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सपा प्रवक्ता के बयान पर बवाल: मायावती बोलीं- ब्राह्मण समाज से तुरंत क्षमा मांगें अखिलेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के खिलाफ की गई टिप्पणी ने प्रदेश का सियासी पारा बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने मोर्चा संभालते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव को कठघरे में खड़ा किया है। मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अखिलेश यादव को इस अभद्र टिप्पणी के लिए तत्काल ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि सपा के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गई अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी से हर तरफ भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है, क्योंकि समाज के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंची है। अखिलेश की चुप्पी ने मामले को बनाया गंभीर बसपा प्रमुख ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले पर खामोशी बेहद चिंताजनक है। मायावती के अनुसार, सपा मुखिया की चुप्पी की वजह से यह विवाद और अधिक तूल पकड़ता जा रहा है और सामाजिक स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने सलाह दी कि सपा मुखिया को तत्काल इसका संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से क्षमा याचना और पश्चाताप कर लेना चाहिए। सपा का चरित्र 'ब्राह्मण विरोधी' मायावती ने सपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इस प्रकरण से एक बार फिर साबित हो गया है कि सपा का चरित्र नहीं बदला है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों, अति-पिछड़ों और मुस्लिम समाज की तरह सपा का 'ब्राह्मण विरोधी' चेहरा भी अब और गहरा होकर सामने आया है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार (बीजेपी) पर भी निशाना साधा और कहा कि ब्राह्मण समाज में मौजूदा सरकार के रवैये को लेकर भी जबरदस्त नाराजगी है, जो किसी से छिपी नहीं है। बसपा में 'यूज एंड थ्रो' की राजनीति नहीं ब्राह्मणों को अपनी ओर आकर्षित करते हुए मायावती ने बसपा के शासनकाल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि बसपा ने हमेशा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी और सरकार में भरपूर आदर-सम्मान दिया है। बसपा में 'यूज एंड थ्रो' (इस्तेमाल करो और फेंको) की राजनीति नहीं होती, बल्कि यहाँ सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है। गौरतलब है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती ने अकेले ही उतरने का ऐलान किया है। 2007 की तरह दलित ब्राह्मण गठजोड़ पर मायावती की नजरें हैं। पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर उन्होंने ब्राह्मण समाज को बसपा से जोड़ने के लिए कई ऐलान भी किए थे।

मायावती कर रहीं SIR के नफा-नुकसान का विश्लेषण, बसपा नई रणनीति के तहत कैंडिडेट का चयन कर रही है

