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SC की रोक के बाद मायावती का बयान, कहा- ‘सवर्ण होते तो विवाद नहीं होता’

लखनऊ यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर विपक्षी नेताओं के भी रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार को नसीहत देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, अगर यूजीसी नियमों में सवर्णों को भी कमिटी में रख लिया जाता तो बवाल नहीं होता। उन्होंने आगे कहा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किए गए है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित। जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जांच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।   अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर उच्चतम न्यायालय द्वारा रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सच्चा न्याय यह सुनिश्चित करने में है कि किसी पर भी अत्याचार या अन्याय न हो। यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, 'सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ़ नियम नहीं, नीयत की भी होती है।' उन्होंने कहा, ‘न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय, न किसी पर जुल्म-ज्यादती हो, न किसी के साथ नाइंसाफ़ी।’ यूजीसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक उच्चतम न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हालिया नियमों के खिलाफ दायर कई याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी। इन याचिकाओं में दलील दी गई थी कि आयोग ने जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने विनियमन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए। उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सभी संस्थानों द्वारा 'समानता समितियां' गठित करने को अनिवार्य बनाने संबंधी नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।  

नए UGC नियमों पर मायावती का बचाव, बोलीं विरोध सवर्णों तक सीमित नहीं होना चाहिए

लखनऊ नए यूजीसी नियमों को लेकर बसपा प्रमुख की प्रतिक्रिया सामने आई है. मायावती ने उच्च शिक्षण संस्थानों में इक्विटी कमेटियों के गठन को अनिवार्य बनाने वाले UGC के नए नियमों का बचाव किया है. उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग के कुछ लोगों द्वारा इस कदम का विरोध बिल्कुल भी जायज नहीं है. हालांकि, मायावती ने चेतावनी दी कि सामाजिक तनाव से बचने के लिए इन नियमों को व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाना चाहिए था. X पर कई पोस्ट में, मायावती ने कहा कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से UGC के उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले नियम, 2026 को 'जातिवादी मानसिकता' वाले लोगों द्वारा गलत तरीके से भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. उन्होंने कहा- सरकारी कॉलेजों और निजी विश्वविद्यालयों में जाति-आधारित भेदभाव को हल करने के लिए 'इक्विटी कमेटियों' के गठन के नए UGC नियमों के कुछ प्रावधानों का विरोध केवल सामान्य वर्ग के वे लोग कर रहे हैं जिनकी जातिवादी मानसिकता है, और वे इन्हें साजिश और भेदभावपूर्ण बता रहे हैं. यह बिल्कुल भी उचित नहीं है.  बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी का मानना ​​है कि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लिया जाता तो बेहतर होता है. सरकारों और संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे कदम देश में सामाजिक तनाव का कारण न बनें. उन्होंने दलितों और पिछड़े वर्गों से भी अपील की कि वे स्वार्थी और अवसरवादी नेताओं के भड़काऊ बयानों के शिकार न बनें.  मायावती ने कहा, "ऐसे मामलों में, दलितों और OBC को भी अपने ही स्वार्थी और बिके हुए नेताओं के भड़काऊ बयानों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए, जो उनकी आड़ में गंदी राजनीति करते रहते हैं. इन वर्गों को सतर्क रहना चाहिए." आपको बता दें कि UGC ने 13 जनवरी को नए नियमों को अधिसूचित किया, जिसमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों को देखने और समावेश को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटियों का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया है. नियमों के अनुसार, इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग व्यक्तियों और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए. 2026 के नियम UGC के 2012 के इक्विटी नियमों की जगह लेते हैं, जो काफी हद तक सलाहकारी प्रकृति के थे. इस कदम से उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है, जिसमें आलोचकों का आरोप है कि नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है. इन चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि नए ढांचे के तहत कोई उत्पीड़न या भेदभाव नहीं होगा. प्रधान ने कहा, "मैं सभी को विनम्रतापूर्वक भरोसा दिलाना चाहता हूं कि किसी को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी, कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर नियम का गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा."

