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जनता को राहत: सरकार ने 12% टैक्स स्लैब घटाकर 5% किया, 99% वस्तुएं होंगी सस्ती

चेन्नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार ने 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 99 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इससे लोगों पर कर का बोझ कम होगा। ट्रेड एडं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के ज्वाइंट कॉन्क्लेव में लोगों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार ने जीएसटी सुधार के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को चार (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) कर दिया गया है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, "जब लोगों को लगा कि सरकार ज्यादा टैक्स लगा रही है तो प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स के बोझ को घटाने के लिए कदम उठाए। जीएसटी में कटौती का हमारे 140 करोड़ नागरिकों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री दिवाली से पहले देश को यह छूट देना चाहते थे, लेकिन हमें नवरात्रि से पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह सभी भारतीयों की जीत है।" वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में केवल 65 लाख लोग की जीएसटी का भुगतान कर रहे थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है, जो कि 2018 में 7.18 लाख करोड़ रुपए था। जीएसटी में कटौती का श्रेय राज्यों के साथ साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के मंत्री जीएसटी परिषद की शुरुआत से ही इसका हिस्सा रहे हैं, और यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है। इस सफलता में राज्य सरकारों की भी भूमिका है। हमने 350 से ज्यादा वस्तुओं पर कर कम किया है और कर ढांचे को केवल दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। नए जीएसटी सुधार 22 सितंबर से लागू होंगे। नए जीएसटी ढांचे में सरकार ने 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब रखे हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का अलग से टैक्स लगाया जाएगा।

भारत की अर्थव्यवस्था पर रघुराम राजन का विश्लेषण: विकास दर उत्साहजनक, मगर चुनौतियां बरकरार

नई दिल्ली  भारत की अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे ऊंचा स्तर है। यह आंकड़ा सतही तौर पर उत्साहजनक दिखाई देता है, लेकिन पूर्व रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) गवर्नर रघुराम राजन का मानना है कि इस पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। क्या है डिटेल स्पारएक्स (SparX) के मुकेश बंसल से बातचीत में रघुराम राजन ने कहा कि मजबूत वृद्धि के आंकड़े का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके पीछे की असल सच्चाई को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, “जब भी आंकड़े ऊंचे आते हैं तो खुशी होना स्वाभाविक है, लेकिन असली सवाल यह है कि यह इतना ऊंचा क्यों है?” राजन ने खास तौर पर दो बड़ी चिंताओं की ओर इशारा किया। पहली, निजी निवेश का सुस्त रहना, जो लंबे समय तक टिकाऊ विकास के लिए बेहद अहम है। दूसरी, रोजगार सृजन की कमजोरी, जिससे विकास का लाभ आम जनता तक सीमित रूप से पहुंच पा रहा है। रघुराम राजन ने क्या कहा रघुराम राजन ने कहा कि भारत में महंगाई मापने का तरीका हकीकत को पूरी तरह नहीं दिखाता। उन्होंने समझाया, “क्या हम महंगाई सही तरीके से गिन रहे हैं? जब आप अर्थशास्त्रियों से बात करते हैं तो पता चलता है कि इसमें दिक्कतें हैं, क्योंकि यह असली महंगाई को पूरी तरह नहीं दिखाता। कभी यह हमारे लिए फायदे में होता है, कभी नुकसान में। अभी यह हमें फायदा दे रहा है, इसलिए हमारे आंकड़े अधिक अच्छे दिख रहे हैं।” राजन ने सिर्फ आंकड़ों की खामियों पर ही नहीं, बल्कि गहरी चिंताओं पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, “आजकल ज्यादातर निवेश सरकार कर रही है, चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें। लेकिन निजी क्षेत्र उतना निवेश नहीं कर रहा। पिछले 10–12 साल से यह एक बड़ी चिंता है। अगर हम सचमुच इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं, तो फिर निजी क्षेत्र निवेश क्यों नहीं कर रहा? यही सवाल हर अर्थशास्त्री को परेशान करता है।” रघुराम राजन ने कहा कि हाल ही में ग्रामीण मांग अच्छी फसल की वजह से मजबूत रही है। यह एक अच्छी बात है क्योंकि इससे अमीर और गरीब के बीच असमानता थोड़ी कम होती है। लेकिन शहरी इलाकों में खपत अभी भी कमजोर है। उन्होंने कहा, “हमें लंबे समय तक टिकाऊ खपत चाहिए। इसके लिए घर-परिवारों को रोज़गार को लेकर भरोसा होना चाहिए। लेकिन शहरी परिवार इस मामले में ज़्यादा चिंतित हैं। आपने खबरें देखी होंगी—जैसे टीसीएस (TCS) नौकरियां घटा रहा है। असली समस्या यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था उतनी अच्छी नौकरियां नहीं बना रही, जितनी जरूरत है ताकि मजदूरी की उम्र में आने वाले युवाओं को रोजगार मिल सके।” ट्रंप टैरिफ पर क्या बोले राजन अमेरिका की टैरिफ नीति पर राजन ने कहा कि इसका भारत पर असर सीमित होगा, लेकिन यह असर सब पर बराबर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि भारत से अमेरिका को होने वाले करीब 85 अरब डॉलर के निर्यात में से लगभग 40 अरब डॉलर का मूल्य भारत में ही जोड़ा जाता है। अगर मान भी लें कि निर्यात पूरी तरह बंद हो जाए, तो भी भारत को लगभग 40 अरब डॉलर यानी करीब 1% जीडीपी का नुकसान होगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ऐसा पूरी तरह से रुकना संभव नहीं है। राजन ने चेतावनी दी कि कुछ क्षेत्रों पर असर ज्यादा हो सकता है, जैसे टेक्सटाइल और झींगा पालन। उन्होंने सुझाव दिया कि “हमारे झींगा किसान ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि अमेरिकी बाजार में हमारे व्यापारी और कंपनियां अमेरिकी पक्षों के साथ मिलकर लॉबिंग करें। मौजूदा अमेरिकी प्रशासन छूट देने को तैयार दिखता है। उदाहरण के लिए, ब्राज़ील को 50% टैरिफ के बावजूद कई छूटें मिल चुकी हैं।” राजन ने अनुमान लगाया कि अगर ये टैरिफ कुछ महीनों तक बने रहते हैं, तो भारत की जीडीपी पर 0.2% से 0.4% तक का असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को चाहिए कि वह निर्यातकों की मदद करे ताकि वे अमेरिकी लॉबिंग का इस्तेमाल कर नुकसान को कम कर सकें। चीन को लेकर क्या बोले रघुराम राजन ने भारत और चीन के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का “स्वाभाविक गठजोड़” चीन के साथ नहीं हो सकता, क्योंकि दोनों देशों के बीच गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है।

