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उत्तर प्रदेश में अब नक्शा पास कराने की झंझट खत्म, घर के साथ आसानी से खोलिए दुकान

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी निर्माण को लेकर बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है। अब अगर आप मकान बना रहे हैं और उसके साथ दुकान भी खोलना चाहते हैं, तो नक्शा पास कराने की झंझट नहीं होगी। साथ ही छोटे भूखंडों पर निर्माण के लिए नक्शा पास कराना अब अनिवार्य नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के शहरी इलाकों के लिए नई भवन निर्माण उपविधियां और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन-2025 लागू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत अब बड़े शहरों में 24 मीटर और छोटे शहरों में 18 मीटर चौड़ी सड़कों पर आवासीय भवनों के साथ दुकानें बनाने की छूट दी जाएगी। मकान में ही बना सकेंगे दुकान नई व्यवस्था के तहत अब विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास कराने के लिए लंबी प्रक्रियाओं और पैसों की वसूली पर भी लगाम लगाने की कोशिश की गई है. सरकार ने 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक प्लॉट पर नक्शा पास कराने की बाध्यता खत्म कर दी है. इन भूखंडों पर लोग सिर्फ विकास प्राधिकरण में रजिस्ट्रेशन कराकर निर्माण करा सकेंगे. यूपी सरकार ने पुराने नियमों को बदलते हुए ‘उत्तर प्रदेश विकास प्राधिकरण भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां और आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025’ लागू करने का फैसला किया है. अब बड़ी आबादी वाले शहरों में 24 मीटर और कम आबादी वाले शहरों में 18 मीटर चौड़ी सड़क पर मकान के साथ दुकान बनाने की अनुमति होगी. बिल्डिंग बनाने का नियम भी आसान सरकार ने बिल्डिंग बनाने के नियम भी आसान कर दिए हैं. 45 मीटर चौड़ी सड़कों पर ऊंची इमारतें बनाने पर अब कोई एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो की सीमा नहीं होगी. वहीं, छोटे प्लॉट्स के लिए भी एफएआर बढ़ा दिया गया है. इसके अलावा ग्रीन रेटेड भवनों को अतिरिक्त एफएआर का फायदा दिया जाएगा. अब 18 मीटर चौड़ी सड़कों पर शॉपिंग मॉल बनाने की भी इजाजत दी गई है. वहीं, 3000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंड पर ही अस्पताल और शॉपिंग मॉल बन सकेंगे. छोटे भूखंडों पर डॉक्टर्स, आर्किटेक्ट्स, वकीलों जैसे प्रोफेशनल्स को अपने घर का 25 फीसदी हिस्सा दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल करने की छूट मिलेगी, जिसके लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं होगी. पार्किंग के लिए नई व्यवस्था पार्किंग को लेकर भी नई व्यवस्था की गई है. 4000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर अलग से पार्किंग ब्लॉक बनाना होगा, पोडियम और मेकेनाइज्ड ट्रिपल स्टैक पार्किंग की भी अनुमति दी गई है. इसके अलावा अस्पतालों में एंबुलेंस पार्किंग और स्कूलों में बस पार्किंग और पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन बनाने के भी नए प्रावधान किए गए हैं. सरकार का दावा है कि इन बदलावों से शहरी विकास को नई रफ्तार मिलेगी और आम लोगों को राहत भी. सरकार ने नक्शा पास कराने की बाध्यता भी काफी हद तक खत्म कर दी है। अब 100 वर्ग मीटर तक के आवासीय और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भूखंडों पर बिना नक्शा पास कराए निर्माण किया जा सकेगा। केवल विकास प्राधिकरण में पंजीकरण कराना जरूरी होगा। इससे आम लोगों को न केवल राहत मिलेगी बल्कि भ्रष्टाचार और फर्जी वसूली पर भी लगाम लगेगी। इतना ही नहीं, जिन क्षेत्रों में ले-आउट पहले से स्वीकृत है, वहां 500 वर्ग मीटर के आवासीय और 200 वर्ग मीटर के व्यावसायिक भूखंडों के लिए नक्शा ऑनलाइन दाखिल करने के बाद उसे “ट्रस्ट बेस्ड अप्रूवल” माना जाएगा। यानी संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी पर नक्शा स्वतः स्वीकृत माना जाएगा, जिससे प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। इस नई व्यवस्था से शहरों में मिश्रित भूमि उपयोग (मल्टी यूज जोन) को बढ़ावा मिलेगा। आम नागरिक अब सरल तरीके से घर और व्यवसाय एक साथ शुरू कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम शहरी विकास को गति देगा और छोटे निवेशकों को भी प्रोत्साहित करेगा।  

