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क्या आपकी भी IRCTC ID हो गई है बंद? जानें 2.5 करोड़ यूजर पर क्यों गिरी गाज

नई दिल्ली अगर आप भी ट्रेन टिकट आईआरसीटीसी के जरिए बुक करते यह खबर आपके लिए है, क्योंकि आईआरसीटीसी ने 2.5 करोड़ से ज्यादा यूजर आईडी को डीएक्टिवेट कर दिया है। रेलवे को डेटा के विश्लेषण में कुछ यूजर्स के बुकिंग पैटर्न पर शक हुआ था। इसी संदेह के आधार पर इन यूजर्स की आईडी को बंद किया गया है। सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। राज्यसभा सांसद सांसद एडी सिंह ने संसद में इस बारे में सवाल पूछा था। सिंह ने रेलवे मंत्रालय से सवाल पूछा था कि आईआरसीटीसी के करोड़ों यूजर्स की आईडी क्यों बंद की गई, टिकट बुकिंग खुलते ही टिकट कैसे गायब हो जाते हैं और इसे रोकने के लिए रेलवे क्या कदम उठा रहा है? इसके जवाब में सरकार ने जानकारी दी। मंत्रालय ने अपने जवाब में लिखा है कि,टिकट बुकिंग में हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए आईआरसीटीसी ने 2.5 करोड़ से ज्यादा यूजर आईडी बंद कर दी है। जांच में पता चला कि इन यूजर आईडी से बुकिंग करने में कुछ गड़बड़ है। 25 जुलाई को राज्यसभा में दिए गए एक उत्तर में रेल मंत्रालय ने कहा कि टिकट बुकिंग सिस्टम में हो रही गड़बड़ी और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए आईआरसीटीसी ने यह कदम उठाया है। डेटा एनालिसिस के दौरान पाया गया कि करोड़ों यूजर आईडी फर्जी या संदिग्ध जानकारियों से बनी थीं। जिसके बाद उनको डीएक्टिवेट कर दिया गया ताकि तत्काल टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाई जा सके और ईमानदार यात्रियों को नुकसान ना हो। मंत्रालय ने यह भी बताया कि, ट्रेनों में टिकटों की मांग पूरे साल एक जैसी नहीं रहती है। कुछ समय ऐसा होता है जब टिकटों की मांग बहुत ज्यादा होती है और कुछ समय ऐसा होता है जब कम होती है। जो ट्रेनें ज्यादा लोकप्रिय हैं और जो यात्रा करने में कम समय लेती हैं, उसमें टिकट जल्दी बिक जाते हैं। लेकिन दूसरी ट्रेनों में टिकट आसानी से मिल जाते हैं। यात्रियों को कन्फर्म टिकट आसानी से मिलें, टिकट बुकिंग में पारदर्शिता रहे और लोग ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन टिकट बुक करें, इसके लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं। इसके अलावा वेटिंग लिस्ट की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। अगर डिमांड बढ़ती है, तो स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जाता है या फिर मौजूदा ट्रेनों में अतिरिक्त डिब्बे जोड़े जाते हैं। साथ ही, विकल्प और अपग्रेडेशन स्कीम जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं ताकि वेटिंग वाले यात्रियों को भी कंफर्म सीट मिल सके। मंत्रालय ने जानकारी दी कि, यात्री ऑनलाइन या रेलवे के काउंटर पर जाकर टिकट बुक कर सकते हैं। आजकल करीब 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं। रेलवे के काउंटर पर भी आप डिजिटल तरीके से भी पेमेंट कर सकते हैं। 1 जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए गए हैं। यात्रियों को अब आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर आधार कार्ड से वेरीफाई करना होगा। एजेंट तत्काल टिकट बुकिंग खुलने के पहले 30 मिनट तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। कैसे चेक करें आपका आईआरसीटीसी अकाउंट एक्टिव है या नहीं?     आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट या एप पर जाएं। फिर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट खोलें या आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट एप डाउनलोड करे।     एप या वेबसाइट पर लॉगिन करे। इसके बाद  अपना यूजर आईडी और पासवर्ड  डालें। इसके बाद कैप्चा कोड भरें और साइन इन पर क्लिक करें।     अगर आपका अकाउंट एक्टिव है, तो आप आसानी से लॉगिन कर पाएंगे और डैशबोर्ड पर अपनी बुकिंग और अन्य जानकारी देख सकेंगे।     अगर अकाउंट निष्क्रिय है, तो आपको एक एरर मैसेज दिखाई देगा, जैसे आपका अकाउंट निष्क्रिय है।     अगर आपका अकाउंट बंद हुआ है, तो घबराएं नहीं। इसके बाद आप आईआरसीटीसी कस्टमर केयर से संपर्क कर सकते हैं।

हुंडई की बंपर डील: इन 3 कारों पर मिल रहा 80,000 रुपए से ज्यादा का डिस्काउंट, मौका सिर्फ जुलाई तक!