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की हलचल तेज हो गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव मिशन-2027 का बिगुल फूंक चुके हैं और एक के बाद एक चुनावी घोषणाएं भी शुरू कर दी है. बीजेपी भी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है और सीएम योगी भी सड़क पर उतरकर सपा-कांग्रेस को महिला विरोधी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं।  सपा और बीजेपी के बीच सिमटती यूपी की सियासत को बसपा प्रमुख मायावती त्रिकोणीय बनाने की कवायद में है, जिसके लिए पार्टी नेताओं के साथ लगातार बैठकें भी कर रही हैं. मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी शुरू कर दिया था, लेकिन अब एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  2027 का चुनाव बसपा के लिए सियासी वजूद को बचाए रखने का है. यही वजह है कि मायावती सूबे में हुई एसआईआर अभियान से हुए फायदे और नुकसान का आकलन कर रही है, उसके लिहाज से पार्टी उम्मीदवारों का सेलेक्शन करेगी. इसके लिए मायावती ने काम भी शुरू कर दिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि मायावती क्या बसपा को दोबारा से खड़ा कर पाएंगी?  बसपा कैंडिडेट सेलेक्शन में जुटी मायावती मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है. मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. बसपा ने 2027 के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान शुरू कर दिया था. सूबे की 40-50 सीटों पर बसपा ने विधानसभा प्रभारी बनाकर  संभावित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की हरी झंडी दे दी थी, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।  यूपी में हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से हुए फायदे-नुकसान का बसपा आकलन कर रही है. मायावती ने पिछले दिनों अपने 15 हजार बूथ कमेटियों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी. बसपा ने एसआईआर अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया था ताकि उसके समर्थकों का नाम मतदाता सूची में बरकरार रहे. बसाप इसी आधार पर चुनावी रणनीति बनाएगी और 2027 के लिए प्रत्याशी चयन होगा।  एसआईआर के लिहाज से कैंडिडेट का चयन बसपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में मायावती ने बूथ कमेटियों से रिपोर्ट मांगी है. एसआईआर अभियान में जिन पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई, उन्हें टिकट चयन में तवज्जो दी जाएगी. खासकर जिलों में जिन संभावित प्रत्याशियों को प्रभारी बनाया गया था, उनके बारे में रिपोर्ट मिलने के बाद उनकी दावेदारी पर फैसला लिया जाएगा।  बसपा सुप्रीमो मायावती खुद इस मामले की गहनता से समीक्षा कर रही हैं. उन्होंने बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल से इस बाबत सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाने को कहा है। खासकर पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या कम होने के बारे में बताने को कहा गया है ताकि जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल होने से रह गए हैं, उनको आगे जुड़वाया जा सके।  कास्ट समीकरण से उम्मीदवारी पर मुहर मायावती के नेतृत्व में बसपा अपनी पुरानी सोशल इंजीनियरिंग को फिर से अपनाने की कोशिश में है. 2027 के लिए बसपा के कैंडिडेट सेलेक्शन के लिए सीट के समीकरण का भी आकलन किया जा रहा, खासकर जाति केमिस्ट्री देखी जा रही है. मायावती ने रणनीति बनाया है कि एसआईआर से सीट पर किस समाज के वोट घटे हैं और मौजूदा समय में किस समाज से वोट बढ़े हैं, उसके आकलन पर टिकट वितरण किया जा रहा।  बसपा ने मिशन-2027 के लिए प्लान बनाया है कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर चार-चार दावेदारों का पैनल बनाकर उनको कसौटी पर परखा जा रहा है. इन्हीं में से एक को पहले विधानसभा क्षेत्र प्रभारी और बाद में प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा. बसपा इस काम के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं की एक पूरी टीम लगा रखी है,जिसमें पार्टी के मंडल और जोनल कोऑर्डिनेटर शामिल है।  मायावती अपने जोनल कोऑर्डिनेटर के जरिए सीट के जातीय समीकरण की रिपोर्ट लेती हैं और उसके बाद कैंडिडेट के चयन के लिए तय करती हैं कि किस जाति का होना चाहिए. इसके लिए जोनल कोऑर्डिनेटर को फिर उस जाति से उम्मीदवार के तलाश करने का टारगेट देती हैं. इसके बाद चार नाम का पैनल बनाकर दिया जाता है, जिसमें से मायावती किसी एक नाम को अपनी मंजूरी देती है. इसके बाद जोनल कोऑर्डिनेटर उसे प्रभारी बनाने के ऐलान करती हैं, जो चुनाव के समय प्रत्याशी होगा।  2007 के फार्मूले से 2027 जीतने का प्लान  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मायावती ने अकेले दम पर लड़ने का प्लान बनाया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल साफ कहा कि बसपा इस बार पारंपरिक गठबंधनों से अलग राह पर चलेगी और समय से पहले कैंडिडेट घोषित कर दिए जाएंगे. प्देश अध्यक्ष का यह बयान बसपा की पुरानी 'सोशल इंजीनियरिंग' रणनीति की पुनर्वापसी का संकेत है,जिसके सहारे 2007 में पार्टी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था।  बसपा का फोकस मुस्लिम-ब्राह्मण-दलित समीकरण पर है. इस तरह आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा संगठन और प्रत्याशियों का पैमाना तैयार किया है. ब्राह्मण और मुस्लिम कैंडिडेट को चुनावी मैदान में उतारकर और दलितों को संगठन के माध्यम से जोड़कर काम करने की योजना बनाई गई है. बसपा ने 2007 में इसी दांव से सत्ता पर काबिज हुई थी।  मायावती ने 2007 में परंपरागत दलित वोटों के साथ-साथ ब्राह्मण और मुस्लिम वोटरों को लेकर मैदान में उतरीं और इस सोशल इंजीनियरिंग ने विपक्षी दलों को चुनावी रण में धराशाई कर दिया. अब मायावती उसी फॉर्मूले को फिर आजमाना चाह रही हैं।  मायावती पिछले 3 महीने में हुई सभी बैठकों मैं यह बात कहती रही हैं कि ब्राह्मण-मुस्लिम और दलित गठजोड़ के साथ वह 2027 के विधानसभा चुनाव में जाएंगी और एक बार फिर से सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ वापसी करेंगी. अब लखनऊ से दिल्ली  वापस आ गई हैं, जहां से पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को मजबूत करने की कवायद करेंगी?   