मायावती ने अपने जन्मदिन पर खेला ब्राह्मण कार्ड, सरकार में मिलेगा पूरा मान-सम्मान

लखनऊ  बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बड़ा सियासी दांव चला. उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दिनों 2025 में शीतकालीन सत्र में सपा, कांग्रेस और बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की. ब्राह्मण विधायकों ने बीजेपी सरकार में उपेक्षा का मुद्दा उठाया है.  इसी तरह क्षत्रिय समाज के विधायकों की बैठक हुई थी. हाल के ही दिनों में सवर्ण समाज के साथ जो कुछ हुआ है वह किसी से छिपा नहीं है. बसपा सरकार बनने पर पार्टी उन्हें पूरा सम्मान देगी. मायावती ने कहा कि ‘हमने ब्राह्मण समाज को हमेशा प्रतिनिधित्व दिया. ब्राह्मणों को किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. ब्राह्मणों को किसी का बाटी चोखा नहीं खाना चाहिए. ब्राह्मणों पर किसी तरह का अत्याचार न हो इसलिए बीएसपी की सरकार जरूरी है.’ मायावती ने क्षत्रिय विधायकों का भी जिक्र कर कहा कि उनका भी पार्टी में पूरा सम्मान होगा. उन्होंने कहा कि बसपा सरकार में सर्व समाज का कल्याण हुआ. किसी को भी जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना चाहिए. बसपा सरकार में नहीं हुआ दंगा मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में कभी मंदिर-मस्जिद का मुद्दा नहीं उठा. हमारी सरकार में कभी कोई दंगा नहीं हुआ. हमारी सरकार ने सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय के मूल सिद्धांत पर काम करती रही है. इतना ही नहीं हमारी सरकार में कानून व्यवस्था भी मजबूत रही है.मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में जो योजनाएं लाई गईं उन्हीं को आगे के सरकारों ने नाम बदलकर आगे बढ़ाया है. एक्सप्रेसवे को लेकर उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे बनाने का रोडमैप उनकी सरकार में ही बन गया था.  एक आध तो बन भी गए थे. उन्होंने बहुजन समाज को भी चेताते हुए कहा कि जातिवादी पार्टियों के बहकावे में नहीं आना है. अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान मायावती ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह हर स्तर पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और EVM में धांधली और बेइमानी नहीं की जाती है तो परिणाम बेहतर होंगे. हम स्तर पर पार्टी को मजबूत कर रहे हैं और क्या पता बाद में EVM को हटा दिया जाए जैसे अन्य कई देशों में हुआ है. हमारी पार्टी का गठबंधन करके चुनाव लड़ने का अनुभव ये रहा है कि इससे पार्टी को नुकसान होता है और गठबन्धन करके चुनाव लड़ने वाली पार्टी को लाभ मिल जाता है. क्योंकि दलित वोटबैंक तो दूसरी पार्टी को मिल जाता है, लेकिन उनकी पार्टी का वोट हमारी पार्टी को नहीं मिलता है.  हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान सभा और लोक सभा चुनाव अकेले लड़ना बेहतर समझा है, और हम कोई भी चुनाव गठबंधन करके नहीं लड़ेंगे. आगे चलकर जब पूरा भरोसा हो जाएगा कि बसपा से गठबंधन करके वो हमारी पार्टी में भी अपना वोट ट्रासंफर करा सकती है तो सोचा जा सकता, लेकिन उसमें वर्षों लगेंगे.

पीसी के दौरान शॉर्ट सर्किट, मची अफरातफरी; मायावती को तुरंत सुरक्षा में निकाला गया बाहर

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बसपा प्रमुख मायावती के जन्मदिन के मौके पर बड़ा हादसा टल गया। मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) के दौरान ही अचानक शॉर्ट सर्किट हो गया। बिजली को बोर्ड से चिंगारी के साथ ही धुआं निकलने लगा। घटना उस वक्त हुई जब मायावती की प्रेसवार्ता समाप्त होने ही वाली थी। देखते ही देखते पूरे हॉल में धुआं भर गया। इससे वहां मौजूद पत्रकारों और नेताओं में हड़कंप मच गया।   तत्परता से टला बड़ा हादसा प्रेस कॉन्फ्रेंस हॉल में जैसे ही शॉर्ट सर्किट हुआ, बिजली के बोर्ड से चिंगारियां निकलने लगीं और धुएं का गुबार छा गया। हालांकि, मायावती की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गजब की फुर्ती दिखाई। खतरे को भांपते हुए सुरक्षा घेरे ने तत्काल पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को लेकर सुरक्षित तरीके से हॉल से बाहर निकाला और उनके आवास की ओर ले गए। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। अग्नि सुरक्षा उपकरणों का हुआ उपयोग शॉर्ट सर्किट की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद सुरक्षा टीम और बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा संभाला। सुरक्षाकर्मियों ने बिना समय गंवाए वहां रखे अग्नि सुरक्षा उपकरणों (Fire Extinguishers) का इस्तेमाल किया। इससे आग फैलने से पहले ही काबू पा लिया गया। गनीमत रही कि इस घटना में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कुछ देर के लिए वहां अफरातफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा पर उठे सवाल? बसपा प्रमुख की सुरक्षा को देखते हुए इस तरह की तकनीकी खामी पर सवाल उठने लगे हैं। जन्मदिन के बड़े आयोजन और मीडिया के भारी जमावड़े के बीच हुए इस शॉर्ट सर्किट ने सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और तकनीकी टीम सर्किट की जांच कर रही है।  