मौलवियत की पढ़ाई करने वाली इस लड़की से मौलाना 3 तक करता रहा रेप ! मेरठ का ये मामला चौंका देगा, 3 बार गर्भपात

 मेरठ  उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैवानियत का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मदरसा छात्रा को मौलाना ने अपनी हैवानियत का शिकार बनाया। छात्रा के साथ वह तीन साल से दुराचार करता रहा। इस बीच छात्रा तीन बार प्रेग्नेंट हो गई। पत्नी के साथ मिलकर मौलाना ने छात्रा का गर्भपात कराया। बच्ची जब शिकायत करने लगी तो उसके बाल काट दिए। उसे पागल करार दे दिया। लोगों को उसकी बात पर भरोसा न करने के लिए मनाया। छात्रा ने जब घर लौटने की बात कही तो मामला बिगड़ गया। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ है। पुलिस आरोपी मौलाना के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई में जुट गई है। अब जानिए पूरा मामला जानकारी मिली है कि यह पूरा मामला मेरठ के लोहिया नगर थाना क्षेत्र के एक मदरसे का है. यहां बिहार की रहने वाली 22 वर्षीय एक युवती ने पुलिस को शिकायत कर बताया कि 3 साल से एक मौलाना उसके साथ रेप कर रहा था. मौलाना की पत्नी भी उसका साथ देती थी. विरोध करने पर उसे पीटा जाता था. युवती का आरोप है कि उसको बंधक भी बनाया गया और जब वह गर्भवती हो गई तो उसका गर्भपात भी करा दिया गया था. पुलिस ने युवती की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी मौलाना को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने क्या बताया? इस मामले में मेरठ के एसपी (सिटी) आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि 'थाना लोहिया नगर पुलिस को एक युवती द्वारा तहरीर दी गई थी जिसमें एक मौलाना पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा तुरंत कार्रवाई करते हुए मौलाना को गिरफ्तार कर लिया गया है. महिला की तहरीर पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया है. महिला के बयान भी कराए गए हैं जिसमें उसने मौलाना पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मौलाना से पूछताछ की जा रही है. मौलाना और युवती आपस में रिश्तेदार हैं, जो भी आरोप हैं, उनकी जांच की जा रही है. इसमें शुरुआती पूछताछ में अभी प्रेम प्रसंग का मामला सामने आ रहा है. जो भी तथ्य इसमें सामने आएंगे उसके अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.' मेरठ जिले के लोहियानगर क्षेत्र स्थित एक मदरसे से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। बिहार से मौलवियत की पढ़ाई करने आई 22 वर्षीय छात्रा के साथ वहां के मौलाना ने तीन साल तक लगातार दुष्कर्म किया। पीड़िता ने थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। वहीं, मौलाना की हैवानियत की दास्तां से हर कोई हैरान रह गया। तीन बार करवाया गर्भपात छात्रा का आरोप है कि मौलाना ने उसे कई बार बंधक बनाकर उसकी अस्मिता से खिलवाड़ किया। इस दौरान वह तीन बार गर्भवती हुई। लेकिन, मौलाना ने अपनी पत्नी की मदद से हर बार उसका गर्भपात करा दिया। पीड़िता का कहना है कि विरोध करने पर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। छात्रा को बता दिया पागल पीड़िता जब इस पीड़ा की जानकारी पड़ोसियों को देने की कोशिश करती, तो उसे पागल करार दे दिया जाता। इतना ही नहीं, उसे डराने और चुप कराने के लिए आरोपियों ने उसके बाल भी काट दिए। आखिरकार, जब छात्रा ने 9 जुलाई को ट्रेन से अपने घर लौटने का निर्णय लिया। टिकट बुक कराई तो मौलाना भड़क उठा और उसके खिलाफ हिंसक हो गया। पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना गुरुवार को मौलाना ने छात्रा को एक बार फिर बंधक बना लिया और उसके साथ मारपीट कर दुष्कर्म किया। पीड़िता के चीखने-चिल्लाने पर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। लड़की को मौलाना के चंगुल से आजाद कराया। इसके बाद पीड़िता पड़ोसियों के साथ थाने पहुंची। उसने पुलिस को घटना की जानकारी दी। मामला पुलिस में पहुंचने के बाद मौलाना फरार हो गया। लोहियानगर थाना पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर मौलाना की तलाश में जुट गई है। एसएचओ लोहिया नगर ने बताया कि पीड़िता के बयान दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम में आयोजित आम महोत्सव 2025 का मुख्यमंत्री योगी ने किया शुभारंभ