महिला आरक्षण पर कांग्रेस का वादा अधूरा, मायावती ने सपा को भी घेरा

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने एक बार फिर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला बोला है. मायावती का कहना है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस अब जो बड़ी-बड़ी बातें कर रही है, वो महज एक दिखावा है. उन्होंने कांग्रेस को गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी करार देते हुए साफ कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उसने कभी SC, ST और OBC के आरक्षण का कोटा पूरा करने की कोशिश नहीं की. मायावती का यह वार सीधे तौर पर कांग्रेस के उस दावे पर है जिसमें वो अब इन वर्गों के हक की बात कर रही है।  मायावती ने पुरानी बातों को याद दिलाते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा इन वर्गों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के साथ खिलवाड़ किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस जब केंद्र की सरकार चला रही थी, तब उसने कभी भी पिछड़ों या दलितों के कोटे को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. आज वही पार्टी महिला आरक्षण के बहाने वोट बैंक की राजनीति कर रही है।  यही नहीं, मायावती ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए मंडल कमीशन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिला, उसे भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह बीएसपी की मेहनत और लगातार किए गए प्रयासों का ही नतीजा था कि उस समय की वी.पी. सिंह सरकार ने इसे आखिरकार लागू किया. मायावती ने साफ संदेश दिया कि जो काम कांग्रेस दशकों में नहीं कर पाई, उसे BSP ने लड़कर करवाया।  जब सरकार में होती है सपा, तो भूल जाती है पिछड़ों का हक मायावती के निशाने पर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं थी, उन्होंने समाजवादी पार्टी को भी जमकर घेरा. उन्होंने यूपी का एक पुराना किस्सा याद दिलाते हुए कहा कि 1994 में जब पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का फायदा देने की रिपोर्ट आई थी, तो उस वक्त की सपा सरकार ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था. लेकिन जब 1995 में बीएसपी की सरकार बनी, तो इस फैसले को तुरंत लागू कर दिया गया. मायावती ने तंज कसते हुए कहा कि सपा जब सत्ता से बाहर होती है, तो बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन सरकार में आते ही इनका रवैया पूरी तरह बदल जाता है।  मायावती ने जनता को सावधान करते हुए कहा कि कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए रंग बदलती हैं. सत्ता में रहते हुए इनका रवैया जातिवादी और तिरस्कार से भरा होता है, लेकिन चुनाव आते ही ये लोग छलावा करने लगते हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा बचकर रहना चाहिए, क्योंकि ये कभी भी दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का भला नहीं चाहतीं।  महिला आरक्षण को लेकर चल रही देरी पर भी मायावती ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर सरकार इसे 2011 की जनगणना के आधार पर लागू करना चाहती है, तो उसे जल्दी करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज कांग्रेस सत्ता में होती, तो वह भी बीजेपी की तरह ही कदम उठाती. यानी घुमा-फिराकर बात वही है कि बड़ी पार्टियों के लिए इन वर्गों का कल्याण कभी प्राथमिकता नहीं रहा।  आखिर में मायावती ने एक बड़ी सलाह देते हुए कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. उन्होंने कहा कि फिलहाल जो कुछ भी मिल रहा है उसे स्वीकार करें, लेकिन असली मजबूती तभी आएगी जब यह समाज खुद अपने पैरों पर खड़ा होगा. मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अपने समाज को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। 

