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ट्रेन में युवती से दुष्कर्म की कोशिश का मामला, TTE सस्पेंड, GRP ने तेज की जांच

देवरिया जिले की एक युवती ने चलती ट्रेन में टिकट जांच कर्मचारी (टीटीई) पर दुष्कर्म के प्रयास मामले में आरोपित टीटीई राहुल कुमार को रेलवे प्रशासन ने निलंबित कर दिया है। आरोपित की गिरफ्तारी के लिए एसपी रेलवे ने पुलिस टीम का गठन कर आरोपी पर  10 हजार रुपये इनाम घोषित कर दिया है। आरोपी पटना (बिहार) के बिहटा स्थित समसारा गांव का रहने वाला है। AC फर्स्ट क्लास के केबिन में रेप का आरोप दरअसल, एक युवती ने आरोप लगाया है कि उसके साथ AC फर्स्ट क्लास के केबिन में रेप की घटना का अंजाम दिए जाने की कोशिस की गई। पीड़िता की शिकायत पर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने आरोपी टीटीई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें पटना में दबिश दे रही हैं। हालांकि अभी तक आरोपी तक रेलवे पुलिस नहीं पहुंच पाई है। गोरखपुर जीआरपी में मामला दर्ज  जीआरपी सूत्रों के अनुसार घटना 15 फरवरी की बताई जा रही है। पीड़िता मऊ से गोरखपुर जाने के लिए ट्रेन में सवार हुई थी। आरोप है कि यात्रा के दौरान टीटीई ने चलती ट्रेन में उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया। पीड़िता की तहरीर पर पहले गोरखपुर जीआरपी में मामला दर्ज किया गया था। बाद में घटना स्थल देवरिया क्षेत्र में पड़ने के कारण केस को देवरिया जीआरपी को स्थानांतरित कर दिया गया। सीसीटीवी फुटेज एंव अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटा रही पुलिस  जीआरपी ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है। रेलवे अधिकारियों से आरोपी के ड्यूटी चाटर्, संबंधित कोच की सूची, यात्रियों का विवरण और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पीड़िता के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

यूपी चुनाव को लेकर मायावती का ऐलान, बसपा उतरेगी अकेले; दिल्ली बंगला मामले में दी सफाई

लखनऊ वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की रणनीति स्पष्ट हो गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और 2007 की तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी दल जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, ताकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाया जा सके। मायावती ने मीडिया में चल रही खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा कि बसपा पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ अकेले मैदान में उतरेगी। उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद भी कई बार इस रुख को दोहराया जा चुका है, इसलिए अब इस विषय पर किसी तरह की चर्चा या भ्रम की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की नीतियां संकीर्ण हैं और ये दल भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं करते। गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ मायावती ने कहा कि पिछले अनुभव बताते हैं कि इन दलों के साथ गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी साजिश या भ्रामक खबर से प्रभावित न हों और 2027 में सरकार बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहें। दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट पर क्या बोलीं दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आवास आवंटित किया है। उन्होंने 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद से उनकी सुरक्षा संवेदनशील विषय रही है और वर्तमान परिस्थितियों में खतरा और बढ़ गया है। मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों की साजिशें तेज होंगी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटे रहने की जरूरत है।  

सीएम योगी के ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ से मजबूत हो रही यूपी की अर्थव्यवस्था

