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महाशिवरात्रि 2026: बन रहे हैं विशेष योग, चार प्रहर पूजा से मिलेगा महाफल

फरवरी महीने में इस बार महाशिवरात्रि पड़ रही है, जो भगवान भोलेनाथ का बहुत ही विशेष दिन है. इस दिन भगवान भोलेनाथ के भक्त विशेष पूजा अर्चना करते हैं. आखिर फरवरी में किस दिन महाशिवरात्रि मनाई जाएगी, कितने बजे से शुरू हो रही है और साथ ही इस बार के महाशिवरात्रि में कौन से तीन विशेष योग बन रहे हैं, जो भोलेनाथ के भक्तों के लिए काफी फलदाई साबित हो सकते हैं. महाशिवरात्रि कब है ? ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री बताते हैं कि "इस बार महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 15 फरवरी 2026 को है. महाशिवरात्रि यानी त्रयोदशी और चतुर्दशी के मध्य का जो समय होता है, वो बहुत शुभ माना जाता है. दिन में 3 बजके 59 मिनट के बाद महाशिवरात्रि का पर्व प्रारंभ हो रहा है. महाशिवरात्रि का पर्व जैसे ही शुरू होगा. इसमें उदया तिथि नहीं लिया जाता है. उदित पारण करना चाहिए. महाशिवरात्रि में ऐसे करें दिन की शुरुआत ज्योतिष आचार्य पंडित सुशील शुक्ला शास्त्री कहते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन प्रातकालीन उठें स्नान करें, एक पवित्र कलश में शुद्ध जल भर लें, साथ में शहद, शक्कर, घी, गुड और कुछ प्रसाद ले लें. किसी शिवालय में जाकर भगवान भोलेनाथ को स्नान कराएं. दूध, दही, गंगाजल, शहद और शक्कर से स्नान कराएं, बेलपत्र धतूर का पत्ता धतूर के फल, फूल, आम के बौर और तरह-तरह के ऐसे फूल जो भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय हैं, ओम नमः शिवाय का जाप करते हुए उन्हें अर्पित करें. फिर भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना-आरती करें, जिससे भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते हैं. बन रहे तीन योग इस बार महाशिवरात्रि में 3 प्रकार के विशेष योग भी बन रहे हैं, जो इस महाशिवरात्रि को बहुत विशेष बनाती है. इस बार की महाशिवरात्रि में जो योग बन रहा है, उसमें पहला व्यतिपात योग है. ये विशेष योग होने के कारण जो भी भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं, इस दौरान साधना, दान, पूजा के लिए अत्यंत फलदाई माना गया है. आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है. ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय होता है. इस योग में मन को एकाग्र करना आसान होता है, इसलिए ध्यान के लिए उत्तम समय है. महाशिवरात्रि में दूसरा योग अमृत सिद्धि योग का बन रहा है. इस दिन शिवजी की कृपा बरसती है. समुद्र, पवित्र नदियों, गंगा या घर में स्नान करें और शिवजी की पूजन कर लें तो अमृत की प्राप्ति होती है. इसके अलावा इसी दिन सर्वार्थ सिद्ध योग भी बन रहा है. मतलब इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए बेहतर समय होता है. कोई नया व्यापार, दुकान शुरू करना है, सोना-चांदी, जमीन खरीदना है, मकान बनाना है तो यह बहुत ही शुभ समय माना जाता है. चार प्रहर की पूजा से भोलेनाथ होंगे प्रसन्न ज्योतिष आचार्य कहते हैं कि महाशिवरात्रि में 4 प्रहर की जो पूजा होती है. जो विशेष मानी गई है. बहुत लोग दिन-रात मिलाकर चार पहर पूजा करना पसंद करते हैं, ऐसे लोग सुबह 15 तारीख की सुबह 6:00 से लेकर के 12:00 तक प्रथम प्रहर की पूजन करें, दोपहर में 12:00 से लेकर के शाम को 6:00 तक दूसरे प्रहर की पूजा करें, इसके बाद शाम 6:00 बजे से 12:00 बजे रात तक तृतीय प्रहर की पूजा करें और फिर रात को 12:00 से सुबह 6:00 बजे तक चतुर्थ प्रहर की पूजा करें. शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि अगर रात्रि के समय चार प्रहर की पूजा करते हैं, तो यह विशेष फलदाई होता है. जो रात्रि कालीन चार प्रहर की पूजा करना चाहते हैं, वो शाम के समय लगभग 6:00 से लेकर के 9:00 बजे के बीच में प्रथम प्रहर की पूजा करें. 9:00 से लेकर के 12:00 के बीच में दूसरे प्रहर की पूजा करें, 12:00 रात्रि से लेकर के सुबह 3:00 बजे तक तृतीय प्रहर की पूजा करें और तड़के 3:00 से लेकर के सुबह 6:00 बजे तक चौथे प्रहर की पूजा करें. चार प्रहर की पूजा के बाद आरती, हवन करें और ब्राह्मण भोज कराएं. इसके बाद खुद का भी पारण करें. जिससे भगवान शिव की कृपा आप पर बरसती है. मन को शांति मिलती है घर में शांति आती है. 

