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अचानक डाउन हुआ Google! भारत में लाखों यूजर्स परेशान, सर्च पर दिखा ‘Server Error’

नई दिल्ली  भारत में आज हजारों यूजर्स के लिए Google डाउन होने की खबर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस पॉपुलर सर्च इंजन को एक्सेस न कर पाने की शिकायतों की बाढ़ आ गई है। वहीं, आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector पर भी भारतीय समयानुसार सुबह लगभग 10:23 बजे 3,300 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं हैं। Downdetector पर लगभग 57% शिकायतें सर्च में आ रही समस्या से जुड़ी हुई थीं, जबकि 28% यूजर्स ने बताया कि कंटेंट ठीक से लोड नहीं हो रहा था। 11% अन्य यूजर्स ने वेबसाइट में ही दिक्कतें बताईं हैं। क्या अभी काम कर रहा है सर्च इंजन? वहीं, नेटिजन्स ने Google एक्सेस करने की कोशिश करते वक्त आए एरर मैसेज को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है। ऐसा लग रहा है कि रिक्वेस्ट प्रोसेस करते टाइम कोई इंटरनल सर्वर एरर आ गया है। शुरुआती आउटेज के बाद से Downdetector पर दर्ज शिकायतों की संख्या में तेजी से गिरावट भी आई है, जिससे पता चलता है कि सर्च दिग्गज एक बार फिर से अच्छे से वर्क कर रहा है। Google आउटेज पर यूजर्स की प्रतिक्रिया इसी बीच Google आउटेज पर एक यूजर ने पोस्ट करते हुए लिखा कि मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मैं यह कह रहा हूं, लेकिन Google.com सच में डाउन हो गया है। मुझे याद नहीं है कि ऐसा आखिरी बार कब हुआ था। ऐसे केस लगातार बढ़ रहे हैं और शायद इसका कारण ‘वाइब कोडिंग’ हो सकता है? साथ ही इस मामले पर एक अन्य यूजर ने लिखा यार, Google का डाउन होना बहुत ही दुर्लभ है। अब तो लग रहा है कि कुछ बड़ा होने हो सकता है।  

Gold रिकॉर्ड स्तर पर, शेयर बाजार क्रैश… PM मोदी ने पेट्रोल-डीजल को लेकर कही बड़ी बात

मुंबई शेयर बाजार में मंगलवार को भी तेज गिरावट देखने को मिली है. मार्केट के दोनों इंडेक्स सोमवार को क्रैश होने के बाद सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भी धड़ाम नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा की गिरावट लेकर कारोबार करता दिखा, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी 160 अंक से ज्यादा फिसलकर ट्रेड कर रहा था. सबसे ज्यादा गिरावट Infosys, Tech Mahindra, TCS समेत अन्य टेक कंपनियों के शेयरों में देखने को मिली। मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल का सीमित इस्तेमाल करने की अपील के बाद लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में डर देखने को मिला. PM Modi ने 24 घंटे में अपनी इस अपील को दोहराया भी। बिखरते चले गए सेंसेक्स-निफ्टी कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,015 के लेवल से तेज गिरावट लेकर 75,688 के लेवल पर खुला और फिर कुछ ही देर में इसकी गिरावट और तेज होती चली गई. महज 5 मिनट के कारोबार के दौरान ही BSE Sensex 723 अंक से ज्यादा टूटकर 75,291 के लेवल पर लुढ़क गया। न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि NSE Nifty भी रेड जोन में खुलने के साथ देखते ही देखते बिखर गया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,815 की तुलना में गिरकर 23,722 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 23,633 तक फिसल गया। IT कंपनियों के शेयर क्रैश शेयर मार्केट में तेज गिरावट के बीच सबसे ज्यादा नुकसान में आईटी कंपनियां नजर आईं. बीएसई लार्जकैप पर नजर डालें, तो इसमें शामिल TCS Share (3.61%), Infosys Share (3.30%), Tech Mahindra Share (2.80%), HCL Tech Share (2.30%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. इसके अलावा अन्य गिरावट वाले स्टॉक्स पर नजर डालें, तो मिडकैप में शामिल UPL Share (4.10%), Hindustan petroleum Share (3.60%), Coforge Share (3%) गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। इस डर का PM Modi कनेक्शन! शेयर बाजार में लगातार बड़ी गिरावट आने के पीछे के कारणों की बात करें, तो सबसे ज्यादा खौफ पीएम मोदी द्वारा रविवार को की गई अपील का माना जा सकता है, जिसमें उन्होंने देश के लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने के लिए कहा था. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट युद्ध और होर्मुज टेंशन का जिक्र करते हुए पेट्रोल-डीजल की सेविंग करने का आग्रह किया था। PM Narendra Modi ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि हमारे पड़ोस में जंग चल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें। सिर्फ यही एक कारण नहीं है Stock Market Crash होने का, बल्कि अमेरिका और ईरान में तनातनी के चलते होर्मुज स्ट्रेट पर टेंशन बरकरार है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में दिख रहा है. Brent Crude Oil Price 105 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है और महंगाई के जोखिम ने शेयर बाजार पर दबाव बनाया है।