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक पर्यटन केवल आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्राचीन धार्मिक स्थलों के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जाए तो आस्था, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था, तीनों को एक साथ मजबूती से आगे बढ़ाया जा सकता है। पिछली सरकारों के दौर में उपेक्षित रहे अनेक धार्मिक स्थलों पर अब सुनियोजित विकास कार्यों ने तस्वीर बदल दी है। सड़कों का चौड़ीकरण, घाटों का सौंदर्यीकरण, आधुनिक यात्री सुविधाएं, समुचित पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था, ठोस सुरक्षा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था जैसे बुनियादी सुधारों ने श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाया है। इसका सीधा परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष उत्तर प्रदेश में 122 करोड़ से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। यह संख्या न केवल राज्य के प्रशासनिक प्रबंधन की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि इस तथ्य को भी स्थापित करती है कि धार्मिक पर्यटन अब प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है। बड़े धार्मिक केंद्रों से लेकर छोटे शहरों तक असर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विकास और भव्य अवसंरचना निर्माण ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। वहीं वाराणसी में काशी क्षेत्र के व्यापक विकास, घाटों के पुनरुद्धार और यात्री सुविधाओं के विस्तार ने पर्यटन को नई ऊंचाई दी। प्रयागराज में संगम क्षेत्र के विकास और महाकुंभ व माघ मेला जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के सफल संचालन ने भी इस मॉडल की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘टेंपल इकॉनमी मॉडल’ का प्रभाव केवल इन प्रमुख धार्मिक शहरों तक सीमित नहीं रहा। मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्याचल और अन्य छोटे धार्मिक नगरों में भी आधारभूत ढांचे के विकास के साथ स्थानीय व्यापार और सेवाक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। धार्मिक पहचान से आर्थिक पुनर्जागरण तक आईआईएम लखनऊ की अयोध्या पर आधारित हालिया रिपोर्ट भी टेंपल इकोनॉमी को सपोर्ट करती है। रिपोर्ट में अध्ययन के आधार पर बताया गया है कि अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद आर्थिक गतिविधियों में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया। करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य, परिवहन, निर्माण और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कीं। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए, हजारों एमएसएमई सक्रिय हुए और स्थानीय बाजारों में कारोबार कई गुना बढ़ा। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तेज उछाल देखा गया, जिससे निजी निवेश को मजबूती मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे, आधुनिक रेलवे स्टेशन, चौड़ी सड़कों और नगर सौंदर्यीकरण जैसे कार्यों ने अयोध्या को एक सुव्यवस्थित धार्मिक-पर्यटन केंद्र में परिवर्तित करने की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया जीवन इसी तर्ज पर अन्य धार्मिक स्थलों में भी सुविधाएं बढ़ने से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई और इसके साथ ही स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, प्रसाद उद्योग, होटल एवं गेस्ट हाउस व्यवसाय, परिवहन सेवाओं, रेस्तरां, गाइड सेवाओं और छोटे व्यापारियों के कारोबार में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ। हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिले। हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ने से ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को भी बल मिला है। धार्मिक पर्यटन स्थलों पर स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बिक्री बढ़ी है, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ पहुंचा है। आस्था से अर्थव्यवस्था तक का समन्वय योगी सरकार का यह मॉडल इस सोच पर आधारित है कि आस्था और अर्थव्यवस्था एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं। यदि धार्मिक स्थलों का समग्र विकास किया जाए, तो यह न केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का माध्यम बनता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और निवेश आकर्षण का भी आधार तैयार करता है। आज उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ होटल इंडस्ट्री, रियल एस्टेट, परिवहन नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं में भी तेजी देखी जा रही है। बेहतर कानून-व्यवस्था और सुव्यवस्थित आयोजन क्षमता ने निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है। सनातन अर्थशास्त्र का आधुनिक मॉडल अर्थशास्त्री पंकज जायसवाल का कहना है कि 122 करोड़ पर्यटकों और श्रद्धालुओं का आगमन यह दर्शाता है कि धार्मिक-सांस्कृतिक केंद्र अब “इमोशनल स्पेस” से आगे बढ़कर “इकोनॉमिक जोन” बन चुके हैं। योगी सरकार ने भारत की पारंपरिक ग्राम-नगर-तीर्थ संरचना को आधुनिक नीति और अवसंरचना से जोड़कर एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसमें आस्था आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बनती है। प्रदेश सरकार के हालिया बजट में नगर विकास के लिए ₹26,514 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह निवेश केवल अवसंरचना निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि नगर-आधारित आर्थिक पुनरुत्थान की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। काशी-विंध्य क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण और प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्र के प्रस्तावित विकास जैसे कदम सांस्कृतिक भूगोल को आर्थिक भूगोल में रूपांतरित करने की दिशा में उठाए गए हैं। रामपथ, तीर्थ सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक केंद्रों और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार धार्मिक स्थलों को स्थायी आर्थिक केंद्रों में बदलने का आधार तैयार कर रहा है।

