samacharsecretary.com

Donald Trump India Visit: ट्रंप के भारत दौरे का बड़ा ऐलान, मार्को रुबियो ने बताई संभावित तारीख

नई दिल्ली/ वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं. अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसको लेकर बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की दिशा में काम चल रहा है और उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में यह दौरा हो सकेगा. IANS की रिपोर्ट के मुताबिक वॉशिंगटन डीसी में भारत-अमेरिका संबंधों पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते शानदार दौर में हैं. उन्होंने बताया कि जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छी मुलाकात हुई थी. दोनों देश अब व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।  रुबियो ने कहा, ‘हम ट्रेड डील को अंतिम रूप देने से बस कुछ कदम दूर हैं. बातचीत बेहद सकारात्मक रही है. जल्द ही क्वाड की अगली बैठक भी होगी. मैं खुद इस साल के अंत से पहले भारत जाने की उम्मीद करता हूं और अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी करूंगा.’ यदि ट्रंप अगले साल भारत आते हैं तो दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।  रुबियो ने कहा- इस साल के अंत में वे भी भारत का दौरा करेंगे व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, मैं साल के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे की तैयारियों के सिलसिले में भारत की यात्रा करूंगा। भारत-अमेरिका के संबंधों को लेकर रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के संबंध मजबूत स्थिति में हैं और जी7 शिखर सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच हुई हालिया मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में बेहतरी हुई है।     फरवरी 2020 में ट्रंप ने किया था भारत दौरा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत का दौरा किया था। उस समय उन्होंने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता से पहले अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली को भी संबोधित किया था। साल 2024 में अमेरिकी सत्ता में दोबारा लौटने के बाद भी ट्रंप ने भारत के साथ बेहतर संबंधों को बढ़ावा दिया है और दोनों देश व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को बढ़ा रहे हैं।  राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी में कई समानताएं भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका को असीमित संभावनाओं वाले स्वाभाविक साझेदार बताते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन प्रौद्योगिकी, रक्षा, निवेश और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग को राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी व्यक्तिगत संबंधों से भी मजबूती मिल रही है। व्हाइट हाउस में आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में गोर ने भारत में अपने पहले छह महीनों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देश की विविधता, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अमेरिका के साथ मजबूत होती साझेदारी ने द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को लेकर उनके विश्वास को और मजबूत किया है।  अमेरिकी राजदूत ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच करीबी कार्य संबंधों की भी तारीफ करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव बताया। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में गोर ने कहा, 'वे बेहद ऊर्जावान हैं, हर काम में व्यक्तिगत रूप से रुचि लेते हैं और परिणाम देने पर जोर देते हैं। मुझे उनमें और राष्ट्रपति ट्रंप में कई समानताएं दिखाई देती हैं, क्योंकि दोनों ही खुद नेतृत्व करते हुए काम पूरा कराने में विश्वास रखते हैं।' उन्होंने कहा, 'दोनों की सोच काफी हद तक एक जैसी है और दोनों परिणाम देना चाहते हैं।' भविष्य की प्राथमिकताओं पर गोर ने कहा कि उनका ध्यान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने, रक्षा सहयोग का विस्तार करने और पैक्स सिलिका जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर रहेगा।  भारत दौरे पर क्या बोले रुबियो? जब उनसे ट्रंप के संभावित भारत दौरे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं. उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति भारत जाएंगे. भारत अमेरिका का बेहद करीबी साझेदार और सहयोगी है.’ रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच जितनी करीबी है, उससे ज्यादा शायद ही किसी और नेता के साथ हो. कूटनीति में ऐसे रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।  ट्रेड डील पर भी जल्द हो सकता है फैसला रुबियो के मुताबिक भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है. अगर यह समझौता पूरा होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई तेजी मिलेगी।  मोदी से ट्रंप के अच्छे संबंध मार्को रूबियो ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच बहुत जल्द ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की उम्मीद है। ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। मैं राष्ट्रपति की यात्रा को अंतिम रूप देने के लिए भारत जा रहा हूं। रूबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। हम साथ मिलकर कर रहें काम भारत, अमेरिका और वेनेजुएला से बातचीत कर रहा है। हम सप्लाई बढ़ाने के लिए बहुत मिलकर काम कर रहे हैं। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जिनके पास भारी कच्चे तेल (heavy crude) को रिफाइन करने की क्षमता है। उन्होंने खुद को पीएम मोदी का प्रशंसक बताते हुए कहा कि मोदी ने भारत को ग्लोबल पावर बनाया है। ट्रंप आखिरी बार कब आए थे भारत? अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने आखिरी बार फरवरी 2020 में भारत की यात्रा की थी। जब ट्रंप ने अहमदाबाद में नमस्ते ट्रंप रैली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ भाग लिया था, जिसके बाद दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय चर्चा की थी।  

डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार! अपाचे हादसे के बाद अमेरिका ने ईरान पर किए हमले, होर्मुज में क्या-क्या हुआ?

वाशिंगटन ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की आग एक बार फिर भड़क गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने होर्मुज को बदलापुर बना दिया है. जिस बात के लिए डोनाल्ड ट्रंप इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को बार-बार रोक रहे थे. अपाचे हेलीकॉप्टर के गिरने के बाद खुद वो गलती कर बैठे. जी हां, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर ताबड़तोड़ अटैक कर दिया है. अमेरिका का ईरान पर यह अटैक सीजफायर के बीच हुआ है. होर्मुज के पास गिराए गए अपाचे हेलीकॉप्टर का ट्रंप ने ईरान पर अटैक करके जवाब दिया है. हालांकि, तेहरान ने भी बदला लेने की कसम खाई है. इसका मतलब है कि युद्ध की आग अब और भड़कने वाली है।  दरअसल, मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जवाबी सैन्य कार्रवाई का आदेश दे दिया है. यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एक अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिर गया था. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान का हाथ था, जबकि तेहरान इस आरोप से इनकार कर रहा है. इस बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं. अमेरिका ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास एक अमेरिकन अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर गिराए जाने के कुछ घंटों बाद ईरान पर हमला किया।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस हमले को सेल्फ डिफेंस स्ट्राइक बताया है. उसने कहा कि ईरान पर यह ताजा हमला ट्रंप के ऑर्डर पर वाशिंगटन टाइम के हिसाब से शाम 5 बजे शुरू हुआ और इसका मकसद ईरानी हमले का प्रोपोर्शनल जवाब देना था. यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने ईरान पर अपाचे को मार गिराने का आरोप लगाया और कसम खाई कि ज़रूरत पड़ने पर अमेरिका इस हमले का जवाब देगा।   ट्रंप का बड़ा एक्शन, ईरान पर अमेरिकी हमले शुरू; मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा बहरहाल, इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. तेल बाजार से लेकर वैश्विक सुरक्षा तक… हर क्षेत्र पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है. आइए जानते हैं इस पूरे मामले के कुछ बड़े अपडेट्स. ट्रंप ने दिया सैन्य कार्रवाई का आदेश: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों और सैन्य उपकरणों पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इसी के बाद ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को मंजूरी दी गई. अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर गश्त कर रहे अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।  अपाचे हेलिकॉप्टर घटना बनी बड़ी वजह: दरअसल, अमेरिका का ईरान पर यह अटैक अपाचे के गिराए जाने का बदला है. ईरान पर आरोप है कि उसने अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर मार गिराया है. इससे ट्रंप भड़क उठे. उन्होंने अपाचे का बदला लेने के लिए ही ईरान पर अटैक करवाया. अमेरिका का दावा है कि इसके पीछे ईरान या उससे जुड़े समूहों की भूमिका थी. कुल मिलाकर अपाचे वाली घटना ही नई जंग की वजह बनी।  ईरान के कई ठिकाने निशाने पर: अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, रडार केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कई रणनीतिक ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए. अमेरिका ने अब्बास समेत 3 ईरानी ठिकानों पर एक साथ हमला किया. इसके बाद तो ईरान में हर तरफ धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी।  तेहरान में बढ़ी हलचल: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. सैन्य ठिकानों पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. लोगों में खौफ का मंजर है. गौरतलब है कि अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर इजरायल के साथ मिलकर अटैक किया था।  ईरान ने दी कड़ी चेतावनी: अमेरिकी हमलों पर ईरान ने भी पलटवार की कसम खाई है. ईरान ने साफ कहा है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी तो पूरे क्षेत्र में हालात और बिगड़ सकते हैं. इस बीच तेहरान ने भी पलटवार किया है. उसने भी कुछ मिसाइलें दागी हैं।  होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा: मिडिल ईस्ट का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर जंग का अखाड़ा बन गया है. अपाचे हेलिकॉप्टर क्रैश के बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला बोल दिया है. इससे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव बढ़ गया है. यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।  बेंजामिन नेतन्याहू को रोक खुद गलती कर रहे ट्रंप: डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही इजरायल को ईरान के खिलाफ नई जंग नहीं छेड़ने के लिए चेताया था. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अगर इजरायल ईरान पर अटैक करता है तो वह उसे अकेले जंग लड़नी पड़ेगी. मगर अपाचे के गिरने के बाद ट्रंप खुद आपा खो बैठे और ईरान पर अटैक कर दिया।  होर्मुज में फिर मचेगा हाहाकार: ईरान जंग पर अमेरिका अब तक शांत था. वह किसी तरह सीजफायर को मान रहा था और ईरान से डील चाहता था. मगर अपाचे के गिरने से ट्रंप का सब्र जवाब दे गया. भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अटैक करके नई जंग छेड़ दी है. इसका मतलब है कि होर्मुज में अब और हड़कंप मचेगा. इससे तेल और गैस की चिंता और बढ़ जाएगी। 