QR कोड अनिवार्य! Google ने वेबसाइट एक्सेस में किया नया नियम लागू

नई दिल्ली इंटरनेट इस्तेमाल करते समय आपने कई बार “I’m Not a Robot” वाला Captcha जरूर देखा होगा। यह सिस्टम वेबसाइट्स को बॉट्स और फर्जी ट्रैफिक से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब Google इस पुराने सिस्टम को बदलने की तैयारी में है। गूगल एक नया QR Code बेस्ड ह्यूमन वेरिफिकेशन सिस्टम टेस्ट कर रही है, जिसमें यूजर्स को वेबसाइट इस्तेमाल करने से पहले अपने फोन को लिंक करना पड़ सकता है। इस नए सिस्टम में यूजर को वेबसाइट पर दिख रहे QR Code को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए यह पुष्टि की जाएगी कि वेबसाइट इस्तेमाल करने वाला इंसान है या कोई बॉट। आज के समय में AI और ऑटोमेटेड बॉट्स पहले से ज्यादा स्मार्ट हो चुके हैं। यही वजह है कि Google अब नया तरीका तलाश रहा है जिससे असली यूजर्स और बॉट्स के बीच फर्क करना आसान हो सके। फिलहाल यह फीचर शुरुआती चरण में बताया जा रहा है और Google ने आधिकारिक तौर पर इसकी पूरी जानकारी शेयर नहीं की है। आने वाले समय में कंपनी इसे कुछ वेबसाइट्स और सेवाओं पर टेस्ट कर सकती है। अगर यह फीचर सफल रहता है, तो इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका आने वाले वर्षों में काफी बदल सकता है। Google का नया QR Code Verification सिस्टम गूगल ऐसा सिस्टम विकसित कर रहा है जिसमें वेबसाइट खोलने पर यूजर को QR Code दिखाई देगा। यूजर को यह QR Code अपने स्मार्टफोन से स्कैन करना होगा। इसके बाद फोन के जरिए वेबसाइट को यह सिग्नल मिलेगा कि सामने असली इंसान है, कोई ऑटोमेटेड बॉट नहीं। यह सिस्टम मौजूदा Captcha की जगह ले सकता है। अभी ज्यादातर वेबसाइट्स पर तस्वीर पहचानना, ट्रैफिक लाइट चुनना या टेक्स्ट टाइप करना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम में यह प्रक्रिया काफी अलग हो सकती है। Google क्यों बदलना चाहता है Google Captcha सिस्टम गूगल लंबे समय से reCAPTCHA सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआत में यह काफी असरदार माना जाता था, लेकिन अब AI तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि कई बॉट्स Captcha टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं। गूगल का मानना है कि फोन लिंक्ड वेरिफिकेशन ज्यादा सुरक्षित हो सकता है क्योंकि इसमें असली डिवाइस और यूजर की पहचान को ट्रैक करना आसान होगा। इससे फर्जी अकाउंट, स्पैम और बॉट एक्टिविटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे काम करेगा यह नया फीचर इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक यूजर जब किसी वेबसाइट पर जाएगा तो वहां QR Code दिखाई देगा। इसके बाद यूजर अपने फोन से QR Code स्कैन करेगा। स्कैन करने के बाद फोन एक तरह का डिजिटल सिग्नल वेबसाइट को भेजेगा, जिससे यह पुष्टि होगी कि सामने असली यूजर मौजूद है। प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल Google के इस नए सिस्टम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा प्राइवेसी पर हो रही है। कई लोगों का कहना है कि अगर हर वेबसाइट के साथ फोन लिंक किया जाएगा, तो यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ज्यादा आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।

