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छत्तीसगढ़ में लाखों श्रमिकों को राहत: DA और सैलरी दरों में वृद्धि, नई वेतन दरें की गई लागू

रायपुर  प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नई परिवर्तनशील महंगाई भत्ता (DA Hike) और न्यूनतम वेतन दरों का निर्धारण कर दिया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होकर 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगी। महंगाई भत्ते में वृद्धि लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है। अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है। दैनिक वेतन और जानकारी दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है। इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।  दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है 

वेतन कटौती विवाद: MP में 1 लाख कर्मचारियों को बड़ा झटका, मोहन सरकार सुप्रीम कोर्ट में ले जाएगी केस; 400 करोड़ रु. बकाया

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों से जुड़ा प्रोबेशन पीरियड वेतन कटौती मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में बड़ा फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें नए नियुक्त कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान पूरा वेतन देने के बजाय 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान किया गया था। अदालत ने इसे भेदभावपूर्ण और अवैध करार देते हुए स्पष्ट कहा था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटी गई राशि एरियर सहित लौटाई जाए। इस निर्णय से करीब 1 लाख कर्मचारियों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें लगभग 400 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान मिल सकेगा। अब सर्वोच्च अदालत की शरण में जाने की तैयारी हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामला थमता नजर आ रहा था, लेकिन अब मोहन सरकार ने इसे चुनौती देने की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की योजना बना रही है। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो एरियर भुगतान पर फिलहाल रोक लग सकती है, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। वेतन कटौती केस, SC जाएगी सरकार मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड (परिवीक्षा अवधि) के दौरान वेतन कटौती का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचने वाला है। जबलपुर हाईकोर्ट ने फरवरी 2026 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तत्कालीन कमलनाथ सरकार के 12 दिसंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें नए कर्मचारियों को प्रोबेशन पीरियड के दौरान शत-प्रतिशत वेतन न देकर 70%, 80% और 90% वेतन देने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि प्रभावित कर्मचारियों को काटा गया वेतन एरियर्स समेत लौटाया जाए। हालांकि, अब मोहन सरकार इस फैसले को मानने के बजाय इसे चुनौती देने का मन बना चुकी है। एमपी हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला  बीजेपी ने कमलनाथ सरकार की तरफ से लागू किए गए इस नियम को बदलने का वादा किया था. लेकिन, एमपी सरकार की तरफ से अब तक यह नियम नहीं बदला गया है. ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने एमपी का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और प्रोबेशन पीरियड 2 साल ही करने और पूरी सैलरी देने को लेकर याचिका लगाई. जहां एमपी हाईकोर्ट ने मामले में बड़ा फैसला सुनाया. जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस दीपक खोत की डिवीजन बेंच ने मामले में कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से न केवल भेदभावपूर्ण है. बल्कि कर्मचारियों को वेतन कम देना भी नियम नहीं है. क्योंकि जब कर्मचारियों से काम पूरा लिया जा रहा है तो फिर उन्हें वेतन भी पूरा देना चाहिए. हाईकोर्ट ने इसे समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन मानते हुए कर्मचारियों को सामान वेतन और एरियर देना का फैसला सुनाया.  सु्प्रीम कोर्ट जाएगी एमपी सरकार  अब इस मामले में एमपी सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. क्योंकि एमपी हाईकोर्ट ने एमपीपीएससी का हवाला दिया था. जिसमें कहा गया था कि एमपीपीएससी के तहत होने वाली नियुक्तियों में दो साल का प्रोबेशन पीरियड और सैलरी भी पूरी दी जाती है. तो फिर कर्मचारी चयन मंडल में यह अंतर क्यों हो रहा है. अब सरकार का कहना है कि एमपीपीएससी और कर्मचारी चयन मंडल की भर्ती प्रक्रियाओं में अंतर है. एमपीपीएससी में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार होता है, जबकि कर्मचारी चयन मंडल में केवल एक परीक्षा होती है. ऐसे में दोनों की चयन प्रक्रिया अलग है.  400 करोड़ मामला अगर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो इस अवधि में चयनित 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को हाईकोर्ट के फैसले के मुताबिक एरियर के जो 400 करोड़ रुपए मिलने थे. वह फिलहाल अटक सकते हैं. क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जो फैसला आएगा यह एरियर उस फैसले पर मायने रखेगा.   सरकार के वादे और कर्मचारियों का संघर्ष साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने प्रोबेशन पीरियड को 2 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दिया था और वेतन में कटौती लागू की थी। 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नियम को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन यह कभी लागू नहीं हो सका। शिवराज सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो थक-हारकर कर्मचारियों ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 2019 का आदेश और बढ़ी परिवीक्षा अवधि का प्रभाव विवाद की जड़ 2019 का वह शासनादेश है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार ने प्रोबेशन अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 4 वर्ष कर दी थी। साथ ही इस अवधि में पूर्ण वेतन के स्थान पर चरणबद्ध वेतन देने का नियम लागू किया गया था। नए कर्मचारियों को पहले वर्ष 70%, दूसरे वर्ष 80% और तीसरे वर्ष 90% वेतन दिया जाता था। चौथे वर्ष के बाद ही उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ मिलता था। इस नीति का तर्क वित्तीय भार कम करना बताया गया था, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण माना। सत्ता परिवर्तन के बाद अधूरे रहे वादे 2020 में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई मंचों से इस वेतन कटौती नियम को समाप्त करने का आश्वासन दिया था। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि नई सरकार इस प्रावधान को खत्म कर देगी, लेकिन व्यवहार में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। लंबे इंतजार और अनदेखी के बाद कर्मचारी संगठनों ने न्यायिक हस्तक्षेप का रास्ता चुना और हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 1 लाख कर्मचारियों की उम्मीदों पर असमंजस हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को राहत की उम्मीद बंधी थी। अनुमान है कि लगभग 1 लाख कर्मचारियों को मिलाकर करीब 400 करोड़ रुपये का एरियर बनता है। यदि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहता है तो भुगतान प्रक्रिया अनिश्चित काल तक टल सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह केवल वेतन का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और समानता का प्रश्न भी है। आगे क्या? कानूनी और राजनीतिक दोनों दांव अब यह मामला कानूनी लड़ाई के अगले चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन देता है … Read more