आज का राशिफल 31 जनवरी: ग्रह-नक्षत्र बताएंगे किसे मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सतर्क

मेष राशि– आज का दिन ऊर्जा से भरा रहेगा। कामकाज में आपकी मेहनत साफ दिखेगी और सीनियर्स भी इसे नोटिस करेंगे। लव लाइफ में थोड़ा धैर्य रखने की जरूरत है, क्योंकि छोटी बात पर बहस हो सकती है। पैसों के मामले में स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन फालतू खर्च से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान महसूस हो सकती है। वृषभ राशि- आज रिश्तों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। प्रेम संबंधों में अहंकार बीच में न आने दें। करियर में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें अच्छे से निभाएंगे। पैसों को लेकर थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। सेहत में खानपान पर ध्यान दें। मिथुन राशि- आज का दिन पॉजिटिव रहने वाला है। लव लाइफ में खुशियां रहेंगी और सिंगल लोगों की जिंदगी में कोई खास आ सकता है। करियर में नए मौके मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। सेहत भी ठीक रहेगी, लेकिन ज्यादा भागदौड़ से बचें। कर्क राशि- आज भावनाओं पर काबू रखना जरूरी होगा। रिश्तों में गलतफहमियां हो सकती हैं, इसलिए खुलकर बात करें। करियर में काम का दबाव रहेगा और सीनियर्स सवाल उठा सकते हैं। पैसों के मामले में बड़ा फैसला टालें। सेहत को लेकर सतर्क रहें। सिंह राशि- आज आत्मविश्वास से भरे रहेंगे। लव लाइफ में साथी का पूरा साथ मिलेगा। करियर में आपकी लीडरशिप नजर आएगी और नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक स्थिति ठीक रहेगी। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन गुस्से से बचें। कन्या राशि- आज जिम्मेदारियों से भरा दिन रहेगा। लव लाइफ में समय की कमी महसूस हो सकती है। करियर में मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी, लेकिन नतीजा अच्छा मिलेगा। पैसों में स्थिरता रहेगी। सेहत में थकान संभव है। तुला राशि- आज सोच-समझकर फैसले लेने का दिन है। रिश्तों में जरूरत से ज्यादा आलोचना करने से बचें। कामकाज में धैर्य जरूरी होगा। पैसों के मामले में दिन सामान्य रहेगा। सेहत में पेट से जुड़ी दिक्कत हो सकती है। वृश्चिक राशि- आज आपकी सोच और आइडिया लोगों को पसंद आएंगे। प्रेम जीवन में आज खुलापन जरूरी होगा। करियर में बदलाव के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी। सेहत अच्छी रहेगी। धनु राशि- आज का दिन संतुलन बनाने का है। लव लाइफ में रोमांस रहेगा और रिश्ते मजबूत होंगे। करियर में नए मौके मिल सकते हैं। पैसों के मामले में सुधार होगा। सेहत अच्छी रहेगी और मन भी शांत रहेगा। मकर राशि- आज आपकी मेहनत रंग लाएगी। प्रेम जीवन में गहराई बढ़ेगी, लेकिन शक से बचें। करियर में कोई अहम काम मिल सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सेहत में सुधार रहेगा। कुंभ राशि- आज नए मौके आपके सामने आएंगे। लव लाइफ में खुलकर बात करेंगे तो रिश्ते बेहतर होंगे। करियर में यात्रा के योग बन सकते हैं। पैसों के मामले में दिन अच्छा रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। मीन राशि- आज भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रह सकते हैं। लव लाइफ में भरोसा बनाए रखें। करियर में काम धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। पैसों को लेकर सतर्क रहें। नींद और तनाव पर ध्यान दें।