ऑटो सेक्टर के लिए खुशखबरी: जीएसटी रेट्स में कटौती, उद्योग में आएगा बड़ा सुधार

नई दिल्ली भारत में मेक इन इंडिया के 10 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह उच्च लक्ष्य निर्धारित करने, सप्लाई चेन को मजबूत करने, मजबूती बढ़ाने और रोजगार, निर्यात एवं हाई-क्वालिटी मैन्युफैक्चरिंग में योगदान देने का एक सही समय है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) के 65वें वार्षिक सत्र में केंद्रीय मंत्री गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हाल ही में घोषित जीएसटी सुधारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करना एक ऐतिहासिक सुधार है और ऑटो उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। ट्रैक्टरों के लिए जीएसटी रेट्स को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सुधार प्रधानमंत्री की सराहना का पात्र है क्योंकि इससे स्पेयर पार्ट्स पहले से अधिक सस्ते हो जाएंगे, औपचारिकता मजबूत होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और वैल्यू चेन में मांग बढ़ेगी। केंद्रीय मंत्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी रेट कटौती का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी रेट में कटौती का यह दौर आजादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार है और इससे हर भारतीय को फायदा होगा। उन्होंने आगे कहा कि 1.4 अरब लोगों में से एक भी नागरिक ऐसा नहीं होगा जिसे इन सुधारों से फायदा नहीं होगा। दिवंगत रतन टाटा का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “लोग आप पर जो पत्थर फेंकते हैं, उन्हें स्वीकार करें और एक स्मारक बनाएं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्र को चुनौतियों से विचलित नहीं होना चाहिए और आत्मविश्वास के साथ-साथ सामूहिक प्रयास से भारत निरंतर मजबूत होता रहेगा। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कोरोना के दौरान देश की मजबूती की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत ने 100 से अधिक देशों को दवाइयां और टीके (कुछ मुफ्त) उपलब्ध करवाने से लेकर बिना किसी मुनाफा के आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कर सभी वैश्विक प्रतिबद्धता को पूरा किया है। उन्होंने आगे कहा कि इससे भारत को वैश्विक रूप से विश्वास प्राप्त हुआ है और आज देश की पहचान एक विश्वसनीय एवं भरोसेमंद साझेदार के रूप में होती है।  