मायावती का बयान: महिला आरक्षण बिल का BSP ने किया समर्थन, SC, ST और OBC को अलग से कोटा मिलना चाहिए

 लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का स्वागत किया है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसमें SC, ST और OBC महिलाओं के लिए अलग से कोटा देने की मांग की. मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 50% आरक्षण के पक्ष में है।  मायावती ने कहा- "हमारी पार्टी देश की संसद, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित 33% आरक्षण का और इसे आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए सही और उचित कदम का स्वागत करती है. हालांकि इसमें काफी देरी हुई है, लेकिन देरी के बावजूद, हमारी पार्टी इसका स्वागत करती है. यदि वास्तव में शोषित और हाशिए पर पड़ी महिलाओं के लिए, विशेष रूप से SC, ST और OBC समुदायों की उन महिलाओं के लिए, जिन्हें सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से लगातार हाशिए पर धकेला जा रहा है, अलग से आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो यह उचित और ऐतिहासिक दोनों होगा।  बकौल मायावती- "जीवन के हर पहलू में महिलाओं को समानता और आत्म-सम्मान का अधिकार देने के साथ-साथ, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 'हिंदू कोड बिल' के माध्यम से उन्हें मजबूत कानूनी अधिकार देने का भी प्रयास किया था. तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपने संकीर्ण जातिवाद से प्रभावित होकर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बाद में इसे टुकड़ों-टुकड़ों में पारित किया. इस प्रकार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को OBCs के लिए आरक्षण की कमी और महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम न उठाए जाने के विरोध में देश के पहले कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।  बसपा प्रमुख ने आगे कहा कि हमारी पार्टी लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के वर्तमान केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करती है. हालांकि, हमारी पार्टी हमेशा से महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में रही है. हमारी पार्टी 33 प्रतिशत आरक्षण का भी स्वागत करती है। 

‘चुनाव आते ही दलित प्रेम जागता है’: कांशीराम जयंती पर मायावती ने सपा-कांग्रेस को घेरा

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन पर "दलित विरोधी" राजनीति में लिप्त होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की विरासत का चुनावी लाभ के लिए लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मायावती ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, सपा और कांग्रेस दलित वोट के स्वार्थ में एक "सोची-समझी रणनीति" के तहत कांशीराम की जयंती मना रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि कांग्रेस पार्टी केन्द्र में अपनी सरकार रहने के दौरान कांशीराम को 'भारतरत्न' की उपाधि नहीं दी और अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, ''यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है?'' मायावती ने दावा किया कि सपा और कांग्रेस ने शुरू से ही, बसपा को ख़त्म करने में लगी रहीं, जिस पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी। उन्होंने कहा कि उसे कांशीराम की 'एकमात्र उत्तराधिकारी'' व बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टियों पर कांशीराम के जीते जी उनकी उपेक्षा करने और अब उनकी विरासत का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के सम्मान में तत्कालीन बसपा सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी तत्कालीन सपा सरकार द्वारा ''अधिकांशः बदल दिया गया। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र।'' मायावती ने प्रतिद्वंद्वी दलों के समर्थकों को चुप रहने की सलाह देते हुए कांशीराम की पुस्तक उल्लेख किया और कहा कि ''ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही कांशीराम जी ने 'चमचा युग' के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।'' कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग की थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था।  

कांग्रेस की वजह से बसपा का गठन, कांशीराम के नाम पर आयोजन पर मायावती ने किया कटाक्ष