नई दिल्ली हुंडई जुलाई महीने के दौरान अपने अलग-अलग मॉडल पर बंपर डिस्काउंट दे रही है। अगर आप भी अगले कुछ दिनों में नहीं हुंडई कार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए खुशखबरी है। बता दें कि इस दौरान हुंडई के तीन कारों पर 80,000 रुपये से ज्यादा की छूट मिल रही है। इनमें हुंडई टक्सन, हुंडई वेन्यू और हुंडई ग्रैंड i10 Nios शामिल हैं। बता दें कि यह ऑफर जुलाई, 2025 के अंत तक ही वैलिड है। डिस्काउंट की अधिक जानकारी के लिए ग्राहक अपने नजदीकी डीलरशिप संपर्क कर सकते हैं। यहां जानिए डिस्काउंट की डिटेल हुंडई टक्सन के डीजल वैरिएंट पर ग्राहक जुलाई महीने के दौरान अधिकतम 1 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं। जबकि कंपनी की दूसरी सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी हुंडई वेन्यू पर 85,000 रुपये की छूट मिल रही है। इसके अलावा, हुंडई वेन्यू N-लाइन पर भी इस दौरान 85,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। जबकि कंपनी इसी दौरान हुंडई ग्रैंड i10 एनआईओएस के सीएनजी वैरिएंट पर 85,000 रुपये तक की छूट दे रही है। कार में है 6-एयरबैग की सेफ्टी अगर सबसे ज्यादा डिस्काउंट वाले कार हुंडई टक्सन की बात करें तो इसके केबिन में ग्राहकों को 10.25-इंच का टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, 10.25-इंच का ड्राइवर डिस्प्ले, कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, एक पैनोरमिक सनरूफ, डुअल जोन क्लाइमेट कंट्रोल, हीटेड और वेंटीलेटेड फ्रंट सीट्स और वायरलेस फोन चार्जिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके अलावा, सेफ्टी के लिए कार में 6-एयरबैग और 360-डिग्री कैमरा जैसे फीचर्स दिए गए हैं। हुंडई टक्सन की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 29.27 लाख रुपये से लेकर टॉप मॉडल में 36.04 लाख रुपये तक जाती है।

वैश्विक कंपनी जेबिल भारत में विनिर्माण क्षेत्र में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है: अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली, वैश्विक विनिर्माण कंपनी जेबिल का गुजरात के साणंद स्थित संयंत्र लगभग पूरा हो चुका है। यह संयंत्र देश में सिलिकॉन फोटोनिक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्माण करेगा।जेबिल के 25 से अधिक देशों में 100 से अधिक स्थानों पर 1,40,000 से अधिक कर्मचारी हैं। वैष्णव ने एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा, "जेबिल भारत में सिलिकॉन फोटोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सेवाओं के निर्माण में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर रही है।" मंत्री ने कहा, "साणंद स्थित संयंत्र लगभग पूरा हो चुका है।"जेबिल के ग्राहकों की सूची में स्वास्थ्य सेवा, पैकेजिंग, स्मार्टफोन और क्लाउड उपकरण से लेकर ऑटोमोटिव और घरेलू उपकरणों तक, हर बाजार में दुनिया के 300 सबसे बड़े ब्रांड शामिल हैं।इस बीच, दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने 31 मार्च तक दूरसंचार उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत 1,162 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। 1 अप्रैल, 2021 को शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य दूरसंचार क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। यह चालू वित्त वर्ष के अंत में समाप्त होने वाली है।इस योजना के तहत चयनित 42 कंपनियों में से 21 निर्माताओं ने अब तक सफलतापूर्वक प्रोत्साहन प्राप्त कर लिए हैं। सरकार ने इस योजना के लिए 4,115 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे, जिसका लक्ष्य अनुमानित 2.45 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री और इसके दौरान 44,000 से अधिक नए रोजगार सृजित करना था। जेबिल शीर्ष लाभार्थी के रूप में उभरा, जिसने दो वित्तीय वर्षों में 235.87 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त किया। अन्य प्रमुख प्राप्तकर्ताओं में फ्लेक्सट्रॉनिक्स (165.12 करोड़ रुपये), नोकिया (157.32 करोड़ रुपये), फॉक्सकॉन राइजिंग स्टार्स (80.33 करोड़ रुपये) और सिरमा एसजीएस (53.23 करोड़ रुपये) शामिल हैं।उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि दूरसंचार ऑपरेटरों और सरकार के दृष्टिकोण के बीच मज़बूत तालमेल ज़रूरी है। वे आत्मनिर्भरता और रोज़गार सृजन के लक्ष्यों को सही मायने में साकार करने के लिए उच्च स्थानीय मूल्य संवर्धन वाले दूरसंचार उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करने के महत्व पर ज़ोर देते हैं।  

