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देव दीपावली 2025: इस दिन करें विशेष पूजा, जानें सही समय और मंत्र

नई दिल्ली   कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। यह कार्तिक मास का अंतिम दिन होता है और इसे देव दीपावली तथा गुरु नानक जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवी-देवता धरती पर गंगा स्नान करने के लिए अवतरित होते हैं। कार्तिक मास का यह पवित्र महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने में भक्त पूजा, व्रत और दानधर्म का पालन करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की भी पूजा होती है। देव दीपावली का महत्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दीपदान का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा नदी के किनारे हजारों दीप जलाए जाते हैं और इसे देव दीपावली कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही सत्यनारायण कथा का पाठ करने से मनोकामना पूरी होती है। देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा 2025 का मुहूर्त तिथि का आरंभ: 04 नवंबर 2025, रात 10:36 बजे तिथि का समापन: 05 नवंबर 2025, शाम 6:48 बजे गंगा स्नान मुहूर्त: सुबह 04:52 से 05:44 बजे तक पूजा मुहूर्त: सुबह 07:58 से 09:20 बजे तक इस समय में पूजा, स्नान और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।   कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि स्नान और शुद्धिकरण: सुबह गंगा या किसी पवित्र जलाशय में स्नान करें। पूजा सामग्री: फूल, दीपक, धूप, फल, तिल, चावल, घी और ब्राह्मण को दान। सत्यनारायण कथा: इस दिन कथा का पाठ विशेष फलदायी होता है। दीपदान: गंगा या तालाब में दीपक जलाना अत्यंत शुभ है। व्रत का पारण: पूरे दिन व्रत रखने के बाद संध्याकाल में पारण करें। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन किए गए दान और पूजा का फल अत्यधिक मंगलकारी होता है। क्यों विशेष है कार्तिक पूर्णिमा यह दिन धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि लाता है। गंगा स्नान और दीपदान से पाप नष्ट होते हैं। भगवान विष्णु और शिव की पूजा से आध्यात्मिक उन्नति होती है। व्रत और कथा का पालन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। 5 नवंबर 2025 को मनाई जाने वाली कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और धर्म का प्रतीक है। गंगा स्नान, दीपदान और सत्यनारायण पूजा से न केवल पाप नष्ट होते हैं, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति आती है।

आज से मंगल वृश्चिक में, ये राशियाँ पाएँगी लाभ, ये रहें सतर्क

ग्रहों के सेनापति मंगल राशि परिवर्तन करने वाले हैं। वह 27 अक्तूबर 2025 को दोपहर 02 बजकर 43 मिनट पर तुला से निकलकर अपनी स्वयं राशि वृश्चिक में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषियों के मुताबिक जब भी कोई ग्रह अपनी स्वराशि में गोचर करता है, तो उसका प्रभाव और भी कई गुना बढ़ जाता है। चूंकि मंगल 45 दिनों के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, इसलिए यह गोचर एक लंबे अंतराल के बाद हो रहा है। ज्योतिष में उन्हें पराक्रम, ऊर्जा, भूमि व साहस के कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए उनकी इस चाल से कुछ राशि वालों को धन लाभ, संपत्ति की प्राप्ति व आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती हैं। हालांकि इस