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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सु वैभवी अग्रवाल को मुख्यमंत्री ने दी बधाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 35वीं रैंक प्राप्त करने वाली सु वैभवी अग्रवाल ने आज मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में भेंट की।  मुख्यमंत्री  साय ने सु वैभवी को मिठाई खिलाकर उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सु वैभवी अग्रवाल ने अपनी प्रतिभा, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वैभवी की यह सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियाँ यह संदेश देती हैं कि लक्ष्य के प्रति समर्पण,अनुशासन और निरंतर प्रयास से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सु वैभवी अग्रवाल भविष्य में प्रशासनिक सेवा में अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए देश और समाज की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आगामी दायित्वों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर सु वैभवी अग्रवाल के पिता  शीतल अग्रवाल और भाई  विनायक अग्रवाल उपस्थित थे।

नक्सल संगठन को तगड़ा झटका, देवजी के बाद 124 माओवादी आत्मसमर्पण को तैयार

जगदलपुर.  तेलंगाना में शनिवार को होने जा रहा 124 माओवादियों का सामूहिक समर्पण वाम उग्रवाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। माओवादी सैन्य प्रमुख थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्लाजी रेड्डी के नेतृत्व में यह समर्पण शाम चार बजे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के सामने होगा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्पण करने वालों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) से जुड़े कई सक्रिय कैडर शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस समर्पण के साथ ही माओवादी संगठन की सैन्य इकाई लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। दरअसल माओवादियों की सक्रिय और संगठित सैन्य संरचना अब केवल दंडकारण्य क्षेत्र तक सीमित रह गई थी। देवा भी समर्पण कर चुका है सूत्रों के अनुसार माओवादियों की इकलौती सक्रिय बटालियन भी इसी इलाके में संचालित हो रही थी, जिसका प्रभारी हाल ही में मारा गया कुख्यात कमांडर माड़वी हिड़मा और कमांडर बा देवा था। इस बटालियन को संगठन की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई माना जाता था। यह छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा से लगे जंगलों में सक्रिय रहती थी। बड़ी संख्या में कैडरों के समर्पण के बाद इस बटालियन की संरचना भी लगभग समाप्त मानी जा रही है। हिड़मा के मारे जाने के बाद देवा भी समर्पण कर चुका है। हाल के महीनों में संगठन के शीर्ष नेता देवजी और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी मल्ला राजी रेड्डी और तेलंगाना के प्रभारी दामोदर के आत्मसमर्पण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कैडरों में भी संगठन छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ी है। माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार सुरक्षा अभियानों, मजबूत खुफिया नेटवर्क और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन का ढांचा तेजी से कमजोर पड़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह सामूहिक समर्पण दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी संगठन के घटते प्रभाव का संकेत है। आने वाले समय में और भी कैडरों के मुख्यधारा में लौटने की संभावना जताई जा रही है।

मध्यप्रदेश में मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, 5 डिब्बे पटरी से उतरे; बिलासपुर-कटनी रूट पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित

बिलासपुर. बिलासपुर से कोयला लेकर बड़ोदरा जा रही एक मालगाड़ी बिलासपुर बीना मार्ग पर कटनी मुड़वारा स्टेशन से पहले बेपटरी हो गई। जिससे रूट का रेल आवागमन प्रभावित हुआ है। ट्रैक को सुधारने और पटरी से उतरे डिब्बों को वापस पटरी पर लाने का कार्य जारी है। मौके पर डीआरएम सहित वरिष्ठ अधिकारी और कई स्थानों की राहत टीम मौजूद हैं। बिलासुपर से बड़ोदरा जा रही थी मालगाड़ी जानकारी के अनुसार, बिलासपुर से एक मालगाड़ी कोयला लोड करके बड़ोदरा जा रही थी। लगभग 11 बजे जैसे ही वह एनकेजे से कटनी मुड़वारा की ओर बढी बाबा घाट के पास बने केबिन के पास अचानक से धमाके के साथ मालगाड़ी के एक के बाद एक पांच डिब्बे पटरी से उतर गए और कोयला ट्रैक पर बिखर गया। किसी तरह से चालक ने गाड़ी रोकी और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। मालगाड़ी के लिए बेपटरी होने की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई और एनकेजे, कटनी सहित जबलपुर और सतना से टीम में मौके पर बुलाई गई है। खाली किया जा रहा कोयला वहीं, जबलपुर डीआरएम कमल तलरेजा सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और डिब्बों को काटकर अलग करते हुए पटरी पर बिखरे कोयले को अलग करने का कार्य किया जा रहा है। वहीं डिब्बों में भरे कोयले को भी मजदूर और मशीनों की मदद से खाली कराया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द रेलवे ट्रैक का सुधार करते हुए यातायात को बहाल किया जा सके। ट्रेनें प्रभावित वही, बिलासपुर बीना रेलखंड के बंद होने से मुड़वारा से बिलासपुर शहडोल की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनें और मालगाड़ी प्रभावित हैं। जिनको अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया है।  