अनिल अंबानी के ऑफिसों पर लगातार छापेमारी, ED की कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी

मुंबई रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी से जुड़े दिल्ली और मुंबई स्थित परिसरों पर पिछले 48 घंटों से ईडी की छापेमारी जारी है. प्रवर्तन निदेशालय ने 3,000 करोड़ रुपये के संदिग्ध लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों और अधिकारियों से जुड़े 35 से ज्यादा जगहों परिसरों में तलाशी अभियान शुरू किया है. गुरुवार सुबह 7 बजे से ईडी के अधिकारी अनिल अंबानी के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रहे थे. आज भी अनिल अंबानी के ऑफिस रिलायंस में छापेमारी जारी है. रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर ने एक बयान जारी कर कहा है कि ईडी की छापेमारी समूह की अन्य कंपनियों से जुड़े पुराने मामलों से संबंधित है. उन कंपनियों या जांच के दायरे में आने वाले मामलों से कोई संबंध नहीं है. ये शिकायतें RAAGA कंपनियों द्वारा सार्वजनिक संस्थानों के साथ लोन हेराफेरी, रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित हैं. RAAGA कंपनियां रिलायंस अनिल अंबानी समूह की संस्थाओं का संदर्भ देती हैं. सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय आवास बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित कई एजेंसियों ने जांच में योगदान देने वाली जानकारी साझा की है. अधिकारियों का कहना है कि लोन वितरण से ठीक पहले, यस बैंक के प्रवर्तकों से जुड़ी संस्थाओं को पैसा रिसीव हुआ था. इससे बैंक अधिकारियों और उधार लेने वाली फर्मों के बीच संभावित रिश्वतखोरी और लेन-देन की व्यवस्था के सवाल उठे हैं. ईडी अब यस बैंक के प्रवर्तकों और अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के बीच कथित सांठगांठ की जांच कर रहा है.