दुनिया की लग्जरी का जलवा: लेंबॉर्गिनी फेनोमेनो रोडस्टर, 7 सेकेंड में 200 किमी/घंटा, लिमिटेड 15 यूनिट

मुंबई  इटली की दिग्गज सुपरकार निर्माता कंपनी लेंबॉर्गिनी ने अपनी नई और बेहद खास सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर से पर्दा उठा दिया है। यह कार केवल तेज रफ्तार का ही प्रतीक नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक, आक्रामक डिजाइन और सीमित उत्पादन के कारण ऑटोमोबाइल दुनिया की सबसे खास कारों में गिना जा रहा है। कंपनी इस सुपरकार की दुनिया भर में केवल 15 इकाइयां ही तैयार करेगी, जिससे इसकी विशिष्टता और भी बढ़ गई है। लेंबॉर्गिनी लंबे समय से ऐसी कारें बनाने के लिए जानी जाती है जो केवल वाहन नहीं बल्कि प्रदर्शन, तकनीक और विलासिता का प्रतीक होती हैं। फेनोमेनो रोडस्टर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखाई देती है। यह कार महज 6.8 सेकेंड में 0 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि इसकी अधिकतम गति 340 किलोमीटर प्रति घंटा से भी ज्यादा बताई जा रही है। बेहद आक्रामक और आकर्षक डिजाइन नई फेनोमेनो रोडस्टर का डिजाइन पहली नजर में ही लोगों को आकर्षित कर देता है। कंपनी ने इसे ‘ब्लू सेफियस’ रंग में पेश किया है, जिसमें लाल रंग के विशेष एक्सेंट दिए गए हैं। यह रंग संयोजन लेंबॉर्गिनी की ऐतिहासिक कारों और इटली के बोलोग्ना शहर को सम्मान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कार का अगला हिस्सा बेहद आक्रामक दिखाई देता है। इसमें तीखे कट्स और धारदार रेखाओं का उपयोग किया गया है, जो इसे भविष्य की सुपरकार जैसा रूप देते हैं। आकर्षक एलईडी हेडलाइट्स, चौड़े एयर इनटेक और षट्कोणीय डिजाइन एलिमेंट इसकी स्पोर्टी पहचान को और मजबूत बनाते हैं। कंपनी का दावा है कि इस कार को केवल खूबसूरत बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि उच्च गति पर बेहतर संतुलन और दबाव नियंत्रण के लिए एयरोडायनामिक तकनीक का भी विशेष इस्तेमाल किया गया है। इसमें नया फ्लैट विंडशील्ड दिया गया है, जिसके ऊपर लगा स्पॉइलर हवा को केबिन से हटाकर इंजन की ओर मोड़ देता है। इससे इंजन को ठंडा रखने में मदद मिलती है। उच्च गति पर भी शानदार संतुलन फेनोमेनो रोडस्टर के साइड प्रोफाइल में आकर्षक रेखाएं और बड़े एयर इनटेक दिए गए हैं। पीछे की ओर इसका लंबा डिजाइन प्रसिद्ध एसेंजा एससीवी12 की याद दिलाता है। इस सुपरकार में खास तौर पर विकसित किए गए ब्रिजस्टोन पोटेंजा स्पोर्ट सेमी-स्लिक टायर लगाए गए हैं। आगे की तरफ 21 इंच और पीछे 22 इंच के बड़े पहिए दिए गए हैं, जो सड़क पर बेहतर पकड़ सुनिश्चित करते हैं। कार के पिछले हिस्से में वर्टिकल लाल पट्टी, षट्कोणीय एग्जॉस्ट और विशेष एयरो डिफ्यूजर दिया गया है। इसके अलावा इसमें एक्टिव विंग भी लगाया गया है, जो तेज रफ्तार के दौरान अतिरिक्त डाउनफोर्स और स्थिरता प्रदान करता है। यही वजह है कि इतनी तेज गति पर भी यह सुपरकार संतुलन बनाए रखने में सक्षम है। विमान जैसे केबिन का अनुभव फेनोमेनो रोडस्टर का इंटीरियर भी उतना ही शानदार है जितना इसका बाहरी डिजाइन। कंपनी ने इसमें “पायलट जैसा अनुभव” डिजाइन थीम का इस्तेमाल किया है। इसका केबिन लड़ाकू विमान से प्रेरित दिखाई देता है। इसमें विशेष स्विचगियर, कार्बन फाइबर ट्रिम और स्पोर्टी बकेट सीटें दी गई हैं। डैशबोर्ड में त्रिआयामी प्रिंट तकनीक से तैयार एयर वेंट लगाए गए हैं। सीटों पर लाल रंग की कॉन्ट्रास्ट सिलाई की गई है, जो केबिन को और प्रीमियम बनाती है। तकनीक के मामले में भी यह सुपरकार बेहद आधुनिक है। इसमें तीन डिजिटल डिस्प्ले दिए गए हैं, जिनमें चालक के लिए 12.3 इंच का डिजिटल डिस्प्ले, 8.4 इंच का टचस्क्रीन और सहयात्री के लिए अलग स्क्रीन शामिल है। 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत लेंबॉर्गिनी ने इस सुपरकार में 6.5 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड वी12 इंजन दिया है। इसके साथ तीन इलेक्ट्रिक मोटर भी जोड़ी गई हैं। यह पूरा सिस्टम मिलकर 1080 हॉर्सपावर की जबरदस्त ताकत उत्पन्न करता है। सुपरकार में 8-स्पीड ड्यूल क्लच गियरबॉक्स दिया गया है, जो बेहद तेज और स्मूद गियर बदलाव सुनिश्चित करता है। इसमें 7 किलोवाट घंटे की बैटरी भी दी गई है, जो इलेक्ट्रिक मोटरों को ऊर्जा प्रदान करती है। इतनी ताकतवर प्रणाली के बावजूद कार का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली है। यह सुपरकार केवल 2.4 सेकेंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने में इसे सिर्फ 6.8 सेकेंड का समय लगता है। दुनिया के चुनिंदा लोगों के लिए बनेगी यह सुपरकार फेनोमेनो रोडस्टर का सबसे खास पहलू इसकी सीमित उपलब्धता है। कंपनी केवल 15 इकाइयों का ही निर्माण करेगी। इसका मतलब यह है कि दुनिया भर में केवल चुनिंदा ग्राहकों के पास ही यह सुपरकार देखने को मिलेगी। ऑटोमोबाइल जगत में सीमित संख्या में बनने वाली कारों की मांग हमेशा बेहद अधिक रहती है और समय के साथ उनकी कीमत भी कई गुना बढ़ जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि फेनोमेनो रोडस्टर केवल एक सुपरकार नहीं बल्कि संग्रहणीय विरासत बनने जा रही है। इसकी तकनीक, प्रदर्शन और दुर्लभता इसे आने वाले वर्षों में बेहद खास बना सकती है।