योगी सरकार का गांव व किसान के समावेशी विकास पर लगातार फोकस

लखनऊ भारत की आत्मा गांवों में बसती है। गांव व अन्नदाता किसान सशक्त होंगे तो देश समृद्ध रहेगा और उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास का लक्ष्य भी तभी प्राप्त होगा। इसी नीति को केंद्र में रखते हुए योगी सरकार ने गांव और किसान को अपनी प्राथमिकता में रखकर बीते 9 वर्ष में उत्तर प्रदेश का नव निर्माण किया है। यह नया उत्तर प्रदेश शहर व गांव के बीच अंतर को पाटता है, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकता है। इसी नीति को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार का बजट 2026-27 भी खेती-किसानी और ग्राम्य विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाता दिखाई दे रहा है। यह ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्रोत्साहन देता है। किसानों को नई तकनीकों से, नए बाजारों से जोड़ता और उद्यमिता से जोड़ता है। खेती-किसानी व इससे संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार के नए माध्यमों को जन्म देता है। यह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में किसानों सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाता है।  बजट में खास ध्यान, कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये 2017 में सत्ता संभालने के तत्काल बाद योगी सरकार द्वारा किसानों की 36 हजार करोड़ रुपये कर्जमाफी से लेकर केंद्र सरकार द्वारा पीएम किसान सम्मान निधि के 94,668.58 करोड़ रुपये स्थानांतरित करने तक, डबल इंजन सरकार ने किसानों को आर्थिक समृद्धि के केंद्र में रखा है। डीबीटी के माध्यम से योजनाओं का लाभ अकाउंट में देकर बिचौलियों का राज समाप्त किया गया। बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये की व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट कर देती है। यह राशि पिछले बजट के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने यूपीएग्रीज परियोजना में एक्वा कल्चर आधारभूत संरचना के तहत विश्वस्तरीय हैचरी तथा विश्वस्तरीय ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की बाह्य सहायतित परियोजना के लिये 155 करोड़ रुपये, एग्री-एक्सपोर्ट हब की स्थापना के लिये 245 करोड़ रुपये तथा किसान उत्पादक संगठनों हेतु रिवाल्विंग फण्ड योजना के लिये 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर में परिवर्तित करने की योजना के लिए 673.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ये बजट प्रावधान कृषि एवं सबद्ध क्षेत्रों के तकनीकी उन्नयन में मददगार होंगे। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी जा रही मजबूती बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक बार फिर मजबूती दी गई है। प्रदेश के सभी जनपदों को शामिल करते हुए 94,300 हेक्टेयर में नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना संचालित है। बजट में इसके लिए 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निजी नलकूपों को अनवरत बिजली आपूर्ति हो, इसका ध्यान रखा गया है। इसके लिए 2400 करोड़ प्रस्तावित हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार किसानों के लिए मजबूत सपोर्ट सिस्टम पर लगातार कार्यरत है। ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भरेगा गन्ना  पिछली सरकारों की अनदेखी के शिकार गन्ना किसानों के जीवन में 2017 के बाद से मिठास घुल गई है। योगी सरकार ने 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड गन्ना मूल्य का भुगतान किया। इस ऐतिहासिक निर्णय ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत दी। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुन्तल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपये प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है, जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई। यह निर्णय गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि के साथ ही ग्रामीण अर्थतंत्र में भी नई ऊर्जा भरेगा। दुग्ध, मत्स्य पालकों के लिए भी खोले दरवाजे  योगी सरकार ने दुग्ध व मत्स्य पालकों के लिए भी दरवाजे खोले हैं। सहकारी क्षेत्र के तहत प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में पहले 30 हजार लीटर क्षमता की नवीन डेयरी परियोजना प्रस्तावित की गयी थी, लेकिन अब 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के नवीन डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। सरकार ने दुग्ध संघों के सुदृढ़ीकरण व उन्हें पुनर्जीवित करने की योजना पर भी जोर दिया है। छुट्टा गोवंश के कारण किसानों को होने वाली समस्याओं के निदान पर भी सरकार ने जोर लगाया। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2,000 करोड़ का प्रावधान किया है। मत्स्य पालक किसानों का भी बजट में ख्याल रखा गया है। इसके अतिरिक्त 36.87 लाख किसानों को निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट, लगभग 83 हजार सोलर पंप की स्थापना, लगभग 32 हजार खेत तालाबों का निर्माण, 2.46 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण और किसान पाठशाला में लगभग दो करोड़ किसानों की सहभागिता से भी अन्नदाता किसानों के जीवन में बदलाव लाया गया है। योगी सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर धान खरीद अभियान के जरिए योगी सरकार का स्पष्ट लक्ष्य अन्नदाता किसानों की आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करना है। एक ओर सरकार धान की निर्बाध खरीद कर रही है, तो दूसरी ओर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों को सीधे बैंक खातों में भुगतान किया जा रहा है। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई और किसानों को समय पर पैसा मिल रहा है। धान खरीद की बात करें तो योगी सरकार एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसानों से यह खरीद कर रही है। धान खरीद सत्र 2025-26 में 18 फरवरी दोपहर 12 बजे तक 12.78 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। इतना ही नहीं, 4869 क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक 10.17 लाख से अधिक किसानों से 60.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। विशेषज्ञ की राय “योगी सरकार ने गांव व किसान को समृद्धि का आधार कहा था। सरकार ने पौने नौ साल में इसे वास्तविकता के धरातल पर उतारा भी है। चाहें बजट प्रावधान हों या किसान पाठशाला के जरिये खेती-किसानी को उन्नत तकनीक से जोड़ना, सरकार किसानों को आत्मनिर्भरता व उद्यमिता की तरफ ले जा रही है। किसी भी प्रदेश के समावेशी विकास के लिए जरूरी है कि कृषि व उससे जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत लोग सिर्फ सरकारी अनुदान योजनाओं पर आश्रित न रहें। राज्य की अर्थव्यवस्था व समृद्धि में उनकी अन्य क्षेत्रों के समान ही हिस्सेदारी होनी … Read more

