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कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से आय बढ़ाने के नए अवसरों की मिली जानकारी

रायपुर कृषि क्रांति अभियान जशपुर जिला प्रशासन द्वारा “आत्मा योजना” एवं “कृषि क्रांति अभियान” के तहत किसानों को आधुनिक और लाभकारी खेती की दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में चयनित किसानों को रायपुर स्थित सेमीना एग्रो कंपनी में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया। इस भ्रमण का उद्देश्य किसानों को उच्च मूल्य वाली औषधीय एवं सुगंधित फसलों की वैज्ञानिक खेती से अवगत कराना और उन्हें कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम के दौरान कंपनी के विशेषज्ञों ने मोरिंगा, पपीता, लेमनग्रास, पिपरमिंट, पचौली, अश्वगंधा, तुलसी और रोसेला जैसी फसलों की उन्नत तकनीक, लागत-लाभ विश्लेषण और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि इन फसलों की मांग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। उप संचालक कृषि जशपुर ने बताया कि किसानों को विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग मॉडल के बारे में समझाया गया, जिसमें कंपनियां पूर्व निर्धारित दर पर फसल की खरीद (बायबैक) करती हैं। इससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से राहत मिलती है और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि इस पहल को आगामी खरीफ/मानसून सत्र 2026-27 की कार्ययोजना से जोड़ा गया है, जिसके तहत जिले में क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। लेमनग्रास, पाल्मारोसा, पचौली, यूकेलिप्टस सिट्रियोडोरा, हल्दी, अदरक, तुलसी, सतावर और सर्पगंधा जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकासखंड स्तर पर इच्छुक किसानों का चयन कर उनकी सहमति से जानकारी संकलित की जा रही है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण, फील्ड विजिट और कंपनियों के साथ अनुबंधित खेती से जोड़ा जा सके। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से अनुबंध और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि क्रांति अभियान के तहत यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर व्यावसायिक और निर्यातोन्मुख कृषि की ओर प्रेरित कर रही है। इससे जिले में नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम जारी रहेंगे, ताकि किसान आधुनिक तकनीकों और बाजार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।

‘बकाया बिल से घबराने की जरूरत नहीं, समाधान योजना से मिलेगी राहत’ – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर प्रदेश के मुखिया  विष्णुदेव साय का 4 मई को सुदूर वनांचल ग्राम कमराखोल का दौरा आमजन के लिए राहत और विश्वास का संदेश लेकर आया। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आम पेड़ के नीचे आयोजित चौपाल में मुख्यमंत्री  साय ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए उनकी समस्याओं को आत्मीयता से सुना और मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह दृश्य शासन और जनता के बीच विश्वास के मजबूत रिश्ते का जीवंत उदाहरण बन गया। बिजली बिल की चिंता पर मिला भरोसे का समाधान चौपाल के दौरान जब एक ग्रामीण ने बढ़ते बिजली बिल और बकाया राशि को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, तो मुख्यमंत्री ने उसे बीच में ही आश्वस्त करते हुए कहा -“परेशान होने की जरूरत नहीं है, आपकी सरकार आपके साथ है।” उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की बिजली बिल भुगतान समाधान योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है, जिसके तहत पुराने बकाया बिलों में व्यापक छूट प्रदान की जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि पंप धारकों को भी योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि बीपीएल परिवारों के लिए विशेष रियायतों का प्रावधान किया गया है। जमीन पर दिखी संवेदनशीलता, मौके पर निर्देश मुख्यमंत्री  साय की कार्यशैली केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने तत्काल कलेक्टर को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जाएं, ताकि कमराखोल सहित आसपास के गांवों के लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और समस्याओं का समाधान उनके अपने गांव में ही हो सके।इस दौरान कलेक्टर  गोपाल वर्मा ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 13 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें कुल 11.75 करोड़ रुपये से अधिक की छूट प्रदान की जा चुकी है। सुशासन का जीवंत उदाहरण बना कमराखोल कमराखोल की इस चौपाल ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब शासन का नेतृत्व सीधे जनता से संवाद करता है, तो जटिल समस्याओं का समाधान भी सरल हो जाता है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की यह पहल इस बात का प्रमाण है कि सुशासन केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचाने की प्रतिबद्धता का नाम है।

सरोधी की चौपाल में उभरी बदलाव की प्रेरक कहानी, स्वच्छता दीदी मनीषा मरकाम की आर्थिक स्थिति हुई सशक्त