गोचर से कुछ राशियों की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। आइए मंगल के वृश्चिक में गोचर का 12 राशियों पर कैसा प्रभाव होगा, यह जानते हैं। मेष राशि मंगल का राशि परिवर्तन मेष राशि वालों के लिए खास रहेगा। इस राशि के स्वामी ग्रह स्वयं मंगल है, इसलिए इन जातकों को कार्य में सफलता व व्यापार में धन लाभ मिल सकता है। रिश्तों में सुधार होगा और आपकी लव पार्टनर के साथ नजदीकियां बढ़ेंगी। निवेश से अच्छा रिटर्न भी आने की संभावनाएं हैं। वृषभ राशि आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। अगर किसी दुकान या मकान के काम को लेकर परेशान थे, तो वह पूरे होंगे। इस दौरान धन के अवसर बढ़ने से नए लोगों से बात भी करेंगे। हालांकि, करियर को लेकर कोई फैसला अभी लेना उचित नहीं रहेगा। मिथुन राशि मंगल का राशि परिवर्तन आपके लिए सकारात्मक परिणाम से भरा रहेगा। कला के क्षेत्र में आगे आएंगे और कुछ नए लोगों से भी जुड़ेंगे। इस समय कारोबार से धन की प्राप्ति होगी। मिथुन राशि के जो लोग नेटवर्किंग और कम्युनिकेशन के क्षेत्र से हैं, उनके करियर में प्रगति होगी। आप फील्ड पर अनुभवी लोगों से अच्छे रिश्ते बनाने में कामयाब रहेंगे। कर्क राशि मंगल के वृश्चिक राशि आने से आपको थोड़ा सतर्क रहना होगा। आप क्रोध पर नियंत्रण रखें। हालांकि, जो लोग मेडिकल और इंजीनियरिंग के सेक्टर से जुड़े हैं, उन्हें आगे आने के नए मौके मिल सकते हैं। सिंह राशि इस राशि के लिए यह समय कल्याणकारी रहेगा। आप वाहन, घर या कोई अन्य संपत्ति की खरीदारी करेंगें। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी और कोई बड़ी कारोबारी डील भी इस समय आप कर सकते हैं। कन्या राशि कन्या राशि वालों को ससुराल पक्ष से आर्थिक लाभ मिलने की संभावनाएं हैं। हालांकि, आपको व्यापार में पार्टनरशिप करने से बचना होगा। संतान की प्रगति से संतुष्ट रहेंगे। तुला राशि तुला राशि वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आपको काम को लेकर तनाव रहेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। आपको बाहर के खाने-पीने से थोड़ा परहेज रखना बेहतर रहेगा। वृश्चिक राशि यह समय आपके लिए खास रहेगा। कोर्ट-कचहरी में फंसा हुआ मामला हल होगा। परिणाम आपके पक्ष में आ सकते हैं। छात्रों को परीक्षा में जीत हासिल होगी। कार्यक्षेत्र में सीनियर और जूनियर दोनों का सहयोग और समर्थन मिलेगा।   धनु राशि धनु राशि वालों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। आप किसी भी नए काम का प्रारंभ न करें। अगर संभव है, तो व्यापार से जुड़ी कोई भी यात्राएं न करें। प्रेम संबंध में सावधानी के साथ कदम आगे बढ़ाएं। मकर राशि इस समय नए वाहन को घर लेकर आएंगे। समय करियर के लिए शुभ रहेगा। यदि कोई योजना में पूर्व में धन निवेश किया था, तो अब लाभ मिलने के योग है। इस समय खरीद-बिक्री में सफलता और मानसिक शांति का एहसास होगा। कुंभ राशि आपके लिए मंगल का राशि परिवर्तन सामान्य रहेगा। कारोबार में नए लोगों से जुडेंगे। इस समय घर और बाहर दोनों जगह तालमेल बिठाने में दिक्कतें आएंगी। धैर्यवान बने रहें। जिम्मेदारियों को समझदारी से निभाना आपके लिए लाभकारी रहेगा। मीन राशि आपके लिए यह समय शुभ रहेगा। घर से दूर रहने वाले जातकों को परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने का सुनहरा मौका मिलेगा। नौकरी और व्यापार दोनों में सफलता मिलेगी। इसके अलावा वैवाहिक जीवन में मधुरता आएगी।  