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के माध्यम से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस को दलितों के अपमान का प्रतीक बताते हुए कहा कि जिस पार्टी ने संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का सम्मान नहीं किया, वह आज कांशीराम जी के नाम पर राजनीति करने का ढोंग कर रही है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस के कारण ही कांशीराम को बसपा बनानी पड़ी थी। अपने समर्थकों को आगाह किया कि वे कांग्रेस के इन 'हथकंडों' से सावधान रहें। कांग्रेस और सपा पर लगाया उपेक्षा का आरोप मायावती ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक केंद्र की सत्ता संभाली, लेकिन कभी भी बाबा साहेब अंबेडकर को 'भारत रत्न' से सम्मानित नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो पार्टी बाबा साहेब का आदर नहीं कर सकी, वह आज मान्यवर श्री कांशीराम जी को सम्मान देने की बात कैसे कर सकती है? मायावती ने उस दौर को याद दिलाया जब कांशीराम जी का निधन हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया था। इतना ही नहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने भी राजकीय शोक घोषित करने की जहमत नहीं उठाई थी। मायावती के अनुसार, ये दोनों पार्टियां दलित महापुरुषों के प्रति हमेशा से संकुचित मानसिकता रखती आई हैं। दलित संगठनों और अन्य पार्टियों को दी चेतावनी बसपा प्रमुख ने न केवल कांग्रेस, बल्कि उन छोटे दलित संगठनों और पार्टियों पर भी निशाना साधा जो कांशीराम जी के नाम का इस्तेमाल अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी पार्टियों के हाथों में खेल रहे ये संगठन मान्यवर के नाम को भुनाने की कोशिश में लगे हैं ताकि बसपा को कमजोर किया जा सके। मायावती ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसे किस्म-किस्म के हथकंडों से सचेत रहें, क्योंकि इन सबका एकमात्र उद्देश्य बसपा के आधार को हिलाना है। 15 मार्च को देशव्यापी कार्यक्रमों की अपील मायावती ने अपने ट्वीट के अंत में सभी समर्थकों और कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि कल, यानी 15 मार्च 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में आयोजित होने वाले पार्टी के कार्यक्रमों को भव्य और कामयाब बनाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो कांशीराम जी के सिद्धांतों पर अडिग है और दलितों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के हक की लड़ाई लड़ रही है।

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर मायावती भड़कीं, उठाए सवाल

लखनऊ  पश्चिम बंगाल दौरे पर गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान होना चाहिए व उनका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मायावती ने 8 मार्च को अपने ट्वीट में लिखा, "भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना जरूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है। वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण।" बसपा अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, "इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा। इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।"

यूपी चुनाव को लेकर मायावती का ऐलान, बसपा उतरेगी अकेले; दिल्ली बंगला मामले में दी सफाई

लखनऊ वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की रणनीति स्पष्ट हो गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को साफ शब्दों में कहा कि बसपा किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और 2007 की तरह अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी दल जानबूझकर इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं, ताकि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान चुनावी तैयारियों से भटकाया जा सके। मायावती ने मीडिया में चल रही खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए कहा कि बसपा पूरी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ अकेले मैदान में उतरेगी। उन्होंने बताया कि 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद भी कई बार इस रुख को दोहराया जा चुका है, इसलिए अब इस विषय पर किसी तरह की चर्चा या भ्रम की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की नीतियां संकीर्ण हैं और ये दल भीमराव आंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप काम नहीं करते। गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ मायावती ने कहा कि पिछले अनुभव बताते हैं कि इन दलों के साथ गठबंधन से बसपा को नुकसान ही हुआ है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी साजिश या भ्रामक खबर से प्रभावित न हों और 2027 में सरकार बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहें। दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट पर क्या बोलीं दिल्ली में नए बंगले के अलॉटमेंट को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह आवास आवंटित किया है। उन्होंने 2 जून 1995 को लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में हुए हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना के बाद से उनकी सुरक्षा संवेदनशील विषय रही है और वर्तमान परिस्थितियों में खतरा और बढ़ गया है। मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों की साजिशें तेज होंगी। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहकर संगठन को मजबूत करने और चुनावी तैयारियों में जुटे रहने की जरूरत है।  

