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देशभर में बढ़ रही मांग, बेंगलुरु से कारगिल तक पहुंच रहा सुगंधित चावल

रायपुर लैलूंगा की पहचान बना ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र का ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल आज अपनी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण एक अलग पहचान स्थापित कर चुका है। पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली यह धान की किस्म अब किसानों के लिए आय का मजबूत माध्यम बन रही है। प्रशासन और कृषि विभाग के सहयोग से इस उत्पाद को व्यवस्थित रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे यह स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक पद्धति और बेहतर विपणन व्यवस्था के कारण इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और कृषि मंत्री  राम विचार नेताम के मार्गदर्शन में प्रदेश के किसानों का आय दुगुनी करने निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार किसानों को सशक्त बनाने में जनहितकारी नीति बनाने के साथ ही किसानों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं इनमें कृषि उन्नति योजना, भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना जैसे योजना शामिल है। इससे प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से मजबूत हुए हैं।  कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंवाफूल धान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक सुगंध और स्वाद है, जो लैलूंगा क्षेत्र की विशिष्ट जलवायु में ही पूर्ण रूप से विकसित हो पाती है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां-दिन में पर्याप्त गर्मी और रात में हल्की ठंडक, इस धान की गुणवत्ता को विशेष बनाती हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में उत्पादित चावल का स्वाद और खुशबू अलग पहचान रखता है और उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है।  ‘केलो’ जैविक जंवाफूल चावल की मांग अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी तेजी से बढ़ रही है। बेंगलुरु, चेन्नई, तेलंगाना, लद्दाख और कारगिल जैसे क्षेत्रों में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में इसका बाजार मूल्य लगभग 150 रुपये प्रति किलो है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। वहीं बीज भी किसानों को 70 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक किसान इस फसल की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।    लैलूंगा के किसान चंद्रशेखर पटेल बताते हैं कि उनके परिवार में लंबे समय से जंवाफूल चावल की खेती की जा रही है, लेकिन अब इसकी मांग और पहचान में काफी वृद्धि हुई है। इस वर्ष उन्होंने 4 एकड़ में इसकी खेती की, जिसमें प्रति एकड़ लगभग 30,000 रुपए की लागत आई। वे बताते हैं कि उन्हें प्रति एकड़ 1 लाख रूपये से अधिक की आय प्राप्त हो रही है। उनका कहना है कि इस फसल से उन्हें स्थिर और संतोषजनक आय मिल रही है, जिससे वे भविष्य में इसकी खेती का रकबा और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग राज्य के बाहर भी बढ़ रही है, जिससे उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।  ग्राम खैरबहार के किसान भवानी पंडा बताते हैं कि वे वर्ष 2015 से खेती कर रहे हैं और धीरे-धीरे जंवाफूल चावल की खेती की ओर बढ़े हैं। वे पूरी तरह जैविक पद्धति से खेती करते हैं, जिसमें रासायनिक खाद या कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। हरी खाद का उपयोग कर वे खेत की उर्वरता बनाए रखते हैं। भवानी पंडा बताते हैं कि जंवाफूल चावल की खेती से उन्हें पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ मिल रहा है। वर्तमान में वे 2 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में इसे 20 एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखे हुए हैं। जंवाफूल चावल की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है, जिससे इसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहती है। रासायनिक मुक्त उत्पादन के कारण यह चावल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को इसका बेहतर मूल्य मिल रहा है।     प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा इस फसल को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही किसान समूहों और एफपीओ के माध्यम से उत्पादन और विपणन को संगठित किया जा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 700 एकड़ में इसकी खेती की गई थी, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 2000 एकड़ तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस लाभकारी फसल से जुड़ सकें। 

छत्तीसगढ़ में लाखों श्रमिकों को राहत: DA और सैलरी दरों में वृद्धि, नई वेतन दरें की गई लागू

रायपुर  प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नई परिवर्तनशील महंगाई भत्ता (DA Hike) और न्यूनतम वेतन दरों का निर्धारण कर दिया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होकर 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगी। महंगाई भत्ते में वृद्धि लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है। अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है। दैनिक वेतन और जानकारी दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है। इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।  दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है 