माघ पूर्णिमा 2026: कब है पावन तिथि? स्नान-दान के शुभ योग जानें

 नई दिल्ली Magh Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत ही महत्वपूर्ण और विशेष कहलाती है. शास्त्रों की मानें तो, पूर्णिमा तिथि के स्वामी चंद्रदेवता माने जाते हैं. इस दिन सूर्य और चंद्रमा आमने-सामने की स्थिति में होते हैं, जिससे चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में दिखाई देता है और समसप्तक राजयोग बनता है. इसी कारण पूर्णिमा के दिन चंद्र देव के दर्शन का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस समय वातावरण और जल तत्व में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिसका लाभ पवित्र नदियों या सरोवरों में स्नान करने से मिलता है. यदि किसी कारणवश नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल या किसी पवित्र नदी का जल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है. शास्त्रों में बताया गया है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान, दान, ध्यान, जप और तप करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है. माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और स्नान-दान मुहूर्त  द्रिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी 2026, रविवार की सुबह 5 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी 2026, सोमवार को सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को ही मनाई जाएगी. स्नान-दान का मुहूर्त- शास्त्रों के अनुसार, पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने का सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त होता है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसके बाद भी स्नान किया जा सकता है लेकिन, ब्रह्म मुहूर्त के बाद के स्नान को राक्षस स्नान कहा जाता है. शुभ योग और पूजा विधि  इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग और रवि पुष्य योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. रवि पुष्य योग सुबह 7 बजकर 11 मिनट से रात 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, जिसे बेहद शुभ माना गया है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, संकल्प लें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें. 'ऊं नमो नारायण' मंत्र का जप करें और सूर्य भगवान की विधिपूर्वक पूजा करें. जल में काले तिल डालकर पितरों के लिए तर्पण करना भी शुभ माना जाता है. माघ पूर्णिमा पर देवताओं का आगमन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी लोक पर विचरण करने आते हैं. इस दिन गंगा स्नान और दान करने से देवगण प्रसन्न होते हैं और साधक को शुभ फल प्रदान करते हैं. विशेष रूप से प्रयागराज में संगम स्नान को अत्यंत फलदायी माना गया है. पूर्णिमा पर लक्ष्मी पूजन का महत्व माघ पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन फल-जल पर उपवास रखने का विधान है. यदि पूर्ण उपवास संभव न हो, तो एक समय सात्विक भोजन किया जा सकता है. चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को जल अर्पित करना भी शुभ फल देता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माघ माह में श्रीहरि विष्णु गंगा नदी में वास करते हैं, इसलिए गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. ग्रह शांति और संतान सुख के उपाय जो लोग ग्रह दोष या गृह शांति चाहते हैं, वे माघ पूर्णिमा के दिन संबंधित ग्रहों के अनुसार दान करके शुभ फल प्राप्त कर सकते हैं. वहीं, संतान सुख की कामना रखने वाले दंपती इस दिन विशेष दान, हवन और मंत्र जप कर लाभ पा सकते हैं.