बसपा परिवार में खुशियों की बहार: आकाश आनंद के घर नन्हीं परी का आगमन, मायावती ने दी बधाई

लखनऊ  बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के परिवार से एक खुशखबरी सामने आई है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक और मायावती के भतीजे आकाश आनंद के घर बच्ची के रूप में एक नई सदस्य का आगमन हुआ है। मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए खुद ही इस बात की जानकारी दी है। वहीं, इस खबर के बाद बसपा समर्थकों और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। मायावती ने सोशल मीडिया एक्स लिखा, "बसपा के राष्ट्रीय संयोज आकाश आनन्द को पुत्री के रूप में परिवार में नई सदस्य की प्राप्ति पर सभी लोगों में खुशी की लहर है। उनके लिए इससे भी ज़्यादा हर्ष व गौरव की बातयह है कि श्री आकाश ने अपनी बेटी को माननीय बहनजी की तरह ही बहुजन समाज के मिशन के प्रति समर्पित करने के लिये तैयार करने की इच्छा व्यक्त की है, जिसका भरपूर स्वाग है। मां और बेटी दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।" बांग्लादेश में हुई हिंसा पर जताई चिंता मायावती ने एक अन्य पोस्ट में बांग्लादेश में हुई हिस्सा पर चिंता जताई। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, "अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के जान, माल व मज़हब को जिस प्रकार से साम्प्रदायिक हिंसा का शिकार बनाकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उससे अपने देश में ही नहीं बल्कि अन्यत्र भी चिन्ता की लहर है। अभी हाल ही में वहां एक दलित युवक की जिस प्रकार से नृशंस हत्या की गयी है। उसको लेकर भारत भर में लोगों का सड़कों पर फूटा आक्रोश स्वाभाविक है, जिसका भारत सरकार को तुरन्त समुचित संज्ञान लेकर आगे हर स्तर पर कुछ और भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की देश को आशा है और यही समय की मांग भी लगती है।" बसपा सुप्रीमो ने आगे लिखा, “वैसे तो अपने देश में भी ख़ासकर दलितों व आदिवासियों पर सदियों से होने वाली जातिवादी द्वेष, जुल्म-ज़्यादती, शोषण व तिरस्कार आदि रुका नहीं है बल्कि हर स्तर पर लगातार जारी है तथा उनकी सुरक्षा को लेकर बने क़ानूनों को एक प्रकार से निष्क्रिय ही बना दिया गया है, किन्तु पड़ोसी देश बांग्लादेश में इसी प्रकार की होने वाली जुल्म-ज्यादती कोई कम गंभीर बात नहीं है बल्कि यह अति-दुखद व चिन्ता की बात है। साथ ही, पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को लेकर ख़ासकर देश में लोगों की चिंताएं लगातार बनी रहती हैं और इस मामले में सरकार अपनी भूमिका भी निभाने का प्रयास करती रहती है, किन्तु हाल के दिनों में बांग्लादेश में जिस प्रकार से भारत व हिन्दू विरोधी घटनायें घटित हो रही हैं। उसको लेकर केन्द्र सरकार को लोगों की अपेक्षा के अनुसार और भी अधिक सक्रियता एवं प्रभावी कदम उठाने की ज़रूरत लग रही है जिसको लेकर जनता का समर्थन अवश्य ही सरकार के साथ होगा।”  

मायावती ने दी उत्तराखंड को 25वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएँ, कहा— ईमानदार शासन से होगा विकास

लखनऊ उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती ने उत्तराखण्ड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उत्तराखंड राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ अर्थात् उत्तराखण्ड रजत जयंती पर राज्य के समस्त भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई।   बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) की उत्तर प्रदेश में मेरी रही सरकार द्वारा कई नए जिले, तहसील व ब्लाक आदि बनाकर उत्तराखंड में जनहित, जनकल्याण व विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पार्टी के समर्थन से बने नये उत्तराखण्ड राज्य के लोगों का जीवन भी ख़ुश एवं खुशहाल हो, यही शुभकामनायें। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन भी सही नीयत व नीति से कार्य करे तो यह बेहतर। जिससे उत्तराखंउ का विकास हो सके। आप को बता दें कि लंबे समय से चली आ रही पृथक राज्य की मांग को स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के एक हिस्से को काट कर 2000 में उत्तराखंड की स्थापना कर नया राज्य बनाया गया था।