प्यास की राजनीति से उबरा बुंदेलखंडः 98 प्रतिशत से अधिक घरों तक नल से जल

लखनऊ कभी पानी की किल्लत और प्यास की राजनीति के लिए चर्चित रहा बुंदेलखंड अब नल से जल आपूर्ति के मामले में नई पहचान बना रहा है। ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत वर्तमान आंकड़ों के अनुसार बुंदेलखंड मंडल के सातों जिलों में 98 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण घरों को फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराया जा चुका है। कई जिलों में यह कवरेज 99 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार इसे ग्रामीण जीवन स्तर में ऐतिहासिक बदलाव का संकेत मान रही है। बांदा में कुल 2,68,960 ग्रामीण घरों में से 2,68,722 घरों को नल कनेक्शन दिया जा चुका है, जो लगभग 99.91 प्रतिशत है। चित्रकूट में 1,63,970 में से 1,63,698 घरों तक कनेक्शन पहुंचा है, जो 99.83 प्रतिशत है। महोबा में 1,40,149 में से 1,39,904 घरों (99.83 प्रतिशत),  हमीरपुर में 1,86,530 में से 1,85,693 घरों (99.55 प्रतिशत) और ललितपुर में 2,06,983 में से 2,05,966 घरों (99.51 प्रतिशत) को नल से जल सुविधा मिल चुकी है। झांसी में 2,51,232 में से 2,49,111 (99.16 प्रतिशत) तथा जालौन में 2,12,069 में से 2,08,174 घरों (98.16 प्रतिशत) को कवर किया गया है। समूचे बुंदेलखंड जोन में कुल 7,59,609 घरों में से 7,58,017 घरों तक कनेक्शन पहुंच चुका है, जो 99.79 प्रतिशत कवरेज दर्शाता है। 2019 से पहले प्रदेश में ग्रामीण नल जल कवरेज दो प्रतिशत से भी कम था। बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र में पाइप से पेयजल सुविधा अपवाद मानी जाती थी। जल जीवन मिशन की शुरुआत के बाद बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे का निर्माण किया गया। ट्यूबवेल, पंप हाउस, ओवरहेड टैंक और व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने का कार्य तेजी से पूरा किया गया। भौतिक संरचना लगभग पूर्ण हो चुकी है और अब ध्यान कमीशनिंग तथा नियमित जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। दूरदराज क्षेत्रों में पानी लाने की मजबूरी खत्म होने से समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखी जा रही है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक शत प्रतिशत कनेक्शन और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।  

पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर डिजिटल रूप देगी योगी सरकार

गोरखपुर वर्तमान और भावी पीढ़यां विरासत पर गर्व की अनुभूति कर सकें, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। इसी क्रम में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहीत करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।  विरासत के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत हर जिले में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उत्तर प्रदेश के लिए यह अभियान और भी विशेष है क्योंकि उत्तर प्रदेश को प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि माना जाता है।  गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से यह ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। अब जिला स्तर पर इन ग्रंथों को चिन्हित करने और उनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।