ट्रंप परिवार का राजस्थान दौरा, चार्टर प्लेन से जैसलमेर पहुंचेंगी बेटी और दामाद

जैसलमेर  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की छोटी बेटी टिफनी ट्रंप अपने पति माइकल बोलस के साथ आज रविवार को राजस्थान के जैसलमेर पहुंचेंगी। यह शाही जोड़ा चार्टर प्लेन से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। उनके इस हाई-प्रोफाइल और निजी दौरे को देखते हुए पर्यटन नगरी में सुरक्षा का अलर्ट जारी।  अपनी इस यात्रा के दौरान टिफनी ट्रंप जैसलमेर की ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करेंगी। वे यहां के विश्व प्रसिद्ध सोनार किला (जैसलमेर फोर्ट), पटवों की हवेली और खूबसूरत गड़ीसर लेक देखने जाएंगी। सोमवार को उनका यहां से रवाना होने का कार्यक्रम है। अक्षरधाम और ताजमहल की खूबसूरती देखी भारत घूमने आईं टिफनी ट्रंप और उनके पति माइकल बोलस ने अपनी यात्रा की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली से की। शुक्रवार को उन्होंने दिल्ली के प्रसिद्ध स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर का दौरा किया। टिफनी ने मंदिर की भव्यता और अद्भुत शिल्पकला की सोशल मीडिया (X) पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए जमकर तारीफ की। इसके बाद शनिवार को वह आगरा पहुंचीं, जहां उन्होंने दुनिया के सात अजूबों में शामिल 'ताजमहल' का दीदार किया। बॉर्डर का जिला होने से सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, रूट डायवर्जन की तैयारी अमेरिकी राष्ट्रपति की बेटी के दौरे को लेकर जैसलमेर जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा जिला होने और हाई-प्रोफाइल वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनके रुकने वाले संभावित स्थानों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। खुफिया एजेंसियां भी सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं। पर्यटन कारोबारियों में भारी उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति के परिवार की इस यात्रा से जैसलमेर के पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होटल व्यवसायियों और गाइडों में जबरदस्त उत्साह का माहौल है। कारोबारियों का मानना है कि टिफनी ट्रंप के इस दौरे से वैश्विक स्तर पर जैसलमेर के पर्यटन को एक नई और बड़ी पहचान मिलेगी। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद आने वाले दिनों में यहां विदेशी पर्यटकों की संख्या में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है। स्वर्ण नगरी अपने पारंपरिक अंदाज 'पधारो म्हारे देस' के साथ इस खास विदेशी मेहमान के भव्य स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। ट्रंप के एक और दामाद आ चुके हैं जैसलमेर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर नवंबर 2018 में जैसलमेर में एक हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने आए थे। वह डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प के पति हैं। जारेड कुशनर (डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद और तत्कालीन वरिष्ठ व्हाइट हाउस सलाहकार) 22 से 25 नवंबर, 2018 को जैसलमेर रहे थे। वे सम रोड स्थित होटल सूर्यगढ़ में उद्योगपति संजय हिंदुजा की पत्नी अनु हिंदुजा के भाई नितिन संपाल की हाई-प्रोफाइल शादी में शामिल होने जैसलमेर आए थे। जारेड कुशनर की सुरक्षा के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) के एजेंट्स कई दिन पहले ही जैसलमेर पहुंच गए थे। स्थानीय राजस्थान पुलिस और सीक्रेट सर्विस ने मिलकर होटल सूर्यगढ़ को एक किले में तब्दील कर दिया था।

डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका को मारने की थी प्लानिंग? ईरानी गार्ड्स पर बड़ा आरोप

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है. ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) से ट्रेनिंग पाए एक खतरनाक आतंकवादी ने इवांका ट्रंप की जान लेने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था।'द पोस्ट' अखबार को मिली जानकारी के मुताबिक, ये आतंकी छह साल पहले अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए अपने गुरु और ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था।  सुरक्षा एजेंसियों ने इवांका ट्रंप की हत्या का प्लान बना रहे आतंकी को पकड़ लिया है. उसकी पहचान 32 साल के मोहम्मद बाकर साद दाऊद अल-सादी के तौर पर हुई है. वो इराकी नागरिक बताया जा रहा है।  कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था आतंकी दरअसल 6 साल पहले बगदाद में डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिका ने एक बड़े ऑपरेशन में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था. अल-सादी इस हमले को अपने गुरु की मौत मानता था और तभी से ट्रंप परिवार को तबाह करने की फिराक में था।  आरोपी अल-सादी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार, खासकर उनकी बेटी इवांका ट्रंप को जान से मारने की कसम खाई थी. जांच के दौरान सुरक्षा बलों को अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट भी बरामद हुआ है. वो काफी समय से उनके घर की रेकी कर रहा था।  ‘हमें इवांका को मारना होगा’— मिला आलीशान घर का ब्लूप्रिंट जांच एजेंसियों को आरोपी अल-सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के आलीशान घर का पूरा ब्लूप्रिंट बरामद हुआ है, जिससे साफ है कि वह लंबे समय से रेकी कर रहा था। वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने बताया कि सुलेमानी की मौत के बाद अल-सादी अक्सर कहता था, “हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा और ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक करना होगा, जैसे उसने हमारे कमांडर को तबाह किया।” फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां आतंकी से पूछताछ कर रही हैं। सोशल मीडिया पर दी थी खुली धमकी इवांका ट्रंप और उनके पति जेरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित 24 मिलियन डॉलर के घर की तस्वीरें और नक्शे इस आतंकी ने सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए थे। आतंकी ने सोशल मीडिया (X और स्नैपचैट) पर अरबी भाषा में लिखा था, 'मैं अमेरिकियों से कहता हूं, इस तस्वीर को देखो और जान लो कि न तो तुम्हारे महल और न ही सीक्रेट सर्विस तुम्हारी रक्षा कर पाएगी। हम अभी निगरानी और विश्लेषण के चरण में हैं। हमारा बदला सिर्फ समय की बात है।' अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के अनुसार, वह अक्सर स्नैपचैट पर साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भेजकर अपने टारगेट को डराता था। अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice – DoJ) के अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, अल-सादी कोई आम अपराधी नहीं बल्कि यूरोप और अमेरिका में हुए 18 आतंकी हमलों और नाकाम कोशिशों का मुख्य साजिशकर्ता है। उस पर मार्च में एम्स्टर्डम में 'बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन' पर फायरबम फेंकने, अप्रैल में लंदन में दो यहूदी नागरिकों पर चाकू से हमला करने और मार्च में ही टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी कराने के गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा वह बेल्जियम के लीज में एक सिनागॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल) पर बमबारी और रॉटरडैम में आगजनी की साजिश में भी शामिल रहा है। तुर्की में हुआ गिरफ्तार, सरकारी पासपोर्ट ने चौंकाया सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि जब अल-सादी को 15 मई को तुर्की में गिरफ्तार किया गया, तो उसके पास से इराक का 'सर्विस पासपोर्ट' (Service Passport) मिला। अल-सादी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक दौरों के नाम पर एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था, जिसकी आड़ में वह दुनिया भर में घूमकर आतंकी नेटवर्क और स्लीपर सेल्स तैयार करता था। फिलहाल, अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) के निर्देश पर आरोपी अल-सादी को ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में कड़ी सुरक्षा के बीच एकांत कारावास (Solitary Confinement) में रखा गया है और आगे की पूछताछ जारी है। 'हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा' वाशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची एंतिफाध कनबर ने इस आतंकी के इरादों के बारे में एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद, अल-सादी लोगों से कहता फिर रहा था कि हमें इवांका ट्रंप को मारना होगा. वो कहता था कि हमें ट्रंप के पूरे घर को उसी तरह जलाकर खाक कर देना चाहिए, जिस तरह उसने हमारे घर (कमांडर सुलेमानी) को तबाह किया था। 