सोने ने रचा इतिहास: 61 साल में पहुँचा ₹113,736.75 तक, जानें साल-दर-साल रेट

मुंबई  सोने की खरीद करने वालों के लिए एक बहुत ही महत्पूर्ण जानकारी है. वह यह है कि 31 दिसंबर 2024 के बाद साल 2025 की शुरुआत से लेकर 12 सितंबर 2025 तक देश के सर्राफा बाजारों में सोना रिकॉर्ड की झड़ी लगाते हुए करीब 34,850 रुपये या 44.14% तक महंगा हो गया है. साल 2025 में अब तक इसकी कीमतों में उछाल आने के पीछे कई कारकों को अहम माना जा रहा है. इनमें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ नीतियां, कमजोर डॉलर, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर कटौती की उम्मीदों और भारत में त्योहारी मांग प्रमुख हैं. सबसे अहम बात यह है कि सोने की चिड़िया कहे जाने वाले भारत में आज से करीब 60 साल पहले 1964 में सोने की कीमत जानकर आप माथा पकड़कर बैठ जाएंगे, क्योंकि उस समय इसकी कीमत मात्र 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम था. इन 60 सालों के दौरान सोने की कीमतों आई उछाल का मूल्यांकन करेंगे, उस समय से अब तक इसकी कीमत में करीब 1798 गुना बढ़कर 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है. इसका मतलब यह है कि आज के 60 साल पहले वर्ष 1964 में जिस व्यक्ति ने 100 सोना खरीदकर रख लिया होगा, आज वह करोड़पति हो गया होगा. आइए, टाइमलाइन के माध्यम से जानते हैं कि साल 2025 में सोने की कीमत ने कब-कब रिकॉर्ड बनाया और साल 1964 से लेकर 12 सितंबर 2025 तक साल-दर-साल सोना कैसे महंगा होता चला गया? 2025 में किन कारणों से सोना हुआ महंगा     वैश्विक स्तर पर: गोल्ड का अंतरराष्ट्रीय भाव 3,500 डॉलर प्रति औंस को पार कर 3,674 डॉलर तक पहुंचा, जो ट्रंप की टैरिफ नीतियों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित है.     भारतीय बाजार में: कमजोर रुपये (88.16 तक गिरावट), सेंट्रल बैंक खरीदारी (आरबीआई ने 2025 में 72.6 टन सोना जोड़ा) और त्योहारी सीजन की मांग से सोना महंगा हुआ.     उपभोग का प्रभाव: भारत में 2025 का गोल्ड उपभोग 600-700 टन अनुमानित है, लेकिन ऊंची कीमतों से ज्वेलरी डिमांड 10% घट गई. 2025 में सोने की कीमतों ने कब-कब बनाया नया रिकॉर्ड वर्ष 2025 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है. 31 दिसंबर 2024 को सोने का भाव 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम था, यानी इस साल अब तक 34,850 रुपये या 44.14% की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है.        31 दिसंबर 2024: 78,950 रुपये प्रति 10 ग्राम     16 अप्रैल 2025: 94,579 रुपये प्रति 10 ग्राम     17 अप्रैल 2025: 97,310 रुपये प्रति 10 ग्राम     18 अप्रैल 2025: 97,580 रुपये प्रति 10 ग्राम     22 अप्रैल 2025: 1,01,350 रुपये प्रति 10 ग्राम     30 अप्रैल 2025: 1,02,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     23 जुलाई 2025: 1,00,510 रुपये प्रति 10 ग्राम     7 अगस्त 2025: 101,470 रुपये प्रति 10 ग्राम     8 अगस्त 2025: 101,900 रुपये प्रति 10 ग्राम     29 अगस्त 2025: 1,02,490 रुपये प्रति 10 ग्राम     2 सितंबर 2025: 1,06,140 रुपये प्रति 10 ग्राम     3 सितंबर 2025: 1,08,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     9 सितंबर 2025: 1,12,750 रुपये प्रति 10 ग्राम     10 सितंबर 2025: 1,10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम     11 सितंबर 2025: 1,13,100 रुपये प्रति 10 ग्राम     12 सितंबर 2025: 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम स्रोत: दिल्ली एमसीएक्स 61 साल में 113,736.75 रुपये महंगा हो गया सोना आपको बता दें कि साल 1964 में जब गुलजारी लाल नंदा और लाल बहादुर शास्त्री देश के प्रधानमंत्री थे, तब भारत के सर्राफा बाजारों में सोने की कीमत करीब 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. आज करीब 61 साल बाद 12 सितंबर 2025 तक देश के सर्राफा बाजारों में इसकी कीमत 1,13,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई है. इन 61 सालों में सोना करीब 113,736.75 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया है. 1964 से 2025 तक सोने का भाव     1964: 63.25 रुपये प्रति 10 ग्राम     1965: 71.75 रुपये प्रति 10 ग्राम     1966: 83.75 रुपये प्रति 10 ग्राम     1967: 102.50 रुपये प्रति 10 ग्राम     1968: 162.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1969: 176.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1970: 184.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1971: 193.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1972: 202.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1973: 278.50 रुपये प्रति 10 ग्राम     1974: 506.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1975: 540.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1976: 432.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1977: 486.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1978: 685.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1979: 937.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1980: 1,330.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1981: 1670.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1982: 1,645.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1983: 1,800.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1984: 1,970.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1985: 2,130.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1986: 2,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1987: 2,570.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1988: 3,130.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1989: 3,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1990: 3,200.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1991: 3,466.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1992: 4,334.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1993: 4,140.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1994: 4,598.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1995: 4,680.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1996: 5,160.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1997: 4,725.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1998: 4,045.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     1999: 4,234.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2000: 4,400.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2001: 4,300.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2002: 4,990.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2003: 5,600.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2004: 5,850.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2005: 7,000.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2007: 10,800.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2008: 12,500.00 रुपये प्रति 10 ग्राम     2009: 14,500.00 रुपये … Read more