खुशहाल जीवन का राज़: ओशो के 5 मंत्र जिन्हें आज से अपनाना चाहिए

ओशो ने अपने जीवन में व्यक्ति को खुश और टेंशन फ्री रहने के लिए कई गहरे और व्यावहारिक सबक दिए हैं। ओशो के सरल विचार व्यक्ति को मन के भीतर की शांति और आनंद खोजने में मदद करते हैं। ऐसे में अगर आप जीवन में खुद को तनाव और समस्याओं से घिरा हुआ देखते हैं तो ओशों के ये 7 सीक्रेट मंत्र आपको खुश, संतुष्ट और टेंशन फ्री रहने में मदद कर सकते हैं। जीवन का आनंद लेते हुए वर्तमान में जिएं ओशो के अनुसार व्यक्ति की खुशी का रहस्य उसके वर्तमान क्षण में छिपा हुआ है। अतीत की चिंता या भविष्य की योजना बनाने में समय बर्बाद करने की जगह वर्तमान समय को पूर्णता से जिएं। इसके लिए रोजना कुछ पल सिर्फ अपने लिए निकालें। जिसमें आप सिर्फ अपनी सांसों, आसपास की प्रकृति या छोटी-छोटी चीजों का आनंद ले सकें। स्वयं को स्वीकार करें ओशो का कहना है कि सच्ची खुशी तब मिलती है जब आप खुद को पूरी तरह स्वीकार करते हैं। अपनी कमियों, गलतियों और खूबियों को प्यार से अपनाएं। आप जैसे भी हैं, खुद से प्यार करें। अपनी आलोचना करना छोड़ें और खुद को स्वीकारना सीखें। मेडिटेशन करें ओशो के अनुसार, ध्यान मन को शांत करके हमारी आंतरिक खुशी से जोड़ता है। यह व्यक्ति को बाहरी परिस्थितियों पर निर्भरता से मुक्त करता है।रोजाना 10-15 मिनट के लिए शांत बैठें, अपनी सांसों पर ध्यान दें। इच्छाओं का बोझ कम करें ओशो कहते हैं कि अनंत इच्छाएं दुख का कारण बनती हैं। खुशी के लिए अपनी जरूरतों को सरल बनाएं। आपके पास जो है, उसमें संतुष्ट रहना सीखें। अपनी जरूरतों और ख्वाहिशों की एक लिस्ट बनाकर चेक करें कि आपके लिए वास्तव में क्या जरूरी है। अनावश्यक चीजों के लिए खुद को परेशान करना छोड़ दें। खुद को अभिव्यक्त करें ओशो कहते हैं कि रचनात्मकता और स्वतंत्र अभिव्यक्ति खुशी का स्रोत है। अपनी भावनाओं, विचारों और रचनात्मकता को दबाएं नहीं। जीवन में कोई एक शौक जरूर अपनाएं। ऐसा करते हुए अपनी भावनाओं को स्वतंत्र रूप से व्यक्त करें।

आज का राशिफल 30 जनवरी: सितारों की स्थिति बदलेगी इन राशियों की किस्मत

मेष राशि- 30 जनवरी के दिन अपनी खामियों का सामना करें और उन पर विजय पाना शुरू करें। इस बारे में सोचें कि प्यार या माफी के बारे में बेहतर ढंग से बोलने के लिए आप क्या कर सकते हैं। सपोर्ट देकर छोटे कदमों से शुरुआत करें। वृषभ राशि- 30 जनवरी के दिन खुद के प्रति धैर्यवान रहने का अभ्यास करें। कुछ टाइम लें और न केवल कार्यों की बल्कि इमोशनल हेल्थ की भी एक लिस्ट बनाएं। लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना शुरू करें। मिथुन राशि- 30 जनवरी के दिन जीवन में संतुलन का आनंद लें। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका दिन कैसा गुजर रहा है, सीमाएं स्थापित करना महत्वपूर्ण है। जान लें कि स्किल्स ही आपका सबसे तेज हथियार हो सकती है। कर्क राशि- 30 जनवरी के दिन सम्मान पाने के लिए हकदार हैं। आपकी ये स्किल्स आपके होने वाले पार्टनर को आपकी ओर अट्रैक्ट कर सकती हैं। अपने आस-पास के लोगों की तारीफ करें। सिंह राशि- 30 जनवरी के दिन आज ही अपने करियर की आकांक्षाओं में समय और प्रयास लगाकर अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना शुरू करें। काम के प्रति आपके जुनून और प्रोफेशनल दुनिया में योगदान देने के साथ आप सफलता पाएंगे। कन्या राशि- 30 जनवरी के दिन समय पर विश्वास करें और खुला दिमाग रखें। अगर आपके पास कोई प्रेम समस्या है, जिसे आपको सॉल्व करने की आवश्यकता है, तो सोल्यूशन निकालने पर फोकस करें। तुला राशि- 30 जनवरी के दिन जब आप अपने रास्ते में आने वाली किसी भी चुनौती से निपट रहे हों तो धैर्य दिखाएं। प्यार पर अपना विश्वास रखें। बातचीत में शामिल होना आपको सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। वृश्चिक राशि- 30 जनवरी के दिन काम के प्रेशर के बावजूद, आपके पार्टनर के साथ आपका रिश्ता मजबूत होगा, जो आपको परेशानियों से बचाएगा। जान लें कि आप दोनों के पास कई ऐसे लोग हैं, जिन पर आप भरोसा कर सकते हैं। धनु राशि- 30 जनवरी के दिन सहयोग की शक्ति का लाभ उठाएं और किसी रोमांचक और इनोवेटिव दौर में प्रवेश करने के लिए तैयार रहें। रियल बने रहें। आपका पार्टनर जो सोचता है और महसूस करता है, उसमें रुचि दिखाएं। मकर राशि- 30 जनवरी के दिन अपने दोस्तों को अपना सपोर्ट और मार्गदर्शन का नेटवर्क मानें। सामाजिक दायरे का हिस्सा होने के बारे में सबसे अविश्वसनीय चीजों में से एक है किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का मौका, जिससे आप नहीं मिल पाते है। कुंभ राशि- 30 जनवरी के दिन करियर में कोई आपको जरूरी सपोर्ट दे सकता है,और साथ मिलकर आप किसी भी प्रॉब्लम से बच सकते हैं। भले ही दिन कठिन हो लेकिन आपके कनेक्शन को और ज्यादा स्ट्रॉंग बनाने का अवसर मौजूद है। मीन राशि- 30 जनवरी के दिन आपका रवैया शानदार है। किसी नए व्यक्ति के साथ बातचीत करने से लेकर कुछ नया आजमाने तक, कदम आगे बढ़ाना शुरू करें और दिल के मामलों में खुद को तलाशें।