UPI ट्रांजैक्शन पर आए नए नियम, 1 अगस्त से ये 3 बदलाव होंगे लागू

 नई दिल्ली  1 अगस्त 2025 से UPI से जुड़े नए नियम लागू हो रहे हैं। अगर आप रोज Paytm, PhonePe, GPay या किसी और UPI ऐप से पेमेंट करते हैं, तो ये बदलाव आपके लिए जरूरी हैं। UPI सिस्टम को मैनेज करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने ये लिमिट्स इसीलिए तय की हैं ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो और ट्रांजैक्शन फेल या डिले जैसी दिक्कतें घटें। ये बदलाव जरूरी ट्रांजैक्शन्स को प्रभावित नहीं करेंगे, लेकिन बैलेंस चेक, स्टेटस रीफ्रेश जैसी चीजों पर लिमिट जरूर लगाई जा रही है। NPCI का कहना है कि इससे UPI ज्यादा स्मूद और भरोसेमंद बनेगा, खासतौर पर उस वक्त जब ज्यादा लोग एक साथ ट्रांजैक्शन करते हैं। 1 अगस्त से UPI पर क्या नई लिमिट्स लगेंगी? अगले महीने से UPI यूजर्स सिर्फ 50 बार ही अपना अकाउंट बैलेंस चेक कर पाएंगे। इसके अलावा, जो यूजर्स अपने मोबाइल नंबर से लिंक बैंक अकाउंट्स को बार-बार चेक करते हैं, वो भी अब सिर्फ 25 बार ही ऐसा कर सकेंगे। ये लिमिट्स इसीलिए लाई गई हैं ताकि बिना जरूरत के सिस्टम पर लोड ना पड़े, जिससे अक्सर स्पीड स्लो हो जाती है या ट्रांज़ैक्शन फेल हो जाते हैं। नए नियमों की वजह क्या है? NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने बताया कि अप्रैल और मई 2025 में UPI प्लेटफॉर्म पर काफी लोड देखा गया। इसका सबसे बड़ा कारण था लोग बार-बार बैलेंस चेक करते रहे या फिर एक ही ट्रांजैक्शन का स्टेटस बार-बार रिफ्रेश करते रहे। इससे सर्वर पर दबाव बढ़ा और कई बार लेन-देन में देरी या फेल होने की स्थिति आ गई। इसी वजह से अब नए नियम लाए जा रहे हैं ताकि सिस्टम बेहतर और फास्ट बना रहे। कौन-कौन से बदलाव होंगे? एक दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक कर सकेंगे। आप अपने मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक अकाउंट की डिटेल्स दिन में 25 बार से ज्यादा नहीं देख पाएंगे। कोई एक ट्रांजैक्शन का स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक किया जा सकेगा, वो भी हर बार कम से कम 90 सेकंड का अंतर होना जरूरी होगा। Netflix, EMI, बिजली बिल जैसे ऑटो डेबिट पेमेंट्स अब सिर्फ निर्धारित समय पर ही प्रोसेस होंगे। ऑटो पेमेंट्स पर भी असर पड़ेगा जो व्यापारी या कंपनियां ऑटो पेमेंट के जरिए ग्राहकों से पेमेंट लेती हैं, उन्हें अब NPCI द्वारा तय किए गए टाइम स्लॉट्स के अनुसार भुगतान प्राप्त करना होगा। इससे पेमेंट सिस्टम और ज़्यादा व्यवस्थित हो सकेगा। हालांकि आम यूजर्स को इससे कोई खास दिक्कत नहीं होगी। UPI बना डिजिटल इंडिया की रीढ़ आज UPI सिर्फ एक ऐप नहीं बल्कि हर गली, मोहल्ले और चाय की दुकान तक पहुंच चुका है। "भैया QR स्कैन कर दूं?" जैसे वाक्य अब आम सुनाई देते हैं। NPCI का यह कदम UPI नेटवर्क को और ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए उठाया गया है। बदलाव जरूरी हैं सुविधा बनाए रखने के लिए जैसे-जैसे डिजिटल पेमेंट की सुविधा बढ़ रही है, वैसे-वैसे सिस्टम को स्मार्ट और टिकाऊ बनाने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हो जाते हैं। इन छोटे लेकिन असरदार नियमों के जरिए हर यूजर को बिना किसी रुकावट के पेमेंट करने में आसानी मिलेगी।  

LIC के पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव, कौन से शेयर हुए शामिल? देखें पूरी सूची