अब शैम्पू, साबुन और जैम होंगे सस्ते, हिंदुस्तान यूनिलीवर ने किया दामों में बड़ा कटौती

नई दिल्‍ली  आप भी अगर हर महीने डव शैम्पू, हॉर्लिक्स, किसान जैम या लाइफबॉय साबुन खरीदते हैं तो आपका खूब पैसा आने वाले समय में बचने वाला है. देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) ने अपने इन लोकप्रिय प्रोडक्ट्स के दाम घटाने का ऐलान कर दिया है. नई कीमतें 22 सितंबर से लागू हो जाएगी. यह कदम सरकार के जीएसटी में कटौती करने के बाद उठाया गया है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अखबारों में विज्ञापन देकर यह रेट कम करने की जानकारी दी है. एचयूएल का कहना है कि संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) वाले नए पैक जल्द ही बाजार में पहुंच रहे हैं. कहीं-कहीं पर ग्राहकों को बढ़े हुए ग्राम वाले पैक भी मिल सकते हैं, यानी या तो आपको सस्ता दाम मिलेगा या फिर ज्यादा मात्रा उसी दाम में. नई रेट लिस्‍ट प्रोडक्ट                                                   पुराना रेट           नया रेट डव शैम्पू (340 एमएल)                           ₹490           ₹435 हॉर्लिक्स (200 ग्राम)                                     ₹130           ₹110 किसान जैम (200 ग्राम)                           ₹90                  ₹80 लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक)          ₹68                 ₹60 डव से लेकर लाइफबॉय तक सब सस्‍ता 22 सितंबर से 340 एमएल की डव शैम्पू की बोतल ₹490 की जगह ₹435 में मिलेगी. बच्चों और बड़ों की पसंद हॉर्लिक्स का 200 ग्राम जार पहले ₹130 में मिलता था, वह ₹110 में उपलब्ध होगा. सुबह के नाश्ते में अक्सर इस्तेमाल होने वाला 200 ग्राम किसान जैम भी सस्ता हो गया है. इसकी कीमत ₹90 से घटाकर ₹80 कर दी गई है. इसके अलावा, हर घर में इस्तेमाल होने वाला लाइफबॉय साबुन (75 ग्राम × 4 पैक) भी अब ₹68 की बजाय ₹60 में मिलेगा.

अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा समर्थन, कम महंगाई और ब्याज दरें बढ़ाएंगी घरेलू मांग