लखनऊ लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम में तीन दिवसीय आम महोत्सव का शुभारंभ आज से हो गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महोत्सव का शुभारंभ किया। इस महोत्सव में आम की 800 प्रजातियों को देखने और चखने का अवसर लोगों को मिलेगा। इस मौके पर सीएम योगी ने हरी झंडी दिखाकर आम के कंटेनर लंदन और दुबई के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विजन के अनुरूप हमारा किसान आज कृषि की उन्नत तकनीकों को अपना कर लाभ कमा रहा है। आम महोत्सव सिर्फ महोत्सव नहीं है। यह तकनीक के विकास का माध्यम बन रहा है। डबल इंजन की सरकार ने चार पैक हाउस बनाए हैं। इससे निर्यात बढ़ रहा है। औद्यानिक फसलों से जुड़े बागवान को एक्सपोर्ट के लिए प्रशिक्षित करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का आम विदेश भेजा जा रहा है। भविष्य में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। उत्तर प्रदेश में 25 से 30 फीसदी जीडीपी कृषि की है। इसे बढ़ा रहे हैं। विकसित भारत की संकल्पना आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड में जल परियोजनाएं आई। जल की समस्या का समाधान हुआ है। वहां पैदावार बढ़ी है। बहुफसली खेती हो रही है। आलू के बाद मक्का की खेती हो रही है। एक एकड़ मक्का में एक लाख का मुनाफा हो रहा है। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कर रहे हैं। सभी मिलकर खेती और अन्नदाता को आगे बढ़ा रहे हैं। मेडिसिन प्लांट भी लग रहे हैं। इससे आर्थिक समृद्धि आएगी। उन्हांने कहा कि  हमें ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। औद्यानिक विशेषज्ञों को मदद के लिए तैयार रहना होगा। इस मौके पर उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि हमें आम प्रसंस्करण की यूनिट बढ़ाने की जरूरत है जिससे कि पूरे साल प्रदेश के लोगों को आम मिल सके। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में 61 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन हो रहा है। प्रदेश के सभी जिलों की जलवायु के अनुसार वहां आम की पौध उपलब्ध कराई जा रही है जिससे हर जिले में उत्पादक बनें। इसके लिए 28 करोड़ पौधे नर्सरी से बंटवाए गए हैं। प्रदेश में कृषि और उद्यान के लिए क्षेत्रफल लगातार घट रहा है इसलिए उद्यान विभाग की कोशिश है कि ऐसी फसल उपजाई जाए जिसमें कम क्षेत्रफल में अधिक मूल्य मिल सकें। उन्होंने कहा कि जितने क्षेत्रफल में गेहूं 38000 का होता है उतने क्षेत्रफल में 15 लाख की शिमला मिर्च तैयार होती है। उद्यान मंत्री ने बताया कि किसानों के उत्पादों को दुनिया के बाजार में कम लागत में पहुंचाने के लिए जेवर एयरपोर्ट तैयार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास इंटीग्रेडेट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट पार्क का भी निर्माण किया जा रहा है, जिसके माध्यम से दुनिया के बाजार के अनुरूप प्रदेश के किसानों के उत्पादों को तैयार किया जाएगा।

क्या इस व्यवस्था को भाजपा-शासित अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा? : मायावती