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, ट्रंप बोले,शांति समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम होंगे

अमेरिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर शांति समझौता जल्द नहीं हुआ तो तेहरान के लिए बहुत बुरा समय आने वाला है। फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर को दिए गए टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान को समझौते में दिलचस्पी रखनी चाहिए। उनका बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत चल रही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में कहा कि ट्रंप प्रशासन से संदेश आए हैं जिसमें बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई गई है, लेकिन अमेरिका पर गहरे अविश्वास की वजह से प्रक्रिया धीमी हो रही है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बावजूद ईरान ने अमेरिका पर दो बार हमला करने का आरोप लगाया है, खासकर परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी पुरानी वार्ताओं के दौरान। अराघची ने वाशिंगटन के विरोधाभासी संकेतों को बातचीत में बाधा बताया। उन्होंने चीन जैसे देशों के कूटनीतिक समर्थन का स्वागत किया और क्षेत्रीय शांति के लिए भारत की बड़ी भूमिका की मांग की। वहीं, ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने कहा कि अमेरिका को ईरान के 14 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करना चाहिए, नहीं तो उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ईरानी प्रस्ताव को खारिज करते हुए युद्धविराम को जीवन रक्ष' पर बताया था। इस बीच, मध्य पूर्व में तनाव जारी है। इजरायल ने हाल ही में विस्तारित युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। लेबनानी मीडिया के अनुसार, 50 किलोमीटर से ज्यादा दूर के दो दर्जन से अधिक गांवों पर हमले हुए। इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बताया और कई गांवों के लिए निकासी चेतावनी जारी की। इन हमलों से सैकड़ों नागरिक बेघर हो गए और सिदोन व बेरूत की ओर पलायन शुरू हो गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने युद्धविराम के विस्तार का स्वागत किया और सभी पक्षों से इसे पूरी तरह मानने की अपील की। युद्धविराम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था और शुक्रवार को 45 दिनों के लिए बढ़ाया गया, लेकिन इसका उल्लंघन बार-बार हो रहा है। लेबनान के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक 2900 से ज्यादा लोग मारे गए, जिनमें युद्धविराम के बाद 400 से अधिक शामिल हैं। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमले जारी रखे हैं। ईरान-अमेरिका वार्ता की सफलता न केवल क्षेत्रीय स्थिरता बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी अहम है। दोनों पक्षों को अविश्वास दूर कर ठोस कदम उठाने होंगे, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है।

अमेरिका-चीन रिश्तों पर ट्रंप का बड़ा बयान,शी जिनपिंग से बातचीत और उपलब्धियों का दावा

