samacharsecretary.com

भाईचारे के बंधन में बंधे CM विष्णु देव साय, ब्रह्मकुमारी बहनों ने की शुभकामनाएं

रायपुर, रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, रायपुर की संचालिका ब्रह्मकुमारी सविता बहन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट की और उन्हें रक्षा-सूत्र बाँधकर उनके स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखद जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने ब्रह्मकुमारी बहनों का हृदय से आभार व्यक्त किया और कहा कि रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी भावनात्मक एकता और सामाजिक मूल्यों की गहराई को दर्शाने वाला अनुपम उत्सव है।उन्होंने कहा कि रक्षा-सूत्र में निहित शुभकामनाएँ उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक समर्पित होने की प्रेरणा देती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर संभाग में हो रहा है डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

रायपुर. बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन तथा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का प्रभावी क्रियान्वयन क्षेत्र के लिए एक बड़ा परिवर्तन साबित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के सशक्त विस्तार की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं आज तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।  बस्तर के छ :जिला चिकित्सालयों,  दो सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण तथा मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारियां अब एक डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रही हैं। इसके तहत मरीजों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल तकनीक के इस समावेशन ने अस्पतालों में पारदर्शिता, कार्यकुशलता और मरीजों की संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) सुनिश्चित किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी जा रही है। स्कैन एंड शेयर एवं आभा आईडी के माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी पंजीयन की सुविधा से मरीजों को लम्बी कतारों से राहत मिली है और उन्हें त्वरित सेवाएं मिल रही हैं। डिजिटल नवाचारों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से सामने आया है। जिला चिकित्सालय बस्तर में मई, जून और जुलाई 2025 के दौरान कुल 60,045 ओपीडी पंजीयन दर्ज किए गए, जिनमें से 32,379 पंजीयन आभा लिंक के माध्यम से हुए — जो कि कुल पंजीयनों का 53% है। इसी अवधि में जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा में 33,895 ओपीडी पंजीयन दर्ज हुए, जिनमें से 13,729 पंजीयन आभा से लिंक किए गए — यानी 40% का डिजिटल एकीकरण। यह पूरी प्रक्रिया न केवल समय की बचत सुनिश्चित कर रही है, बल्कि मरीजों के लिए डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की सुविधा भी प्रदान कर रही है, जिसे वे देश के किसी भी हिस्से में कभी भी देख सकते हैं। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ उपचार की निरंतरता और गुणवत्ता में भी वृद्धि हो रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर संभाग में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी आधुनिक तकनीकों के सफल क्रियान्वयन ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति और दिशा दी है। डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह पहल न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल है, जिसे हम शीघ्र ही राज्य के सभी जिलों में लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" के संकल्प को साकार करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का यह तकनीकी उन्नयन न केवल स्थानीय जनता के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहा है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभर रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस प्रणाली को सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू कर "स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़" की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ना है। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में यह पहल केवल स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। बस्तर में मिले सकारात्मक परिणाम इस बात का प्रमाण हैं कि जब तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी एक साथ आते हैं, तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव लाएगी, बल्कि ‘स्वस्थ भारत’ के निर्माण में भी छत्तीसगढ़ का महत्त्वपूर्ण योगदान सुनिश्चित करेगी।

