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बलरामपुर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: अफीम की अवैध खेती के बाद वर्षों से जमे 58 पटवारी हटाए गए

बलरामपुर. जिले में हाल ही में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामलों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने एक साथ 58 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। इस निर्णय के तहत कई तहसीलों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा गया है। जारी आदेश के अनुसार राजपुर, रामानुजगंज, कुसमी, वाड्रफनगर, शंकरगढ़, रघुनाथनगर और बलरामपुर सहित कई तहसीलों के पटवारियों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राजस्व व्यवस्था में कसावट लाना, कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ कर्मचारियों के कारण बन रही प्रशासनिक ढिलाई को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों में अवैध अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने राजस्व तंत्र में सख्ती दिखाते हुए यह बड़ा फैसला लिया है। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पटवारियों के तबादले को प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित पटवारियों को 13 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाएगा। साथ ही सभी संबंधित पटवारियों को 16 मार्च 2026 तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। जिला प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि आदेश का पालन नहीं करने या निर्धारित समय में नई पदस्थापना स्थल पर जॉइन नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और लापरवाही पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रशासन राजस्व विभाग में और भी सख्ती बरत सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान: सिंधी समाज की एकजुटता प्रशंसनीय

सिंधी समाज की एकजुटता सराहनीय : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मुख्यमंत्री पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में हुए शामिल रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय राजधानी रायपुर में पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत द्वारा आयोजित “सिंधीयत जो मेलो” में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज की एकजुटता और उनकी संघर्षशील परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि सिंधी समाज ने देश के इतिहास के सबसे कठिन दौर—विभाजन की विभीषिका—का सामना किया है। इसके बावजूद इस समाज ने व्यापार और उद्यम के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर देश की आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विभाजन के समय सिंधी समाज के अनेक परिवारों को अपनी पुश्तैनी संपत्ति और घर-बार छोड़ना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने आराध्य के प्रति अटूट आस्था और परिश्रम के बल पर उन्होंने नई शुरुआत की और आज सिंधी समाज विकास के नए-नए सोपान रच रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज का यह जुझारूपन और आत्मविश्वास पूरे समाज के लिए प्रेरणास्पद है और इसके लिए समाज के सभी सदस्य प्रशंसा के पात्र हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज को एकजुट होने का अवसर मिलता है। जब समाज संगठित और मजबूत होता है तो राष्ट्र भी सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की एकजुटता वास्तव में सराहनीय है और इस प्रकार के मेलों का सबसे बड़ा उद्देश्य यही होता है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे। इस मेले में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज सिंधी समाज के लोग देश के कोने-कोने में बसे हुए हैं और अपनी मेहनत, लगन तथा उद्यमशीलता के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने छोटे-छोटे व्यवसाय से शुरुआत कर अपने कार्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, जो उनके परिश्रम और दूरदर्शिता का परिचायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार  प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी के तहत प्रदेश सरकार ने  अधिकांश गारंटियों को पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर प्रदेश में आज से प्रारंभ की गई गौधाम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके अंतर्गत पूरे प्रदेश में  गौधाम स्थापित किए गए हैं। इन गौधामों के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी। यहां पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, काऊ कैचर, दवाइयाँ तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और हम उनका पूजन करते हैं। गाय से प्राप्त पंचगव्य को अमृत के समान माना गया है, जो हमारे धार्मिक और सामाजिक जीवन में विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को चेट्रीचंड्र पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ भी दीं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और उनकी सराहना की। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री  केदार कश्यप ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिंधी समाज अत्यंत मेहनतकश समाज है। उन्होंने समाज द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम हैं।  इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक  मोती लाल साहू, धमतरी महापौर  रामू रोहरा, पूज्य छत्तीसगढ़ी सिंधी पंचायत के अध्यक्ष  महेश दरयानी सहित सिंधी समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित  थे।