 नई दिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपनी बीजिंग यात्रा के आखिरी दिन यह दावा किया कि चीनी नेता शी चिनफिंग ने उन्हें कई शानदार सफलताओं पर बधाई दी है। ट्रंप ने कहा कि जब चिनफिंग ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को शायद एक पतनशील राष्ट्र बताया, तो उनका यह इशारा ट्रंप से पहले की जो बाइडन सरकार की तरफ था। यह स्पष्ट नहीं था कि ट्रंप चिनफिंग की किसी बंद कमरे में हुई बातचीत का हवाला दे रहे थे या उनके थ्यूसीडाइड्स ट्रैप वाले बयान का। यात्रा के पहले दिन शी चिनफिंग ने कहा था कि अमेरिका-चीन संबंधों को स्थिर करना सिर्फ दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। थ्यूसीडाइड्स ट्रैप का जिक्र हालांकि, शी चिनफिंग ने सार्वजनिक तौर पर पतनशील राष्ट्र शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया था कि क्या दोनों महाशक्तियां थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बच सकती हैं। यह एक ऐसा राजनीतिक सिद्धांत है जो बताता है कि एक उभरती हुई शक्ति और पहले से स्थापित महाशक्ति के बीच युद्ध होना तय होता है। सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबी पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पतन के बारे में शी चिनफिंग का आकलन 100% सही था। ट्रंप के अनुसार, बाइडन प्रशासन की इमिग्रेशन, जेंडर इक्वेलिटी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण देश को अपार नुकसान उठाना पड़ा है। ट्रंप ने लिखा, "जब राष्ट्रपति शी ने बहुत ही शालीनता से अमेरिका को एक पतनशील राष्ट्र कहा, तो वह स्लीपी जो बाइडन और बाइडन प्रशासन के उन चार सालों के दौरान हुए भयानक नुकसान का जिक्र कर रहे थे। इस मामले में वह पूरी तरह सही थे।" उन्होंने आगे कहा कि खुली सीमाओं, भारी टैक्स, हर किसी के लिए ट्रांसजेंडर नीतियों, महिलाओं के खेलों में पुरुषों की भागीदारी, विविधता, समानता और समावेश, खराब व्यापार समझौतों और बढ़ते अपराध के कारण हमारे देश को बहुत नुकसान हुआ। ट्रंप ने गिनाईं अपनी उपलब्धियां ईरान और ताइवान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारी मतभेदों के बावजूद अमेरिकी नेता ने दावा किया कि दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच संबंध अच्छे हैं और लगातार बेहतर हो रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल के 16 शानदार महीनों के दौरान अमेरिका ने अविश्वसनीय प्रगति की है। उन्होंने शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर, अपनी कथित सैन्य जीत, मजबूत जॉब मार्केट और निवेश के नए वादों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका के पुनरुत्थान का संकेत बताया। ट्रंप ने लिखा कि राष्ट्रपति शी का इशारा अमेरिका की उस अविश्वसनीय प्रगति की ओर नहीं था जो ट्रंप प्रशासन के 16 शानदार महीनों में दुनिया ने देखी है। उन्होंने वेनेजुएला के साथ अच्छे संबंधों, ईरान के सैन्य पतन और अमेरिका में बाहरी लोगों द्वारा 18 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड निवेश का भी जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि शी चिनफिंग ने इतने कम समय में मिली इन शानदार सफलताओं के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि दो साल पहले अमेरिका वास्तव में पतन की ओर था, लेकिन अब यह दुनिया का सबसे हॉट देश है। क्या है जमीनी हकीकत? हालांकि, अमेरिका-चीन संबंधों को लेकर ट्रंप का यह सकारात्मक रवैया दोनों देशों के बीच मौजूद कई कड़वी सच्चाइयों से मेल नहीं खाता है। ईरान में चल रहे संघर्ष को सुलझाने में अमेरिका ने चीन से अधिक भागीदारी की अपील की है, लेकिन बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर इसमें बहुत कम दिलचस्पी दिखाई है। भले ही ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के सीन हैनिटी को दिए इंटरव्यू में दावा किया हो कि शी चिनफिंग ने मदद की पेशकश की थी। इसके अलावा, वाइट हाउस का मानना है कि मेक्सिको में जाने वाले चीनी रसायनों को रोकने के लिए चीन को अभी और कदम उठाने चाहिए, जिनका इस्तेमाल अवैध फेंटानिल ड्रग बनाने में होता है। इस ड्रग्स की वजह से अमेरिका के कई समुदाय बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