बाजार में जोरदार गिरावट: सेंसेक्स 76,015, निफ्टी 360 अंक नीचे

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 23,900 के नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,312.91 अंक गिरकर 76,015.28 पर और निफ्टी 360.30  अंक टूटकर 23,815.85 पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें 1. कच्चे तेल में तेज उछाल अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने से वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ गया। इसके बाद ब्रेंट क्रूड करीब 4% उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। 2. रुपए पर दबाव तेल महंगा होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI को रुपए को संभालने के लिए बाजार में दखल देना पड़ा। 3. गोल्ड और एविएशन शेयरों में भारी गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्राएं टालने की अपील की। इसके बाद ज्वैलरी और एविएशन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। Titan Company, Kalyan Jewellers और InterGlobe Aviation जैसे शेयर दबाव में रहे। 4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बढ़ते तेल दाम, कमजोर रुपया और वैश्विक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 5. इंडिया VIX में उछाल बाजार की घबराहट मापने वाला India VIX करीब 12% बढ़कर 18.82 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता तेजी से बढ़ी है।

मार्केट क्रैश का डर: मोदी की अपील के बाद सोना-पेट्रोल की बढ़ी चिंता, शेयर बाजार में गिरावट

मुंबई  सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। बाजार खुलते ही बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए। बाजार के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिन्होंने मंदी की गाड़ी में फ्यूल भरने का काम किया है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अब कहानी सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर आए पीएम मोदी के बयान ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 1000 पॉइंट यानी 1 पर्सेंट से ज्यादा टूटकर 76,364 के लेवल पर आ गया। वहीं निफ्टी भी 1 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,896 के निचले स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 पर्सेंट तक की गिरावट देखी गई। इस गिरावट की वजह से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 473.5 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में इस कदर बिकवाली हुई कि छोटे और बड़े हर तरह के निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी बाजार के गिरने की पहली बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का विफल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है, जिससे युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिसका सीधा असर देश की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। पीएम मोदी की बचत वाली अपील का असर बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार ग्लोबल कारणों से ज्यादा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'किफायत' वाली अपील का पड़ा है। पीएम मोदी ने रविवार को भारतीयों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल कम करने और कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, पीएम की इस अपील ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है। लोगों से खर्च कम करने की बात कहने का मतलब है कि आने वाले समय में कंपनियों की कमाई और देश की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार पीएम मोदी की इस अपील का सबसे बुरा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ा है। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेनको गोल्ड और पीसी ज्वेलर जैसे शेयरों में भारी गिरावट देखी गई क्योंकि लोगों को डर है कि सोने की डिमांड कम हो जाएगी। इसके अलावा मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखा। इतना ही नहीं, पीएम द्वारा विदेशी दौरों से बचने की सलाह देने के बाद थॉमस कुक और ईजी ट्रिप प्लानर्स जैसी ट्रेवल कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। बाजार को डर है कि अगर लोग कम खर्च करेंगे, तो कॉर्पोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों के मुनाफे पर इसका सीधा असर होगा। निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 473.5 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार खुलने के कुछ ही समय में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। अब सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आ गई? इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसे देखते हुए पीएम मोदी ने भी गोल्ड और पेट्रोल-डीजल को लेकर लोगों से अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच नहीं हो रही सुलह दरअसल, निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से हालात सुधर सकते हैं। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बातचीत पूरी तरह विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और सख्त कदम उठा सकता है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है। पीएम मोदी की अपील मिडिल ईस्ट संकट से दुनियाभर में एनर्जी की कीमतें आसमान पर हैं। इससे भारत का आयात घाटा लगातार बढ़ रहा है और रुपया गिर रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल को बचाने की अपील की है। पीएम ने कहा कि हमारे पड़ोस मे जंग जल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें।

नया कारोबारी हफ्ता: विदेशी निवेश और महंगाई आंकड़ों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली  सोमवार 11 मई से शेयर बाजार का नया कारोबारी हफ्ता शुरू होगा। विश्लेषकों के अनुसार आगामी हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा (Stock Market Outlook for Next Week) अमेरिकी-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये-डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को प्रभावित करेंगी। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेगा और निवेशकों का ध्यान अमेरिका-ईरान से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगा। कच्चे तेल पर रहेगी नजर पोनमुडी ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल के दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं या तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो जोखिम वाले निवेश माध्यमों में राहत भरी तेजी देखी जा सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।’’ एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक इस सप्ताह महंगाई के आंकड़े भी आने हैं जो बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, केनरा बैंक, टाटा पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियां सप्ताह के दौरान अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी। और कौन-से फैक्टर्स रहेंगे अहम? मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बने रहेंगे और बाजार व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है। खेमका ने कहा कि भारत के अप्रैल महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ब्याज दर नीति का संकेत देंगे, जबकि अमेरिका के सीपीआई और पीपीआई आंकड़े फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती, बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। कैसा रहा पिछला हफ्ता? बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत के लाभ में रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भी भारतीय बाजारों से निकासी जारी रखी है। इस महीने अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 14,231 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। साथ ही चौथी तिमाही के नतीजों का अंतिम चरण शेयर और क्षेत्र आधारित गतिविधियों को प्रभावित करेगा।  