घर का मुख्य द्वार किस दिशा में हो तो मिले अपार धन और खुशहाली?

वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि वास्तु के नियम का पालन करने से जातक का जीवन खुशियों से भरा रहता है। वास्तु की दृष्टि से घर के मुख्य द्वार एक अहम हिस्सा होता है, इसलिए मुख्य द्वार सही दिशा में होना चाहिए, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होगा। शुभ दिशा में घर का मुख्य द्वार होने से सकारात्मकता और मानसिक शांति बनी रहती है। साथ ही तनाव की समस्या दूर होती है। ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि किस दिशा में होना चाहिए घर का मुख्य द्वार। कौन-सी दिशा मुख्य द्वार के लिए है शुभ?     वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार लिए उत्तर दिशा शुभ माना जाता है। इस दिशा को धन के देवता कुबेर का स्थान माना जाता है। इससे घर में धन का प्रभाव बना रहता है।     इसके अलावा पूर्व दिशा को भी घर के मुख्य द्वार के लिए उत्तम माना जाता है। यह दिशा सूर्य देव की है। इस दिशा में मुख्य द्वार होने से जातक को मान-सम्मान मिलता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।     अगर आप घर में शांति का माहौल चाहते हैं, तो घर का मुख्य द्वार ईशान कोण में होना चाहिए। इससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। इन बातों का रखें ध्यान     मुख्य द्वार घर के अंदर की तरफ खुलना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।     इसके अलावा मुख्य द्वार घर के सभी दरवाजों से बड़ा चाहिए।     मुख्य पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। ऐसा माना जाता है कि मुख्य द्वार पर गंदगी होने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन नहीं होता है।     मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह लगाना शुभ माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा नहीं आती है     मुख्य द्वार पर पेड़-पौधें लगाएं। इससे गेटिविटी दूर रहती है।     द्वारा पर हमेशा पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए।     अगर आप वास्तु के इन नियम का पालन करते हैं, तो आपक घर में हमेशा खुशहाली और सकारात्मकता का वास होगा।  

आर्थिक परेशानियों से राहत पाने का समय: जनवरी का अंतिम प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है. जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कल यानी 30 जनवरी को रखा जाएगा. शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा. मान्यता है कि शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से न केवल सुख-समृद्धि आती है, बल्कि आर्थिक तंगी से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं इस व्रत का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व. प्रदोष व्रत 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त पंचांग की गणना के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विवरण इस प्रकार है.     त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 30 जनवरी 2026, 11:09 बजे से.     त्रयोदशी तिथि समाप्त: 31 जनवरी 2026, सुबह 08:25 बजे तक. व्रत की तिथि: चूंकि प्रदोष काल में शिव पूजा का महत्व है, इसलिए यह व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को ही रखा जाएगा. पूजा का सबसे शुभ समय: भगवान शिव की पूजा के लिए शाम को 05:59 PM से रात 08:37 PM तक का समय सर्वश्रेष्ठ है. भक्तों के पास महादेव की आराधना के लिए लगभग ढाई घंटे का शुभ समय रहेगा. शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्ताह के अलग-अलग दिनों में पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है. शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से सौभाग्य, वैवाहिक सुख और धन-संपदा के लिए किया जाता है. प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं. इस समय की गई पूजा से भोलेनाथ जल्द प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं. प्रदोष व्रत की पूजा विधि अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या जीवन में सुख शांति चाहते हैं, तो इस विधि से पूजा करें. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (संभव हो तो सफेद) धारण करें. हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें. प्रदोष काल में दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं. शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा सफेद फूल और मिठाई अर्पित करें. पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का निरंतर जाप करें. शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में शिव जी की आरती करें.शुक्र प्रदोष के दिन शिवलिंग पर सफेद चंदन का लेप लगाएं और खीर का भोग लगाएं. इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है और घर में सुख-सुविधाओं की वृद्धि होती है.