आज का राशिफल 27 अक्टूबर 2025: मिथुन को मिलेगा धन लाभ, मकर रहें सावधान!

मेष: मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से अच्छा रहने वाला है। राशि स्वामी मंगल के सप्तम भाव में विराजमान होने से नए कार्यों में सफलता मिलेगी। भाग्य का सहयोग मिलने से रुके हुए कार्यों को गति मिलेगी। व्यापार में नए बदलाव के संकेत दिख रहे हैं, जिससे आपको भविष्य में लाभ मिलेगा। वृष: चंद्रमा का अष्टम भाव में गोचर वृष राशि वालों के लिए बाधाएं खड़ी कर सकता है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों की संख्या बढ़ने से बिना कारण रुकावट सामने आ सकती हैं। घरेलू मोर्चे पर भी कुछ मतभेद से मन विचलित होगा। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग नहीं मिलने से मानसिक तनाव उत्पन्न ह सकता है। हालांकि, शाम 5 बजे के बाद समय करवट लेगा और धनु राशि में चंद्रमा का प्रवेश आपके लिए राहत लेकर आएगा।  मिथुन: आज मिथुन राशि के जातकों का ध्यान कार्यों के प्रति केंद्रित रहेगा। पुरानी अटकी हुई योजनाओं को आज गति मिलती हुई दिख रही है। नौकरी करने वाले लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से सराहना मिलेगी। व्यवसाय करने वालों के लिए नए निवेश के अवसर सामने आएंगे। हालांकि पारिवारिक वातावरण थोड़ा तनावपूर्ण रह सकता है। शाम के समय अचानक वाहन से जुड़ी कोई तकनीकी खराबी से कुछ परेशानी हो सकती है।  कर्क : कर्क राशि वालों के लिए आज का दिन ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है। आप कई कार्यों में एक साथ व्यस्त रहेंगे और अपनी कुशल रणनीति के चलते बाधाओं को दूर करने में सफल होंगे। कार्य क्षेत्र में नए प्रयोग अपनाने का लाभ मिलेगा। छात्रों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। शाम के बाद भौतिक सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी होने के संकेत हैं। हालांकि किसी बात को लेकर आलोचना हो सकती है। सिंह : सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन करियर में नई पहचान बनाने का अवसर लेकर आएगा। भाग्येश चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहे हैं, जिससे करियर में लाभ और कार्ययश के योग बन रहे हैं। कीमती वस्तु मिलने की संभावना बन रही है। व्यवसाय में बिक्री बढ़ेगी और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। इस दौरान सामाजिक संपर्क बढ़ेंगे और नए लाभदायक संबंध बनेंगे। शाम के बाद मन धार्मिक गतिविधियों की ओर आकर्षित होगा।  कन्या : कन्या राशि के जातकों के लिए चंद्रमा का चतुर्थ भाव में विराजमान होना मान-सम्मान का योग बना रहा है। सरकारी कार्यों में प्रगति होगी। प्रभावशाली लोगों की सहायता भी मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन के संकेत मिल रहे हैं। व्यवसाय में नई डील से लाभ हो सकता है। हालांकि शाम के बाद अनावश्यक खर्चे अचानक बढ़ सकते हैं। इससे आर्थिक दबाव महसूस होगा। जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें।  तुला : तुला राशि वालों को आज के दिन मेहनत का पूरा फल मिलेगा। लेकिन अधिक परिश्रम के कारण स्वास्थ्य थोड़ा प्रभावित हो सकता है। इसलिए कार्य और आराम में संतुलन बनाना जरूरी होगा। सरकारी मामलों में मान-सम्मान बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। सहकर्मियों का साथ मिलने से काम में तेजी आएगी। व्यवसाय में नए अवसर मिलेंगे और किसी पुराने संपर्क से लाभ संभव है। परिवार की ओर से सुखद समाचार मिलेगा। वृश्चिक: वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। द्वादश भाव में मंगल होने के कारण अनावश्यक खर्चों की संभावना बढ़ेगी। इसलिए आर्थिक मामलों में सतर्कता रहना होगा। पेट से जुड़ी तकलीफ भी आपको परेशान कर सकती है। कार्यस्थल पर परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। व्यापार में नया निवेश फिलहाल टालना आपके लिए अच्छा रहेगा। दोपहर बाद समय बेहतर होगा और कोई शुभ समाचार मिल सकता है। धनु: धनु राशि के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व में आज निखार आएगा। कार्यक्षेत्र में आपके नेतृत्व कौशल की सराहना होगी। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा। भौतिक संसाधनों की कमी के कारण कुछ कार्य अधूरे रह सकते हैं। धन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतें। किसी को उधार लेन-देन से बचें। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। लंबे समय से अटके हुए धन की प्राप्ति के योग बन रहे हैं। मकर : मकर राशि वालों के लिए आज का दिन उपलब्धियों से भरा रहने वाला है। द्वादश भाव में चंद्रमा और अष्टम भाव में केतु, सूर्य, मंगल और शुक्र का योग आपके निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाएगा। किसी पुराने विवाद या कानूनी मामले में जीत मिलेगी। कार्यस्थल पर मेहनत रंग लाएगी। इस दौरान प्रमोशन या मान-सम्मान मिलने की संभावना बढ़ती हुई दिख रही है। व्यावसायिक क्षेत्र में लाभदायक प्रस्ताव मिलने से आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। कुंभ : कुंभ राशि वालों के लिए आज का दिन करियर के विस्तार के लिए शुभ रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर सामने आएंगे और वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त होगा। सहकर्मी भी आपकी प्रशंसा करेंगे। व्यापार में भागीदारी वाले काम से लाभ होगा। वहीं, परिवार के बुजुर्गों का सहयोग और आशीर्वाद आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। सायंकाल में मित्रों से मुलाकात का योग बनेगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए समय अनुकूल है। मीन : मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। करियर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति भी मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी कार्यक्षमता बढ़ने से उच्च अधिकारियों का समर्थन मिलेगा। नौकरी में पदोन्नति के योग बन रहे हैं। व्यापारियों को लाभ के अवसर मिलेंगे। घर-परिवार का वातावरण सुखद रहेगा और संतान से शुभ समाचार मिलेंगे। मानसिक अशांति और चिंता के कारण एकाग्रता प्रभावित हो सकती है।