लखनऊ बिहार राज्य के पटना विश्वविद्यालय के पांच कॉलेजों में लॉटरी के माध्यम से प्रधानाचार्यों (प्रिंसिपल) की नियुक्ति की गई है। यह मामला पूरे देश में चर्चा का बिषय बना हुआ है। इस नियुक्ति को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस तरह से हुई नियुक्ति को लेकर सवाल उठाया और कहा कि किसी भी विशिष्ठ क्षेत्र में इस प्रकार की मनमानी वाला विकृत प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।  मायावती ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि पटना विश्वविद्यालय के पांच प्रतिष्ठित कॉलेजों में 'लाटरी' की नई व्यवस्था के तहत प्रिंसिपलों की नियुक्ति का मामला दिलचस्प होने के कारण देश भर में खासकर मीडिया एवं शिक्षा जगत में काफी चर्चाओं में है। उन्होंने कहा कि स्थापित परम्परा से हटकर 'लॉटरी' के जरिए नियुक्ति की एक प्रकार से विचित्र व्यवस्था लागू करने के कारण केवल कला (आर्ट्स) विषयों की पढ़ाई वाले 1863 में स्थापित पटना कॉलेज में कैमिस्ट्री के प्राध्यापक प्रो. अनिल कुमार प्राचार्य बन गये हैं जबकि बिहार विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान की प्राचार्य प्रो. अल्का यादव विज्ञान की उच्च शिक्षा के लिए प्रख्यात पटना साइंस कॉलेज की नई प्रिंसिपल नियुक्त हुई हैं।  बसपा प्रमुख ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि इसी प्रकार की नियुक्ति वाणिज्य महाविद्यालय में भी हुई है। यहां पहली बार कला संकाय की महिला प्राध्यापक डॉ. सुहेली मेहता प्राचार्य बनी हैं। हालांकि उनके विषय की पढ़ाई यहां इस कॉलेज में नहीं होती है। साथ ही, महिला शिक्षा जगत में प्रसिद्ध मगध महिला कॉलेज को लम्बे इतिहास में दूसरी बार पुरुष प्रिंसिपल मिले हैं। प्रो. एन.पी. वर्मा यहां के नये प्राचार्य होंगे जबकि प्रो. योगेन्द्र कुमार वर्मा की लॉटरी पटना लॉ कालेज के प्रिन्सिपल के रूप में निकली है। इसको लेकर लोगों में उत्सूकता है कि 'पारदर्शिता व तटस्था' के नाम पर बिहार सरकार तथा वहां के चांसलर ने भी इस प्रकार लॉटरी के माध्यम से की गयी प्रिंसिपल की नियुक्तियों को सही ठहरा कर क्या इस व्यवस्था को भाजपा-शासित अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा? मायावती ने कहा कि वास्तव में कॉलेजों के प्रिन्सिपल जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी पूरी पारदर्शिता, तटस्था व ईमानदारी के साथ नियुक्ति नहीं कर पाने की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ही ऐसा घातक प्रयोग करना लोगों की नजर में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधार का कम तथा खराब करने वाला ज्यादा प्रतीत होता है। इसी प्रकार, इसी परम्परा को अपना कर आगे चलकर मेडिकल कॉलेजों, आईआईटी व अंतरिक्ष विज्ञान आदि जैसी सांइस की उच्च व विशिष्ठ संस्थाओं में भी गै़र-एक्सपर्ट नियुक्त किये जायें तो यह ताज्जुब की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आगे लिखा कि वैसे हमारी पार्टी का यह मानना है कि किसी भी विशिष्ठ क्षेत्र में इस प्रकार की मनमानी वाला विकृत प्रयोग ना किया जाये तो उचित है। इससे पहले कि यह रोग गंभीर होकर और ज़्यादा फैले केन्द्र की सरकार को इसका उचित व समुचित संज्ञान लेकर जन व देशहित में जितनी जल्द कार्रवाई करें उतना बेहतर है।  

मुहर्रम जुलूस: शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सभी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 11 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावण मास को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। 6 जुलाई को मुहर्रम का जुलूस भी निकाला जाएगा। इसे शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सभी जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। कांवड़ यात्रा और मोहर्रम को लेकर सुरक्षा, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जिला प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी करने का दावा किया है। डीएम प्रयागराज रविंद्र कुमार मांदड़ ने बताया कि कांवड़ मार्गों पर सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता के लिए इंजीनियरिंग विभाग और नगर प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं। संगम से वाराणसी तक जाने वाले प्रमुख मार्ग, जहां कांवड़िए जल लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर जाते हैं, उनकी मरम्मत शुरू हो चुकी है। डीएम के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के दौरान मांस और शराब की दुकानें बंद रहेंगी। डीजे की ध्वनि को भी नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। दशाश्वमेध घाट, जहां कांवड़िए जल भरने आते हैं, वहां महाकुंभ के लिए बने नए पक्के घाट से श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी। घाट पर जल पुलिस, एसडीआरएफ और गोताखोरों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। डीएम ने बताया कि शहर के प्रमुख शिवालयों जैसे मनकामेश्वर, सोमेश्वर और अन्य मंदिरों में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मोहर्रम के दौरान ताजियों की ऊंचाई 10 फीट से अधिक न हो, यह निर्देश दिया गया है ताकि बिजली के तारों से दुर्घटना न हो। बीते वर्षों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए इस बार पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं। ताजिया जुलूसों के लिए भी शांति समिति की बैठकों में दिशा-निर्देश दिए गए हैं। डीएम रवींद्र कुमार मांदड़ ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी कांवड़ मार्गों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत शुरू की गई है। थाना और तहसील स्तर पर शांति समितियों की बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि प्रयागराज प्रशासन ने दोनों आयोजनों को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  

श्रीकृष्ण जन्म भूमि-शाही ईदगाह मामले में हिंदू पक्ष को बड़ा झटका, HC ने हिंदू पक्ष की अर्जी खारिज की

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद विवाद मामले में मंदिर पक्ष की वह अर्जी खारिज कर दी है जिसमें भविष्य की सभी कार्यवाहियों में 'ईदगाह मस्जिद' को 'विवादित संरचना' के रूप में संदर्भित करने की मांग की गई थी। यह अर्जी मामले में पक्षकार और अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने दाखिल की थी। बीती 23 मई को अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की एकल पीठ ने यह निर्णय सुनाया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि मौजूद तथ्यों और याचिका के आधार पर मथुरा की शाही ईदगाह को फिलहाल विवादित ढांचा घोषित नहीं किया जा सकता है. जबकि, हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि ईदगाह का निर्माण श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर स्थित अति प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था. फिलहाल, सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं.  इस पूरे मामले में हिंदू पक्ष के वकील महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट में 5 मार्च 2025 को मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किए जाने की मांग करते हुए एक एप्लीकेशन दी गई थी. इस पर 23 मई को कोर्ट में बहस पूरी हो गई थी और कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जो आज सुनाया गया.  हिंदू पक्षकार के मुताबिक, हमने हाई कोर्ट के समक्ष कहा था कि वहां पहले मंदिर था. वहां पर मस्जिद होने का कोई साक्ष्य आज तक शाही ईदगाह मस्जिद पक्ष कोर्ट में पेश नहीं कर सका है. ऐसे में इसे मस्जिद क्यों कहा जाए, विवादित ढांचा घोषित किया जाए. जैसे कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना निर्णय देने से पहले बाबरी मस्जिद को विवादित ढांचा घोषित किया था, उसी तरह शाही ईदगाह मस्जिद को भी विवादित ढांचा घोषित करना चाहिए. हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कोर्ट के समक्ष कहा था कि वहां पहले मंदिर था। वहां पर मस्जिद होने का कोई साक्ष्य आज तक शाही ईदगाह मस्जिद पक्ष न्यायालय में पेश नहीं कर सका। न खसरा खतौनी में मस्जिद का नाम है, न नगर निगम में उसका कोई रिकॉर्ड। न कोई टैक्स दिया जा रहा। यहां तक कि बिजली चोरी की रिपोर्ट भी शाही ईदगाह प्रबंध कमेटी के खिलाफ हो चुकी है, फिर इसे मस्जिद क्यों कहा जाए? पक्षकार ने इसके लिए मासरे आलम गिरी से लेकर मथुरा के कलेक्टर रहे एफएस ग्राउस तक के समय में लिखी गई इतिहास की पुस्तकों का हवाला दिया था। श्रीकृष्ण जन्मभूमि एवं शाही ईदगाह मस्जिद केस के मंदिर पक्षकार ने बताया कि हाईकोर्ट में 5 मार्च 2025 को ये प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर न्यायाधीश राम मनोहर नारायण मिश्र के न्यायालय में बहस पूरी हो चुकी है। न्यायालय ने अपना ऑर्डर रिजर्व कर लिया। महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि चार जुलाई को कोर्ट का निर्णय आएगा। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले देश भर में हिंदू चेतना यात्राएं निकली जा रही हैं। इसे लेकर मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर अपनी आपत्ति दर्ज की थी। जानिए पूरा विवाद  गौरतलब है कि पूरा विवाद मथुरा के कटरा केशव देव क्षेत्र की 13.37 एकड़ जमीन पर है, जिसमें मंदिर और मस्जिद दोनों बनी हैं. जानकारी के मुताबिक, कुल जमीन में 11 एकड़ जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि है, जबकि बाकीजमीन पर ईदगाह होने का दावा है. हिंदू पक्ष पूरी जमीन को श्रीकृष्ण जन्मभूमि बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इससे इनकार करता है.  हिंदू पक्ष के अनुसार, 1670 में औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई थी. वहीं, मुस्लिम पक्ष इस दावे को खारिज करता रहा है. आज यानी 4 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा हम इसे विवादित ढांचा नहीं घोषित कर सकते हैं.   

उपचारिका विदेह कुमारी पर मरीजों से अवैध वसूली आरोप मामले में किया निलंबित

लखनऊ मरीजों से अवैध वसूली के आरोपों में फर्रुखाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में तैनात उपचारिका को निलंबित कर दिया गया है। जबकि कुशीनगर मेडिकल कॉलेज की महिला डॉक्टर पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे हैं। उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मेडिकल संस्थान में डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव को कार्यवाही के लिए निर्देशित किया है। फर्रुखाबाद स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में तैनात उपचारिका विदेह कुमारी पर मरीजों से अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। साथ ही अस्पताल में अराजकता फैलाने के भी आरोप हैं। शिकायतों का डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया। उपचारिका को निलंबित करते हुए बहराइच मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनाती के आदेश दिए गए हैं। साथ ही प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को निर्देश दिए हैं कि उपचारिका को आरोप पत्र देकर कठोर विभागीय कार्यवाही की जाए। कुशीनगर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में आब्स एण्ड गायनी विभाग में सहायक आचार्य के पद पर तैनात डॉ. रूचिका सिंह पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को डॉ. रूचिका के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं। आजमगढ़ सीएचसी में तैनात डॉ. सुरजीत सिंह द्वारा हरदोई के जिला चिकित्सालय में तैनाती के दौरान मरीजों से दुर्व्यवहार एवं दूसरी गंभीर शिकायतें मिली हैं। डॉ. सुरजीत पर विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की गई है। बहराइच की पीएचसी गंगवल में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. विकास वर्मा ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र-पयागपुर में गलत मेडिकल सर्टिफिकेट बनाया था। जांच के बाद डॉ. विकास की वेतन वृद्धि एक वर्ष के रोकते हुए परिनिन्दा का दंड दिया गया है। उधर, हमीरपुर मुख्य चिकित्साधिकारी, डॉ. गीतम सिंह ने महोबा में उप्र विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासनिक विलम्ब समिति की दिनांक 25 अप्रैल 2025 की बैठक में सूचना सहित प्रतिभाग न किये जाने के आरोप लगे हैं। यह शासकीय व पदीय दायित्वों में लापरवाही एवं उदासीनता है। लिहाजा डॉ. गीतम से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। मरीजों से अभद्रता, स्पष्टीकरण तलब उधर, रायबरेली के खीरों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. इफ्तिखार अहमद पर महिला रोगियों से अभद्रता किये जाने के आरोप हैं। उच्च आदेशों की अवहेलना करने का भी इल्जाम है। लिहाजा डॉ. इफ्तिखार से स्पष्टीकरण मांगा गया है।  

कांवड़ यात्रा को लेकर गाजियाबाद में ट्रैफिक प्लान तैयार, कई रूट होंगे डायवर्ट, यात्रा को लेकर तैयारी तेज