बाल विवाह मुक्त बनने की दिशा में एमसीबी जिला, 60 ग्राम पंचायतों की शानदार सफलता

बाल विवाह मुक्त बनने की राह पर एमसीबी जिला, 60 ग्राम पंचायतों की उल्लेखनीय उपलब्धि एमसीबी जिले में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बड़ी उपलब्धि सामने आई है। संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग रायपुर के पत्र क्रमांक 33/10568/मवादि/मि.वा./सारा/2025-26 दिनांक 09 सितम्बर 2025 के निर्देशानुसार ऐसे ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाना है, जहां विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ हो। इसी के तहत जिले के विभिन्न विकास खंडों से प्रस्ताव प्राप्त हुए और नियमानुसार जांच के बाद संबंधित दस्तावेज महिला एवं बाल विकास विभाग को प्राप्त हुए। इसके पश्चात 06 मार्च 2026 को दावा-आपत्ति के लिए पत्र जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित तिथि तक महिला एवं बाल विकास विभाग जिला एमसीबी कार्यालय में कोई भी दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। हालांकि चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से कुछ ग्राम पंचायतों में बाल विवाह की सूचना प्राप्त होने पर ब्लॉक खड़गवां के ग्राम पंचायत आमालाड, मुकुन्दपुर और दुग्गी, ब्लॉक भरतपुर के ग्राम पंचायत सेमरिया तथा ब्लॉक मनेन्द्रगढ़ के ग्राम पंचायत डंगौरा और चिमटीमार को सूची से विलोपित कर दिया गया है। कलेक्टर की अनुशंसा के आधार पर चयनित ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को तीन चरणों में बाल विवाह मुक्त होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा तथा आगे की प्रक्रिया के तहत जिले के अन्य पंचायतों और नगरीय निकायों को भी प्रमाण पत्र प्रदान कराया जाएगा।  बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत विकासखण्ड मनेन्द्रगढ़ की ग्राम पंचायत चौघड़ा, तेन्दूडांड, बंजी, बिहरापुर, भलौर, हस्तिनापुर, पिपरिया, चिरईपानी, चैनपुर, कठौतिया, छिपछिपी, सेमरा, बुन्देली, सिरौली, भौता, शंकरगढ़, बॉही, बिरौरीडांड, गरूणडोल, बुलाकीटोला, घाघरा, उजियारपुर, बौरीडांड, महाई, बेलबहरा, डुगला, रोझी, चनवारीडांड, मनवारी, डोडकी, केल्हारी, रोकड़ा, ताराबहरा, केराबहरा, परसगढ़ी, डिहुली और कछौड शामिल हैं। इसके साथ ही विकासखण्ड भरतपुर की ग्राम पंचायत बरहोरी, चांटी, ओहनिया, नेरूआ, बड़गांव कला, केसौड़ा, डोमहरा और कुदरा तथा विकासखण्ड खड़गवां की ग्राम पंचायत बोडेमुडा, छोटेकलुआ, पेण्ड्री, बरदर, गिद्धमुड़ी, अखराडांड, जड़हरी, मंगोरा और बेलकामार ग्राम पंचायत भी इस सूची में शामिल हैं। जिले में चलाए जा रहे जागरूकता अभियान, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और आमजन की सक्रिय भागीदारी के कारण बाल विवाह रोकने की दिशा में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है, जो समाज में जागरूकता और बेटियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान: बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति की ओर हो रही प्रगति

बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में हो रहे हैं कामयाब: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ‘आदि परब’ जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच प्रदान करने का बेहतर आयोजन ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिला ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड’ पुरस्कार मुख्यमंत्री ने 43 जनजातियों के पारंपरिक परिधान में सजे अटायर शो का लिया आनंद जनजातीय विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा और शोधार्थियों के लिए 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण हर्षोल्लास के साथ ‘आदि परब’ का हुआ समापन रायपुर  हमारी सरकार जनजातीय समाज के भविष्य को संवारने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प से अब हम बस्तर क्षेत्र में खुशहाली और शांति बहाल करने में कामयाब हो रहे हैं। बस्तर पिछले लगभग 40 वर्षों से विकास से अछूता रहा और लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित था, लेकिन अब परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश जल्द ही नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे जनजातीय समाज में अमन-चैन के साथ-साथ खुशहाली और समृद्धि का नया दौर आएगा।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि ‘आदि परब’ की थीम ‘परंपरा से पहचान तक’ रखी गई है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को साझा मंच देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के आदिवासी लोक कलाकारों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 43 विभिन्न जनजातियों के लोग एक मंच पर एकत्रित हुए, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की पूरी टीम को बधाई दी तथा ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को मिले ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ पुरस्कार के लिए भी शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बाहुल्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में इस प्रकार के आयोजन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं की व्यापकता को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट-बाजार और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। हमारी लोक परंपराएँ ही हमारी असली पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां स्थित दो संग्रहालयों में से एक शहीद वीर नारायण सिंह जी की जीवनगाथा को समर्पित है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश के पहले डिजिटल ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’ का लोकार्पण किया था, जो हम सभी के लिए गर्व की बात है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे जनजातीय संग्रहालय में जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों सहित जनजातीय जीवन के विभिन्न अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक परिधानों और रीति-रिवाजों का जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया गया है। आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को सहेजना होगा। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि आज देश में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जैसे नेतृत्व के कारण आदिवासी समाज का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति के लिए आदिवासी समाज की बेटी मती द्रौपदी मुर्मु को अवसर मिला, जो पूरे जनजातीय समाज के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ में चिन्हित 6 हजार 691 बसाहटों का कायाकल्प किया जा रहा है। अति पिछड़ी जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के तहत प्रदेश की 2300 से अधिक पीवीटीजी बसाहटों के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्लानार योजना (आपका अच्छा गांव) हमारी सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जनजातीय गांवों तक सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुंचाई जा रही हैं। साथ ही इन क्षेत्रों के लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इस अवसर पर आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद जनजातीय समाज के गौरव के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह देश का ऐसा डिजिटल संग्रहालय है जिसका अध्ययन करने देश और विदेश से लोग आ रहे हैं। संग्रहालय में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले जनजातीय नायकों और आंदोलनों की जीवंत प्रस्तुति की गई है, जो समाज के गौरव को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि सरकार 3357 आश्रम-छात्रावास, 17 प्रयास विद्यालय और 75 एकलव्य विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय वर्ग के भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की सरकार ने एफआरए के तहत 4 लाख 25 हजार 425 हितग्राहियों को 3.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पट्टा प्रदान किया है। इस अवसर पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने ‘परंपरा से पहचान तक’ की थीम पर आयोजित ‘आदि परब’ के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हमने नक्सलवाद की पीड़ा को नजदीक से देखा है और अब डबल इंजन की सरकार के दृढ़ संकल्प से नक्सलवाद समाप्ति की ओर बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराने में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने ‘आदि परब’ के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को दुनिया तक पहुंचाने के इस प्रयास की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने यूपीएससी … Read more

शहर को मिलेगा नया सब्जी बाजार: 3.40 करोड़ रुपए की परियोजना का भूमिपूजन

रायपुर राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने 32 लाख रुपए से बने हाट बाजार का का किया लोकार्पण प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने शनिवार को नगर पालिका बलौदाबाजार के वार्ड क्रमांक 13 में नव-निर्मित हाट बाजार का लोकार्पण तथा वार्ड क्रमांक 10 में बनने वाले सब्जी बाजार का भूमिपूजन किया। हाट बाजार में लगभग 32 पक्के छत वाले चबूतरे 32 लाख रुपए की लागत से बनाए गए हैं। वहीं आधुनिक सुविधाओं से युक्त सब्जी बाजार का निर्माण करीब 3 करोड़ 40 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा।         कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि आज बलौदाबाजार शहर के विकास में एक नई कड़ी जुड़ गई है। उन्होंने कहा कि अब शहर में बदलाव साफ दिखाई देने लगा है और आने वाले दो वर्षों में शहर का कायाकल्प होकर यह और अधिक सुंदर व व्यवस्थित बनेगा।        उन्होंने कहा कि केवल शासकीय योजनाओं और निर्माण कार्यों से ही शहर सुंदर नहीं बनता, बल्कि इसके लिए नागरिकों की जागरूकता भी आवश्यक है। नगरवासियों को शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी। उन्होंने अपील की कि कचरा इधर-उधर न फेंककर कूड़ेदान या डस्टबिन में डालने की आदत विकसित करनी चाहिए और सभी को इसके लिए संकल्प लेना होगा।        इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जैन, पूर्व विधायक लक्ष्मी बघेल, भारत स्काउट गाइड के राज्य उपाध्यक्ष विजय केशरवानी, नगर पालिका उपाध्यक्ष जीतेन्द्र महले सहित पार्षदगण और बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे।