जगत है आद्याशक्ति प्रकट रूप

दुर्गा या देवी विश्व की मूलभूत शक्ति की संज्ञा है। विश्व की मूलभूत चिति शक्ति ही यह देवी है। देवों की माता अदिति इसी का रूप है। यही एक इडा, भारती, सरस्वती इन तीन देवियों के रूप में विभक्त हो जाती है। वेदों में जिसे वाक् कहा जाता है, वह भी देवी या शक्ति का ही रूप है। वसु, रुद्र, आदित्य इन तीन देवों या त्रिक के रूप में उस शक्ति का संचरण होता है। ऋग्वेद के वागम्भृणी सूक्त में इस शक्ति की महिमा का बहुत ही उदात्त वर्णन पाया जाता है-मित्र और वरुण, इन्द्र और अग्नि, दोनों अश्विनीकुमार इनको मैं ही धारण करती हूं। विश्वदेव मेरे ही रूप हैं। वसु, रुद्र, आदित्य इस त्रिक का संचरण मेरे ही द्वारा होता है। ब्रह्मणस्पति, सोम, त्वष्टा, पूषा और भग इनका भरण करने वाली मैं हूं। राष्ट्र की नायिका मुझे ही समझो। मैं ही वसुओं का संचय करने वाली वसुपत्नी हूं। जितने यज्ञीय अनुष्ठान हैं, सबमें प्रथम मेरा स्थान है। सबका ज्ञान मेरा स्वरूप है। देवों ने मुझे अनेक स्थानों में प्रतिष्ठित किया है। अपने अनेक आवास स्थानों में मैं अपने पुष्कलरूप से भर रही हूं। जो देखता, सुनता और सांस लेता है, वह मेरी शक्ति से ही अन्न खाता है। यद्यपि लोग इसे नहीं जानते, पर वह सब मेरे ही अधीन है। यह सत्य है, जो मैं तुमसे कहती हूं। इसे सुनो। देव और मनुष्य दोनों को जो प्रिय है, उस शब्द का उच्चारण मुझसे ही होता है। मैं जिसका वरण करती हूं, उसे ही उग्र, ब्रह्मा, ऋषि और मेधावी बना देती हूं। रुद्र के धनुष में मेरी शक्ति प्रविष्ट है, जो ब्रह्मद्रोही का हरण करती है। मनुष्यों के लिए संघर्ष का विधान करने वाली मैं ही हूं। मैं ही द्यावा-पृथिवी के अंतराल में प्रविष्ट हूं। पिता द्युलोक का प्रसव करने वाली मैं ही हूं। मेरा अपना जन्मस्थान जलों के भीतर पारमेष्ठ्य समुद्र में है। वहां से जन्म लेकर मैं सब लोकों में व्याप्त हो जाती हूं। मेरी ऊंचाई द्युलोक का स्पर्श करती है। झंझावात की तरह सांस लेती हुई मैं सब भुवनों का आरम्भण या उपादान हूं। द्युलोक और पृथिवी से भी परे मेरी महिमा है। इस सूक्त में जिस वाक् तत्त्व का वर्णन है, वह देवी का ही रूप है। प्रायः समझा जाता है कि ऋग्वेद में पुरुष संज्ञक देवों का प्राधान्य है, किन्तु तथ्य यह है कि मित्र, वरुण, इन्द्र, अग्नि आदि जितने प्रधान देव हैं, उन सबको जन्म देने वाली मूलभूत शक्ति देवमाता अदिति है। उसका वर्णन सैकड़ों प्रकार से ऋग्वेद में आता है। वही अमृत की अधिष्ठात्री और यज्ञों की विधातृ विश्वरूपा कामदुधा शक्ति है, जिसे गौ भी कहते हैं। द्यौ, अन्तरिक्ष और पृथिवी, माता, पिता और पुत्र, विश्वेदेव और पञ्चजन, देश और काल सब उस अदिति के ही रूप हैं। उसके वरदानों का कोई अन्त नहीं है। वह वाक् शक्ति मूलरूप में एकपदी या अपदी हैय अर्थात् वह शुद्ध स्थिति तत्त्व है। स्थिति ही उसकी पर या अव्यक्त अवस्था है, किन्तु उसी सेत्रिगुणात्मक विश्व जन्म लेता है, जो उसका अवर या मूर्त रूप है। वैदिक शक्तितत्त्व की यह परम्परा पुराणों में भी आई है। यह पुराण विद्या का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। देवी भागवत के अनुसार शक्तिः करोति ब्रह्माण्डम अर्थात् शक्ति ब्रह्माण्ड को रचती है। वेदों में जिसे ब्रह्म कहा है, वही परमात्मिका शक्ति है- ते वै शक्तिं परां देवीं परमाख्यां परमात्मिकाम्। ध्यायन्ति मनसा नित्यं नित्यां मत्वा सनातनीम्।। (देवी भागवत 1.8.47) विष्णु में सात्विकी शक्ति, ब्रह्मा में राजसी शक्ति और शिव में तामसी शक्ति का रूप है। निर्गुण शक्ति ही ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूप में सगुण रूप धारण करती है। शक्ति से युक्त होकर ही देवता अपना-अपना कार्य करते हैं। ब्रह्मा का विवेक सर्वगत शक्ति का ही रूप है (एवं सर्वगता शक्तिः सा ब्रह्मेति विविच्यते)। ब्रह्मा में सृष्टि शक्ति, विष्णु में पालन शक्ति, रुद्र में संहार शक्ति, सूर्य में प्रकाशिका शक्ति, अग्नि में दाह शक्ति, वायु में प्रेरणा शक्ति ये सब आद्या शक्ति के ही रूप हैं। जो शक्ति से हीन है, वह असमर्थ है। शिव भी शक्ति के बिना शव बन जाते हैं। यही सर्वशास्त्रों का निश्चय है। पुराणों में इस शक्ति के अनेक नाम हैं। इसे ही अम्बिका, दुर्गा, कात्यायनी, महिषासुरमर्दिनी कहा गया है।  