पैसा आता है लेकिन टिकता नहीं? चाणक्य नीति के ये 5 सूत्र सिखाएँगे धन की बचत

नौकरीपेशा लोगों की अकसर खुद से यह शिकायत रहती है कि महीना खत्म होने से पहले ही उनकी जेब के पैसे खत्म हो जाते हैं। पूरे महीने मेहनत करके कमाया हुआ धन, खर्चों की कटौती करने के भी नहीं बच पाता है। अगर आपका हाल भी कुछ ऐसा ही है तो चाणक्य नीति में आपकी परेशानी का हल मौजूद है। चाणक्य नीति में धन के प्रबंधन और बचत के लिए कई उपयोगी सिद्धांत बताए गए हैं, जो आज के समय में भी बेहद असरदार हैं। धन की बचत से जुड़े चाणक्य के ये 5 सिद्धांत व्यक्ति को को आर्थिक सुरक्षा देकर सम्मानित जीवन जीने में भी मदद करते हैं। धन की बचत से जुड़े चाणक्य नीति के 5 सिद्धांत आय का एक हिस्सा अवश्य बचाएं चाणक्य के अनुसार, जिस तरह बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, वैसे ही छोटी-छोटी बचत से धन संचय होता है। व्यक्ति को चाहिए कि अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा, चाहे वह कितना भी कम क्यों ना हो, नियमित रूप से बचत के लिए अलग निकालकर रखें। यह धन भविष्य में आपातकाल या बड़े लक्ष्यों को पूरा करने के काम आता है। अनावश्यक खर्चों से बचें चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी आय से अधिक खर्च करता है, वह शीघ्र ही दरिद्र हो जाता है। चाणक्य नीति के अनुसार, दिखावे के लिए अनावश्यक खर्च करने से बचना चाहिए। केवल जरूरी और उपयोगी चीजों पर ही धन खर्च करें। उदाहरण के लिए ब्रांडेड कपड़ों या लग्जरी वस्तुओं पर खर्च करने के बजाय, गुणवत्तापूर्ण और किफायती विकल्प चुनें। धन का विवेकपूर्ण निवेश करें धन को केवल वहां उपयोग करें, जहां सुरक्षित रहते हुए वह अधिक बढ़ सके। चाणक्य की इस सलाह का मतलब है कि धन को बेकार एक जगह न पड़ा रहने दें, बल्कि जोखिम का आकलन करते हुए उसे ऐसी जगह निवेश करें जहां वह समय के साथ बढ़े, जैसे व्यापार, संपत्ति, या सुरक्षित निवेश योजनाएं। म्यूचुअल फंड, या सोने में निवेश धन को बढ़ाने का सुरक्षित तरीका हो सकता है। भविष्य के लिए योजना बनाएं जो व्यक्ति भविष्य की चिंता नहीं करता, वह एक दिन संकट में पड़ जाता है। चाणक्य के अनुसार, भविष्य की जरूरतों, जैसे शिक्षा, विवाह, या आपातकाल के लिए धन संचय करना चाहिए। इसके लिए नियमित बचत और दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। लालच और जोखिम से बचें लालच में आकर धन का दुरुपयोग करने वाला व्यक्ति अपना सर्वनाश कर लेता है। चाणक्य सलाह देते हैं कि जल्दी अमीर बनने की चाह में जोखिम भरे निवेश या जुआ जैसी गतिविधियों से बचें। धन को सुरक्षित और समझदारी से प्रबंधित करें।

क्या आप भी सुबह सबसे पहले ये 5 चीजें देखते हैं? हो सकता है इसी वजह से बिगड़ता हो आपका दिन