नई दिल्ली एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी होने के साथ-साथ सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक भी है। उसके पास 15.5 लाख करोड़ रुपये का इक्विटी पोर्टफोलियो है। जून तिमाही में एलआईसी ने 81 कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी लेकिन सरकारी डिफेंस कंपनियों में जमकर पैसा लगाया। LIC का डिफेंस सेक्टर पर ध्यान देना एक बड़ा बदलाव है। पिछले छह महीनों में निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स 34% बढ़ा है। इस दौरान सरकारी डिफेंस कंपनी GRSE के शेयरों में 71% की बढ़त हुई है। एलआईसी ने जून तिमाही में कुछ लोकप्रिय शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है। इनमें सुजलॉन एनर्जी, रिलायंस पावर और वेदांता शामिल हैं। ये शेयर छोटे निवेशकों के पसंदीदा रहे हैं। हालांकि हाल में इनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा है। ACE इक्विटी के डेटा के अनुसार एलआईसी के पोर्टफोलियो में अब 277 स्टॉक हैं। एलआईसी ने कुछ नई कंपनियों में निवेश किया है। कंपनी ने मझगांव डॉप शिपबिल्डर्स में 3.27% हिस्सेदारी खरीदी है। इसकी कीमत 3,857 करोड़ रुपये है। डिफेंस पर दांव एलआईसी ने साथ ही कुछ पुरानी डिफेंस कंपनियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। कंपनी ने कोचीन शिपयार्ड में अपनी हिस्सेदारी 13 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.05% कर दी है। इसी तरह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में एलआईसी की हिस्सेदारी 10 बेसिस पॉइंट बढ़कर 1.99% हो गई है। इसी तरह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स में उसकी हिस्सेदारी 5 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 2.77% पहुंच गई है। डिफेंस स्टॉक हाल में चर्चा में रहे हैं। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद डिफेंस पर खर्च बढ़ा दिया है। पश्चिमी देशों के डिफेंस ब्लॉक नैटो ने भी डिफेंस पर खर्च बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। जून तिमाही में एलआईसी ने टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों में भी निवेश बढ़ाया है। कंपनी ने इन्फोसिस में अपनी हिस्सेदारी 43 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 10.88% कर दी है। इसी तरह एचसीएल टेक में एलआईसी की हिस्सेदारी 48 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.31% हो गई है। कंपनी ने साथ ही मुकेश अंबानी की कंपनी जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी अपनी हिस्सेदारी 55 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.68% कर दी है। टाटा मोटर्स में उसकी हिस्सेदारी 74 बेसिस पॉइंट की बढ़त के साथ 3.89% पहुंच गई है। बैंकिंग शेयर बैंकिंग शेयरों में भी एलआईसी ने कुछ बदलाव किए हैं और कुछ बड़े बैंकों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी में 30 बेसिस पॉइंट की कमी की है। अब इस बैंक में एलआईसी की हिस्सेदारी 5.45% रह गई है। इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक में उसकी हिस्सेदारी 42 बेसिस पॉइंट की कमी के साथ 6.38% रह गई है। लेकिन कंपनी ने सरकारी क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा और कैनरा बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। एलआईसी ने कुछ ऐसे शेयरों में मुनाफावसूली की है जो छोटे निवेशकों को काफी पसंद हैं। इनमें रिलायंस पावर, वेदांता और सुजलॉन एनर्जी शामिल हैं। कंपनी ने हीरो मोटोकॉर्प में अपनी हिस्सेदारी में सबसे ज्यादा कटौती की है। अब यह 531 बेसिस पॉइंट की कमी के साथ 6.53% रह गई है। साथ ही उसने नवीन फ्लोरीन, डिवीज लैब, मैरिको, अपोलो हॉस्पिटल्, आयशर मोटर्स, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल और एसबीआई में भी अपनी हिस्सेदारी कम की है। रिलायंस पर भरोसा देश के सबसे बड़े निवेशक का सबसे बड़ा निवेश अब भी रिलायंस इंडस्ट्रीज में है। उसके पास मुकेश अंबानी की कंपनी के 1.3 लाख करोड़ रुपये के शेयर हैं। यह रिलायंस की 6.93% हिस्सेदारी के बराबर है। जून में कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी 19 बेसिस पॉइंट बढ़ाई है। उसका दूसरा सबसे बड़ा निवेश आईटीसी है। एलआईसी के पास इस कंपनी के 82,200 करोड़ रुपये के शेयर हैं जो 15.8% हिस्सेदारी के बराबर है। कंपनी ने जून तिमाही में आईटीसी में 28 बेसिस पॉइंट की बढ़त की है। एलआईसी के टॉप 10 निवेश 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं। इनमें रिलायंस और आईटीसी के साथ एचडीएफसी बैंक (68,600 करोड़ रुपये), एसबीआई (66,300 करोड़ रुपये) और एलएंडटी (64,100 करोड़ रुपये) शामिल हैं। कंपनी ने कुछ खास सेक्टरों में ज्यादा निवेश किया है। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में IREDA में 2.21% हिस्सेदारी खरीदी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में RVNL में अपनी हिस्सेदारी 22 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.06% कर दी है। कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में बाबा रामदेव से जुड़ी पतंजलि फूड्स में हिस्सेदारी 148 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 9.14% कर दी है।