शहनाई की वापसी: नवंबर में 13, दिसंबर में केवल 3 मुहूर्त

भारत में शादी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि परिवारों और समाज का भी विशेष अवसर होता है. शादी की तारीख का चुनाव शुभ मुहूर्त के अनुसार किया जाता है, ताकि नवविवाहित जोड़े का जीवन खुशहाल और समृद्ध रहे. पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवंबर और दिसंबर 2025 में शादी के लिए कुछ विशेष शुभ तिथियां हैं, जो दांपत्य जीवन में सुख-शांति और समृद्धि के लिए शुभ हैं. आइए जानते हैं साल 2025 के नवंबर और दिसंबर महीने के शुभ मुहूर्त के बारे में. 142 दिन का इंतजार होगा खत्म माना जा रहा है कि जुलाई से शुरू हुए चातुर्मास के कारण पिछले लगभग 142 दिनों से शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लगी हुई है. भगवान विष्णु के योग निद्रा से जागने के बाद ही शुभ कार्य फिर से शुरू होंगे. इस वर्ष देवउठनी एकादशी 01 नवंबर 2025 को पड़ रही है, जिसके बाद से विवाह की शुरुआत होगी. नवंबर 2025: बंपर मुहूर्त, 13 दिन बजेगी शहनाई साल 2025 का नवंबर महीना विवाह के लिए बेहद शुभ रहने वाला है. देवउठनी एकादशी के तुरंत बाद ही शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे और इस महीने में कुल 13 शुभ विवाह की तिथियां मिल रही हैं. नवंबर 2025 के शुभ विवाह मुहूर्त     2 नवंबर 2025     3 नवंबर 2025     5 नवंबर 2025     8 नवंबर 2025     12 नवंबर 2025     13 नवंबर 2025     16 नवंबर 2025     17 नवंबर 2025     18 नवंबर 2025     21 नवंबर 2025     22 नवंबर 2025     23 नवंबर 2025     25 नवंबर 2025     30 नवंबर 2025 दिसंबर 2025: केवल 3 दिन मिलेंगे शुभ मुहूर्त नवंबर के मुकाबले दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त बेहद कम हैं. पंचांग के अनुसार, साल के आखिरी महीने दिसंबर 2025 में विवाह के लिए सिर्फ 3 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं. दिसंबर 2025 के शुभ विवाह मुहूर्त     4 दिसंबर 2025     5 दिसंबर 2025     6 दिसंबर 2025 शादी के लिए शुभ मुहूर्त क्यों जरूरी होता है? विवाह को एक नए जीवन की शुरुआत माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार, हर समय (मुहूर्त) में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति अलग-अलग होती है, जिसका मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है. शुभ मुहूर्त वह समय होता है जब ग्रह-नक्षत्रों की ऊर्जा वर और वधू के लिए सबसे अनुकूल होती है. माना जाता है कि शुभ समय में किया गया विवाह नवदंपति को देवताओं का आशीर्वाद दिलाता है और उनके जीवन में सकारात्मकता, सौभाग्य और समृद्धि लाता है.