हम अक्सर कहते हैं कि "आज का दिन ही खराब है", लेकिन कभी इसके पीछे की वजह पर गौर नहीं करते। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जब हम सोकर उठते हैं, तो हमारा शरीर और मन अत्यधिक संवेदनशील होता है। उस वक्त हम जो देखते हैं, उसका सीधा असर हमारी मानसिक ऊर्जा और भाग्य पर पड़ता है। प्राचीन वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कुछ चीजें नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। अगर दिन की शुरुआत ही इन चीजों को देखकर हो, तो न केवल मानसिक तनाव बढ़ता है, बल्कि आर्थिक हानि के योग भी बनने लगते हैं। भूलकर भी न देखें ये 5 चीजें बंद घड़ी (रुका हुआ समय): वास्तु विशेषज्ञों के मुताबिक, सुबह उठते ही बंद घड़ी देखना बहुत अशुभ है। यह आपके जीवन में ठहराव और कार्यों में बाधा आने का संकेत है। यह दर्शाता है कि आपका अच्छा समय रुक गया है। शीशे में चेहरा देखना: बहुत से लोगों की आदत होती है जागते ही शीशा देखने की। वास्तु के अनुसार, रात भर की नकारात्मक ऊर्जा सुबह चेहरे पर होती है। शीशा देखने से वह ऊर्जा वापस आप में समा जाती है, जिससे दिनभर चिड़चिड़ापन रह सकता है। जूठे बर्तन: अगर आप सुबह उठकर किचन में सबसे पहले रात के जूठे बर्तन देखते हैं, तो यह सीधे तौर पर आर्थिक तंगी को न्योता देना है। इससे घर में दरिद्रता का वास होता है। अपनी या दूसरों की परछाई: सुबह-सुबह परछाई देखना (चाहे वह अपनी हो या किसी और की) राहु का प्रभाव बढ़ाता है। इससे मन में डर, भ्रम और कार्यों में उलझन पैदा होती है। जंगली जानवरों की तस्वीर: बेडरूम में कभी भी हिंसक जानवरों की फोटो न लगाएं। सुबह इन्हें देखने से स्वभाव में क्रोध बढ़ता है और परिवार में क्लेश होने की संभावना रहती है। धार्मिक ग्रंथों और वास्तु के जानकारों के अनुसार, इन नकारात्मक चीजों से बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि सुबह उठते ही अपनी हथेलियों के दर्शन करें या किसी देवी-देवता की शांत तस्वीर देखें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।  

राहु का प्रभाव और गोमेद रत्न: मन की उलझनों से मुक्ति किसे मिल सकती है?