BSP सुप्रीमो मायावती आज बिहार दौरे पर, रैली से भरेंगी चुनावी जोश

पटना बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आज बिहार के कैमूर जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करेंगी। बसपा के एक बयान के अनुसार, रैली दोपहर में भभुआ हवाई पट्टी के पास एक मैदान में आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम में आसपास के जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी ने कहा कि बसपा लगभग सभी सीटों पर बिहार विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। बयान में कहा गया है कि राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक और राज्यसभा सांसद रामजी गौतम, राष्ट्रीय समन्वयक अनिल सिंह और राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद कर रहे हैं। 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान बिहार में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी। 2025 के बिहार चुनाव (Bihar Election 2025) में मुख्य मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (Mahagathbandhan) के बीच होगा। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस पार्टी, दीपांकर भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। इसके अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज ने भी राज्य की सभी 243 सीटों पर दावा ठोका है।

UP विधानसभा 2027: मायावती की रणनीति पर BSP कार्यकर्ताओं की बैठक में चर्चा

लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हालांकि, उनके भतीजे आकाश आनंद खराब स्वास्थ्य के कारण इसमें शामिल नहीं हो सके। चुनावी रणनीति और पांचवीं बार सरकार बनाने की कोशिश के चलते मायावती ने ये बैठक बुलाई। बैठक के दौरान, मायावती ने पार्टी नेताओं का चुनावी तैयारियों पर मार्गदर्शन किया और उत्तर प्रदेश में बसपा को पांचवां कार्यकाल दिलाने की रणनीति की रूपरेखा पर चर्चा की। मुख्य चर्चा आगामी चुनावों के प्रति पार्टी के दृष्टिकोण पर केंद्रित रही। बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में निर्देश दिए की बूथ स्तर तक संगठन के गठन का काम अगले तीन महीने में पूरा किया जाए। मान्यवर कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी कार्यकर्ताओं की भीड़ के लिए बूथ स्तर तक पदाधिकारी जाएं और धन्यवाद ज्ञापित करें। सर्व समाज के लोगों को पार्टी से जोड़ें। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटें। 15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन जनकल्याणकारी दिवस के रूप में सभी जिलों में मनाया जाएगा। इसकी अभी से तैयारियां शुरू करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में मायावती और आकाश आनंद के उत्तर प्रदेश भर में होने वाले दौरों के कार्यक्रमों को भी अंतिम रूप दिया गया। ये दौरे पार्टी का आधार मजबूत करने और चुनाव के लिए समर्थन जुटाने के उद्देश्य से किए जाएंगे। साथ ही बैठक में निर्देश दिए गए कि 10 प्रतिशत बचे बूथ हर हाल में नवंबर से जनवरी तक गठित किए जाएं। चार बार बसपा की सरकार रही है उस समय सरकार ने जो काम किए वह जन-जन तक पहुंचाए जाएं। अपनी जमीनी रणनीति के अलावा, बसपा अपनी भाईचारा समितियों के जरिए मुसलमानों, ओबीसी, दलितों और ब्राह्मणों सहित विभिन्न समुदायों का समर्थन मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह चुनावों से पहले एक व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाए रखने के पार्टी के निरंतर प्रयास को दर्शाता है।  

मायावती की रणनीति में 2007 की झलक, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं पर चुप क्यों हैं बीएसपी प्रमुख?