बस्तर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए सहारा बना ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’

जगदलपुर. जगदलपुर में संचालित ‘सखी वन स्टॉप सेंटर’ संकट में घिरी महिलाओं के लिए सुरक्षा और सहायता का अहम केंद्र बनकर उभरा है। 31 जनवरी 2026 से शुरू हुई इस सेवा के तहत अब तक 1862 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 1849 मामलों का समाधान कर पीड़ित महिलाओं को राहत दिलाई गई है। केंद्र की सबसे महत्वपूर्ण सुविधा अस्थायी सुरक्षित आश्रय है। घर या समाज में खुद को असुरक्षित महसूस करने वाली महिलाओं को यहां सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था दी जाती है। अब तक 763 महिलाओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जा चुका है। इसके साथ ही मनोवैज्ञानिक परामर्श (काउंसलिंग) भी महिलाओं के लिए बड़ी मदद साबित हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1225 महिलाओं की काउंसलिंग की गई है, जिससे वे मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव से बाहर निकलने में सफल रही हैं। जिला महिला संरक्षण अधिकारी के अनुसार घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद से जूझ रही महिलाओं के लिए भावनात्मक सहारा बेहद जरूरी होता है। यही कारण है कि यह केंद्र अब महिलाओं के लिए सुरक्षा, न्याय और आत्मविश्वास की नई उम्मीद बनकर सामने आया है।

बस्तर में मलेरिया से निपटने के कार्यशाला में बताए उपाय

जगदलपुर. बस्तर संभाग में मलेरिया की चुनौती से निपटने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 7 मार्च को होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर के वरिष्ठ चिकित्सक और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। यह कार्यशाला एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया और शासकीय मेडिकल कॉलेज जगदलपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। मलेरिया के बदलते स्वरूप, जटिल मामलों की पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में चिकित्सकों को अपडेट करना कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है। विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में मलेरिया, विशेष रूप से फैल्सीफेरम मलेरिया के मामले अधिक देखने को मिलते हैं, जो गंभीर रूप ले सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार बिना स्पष्ट लक्षण वाले मलेरिया और दस्त के मरीजों में भी मलेरिया के संकेत मिलते हैं, जो चिंता का विषय है। कार्यशाला में मलेरिया की एपिडेमियोलॉजी, आधुनिक जांच तकनीक, समय पर निदान और गंभीर मरीजों के उपचार पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे। इस पहल से बस्तर के डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को मलेरिया प्रबंधन की आधुनिक पद्धतियों को समझने और मरीजों के बेहतर उपचार में मदद मिलेगी।

सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से बस्तर में नक्सलियों के TCOC पर सन्नाटा