नई दिल्ली एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बीच कम हेडलाइन मुद्रास्फीति और ब्याज दरें अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग को महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करेंगी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में अब हेडलाइन मुद्रास्फीति पहले के 3.5 से कम होकर 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके परिणामस्वरूप इस वित्त वर्ष के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति में 140 आधार अंकों (1.4 प्रतिशत) की गिरावट आएगी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "इस तीव्र नरमी का अर्थ है कि इस वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति में 140 आधार अंकों की गिरावट आएगी, जिससे मौद्रिक नीति में ढील की गुंजाइश बनेगी। हमारा मानना है कि आरबीआई इस वर्ष दरों में 25 आधार अंकों की अतिरिक्त कटौती करेगा।" आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अगस्त में मामूली रूप से बढ़कर 2.1 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 1.6 प्रतिशत थी और आरबीआई के 2 प्रतिशत के लोअर टॉलरेंस बैंड को पार कर गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति बहुत निचले स्तर से ऊपर जाने लगी है, जिसमें सांख्यिकीय निम्न-आधार प्रभाव भी शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र में सीएफपीआई आधारित खाद्य मुद्रास्फीति जुलाई, 2025 में -1.74 प्रतिशत की तुलना में अगस्त में -0.70 प्रतिशत (अनंतिम) दर्ज की गई है। हालांकि, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि अत्यधिक बारिश खरीफ फसलों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, जिसका संभावित रूप से खाद्य कीमतों पर असर पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ने यह भी नोट किया कि गैर-खाद्य मुद्रास्फीति सौम्य बनी हुई है या आगे भी कम होने की उम्मीद है, जिसे तेल की कम कीमतों और जीएसटी दरों में कटौती के कारण कोर मुद्रास्फीति में नरमी का समर्थन प्राप्त है। केरोसिन, बिजली और जलाऊ लकड़ी की कम कीमतों के कारण ईंधन मुद्रास्फीति 2.7 प्रतिशत से घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण कोर मुद्रास्फीति 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में मुद्रास्फीति में गिरावट आई।  

बिल्डिंग मटेरियल हुआ सस्ता: अब घर बनाना पड़ेगा सस्ता, जानें कितना घटे रेट

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल ने बड़ा फैसला लेते हुए GST के दरों में बड़ा बदलाव किया है. अभी जीएसटी के तहत 4 स्‍लैब- 5%, 12%, 18% और 28% है, लेकिन बदलाव के बाद सिर्फ दो स्‍लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी हो जाएगा. इस कारण तमाम जरूरत की चीजें सस्‍ती हो जाएगी, यहां तक कि घर बनवाने के लिए सीमेंट, ईंट और स्‍टील के दाम भी घटने वाले हैं. इन चीजों पर भी GST रेट में कटौती हुई है. 22 सितंबर से जीएसटी कटौती लागू होगी.  सीमेंट पर जीएसटी के रेट को 28 फीसदी की कैटेगरी से हटाकर 18% स्‍लैब में शामिल किया गया है. इसी तरह, ईंट और टाइल्‍स को 12% स्‍लैब से हटाकर 5 फीसदी स्‍लैब में रख दिया गया है. वहीं स्‍टील यानी सरिया पर भी GST को कम किया गया है, जो अब 28 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो जाएगा. आइए जीएसटी कैलकुलेशन से समझते हैं कि अब घर बनवाना कितना सस्‍ता हो सकता है.  सीमेंट के कितने कम होंगे दाम?  सीमेंट पर अभी जीएसटी 28% है, जो नई जीएसटी के बाद घटकर 18 फीसदी होगी यानी 10 फीसदी की कटौती होगी. अब मान लीजिए 50 किलो सीमेंट की बोरी ₹400 है. ऐसे में 10% GST कटौती के बाद 40 रुपये प्रति बोरी की कमी आएगी. वहीं 450 रुपये वाली बोरी पर 45 रुपये की कमी आएगी.  ईंट के दाम कितने घटेंगे?  ईंट पर जीएसटी रेट को 12 से कम करके 5 फीसदी किया गया है. ऐसे में इसपर जीएसटी रेट में 7 फीसदी की कमी आई है. अब मान लीजिए आप 1 लाख ईंट घर बनवाने के लिए मंगाते हैं और हर एक ईंट की कीमत 10 रुपये है तो कुल आपको 10 लाख रुपये का खर्च आएगा. ईंट पर जीएसटी 7% कम होने के बाद इसका कुल रेट घटकर 9 लाख 30 रुपये हो जाएंगे. यानी 1 लाख ईंट मंगाने पर आपको अब 70 हजार रुपये कम देने पड़ेंगे.  सरिया का रेट कितना कम होगा?  स्‍टील प्रोडक्‍ट्स पर जीएसटी रेट 28 फीसदी से कम करके 18 फीसदी किया गया है. ऐसे में 10 फीसदी रेट में कटौती हो सकता है. अब मान लीजिए 1 कुंतल सरिया का दाम 5000 रुपये है. ऐसे में प्रति कुंतल सरिया के दाम में 500 रुपये की कमी आएगी.  टाइल्‍स के रेट कितने घटेंगे?  टाइल्‍स जैसी चीजों पर जीएसटी को 12% से घटाकर 5% किया गया है. ऐसे में इसके दाम में भी 7 फीसदी की कटौती होने की उम्‍मीद है. अब 100 रुपये वर्ग फुट की एक टाइल्‍स पर 7 रुपये की कटौती होगी.  2500 वर्गफुट या 4BHK घर बनवाने में कितना खर्च आएगा?  एक अनुमान के मुताबिक, 2500 वर्गफुट घर बनवाने में करीब 1000 बोरी सीमेंट का यूज होता है. इसके अलावा, 25 हजार ईंट और सरिया 10 टन सरिया का इस्‍तेमाल हो सकता है. साथ ही लगभग 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स का यूज भी मान लेते हैं. अब इसी अनुमान पर कैलकुलेशन करें तो…  पुरानी जीएसटी रेट पर      400 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 1000 सीमेंट के दाम- 4 लाख रुपये      10 रुपये प्रति ईंट के हिसाब से 25000 ईंट के दाम- 2 लाख 50 हजार रुपये      50 हजार रुपये प्रति टन सरिया के हिसाब से 10 टन सरिया का दाम- 5 लाख रुपये      100 रुपये वर्गफुट टाइल्‍स के हिसाब से 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स के दाम- 2 लाख 20 हजार रुपये      कुल खर्च- 13.70 लाख रुपये  नई जीएसटी रेट पर     360 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 1000 सीमेंट के दाम- 3 लाख 60 हजार रुपये      9.3 रुपये प्रति ईंट के हिसाब से 25000 ईंट के दाम- 2 लाख 32.5 हजार रुपये      45 हजार रुपये प्रति टन सरिया के हिसाब से 10 टन सरिया का दाम- 4.50 लाख रुपये      93 रुपये वर्गफुट टाइल्‍स के हिसाब से 2200 वर्ग फुट टाइल्‍स के दाम- 2 लाख 4.6 हजार रुपये      कुल खर्च- 12.47 लाख रुपये  नई जीएसटी रेट लागू होने के बाद 2500 वर्ग फुट का घर बनवाने में 1.23 लाख रुपये की बचत हो सकती है. 