बालिकाओं को मिल रहा ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का अवसर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियां भी अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीख रहीं हैं। बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब से ग्रामीण छात्राओं के सपनों को उड़ान मिलेगी। ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाओं को आधुनिक विज्ञान को समझने का अवसर मिल रहा है। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्राएं अंतरिक्ष से जुड़े जटिल सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझ रहीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से अब ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं भी टेलिस्कोप संचालित करने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं बेटियां सीएम योगी की इस दूरदर्शी पहल से विज्ञान शिक्षा को नई गति मिल रही है। ब्लॉक संसाधन केंद्र छपरौली में स्थापित एस्ट्रोनॉमी लैब को हाईटेक टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है। बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ छात्राओं को एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं। इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में बेहद सहायक होगा। टेलिस्कोप से चंद्रमा देख बढ़ रहा आत्मविश्वास इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब छात्राएं स्वयं टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रही हैं। जब एक बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप चलाकर चंद्रमा देखती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और जिज्ञासा दोनों का विकास होता है। अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से समझ रहीं बालिकाएं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली की सभी छात्राएं इस लैब में नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। नाइट-स्काई प्रेक्षण जैसी गतिविधियां उनके लिए रोमांचक अनुभव साबित हो रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि  इससे बालिकाओं की विज्ञान के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है और वे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से सोचने लगी हैं। एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से मिल रही आधुनिक शिक्षा जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि बागपत में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास शुरू की गई हैं। इनके माध्यम से बच्चों को इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।

स्किल हब’ बनेगा उत्तर प्रदेश, ‘कौशल कनेक्ट सेल’ से युवाओं को सीधे मिलेगा रोजगार

लखनऊ. उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश में निवेश करने वाले बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने के लिए 'कौशल कनेक्ट सेल' का गठन किया गया है। प्रदेश में आने वाले बड़े निवेश को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि उद्योगों को समय पर स्किल्ड मैनपावर मिल सके। इसी उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के लिए 'कौशल कनेक्ट सेल' बनाई गई है। स्पीडअप-पीएमयू देगा प्रशिक्षण को रफ्तार प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि मिशन में प्रशिक्षण और सेवायोजन (रोजगार) की प्रक्रिया को गति देने के लिए स्पीडअप-पीएमयू को आबद्ध किया गया है। यह पीएमयू अब 'कौशल कनेक्ट सेल' के माध्यम से निवेशकों के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित करेगा। डेटाबेस से लेकर सीधे प्लेसमेंट तक जिम्मेदारी 'कौशल कनेक्ट सेल' केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं होगी, बल्कि इसके कार्य जमीन पर बदलाव लाएंगे। रियल-टाइम ट्रैकिंग कर इन्वेस्ट यूपी के साथ दैनिक समन्वय कर निर्गत प्रोजेक्ट्स की स्थिति को अपडेट रखना यह सेल का मुख्य कार्य होगा। इसके साथ ही किस जिले में कितना निवेश आ रहा है और वहां किस सेक्टर (जैसे ऑटोमोबाइल, आईटी, टेक्सटाइल आदि) में कितने युवाओं की जरूरत है, इसका डेटाबेस तैयार करना भी उसकी जिम्मेदारी होगी। निवेशकों के एचआर विभाग से लगातार संपर्क में रहना और ट्रेनिंग पार्टनर्स के माध्यम से प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को संबंधित उद्योगों की जरूरत के अनुसार रोजगार सुनिश्चित करना भी सेल का काम होगा। 35 सेक्टर्स और 1300 जॉब रोल्स में ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा लगभग 35 सेक्टर्स और 1300 से अधिक जॉब रोल्स में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 'कौशल कनेक्ट सेल' के सक्रिय होने से अब ट्रेनिंग और इंडस्ट्री की मांग के बीच का अंतर खत्म होगा और यूपी के युवाओं को उनके जिले में ही बड़े उद्योगों में नौकरी मिल सकेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। 'कौशल कनेक्ट सेल' की स्थापना न केवल प्रदेश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को 'स्किल हब' के बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इन अधिकारियों को सौंपी गई है जिम्मेदारी समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए दोनों विभागों की ओर से एकल संपर्क सूत्र (एसपीओसी) नामित किए गए हैं। इन्वेस्ट यूपी की ओर से ओमैर शहिद, टीम लीडर एसपीओसी के रूप में कार्य करेंगे। कौशल विकास मिशन की ओर से इस सेल की अध्यक्षता डॉ. पवित्रा टंडन, सहायक निदेशक द्वारा की जाएगी। मिशन के एसपीओसी अतुल कुमार सिंह को नामित किया गया है। उनकी सहायता के लिए  धनंजय कुमार द्विवेदी और ज्योति वास्तव को भी टीम में शामिल किया गया है।

