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ADB ने घटाया भारत का GDP अनुमान, महंगाई बढ़ने की चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान युद्ध का असर दुनिया पर पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा. विदेश से भारतीय इकोनॉमी और कच्चे तेल को लेकर एक बुरी खबर आई है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB के मुताबिक, Iran War की वजह से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन का असर जारी रहेगा और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है. इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां पर महंगाई का बम फूट सकता है. इसके साथ ही एडीबी ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भी बड़ी कटौती की है. इतनी रहेगी कच्चे तेल की कीमत पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मिडिल ईस्ट संकट के उम्मीद से अधिक लंबे समय तक चला, इसके कारण सप्लाई चेन में पैदा हुआ रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि,'Crude Oil की ऊंची कीमतों की संभावना के साथ, नए आउटलुक को देखें, तो ये 2026 के लिए औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहनी चाहिए.'  अल्बर्ट के मुताबिक, भविष्य के अनुमानों के अनुसार अगले साल के लिए कीमतें पहले की तुलना में अधिक रहने का संकेत दे रही हैं.  भारत की GDP को लगेगा झटका भारत पर वेस्ट एशिया संकट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इससे देश की जीडीपी वृद्धि (India's GDP Growth) में 0.6 फीसदी की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 फीसदी पर आ जाएगी. गौरतलब है कि एशियाई विकास बैंक ने बीते अप्रैल महीने में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी पर मजबूती से बनी रहेगी, जबकि मजबूत घरेलू डिमांड के कारण अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 फीसदी हो जाएगी. पार्क ने राहत भरी बात भी कही कि इससे अगले वर्ष देश का विकास फिर से पटरी पर आ जाएगा. क्या फूटने वाला है महंगाई बम? Middle East War और Crude Oil Price के हाई बने रहने के चलते सिर्फ भारत की जीडीपी पर ही असर नहीं पड़ेगा. बल्कि देश में महंगाई का बम भी फूट सकता है. एडीडी अर्थशास्त्री ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में India Inflation में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले अनुमान 4.5 फीसदी का जताया गया था, जिसे बढ़ाते हुए 6.9 फीसदी किया गया है. यानी महंगाई दर में सीधे 2.4 फीसदी का उछाल आ सकता है. देश में महंगाई बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है. अगर चीन को हटा दिया जाए, तो इस वर्ष ग्रोथ पर पड़ने वाला यह नकारात्मक 0.6 फीसदी पूरे क्षेत्र के लिए भी लगभग एक समान है. इकोनॉमिस्ट का कहना है कि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ने से किसान कम इस्तेमाल को मजबूर होंगे, जिससे पैदावार कम होगी और साल के अंत में इसकी उपलब्धता भी कम हो जाएगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों (Food Price) पर पड़ेगा, लेकिन कितना असर पड़ेगा यह गैस आपूर्ति में व्यवधान पर निर्भर करेगा.

भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती, वित्त वर्ष 2026 में 7.4% विकास का अनुमान

 नई दिल्‍ली भारत की अर्थव्‍यवस्‍था तेजी से भाग रही है . 7 जनवरी को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष के 6.5% की तुलना में 7.4% की दर से बढ़ने का अनुमान है. यह उछाल वैश्विक दबाव और अमेरिकी निर्यात में रुकावट के बीच है. अर्थव्‍यवस्‍था में यह उछाल भारत के मजबूत निवेश और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है. साथ ही देश के नीतिगत बदलाव, कंजम्‍पशन और घरेलू इंफ्रा के मजबूती को भी दिखाता है.  अर्थव्‍यस्‍था में इस तेजी को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने सपोर्ट किया है, जिसने इस वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7 प्रतिशत की ग्रोथ रेट हासिल होने का अनुमान है.  इन सेक्‍टर्स में सामान्‍य ग्रोथ का अनुमान  MoSPI ने कहा कि सर्विस सेक्टर में अच्छी ग्रोथ FY 2025-26 में अनुमानित रियल GVA (ग्रॉस वैल्‍यू असेट) ग्रोथ रेट 7.3 प्रतिशत का एक प्रमुख कारण रही है. हालांकि, एग्रीकल्‍चर और संबंधित क्षेत्र और 'बिजली, गैस, पानी की सप्लाई और अन्य यूटिलिटी सेवाओं के क्षेत्रों में 31 मार्च को खत्म होने वाले मौजूदा वित्त वर्ष में सामान्य ग्रोथ रेट रहने का अनुमान है. नॉमिनल जीडीपी 8 फीसदी से ग्रो करेगी मंत्रालय ने आगे कहा कि नॉमिनल GDP या मौजूदा कीमतों पर GDP में 2025-26 के दौरान 8 प्रतिशत की ग्रोथ होने का अनुमान है. एडवांस अनुमानों के डेटा का इस्तेमाल केंद्रीय बजट तैयार करने में किया जाता है, जिसे 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है.  निवेश से मजबूत हुई ग्रोथ  आर्थिक उछाल का एक प्रमुख कारण निवेश गतिविधि थी.सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) वित्त वर्ष 2026 में 7.8% बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.1% से अधिक है. यह व्यवसायों द्वारा बुनियादी ढांचे, मशीनरी और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर अधिक खर्च को दर्शाता है. पॉलिसी चेंज से बढ़ी मांग  विकास को गति देने में सरकारी उपायों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है . आयकर में राहत और जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने के फैसले ने  उपभोक्ता मांग को बढ़ाने में मदद की, भले ही वैश्विक परिस्थितियां अनिश्चित बनी रहीं. वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ संबंधी चुनौतियों के कारण निर्यात की संभावनाएं भले ही प्रभावित हुईं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग ने इस प्रभाव को कम करने और विकास को पटरी पर लाने में मदद की है.