26 अक्टूबर 2025 राशिफल: मकर राशि के लिए शुभ संकेत, देखें आपकी राशि का फल

मेष आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। काम में ज्यादा व्यस्त रहेंगे, लेकिन मेहनत का फल भी आपको जल्दी मिलेगा। ऑफिस या व्यापार में नए आइडिया को अपनाने का समय अच्छा है। दोस्तों और परिवार के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है। छोटे-छोटे झगड़े से बचें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, हल्की एक्सरसाइज और पानी ज्यादा पीना लाभदायक रहेगा। वृषभ आज आप अपने पैसों और खर्चों पर ज्यादा ध्यान दें। कोई नया निवेश सोच-समझ कर ही करें। परिवार के साथ समय बिताना आज आपको मानसिक संतोष देगा। घर के छोटे-मोटे काम निपटाने के लिए दिन अच्छा है। अगर कोई पुराना झगड़ा है तो उसे शांतिपूर्वक सुलझा सकते हैं। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन खान-पान संतुलित रखें। मिथुन आज का दिन आपके लिए संवाद और बातचीत में सफल रहेगा। नौकरी या व्यापार में कुछ नए अवसर मिल सकते हैं। यात्रा की संभावना है, जो आपके लिए फायदेमंद रहेगी। दोस्तों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। परिवार के साथ तालमेल बनाए रखें। मानसिक रूप से हल्का तनाव हो सकता है, इसलिए ध्यान या मेडिटेशन मदद करेगा। कर्क आज आप भावनात्मक रूप से थोड़े संवेदनशील रहेंगे। परिवार और घर के मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कामकाज में थोड़ी मेहनत ज्यादा लगेगी, लेकिन परिणाम सकारात्मक मिलेंगे। अपने आत्मविश्वास पर ध्यान दें और दूसरों के विचारों को समझने की कोशिश करें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और योग लाभदायक रहेगा। सिंह आज आपका आत्मविश्वास ऊंचा रहेगा। नया प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी लेने के लिए अच्छा समय है। पुराने विवादों को सुलझाने का प्रयास करें। दोस्तों और सहयोगियों के साथ तालमेल बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन खान-पान में संतुलन जरूरी है। कन्या आज आप अपने कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखें। किसी पुराने काम को पूरा करने की जरूरत है। आर्थिक मामलों में स्थिरता रहेगी। अपने विचारों को नियंत्रित रखना और निर्णय सोच-समझकर लेना जरूरी है। परिवार के साथ समय बिताना आपको मानसिक शांति देगा। तुला आज आपके संबंधों में सुधार होगा। जीवनसाथी या मित्र के साथ तालमेल बढ़ेगा। कार्यस्थल पर सहयोग मिलेगा। नए आइडिया और क्रिएटिव सोच फायदेमंद साबित होंगे। आर्थिक मामलों में कुछ अच्छे मौके मिल सकते हैं। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, हल्की एक्सरसाइज और पर्याप्त नींद जरूरी है। वृश्चिक आज का दिन आपके लिए ऊर्जा और जोश से भरा रहेगा। अपनी योजनाओं में ठोस कदम उठाएँ। स्वास्थ्य ठीक रहेगा। परिजनों के साथ संवाद बनाए रखें, किसी पुरानी गलतफहमी को दूर करना फायदेमंद रहेगा। नौकरी या व्यापार में सफलता मिलेगी। यात्रा करने का अवसर भी बन सकता है। धनु आज आप अपने करियर और पेशेवर जीवन पर ध्यान दें। कोई नई शुरुआत या योजना सफल हो सकती है। यात्रा और शिक्षा से जुड़े काम फायदेमंद रहेंगे। मित्रों और परिवार के साथ समय बिताना सुखद रहेगा। आर्थिक मामलों में स्थिरता रहेगी। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, हल्का व्यायाम और सही खान-पान जरूरी है। मकर आज वित्तीय मामलों में सावधानी रखें। नौकरी या व्यापार में अचानक बदलाव आ सकते हैं। घर और परिवार में सामंजस्य बनाए रखें। स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें, हल्का व्यायाम और पर्याप्त नींद लाभ देगा। अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें। पुरानी जिम्मेदारियों को निपटाना फायदेमंद रहेगा। कुंभ आज आप सामाजिक और पेशेवर मामलों में आगे बढ़ेंगे। अपने दोस्तों और सहयोगियों से मदद मिलेगी। नए अवसरों के लिए खुला दिमाग रखें। मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा आपको उत्साहित रखेगी। परिवार के साथ समय बिताना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। स्वास्थ्य और खान-पान पर ध्यान दें। मीन आज आपका दिन सहज और शांत रहेगा। आध्यात्मिक कामों में समय बिताना लाभदायक रहेगा। परिवार और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। किसी पुराने काम को पूरा करने का समय है। करियर और वित्तीय मामलों में थोड़ा धैर्य रखें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, हल्की-फुल्की एक्सरसाइज मदद करेगी।

रिश्ते होंगे और गहरे! जानें कौन-सा रंग लाता है बेडरूम में सकारात्मक ऊर्जा

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारी भावनाओं और जीवन के हर पहलू पर असर डालता है। खासतौर पर बेडरूम का माहौल हमारे मानसिक संतुलन और दांपत्य जीवन से गहराई से जुड़ा होता है। इसलिए वास्तु में बेडरूम की सजावट, दिशा और रंगों को लेकर खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। अगर आप चाहते हैं कि आपके और आपके जीवनसाथी के बीच प्यार और समझ और भी गहरी हो, तो बेडरूम में इस्तेमाल की जाने वाली चादर के रंगों का चयन बहुत ही सोच-समझकर करें। तो आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार, बेडरूम मे कौन से रंग की बेडशीट का इस्तेमाल करना चाहिए। कौन-सा रंग है शुभ? वास्तु के अनुसार गुलाबी या हल्का लाल रंग प्रेम, अपनापन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। कहा जाता है कि चादर का रंग न सिर्फ कमरे की खूबसूरती बढ़ाता है, बल्कि यह पार्टनर के बीच आपसी सामंजस्य और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। वास्तु के अनुसार, गुलाबी, हल्का लाल और क्रीम रंग की बेडशीट कपल्स के लिए बेहद शुभ मानी जाती है। ये रंग प्रेम, सौम्यता और गर्मजोशी का प्रतीक होते हैं, जो रिश्ते में मधुरता बनाए रखते हैं। इन रंगों की चादर बिछाने से रिश्ते में मिठास बढ़ती है और आपसी मतभेद धीरे-धीरे कम होते हैं। ये रंग न केवल कमरे का वातावरण सुकून भरा बनाते हैं बल्कि मानसिक रूप से भी शांति और आकर्षण का एहसास कराते हैं। किन रंगों से करें परहेज़? बहुत गहरे या उदास रंग जैसे काला, ग्रे या भूरा रंग बेडरूम में नेगेटिविटी ला सकते हैं। ये रंग मन को भारी बना देते हैं और कभी-कभी रिश्तों में दूरी बढ़ा सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि चादर और पर्दे हल्के व सौम्य रंगों के ही हों।