टियर-2 और 3 शहर भारत के इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को आकार देने में निभाएंगे बड़ी भूमिका : रिपोर्ट

नई दिल्ली एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टियर-2 और टियर-3 शहर अगले कुछ वर्षों में देश के इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को आकार देने में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे। एनएलबी सर्विसेज द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक महानगरों के बाहर नए संस्थान, टेक्नोलॉजी पार्क और स्किलिंग हब तेजी से उभर रहे हैं। इसलिए अनुमान है कि 2028 तक भारत के एडवांस्ड इंजीनियरों में टियर-2 और टियर-3 शहरों का योगदान लगभग 35 प्रतिशत हो जाएगा। जयपुर, वडोदरा, कोयंबटूर, कोच्चि, पुणे और इंदौर जैसे शहर कम लागत और उच्च प्रभाव वाली प्रतिभाओं की तलाश करने वाले उद्यमों को लुभाते हुए तेजी से उनके लिए आकर्षक गंतव्य बन रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत पहले से ही हर वर्ष लगभग 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स तैयार करता है, जिनमें मैकेनिकल, सिविल, आईटी, सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हालांकि, वर्तमान में इनमें से केवल 45 प्रतिशत ही उद्योग मानकों को पूरा करते हैं, जबकि 60-72 प्रतिशत को व्यापक रूप से रोजगार योग्य माना जाता है। एआई, डेटा साइंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर जैसे न्यू एज फिल्ड्स में स्किल्स गैप एक चुनौती साबित हो रहा है। रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि भारत की अर्थव्यवस्था का भविष्य एसटीईएम-लेड इनोवेशन से संचालित होगा। आने वाली 70 प्रतिशत नौकरियों में एसटीईएम स्किल की आवश्यकता होने की उम्मीद है, ऐसे में एआई, मशीन लर्निंग, डेटा इंजीनियरिंग, एम्बेडेड सिस्टम और नैतिक एआई शासन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को 2026 तक 10 लाख एआई-ट्रेन्ड इंजीनियरों की आवश्यकता होने का अनुमान है, लेकिन वर्तमान आपूर्ति इस मांग का केवल 20 प्रतिशत ही पूरा कर पाती है। इसी प्रकार, ईवी इंडस्ट्री 30-40 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रही है। इस इंडस्ट्री को 2030 तक बैटरी टेक्नोलॉजी, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स और सस्टेनेबल डिजाइन जैसे क्षेत्रों में 10-20 लाख इंजीनियरों की आवश्यकता होने की उम्मीद है। भारत के पहले स्वदेशी 32-बिट माइक्रोप्रोसेसर, विक्रम 3201 के आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम के बाद सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री भी नए अवसर पेश कर रही है। देश को चिप डिजाइन, प्रोसेस इंजीनियरिंग और टेस्टिंग के लिए हर वर्ष 25,000-30,000 स्किल्ड इंजीनियरों की आवश्यकता होने की उम्मीद है।  