 गाजियाबाद सावन महीने की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन होकर कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने-अपने शहरों की ओर निकलते हैं. इस दौरान सड़क पर भारी भीड़ होती है, जिसे देखते हुए ट्रैफिक और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. खासकर दिल्ली-मेरठ रोड पर नियम और कड़े किए जा रहे हैं. वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से जाना होगा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, रूट डायवर्जन प्लान लागू होने के बाद दिल्ली से आने वाले वाहन चौधरी चरण सिंह मार्ग (रोड नंबर 58) का प्रयोग कर यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) होते हुए एनएच-9 से जा सकेंगे। वहीं, दिल्ली से जिन्हें हरिद्वार, अमरोहा, मुरादाबाद और लखनऊ आदि स्थानों पर जाना है, वे यूपी गेट से प्रवेश कर एनएच-9 का प्रयोग करते हुए डासना से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे होते हुए जा सकेंगे। इसके अलावा एनएच नौ के जरिये हापुड़ होते हुए मेरठ भी जा सकेंगे। वहीं, बुलंदशहर और हापुड़ की ओर से आने वाले वाहन लालकुआं से सीधे गाजियाबाद शहर की ओर न आकर एनएच-9 का प्रयोग करते हुए दिल्ली जा सकेंगे। जीटी रोड भी बंद होगा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, सावन के पहले सोमवार से जीटी रोड स्थित दूधेश्वरनाथ मंदिर के आसपास का मार्ग बंद करने की योजना है। अभी बनी योजना के अनुसार, चौधरी मोड़ से हापुड़ तिराहा या मेरठ तिराहा की ओर जाने वाले वाहन घंटाघर फ्लाईओवर से होकर भेजे जा सकते हैं।फ्लाईओवर के नीचे से किसी भी वाहन को जाने नहीं देने की योजना है। विजयनगर की तरफ से भी वाहन को गोशाला बैरियर से आगे दूधेश्वरनाथ की ओर नहीं भेजने की योजना है। हालांकि, यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की भीड़ देखते हुए लागू की जाएगी। मेरठ तिराहे पर कंट्रोल रूम बनाया गया नगर निगम ने कांवड़ यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है। मेरठ तिराहे पर कांवड़ यात्रा पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बना दिया है। 200 से ज्यादा स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़कर कांवड़ यात्रा पर नजर रखी जाएगी। दस जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। नगर आयुक्त ने तीन दिन पहले बैठक कर अधिकारियों को कांवड़ यात्रा की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में निगम के निर्माण विभाग ने मेरठ तिराहे पर कंट्रोल रूम बना दिया है। यह मुख्य कंट्रोल रूम है। कंट्रोल रूम से मेरठ रोड और जीटी रोड पर नजर रखी जाएगी। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ मार्ग पर 24 घंटे सफाई व्यवस्था रहेगी। मेरठ रोड पर दस किलोमीटर तक अस्थाई प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। पड़ोसी राज्यों और जनपदों के अधिकारी मौजूद रहे पुलिस लाइन में हुई समन्वयक बैठक में बताया गया कि तीन मुख्य कंट्रोल रूम, एक यातायात कंट्रोल रूम के अलावा 12 सब कंट्रोल रूम के जरिए पूरे कांवड़ मार्ग और यात्रा पर नजर रखी जाएगी। बैठक में पड़ोसी राज्यों और जनपदों के अधिकारी मौजूद रहे। 11 जुलाई से भारी वाहनों पर रोक प्रशासन ने फैसला लिया है कि 11 जुलाई से दिल्ली-मेरठ रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी जाएगी. इस दौरान ट्रक, बड़े मालवाहक और दूसरे भारी वाहन इस रास्ते पर नहीं चल सकेंगे. ये कदम कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए उठाया गया है. वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी यात्रा के दौरान ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए वन-वे सिस्टम भी लागू किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक 22 जुलाई से लेकर 26 जुलाई के बीच किसी भी दिन यह व्यवस्था लागू की जा सकती है. इससे रास्ते में होने वाले जाम और टकराव की स्थिति से बचा जा सकेगा. इन रास्तों पर होगा डायवर्जन दिल्ली से मेरठ, गाजियाबाद होते हुए हरिद्वार जाने वाले रास्तों पर खास ध्यान दिया जा रहा है. जहां जरूरत होगी, वहां डायवर्जन लगाया जाएगा ताकि कांवड़ियों को बिना किसी रुकावट के रास्ता मिल सके. खबर है कि चौधरी मोड़ से हापुड़ तिराहा और मेरठ तिराहा जाने वाले वाहन घंटाघर फ्लाईओवर से होकर भेजे जाएंगे. साथ ही फ्लाइओवर के नीचे से किसी भी वाहन को जाने देने की अनुमति नहीं होगी. यात्रा के बीच में पड़ने वाली टूटी सड़को की मरम्मत शुरू कर दी गई है. पुलिस और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी लगातार रूट प्लानिंग कर रहे हैं. कांवड़ियों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन ने जगह-जगह आराम करने के लिए शिविर, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था की है. साथ ही मेडिकल टीम और वॉलंटियर्स को भी मुस्तैद रखा गया है ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके. बता दें कि यह सारी तैयारी इस बार की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए की जा रही है.

‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के गठन के प्रस्ताव को अनुमोदित किया, सीएम योगी के नेतृत्व में ऐतिहासिक निर्णय