गोवंश सुरक्षा के नए प्रयास, गोसेवकों के लिए मानदेय योजना लागू

रायपुर  राज्य सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा के लिए ‘गौधाम’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें बेसहारा गोवंश के लिए चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी। चरवाहों और गोसेवकों को मासिक मानदेय मिलेगा, चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी और बेहतर संचालन करने वाली संस्थाओं को रैंकिंग के साथ ईनाम भी दिया जाएगा। वित्त विभाग ने ‘गौधाम योजना’ को मंजूरी दे दी है और पशुधन विकास विभाग ने कलेक्टरों और फील्ड अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। गोवंशों की लगातार हो रही मौतों पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार में आने के बाद गो अभ्यारण बनाने की बात कही थी। बता दें कि दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री साय ने एक कार्यक्रम में कहा था कि गो माता हमारी समृद्धि का प्रतीक हैं और माना जाता है कि उनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा था कि गो अभ्यारण्य को ‘गौधाम’ कहना अधिक उचित है। बेमेतरा में 50 एकड़ में ‘गौधाम’ तैयार बेमेतरा के झालम में 50 एकड़ में गौधाम तैयार है। इसी तरह कवर्धा में 120 एकड़ में गौधाम निर्माण तेजी से जारी है। बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने सड़कों पर मृत पड़ी गायों की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी की थी। पिछले सप्ताह तीन अलग-अलग हादसों में 90 गायों की मौत और बिलासपुर रोड पर 18 गायों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्य सचिव ने अफसरों को फटकार लगाई थी। क्या होगा ‘गौधाम’ में     गौधाम शासकीय भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशु-शेड, पर्याप्त पानी, बिजली और चारागाह की सुविधा होगी।     इनका संचालन निकटस्थ पंजीकृत गौशाला समितियों को प्राथमिकता देकर किया जाएगा।     योग्य एनजीओ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां या किसान उत्पादक कंपनियां भी जिम्मेदारी संभाल सकेंगी।     चयन का मापदंड गोसेवा, नस्ल सुधार, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन प्रशिक्षण का अनुभव होगा।     गोधाम में वैज्ञानिक पद्धति से पशुओं का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा।     गो- उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकास, नस्ल सुधार, गौसेवा के प्रति जन-जागरण और रोजगार सृजन योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं।     प्रत्येक गो-धाम में अधिकतम 200 पशु रखे जा सकेंगे। ये हैं कानूनी प्रविधान छत्तीसगढ़ की सीमाएं सात राज्यों से जुड़ी हैं और यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे अंतर्राज्यीय पशु परिवहन की संभावना रहती है। राज्य में कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (संशोधित 2011) और छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण नियम 2014 लागू हैं, जिनमें अवैध पशु परिवहन व तस्करी पर सख्ती से रोक है। प्रदेश में बड़ी संख्या में निराश्रित और जब्त गोवंश पाए जाते हैं, जो फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि ‘गौधाम योजना’ से न केवल निराश्रित पशुओं की मौत पर रोक लगेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर प्रबंधन करने वाली संस्थाएं राज्य में माडल गौधाम के रूप में पहचान बनाएंगी।  

गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत – पशुधन सुरक्षा, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल रायपुर में शुरू हुई ‘गौधाम योजना’, पशुधन सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मिलेगी ताकत गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और पशुधन संरक्षण को नई दिशा देने के लिए गौधाम योजना की शुरुआत करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल पशुधन की सुरक्षा और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी, बल्कि जैविक खेती, चारा विकास और गौ-आधारित उद्योगों के माध्यम से गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। योजना का स्वरूप इस तरह तैयार किया गया है कि निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल के साथ-साथ चरवाहों और गौसेवकों को नियमित आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध हो, जिससे ग्रामीण जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता आ सके। गौधाम योजना के ड्राफ्ट को वित्त एवं पशुधन विकास विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है। गौधाम योजना का उद्देश्य गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन करना, गौ-उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना, ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा फसलों के नुकसान और दुर्घटनाओं में पशु एवं जनहानि से बचाव सुनिश्चित करना है। अवैध तस्करी और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस* पशुधन विकास विभाग ने यह योजना विशेष रूप से तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े गए पशुओं और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की है। राज्य में अवैध पशु तस्करी एवं परिवहन पर पहले से रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु जब्त होते हैं। इन पशुओं और घुमंतु पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए ही यह योजना शुरू की जा रही है। प्रत्येक गौधाम में क्षमता के अनुसार अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे। गौधाम योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपए प्रतिमाह और गौसेवकों को 13,126 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही मवेशियों के चारे के लिए प्रतिदिन निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष 20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष 30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो। मुख्यमंत्री साय – “पशुधन की सुरक्षा और गांवों में रोजगार बढ़ाएगी गौधाम योजना” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  कहा कि गौधाम योजना से प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़ी संख्या में चरवाहों एवं गौसेवकों को नियमित आय का साधन मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार कर उन्हें अधिक दूध देने और खेती-किसानी में पूरी क्षमता से उपयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रमों को भी गति मिलेगी, जिससे ग्राम स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। गौधाम की स्थापना के लिए चयनित होगी उपयुक्त शासकीय भूमि ऐसी शासकीय भूमि, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। जिन गौठानों में पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से सटे चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि आसपास की पंजीकृत गौशाला की समिति संचालन हेतु असहमति व्यक्त करती है, तो अन्य स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारी समिति संचालन के लिए आवेदन कर सकेगी। जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जो पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था और आयोग के बीच करार होगा, जिसके पश्चात गौधाम का संचालन उस संस्था को सौंपा जाएगा। गोबर खरीदी नहीं होगी, चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन गौधाम में गोबर खरीदी नहीं होगी, पशुओं के गोबर का उपयोग चरवाहा स्वयं करेगा। यहां निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा और उनका वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन होगा। संचालन में गौशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य गौ सेवा आयोग में पंजीकृत गौशाला की समिति, स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनी और सहकारी समिति संचालन के लिए पात्र होंगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं की संख्या के आधार पर राशि दी जाएगी। गौधाम से सटी भूमि पर चारा विकास के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी—एक एकड़ में चारा विकास कार्यक्रम पर 47,000 रुपए और पांच एकड़ के लिए 2,85,000 रुपए का प्रावधान है। गौधाम बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र, बढ़ावा मिलेगा गौ उत्पादों को प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पाद विषय पर प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, कीट नियंत्रक, गौ काष्ठ, गोनोइल, दीया, दंतमंजन, अगरबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण, उत्पादन और बिक्री के लिए भी गौधाम एक माध्यम बनेंगे।

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय को जशपुर की बहनों ने बांधी राखी रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह ग्राम बगिया स्थित कैंप कार्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित बहनों ने राखी बांधकर आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना की हितग्राही दीदियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाएँ, मितानिन और स्व-सहायता समूह की बहनों ने भी मुख्यमंत्री श्री साय की कलाई पर राखी बांधी और उनके दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, स्नेह और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है और मोदी जी की गारंटी का अर्थ है—वादा पूरा होने की गारंटी। मुख्यमंत्री श्री साय ने जशपुर के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जशपुर जिले में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, फिजियोथेरेपी एवं उद्यानिकी कॉलेज, 200 बिस्तरों का अस्पताल और बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए हर्राडांड (कुनकुरी) में प्रदेश का पाँचवाँ पावर प्लांट स्थापित करने की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जशपुर के विकास में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। इस अवसर पर श्री उपेंद्र यादव, श्री सुनील गुप्ता, सरगुजा कमिश्नर श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक कुमार झा, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक कुमार, जनप्रतिनिधिगण, स्व-सहायता समूह की दीदियाँ और हितग्राही महिलाएँ बड़ी संख्या में उपस्थित थीं।

उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेंगी अच्छी पुस्तकें, युवाओं के करियर निर्माण में अहम साबित होंगी सेंट्रल लाइब्रेरी

रायपुर : युवाओं के सपनों को लगेंगे पर, बनेंगे 34 नए नालंदा परिसर नगरीय प्रशासन विभाग ने नालंदा परिसरों के लिए मंजूर किए हैं 237.58 करोड़ सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे दूरस्थ शहरों में भी खुलेंगी सेंट्रल लाइब्रेरी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अच्छा माहौल उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेंगी अच्छी पुस्तकें, युवाओं के करियर निर्माण में अहम साबित होंगी सेंट्रल लाइब्रेरी नगरीय प्रशासन विभाग ने नालंदा परिसरों के लिए मंजूर किए हैं 237.58 करोड़ रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सपनों को पर देने 34 नए नालंदा परिसर बना रही है। ये नालंदा परिसर केवल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, रायगढ़ जैसे बड़े शहरों में ही नहीं बन रहे, बल्कि दूरस्थ वनांचलों के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे शहरों में भी बन रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नए नालंदा परिसरों के लिए राशि स्वीकृत की है। वहीं रायगढ़ में सीएसआर से 700 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी का काम प्रगति पर है। इसके लिए रायगढ़ नगर निगम और एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) के बीच 42 करोड़ 56 लाख रुपए का करार हुआ है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा।  इन सेंट्रल लाइब्रेरीज-सह-रीडिंग जोन्स से प्रदेशभर के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छा माहौल मिलेगा। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छी पुस्तकें भी मिलेंगी। प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं के करियर निर्माण में ये लाइब्रेरीज काफी मददगार और अहम साबित होंगे। इन सर्वसुविधायुक्त, अत्याधुनिक लाइब्रेरीज में युवाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नालंदा परिसरों के लिए 237 करोड़ 57 लाख 95 हजार रुपए मंजूर किए हैं। विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 नगरीय निकायों में 18 नालंदा परिसरों के लिए 125 करोड़ 88 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में अलग-अलग शहरों में 15 नालंदा परिसरों के लिए 111 करोड़ 70 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें से 11 नालंदा परिसरों के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर संबंधित निर्माण एजेंसीज को कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं। ये जल्द ही आकार लेना शुरू कर देंगे।  नगरीय प्रशासन विभाग ने 11 नालंदा परिसरों के लिए जारी किए 19.15 करोड़ उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने 11 नगरीय निकायों में नालंदा परिसरों के निर्माण के लिए प्रथम किस्त के रूप में कुल 19 करोड़ 14 लाख 87 हजार रुपए इसी महीने जारी किए हैं। विभाग द्वारा दुर्ग, राजनांदगांव और अंबिकापुर नगर निगम को प्रत्येक को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की प्रथम किस्त जारी की गई है। वहीं बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, कांकेर और जांजगीर नगर पालिका तथा कुनकुरी नगर पंचायत को प्रत्येक को एक करोड़ दस लाख 37 हजार रुपए प्रथम किस्त के रूप में जारी किए गए हैं। नालंदा परिसर के निर्माण के लिए जशपुर नगर पालिका को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है।  दस शहरों में 500 सीटर और 22 में 250 सीटर लाइब्रेरी बनेंगी राज्य के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के अनुकूल माहौल देने के लिए दस नगरीय निकायों में 500 सीटर और 22 शहरों में 250 सीटर लाइब्रेरी बनाए जाएंगे। दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर निगम तथा जशपुर, लोरमी एवं गरियाबंद नगर पालिका में 500-500 सीटर नालंदा परिसरों का निर्माण किया जाएगा। वहीं धमतरी और चिरमिरी नगर निगम, कवर्धा, जांजगीर-नैला, बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कांकेर, नारायणपुर, बलरामपुर, मुंगेली, खैरागढ़, सक्ती, पेंड्रा, सारंगढ़, सूरजपुर, बैकुंठपुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा नगर पालिका तथा कुनकुरी, बसना और अंबागढ़-चौकी नगर पंचायत में 250-250 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन बनाए जाएंगे।   रायपुर में अभी तीन लाइब्रेरी संचालित, दो और बनेंगे राजधानी रायपुर में अभी तीन सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन संचालित हैं। इनमें एक हजार सीटर नालंदा परिसर-सह-ऑक्सी रीडिंग जोन, 800 सीटर तक्षशिला सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-स्मार्ट रीडिंग जोन और 500 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी शामिल हैं। पिछले पांच वर्षों में नालंदा परिसर में पढ़ाई करने वाले 400 युवाओं ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर न केवल अच्छी नौकरियां हासिल की हैं, बल्कि प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश भी प्राप्त किया है। रायपुर में जल्दी ही एक हजार सीटर और 500 सीटर नई लाइब्रेरी का काम प्रारंभ होगा। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इनके लिए क्रमशः 22 करोड़ 80 लाख रुपए और 11 करोड़ 28 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद – विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के नालंदा परिसर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को उड़ान देने का काम कर रही है। छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिले, इसके लिए हम अलग-अलग क्षेत्र के शहरों में नालंदा परिसरों का निर्माण कर रहे हैं। सुकमा से लेकर सूरजपुर और रायगढ़ से लेकर कवर्धा तक – हर कोने में अत्याधुनिक सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन खोले जा रहे हैं। ये नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद हैं।  छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने प्रतिबद्ध – अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेशभर में नालंदा परिसरों के विस्तार के बारे में कहा कि सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वसुविधायुक्त ये लाइब्रेरियां उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को पढ़ाई का अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री भी प्रदान करेंगी। राज्य के युवाओं की मेहनत को उनके इच्छित मुकाम तक पहुंचाने में नालंदा परिसर बड़ी भूमिका निभाएंगे। यहां वे पूरे फोकस, लगन और समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।

दंतेश्वरी फाइटर्स बहनों का शौर्य अन्य बहनों के लिए अनुकरणनीय: उप मुख्यमंत्री शर्मा

रायपुर : उप मुख्यमंत्री और वन मंत्री को ‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ आत्मसमर्पित माओवादी बहनों ने बांधा रक्षा सूत्र विकास की मुख्यधारा से जुड़ने वाली बहनों को सुरक्षा-सम्मान देने के लिए शासन प्रतिबंध: उप मुख्यमंत्री शर्मा दंतेश्वरी फाइटर्स बहनों का शौर्य अन्य बहनों के लिए अनुकरणनीय: उप मुख्यमंत्री शर्मा विकास की मुख्यधारा से जुड़ने वाली बहनों को सुरक्षा-सम्मान देने के लिए शासन प्रतिबंध रायपुर रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आज सर्किट हाउस परिसर दंतेवाड़ा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री केदार कश्यप को ‘दंतेश्वरी फाइटर’ एवं आत्मसमर्पित माओवादी बहनों ने रक्षा सूत्र बांधकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का संदेश दिया।  मंत्री द्वय ने इस मौके पर कहा कि हम सब यहाँ एक ऐसे अद्भुत और प्रेरणादायी क्षण के साक्षी हैं, जहाँ हमारी बहनों ने नक्सलवाद के रास्ते को छोड़कर विकास की मुख्यधारा का मार्ग अपनाया है। ये वही बहनें हैं, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और संघर्षों को पार करते हुए, समाज में सम्मान और शांति के साथ जीवन यापन का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि आज, इन बहनों ने हमारे अलावा यहां उपस्थित जिला पंचायत अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, सचिव, कमिश्नर, आईजी, डीआईजी, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत सीईओ और वरिष्ठ अधिकारियों को रक्षा सूत्र बांधकर यह विश्वास जताया है कि भाई-बहन का यह बंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्नेह और सम्मान का वचन है।  उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जो भी बहनें आज भी भटकाव के उस रास्ते पर हैं, यदि वे मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगी, तो पूरा समाज उन्हें खुले हृदय से अपनाएगा। हम उन्हें बहन का स्थान देंगे, उनकी सुरक्षा और सम्मान की पूरी जिम्मेदारी निभाएंगे, और उनके जीवन यापन के लिए हर संभव सहायता करेंगे। रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि विश्वास, अपनापन और एक-दूसरे की सुरक्षा का संकल्प है। आज इन बहनों ने जो स्नेह और सम्मान दिया है, वह मेरे लिए अविस्मरणीय है। सरकार इन बहनों और बस्तर के हर नागरिक के जीवन में शांति, सम्मान और समृद्धि लाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगी। इस दौरान उप मुख्यमंत्री एवं वन मंत्री और जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों सर्किट हाउस परिसर में पौधरोपण भी किया। साथ ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हर घर तिरंगा हर घर स्वच्छता, स्वतंत्रता का उत्सव स्वच्छता के संग अभियान अंतर्गत स्वच्छता जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।  इस अवसर पर विधायक चौतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष अरविन्द कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह, आईजी बस्तर रेंज सुंदरराज पी, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर कुणाल दुदावत, पुलिस अधीक्षक गौरव रॉय, जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारीगण उपस्थित थे।

युवाओं के लिए खुशखबरी: छत्तीसगढ़ में 34 नए नालंदा परिसर और सेंट्रल लाइब्रेरी

रायपुर  छत्तीसगढ़ के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए अब अपने ही शहर में बेहतरीन पढ़ाई का माहौल मिलने वाला है। राज्य सरकार 34 नए नालंदा परिसर बनाने जा रही है, जहां आधुनिक सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन की सुविधा होगी। खास बात यह है कि ये लाइब्रेरियां सिर्फ रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई जैसे बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, पेंड्रा, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर जैसे दूरस्थ इलाकों में भी खुलेंगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधा होंगी इन लाइब्रेरियों में युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी किताबें मिलेंगी। साथ ही यहां ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की सुविधा होगी, ताकि छात्र अपने लक्ष्य पर फोकस कर सकें। रायगढ़ में बनने वाली 700 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी राज्य की सबसे बड़ी होगी, जो एनटीपीसी के सीएसआर फंड से तैयार हो रही है। 237 करोड़ 57 लाख 95 हजार रुपए स्वीकृत नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पिछले दो सालों में 33 नालंदा परिसरों के लिए 237 करोड़ 57 लाख 95 हजार रुपए स्वीकृत किए हैं। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 नगरीय निकायों में 18 नालंदा परिसरों के लिए 125 करोड़ 88 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। वहीं, 2024-25 में 15 नालंदा परिसरों के लिए 111 करोड़ 70 लाख रुपए स्वीकृत हुए, जिनमें से 11 के निर्माण का कार्यादेश जारी हो चुका है। हाल ही में विभाग ने 11 नगरीय निकायों में निर्माण के लिए 19 करोड़ 14 लाख 87 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की है। यहां बनेगी 500 सीटों की क्षमता वाली लाइब्रेरी स्थान सीटों की संख्या दुर्ग 500 राजनांदगांव 500 अंबिकापुर 500 जगदलपुर 500 बिलासपुर 500 भिलाई 500 जशपुर 500 लोरमी 500 गरियाबंद 500 यहां बनेगी 250 सीटों की क्षमता वाली लाइब्रेरी स्थान सीटों की संख्या धमतरी 250 चिरमिरी 250 कवर्धा 250 जांजगीर-नैला 250 बालोद 250 बलौदा बाजार 250 बेमेतरा 250 कांकेर 250 नारायणपुर 250 बलरामपुर 250 मुंगेली 250 खैरागढ़ 250 सक्ती 250 पेंड्रा 250 सारगंगढ़ 250 सूरजपुर 250 दंतेवाड़ा 250 कुनकुरी 250 बसना 250 अंबागढ़ चौकी 250   रायपुर में तीन सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन संचालित राजधानी रायपुर में वर्तमान में तीन सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन संचालित हैं। 1000 सीटर नालंदा परिसर, 800 सीटर तक्षशिला सेंट्रल लाइब्रेरी और 500 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी। पिछले पांच सालों में इनसे पढ़ाई करने वाले 400 युवाओं ने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाई है। जल्द ही रायपुर में 1000 सीटर और 500 सीटर नई लाइब्रेरियों का निर्माण भी शुरू होगा। युवाओं के भविष्य की बुनिया नालंदा: सीएम साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि, नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, यह युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद हैं। हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र का युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर पाए। हर सुविधा देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – डिप्टी CM डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को पढ़ाई की हर सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वसुविधायुक्त लाइब्रेरियां उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री और शांत माहौल उपलब्ध कराएंगी, जिससे वे पूरे फोकस और लगन से अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकेंगे। इन नए नालंदा परिसरों के निर्माण से न केवल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को भी बड़े शहरों के बराबर अवसर मिलेंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ के शिक्षा ढांचे को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।  

खरगा की पूनम की मुस्कान में झलकता सुनहरे भविष्य का सपना

युक्तियुक्तकरण से बदला छोटे से गाँव का शैक्षिक परिदृश्य रायपुर बिलासपुर जिला के कोटा ब्लॉक का छोटा सा ग्राम खरगा अब शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। इस गाँव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय की छात्रा पूनम धृतलहरे की आंखों में अब आत्मविश्वास और उम्मीद दोनों चमकते हैं। मेहनती और होशियार पूनम शुरू से पढ़ाई में आगे रही है, लेकिन लंबे समय से यह विद्यालय एकल शिक्षकीय था, जिससे उसकी और उसके साथियों की शिक्षा प्रभावित हो रही थी। कठिन सवालों के उत्तर न मिल पाने से बच्चे धीरे-धीरे उत्साह खोने लगे थे और कुछ तो स्कूल छोड़ने की सोच भी रहे थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए युक्तियुक्तकरण ने इस गाँव के बच्चों की जिंदगी में नई दिशा दी। विद्यालय में पहले से कार्यरत शिक्षक श्री संतोष कुमार खांडे के साथ अब श्री मुकेश कुमार यादव की नियुक्ति होने से कक्षाओं में नई ऊर्जा और बेहतर शिक्षण वातावरण आया। दो शिक्षकों की मौजूदगी ने न केवल पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारी, बल्कि बच्चों का स्कूल से जुड़ाव भी बढ़ाया। पूनम और उसके सहपाठियों का कहना है कि अब वे कठिन से कठिन प्रश्न हल करना सीख गए हैं और पढ़ाई में मजा आने लगा है। पालकों ने भी मुख्यमंत्री के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है, जिससे वे भी शहर के बच्चों की तरह बड़े सपने देख और पूरे कर सकेंगे। खरगा जैसे छोटे गाँवों में जब शिक्षक समय पर पहुँचते हैं, तो यह बदलाव केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे गाँव के भविष्य को दिशा देता है। आज पूनम और उसके साथी न सिर्फ मन लगाकर पढ़ रहे हैं, बल्कि आने वाले समय में अपने गाँव और राज्य का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।

छत्तीसगढ़ में ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत – पशुधन सुरक्षा, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल

गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और पशुधन संरक्षण को नई दिशा देने के लिए गौधाम योजना की शुरुआत करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल पशुधन की सुरक्षा और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी, बल्कि जैविक खेती, चारा विकास और गौ-आधारित उद्योगों के माध्यम से गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। योजना का स्वरूप इस तरह तैयार किया गया है कि निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल के साथ-साथ चरवाहों और गौसेवकों को नियमित आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध हो, जिससे ग्रामीण जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता आ सके। गौधाम योजना के ड्राफ्ट को वित्त एवं पशुधन विकास विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है। गौधाम योजना का उद्देश्य गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन करना, गौ-उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना, ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा फसलों के नुकसान और दुर्घटनाओं में पशु एवं जनहानि से बचाव सुनिश्चित करना है। अवैध तस्करी और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस* पशुधन विकास विभाग ने यह योजना विशेष रूप से तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े गए पशुओं और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की है। राज्य में अवैध पशु तस्करी एवं परिवहन पर पहले से रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु जब्त होते हैं। इन पशुओं और घुमंतु पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए ही यह योजना शुरू की जा रही है। प्रत्येक गौधाम में क्षमता के अनुसार अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे। गौधाम योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपए प्रतिमाह और गौसेवकों को 13,126 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही मवेशियों के चारे के लिए प्रतिदिन निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष 20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष 30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो। मुख्यमंत्री श्री साय – “पशुधन की सुरक्षा और गांवों में रोजगार बढ़ाएगी गौधाम योजना” मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  कहा कि गौधाम योजना से प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़ी संख्या में चरवाहों एवं गौसेवकों को नियमित आय का साधन मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार कर उन्हें अधिक दूध देने और खेती-किसानी में पूरी क्षमता से उपयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रमों को भी गति मिलेगी, जिससे ग्राम स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। गौधाम की स्थापना के लिए चयनित होगी उपयुक्त शासकीय भूमि ऐसी शासकीय भूमि, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। जिन गौठानों में पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से सटे चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि आसपास की पंजीकृत गौशाला की समिति संचालन हेतु असहमति व्यक्त करती है, तो अन्य स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारी समिति संचालन के लिए आवेदन कर सकेगी। जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जो पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था और आयोग के बीच करार होगा, जिसके पश्चात गौधाम का संचालन उस संस्था को सौंपा जाएगा। गोबर खरीदी नहीं होगी, चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन गौधाम में गोबर खरीदी नहीं होगी, पशुओं के गोबर का उपयोग चरवाहा स्वयं करेगा। यहां निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा और उनका वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन होगा। संचालन में गौशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य गौ सेवा आयोग में पंजीकृत गौशाला की समिति, स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनी और सहकारी समिति संचालन के लिए पात्र होंगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं की संख्या के आधार पर राशि दी जाएगी। गौधाम से सटी भूमि पर चारा विकास के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी—एक एकड़ में चारा विकास कार्यक्रम पर 47,000 रुपए और पांच एकड़ के लिए 2,85,000 रुपए का प्रावधान है। गौधाम बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र, बढ़ावा मिलेगा गौ उत्पादों को प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पाद विषय पर प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, कीट नियंत्रक, गौ काष्ठ, गोनोइल, दीया, दंतमंजन, अगरबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण, उत्पादन और बिक्री के लिए भी गौधाम एक माध्यम बनेंगे।