Mutual Fund निवेशकों के लिए राहत, SEBI ने कम किया एग्जिट लोड, जानें क्या बदलेगा

मुंबई  बाजार नियामक सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने  म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने मैक्सिमम परमीसिबल एग्जिट लोड को 5 फीसदी से घटाकर 3 फीसदी कर दिया है। इससे म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि यह लोड फंड से निकासी के समय लगता है। सेबी ने इस बैठक में आइपीओ, कमोडिटी और बीमा सेक्टर से जुड़े नियमों को सरल किया है, जिससे निवेशक आकर्षित हो सके। क्या है एग्जिट लोड और किसे मिलेगा फायदा? जब आप किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं और कुछ समय बाद अपने यूनिट्स बेचकर बाहर निकलते हैं, तो फंड हाउस आपसे एक शुल्क ले सकता है। इसे एग्जीट लोड कहा जाता है। एग्जीट लोड कम होने से सीधे तौर म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों को फायदा मिलेगा, क्योंकि अब उन्हें कम निकासी शुल्क देना होगा। बड़ी कंपनियों के लिए हुआ यह फैसला सेबी ने कहा कि 50,000 करोड़ रुपए से एक लाख करोड़ रुपए के बीच मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत का कम से कम पब्लिक शेयर रखने के मानदंड को अब मौजूदा तीन सालों की जगह पांच सालों में हासिल किया जा सकता है। जिन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ के बीच है, उनके लिए सेबी ने न्यूनतम 6,250 करोड़ या आइपीओ के बाद मार्केट कैप का 2.75 प्रतिशत तक का रखने की बात कही है। वहीं, 5 लाख करोड़ से अधिक मार्केट कैप वाली कंपनियों के लिए, सेबी ने न्यूनतम सार्वजनिक पेशकश का आकार 15,000 करोड़ रुपए या 1 प्रतिशत रखने की बात कही है। एंकर कोटे में मिलेगी प्राथमिकता एंकर कोटे में बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों के लिए 7 फीसदी अतिरिक्त कोटा होगा। यानी बीमा, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंडों के लिए 40 प्रतिशत कोटा होगा। इसके अलावा 250 करोड़ रुपए से अधिक के स्वीकार्य एंकर आवंटियों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई है। बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को आईपीओ एंकर बुक के लिए रिजर्व कैटेगरी में शामिल किया जाएगा। एमपीएस नियम हो जाएंगे सरल इससे जियो जैसे मेगा इश्यू के लिए पब्लिक ऑफर और एमपीएस नियम अब ज्यादा सरल हो जाएंगे। कॉर्पोरेट्स पर दबाव घटेगा कंपनियों को कम समय में बड़े पैमाने पर इक्विटी डायल्यूशन से बचने का मौका मिलेगा। ऑफर्स से रिटेल और संस्थागत निवेशकों को ज्यादा अवसर मिलेंगे।

बदलते दौर में बदलती शादियां: दिखावे से हटकर अब प्रैक्टिकल अप्रोच, परिवार अपनाएंगे ये रास्ता?