“विजन 2030” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

रायपुर “विजन 2030” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित वन मंत्री  केदार कश्यप ने आज छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा “विजन 2030 दृ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए उच्च विकास व्यवसाय मॉडल का निर्माण” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन अरण्य भवन सभागार, नया रायपुर में किया गया।  कार्यक्रम के दौरान अपने उद्बोधन में वन मंत्री  कश्यप ने निगम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम राज्य की वन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वन संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन, वनोपज का मूल्य संवर्धन तथा उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय के माध्यम से निगम की गतिविधियों का विस्तार किया जाना आवश्यक है। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं समय की आवश्यकता हैं। इनके माध्यम से विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा करने का मौका मिलता है, उद्योग जगत की अपेक्षाएं और विशेषज्ञों के सुझाव एक मंच पर प्राप्त होते हैं, जिससे भविष्य के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलती है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए वन विकास निगम के अधिकारियों को बधाई दी और उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझावों के आधार पर निगम के लिए सुदृढ़ और उच्च विकास क्षमता वाला रोडमैप तैयार किया जाएगा।  कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक  प्रेम कुमार ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कार्यशाला के उद्देश्य तथा विजन 2030 के अंतर्गत निगम के दीर्घकालिक लक्ष्यों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निगम वन संसाधनों के सतत उपयोग, मूल्य संवर्धन तथा नए अवसरों के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामसेवक पैकरा ने भी कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि वन विकास निगम लगातार बेहतर कार्य कर रहा है और वनवासियों को आजीविका के अवसर प्रदान कर रहा है। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख छत्तीसगढ़  व्ही. निवास राव सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि इस कार्यशाला की विशेषता यह रही कि इसमें देश के पांच राज्यों के वन विकास निगमों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया स उन्होंने अपने-अपने राज्यों में संचालित गतिविधियों, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा सफलता की कहानियों को साझा किया। इसके अतिरिक्त विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता करते हुए उद्योगों की आवश्यकताओं और निगम के साथ संभावित सहयोग के अवसरों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस एक दिवसीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में सार्थक चर्चा हुई। विभिन्न राज्यों के अनुभवों, उद्योग जगत के सुझावों और विशेषज्ञों के विचारों के आधार पर छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के लिए विजन 2030 के अंतर्गत उच्च विकास क्षमता वाले मॉडल के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।  प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के विचार-विमर्श भविष्य की रणनीति तय करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा

रायपुर जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री  अरुण साव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल बैठक में शामिल हुए। बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शनों की समीक्षा के साथ ही जल जीवन मिशन 2.0 की जानकारी दी गई।  जल जीवन मिशन की प्रगति, क्रियान्वयन तथा नल कनेक्शनों की स्थिति पर हुई चर्चा नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से आयोजित बैठक में केन्द्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री  वी. सोमन्ना तथा विभिन्न राज्यों के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री भी मौजूद थे। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, जल जीवन मिशन के संचालक  जितेन्द्र कुमार शुक्ला तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता  ओंकेश चंद्रवंशी भी उप मुख्यमंत्री  अरुण साव के साथ उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए।   बैठक में जल जीवन मिशन की प्रगति, उसके प्रभावी क्रियान्वयन तथा हर घर तक नल से स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। घरेलू नल जल कनेक्शनों की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति, पेयजल योजनाओं के संचालन में आ रही चुनौतियों तथा उनके समाधानों पर भी इस दौरान चर्चा की गई। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 की केंद्रीय कैबिनेट से अनुमोदन एवं उसकी शर्तों के बारे में सभी राज्यों को अवगत कराया गया। उप मुख्यमंत्री  साव ने बैठक में जल जीवन मिशन की समयावधि को दिसम्बर-2028 तक बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने इसके लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की।   उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने बैठक में बताया कि छत्तीसगढ़ द्वारा जल जीवन मिशन की योजनाओं के लिए राज्यांश के रूप में 3426 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि जारी की गई है। उन्होंने इसके समतुल्य केंद्रांश की राशि प्राथमिकता से जारी करने का अनुरोध किया। भारत सरकार द्वारा एकल ग्राम योजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का निर्णय लिया गया है।  साव ने इसमें आंशिक संशोधन करते हुए मल्टी-विलेज योजनाओं (MVS) के लिए भी प्राथमिकता के आधार पर राशि जारी करने का आग्रह केंद्र सरकार से किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सभी राज्यों को भारत सरकार के साथ एमओयू करना होगा। भारत सरकार द्वारा सुझाए गये बिन्दुओं को समाहित कर संशोधित ओएंडएम नीति (O&M Policy) लागू करनी होगी। इसके बाद ही भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत राशि जारी की जाएगी। साथ ही मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सभी योजनाओं की डिजिटल एसेट रजिस्ट्री सुजलम भारत मोबाइल एप के माध्यम से सुजल गांव आईडी जनरेट किया जाना होगा तथा योजनाओं का फाइनेंशियल रिकॉन्सिलिएशन भी किए जाने की अनिवार्यता होगी। इन प्रक्रियाओं को पूर्ण करने के बाद ही भारत सरकार द्वारा मिशन के तहत योजनावार राशि जारी की जाएगी। 

साव ने 55 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन, 21.40 करोड़ के नए कार्यों की घोषणा

रायपुर बीरगांव को हमने नगर निगम बनाया और हम ही संकल्प के साथ संवार रहे :  अरुण साव उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री  अरुण साव ने आज बीरगांव नगर निगम में 55 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। उन्होंने बीरगांव में आयोजित कार्यक्रम में 21 करोड़ 40 लाख रुपए के नए कार्यों की घोषणा भी की।  साव ने नागरिक सेवाओं को आसान और सुलभ बनाने आज बीरगांव नगर निगम के व्हाट्स-एप चैटबॉट सेवा का शुभारंभ किया। इसमें नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज कर सकेंगे तथा आवश्यक सेवाओं की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।  बीरगांव को हमने नगर निगम बनाया और हम ही संकल्प के साथ संवार रहे :  अरुण साव उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लाभार्थियों को मुख्यमंत्री गृह प्रवेश योजना के तहत चेक सौंपकर उन्हें नए घर की बधाई दी। उन्होंने पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राहियों को भी चेक प्रदान किए। कार्यक्रम में शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में योगदान के लिए स्वच्छता दीदियों को सम्मानित भी किया गया। सांसद  बृजमोहन अग्रवाल, विधायक  मोतीलाल साहू और महापौर  नंदलाल देवांगन भी लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। उप मुख्यमंत्री  साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बीरगांव नगर निगम को आज 55 करोड़ रुपए की बड़ी सौगात मिली है। जनप्रतिनिधियों की जागरूकता और सरकार की प्रतिबद्धता से ही विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि बंजारी मंदिर चौक से बस स्टैंड होते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक सड़क चौड़ीकरण के लिए 7 करोड़ 40 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। जल्दी ही यह कार्य शुरू होगा।  साव ने उरकुरा में मल्टी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के लिए 5 करोड़ रुपए, सड़क और नाली निर्माण के लिए 2-2 करोड़ रुपए तथा बीरगांव में अन्य विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।  साव ने कहा कि हमारी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले दो वर्षों में 2500 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन के साथ तेजी से विकास के कार्य हो रहे हैं। हमने ही बीरगांव को नगर निगम बनाया है और हम ही इसे संवारने का काम भी कर रहे है। बीरगांव नगर निगम के सभापति  कृपा राम निषाद, नेता प्रतिपक्ष  ओमप्रकाश साहू,  योगेश साहू और  भागीरथी साहू के साथ एमआईसी सदस्य, पार्षदगण और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे। 