रायपुर सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल केवल समस्याओं के समाधान का मंच नहीं रही, बल्कि यह ग्रामीण जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलावों की सजीव तस्वीर भी बनी। इसी चौपाल में स्वच्छता दीदी मती मनीषा मरकाम की कहानी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। मनीषा मरकाम अपने पति  रंजीत मरकाम और तीन बेटों के साथ एक साधारण परिवार से हैं। उनके बच्चे वर्तमान में अध्ययनरत हैं और परिवार की आजीविका खेती-किसानी एवं मजदूरी पर निर्भर है। सीमित आय के बीच घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई संभालना पहले चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव आया है। मनीषा बताती हैं कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली 1000 रुपए की मासिक सहायता उनके लिए बड़ा सहारा बनी है। इन दोनों आय स्रोतों से वे घरेलू खर्चों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से रसोई का कार्य आसान हुआ है। मनीषा मरकाम “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” से भी जुड़ी हैं, जहां वे अन्य महिलाओं के साथ मिलकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कार्य कर रही हैं। मनीषा कहती हैं कि पहले जहां हर खर्च चिंता का कारण बनता था, वहीं अब उन्हें एक स्थिर आर्थिक संबल मिल गया है। महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना को मजबूत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जैसे अनेक परिवारों को नई उम्मीद और बेहतर भविष्य की दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि पूरे परिवार के जीवन में स्थायित्व और सशक्तिकरण भी लाती हैं।

चौपाल में मिली राहत, सरलाबाई मरावी की समस्या का मुख्यमंत्री ने किया त्वरित समाधान

रायपुर  सुशासन तिहार के अंतर्गत ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल में शासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्यवाही का एक भावनात्मक उदाहरण सामने आया। सरोधी की रहने वाली सरलाबाई मरावी ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के समक्ष अपनी समस्या रखी और कुछ ही पलों में उसका समाधान भी मिल गया। सरलाबाई मरावी, पति  लल्लूराम मरावी, एक साधारण कृषक परिवार से हैं। उनके पास लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि है और परिवार में उनका एक बेटा है। खेती ही उनके जीवनयापन का मुख्य साधन है। चौपाल के दौरान सरलाबाई ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत 1.50 लाख रुपए के ऋण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली थी। मुख्यमंत्री ने जैसे ही यह बात सुनी, उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए और तुरंत निराकरण सुनिश्चित कराया। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होते देख सरलाबाई भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी बात इतनी जल्दी सुनी जाएगी और समाधान भी मिल जाएगा। उनकी आंखों में संतोष और चेहरे पर राहत साफ झलक रही थी। सरलाबाई ने यह भी बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे घरेलू खर्चों में सहारा मिलता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज उन्हें महसूस हुआ कि सरकार वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुन रही है और उनका समाधान कर रही है। ग्राम सरोधी की यह घटना इस बात का सजीव प्रमाण है कि सुशासन तिहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में भरोसा और राहत लेकर आने वाली पहल बन चुका है।

रेत माफिया पर प्रशासन का शिकंजा, 9 वाहन जप्त

रायपुर रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त प्रदेश में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में  राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने जांजगीर-चांपा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। रेत के अवैध परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, 6 हाइवा और 3 ट्रैक्टर जब्त जांच के दौरान बम्हनीडीह क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन करते पाए जाने पर 2 हाइवा वाहनों को जब्त कर थाना बम्हनीडीह के सुपुर्द किया गया। वहीं जांजगीर क्षेत्र में 3 ट्रैक्टर जब्त कर खनिज विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए सौंपा गया। इसके अलावा देवरहा, पीथमपुर, हाथनेवरा, गढ़ापाली, केवा नवापारा और जांजगीर मुख्य मार्ग पर जांच के दौरान 4 और हाइवा अवैध रेत परिवहन करते पाए गए, जिन्हें जब्त कर पुलिस लाइन खोखरा में सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21 से 23(ख) के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस विभाग में तबादलों की लहर: रायपुर में 136 कर्मियों का हुआ ट्रांसफर, कई थानों में बदलाव