छठ पर्व का पहला चरण: खरना पर आम की लकड़ी से बनता है प्रसाद, जानें वजह

छठ पूजा का महापर्व आज से शुरू हो गया है. आज छठ पूजा का पहला दिन है. आज नहाय-खाय है. 28 अक्टूबर को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही ये महापर्व संपन्न हो जाएगा. छठ के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है. ये कल मनाया जाने वाला है. खरना के दिन गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाए जाने की परंपरा है. ये प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही बनाया जाता है. इतना ही नहीं प्रसाद बनाने के लिए चूल्हे में लगाने के लिए सिर्फ आम की लकड़ी का उपयोग किया जाता है. किसी दूसरी लकड़ी से यह प्रसाद नहीं बनाया जाता, लेकिन ऐसा करने के पीछे की वजह क्या है? आइए जानते हैं इसके पीछे की परंपरा और धार्मिक कारण. खरना का महत्व छठ का दूसरा यानी खरने के दिन का खास महत्व धर्म शास्त्रों में बताया गया है. खरना का अर्थ होता है. ‘शुद्धता’. खरने के दौरान व्रतियों के द्वारा स्वच्छता और पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है. मान्यताओं के अनुसार, वो खरने का दिन होता है, जब छठी का घर में प्रवेश होता है. खरना का दिन पूर्ण रूप से भक्ति और समर्पण का माना जाता है. इस दिन सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद मिलता है. प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ी का उपयोग क्यों? खरना की शाम मिट्टी का चूल्हा बनाया जाता है. इस चूल्हे में आम की लकड़ियां उपयोग की जाती हैं. आम की लकड़ी शुद्ध और सात्विक मानी जाती है. मान्यता है कि आम की लकड़ी छठी मैया को बहुत प्रिय है, इसलिए छठ के अवसर पर प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ियों का उपयोग होता है. इस लकड़ी से प्रसाद बानने पर घर में सकारात्मक उर्जा आती है. खरना की विधि     खरना के दिन व्रती महिलाओं द्वारा मिट्टी के नए चूल्हे पर गुड़ और चावल की खीर बनाई जाती है.     ये खीर पीतल के बर्तन में गुड़, चावल और दूध से तैयार की जाती है.     साथ ही गेहूं के आटे से बनी रोटी, पूड़ी या ठेकुआ बनाया जाता है.     इस खीर का भोग छठी मैया को लगता है.     इसके बाद इसे सभी लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं.     फिर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है.  

अगर किसी में दिखें ये 6 लक्षण, तो समझ जाएं — भरोसा करना भारी पड़ेगा

लाइफ में हर किसी को उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं। अगर आपने कभी किसी इंसान से धोखा खाया है तो फ्यूचर में जरूर आप हर इंसान की पर्सनैलिटी को परखते होंगे। अगर किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी में ये 7 तरह के व्यवहार दिख रहे हैं तो फौरन संभल जाएं। इस तरह का व्यवहार करने वाले लोग खतरनाक प्रवृत्ति के होते हैं और साइकोलॉजी कहती है कि ऐसे इंसानों पर कम भरोसा करना चाहिए। अपने प्लान को सीक्रेट रखने वाले ऐसे इंसान जो अपने प्लान के बारे में किसी को भी नहीं बताते। हमेशा अपने मूव्स और प्लान को सीक्रेट रखते हैं तो इसका मतलब है कि ये दूसरों पर भरोसा नहीं करते। ऐसे इंसान की खुद की प्रवृत्ति दूसरों को धोखा देने वाली होती है। इसलिए दूसरों पर भी भरोसा नहीं करते। अपने इमोशन को कंट्रोल करते हैं ऐसे इंसान जो अपने इमोशन को पूरी तरह से कंट्रोल में करके रखते हैं और सबसे करीबी इंसान को भी इमोशन जाहिर नहीं करते। ऐसे लोगों की पर्सनैलिटी काफी डेंजरस मानी जाती है। ऐसे लोगों पर भरोसा कम करना चाहिए। ये हमेशा खुद के फायदे के बारे में ही सोचते हैं। स्ट्रांग आई कान्टेक्ट ऐसे इंसान सामने वाले से स्ट्रांग आई कान्टेक्ट बनाते हैं और जब तक वो नजरें ना झुका ले खुद का आई कान्टेक्ट नहीं हटाते। ऐसे लोग काफी ज्यादा डेंजरस माने जाते हैं। इनसे दूरी ही अच्छी होती है। अनप्रिडिक्टिबल होते हैं ऐसे लोग ऐसे इंसान जिनके व्यवहार या फिर किसी काम के बारे में ना पता हो। कब क्या करेंगे, क्या बोलेंगे? ऐसे इंसान डेंजरस होते हैं और इन पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए। अटेंशनसीकर होते हैं ऐसे इंसान लोगों का अटेंशन मांगते नहीं है बल्कि कुछ ऐसा करते हैं कि खुदबखुद लोग उन्हें देखें। उनके काम को पूछें और तारीफ करें। ऐसे लोगों पर भरोसा कम किया जा सकता है। बहुत कम बोलते हैं व्यवहार से डेंजरस इंसान बहुत कम बोलते हैं लेकिन अपने आसपास की चीजों को पूरी तरह से ऑब्जर्व करते हैं और खुद को पावरफुल दिखाते हैं।  