2026 में वेतन वृद्धि पर सर्वे रिपोर्ट: कर्मचारी वेतन में 9.1% तक इजाफा, जानें कौन‑से सेक्टर आगे

नई दिल्ली निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। भारत में साल 2026 में कर्मचारियों के वेतन में 9.1 % वृद्धि देखने को मिल सकती है यह जानकारी ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘एऑन ’ की 32वीं एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे 2025-26 से सामने आई है। यह सर्वे देश की 45 अलग-अलग इंडस्ट्रीज की 1,400 से ज्यादा कंपनियों के डेटा पर आधारित है, जो यह संकेत देता है कि बाजार में तेजी बनी हुई है। सर्वे के अनुसार, एट्रिशन रेट यानी नौकरी छोड़ने की दर साल 2025 में गिरकर 16.2 प्रतिशत पर आ गई है। यह रेट 2023 में 18.7 प्रतिशत और 2024 में 17.7 प्रतिशत थी। किस सेक्टर को कितनी सैलरी हाईक?     एऑन की एनुअल सैलरी इंक्रीज एंड टर्नओवर सर्वे 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1% वृद्धि देखने को मिल सकती है। हालांकि अलग-अलग इंडस्ट्री में सैलरी बढ़ने की दर अलग-अलग होगी।     रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर, साथ ही नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) में ज्यादा तो ऑटोमोबाइल और वाहन निर्माण, इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल जैसे सेक्टरों में औसत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।     रियल एस्टेट व इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 10.2 प्रतिशत, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) में 10.1 प्रतिशत, ऑटोमोबाइल व इंजीनियरिंग डिजाइन सर्विसेज में 9.9 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर में 9.5 प्रतिशत तक सैलरी बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘मर्सर’ की रिपोर्ट में 9 से 10% तक वृद्धि संभव इससे पहले दिसंबर 2025 में ग्लोबल कंसल्टेंसी कंपनी ‘मर्सर’ की सैलरी सर्वे रिपोर्ट 2026 में 9 से 10 % तक की वृद्धि की बात सामने आई थी। इस सर्वे में 1500 से ज्यादा कंपनियों और 8000 से ज्यादा पदों का एनालिसिस किया था। मर्सर के सर्वे के अनुसार, साल 2026 में हाई टेक वाले सेक्टरों और ऑटो इंडस्ट्री में ज्यादा वेतन वृद्धि होने की उम्मीद है। हाई टेक सेक्टर में 9.3 प्रतिशत और ऑटो इंडस्ट्री में 9.5 प्रतिशत सैलरी बढ़ने की संभावना है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी से जुड़ी सेवाएं (ITES) और वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) के कर्मचारियों को भी अच्छी सैलरी हाइक मिल सकती है।

एमपी मेट्रो भर्ती 2025: इस डिग्री वालों को मिलेगा बड़ा मौका, सैलरी और योग्यता देखें यहां

भोपाल मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने सहायक प्रबंधक पद पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह भर्ती डिपुटेशन, कांट्रैक्ट और री-एम्प्लॉयमेंट के आधार पर की जाएगी। योग्य और अनुभवी उम्मीदवार 28 अक्टूबर 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। योग्यता और अनुभव इस पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/संस्थान से मास कम्यूनिकेशन, जर्नलिज्म, पब्लिसिटी, पब्लिक रिलेशन या पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक डिग्री अनिवार्य है। इसके अलावा, इन विषयों में पोस्टग्रेजुएट डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर निकली नौकरी… सहायक प्रबंधक का मुख्य कार्य जनसंपर्क, मीडिया संबंध और सार्वजनिक जानकारी से जुड़ा होगा। पद पर कार्य करने वाले उम्मीदवार मेट्रो परियोजनाओं के प्रचार-प्रसार और मीडिया रिपोर्टिंग, प्रेस कांफ्रेंस तथा अन्य जनसंपर्क गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। आवेदन प्रक्रिया इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन पत्र सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ MPMRCL के संबंधित विभाग में 28 अक्टूबर, 2025 तक भेज सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया और शैक्षिक योग्यताओं से संबंधित जानकारी के लिए उम्मीदवार MPMRCL की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं। कब तक कर सकेंगे आवेदन आवेदन की अंतिम तिथि 28 अक्टूबर 2025 है। इस तिथि के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे समय रहते अपना आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।  

आउटसोर्स कर्मियों के वेतन की तिथि निर्धारित

भोपाल श्रम विभाग ने आउटसोर्स कर्मियों के हित में समय पर वेतन दिलाने की पहल की है। इसके लिये विभाग ने एक व्हाट्सअप नंबर भी जारी किया है। श्रम विभाग के अपर सचिव श्री बसंत कुर्रे ने बताया है कि शासकीय कार्यालयों, निगमों मंडलों और प्राधिकरणों में अगर 1000 से कम आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं तो उन्हें भुगतान 7 तारीख तक किया जाना अनिवार्य है। इसी तरह 1000 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी होने पर उन्हें माह की 10 तारीख तक वेतन का भुगतान किया जाना अनिवार्य है। किसी भी आउटसोर्स कर्मचारी को निर्धारित समय सीमा में वेतन भुगतान न होने की स्थिति में शासन द्वारा संचालित WHATSAPP नंबर 07552555582 पर कर्मचारी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।