CG के 4 IPS को मिलेगी हैदराबाद में ट्रेनिंग, DGP ने नियुक्त किए नए प्रभारी एसपी, मनीषा ठाकुर को रायपुर की जिम्मेदारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम ने 4 जिलों में प्रभारी एसपी की नियुक्ति की है। इन जिलों के एसपी के इंडक्शन ट्रेनिंग पर जाने के कारण यह व्यवस्था की गई है। प्रभारी एसपी की नियुक्ति का आदेश पुलिस मुख्यालय से जारी किया गया है। पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ कैडर के 4 आईपीएस अधिकारी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, पंकज चंद्रा, वेदव्रत सिरमौर और विजय पांडेय को इंडक्शन ट्रेनिंग के लिए चुना गया है। IPS श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा रायपुर ग्रामीण में, विजय पांडेय जांजगीर-चांपा, पंकज चंद्रा कोंडागांव, वेदव्रत सिरमौर गरियाबंद के पुलिस अधीक्षक हैं। यह उच्च स्तरीय प्रशिक्षण हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में आयोजित किया जाएगा। ट्रेनिंग का शेड्यूल 6 अप्रैल से शुरू होकर 15 मई तक चलेगा। किसे कहां की मिली जिम्मेदारी रायपुर ग्रामीण की जिम्मेदारी मनीषा ठाकुर रावटे को सौंपी गई है। जांजगीर-चांपा का प्रभार विमल कुमार बैस को दिया गया है। कोंडागांव की जिम्मेदारी प्रभारी कप्तान त्रिलोक बंसल को सौंपी गई है।गरियाबंद में प्रभारी एसपी के रूप में नीरज चंद्राकर को जिम्मेदारी दी गई है। ट्रेनिंग अवधि तक रहेगा प्रभार इन एसपी रैंक के अधिकारियों के नेतृत्व में अब संबंधित जिलों का कानून-व्यवस्था संचालन किया जाएगा। डीजीपी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक मूल अधिकारी ट्रेनिंग से वापस नहीं लौटते, तब तक ये चारों अधिकारी अपने-अपने जिलों में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सभी दायित्वों का निर्वहन करेंगे। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आधुनिक पुलिसिंग के लिए अहम है इंडक्शन ट्रेनिंग आईपीएस अधिकारियों की इंडक्शन ट्रेनिंग हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में आयोजित की जाती है। इस प्रशिक्षण के लिए देशभर से आईपीएस अधिकारियों का चयन किया जाता है। इंडक्शन ट्रेनिंग को आईपीएस अधिकारियों के करियर ग्राफ के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। करीब डेढ़ महीने तक चलने वाली इस ट्रेनिंग के दौरान अधिकारी आधुनिक पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और प्रशासन के नए आयामों को सीखते हैं। महासमुंद पुलिस अधीक्षक (एसपी) आशुतोष सिंह का तबादला कर दिया गया है। उन्हें केंद्रीय गृह विभाग की प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) में एसपी बनाया गया है। यह तबादला हाल ही में हुई एक बैठक से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें एसपी आशुतोष सिंह की गृहमंत्री विजय शर्मा के साथ तीखी नोकझोंक हुई थी।

जनजातीय प्रतिभाओं को मिला राष्ट्रीय मंच, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स बना नए अवसरों का द्वार – उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है। समारोह में मुख्यमंत्री  साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी। समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने  सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया। साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया।  उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की।  इस अवसर पर मुख्य सचिव  विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल, विधायक  पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव  विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष  जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष  संजय वास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव  यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर  संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर … Read more