इंदौर  बिटिया की शादी, सोना खरीदना है… ये हर माता-पिता की चाहत होती है, और यही भारतीय परंपरा भी है. लेकिन अब कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं, जो कह रहे हैं कि बिना गहनों के कैसे बिटिया को विदा करेंगे? भारतीय शादी में श्रृंगार का अहम स्थान है, और उसमें सोने की ज्वेलरी सबसे ऊपर है. दुल्हन के श्रृंगार से लेकर वर-वधू के परिवारों की शान तक, हर जगह सोना ही मुख्य आकर्षण होता है. यही कारण है कि सोने के बिना भारतीय शादी की कल्पना अधूरी-सी लगती है.  हालांकि शादी में मिले सोने-चांदी को संजोकर रखना भी हमारी परंपरा रही है, जो एक तरह से सुरक्षित निवेश भी है. परंपरा के अनुसार, दुल्हन को विवाह के समय सोने के गहने देना न सिर्फ उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिए होता है, बल्कि यह उसके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भी संकेत है.  दरअसल, मौजूदा समय में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, लेकिन इस साल शादी का सीजन कई परिवारों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है, क्योंकि इस वक्त सोना न सिर्फ महंगा हुआ है, बल्कि लगातार बढ़ती कीमतों ने उन परिवारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, जिनके यहां इस साल शादी है.  एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए शादी का बजट सीमित होता है. इस बदले हुए दौर में लोग ज्वेलरी के अलावा डेकोरेशन, फोटोग्राफी और हनीमून पैकेज जैसी चीजों पर खर्च कर रहे हैं. खासकर शहरों में युवाओं की सोच बदल रही है. ऐसे में शादी का बजट बिगड़ता जा रहा है और सोने का भाव भी बढ़ता जा रहा है.  सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों को है, जिनके यहां इस साल शादी है, क्योंकि पिछले एक साल में सोना करीब 46-47% महंगा हो चुका है. जबकि इसी साल यानी 2025 में ही सोने की कीमत करीब 40 फीसदी बढ़ चुकी है. एक साल पहले 24K कैरेट 10 ग्राम गोल्ड की कीमत करीब 75 हजार रुपये थी, जो बढ़कर 1,10,000 रुपये को पार कर चुकी है.  एक साल में सोने की  कितनी बढ़ी है (24 कैरेट)  सितंबर-2024         सितंबर- 2025 ₹75,930         ₹1,11,280 यानी एक साल में 10 ग्राम सोने की कीमत में 35000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है.  आमतौर पर एक मध्यवर्गीय परिवार शादी में 5 से 10 लाख रुपये खर्च करता है, एक अनुमान 5 लाख रुपये खर्च करने वाला परिवार कम से कम 20 ग्राम सोना खरीदता था, जो करीब 1.50 लाख रुपये में आ जाता था. लेकिन इस साल शादी में 5 लाख खर्च करने वाला परिवार परेशान है, वो सोच रहे हैं कि अब कितने का सोना खरीदें, क्योंकि सोना हर रोज महंगा हो रहा है, और बजट से भी बाहर हो रहा है. भारत में शादी को लेकर परंपरा और दिखावे का दबाव हमेशा रहा है. ऐसी स्थिति बिना गहनों की शादी भी नहीं हो सकती. 10 लाख रुपये तक शादी में खर्च करने वाले पहले 40 ग्राम सोना खरीदते थे, जो कि करीब 3 लाख रुपये में आज जाता था, अब इस साल 10 लाख रुपये शादी में खर्च करने वाले केवल 20 ग्राम ही सोना खरीद सकता है, क्योंकि 40 ग्राम खरीदने पर बजट बिगड़ जाएगा.  सोना महंगा होने पर अब क्या विकल्प?    सोने की कीमतों में उछाल का सीधा असर ज्वेलरी बाजार पर भी दिख रहा है. ज्वेलर्स की बिक्री में गिरावट आई है और कई दुकानदार किस्तों पर गहने देने की योजना ला रहे हैं. जानकार भी कह रहे हैं कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले महीनों में ज्वेलरी इंडस्ट्री को बड़ा झटका लग सकता है.  हालांकि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अब लोग परंपरा निभाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं. शादी-ब्याह और त्योहारों में गहनों का महत्व बना रहता है, लेकिन बढ़ते दामों ने लोगों की पसंद और रणनीति दोनों बदल दी है.  1. हल्की और मिनिमल ज्वेलरी भारी नेकलेस और कंगन की जगह अब लोग हल्के डिजाइन चुन रहे हैं. छोटे चेन, स्लीक रिंग्स और मिनिमल ब्रेसलेट्स की डिमांड बढ़ी है. इससे सोना भी खरीदा जाता है और बजट पर बोझ भी कम पड़ता है. 2. 18 कैरेट और 14 कैरेट गोल्ड पहले लोग ज्यादातर 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड खरीदते थे, लेकिन अब 18K और 14K के गहने बनवा रहे हैं. इससे सोना सस्ता भी पड़ रहा है और फैशनेबल डिजाइनों की भी बड़ी रेंज मिलती है. 3. गोल्ड प्लेटेड और इमीटेशन ज्वेलरी खासकर शादी या फंक्शन के लिए, कई परिवार अब गोल्ड प्लेटेड ज्वेलरी या फिर हाई क्वालिटी वाली इमीटेशन ज्वेलरी ले रहे हैं. दिखने में ये लगभग असली सोने जैसी लगती हैं और खर्च काफी कम आता है. यानी बजट में होता है.  4. सिल्वर और प्लैटिनम सोने के विकल्प के तौर पर लोग अब सिल्वर और प्लैटिनम ज्वेलरी की तरफ रुख कर रहे हैं.. खासकर शहरी युवाओं में यह चलन बढ़ा है, क्योंकि यह आधुनिक लुक देता है और वैल्यू भी बनाए रखता है.