Elon Musk की इंटरनेट सेवा ‘फेल’, ढाई घंटे तक दुनिया भर में कनेक्टिविटी ठप

वॉशिंगटन Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्‍टारलिंक, जिसके आने का इंतजार भारत में बेसब्री से किया जा रहा है, गुरुवार को आउटेज का शिकार हो गई। करीब ढाई घंटों तक हजारों की संख्‍या में स्‍टारलिंक के सब्‍सक्राइबर्स इंटरनेट नहीं चला सके। तमाम देशों में यह आउटेज रिपोर्ट किया गया। कुछ लोगों ने इस बात पर निश्‍चिंतता जताई कि उनके पास 5जी नेटवर्क है। सैटेलाइट इंटरनेट को ब्रॉडबैंड और 5जी नेटवर्क से ज्‍यादा भरोसेमंद माना जाता है, खासतौर पर आपदा की स्‍थ‍िति में। ऐसे में उसका बंद होने सवाल पैदा करता है। स्‍टारलिंक में यह आउटेज क्‍यों आया, इसकी वजह भी आपको जाननी चाहिए। क्‍या है स्‍टारलिंक आउटेज रिपोर्टों के अनुसार, स्‍टारलिंक नेटवर्क में गुरुवार को दिक्‍कत आ गई थी। इसके चलते लोग इंटरनेट नहीं चला सके। हजारों की संख्‍या में लोग परेशान हुए। रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह के आउटेज को रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट डाउनड‍िटेक्‍टर पर 55 हजार से ज्‍यादा रिपोर्ट आईं। यानी काफी ज्‍यादा संख्‍या में लोग इंटरनेट नहीं चला पा रहे थे। कंपनी ने इस आउटेज की बात स्‍वीकार की। कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि दोबारा से ऐसा नहीं हो। एलन मस्‍क भी इस आउटेज को लेकर व्‍यथ‍ित दिखाई दिए। एलन मस्‍क ने मांगी माफी स्‍टारलिंक की सर्विस में आई रुकावट पर एलन मस्‍क ने भी माफी मांगी। उन्‍होंने कहा कि स्‍पेसएक्‍स सुनिश्चित करेगी कि आगे से इस तरह की रुकावट ना आए। कंपनी दुनिया के 130 से ज्‍यादा देशों में अपनी सर्विस देती है। सर्विस में रुकावट की कंप्‍लेंट दुनियाभर से आई। यूरोपीय देश जर्मनी हो या फ‍िर जिम्‍बॉब्‍वे, स्‍टारलिंक के सब्‍सक्राइबर्स कई घंटों तक रुकावट झेलते रहे। स्‍टारलिंक की सर्विस में क्‍या थी परेशानी स्‍टारलिंक के वीपी ऑफ इंजीनियरिंग Michael Nicolls ने एक सोशल मीडिया पोस्‍ट में बताया कि लगभग 2.5 घंटे तक चले नेटवर्क आउटेज को ठीक कर लिया गया है। उन्‍होंने ल‍िखा कि आउटेज, कोर नेटवर्क को ऑपरेट करने वाले प्रमुख इंटरनल सॉफ्टवेयर सर्विस के फेलियर के कारण हुआ था। Michael Nicolls ने इसके लिए माफी मांगी और कहा कि इस समस्‍या की तह तक जाकर उससे निपटा जाएगा ताकि भविष्‍य में ऐसा ना हो। यूजर ने कहा, किस्‍मत है क‍ि 5जी है स्‍टारलिंक इंटरनेट के बाधित होने पर यूजर्स की खीझ भी सामने आई। सोशल मीडिया पर लोग अपना पक्ष रखते हुए दिखे। एक यूजर ने लिखा कि वे भाग्यशाली हैं कि उनके पास 5G की सर्विस है। यूजर ने लिखा कि स्‍टारलिंक की सबसे अहम कमी यह है कि इसके बंद होने से यूजर के पास सिर्फ फोन का नेटवर्क ही बचता है। गौरतलब है कि स्‍टारलिंक का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला हुआ है। कंपनी अपनी सर्विस को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए अभी तक 7800 से ज्‍यादा सैटेलाइट्स लॉन्‍च कर चुकी है।