ADB ने घटाया भारत का GDP अनुमान, महंगाई बढ़ने की चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान युद्ध का असर दुनिया पर पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा. विदेश से भारतीय इकोनॉमी और कच्चे तेल को लेकर एक बुरी खबर आई है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB के मुताबिक, Iran War की वजह से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन का असर जारी रहेगा और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है. इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां पर महंगाई का बम फूट सकता है. इसके साथ ही एडीबी ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भी बड़ी कटौती की है. इतनी रहेगी कच्चे तेल की कीमत पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मिडिल ईस्ट संकट के उम्मीद से अधिक लंबे समय तक चला, इसके कारण सप्लाई चेन में पैदा हुआ रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि,'Crude Oil की ऊंची कीमतों की संभावना के साथ, नए आउटलुक को देखें, तो ये 2026 के लिए औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहनी चाहिए.'  अल्बर्ट के मुताबिक, भविष्य के अनुमानों के अनुसार अगले साल के लिए कीमतें पहले की तुलना में अधिक रहने का संकेत दे रही हैं.  भारत की GDP को लगेगा झटका भारत पर वेस्ट एशिया संकट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इससे देश की जीडीपी वृद्धि (India's GDP Growth) में 0.6 फीसदी की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 फीसदी पर आ जाएगी. गौरतलब है कि एशियाई विकास बैंक ने बीते अप्रैल महीने में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी पर मजबूती से बनी रहेगी, जबकि मजबूत घरेलू डिमांड के कारण अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 फीसदी हो जाएगी. पार्क ने राहत भरी बात भी कही कि इससे अगले वर्ष देश का विकास फिर से पटरी पर आ जाएगा. क्या फूटने वाला है महंगाई बम? Middle East War और Crude Oil Price के हाई बने रहने के चलते सिर्फ भारत की जीडीपी पर ही असर नहीं पड़ेगा. बल्कि देश में महंगाई का बम भी फूट सकता है. एडीडी अर्थशास्त्री ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में India Inflation में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले अनुमान 4.5 फीसदी का जताया गया था, जिसे बढ़ाते हुए 6.9 फीसदी किया गया है. यानी महंगाई दर में सीधे 2.4 फीसदी का उछाल आ सकता है. देश में महंगाई बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है. अगर चीन को हटा दिया जाए, तो इस वर्ष ग्रोथ पर पड़ने वाला यह नकारात्मक 0.6 फीसदी पूरे क्षेत्र के लिए भी लगभग एक समान है. इकोनॉमिस्ट का कहना है कि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ने से किसान कम इस्तेमाल को मजबूर होंगे, जिससे पैदावार कम होगी और साल के अंत में इसकी उपलब्धता भी कम हो जाएगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों (Food Price) पर पड़ेगा, लेकिन कितना असर पड़ेगा यह गैस आपूर्ति में व्यवधान पर निर्भर करेगा.

निफ्टी के लिए 23,500–25,000 का अहम रेंज, एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और वैश्विक राजनीतिक हलचलों के बीच शुक्रवार 8 मई को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी के कारण सेंसेक्स 516 अंक गिरकर 77,328 पर और निफ्टी 151 अंक फिसलकर 24,176 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस अस्थिरता के बावजूद आनंद राठी (Anand Rathi) के टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, बाजार अब 'Buy-on-Dips' यानी हर गिरावट पर खरीदारी के मोड में है। सोमवार 11 मई 2026 के लिए उन्होंने तीन ऐसे शेयरों को चुना है जो निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकते हैं। अगले हफ्ते के लिए बाजार का आउटलुक मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश डोंगरे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,500–23,800 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम करेगा, जबकि 24,800–25,000 की रेंज में बड़ी रुकावट (Resistance) देखी जा सकती है। अगर निफ्टी 24,800 के ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो यह जल्द ही 25,300 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 54,500–55,000 का स्तर अहम सपोर्ट है। एक्सपर्ट की टॉप 3 पिक्स (Top Picks for Monday) सोमवार के लिए गणेश डोंगरे ने इन तीन शेयरों में खरीदारी की सलाह दी है। 1- एमक्योर फार्मा (Emcure Pharmaceuticals):- खरीदें:- ₹1640 – ₹1660 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹1730 स्टॉप लॉस:- ₹1615 2- केफिन टेक (Kfin Technologies):- खरीदें:- ₹910 – ₹920 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹980 स्टॉप लॉस:- ₹890 3- मझगांव डॉक (Mazagon Dock Shipbuilders):- खरीदें:- ₹2640 – ₹2660 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹2750 स्टॉप लॉस:- ₹2580 निवेशकों के लिए जरूरी सुझाव एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत और संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे। बाजार में किसी भी बड़ी खबर से उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है, इसलिए चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करें और स्टॉप लॉस (Stop Loss) का सख्ती से पालन करें। अनुशासन के साथ निवेश करना ही मौजूदा बाजार में मुनाफे की कुंजी है।