मल्लखंभ में दिखा कौशल और संतुलन, ट्राइबल गेम्स में शानदार अंत

रायपुर छत्तीसगढ़ की टीम ने मल्लखंभ में लहराया परचम, बालक-बालिका दोनों वर्गों में बने चौंपियन खेलो इंडिया ट्राईबल गेम्स 2026 के अंतर्गत सरगुजा जिले के अम्बिकापुर के गांधी स्टेडियम में आयोजित डेमो खेल मल्लखंभ प्रतियोगिता का शानदार समापन शुक्रवार को हुआ। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने रोप मल्लखंभ, पोल मल्लखंभ, हैंगिंग मल्लखंभ, पिरामिड मल्लखंभ में एक से बढ़कर एक करतब दिखाए। खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर वहां मौजूद दर्शकों द्वारा तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। प्रतियोगिता के बाद विजेता टीम घोषित किया गया। आज हुई प्रतिस्पर्धा में छत्तीसगढ़ की बालिका टीम उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ विजेता घोषित की गई।  विजेता टीमों को शनिवार को आयोजित मेडल सेरेमनी में मेडल प्रदान किया जाएगा। ये रहे चौंपियन             मल्लखंभ प्रतियोगिता में देश के 14 राज्यों की टीमों ने हिस्सा लिया। राज्यों की टीमों ने शानदार प्रदर्शन कर जीत के लिए दमखम लगाया।  छत्तीसगढ़ की टीम ने बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। बालक वर्ग में छत्तीसगढ़ की टीम ने 124.35 अंक के साथ गोल्ड, महाराष्ट्र की टीम ने 118.35 अंक के साथ सिल्वर एवं झारखण्ड की टीम ने 86.95 अंक के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।  वहीं बलिका वर्ग में छत्तीसगढ़ की टीम ने 80.15 अंक के साथ गोल्ड, महाराष्ट्र की टीम ने 69.90 अंक के सिल्वर एवं झारखण्ड की टीम ने 49.80 अंक के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की मेहनत से खत्म हुआ जल संकट

रायपुर कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर  अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम लखापाल में विकास की वह रोशनी पहुंची है, जिसकी यहां वर्षों से प्रतीक्षा थी। जहां पानी के लिए थी जद्दोजहद, अब घर-घर बह रहा अमृत* जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार पानी के लिए बोरिंग, कुएं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर इतना नीचे चला जाता था कि ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को कई बार दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था। समय और मेहनत के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी लगातार बना रहता था। 72 लाख की योजना ने बदल दिया गांव का भविष्य* सुकमा जिले के कार्यपालन अभियंता  विनोद कुमार राम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकी स्थापित की गई। इसके माध्यम से गांव में 117 घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। गांव की कुल जनसंख्या 465 है, और अब हर परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। महिलाओं की आंखों में राहत, चेहरे पर मुस्कान* गांव की महिला मती लखे तेलाम भावुक होकर बताती हैं कि पहले पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था। कई बार मौसमी बीमारी हो जाती थी। महुआ बीनकर लौटने के बाद पानी लेने जाना बहुत मुश्किल होता था। अब नल से घर में ही दिनभर पानी मिलता है। हम बहुत खुश हैं। शासन की योजना बहुत अच्छी है। उनकी बातों में केवल राहत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की उम्मीद झलकती है। डर के साये से विकास की राह तक* गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं कि पहले लखापाल में भय का माहौल था। हमारा गांव पहले नक्सल समस्या से प्रभावित था। लोग ख़ौफ़ में जीते थे। बिजली, पानी और सड़क की समस्या थी। गांव में पहले नक्सलियों की मीटिंग होती थी। गांववालों से पैसा और चावल-दाल जमा कराया जाता था। लेकिन अब बदलाव आ गया है। अब पंचायत की मीटिंग ग्राम विकास के लिए होती है। बिजली, पानी, राशन और सड़क की सुविधा मिल रही है।” उनके शब्द साफ कहते हैं अब गांव में डर नहीं, विकास की चर्चा होती है। स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में सुधार, बीमारी में कमी* जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद लखापाल में सिर्फ पानी की सुविधा नहीं आई, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। अब जलजनित बीमारियों में कमी आई है और स्वच्छ पेयजल के कारण ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है। अब सब्जी-बाड़ी से आत्मनिर्भरता की ओर गांव* नल जल योजना से पानी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खेती और बाड़ी की ओर कदम बढ़ाया है। अब गांव के लोग अपने घर के आसपास टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगा रहे हैं। इससे न केवल घर में सब्जी की व्यवस्था हो रही है, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने का खर्च भी बच रहा है। कलेक्टर  अमित कुमार ने बताया कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाकर विकास की रोशनी हर क्षेत्र तक पहुंचाई जाएगी।* ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री और प्रशासन के प्रति आभार* ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक हुआ है। लखापाल बना उदाहरण- विकास हर कोने तक पहुंच रहा है* जल जीवन मिशन ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है। आज लखापाल गांव केवल पानी की सुविधा नहीं पा रहा बल्कि वह भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