मायावती का बड़ा ऐलान: यूपी चुनाव में बीएसपी करेगी अकेले चुनाव, टाइप-8 बंगला पर भी बयान

 लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने गठबंधन को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक और निराधार करार दिया है. मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे गठबंधन से जुड़ी 'उल्टी खबरों' पर ध्यान न दें और 'हाथी की मस्त चाल' चलते हुए चुनावी तैयारियों में जुट जाएं.  मायावती का टार्गेट 2007 की तरह ही प्रदेश में बीएसपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाना है. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में खुद को आवंटित हुए टाइप-8 बंगले को लेकर भी सफाई दी और कहा कि यह सुरक्षा की दृष्टि से आवंटित किया गया है.  मायावती ने विरोधियों को नसीहत दी है कि बंगले को लेकर कोई भी गलत सूचना न फैलाएं. गठबंधन की अटकलों पर विराम मायावती ने कहा कि बीएसपी के किसी अन्य दल के साथ हाथ मिलाने की खबरें सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं जानबूझकर चलाई जा रही हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पार्टी अपनी ताकत पर भरोसा करती है और बिना किसी बैसाखी के चुनाव लड़ेगी. कार्यकर्ताओं से 'हाथी की मस्त चाल' चलने की अपील मायावती ने कैडर में जोश भरते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को विरोधियों के दुष्प्रचार से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने नारा दिया कि पार्टी को 2007 वाला इतिहास दोहराना है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जाकर जनता को बीएसपी की नीतियों से जोड़ने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के संकल्प के साथ काम करने को कहा है. दिल्ली में बंगले के आवंटन पर दी सफाई दिल्ली में मिले नए सरकारी बंगले को लेकर हो रही चर्चाओं पर मायावती ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल के तहत टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया है. उन्होंने साफ किया कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है और इसे लेकर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाना गलत है.

ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मिली मेट्रो सुविधा, सेक्टर-61 से गौर चौक तक कनेक्टिविटी होगी आसान

ग्रेटर नोएडा  ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है.  लंबे समय से मेट्रो कनेक्टिविटी की मांग कर रहे इस इलाके को अब मेट्रो का तोहफा मिलने जा रहा है. नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. इस नए रूट के बनने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के करीब 5 लाख लोगों और करीब 113 हाउसिंग सोसाइटी को सीधा फायदा मिलेगा. योजना के मुताबिक मेट्रो की यह नई लाइन नोएडा सेक्टर-61 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौक तक जाएगी. इस पूरे रूट पर कुल 4 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की कमी के कारण लोगों को रोजाना भारी जाम, बसों और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है. मेट्रो के आने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी. जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में होगी आसानी अधिकारियों के अनुसार यह रूट यूपी कैबिनेट से पहले ही मंजूर नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो विस्तार योजना का ही हिस्सा है, लेकिन इसे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्टेशन पर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) से भी जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सिर्फ मेट्रो ही नहीं, बल्कि तेज रफ्तार आरआरटीएस की सुविधा भी मिलेगी.  इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी. बताया जा रहा है कि आरआरटीएस सराय काले खां से चलकर गाजियाबाद होते हुए नॉलेज पार्क-5 तक जाएगी और वहीं से यह मेट्रो लाइन ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ेगी. सेक्टर-61 में पहले से दिल्ली मेट्रो और आगे जाने वाली एनएमआरसी मेट्रो की कनेक्टिविटी मौजूद है.  ऐसे में लोग दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच बिना ज्यादा परेशानी के आ-जा सकेंगे. रूट की फाइनल डीपीआर बनकर तैयार इस रूट की फाइनल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है. कुछ जरूरी संशोधन के बाद इसे दोबारा यूपी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा.  वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस मेट्रो लाइन के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे और लोगों को सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन मिलेगा. कुल मिलाकर, मेट्रो विस्तार की यह योजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी और यहां रहने वाले आम लोगों के रोजमर्रा के सफ़र को आसान बनाएगा.