ईरान-पाकिस्तान वार्ता के बीच अब्बास अराघची का दोबारा इस्लामाबाद दौरा तय

नई दिल्ली अमेरिका के साथ वार्ता की उम्मीदों पर पानी फिरने के बाद ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान से रवाना हो गए थे। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक ईरान विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान का दौरा करेंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी की खबर। खबर में कहा गया है कि अराघची ओमान और रूस की यात्रा के बाद पाकिस्तान लौटेंगे। खबर के अनुसार वह संभवत: रविवार को इस्लामाबाद लौटकर उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे जो युद्ध खत्म करने से संबंधित विषयों पर विचार विमर्श के लिए तेहरान गया था। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब वह अपनी टीम पाकिस्तान नहीं भेजेंगे। वह फोन पर ईरान से वार्ता करने को तैयार हैं। ईरानी राष्ट्रपति से शहबाज शरीफ ने की बात पाकिस्तान पहुंचने के बाद ईरानी विदेश मंत्री पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से मिले थे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियां से फोन पर बात की है। शनिवार को उन्होंने फोन किया और कहा कि वह क्षेत्र में शांति के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। दोनों के बीच करीब 50 मिनट तक वार्ता चली। ट्रंप बोले- खारिज कर दिया ईरान का प्रस्ताव इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा से वाशिंगटन आने के लिए एयर फोर्स वन विमान में सवार होने से पहले कहा, "उन्होंने हमें एक प्रस्ताव भेजा, जो बेहतर हो सकता था। दिलचस्प बात यह है कि जब मैंने इसे खारिज कर दिया तो 10 मिनट के अंदर हमें दूसरा प्रस्ताव मिला, जो काफी बेहतर है।' क्यों रद्द कर दी वार्ता? राष्ट्रपति ने यह नहीं बताया कि ताजा प्रस्ताव में क्या है। उन्होंने बस यही कहा कि ईरान ने काफी पेशकश की हैं। ट्रंप ने हालांकि कहा कि उनकी एक शर्त यह है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ नए दौर की वार्ता इसलिए रद्द कर दी क्योंकि इसके लिए बहुत सफर करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा उनके वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की मुलाकात "देश के नेता से नहीं होने वाली थी।' खुली है फोनलाइन ट्रंप ने कहा कि अमेरिका टेलीफोन के जरिये समझौता करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "वे (ईरान) जब चाहें, हमें कॉल कर सकते हैं।" डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि सब कुछ उनके नियंत्रण में है। बता दें कि इस्लामाबाद में वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने ईरान के लिए नाकेबंदी कर दी। जब उसने नाकेबंदी नहीं हटाई तो ईरान ने एक बार फिर से होर्मुज को बंद कर दिया है जिससे पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा गया है।

होर्मुज प्रतिबंध को लेकर तनाव बढ़ा, डोनाल्ड ट्रंप बोले—ईरान की ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान अमेरिका और दुनिया को ब्लैकमैल नहीं कर सकता। बता दें, शुक्रवार को लेबनान में हुए सीजफायर का स्वागत करते हुए ईरान ने होर्मुज पर लगे प्रतिंबध को हटा दिया था। हालांकि, जब ट्रंप होर्मुज के पास लगे अमेरिकी ब्लाकेड को हटाने से इनकार कर दिया, तो शनिवार को ईरान ने फिर से होर्मुज के दरवाजे बंद कर दिए। होर्मुज पर बदलते हालात पर ट्रंप ने शनिवार को ओवेल ऑफिस में मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "हम उनसे बात कर रहे हैं। वे स्ट्रेट को फिर से बंद करना चाहते हैं। जैसा कि वे वर्षों से करते आ रहे हैं और वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते।" इससे पहले ईरानी सेना की कमांड ने एक होर्मुज पर अमेरिकी कमांड को वादाखिलाफी बताया। ईरान की तरफ से कहा गया कि ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगाए गए अमेरिकी ब्लाकेड को न हटाकर अमेरिका ने अपना वादा तोड़ा है। बयान में आगे कहा गया, "जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति सख्त नियंत्रण में रहेगी।"

नाकेबंदी की तरफ आए तो कर देंगे तबाह, ड्रग्स तस्करों जैसा अंजाम भुगतने की डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी

वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फिर से ईरान को चेतावनी दी। ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज में अगर कोई भी ईरानी अमेरिकी नेवी नाकेबंदी की तरफ आया तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। बता दें कि ईरान के साथ पाकिस्तान में वार्ता विफल होने के बाद से ही ट्रंप भड़के हुए हैं। वह लगातार ईरान को चेतावनी दे रहे हैं। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि ईरान की नेवी को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि ईरानी नेवी समुद्र की तली में पड़ी है। उनके पास 158 जहाज वहां पर हैं। हम इन्हें मार नहीं पाए हैं। यह लोग इसे फास्ट अटैक शिप्स कहते हैं, लेकिन हम लोग इसे बड़ा खतरा नहीं मानते। गौरतलब है कि अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे या ईरान के स्थानीय समयानुसार शाम साढ़े पांच बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। इसमें कहा गया कि ‘यूएस सेंट्रल कमांड' (सेंटकॉम) ने कहाकि यह नाकेबंदी सभी देशों के उन पोतों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी’ जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। सेंटकॉम ने कहाकि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की तैयारी, अमेरिका ने खाली किए अपने मिसाइल भंडार, नर्क का द्वार खुलने की चेतावनी