उपभोक्ताओं को मिलेगा 758 करोड़ रुपए का सीधा लाभ

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा 12 मार्च 2026 को प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना (एमबीबीएस) आर्थिक रूप से कमजोर बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत और संजीवनी बनकर सामने आई है। इस योजना के माध्यम से कोरोना महामारी तथा अन्य कारणों से बकाया बिजली बिल जमा नहीं कर पाने वाले उपभोक्ताओं को सीधे राहत प्रदान की जाएगी। यह योजना विशेष रूप से निम्नदाब घरेलू, बीपीएल तथा कृषि उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी है। इसके अंतर्गत 31 मार्च 2023 की स्थिति में बकाया राशि को आधार मानकर उपभोक्ताओं को मूल राशि एवं अधिभार (सरचार्ज) में छूट दी जाएगी। प्रदेश के 29 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को इस योजना के तहत लगभग 758 करोड़ रुपए तक की सीधी छूट मिलने का अनुमान है। बिजली क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि की राहत पहली बार दी जा रही है। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण के दौरान प्रोटोकॉल और प्रतिबंधों के कारण कई महीनों तक मीटर रीडिंग नहीं हो पाई थी। इसके चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को एक साथ कई महीनों के बिजली बिल मिले, जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण वे जमा नहीं कर सके। महामारी के कारण कमजोर हुई आर्थिक स्थिति ने अनेक परिवारों को और अधिक कठिनाई में डाल दिया। ऐसे ही उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। इस योजना से उपभोक्ताओं को न केवल बकाया बिजली बिलों के भुगतान में राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें सरल और सुविधाजनक तरीके से अपने पुराने बकाये का निराकरण करने का अवसर भी मिलेगा। योजना 30 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगी। योजना में शामिल होने के लिए उपभोक्ता मोर बिजली ऐप, सभी बिजली वितरण केंद्रों तथा संबंधित कार्यालयों में पंजीयन करा सकते हैं। राज्य सरकार द्वारा योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव में शिविर भी लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद उपभोक्ता इसका लाभ उठा सकें। भुगतान के बाद पात्र उपभोक्ताओं को एम-ऊर्जा योजना का लाभ भी मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना न केवल लाखों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देगी, बल्कि उन्हें नियमित रूप से बिजली बिल भुगतान के लिए प्रोत्साहित भी करेगी। मुख्यमंत्री  साय की इस संवेदनशील पहल से प्रदेश के लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे समय पर पंजीयन कर योजना का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करें तथा भुगतान के दौरान किसी प्रकार की आशंका होने पर संबंधित वितरण केंद्र के अधिकारियों से संपर्क किया जाए।

जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास: गौधाम योजना से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को मिलेगा सुरक्षित आश्रय

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना का शुभारंभ किया। योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के 11 जिलों में 29 गौधामों का संचालन प्रारंभ हो गया है।  मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर बिलासपुर जिले के  कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जोगीपुर में प्रस्तावित गौ अभ्यारण्य लगभग 184 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रथम चरण में 1 करोड़ 32 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके पूर्ण होने पर यहां एक साथ लगभग 2500 गौवंश के संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा सकेगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौधाम योजना के माध्यम से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा तथा पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत कई जिलों में गाय वितरण का कार्य भी प्रारंभ किया गया है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पानी और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस योजना से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि गौधाम योजना का शुभारंभ एक पुनीत अवसर है। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है तथा गोधन संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, जब पूरे प्रदेश में एक साथ गौधाम योजना की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 10-10 गौधाम चरणबद्ध रूप से स्थापित किए जाएंगे, जिससे गौवंश संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष  विशेषर पटेल ने कहा कि गौ माता हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य सरकार सुनियोजित कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही है। कार्यक्रम में विधायक  अमर अग्रवाल,  धरमलाल कौशिक,  धर्मजीत सिंह,  सुशांत शुक्ला, महापौर मती पूजा विधानी, कमिश्नर बिलासपुर  सुनील जैन, आईजी  रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा  चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में गौपालक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।