रायपुर. राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। रायपुर कमिश्नरेट में व्यापक स्तर पर पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली में नई गति और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला द्वारा जारी आदेश के अनुसार कुल 136 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर किया गया है। इस आदेश के साथ ही सभी तबादलों की विस्तृत सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है। इस तबादला सूची में 2 सब-इंस्पेक्टर (SI), 16 असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और 118 हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल हैं। यह संख्या बताती है कि यह सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस बल में व्यापक पुनर्गठन है। कई पुलिसकर्मियों को उनके वर्तमान थानों से हटाकर नए थानों, चौकियों और विशेष इकाइयों में पदस्थ किया गया है। प्रशासनिक दृष्टि से अहम कदम ऐसे बड़े पैमाने पर तबादले आमतौर पर प्रशासनिक आवश्यकताओं, कार्यक्षमता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को बदलने से न सिर्फ नई ऊर्जा आती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित होती है। कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा असर रायपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में यह फेरबदल शहर के विभिन्न इलाकों में पुलिसिंग को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। नए स्थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने अनुभव और कार्यशैली से संबंधित क्षेत्रों में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। विभागीय रणनीति का हिस्सा पुलिस विभाग समय-समय पर इस तरह के बदलाव करता रहता है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही, पक्षपात या स्थानीय प्रभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में अनुभवी पुलिसकर्मियों की तैनाती भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इससे अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा को मजबूती मिलती है। कर्मचारियों के लिए नई चुनौती तबादले के बाद पुलिसकर्मियों के सामने नए कार्यस्थल, नई चुनौतियां और नई जिम्मेदारियां होंगी। उन्हें नए क्षेत्र की परिस्थितियों को समझते हुए तेजी से खुद को ढालना होगा। वहीं, आम जनता को भी नई तैनाती के बाद पुलिस से बेहतर सहयोग और सेवा की उम्मीद है। बता दें रायपुर कमिश्नरेट में हुआ यह बड़ा फेरबदल प्रशासन की सक्रियता और कानून-व्यवस्था को लेकर उसकी गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह बदलाव शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने में कितना कारगर साबित होता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

लखपति दीदियों के हौसले की उड़ान देख गदगद हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , सबको और मेहनतकर अब करोड़पति बनने की राह पर चलने कहा