बस्तर. देश के सबसे बड़े नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में इस बार एक अलग स्थिति देखने को मिल रही है। करीब दो दशक में पहली बार ऐसा लग रहा है कि नक्सली अपने अहम सैन्य अभियान TCOC (Tactical Counter Offensive Campaign) की शुरुआत तय समय पर नहीं कर पाए हैं। आमतौर पर यह अभियान हर साल 8 मार्च के बाद शुरू होकर जून तक चलता है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करना और बस्तर जैसे क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाना होता है। यह अभियान उनके गुरिल्ला युद्ध का हिस्सा है, जिसमें वे सूखे और पतझड़ के मौसम का फायदा उठाते हैं। लेकिन इस बार शुरुआती दिनों में किसी बड़ी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। बता दें कि सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल संगठन पर बढ़ते दबाव और कमजोर होती संरचना का परिणाम मान रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए ऑपरेशन में कई बड़े कमांडर मारे गए, गिरफ्तार हुए या आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसके साथ ही जंगलों में नए सुरक्षा कैंप, सड़कों का तेजी से विस्तार और ड्रोन सर्विलांस ने नक्सलियों की गतिविधियों को काफी सीमित कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों के खौफ से अब नक्सली बड़ी संख्या में एकत्र होकर रणनीति बनाने में भी मुश्किल महसूस कर रहे हैं। ऐसे में बड़े हमलों की योजना बनाना उनके लिए पहले जितना आसान नहीं रह गया है।हालांकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं। आशंका है कि नक्सली छोटे या मध्यम स्तर के हमलों के जरिए अभियान की शुरुआत कर सकते हैं। इसे देखते हुए बस्तर संभाग के सभी जिलों में सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। यदि इस साल भी टीसीओसी प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाता, तो यह नक्सली आंदोलन के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो सकता है।

युवा किसान रत्ना की सफलता की कहानी: 21 की उम्र में आधुनिक खेती से लाखों की कमाई

सरगुजा सरगुजा के डिगमा गांव की रहने वाली रत्ना मजूमदार ने शादी के बाद अपने परिवार की खेती को नई दिशा दी। रत्ना ने नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन की महिला समूह से जुड़कर लोन लिया और दो एकड़ में गेंदे के फूल की खेती शुरू की। गेंदे के फूल की खेती में प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपये की लागत आती है और उत्पादन करीब दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। यानी लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक मुनाफा होता है। खास बात यह है कि तीन महीने में एक फसल तैयार हो जाती है और साल में चार बार उत्पादन मिलता है। रत्ना मजूमदार का कहना है कि ड्रिप इरीगेशन जैसी आधुनिक तकनीक से खेती आसान हो गई है और युवाओं को भी खेती की ओर आना चाहिए। रत्ना मजूमदार ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि शादी के बाद जब मैं ससुराल आई तो देखा कि मेरे ससुराल वाले फूल की छोटी खेती करते थे। मैं मां महामाया समूह में जुड़ी तो देखा कि यहां से लोन लेकर सभी महिलाएं अपने काम को आगे बढ़ाती हैं। मैंने भी समूह से लोन लिया और इस काम को आगे बढ़ाया। पहले हम लोग छोटे पैमाने पर करते थे, अब हम लोग दो-तीन एकड़ में करते हैं। उन्होंने बताया कि हम लोगों की लागत डेढ़ से दो लाख रुपए लग जाती है और प्रॉफिट 50 प्रतिशत तक आ जाती है। उन्होंने बताया कि गेंदे के फूल की खेती के लिए पौधे कोलकाता से आते हैं। उन लोगों से हम पौधों को खरीदते हैं और अपने खेतों में लगाते हैं। पहले महीने में इसका फूल आ जाता है। ये फूल तीन महीने तक लगातार चलते हैं। फिर हम लोग इसको हटाकर नए पौधे लगाते हैं। उन्होंने पीएम मोदी का धन्यवाद किया और कहा कि हम महिलाओं को लोन देकर आगे बढ़ाने के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने सभी महिलाओं से अपील की कि आप भी समूह में जुड़िए। अपने छोटे-मोटे काम को आगे बढ़ाइए। यानी अगर आधुनिक तकनीक के साथ खेती की जाए तो खेती भी रोजगार का बड़ा जरिया बन सकती है। सरगुजा से यह कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं

रायपुर बिरगांव होली मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी होली की शुभकामनाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक श्री अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष श्री नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष श्री मिर्जा एजाज बेग, श्री रमेश ठाकुर, श्री भागीरथी यादव, श्री मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