लखनऊ  बसपा प्रमुख मायावती ने क़रीब 9 साल बाद गुरुवार को लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन कर 2027 के लिए चुनावी हुंकार भर दी. बसपा के संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर मायावती ने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर निशाना साधकर उत्तर प्रदेश की दो ध्रुवीय हो चुकी राजनीति को त्रिकोणीय बनाने की कवायद करती नज़र आईं. कांशीराम स्मारक स्थल से मायावती ने अपने खिसके सियासी जनाधार को वापस लाने की रणनीति का ख़ुद ख़ुलासा किया. 2027 की चुनावी जंग फ़तह करने के लिए 2007 जैसे सियासी समीकरण बनाने का ताना-बाना बुनती नज़र आईं. बसपा के दलित वोट बैंक को पहले से ज़्यादा मज़बूत करने के साथ ओबीसी, अति-पिछड़ों के साथ ब्राह्मण-ठाकुर वोटों की केमिस्ट्री बनाने का दाँव चला. मायावती ने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा कि पिछड़े और अति-पिछड़ा तबक़े के साथ ही ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को बसपा से जोड़ने पर उनकी पार्टी काम करेगी. महारैली में मायावती ने ऐलान किया कि राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को ब्राह्मण, विधायक उमाशंकर सिंह को क्षत्रिय और प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को अति-पिछड़ा और पिछड़ा समाज को जोड़ने का ज़िम्मा सौंपा. हालाँकि, मुस्लिम समाज को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले. 2007 के फ़ॉर्मूले से 2027 जीतने का प्लान बसपा की बहुजन पॉलिटिक्स के साथ मायावती ने 2007 में सर्वजन की सियासत पर क़दम बढ़ाया था, जिसके दम पर पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई. मायावती ने दलित वोटों के साथ अति-पिछड़े, मुस्लिम और ब्राह्मण की सियासी केमिस्ट्री बनाई थी. उत्तर प्रदेश के 2027 चुनाव को देखते हुए बसपा ने इस साल फ़रवरी से ही सोशल इंजीनियरिंग पर काम शुरू कर दिया था. इसके तहत मार्च में हर ज़िले में भाईचारा कमेटी का गठन किया था, जिसके ज़रिए पिछड़ों को जोड़ने की योजना थी. इसके लिए उन्होंने विश्वनाथ पाल के नाम का ज़िक्र किया, जो बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं. बसपा बना रही नई सोशल इंजीनियरिंग बसपा से पिछड़ा और अति-पिछड़ों को जोड़ने के लिए इन कमेटियों की हर दो महीने में बैठकें भी मायावती कर रही हैं. इस बीच अब ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को साथ लाने के लिए पार्टी मिशन मोड पर काम करेगी. मायावती ने ब्राह्मण समाज को जोड़ने का बीड़ा सतीश चंद्र मिश्र को दे रखा है तो ठाकुर वोट के लिए उमाशंकर सिंह को ज़िम्मा दिया है. मायावती ने इन दोनों नेताओं का नाम भी लिया. मायावती ने गुरुवार को भाषण में भी ग़रीब सवर्णों का कई बार ज़िक्र करते हुए कहा कि भाजपा, सपा और कांग्रेस की सरकारों में इस तबक़े की हालत लगातार ख़राब हुई और बसपा की सरकार बनने के बाद सर्व समाज को रोज़ी-रोटी और रोज़गार का संकट नहीं होने दिया जाएगा. सतीश चंद्र मिश्र के बेटे कपिल मिश्र के काम को भी सराहा. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कपिल ने कार्यक्रम में फ़्री मेडिकल समेत दूसरी व्यवस्थाओं में मदद की है, वह पार्टी के प्रति उनके सेवा भाव को दिखाता है. मुस्लिमों पर क्यों मायावती रहीं ख़ामोश? मायावती ने मुस्लिम वोटों पर अपने पत्ते नहीं खोले, लेकिन रैली के मंच पर पूर्व सांसद मुनकाद अली, शमसुद्दीन राईन और पूर्व एमएलसी नौशाद अली को जगह देकर मुस्लिम समाज को साथ आने व सम्मान देने का संदेश दिया है. बसपा के एक वरिष्ठ नेता की मानें तो मुस्लिम समाज के बीच अभी बसपा को लेकर उहापोह की स्थिति है, लेकिन उसे जोड़ने के लिए अलग से योजना पर काम चल रहा है, जिसका ख़ुलासा बाद में किया जाएगा. हालाँकि, मायावती ने ज़िला से लेकर मंडल और प्रदेश स्तर पर संगठन में मुस्लिम पदाधिकारी बनाकर बसपा यह संदेश देने का प्रयास किया है कि मुस्लिम समाज के लिए पार्टी के दरवाज़े खुले हैं, लेकिन सपा के साथ जिस तरह एकमुश्त जुड़े हैं, उसके चलते फ़िलहाल मुख्य फ़ोकस नहीं है. मायावती समझ रही हैं कि मुस्लिम वोट तभी बसपा के साथ जुड़ेगा, जब उसका बहुजन वोट साथ आ जाएगा, इसीलिए पूरा फ़ोकस दलित और पिछड़े वोटबैंक पर है. रैली में मायावती ने अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुस्लिमों का विकास न होने व जान-माल का ख़तरा होने की बात कहकर उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास किया. 2027 जीतने की मायावती ने भरी हुंकार मायावती ने साफ़ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ेंगी. उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव जीतने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगी. बसपा प्रमुख ने पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को अपने से पहले बोलने का मौक़ा देकर पार्टी के भविष्य की तस्वीर भी साफ़ कर दी. उन्होंने कहा कि आकाश अब पार्टी के मूवमेंट से पूरी तरह जुड़ चुके हैं. पूरी लगन और मेहनत से काम कर रहे हैं, जिस तरह आपने कांशीराम के बाद मेरा साथ दिया, उसी तरह आकाश का भी देना है. इस तरह आकाश को भविष्य का नेता बता दिया. मायावती ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में बहुमत की सरकार बनाकर अपना 15 साल का वनवास ख़त्म करने के लिए रैली के ज़रिए तगड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. क़रीब तीन लाख लोगों की क्षमता वाला कांशीराम स्मारक स्थल ख़चाख़च भरा रहा तो बाहर भी भीड़ दिखाई दी, जो बसपा के लिए 2027 से पहले सियासी संजीवनी से कम नहीं है.