Elon Musk की इंटरनेट सेवा ‘फेल’, ढाई घंटे तक दुनिया भर में कनेक्टिविटी ठप

वॉशिंगटन Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्‍टारलिंक, जिसके आने का इंतजार भारत में बेसब्री से किया जा रहा है, गुरुवार को आउटेज का शिकार हो गई। करीब ढाई घंटों तक हजारों की संख्‍या में स्‍टारलिंक के सब्‍सक्राइबर्स इंटरनेट नहीं चला सके। तमाम देशों में यह आउटेज रिपोर्ट किया गया। कुछ लोगों ने इस बात पर निश्‍चिंतता जताई कि उनके पास 5जी नेटवर्क है। सैटेलाइट इंटरनेट को ब्रॉडबैंड और 5जी नेटवर्क से ज्‍यादा भरोसेमंद माना जाता है, खासतौर पर आपदा की स्‍थ‍िति में। ऐसे में उसका बंद होने सवाल पैदा करता है। स्‍टारलिंक में यह आउटेज क्‍यों आया, इसकी वजह भी आपको जाननी चाहिए। क्‍या है स्‍टारलिंक आउटेज रिपोर्टों के अनुसार, स्‍टारलिंक नेटवर्क में गुरुवार को दिक्‍कत आ गई थी। इसके चलते लोग इंटरनेट नहीं चला सके। हजारों की संख्‍या में लोग परेशान हुए। रिपोर्टों के अनुसार, इस तरह के आउटेज को रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट डाउनड‍िटेक्‍टर पर 55 हजार से ज्‍यादा रिपोर्ट आईं। यानी काफी ज्‍यादा संख्‍या में लोग इंटरनेट नहीं चला पा रहे थे। कंपनी ने इस आउटेज की बात स्‍वीकार की। कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि दोबारा से ऐसा नहीं हो। एलन मस्‍क भी इस आउटेज को लेकर व्‍यथ‍ित दिखाई दिए। एलन मस्‍क ने मांगी माफी स्‍टारलिंक की सर्विस में आई रुकावट पर एलन मस्‍क ने भी माफी मांगी। उन्‍होंने कहा कि स्‍पेसएक्‍स सुनिश्चित करेगी कि आगे से इस तरह की रुकावट ना आए। कंपनी दुनिया के 130 से ज्‍यादा देशों में अपनी सर्विस देती है। सर्विस में रुकावट की कंप्‍लेंट दुनियाभर से आई। यूरोपीय देश जर्मनी हो या फ‍िर जिम्‍बॉब्‍वे, स्‍टारलिंक के सब्‍सक्राइबर्स कई घंटों तक रुकावट झेलते रहे। स्‍टारलिंक की सर्विस में क्‍या थी परेशानी स्‍टारलिंक के वीपी ऑफ इंजीनियरिंग Michael Nicolls ने एक सोशल मीडिया पोस्‍ट में बताया कि लगभग 2.5 घंटे तक चले नेटवर्क आउटेज को ठीक कर लिया गया है। उन्‍होंने ल‍िखा कि आउटेज, कोर नेटवर्क को ऑपरेट करने वाले प्रमुख इंटरनल सॉफ्टवेयर सर्विस के फेलियर के कारण हुआ था। Michael Nicolls ने इसके लिए माफी मांगी और कहा कि इस समस्‍या की तह तक जाकर उससे निपटा जाएगा ताकि भविष्‍य में ऐसा ना हो। यूजर ने कहा, किस्‍मत है क‍ि 5जी है स्‍टारलिंक इंटरनेट के बाधित होने पर यूजर्स की खीझ भी सामने आई। सोशल मीडिया पर लोग अपना पक्ष रखते हुए दिखे। एक यूजर ने लिखा कि वे भाग्यशाली हैं कि उनके पास 5G की सर्विस है। यूजर ने लिखा कि स्‍टारलिंक की सबसे अहम कमी यह है कि इसके बंद होने से यूजर के पास सिर्फ फोन का नेटवर्क ही बचता है। गौरतलब है कि स्‍टारलिंक का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला हुआ है। कंपनी अपनी सर्विस को ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए अभी तक 7800 से ज्‍यादा सैटेलाइट्स लॉन्‍च कर चुकी है।