रायपुर  मई की तपती गर्मी में आज लगातार दूसरे दिन मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय दूरस्थ गांवों के औचक दौरे पर रहे । कबीरधाम ज़िले के पंडरिया स्थित लोखान पंचायत में आज मुख्यमंत्री का आगमन हुआ । इस अवसर पर वे बैगा बाहुल्य कमराखोल में पीएम जनमन योजना के तहत हुए कार्यों का निरीक्षण किए और वहीं पास में आम के पेड़ों के नीचे अपनी चौपाल लगा लिए । अपने बीच मुख्यमंत्री को देख ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई । बीरनमाला, कमल के फूल से मुख्यमंत्री का आत्मीय अभिनंदन करते हुए ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। इस दौरान महतारी शक्ति को सामने बैठा देख मुख्यमंत्री ने पूछ लिया कितनी महतारी यहाँ लखपति हो गई हैं ? एक साथ अनेक हाथ हवा में उठ गए । मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते सबको करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ने कहा । उन्होंने बारी- बारी से लखपति दीदियों से बातचीत की । यहाँ जंगल से बीन कर लाए  महुआ और चार को मुख्यमंत्री  साय को उपहार के रूप में देते हुए कुकदूर की लखपति दीदी मती कचरा तेलगाम ने मुख्यमंत्री से कहा कि महुआ का पौष्टिक लड्डू बनाकर खाइएगा , वरना मैं बना कर दूँगी । मुख्यमंत्री भी उनकी आत्मीयता देख भाव विभोर होकर मुस्कुराते हुए बोले कि घर जाकर बनवाकर खाऊँगा । मती कचरा तेलगाम दीदी आस पास के गांवों में बन रहे प्रधानमंत्री आवासों में सेंट्रिग प्लेट लगाती हैं और इससे उन्हें एक साल में ८० हज़ार की आय हुई है । उन्होंने कहा कि आज चौपाल लगा देख वे साहस वहाँ पहुँची और मुख्यमंत्री  के लिए भेंट स्वरूप जंगल से बीने महुआ और चार दी हैं ।  वहीं डीलर दीदी मती रजमत बाई धुर्वे ने बताया कि वे प्रधानमंत्री आवासों के लिए मटेरियल सप्लाई का काम करती हैं । उन्हें सालाना 2.50 – 3 लाख का मुनाफा हुआ है । लखपति पशु सखी मती शिवरानी पटेल का कहना है कि समूह से जुड़ सीआईएफ से उन्होंने व्यवसाय के लिए ऋण लिया और अपने खेत में सब्जी- भाजी लगायी । उन्हें सालाना डेढ़ लाख की आय हो रही । इस बिहान योजना से जीवन में आए सकारात्मक बदलाव के लिए धन्यवाद स्वरूप उन्होंने अपने खेत की सब्जियां टोकरी में मुख्यमंत्री को भेंट की । मुख्यमंत्री ने भी सभी दीदियों से बात कर प्रोत्साहित किया कि इसी तरह मन लगाकर काम करिए और आर्थिक रूप से सशक्त होइए।  ज्ञात हो कि लोखन पंचायत में 58 लखपति दीदियां हैं जो विभिन्न व्यवसाय से जुड़ आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं ।        चौपाल में हुआ नामकरण आज अपने नौनिहाल बच्चे के साथ मती ऋषि बघेल भी चौपाल पहुँची । यहाँ उन्होंने मुख्यमंत्री से एक ही गुहार लगायी कि उनके बच्चे का नामकरण कर दें मुख्यमंत्री । बच्चे को गोद में लेकर दुलारते हुए मुख्यमंत्री  साय ने पूछा कि कब हुआ है इसका जन्म ? तब माँ ने बताया कि रविवार के दिन । मुख्यमंत्री ने बच्चे को स्नेह से देखते हुए नाम रविशंकर बघेल रखा और आशीर्वाद स्वरूप ५०० रुपए भी दिए । पंडरिया विधायक मती भावना बोहरा ने भी बच्चे को ५०० रुपए अपनी ओर से आशीर्वाद स्वरूप दिया ।मुख्यमंत्री के द्वारा नवजात का नाम रखते ही चौपाल में तालियाँ गूंज उठी । चौपाल में पहुंचे मेधावी विधार्थी आज कबीरधाम के पंडरिया के लोखान पंचायत के आश्रित ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की चौपाल को देख वहाँ से गुज़र रहे राजेंद्र मसराम और उनके पिता भी रुक गए । इस दौरान बातचीत में पता चला कि छिरहा के रहने वाले इस मेधावी बच्चे ने इस साल हाई स्कूल में 94.5 %  अंक के साथ ज़िले में नौवाँ स्थान प्राप्त किया है । मुख्यमंत्री ने उन्हें ख़ुश होकर पेन दिया और पूछा बड़ा होकर क्या बनना चाहते हैं ? इस पर उन्होंने बड़ा होकर आईएएस बनने के सपने को साझा किया । मुख्यमंत्री ने उन्हें खूब सारी शुभकामनाएँ दी ताकि वो अपना सपना पूरा कर सकें । यहाँ कमराखोल के बैगा बस्ती की कक्षा नवमी की बालिका भी चौपाल में मुख्यमंत्री से मिली और बताया कि आज पीएम जनमन से बने उनके आवास में मुख्यमंत्री पहुंचे थे । वहाँ मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पायी इस लिए वे चौपाल में पहुँचीं । इस साल यह बच्ची हेम कुमारी 75% अंक कक्षा नौवी में लायी । एचसीएम ने आगे भी मन लगाकर पढ़ने की सलाह और बधाई देते हुए पेन दिया ।  घोषणाएँ बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज चौपाल लगाकर शासकीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और प्रसन्न दिखे कि दूरस्थ अंचल तक हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है । उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर कमरखोल में  मिशन तालाब गहरीकरण (ट्यूबवेल के साथ), रामखिलावन के घर से ग्राम देवसरा तक मिट्टी मुरुम सड़क (६ किलोमीटर लगभग) , सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम शेड निर्माण तथा  महतारी सदन ( स्व सहायता समूह की महिलाओं की माँग पर ) की घोषणा की । इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव  रजत बंसल, कलेक्टर  गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक  धर्मेंद्र सिंह , सीओ जिला पंचायत  अभिषेक अग्रवाल और ग्रामीण चौपाल में उपस्थित रहे ।

मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना से नर्सिंग के सपनों को मिला संबल

रायपुर कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और शासन का साथ मिले, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है सरगुजा जिले के भिट्ठीकला की रहने वाली ममता ने। ममता, जो कि वर्तमान में बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष की छात्रा हैं, आज अपनी पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हैं और इसका श्रेय वे छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को देती हैं। संघर्षों के बीच जागी उम्मीद की किरण ममता के जीवन का सफर आसान नहीं था। पिता स्व. मोटू राम के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी माता प्यारो बाई के कंधों पर आ गई। माँ ने हार नहीं मानी और एक पंजीकृत श्रमिक के रूप में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण किया। संसाधनों की कमी के बावजूद प्यारो बाई का सपना अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाना था, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग ने साकार किया है। मेधावी शिक्षा सहायता ने आसान हुई राह ममता ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग के माध्यम से नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 45,000 रुपए की वार्षिक सहायता प्राप्त हुई है। इस राशि ने उनके शिक्षण शुल्क और पढ़ाई से संबंधित अन्य खर्चों के बोझ को कम कर दिया है। उन्होंने बताया कि मेरी मम्मी एक मजदूर हैं, फिर भी उन्होंने हमें कभी पीछे मुड़ने नहीं दिया। श्रम विभाग से मिली इस आर्थिक सहायता की वजह से मैं आज अपनी नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर पा रही हूँ और अपने उज्ज्वल भविष्य का सपना देख पा रही हूँ। योजना के लिए व्यक्त किया आभार अपनी सफलता का  श्रेय देते हुए ममता ने प्रदेश के  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और श्रम विभाग के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए सशक्त माध्यम बनी है। जिससे पढ़ने और आगे बढ़ने का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के माध्यम से ममता जैसी हजारों बेटियाँ अब न केवल शिक्षित हो रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ रही हैं।