क्षेत्र में बिछेगा सड़कों और पुल-पुलियों का जाल

रायपुर, भानपुरी में आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे का अनूठा संगम हेल्थ एटीएम का शुभारंभ बस्तर के विकास और जन-सुविधाओं की दिशा में शुक्रवार को नई शुरुआत हुई, जहाँ आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्र के स्वास्थ्य परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के उद्देश्य से बस्तर जिले में हेल्थ एटीएम सेवा का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया है।  वन मंत्री  केदार कश्यप ने भानपुरी स्थित सिविल अस्पताल में इस हाईटेक स्वास्थ्य सुविधा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बस्तर सांसद  महेश कश्यप तथा अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।  उन्होंने क्षेत्रवासियों को 36.50 लाख रूपए के निर्माण कार्यों की सौगात देते हुए ग्राम राजपुर और खड़का में विभिन्न परियोजनाओं का भूमिपूजन किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने कहा कि यह हेल्थ एटीएम बस्तर के दूरस्थ अंचलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है, क्योंकि अब ग्रामीणों को छोटी-बड़ी जांचों के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। इस अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से नागरिक ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी और ऑक्सीजन लेवल सहित 100 से अधिक प्रकार की स्वास्थ्य जांचें तत्काल करवा सकेंगे। उन्होंने कहा कि सबसे क्रांतिकारी पहलू यह है कि यह मशीन महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान करने में सक्षम है, जिससे समय रहते उपचार संभव हो सकेगा। इसके साथ ही, टेलीमेडिसिन सुविधा के जरिए मरीज सीधे विशेषज्ञ डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर परामर्श ले सकेंगे और उनकी पूरी मेडिकल रिपोर्ट मोबाइल ऐप पर डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में इस डिजिटल क्रांति के साथ-साथ नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास का शंखनाद भी गूँजा। कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देते हुए वनमंत्री  कश्यप ने सालेमेटा और राजपुर सरगीगुड़ा में नई सीसी सड़कों की आधारशिला रखी गई, जो ग्रामीणों को कीचड़ और दुर्गम रास्तों से स्थायी निजात दिलाएंगी। इसके अलावा तिरथा, सुधापाल और खड़का में नई पुलियों के निर्माण से मानसून के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का समाधान होगा और ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क मुख्य मार्गों से बना रहेगा। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए घोटिया दुलारदई गुड़ी में एक नवीन सामुदायिक भवन के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हुआ है। इन सभी विकास कार्यों और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के एकीकृत प्रयासों ने बस्तर में हर्ष और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।  इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, पूर्व सांसद  दिनेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रूपसिंह मंडावी, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल, जिला पंचायत सदस्य  निर्देश दीवान सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी ग्रामीण उपस्थित थे।

सूरजपुर में स्कूल पर ताला, घंटों बाहर बैठे रहे छात्र; 6 शिक्षकों पर कार्रवाई

सूरजपुर  जिले के भैयाथान ब्लाक अंतर्गत सांवारांवा स्थित प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला में गुरुवार को लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया। स्कूल समय में विद्यालय का ताला नहीं खुलने के कारण छात्र-छात्राएं बाहर ही बैठे रहे। घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया में प्रसारित होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधान पाठक सहित छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जानकारी के अनुसार पांच मार्च को सुबह 11 बजे तक सांवारांवा के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला बंद पाए गए। विद्यालय परिसर में कोई भी शिक्षक या कर्मचारी उपस्थित नहीं था। इस दौरान पढ़ने आए छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर बैठे रहे। शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बच्चों को मध्यान्ह भोजन भी नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी मोबाइल के माध्यम से विकासखंड शिक्षा अधिकारी भैयाथान को दी। सूचना मिलने के बाद अधिकारियों ने निरीक्षण कराया, जिसमें शिकायत सही पाई गई। इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो में भी बच्चे स्कूल के बाहर बैठे नजर आ रहे हैं और विद्यालय में ताला लटका दिखाई दे रहा है। छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस मामले को गंभीर मानते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा ने प्रधान पाठक सहित छह शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। नोटिस में कहा गया है कि विद्यालय समय में स्कूल बंद पाया जाना और शिक्षकों की अनुपस्थिति शासकीय दायित्व के प्रति गंभीर लापरवाही है। जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देश दिया है कि संबंधित शिक्षक स्वयं उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। निर्धारित समय में जवाब नहीं देने या संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इनको मिला नोटिश जिन शिक्षकों को नोटिस जारी किया गया है उनमें प्रधान पाठक संजय गुप्ता, संकुल समन्वयक रामजतन कुशवाहा, शिक्षिका इशा खलखो, प्रीति टोप्पो तथा शिक्षक अजित कुमार चन्द्रा और रमेश चेसकर शामिल हैं।