इंडिया से हायरिंग पर ट्रंप का ऐक्शन! टेक दिग्गजों को सख्त हिदायत

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को एक सख्त मैसेज दिया है, जिसमें भारत समेत दूसरे देशों से हायरिंग करने को मना किया है. इसमें Google, Microsoft, Meta जैसे नाम शामिल हैं. बुधवार को वॉशिंगटन में आयोजित AI Summit के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी टेक कंपनियों को ये संदेश दिया है. साथ ही अमेरिकी टैलेंट को हायरिंग करने की भी सलाह दी है.  यहां आपकी जानकारी के लिए बता देते हैं कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में बहुत से कर्मचारी यहां तक कि CEO तक के पोस्ट पर कई भारतीय मूल के लोग पहुंच चुके हैं. इसमें Google CEO सुंदर पिचाई और Microsoft CEO सत्य नडेला जैसे नाम शामिल हैं. हाल ही में Meta ने भी एक बड़ी AI टीम की हायरिंग की है, जिसमें कई भारतीय नाम शामिल हैं.  डोनाल्ड ट्रंप ने AI Summit  के दौरान के दौरान टेक इंडस्ट्री में ग्लोबल माइंडेस्ट की आलोचना की. उन्होंने आगे कहा कि इस वजह से कई अमेरिकी नागरिक और अमेरिकी टैलेंट को इग्नोर किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया है कि कई टॉप कंपनियां प्रोफिट के लिए अमेरिका की आजादी का फायदा उठा रहे हैं और बाहरी लोगों पर बड़ा इनवेस्ट कर रहे हैं.  चीन में लगा रहे फैक्ट्री और भारत से कर रहे भर्तीः ट्रंप  ट्रंप ने आगे कहा कि बहुत सी टेक कंपनियां अमेरिकी आजादी की वजह से अपनी फैक्टरी को चीन में लगा रहे हैं और भारत से कर्मचारियों को भर्ती कर रहे हैं, ये सब बातें आप जानते हैं. इन सब के बावजूद वे अपने ही देश के लोगो को नकार रहे हैं और आलोचना तक कर रहे हैं.  अमेरिका AI टेक कंपनियां Sr No- कंपनी का नाम संस्थापक / CEO स्पेशल प्रोडक्ट 1 OpenAI सैम ऑल्टमैन (CEO), एलन मस्क (Co-founder) ChatGPT, GPT मॉडल्स 2 Google DeepMind डेमिस हासाबिस (CEO) Gemini, AlphaGo, AI रिसर्च 3 Anthropic डारियो अमोदेई (CEO, Ex-OpenAI) Claude AI मॉडल 4 xAI एलन मस्क (Founder) Grok AI, Twitter/X इंटीग्रेशन 5 NVIDIA जेन्सेन हुआंग (CEO) AI चिप्स (GPU), AI हार्डवेयर 6 Microsoft सत्या नडेला (CEO) Azure AI, Copilot, OpenAI में निवेशक 7 Amazon (AWS AI) एंडी जेसी (CEO), रूहित प्रसाद (Alexa AI Chief) Alexa, Amazon Bedrock 8 IBM Watson अरविंद कृष्णा (CEO) Watson AI, एंटरप्राइज AI समाधान 9 Meta AI (Facebook) मार्क ज़ुकरबर्ग (Founder & CEO) LLaMA, FAIR रिसर्च, AI चैटबॉट 10 Palantir Technologies एलेक्स कार्प (CEO) AI डेटा एनालिटिक्स, गोथाम प्लेटफॉर्म अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फिर से दोहराया  ट्रंप ने एक बार फिर से अमरिकी फर्स्ट पॉलिसी को याद दिलाया. उन्होंने आगे कहा कि AI की रेस में न्यू स्प्रिट की मांग है, साथ ही राष्ट्र के प्रति लगाव जरूरी है. उन्होंने कहा कि हमें अमेरिकी कंपनियों की जरूरत है, जो अमेरिका में ही रहें. साथ ही वह अमेरिकी फर्स्ट पॉलिसी को फॉलो करें. ये सब आपको करना ही पड़ेगा.   

ED की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी समूह की कंपनियों पर एक साथ कई छापेमारी

मुंबई कारोबारी अनिल अंबानी की कंपनियों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) छापेमारी कर रही है. ये छापेमारी अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में मुंबई में की जा रही है.  ये कार्रवाई नेशनल हाउसिंग बैंक, सेबी, नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (NFRA), बैंक ऑफ बड़ौदा और सीबीआई की दो एफआईआर के आधार पर की गई. अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों के कई वरिष्ठ अधिकारियों के परिसरों में भी तलाशी ली जा रही है. ईडी को जांच में इस बात के सबूत मिले हैं कि यह सार्वजनिक धन की हेराफेरी के लिए रची गई एक सुनियोजित साजिश थी. इसमें कई संस्थानों, बैंकों, शेयरधारकों और निवेशकों को ठगा गया. घूसखोरी के एंगल से भी जांच की जा रही है, जिसमें यस बैंक के प्रमोटर्स भी संदेहास्पद हैं.  साल 2017 से 2019 के बीच यस बैंक से लिए गए करीब 3,000 करोड़ रुपये के ऋण की अवैध तरीके से हेराफेरी और दुरुपयोग का शक है. अनिल अंबानी क्यों घोषित किए गए फ्रॉड? इससे पहले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में अनिल अंबानी को फ्रॉड घोषित किया था. इस महीने की शुरुआत में अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्‍युनिकेशन के लोन अकाउंट को SBI से बड़ा झटका मिला था. SBI ने कंपनी को दिसंबर 2023, मार्च 2024 और सितंबर 2024 में कारण बताओ नोटिस भेजा था. कंपनी के जवाब की समीक्षा करने के बाद बैंक ने कहा था कि अनिल अंबानी की कंपनी ने अपने लोन की शर्तों का पालन नहीं किया और अपने अकाउंट्स के संचालन में अनियमितताओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी.