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असम राइफल्स पर हमले में शहीदों को मुख्यमंत्री साय ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मणिपुर में असम राइफल्स पर हुए कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस हमले में छत्तीसगढ़ के बस्तर के वीर सपूत राइफलमैन रंजीत कश्यप सहित दो जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्र शहीद जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार शोकसंतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों का यह त्याग हम सबको देश की रक्षा और एकता के मार्ग पर और अधिक दृढ़ संकल्पित करता है।

मुख्यमंत्री साय गुरु तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी पर नगर कीर्तन यात्रा में हुए शामिल

रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के सेरीखेड़ी में गुरु तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर आयोजित नगर कीर्तन यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुरु तेगबहादुर सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। यह हमारा सौभाग्य है कि आज छत्तीसगढ़ की धरती पर आयोजित कीर्तन यात्रा का दर्शन कर रहे हैं।   मुख्यमंत्री साय ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी की अगुवाई कर रहे पंच प्यारों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को पवित्र सिरोपा और कृपाण भेंट की गई।   मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़े सौभाग्य और गर्व का विषय है। आज हम नगर कीर्तन यात्रा के दर्शन कर रहे हैं, जो गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर असम के गुरुद्वारा धुबरी साहिब से प्रारंभ होकर देश के अनेक स्थानों से होते हुए छत्तीसगढ़ पहुँची है। लगभग 10 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर यह नगर कीर्तन यहां पहुँचा है। हमारे प्रदेशवासियों के लिए यह ऐतिहासिक क्षण और पुण्य अवसर है कि हमें इस यात्रा का स्वागत करने और इसमें भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी की शहादत के बारे में हम सभी भलीभांति जानते हैं। वे मुगलों के सामने कभी नहीं झुके और अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। आज भी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब गुरु तेगबहादुर जी की शहादत का अमर प्रतीक है। हम गुरु तेगबहादुर जी को नमन करते हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत भी अद्वितीय है। साहिबजादों ने मुगलों के सामने झुकने के बजाय धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने साहिबजादों की इस वीरता को नमन करते हुए हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वीर बाल दिवस को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर विधायक सुनील सोनी, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवड़िया, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, बलदेव सिंह भाटिया, गुरचरण होरा, गुरुद्वारा कमेटियों के प्रमुखजन सहित बड़ी संख्या में सिख धर्म के अनुयायी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।  

सशक्तिकरण की ओर: जागरूकता संगोष्ठी का सेलम इंग्लिश स्कूल, रायपुर में भव्य एवं सफल आयोजन

रायपुर चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया, छत्तीसगढ़ डायोसीज़ के तत्वावधान में सेलम इंग्लिश स्कूल, मोती बाघ, रायपुर में आज “सशक्तिकरण की ओर: जागरूकता संगोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम समाज में शिक्षा, अवसर और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी एवं शैक्षिक योजनाओं की जानकारी देना तथा बच्चों और युवाओं को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरित करना था। “बच्चों का भविष्य शिक्षा और आत्मनिर्भरता से ही सुरक्षित होगा। योजनाएं तभी सफल होंगी जब हम उनका लाभ समय पर उठाएँ।” सशक्तिकरण का संकल्प कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी ने एक स्वर से शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा हथियार मानते हुए इन योजनाओं का लाभ उठाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर गेस्ट स्पीकर्स के रूप में आमंत्रित श्री अल्बर्ट कुजूर और श्रीमती शालिनी टोप्पो ने विस्तार से विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। विशेष रूप से उन्होंने PM-VIKAS (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना की उप-योजनाओं – सीखो और कमाओ, नई रोशनी, नई मंजिल, उस्ताद और हमारी धरोहर – पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि ये योजनाएं न केवल कौशल विकास और रोज़गार के अवसर उपलब्ध कराती हैं बल्कि भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्पों को भी नई ऊर्जा देती हैं। “गरीबी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरकार ने रास्ता दिखाया है, अब हमें आगे बढ़कर उसका लाभ लेना है।” छात्रवृत्तियों से शिक्षा के नए आयाम कार्यक्रम में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति – ₹5,000/- तक। स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति – ₹7,000/- तक। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु – ₹10,000/- तक की सहायता। यह संदेश बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए अत्यंत उत्साहवर्धक रहा। वक्ताओं ने कहा कि “गरीबी शिक्षा की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। सरकार ने रास्ता दिखाया है, अब हमें आगे बढ़कर उसका लाभ लेना है।” आयोजकों की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम में सीएनआई डायोसीज़ की बिशप, द राइट रेव. डॉ. सुषमा कुमार और डायोसीज़ सेक्रेटरी श्री नितिन लॉरेंस की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। उनके प्रेरक विचारों ने उपस्थित जनसमूह के भीतर विश्वास और आत्मबल का संचार किया। सेलम स्कूल की प्रभारी प्राचार्य, श्रीमती रुपिका लॉरेंस, ने मंच से छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा – “आज का यह आयोजन केवल एक संगोष्ठी नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। अगर हमारे बच्चे शिक्षित होंगे, आत्मनिर्भर होंगे, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होगा। हमें इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने बच्चों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाना है।” “हमारा लक्ष्य है कि हर बच्चा पढ़े, सीखे और अपनी प्रतिभा से समाज को रोशन करे। यह संगोष्ठी उसी दिशा में एक मजबूत कदम है।” भविष्य की दिशा आयोजकों ने घोषणा की कि इस तरह की संगोष्ठियां आगे भी निरंतर आयोजित की जाएंगी, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय जागरूक होकर शिक्षा और सरकारी योजनाओं से अधिकतम लाभ उठा सके। सेलम इंग्लिश स्कूल ने इस पहल को सफल बनाने के लिए चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया, छत्तीसगढ़ डायोसीज़ का विशेष आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी अतिथियों, गेस्ट स्पीकर्स, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का हार्दिक आभार प्रकट किया गया। “शिक्षा ही वह दीपक है जो अंधकार मिटाकर हर घर में उजाला कर सकती है।” जनहित का संदेश यह संगोष्ठी वास्तव में समुदाय के सशक्तिकरण, शिक्षा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि “शिक्षा ही वह दीपक है जो अंधकार मिटाकर हर घर में उजाला कर सकती है।”

गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी ने धर्म की रक्षा के लिए दी अपनी शहादत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी पर नगर कीर्तन यात्रा में हुए शामिल रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के सेरीखेड़ी में गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर आयोजित नगर कीर्तन यात्रा में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु श्री तेगबहादुर सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। यह हमारा सौभाग्य है कि आज छत्तीसगढ़ की धरती पर आयोजित कीर्तन यात्रा का दर्शन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था टेककर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी की अगुवाई कर रहे पंच प्यारों का सम्मान भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को पवित्र सिरोपा और कृपाण भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए बड़े सौभाग्य और गर्व का विषय है। आज हम नगर कीर्तन यात्रा के दर्शन कर रहे हैं, जो गुरु तेगबहादुर जी की 350वीं शहादत शताब्दी के अवसर पर असम के गुरुद्वारा धुबरी साहिब से प्रारंभ होकर देश के अनेक स्थानों से होते हुए छत्तीसगढ़ पहुँची है। लगभग 10 हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर यह नगर कीर्तन यहां पहुँचा है। हमारे प्रदेशवासियों के लिए यह ऐतिहासिक क्षण और पुण्य अवसर है कि हमें इस यात्रा का स्वागत करने और इसमें भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गुरु तेगबहादुर जी की शहादत के बारे में हम सभी भलीभांति जानते हैं। वे मुगलों के सामने कभी नहीं झुके और अपने धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया। आज भी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरुद्वारा शीशगंज साहिब गुरु तेगबहादुर जी की शहादत का अमर प्रतीक है। हम गुरु तेगबहादुर जी को नमन करते हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की शहादत भी अद्वितीय है। साहिबजादों ने मुगलों के सामने झुकने के बजाय धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने साहिबजादों की इस वीरता को नमन करते हुए हर वर्ष 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वीर बाल दिवस को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कांवड़िया, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, पूर्व विधायक श्री कुलदीप जुनेजा, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, श्री बलदेव सिंह भाटिया, श्री गुरचरण होरा, गुरुद्वारा कमेटियों के प्रमुखजन सहित बड़ी संख्या में सिख धर्म के अनुयायी एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने असम राइफल्स पर हमले में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मणिपुर में असम राइफल्स पर हुए कायरतापूर्ण हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस हमले में छत्तीसगढ़ के बस्तर के वीर सपूत राइफलमैन रंजीत कश्यप सहित दो जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्र शहीद जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि इस कठिन घड़ी में राज्य सरकार शोकसंतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों का यह त्याग हम सबको देश की रक्षा और एकता के मार्ग पर और अधिक दृढ़ संकल्पित करता है।

डोंगरगढ़ में ट्रेन सुविधाएं बढ़ीं: नवरात्रि के लिए 1 मेमू स्पेशल, 2 मेमू ट्रेनें अब गोंदिया तक

 रायपुर भारत में नवरात्र का पर्व एक विशेष धार्मिक अवसर है, जिसे भक्तों के लिए यात्रा करना अक्सर चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इस समय हर साल रेलवे प्रशासन भक्तों की सुविधा के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करता है।इस बार भी, 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक डोंगरगढ़ देवीधाम रेलवे स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों को 9 दिनों के लिए स्टापेज दिया गया है, जिससे यात्रियों को बहुत राहत मिल सकेगी। इसके साथ ही, 2 मेमू ट्रेनों का गोंदिया तक विस्तार भी किया गया है और 1 स्पेशल मेमू ट्रेन चलाई जाएगी। दो मेमू का किया विस्तार नवरात्र के दौरान ही गाड़ी संख्या 68741 दुर्ग-गोंदिया मेमू का रायपुर तक विस्तार किया गया है। यह शाम 5.15 बजे रायपुर से रवाना होगी। 68742 गोंदिया-दुर्ग मेमू रात रायपुर रात 10.40 बजे आएगी। इसी तरह रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू का गोंदिया तक विस्तार किया गया है। मेमू 68729 रात 11.40 बजे डोंगरगढ़ से रवाना होकर 1.20 गोंदिया पहुंचेगी। 68730 डोंगरगढ़-गोंदिया मेमू 1.45 गोंदिया से रवाना होकर 3.20 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी। डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ठहराव रेलवे प्रशासन ने नवरात्र पर्व के दौरान डोंगरगढ़ माता मंदिर पहुंचने वाले भक्तों की संख्या को ध्यान में रखते हुए पांच जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर ठहराव देने की घोषणा की है। इन ट्रेनों में शामिल हैं: दुर्ग-डोंगरगढ़ के बीच स्पेशल श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे डोंगरगढ़-दुर्ग के बीच मेमू स्पेशल चलाएगा। यह मेमू 06886 डोंगरगढ-दुर्ग 1 बजे डोंगरगढ़ से निकलेगी, जो कि 1.05 जतकनहार, 1.11 मुसरा, 1.19 बकल, 1.30 राजनांदगांव, 1.40 परमलकसा, 1.50 मुरहीपार, 1.57 रसमरा, 2.20 बजे दुर्ग पहुंचेगी। इसी प्रकार 06885 दुर्ग- डोंगरगढ़ मेमू दुर्ग से 2.40 बजे निकलेगी, जो कि 2.45 रसमरा, 2.53 मुरहीपार, 3.01 परमलकसा, 3.09 राजनांदगांव, 3.19 बकल, 3.28 मुसरा, 3.35 जतकनहार और 4 बजे      बिलासपुर-भगत की कोठी-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-बीकानेर-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-चेन्नई-बिलासपुर एक्सप्रेस     बिलासपुर-पुणे-बिलासपुर एक्सप्रेस     रायपुर-सिकंदराबाद-रायपुर एक्सप्रेस डोंगरगढ़ स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक डोंगरगढ़ स्टेशन पर 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव दो मिनट के लिए दिया गया है, जिससे यात्रियों को राहत मिलेगी। मेमू ट्रेनों का विस्तार: गोंदिया-दुर्ग मेमू ट्रेन का फेरा 9 दिनों के लिए रायपुर तक बढ़ाया गया है, जबकि रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू ट्रेन को गोंदिया तक बढ़ाया गया है। स्पेशल मेमू ट्रेन: दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच 9 दिनों के लिए एक स्पेशल मेमू ट्रेन चलाई जाएगी, जो यात्रियों के लिए अतिरिक्त सुविधा प्रदान करेगी। नवरात्र के दौरान रेलवे प्रशासन की तैयारी: रेलवे प्रशासन ने नवरात्र के पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रेन सेवाओं की व्यवस्था की है। विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव: बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे और रायपुर-सिकंदराबाद एक्सप्रेस ट्रेनों को डोंगरगढ़ स्टेशन पर 9 दिनों के लिए ठहराव दिया गया है। गोंदिया-दुर्ग मेमू का फेरा रायपुर तक बढ़ाया गया नवरात्र के दौरान गोंदिया से दुर्ग तक चलने वाली मेमू ट्रेन को रायपुर तक बढ़ाया गया है। यह ट्रेन गोंदिया से दुर्ग तक पहुंचने के बाद भिलाई नगर, भिलाई पावर हाउस, भिलाई, देव बलौदा चरौदा, डी-केबिन, कुम्हारी, सरोना होते हुए रायपुर पहुंचेगी। वापसी में यह वही मार्ग अपनाते हुए गोंदिया लौटेगी। यह ट्रेन नवरात्र के दौरान भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्शन बनेगी, जिससे वे आसानी से यात्रा कर सकेंगे और अपनी धार्मिक यात्रा का आनंद ले सकेंगे।  रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू को गोंदिया तक बढ़ाया गया दूसरी ओर, रायपुर से डोंगरगढ़ के बीच चलने वाली मेमू ट्रेन को भी 9 दिनों के लिए गोंदिया तक बढ़ा दिया गया है। यह ट्रेन डोंगरगढ़ से गुदमा, आमगांव, धानौली, सालेकसा, दरेकसा, बोरतलाव, पनिया-जोब होते हुए गोंदिया पहुंचेगी। वापसी में यह गोंदिया से डोंगरगढ़ होते हुए रायपुर तक पहुंचेगी। यह विस्तार न केवल धार्मिक यात्रियों के लिए एक सुविधा है, बल्कि इससे इस क्षेत्र के अन्य यात्रियों को भी यात्रा में आसानी होगी।  दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच मेमू स्पेशल इसके अतिरिक्त, दुर्ग और डोंगरगढ़ के बीच 9 दिनों के लिए एक विशेष मेमू ट्रेन भी चलायी जाएगी। यह ट्रेन दुर्ग से रसमरा, मुरहीपार, परमलकसा, राजनांदगांव, बकल, मुसरा, जटकन्हार होते हुए डोंगरगढ़ पहुंचेगी। यह स्पेशल ट्रेन नवरात्र पर्व के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए चलाई जाएगी। नवरात्र पर रेलवे की तैयारी: भक्तों के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था भारतीय रेलवे ने हर साल की तरह इस बार भी नवरात्र के दौरान यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा है। डोंगरगढ़ स्टेशन पर 9 दिनों के लिए 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव, गोंदिया-दुर्ग और रायपुर-डोंगरगढ़ मेमू ट्रेनों का विस्तार, साथ ही विशेष मेमू ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन सभी उपायों से यह सुनिश्चित किया गया है कि यात्रियों को न केवल धार्मिक यात्रा का आनंद मिले, बल्कि उन्हें यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।   छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ देवी धाम की विशेषताऐं छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले में स्थित डोंगरगढ़ देवी धाम को मां बम्लेश्वरी मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह 1,600 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जहां लाखों भक्त हर साल दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को लगभग 1,100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, और जो सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते, उनके लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।  मां बम्लेश्वरी मंदिर की मुख्य बातें:     स्थान: यह मंदिर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव ज़िले के डोंगरगढ़ शहर में स्थित है।      ऊंचाई: यह 1,600 फीट ऊँची पहाड़ी की चोटी पर बना है।     इतिहास: इस शक्तिपीठ का इतिहास करीब 2,000 वर्ष पुराना माना जाता है।     छोटी बम्लेश्वरी: पहाड़ी के समतल पर एक और मंदिर है जिसे छोटी बम्लेश्वरी के नाम से जाना जाता है।     पहुँच: भक्तों के लिए मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1,100 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।     रोपवे: सीढ़ियाँ न चढ़ पाने वाले भक्तों के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है।     मेला: नवरात्रि के समय यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इन ट्रेनों के डोंगरगढ़ में ठहरने का समय दो मिनट के लिए निर्धारित किया गया है। यह यात्रियों को मंदिरों के दर्शन करने के … Read more

आरपीएफ स्थापना दिवस समारोह: आईजी ने वीरता और उत्कृष्ट कार्य के लिए 40 को किया सम्मानित

रायपुर/ बिलासपुर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 20 सितंबर  को अपना स्थापना दिवस समारोह रिजर्व लाइन, बैरक प्रांगण के मैदान में उत्साहपूर्वक मनाया. इस अवसर पर महानिरीक्षक-सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त मुनव्वर खुर्शीद ने परेड की सलामी ली और उपस्थित बल सदस्यों को संबोधित किया. उन्होंने RPF के गौरवशाली इतिहास और कर्तव्यों पर प्रकाश डाला, साथ ही बल सदस्यों को ईमानदारी, निष्ठा और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए कर्तव्य निभाने के लिए प्रोत्साहित किया. समारोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 40 अधिकारियों और बल सदस्यों को उनके सराहनीय कार्य के लिए पुरस्कार और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया. इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया. सामाजिक जिम्मेदारी के तहत 50 से अधिक RPF अधिकारियों और कर्मचारियों ने रेलवे अस्पताल, बिलासपुर में रक्तदान किया.  कार्यक्रम में उप महानिरीक्षक-सह-मुख्य सुरक्षा आयुक्त, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, सहायक सुरक्षा आयुक्त और रेलवे सुरक्षा बल के अन्य अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे. इस समारोह ने RPF की प्रतिबद्धता और सेवा भावना को उजागर करते हुए बल सदस्यों में जोश और उत्साह का संचार किया.

शहीद रंजीत कश्यप की कहानी: 3 बेटियों के पिता और बुजुर्ग माता-पिता का था इकलौता सहारा

रायपुर  मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में आतंकवादियों ने असम राइफल्स के एक वाहन पर हमला किया। इस हमले में दो जवान शहीद हो गए, जबकि 5 घायल हो गए। शहीद जवानों में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के बालेंगा गांव निवासी रंजीत कुमार कश्यप भी शामिल हैं।  ग्रामीणों और दोस्तों के मुताबिक रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आया था। करीब एक महीने तक वो अपने परिजनों के साथ रहा। पिछले रविवार को ही ड्यूटी पर लौटा था। उसने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं। इसके बाद रिटायर होकर गांव लौटेगा और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनेगा। परिजन बताते हैं कि, रंजीत शुरू से ही देश की सेवा करना चाहता था। उसका सपना था फोर्स ज्वाइन कर देश की रक्षा करना। रंजीत की तीन बेटियां हैं। एक बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई है। शुक्रवार को हुआ था हमला जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे बिष्णुपुर जिले के नांबोल सबल लीकाई इलाके में आतंकियों ने असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया। अचानक हुई गोलीबारी में एक वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हमले में एक ऑफिसर और जवान रंजीत कुमार कश्यप शहीद हो गए। इनके अलावा तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। वहीं, रंजीत कश्यप बस्तर के बालेंगा इलाके के रहने वाले थे। असम में अपनी सेवा दे रहे थे। तलाशी अभियान और श्रद्धांजलि हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और आतंकवादियों की तलाश शुरू कर दी. सेना ने तलाशी अभियान जारी रखा है ताकि हमलावरों को पकड़ा या मार गिराया जा सके. असम राइफल्स के डायरेक्टर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. पीएम मोदी के दौरे के बाद मणिपुर की शांति पर सवाल यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर दौरे पर गए थे, उन्होंने चुराचांदपुर में 7000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया था और मणिपुर को शांति और विकास का प्रतीक बनाने का वादा किया था, लेकिन दौरे के कुछ ही दिनों बाद हुई यह आतंकी घटना राज्य में शांति बहाल करने की कोशिशों पर सवाल खड़े करती है.

महापौर–पार्षद निधि के लिए 102.97 करोड़ रुपए जारी, नगरीय निकायों में आएगी रौनक

रायपुर राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों को कुल 102 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए जारी किए हैं। विभाग ने निकायों को पार्षद निधि के कुल 72 करोड़ 33 लाख 75 हजार रुपए, महापौर/अध्यक्ष निधि के कुल 30 करोड़ 63 लाख 75 हजार रुपए आबंटित कर दिए हैं। विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दोनों मदों में 50-50 प्रतिशत राशि निकायों को जारी की है। नगरीय प्रशासन विभाग ने पार्षद निधि के रूप में राज्य के 14 नगर निगमों को कुल 21 करोड़ 96 लाख रुपए जारी किए हैं। वहीं 54 नगर पालिकाओं को 23 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपए, 120 नगर पंचायतों को 27 करोड़ रुपए की पार्षद निधि जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से 14 नगर निगमों को दस करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए की महापौर निधि आबंटित की गई है। राज्य के 54 नगर पालिकाओं को दस करोड़ 50 लाख रुपए और 120 नगर पंचायतों को दस करोड़ एक लाख 25 हजार रुपए अध्यक्ष निधि जारी की गई है।

जनसेवक की मिसाल: MLA भावना बोहरा ने घायल को निजी वाहन से कराया अस्पताल भेजवाया

कवर्धा पांडातराई के पास शुक्रवार रात दर्दनाक हादसा हो गया. दो बाइकों की आमने-सामने की टक्कर में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. सड़क पर वह खून से लथपथ हालत में वह सड़क पर तड़प रहा था. इस दौरान घटनास्थल से गुजर रही भाजपा विधायक भावना बोहरा ने काफिला रोककर घायल की मदद कर मिसाल पेश की. दरअसल, पंडरिया विधायक भावना बोहरा बिलासपुर से लौट रही थी. इस दौरान सड़क पर हादसे में खून से लथपथ युवक को देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवाया. इसके बाद विधायक भीड़ में पहुंची और घायल युवक के सिर बह रहे खून को रोकने के लिए कपड़ा भी रख दिया. मसीहा की तरह पहुंची विधायक भावना ने अपनी गाड़ी से युवक को अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल अस्पताल में युवक का इलाज जारी है. वहीं मौके पर मौजूद लोगों ने विधायक भावना बोहरा के इस मानवीय कदम की सराहना की.