घर में धन और समृद्धि लाने के लिए करें ये वास्तु अनुसार काम

लाभ पंचमी का पर्व धन, सफलता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन कुछ विशेष उपाय और दिशाओं का ध्यान रखा जाए तो घर, व्यापार और जीवन में लाभ के द्वार खुलते हैं। आइए जानते हैं कि वास्तु के अनुसार लाभ पंचमी पर क्या करना चाहिए: सुबह की शुरुआत सूर्य अर्घ्य से करें लाभ पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। यह वास्तु के अनुसार ऊर्जा और सफलता का आरंभ है। सूर्य देव को अर्घ्य देने से घर में पॉजिटिव एनर्जी आती है और व्यापार में बाधाएं दूर होती हैं। घर और दुकान की दिशा की सफाई घर और दुकान की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को साफ-सुथरा रखें। यह दिशा माता लक्ष्मी और कुबेर जी का निवास स्थान मानी गई है। इस कोने में लाल या पीले फूल, दीपक और अगरबत्ती जलाना शुभ रहता है। गणेश-लक्ष्मी की पूजा किस दिशा में करें माता लक्ष्मी की मूर्ति उत्तर दिशा की ओर मुख करके रखें। पूजक (जो व्यक्ति पूजा कर रहा है) का मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। भगवान गणेश को दाईं ओर और महालक्ष्मी को बाईं ओर बैठाएं। पूजा स्थल पर काले या गहरे रंगों का प्रयोग न करें, केवल हल्के रंगों का उपयोग करें। प्रवेश द्वार पर शुभ प्रतीक बनाएं वास्तु शास्त्र में कहा गया है, “मुखद्वारे शुभलाभ चिह्नं धनं लभते गृहस्थः।” मुख्य दरवाजे पर शुभ लाभ और स्वस्तिक का चिह्न लाल सिंदूर या रोली से बनाएं। द्वार के दोनों ओर आम के पत्तों और बंदनवार लगाएं। इससे घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और धनवृद्धि के योग बनते हैं। तिजोरी और धन स्थान का वास्तु तिजोरी या कैश बॉक्स को हमेशा दक्षिण दिशा की दीवार के सहारे रखें और उसका मुख उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए। यह स्थिति धन के स्थायित्व का संकेत देती है। लाभ पंचमी के दिन तिजोरी में पीली कौड़ी, चांदी का सिक्का या लाल कपड़े में हल्दी रखी सुपारी रखें। व्यापार स्थल के लिए विशेष उपाय दुकान या ऑफिस के मुख्य द्वार के सामने कोई रुकावट (खंभा, पेड़ या दीवार) नहीं होनी चाहिए। प्रवेश द्वार के ऊपर मंगल कलश या नारियल लगाना शुभ होता है। लाभ पंचमी पर नया लेन-देन या बहीखाता शुरू करना अत्यंत फलदायी माना गया है। दीपक जलाने की दिशा सुबह और शाम पूर्व या उत्तर दिशा में घी का दीपक जलाएं। तिल के तेल का दीपक मुख्य द्वार पर जलाना बहुत शुभ माना गया है। दीपक की लौ सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए, इससे आर्थिक उन्नति होती है। वास्तु अनुकूल उपाय लाभ पंचमी के दिन घर में कुबेर यंत्र या श्री यंत्र स्थापित करें और उनका पूजन करें। तुलसी पौधे के पास दीपक जलाएं, इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। रसोईघर में पहली रोटी गाय को और मीठा पहला भोजन कन्याओं को दें। दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग की पेंटिंग या कपड़ा लगाना निषेध है। रंग और वस्त्र चयन लाभ पंचमी के दिन लाल, पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना गया है। ये रंग आकर्षण, सौभाग्य और ऊर्जा के प्रतीक हैं। काले या भूरे रंग से बचें क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार शुभ संकेत अगर लाभ पंचमी के दिन पूजा करते समय दीपक की लौ स्थिर रहती है, कपूर आसानी से जल जाता है या पूजा स्थल में सुगंध फैल जाती है तो यह इस बात का संकेत है कि माता लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी हुई है। लाभ पंचमी केवल धन की पूजा का दिन नहीं है, यह वास्तु संतुलन और ऊर्जात्मक शुद्धि का पर्व भी है। यदि इस दिन आप वास्तु के इन छोटे-छोटे नियमों का पालन करते हैं तो आपके घर और कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा, धनवृद्धि और सौभाग्य का प्रवाह बढ़ता है।