हेसोनाइट, जिसे हिंदी में गोमेद कहा जाता है, राहु से जुड़ा रत्न है. राहु कोई दिखाई देने वाला ग्रह नहीं, बल्कि छाया ग्रह माने जाते हैं. राहु भ्रम, महत्वाकांक्षा, विदेशी प्रभाव, अचानक घटनाएं, जुनून और अलग रास्तों का संकेत देते हैं. गोमेद राहु की बिखरी और भ्रमित ऊर्जा को संभालने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए पहना जाता है, खासकर राजनीति, विदेश, अचानक सफलता और भौतिक क्षेत्रों में. राहु अचानक उतार-चढ़ाव, विदेश यात्रा, राजनीति, जन-प्रभाव, तकनीक, नशा, डर, भ्रम और मानसिक पैटर्न से जुड़े माने जाते हैं. पीड़ित राहु चिंता, भ्रम, नशे, कानूनी झंझट, अचानक नुकसान और बदनामी दे सकते हैं. संतुलित राहु तेज दिमाग, नाम और अलग तरह की सफलता देते हैं. गोमेद गार्नेट परिवार का रत्न है. इसका रंग शहद जैसा भूरा से लेकर लाल-नारंगी (दालचीनी जैसा) होता है. इसमें हल्की तैलीय या धुंधली चमक होती है, जो इसे दूसरे रत्नों से अलग बनाती है. अच्छा गोमेद साफ, एकसार रंग वाला और बिना दरार या काले धब्बों के होना चाहिए. श्रीलंका (सीलोन) का गोमेद सबसे अच्छा माना जाता है. गोमेद से जुड़े ज्योतिषीय, सांस्कृतिक और व्यावहारिक पहलू वैदिक ज्योतिष में गोमेद को राहु ग्रह का रत्न माना जाता है. राहु बाकी ग्रहों की तरह सीधा असर नहीं करता, बल्कि यह मन, डर, लालच, भ्रम, अचानक घटनाओं और कर्म से जुड़े मामलों को प्रभावित करता है. गोमेद का काम भ्रम को बढ़ाना नहीं, बल्कि वहां नियंत्रण और स्पष्टता लाना है, जहां राहु की वजह से उलझन, बेचैनी या अजीब व्यवहार पैदा हो जाता है. कर्म और दशा के अनुसार, गोमेद ज्यादातर राहु की महादशा या अंतरदशा में पहनने की सलाह दी जाती है. खासकर तब, जब बिना वजह रुकावटें आ रही हों, अचानक नुकसान हो रहा हो, कोर्टकचहरी के मामले चल रहे हों, लत की समस्या हो या बार-बार डर और घबराहट सताती हो. अगर कुंडली में राहु शुभ हो लेकिन अटका हुआ हो, तो गोमेद विदेश से जुड़े मौके, अनोखी सफलता, टेक्नोलॉजी, राजनीति और जनसंचार जैसे क्षेत्रों में अचानक ब्रेकथ्रू दिला सकता है. सांस्कृतिक रूप से राहु को छाया ग्रह और ग्रहण से जोड़ा गया है. पुराने समय में गोमेद को धोखा, काला जादू और छुपे हुए दुश्मनों से बचाव के लिए ताबीज की तरह भी पहना जाता था. आध्यात्मिक रूप से गोमेद जरूरत से ज्यादा कल्पनाशक्ति, भ्रम या वहम को जमीन से जोड़ता है. यही वजह है कि यह गहरे मानसिक या तांत्रिक कार्यों से जुड़े लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है. व्यावहारिक रूप से गोमेद खरीदते समय ध्यान रखें कि उसका रंग शहद या दालचीनी जैसा हो और उसमें हल्की तेलीय चमक हो, कांच जैसी तेज चमक नहीं. आमतौर पर गोमेद 5 से 8 रत्ती तक पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन सही वजन उम्र, शरीर के वजन और कुंडली के अनुसार तय किया जाना चाहिए. कृत्रिम रूप से गर्म किया हुआ, बहुत फीका या बेजान गोमेद नहीं पहनना चाहिए. एक आम गलती यह होती है कि लोग अचानक पैसा या ताकत पाने के लिए बिना जांच गोमेद पहन लेते हैं. अगर कुंडली में राहु अशुभ हो, तो गोमेद पहनने से वहम, लत, डर या मानसिक अस्थिरता बढ़ सकती है इसलिए गोमेद पहनने से पहले ट्रायल पहनना और किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना बहुत जरूरी है. सही स्थिति में गोमेद ढाल और इंजन दोनों की तरह काम करता है—यह सुरक्षा भी देता है और महत्वाकांक्षा को नियंत्रित तरीके से सफलता की ओर ले जाता है. गोमेद रत्न पहनने के ज्योतिषीय लाभ     डर, घबराहट और मानसिक भ्रम कम करेगा     नकारात्मक ऊर्जा और भ्रम से सुरक्षा देगा     अचानक करियर और धन लाभ में मदद करेगा     राजनीति, मीडिया और जन-प्रभाव वाले क्षेत्रों में सफलता देगा     विदेश यात्रा, विदेश में बसने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग करेगा     नशे और जुनूनी आदतों को नियंत्रित करने में मदद करेगा     राहु महादशा चल रही हो या बिना कारण बार-बार समस्याएं आ रही हों, तो गोमेद सलाह दिया जाता है. गोमेद पहनने की विधि     धातु: चांदी या पंचधातु     उंगली: मध्य उंगली     हाथ: दाहिना     दिन: शनिवार शाम     समय: राहु काल     मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (108 बार) गोमेद पहनते समय बरतें ये सावधानियां     गोमेद हमेशा ट्रायल के बाद ही पहनें     ट्रायल अवधि: 57 दिन     डर, बुरे सपने, बीमारी या नुकसान हो तो तुरंत उतार दें     टूटा, फीका या ट्रीट किया हुआ गोमेद न पहनें     मोती, माणिक, पुखराज या नीलम के साथ बिना सलाह न पहनें गोमेद सजावटी नहीं, बल्कि सुधार करने वाला रत्न है. राहु अनुकूल हों तो यह अचानक सफलता और सुरक्षा दे सकता है. राहु प्रतिकूल हों तो भ्रम और अस्थिरता बढ़ा सकता है. इसलिए कुंडली जांच बेहद जरूरी है.