वॉशिंगटन  ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के अगले चरण मे JASSM-ER क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन मिसाइलों की युद्धक्षेत्र में तैनाती चल रही है। इन मिसाइलों को उन भंडारों से निकाला जा रहा है जिन्हें दूसरे क्षेत्रों के लिए रखे गए थे। इन मिसाइलों की तैनाती उस वक्त हो रही है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और युद्धविराम पर सहमति नहीं बनने पर 'पाषाण युग' में पहुंचाने की धमकी दी है। ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका को 'नर्क का दरवाजा' खोलने की धमकी दी है। इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि प्रशांत क्षेत्र के भंडारों से 1.5 मिलियन डॉलर की इस मिसाइल को निकालने का आदेश मार्च के आखिर में जारी किया गया था। उस व्यक्ति ने बताया कि अमेरिका के अन्य ठिकानों (जिनमें मुख्य अमेरिकी भूभाग भी शामिल है) पर मौजूद मिसाइलों को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के ठिकानों या UK के फेयरफोर्ड में भेजा जाएगा। संवेदनशील जानकारियों पर चर्चा करने के लिए उस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान के खिलाफ अमेरिका की सबसे घातक मिसाइल हालांकि अमेरिका के सामने दिक्कत ये है कि भंडार से इन मिसाइलों के निकाले जाने के बाद युद्ध से पहले के 2300 मिसाइलों के भंडार में से बाकी दुनिया के लिए सिर्फ 425 JASSM-ER मिसाइलें ही उपलब्ध रह जाएंगी। यह संख्या लगभग 17 B-1B बमवर्षक विमानों के एक ही मिशन के लिए काफी होगी। इसके अलावा लगभग 75 अन्य मिसाइलें क्षतिग्रस्त होने या तकनीकी खराबी के कारण "इस्तेमाल के लायक नहीं" हैं। JASSM-ER, जिसका पूरा नाम 'जॉइंट एयर-टू-सरफेस मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज' है उसकी रेंज 600 किलोमीटर से ज्यादा है और इस मिसाइल की क्षमता ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र में तबाही मचाने की है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन की हवाई सुरक्षा से बचते हुए सुरक्षित दूरी से ही अपने लक्ष्यों को भेद सके। हालांकि इसका मतलब ये भी हो सकता है कि जिस तरह से ईरान ने अब अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मारना शुरू किया है उसे देखते हुए शायद अब ईरान के एयर डिफेंस क्षेत्र में आए बगैर उसके ठिकानों पर हमला करना हो सकता है। दो तिहाई हिस्से का ईरान युद्ध में होगा इस्तेमाल उस व्यक्ति ने ये भी बताया कि कम दूरी वाली JASSM मिसाइल के साथ-साथ जिसकी मारक क्षमता लगभग 250 मील है, अमेरिका के लगभग दो-तिहाई जखीरे को ईरान युद्ध के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। लेकिन अमेरिका और इजरायल के मिसाइल भंडार में कमी आने की कई रिपोर्ट्स आई हैं। अमेरिका में मिसाइल इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के मारक हथियारों की आपूर्ति एक अहम मुद्दा बनी हुई है। इस्तेमाल हो चुके हथियारों की भरपाई करने में मौजूदा उत्पादन दर के हिसाब से कई साल लग जाएंगे। अमेरिका अगर हमलों के लिए JASSM-ER जैसे लंबी दूरी के हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है, तो इससे उसके सैनिकों को होने वाला खतरा तो कम हो जाता है लेकिन चीन जैसे अधिक सक्षम प्रतिद्वंद्वियों के लिए रखे गए हथियारों के जखीरे में कमी आ जाती है। ऐसी स्थिति में ताइवान पर जब चीन हमला करेगा तो अमेरिका के पास गाल बजाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रहेगा।