मायावती का बड़ा ऐलान: यूपी चुनाव में बीएसपी करेगी अकेले चुनाव, टाइप-8 बंगला पर भी बयान

 लखनऊ बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने गठबंधन को लेकर चल रही तमाम चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक और निराधार करार दिया है. मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे गठबंधन से जुड़ी 'उल्टी खबरों' पर ध्यान न दें और 'हाथी की मस्त चाल' चलते हुए चुनावी तैयारियों में जुट जाएं.  मायावती का टार्गेट 2007 की तरह ही प्रदेश में बीएसपी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाना है. इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली में खुद को आवंटित हुए टाइप-8 बंगले को लेकर भी सफाई दी और कहा कि यह सुरक्षा की दृष्टि से आवंटित किया गया है.  मायावती ने विरोधियों को नसीहत दी है कि बंगले को लेकर कोई भी गलत सूचना न फैलाएं. गठबंधन की अटकलों पर विराम मायावती ने कहा कि बीएसपी के किसी अन्य दल के साथ हाथ मिलाने की खबरें सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाएं जानबूझकर चलाई जा रही हैं, जिससे कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाया जा सके. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि पार्टी अपनी ताकत पर भरोसा करती है और बिना किसी बैसाखी के चुनाव लड़ेगी. कार्यकर्ताओं से 'हाथी की मस्त चाल' चलने की अपील मायावती ने कैडर में जोश भरते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को विरोधियों के दुष्प्रचार से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है. उन्होंने नारा दिया कि पार्टी को 2007 वाला इतिहास दोहराना है. उन्होंने कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जाकर जनता को बीएसपी की नीतियों से जोड़ने और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के संकल्प के साथ काम करने को कहा है. दिल्ली में बंगले के आवंटन पर दी सफाई दिल्ली में मिले नए सरकारी बंगले को लेकर हो रही चर्चाओं पर मायावती ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों और प्रोटोकॉल के तहत टाइप-8 बंगला आवंटित किया गया है. उन्होंने साफ किया कि इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है और इसे लेकर किसी भी तरह की भ्रामक जानकारी फैलाना गलत है.

मायावती का सख्त फैसला: बसपा संगठन में बड़े पदों पर चली कैंची

लखनऊ विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए बूथ और सेक्टर स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है। इसके तहत संगठन में 50 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी प्रमुख ने दो-दो जिला प्रभारियों की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है और उन्हें विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। अब विधानसभा अध्यक्ष, महासचिव और प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ और सेक्टर गठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1200 किए जाने के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या 1.62 लाख से बढ़कर 1.77 लाख हो गई है। इसके चलते पहले से गठित बूथ और सेक्टर स्तर के संगठन प्रभावी नहीं रह गए हैं। लगभग 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ है।   एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं पार्टी के अनुसार एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश में नए सिरे से संगठन खड़ा करने में लगभग तीन माह का समय लग सकता है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कांशीराम और आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने के निर्देश बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को लखनऊ और नोएडा में भव्य रूप से मनाई जाए। वहीं 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी पूरे उत्साह के साथ मनाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि 12 मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लखनऊ में, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों के कार्यकर्ता नोएडा स्थित स्मारक पर पहुंचेंगे। संगठन मजबूत करने के लिए जिलों में उतरेंगे शीर्ष नेता एसआईआर और बूथ-सेक्टर गठन का कार्य पूरा होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, विधायक उमा शंकर सिंह और मंडल स्तरीय मुस्लिम भाईचारा प्रभारियों द्वारा जिलों का दौरा किया जाएगा। सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे बैठक में मायावती ने कहा कि अगले वर्ष सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में बसपा ने अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि इसके बाद पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और वर्तमान में विधानसभा में बसपा का केवल एक विधायक है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।