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट की बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के गठन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया। इस मिशन का उद्देश्य न केवल राज्य के युवाओं को देश में रोजगार उपलब्ध कराना है, बल्कि उन्हें विदेशों में भी नियोजन के अवसर दिलाना है, वह भी अब सीधे राज्य सरकार के माध्यम से। कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के इस निर्णय की जानकारी दी गई। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि बैठक में कुल 30 प्रस्तावों को अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह दूरदर्शी पहल न केवल प्रदेश के युवाओं को सशक्त बनाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को भारत का वैश्विक मानव संसाधन आपूर्ति केंद्र (ग्लोबल एचआर हब) बनाने की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी। यह मिशन राज्य सरकार के उस वादे की पुष्टि करता है, जिसमें कहा गया था, "हर हाथ को काम और हर हुनर को सम्मान।" कैबिनेट बैठक के बाद श्रम मंत्री अनिल राजभर ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक सेवायोजन विभाग केवल रोजगार मेलों और सेवायोजकों के माध्यम से राज्य के बेरोजगार युवाओं को अवसर दिला रहा था। अब, उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के गठन के साथ हम देश और विदेश दोनों स्तरों पर अपने युवाओं को सीधी नौकरी दिला सकेंगे। मिशन का लक्ष्य एक वर्ष में देश में एक लाख और विदेशों में 25 से 30 हजार युवाओं को सेवायोजित करने का रखा गया है। उन्होंने बताया कि अब तक विदेशों में रोजगार के लिए राज्य को रिक्रूटिंग एजेंट (आरए) लाइसेंसधारी एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता था। मिशन के गठन के साथ ही सरकार स्वयं आरए का लाइसेंस प्राप्त कर सकेगी, जिससे अब बेरोजगारों को सीधे विदेशों में रोजगार पर भेजा जा सकेगा। वैश्विक स्तर पर उत्तर प्रदेश की मैनपावर खासकर पैरा मेडिकल, नर्सिंग स्टाफ, ड्राइवर्स, कुशल श्रमिकों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह मिशन राज्य की उस क्षमता को दिशा और अवसर देने का माध्यम बनेगा। मिशन की प्रमुख गतिविधियां – देश-विदेश में रोजगार मांग का सर्वेक्षण। प्रतिष्ठित कंपनियों की सूची तैयार कर उनसे मांग एकत्र करना। स्किल गैप का आकलन और आवश्यक प्रशिक्षण भाषा प्रशिक्षण और प्रि-डिपार्चर ओरिएंटेशन। करियर काउंसलिंग और कैम्पस प्लेसमेंट। प्लेसमेंट के बाद सहायता व फॉलोअप सेवा। मिशन की संगठनात्मक संरचना – उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का गठन एक उच्च स्तरीय संस्था के रूप में किया जा रहा है, जो सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1860 के तहत पंजीकृत होगी। इसके संचालन के लिए 5 प्रमुख इकाइयां गठित की जाएंगी। शासी परिषद, राज्य संचालन समिति, राज्य कार्यकारिणी समिति, राज्य कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (एसपीएमयू) और जिला कार्यकारिणी समिति। इसके अलावा, योगी सरकार ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब महिलाओं को कुछ विशेष शर्तों के साथ खतरनाक श्रेणी के सभी 29 कारखानों में काम करने की अनुमति दी गई है। श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बताया कि अब तक देश में 29 प्रकार के खतरनाक कारखानों में महिलाओं का कार्य करना प्रतिबंधित था। 12 प्रकार के कम खतरनाक कारखानों में पहले ही उन्हें कार्य की अनुमति दी गई थी, जबकि हाल ही में 4 और श्रेणियों को अनुमोदन प्रदान किया गया है। अब ताजा निर्णय में उन्हें सभी 29 कारखानों में काम की अनुमति दे दी गई है। कैबिनेट का यह फैसला तकनीकी विस्तार और उद्योगों की मांग के मद्देनजर लिया गया है। महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही नियमों में संशोधन किया गया है। हमारी बहनें उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सहभागी बनें, यही हमारा लक्ष्य है। योगी कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया है। लगभग 49.96 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसका निर्माण ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल पर किया जाएगा। परियोजना पर अनुमानित 4,775.84 करोड़ रुपए का व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस लिंक एक्सप्रेसवे के माध्यम से लखनऊ, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर जैसे प्रमुख शहरों के बीच आवागमन और अधिक सुगम, त्वरित और बाधारहित हो सकेगा। खासकर राजधानी लखनऊ के भीतर होने वाले भारी यातायात दबाव को कम करने और यात्रा समय को घटाने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि प्रदेश में अब तक विकसित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे आपस में मिलकर एक एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार कर रहे हैं। यह ग्रिड प्रदेश के किसी भी कोने तक यात्रा को तेज, सुरक्षित और निर्बाध बनाएगा।

यूपी में विकास को मिलेगी रफ्तार, नया एक्सप्रेसवे पूर्वांचल को जोड़ेगा दिल्ली से

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को अनुमोदन प्रदान किया है। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी' ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी प्रदान की गयी है। लगभग 49.96 किमी लंबा यह एक्सप्रेसवे छह लेन का होगा, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसका निर्माण ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल पर किया जाएगा।  लखनऊ में खत्म होगा जाम का झंझट  परियोजना पर अनुमानित 4775.84 करोड़ रुपये का व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इस लिंक एक्सप्रेसवे के माध्यम से लखनऊ, आगरा, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर जैसे प्रमुख शहरों के बीच आवागमन और अधिक सुगम, त्वरित और बाधारहित हो सकेगा। उन्होने बताया कि खासकर राजधानी लखनऊ के भीतर होने वाले भारी यातायात दबाव को कम करने और यात्रा समय को घटाने में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  'एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार कर रहे हैं लिंक एक्सप्रेसवे' औद्योगिक विकास मंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक विकसित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे आपस में मिलकर एक एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार कर रहे हैं। यह ग्रिड प्रदेश के किसी भी कोने तक यात्रा को तेज, सुरक्षित और निर्बाध बनाएगा।