कलेक्टर ने लाइवलीहुड कॉलेज में 32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट वितरण किया

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन की मानवीय, संवेदनशील एवं दूरदर्शी पुनर्वास नीति अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई कहानी लिख रही है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिससे आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसी क्रम में जिला मुख्यालय सुकमा स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में 32 आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट प्रदान की गई। कार्यक्रम कलेक्टर  अमित कुमार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर ने युवाओं से संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।     कलेक्टर  अमित कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि आप सभी को स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मान मिले। आज दी जा रही मेसन किट केवल औजार नहीं, बल्कि आपके नए जीवन की मजबूत नींव है। निर्माण कार्यों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजमिस्त्री का कार्य ऐसा कौशल है जिससे आप मेहनत और ईमानदारी के बल पर कुशल कारीगर बनकर आगे चलकर स्वरोजगार, ठेकेदारी और उद्यमिता की ओर भी बढ़ सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप इस अवसर का पूरा लाभ उठाएंगे और प्रशिक्षण व अनुशासन के साथ अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।      इस पहल के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में लौटना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से युवाओं को निर्माण कार्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकेंगे।

प्रेम प्रसंग बना जानलेवा, युवक की हत्या कर जिंदा दफनाया—5 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर अभनपुर थाना क्षेत्र में मिले अज्ञात शव के अंधे कत्ल का पुलिस ने सुलझा लिया है। मुख्य आरोपित श्याम सुंदर सोनी समेत कुल पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपित अब भी फरार है। जांच में सामने आया है कि प्रेम प्रसंग के चलते युवक नितेश बत्रा (29 वर्ष) की हत्या कर उसे जिंदा ही मुरूम गड्ढे में दफना दिया गया था। मुरूम गड्ढे में मिला था शव, हाथ-पैर बाहर निकले थे मामले का राजफाश करते हुए ग्रामीण एसपी स्वेता श्रीवास्तव सिंहा ने बताया कि 21 मार्च को ग्राम भरेंगाभाठा के पास सड़क किनारे मुरूम गड्ढे में एक अज्ञात युवक का शव दफन मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। शव का एक हाथ और पैर बाहर दिखाई दे रहा था। पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट की टीम मौके पर पहुंची और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को निकाला गया। डॉक्टरों की रिपोर्ट में सामने आया कि मृतक के गले पर गंभीर चोट पहुंचाई गई थी और उसे अधमरी हालत में गड्ढे में दफन किया गया, जिससे मिट्टी सांस नली में जाने के कारण उसकी मौत हो गई। इस आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। गुमशुदगी से जुड़ा मामला, ऐसे हुई पहचान जांच के दौरान थाना माना में दर्ज गुमशुदगी के एक केस से मृतक का मिलान किया गया। कपड़ों, टैटू और अन्य पहचान के आधार पर स्वजनों को बुलाया गया, जिन्होंने शव की पहचान नितेश बत्रा (29) निवासी माना के रूप में की। प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ विवाद, फिर बना हत्या का कारण पुलिस पूछताछ में राजफाश हुआ कि आरोपित श्याम सुंदर सोनी और सावित्री साहू के बीच प्रेम संबंध था। नितेश बत्रा अक्सर सावित्री को परेशान करता था। 16 मार्च की रात जब नितेश सावित्री के घर के पास पहुंचा, तब श्याम सुंदर सोनी से उसका विवाद हो गया। इसी दौरान आरोपितों ने मिलकर नितेश की पिटाई की। ऑटो में घुमाकर कई जगह की मारपीट, फिर दफनाया आरोपितों ने पहले लकड़ी और हाथ-मुक्कों से मारपीट की, फिर उसे ऑटो में बैठाकर अलग-अलग जगहों पर ले गए। रास्ते में उसकी स्कूटी को पुलिया के नीचे फेंक दिया गया। बाद में सुनसान जगह ले जाकर गमछे से गला दबाया गया और बेहोश होने पर मुरूम खदान में दफना दिया गया। तकनीकी जांच और सीसीटीवी से मिली सफलता घटना स्थल ब्लाइंड स्पॉट होने के बावजूद पुलिस ने कई किलोमीटर के दायरे में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले और तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपितों तक पहुंची। मुखबिर की सूचना पर टीम ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया। ये आरोपित हुए गिरफ्तार पुलिस ने श्याम सुंदर सोनी (21), सुमित कोसले (21), सावित्री साहू (21) और दो विधि के साथ संघर्षरत बालकों को गिरफ्तार किया है। मामले में माईकल सैनी नामक एक आरोपित फरार है, जिसकी तलाश जारी है। आरोपितों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ऑटो, लकड़ी और अन्य साक्ष्य बरामद किए गए हैं।  