माओवादियों का गढ़ रहे तर्रेम बना स्वास्थ्य मॉडलः राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन हासिल

रायपुर विकासखंड उसूर का अतिसंवेदनशील ग्राम तर्रेम, जो कभी माओवादी प्रभाव के कारण पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आज स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान बना चुका है। जिला मुख्यालय से लगभग 80 किमी दूर स्थित ग्राम तर्रेम में अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार की पहल से क्षेत्र में पहुंच आसान हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार संभव हुआ। आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम में प्रतिदिन 25 से 30 मरीजों की ओपीडी, सुरक्षित प्रसव सेवाएं तथा लैब जांच की सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन, स्वच्छता, मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और 102 व 108 एम्बुलेंस सेवाओं के प्रभावी संचालन के साथ आयुष्मान भारत योजना सहित अन्य शासकीय योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। कलेक्टर  संबित मिश्रा के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के नेतृत्व में आकांक्षी विकासखंड उसूर के आयुष्मान आरोग्य मंदिर तर्रेम को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक NQAS प्रमाणन प्राप्त हुआ है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 16 फरवरी 2026 से वर्चुअल मूल्यांकन किया गया जिसमें 12 सेवाओं के आधार पर कुल 88.19ः अंक प्राप्त हुए। मूल्यांकन के दौरान स्वास्थ्य केंद्र के समस्त स्टाफ सीएचओ, आरएचओ महिला एवं पुरुष से राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीणों को दी जा रही सेवाओं पर विस्तार से जानकारी ली गई, जिसमें सभी कर्मी सफल रहे। इस उपलब्धि में जिला कार्यक्रम प्रबंधक  वरुण साहू, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश ठाकुर, सेक्टर प्रभारी डॉ शिवा गौरी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक श्रवण नेताम, डाटा प्रबंधक निरंजन भोई सहित समस्त स्वास्थ्य स्टाफ, सीएचओ, आरएचओ, एएनएम एवं मितानिनों का विशेष योगदान रहा।

महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई केकती बाई की जिंदगी

रायपुर सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का ग्राम सरोधी में आयोजित चौपाल कार्यक्रम केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आम जनजीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जीवंत तस्वीर भी बन गया।इसी चौपाल में सामने आई एक ऐसी कहानी, जिसने सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को भावनात्मक रूप से उजागर किया। ग्राम सरोधी की निवासी मती केकती मरावी, अपने पति  राजेंद्र मेरावी और तीन बच्चों—चिंरजीव, किरण और विक्रांत के साथ एक साधारण किसान परिवार से जुड़ी हैं। खेती-किसानी ही उनके जीवन का मुख्य आधार है, लेकिन सीमित आय के बीच परिवार का खर्च चलाना हमेशा एक चुनौती रहा है। केकती बाई बताती हैं कि महतारी वंदन योजना ने उनके जीवन में नई रोशनी लाई है। अब तक उन्हें योजना की 26 किश्तें मिल चुकी हैं, जिससे वे घर के छोटे-छोटे खर्चों में हाथ बंटा पा रही हैं। पहले जहां हर छोटी जरूरत के लिए सोच-विचार करना पड़ता था, वहीं अब उनके पास आत्मनिर्भरता का एक आधार बन गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से वे “स्वच्छता दीदी” के रूप में भी कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस सिलेंडर मिलने से उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है और रसोई का काम आसान हुआ है। केकती बाई केवल अपने परिवार तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” की अध्यक्ष भी हैं। समूह के माध्यम से उन्हें 15 हजार रुपए का अनुदान मिला है, जिससे वे अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। भावुक होते हुए केकती बाई ने कहा कि आज उनका परिवार पहले से कहीं अधिक सशक्त और आत्मविश्वासी महसूस करता है। उन्होंने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। ग्राम सरोधी की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि जब योजनाएं सही हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल आर्थिक मदद नहीं देतीं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोलती हैं।