देश की सबसे लोकप्रिय SUV: टाटा पंच ने फ्रॉन्क्स के साथ क्रेटा को पीछे छोड़ा

मुंबई  भारतीय वाहन बाजार में एसयूवी गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि ग्राहकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है। इस बार बिक्री के मोर्चे पर सबसे बड़ा धमाका टाटा पंच ने किया है। दमदार सुरक्षा, आकर्षक डिजाइन और किफायती कीमत के दम पर इस गाड़ी ने एक बार फिर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी बनने का गौरव हासिल कर लिया। दूसरी ओर मारुति की फ्रॉन्क्स ने भी ऐसा प्रदर्शन किया कि कई स्थापित मॉडलों की चिंता बढ़ गई। लंबे समय से बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाली हुंडई क्रेटा को भी इस बार पीछे रहना पड़ा।  टाटा पंच ने फिर साबित की अपनी ताकत अप्रैल 2026 के दौरान टाटा पंच की बिक्री में शानदार उछाल देखने को मिला। कंपनी ने इस अवधि में 19 हजार से ज्यादा इकाइयों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रही। बिक्री में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि छोटे आकार की लेकिन मजबूत और सुरक्षित एसयूवी को ग्राहक तेजी से पसंद कर रहे हैं। टाटा पंच की लोकप्रियता के पीछे इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, ऊंचा बैठने का अनुभव और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आसान संचालन को बड़ी वजह माना जा रहा है। कम कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलने के कारण यह मध्यम वर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनती जा रही है। मारुति फ्रॉन्क्स ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा इस बार बिक्री के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा मारुति फ्रॉन्क्स की रही। कंपनी ने अप्रैल महीने में इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की और यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। फ्रॉन्क्स की सफलता का बड़ा कारण इसका आधुनिक डिजाइन, आकर्षक लुक और बेहतर ईंधन क्षमता मानी जा रही है। युवाओं के बीच यह एसयूवी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसने कई पुराने और भरोसेमंद मॉडलों को पीछे छोड़ते हुए बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। टाटा नेक्सन की पकड़ अब भी बरकरार टाटा मोटर्स की एक और लोकप्रिय एसयूवी नेक्सन भी बिक्री के मामले में मजबूत स्थिति में रही। अप्रैल 2026 में इसकी बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह शीर्ष दो स्थानों में जगह नहीं बना सकी, लेकिन तीसरे स्थान पर रहकर इसने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। नेक्सन लंबे समय से अपनी सुरक्षा और दमदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती रही है। यही कारण है कि ग्राहकों का भरोसा इस गाड़ी पर लगातार बना हुआ है। पेट्रोल, डीजल और विद्युत विकल्पों में उपलब्ध होने के कारण यह अलग-अलग वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। हुंडई क्रेटा की रफ्तार पड़ी धीमी एक समय भारतीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी मानी जाने वाली हुंडई क्रेटा के लिए अप्रैल का महीना ज्यादा अच्छा साबित नहीं हुआ। बिक्री में गिरावट ने साफ कर दिया कि अब बाजार में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो चुका है। क्रेटा लंबे समय तक अपने प्रीमियम स्वरूप और आधुनिक सुविधाओं की वजह से ग्राहकों की पसंद बनी रही, लेकिन अब कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं देने वाले नए मॉडल इसकी चुनौती बढ़ा रहे हैं। बिक्री में आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। महिंद्रा स्कॉर्पियो की मांग में भी आई नरमी महिंद्रा की लोकप्रिय एसयूवी स्कॉर्पियो भी इस बार बिक्री के मामले में थोड़ी पीछे नजर आई। हालांकि इसकी मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अब भी स्कॉर्पियो की मजबूत पहचान बनी हुई है, लेकिन नए मॉडलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसका असर दिखाने लगी है। ब्रेजा और वेन्यू ने भी दिखाया दम मारुति ब्रेजा की बिक्री में इस बार गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यह शीर्ष गाड़ियों की सूची में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही। दूसरी ओर हुंडई वेन्यू ने शानदार वापसी करते हुए बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे साफ है कि ग्राहकों का भरोसा एक बार फिर इस गाड़ी की ओर बढ़ रहा है। वहीं किआ सेल्टोस और किआ सोनेट ने भी बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों एसयूवी की बिक्री में मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि भारतीय वाहन बाजार में अब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है। एसयूवी बाजार में लगातार बढ़ रही चुनौती अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक अब केवल बड़े नामों पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा, सुविधाएं, कीमत और ईंधन बचत जैसे पहलुओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ कंपनियां लगातार नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन सी कंपनी ग्राहकों का सबसे ज्यादा भरोसा जीतने में सफल रहती है।