चंद्रशेखर रावण पर गंभीर आरोप, डॉ. रोहिणी घावरी ने की खुलकर बातें, शराब को लेकर भी विवाद

इंदौर  उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर इंदौर की पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने उत्पीड़न, धोखेबाजी और कई दलित लड़कियों के शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. रोहिणी का कहना है कि चंद्रशेखर ने शादी का झांसा देकर उनके साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए और उन्हें धोखे में रखा। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उनके पास चंद्रशेखर के खिलाफ वीडियो के रूप में पुख्ता सबूत हैं, जिसमें वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और इसकी सुप्रीमो मायावती के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। 'अन्याय के खिलाफ है मेरी लड़ाई' डॉ. रोहिणी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह जून से ही चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रही हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने पर उन्होंने वकील की सलाह पर दिल्ली की एक अदालत में याचिका दायर की है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि वह किसी राजनीतिक दल के इशारे पर यह सब कर रही हैं। रोहिणी ने कहा, "मेरी लड़ाई किसी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ है। अगर किसी को लगता है कि मैं किसी के कहने पर काम कर रही हूं, तो वे इसे सबूतों के साथ समाज के सामने साबित करें।" जबकि रोहिणी का कहना है कि मैंने समाज को जागरूक करने के लिए वीडियो शेयर किया था। बताया था कि लीडर्स समाज को झूठा संदेश देते हैं। एक तरफ तो आप प्रेरित करते हो कि शराब नहीं पीना चाहिए। मैंने वही दिखाया जो सच है। रात को 1 बजे ग्रीन टी कौन पीता है। आप एल्कोहोलिक हो तो झूठ मत बोलो। कई दलित लड़कियों के शोषण का आरोप रोहिणी ने दावा किया कि चंद्रशेखर ने उनके अलावा भी कई दलित लड़कियों का शोषण किया है। उन्होंने कहा, "मेरी कुछ ऐसी लड़कियों से बात हुई है, जिन्हें मेरी तरह ही शादी का झांसा देकर रिश्ते में रखा गया और बाद में छोड़ दिया गया।" उन्होंने 2017 के एक मामले का भी जिक्र किया, जिसमें सहारनपुर की एक जाटव लड़की ने चंद्रशेखर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसकी आवाज दबा दी गई। शादी और निजी संबंधों पर बड़ा खुलासा डॉ. घावरी ने चंद्रशेखर की शादी को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर ने अपनी शादी की बात छिपाई थी और इसे एक 'कॉन्ट्रैक्चुअल मैरिज' बताया था, जिससे वह जल्द छुटकारा पाना चाहते थे। रोहिणी के अनुसार, चंद्रशेखर की मां ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके बेटे की शादी नहीं हुई है, जबकि चंद्रशेखर को एक बेटा भी है। मायावती के लिए कहे अपशब्द रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने बसपा सुप्रीमो मायावती के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा, "मेरे पास ऐसे वीडियो हैं, जिन्हें मैं जांच एजेंसियों को देने के लिए तैयार हूं। वह (चंद्रशेखर) नहीं चाहते थे कि कोई और दलित लीडरशिप में आगे बढ़े और इसीलिए वे मायावती जी की छवि खराब करने की कोशिश करते थे।"