भाजपा ने सतीश दौरा को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, बनाये गये गरियाबंद जिला विधि प्रकोष्ठ के जिला संयोजक

गरियाबंद गरियाबंद ज़िला के अंतिम छोर देवभोग क्षेत्र के जाने-माने वकील और समाजसेवी सतीश दौरा को भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए गरियाबंद जिला विधि प्रकोष्ठ का जिला संयोजक नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के बाद क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। सतीश दौरा लंबे समय से वकालत के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए लोगों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं।अपनी कानूनी विशेषज्ञता के साथ-साथ वे समाज सेवा में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। क्षेत्र के गरीब,जरूरतमंद और पीड़ित लोगों की सहायता करना उनकी पहचान बन चुकी है। कानून और समाज सेवा का अनुभव सतीश दौरा ने अपने पेशेवर जीवन में कई सामाजिक और जनहित से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई है। वे न सिर्फ अदालतों में लोगों की पैरवी करते हैं,बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी आवाज उठाते हैं। यही कारण है कि आम जनता के बीच उनकी एक साफ-सुथरी और भरोसेमंद छवि बनी हुई है। संगठन को मिलेगी मजबूती भारतीय जनता पार्टी द्वारा उन्हें जिला विधि प्रकोष्ठ का ज़िला संयोजक बनाए जाने से संगठन को कानूनी मामलों में मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सतीश दौरा के अनुभव और कार्यशैली से संगठन को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।नियुक्ति के बाद सतीश दौरा ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे तथा संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य करेंगे। क्षेत्र के लोगों ने भी इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सतीश दौरा अपने नए दायित्व में भी जनसेवा की भावना को प्राथमिकता देंगे।

वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लकड़ी से भरा पिकअप वाहन पकड़ा गया

रायपुर लकड़ी के अवैध परिवहन पर कार्रवाई, पिकअप वाहन जब्त वन मंत्री  केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, अतिक्रमण और उत्खनन पर रोक लगाने के लिए लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रबंध संचालक के निर्देश पर सभी परियोजना मंडलों में नियमित गश्त और निगरानी की जा रही है, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है। इसी क्रम में कोटा परियोजना मंडल, बिलासपुर की टीम ने गश्त के दौरान बड़ी कार्रवाई की। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर भैंसाझार परिक्षेत्र के बछाली बीट में ग्राम नवापारा और उमरमरा के बीच सड़क मार्ग पर एक पिकअप वाहन को रोककर जांच की गई। जांच के दौरान वाहन में साल प्रजाति की 27 नग लकड़ी (चिरान/चौखट) अवैध रूप से परिवहन करते हुए पाई गई। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जितो प्लस पिकअप वाहन (क्रमांक CG-10BL-4663) को जब्त कर लिया।               इस मामले में वाहन चालक रघुवीर कश्यप के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 41(2) (ख) और धारा 52 के तहत वन अपराध दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्रीय महाप्रबंधक बिलासपुर और मंडल प्रबंधक कोटा के मार्गदर्शन में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में की गई। टीम में सहायक क्षेत्रपाल, क्षेत्ररक्षक एवं अन्य वन कर्मचारी शामिल रहे।            वन विकास निगम के प्रबंध संचालक  प्रेम कुमार ने इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के लिए टीम को बधाई दी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इसी तरह सतर्क रहकर वन सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि आगामी गोपनीय प्रतिवेदन में वन संरक्षण और सुरक्षा में कर्मचारियों के योगदान को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा l