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52 गांवों की समस्याओं को लेकर आदिवासियों और कांग्रेस का प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोग

धमतरी. जिले के आदिवासी अंचलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश आखिरकार सोमवार को फूट पड़ा। लगभग 52 गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया और कलेक्ट्रेट घेराव के लिए बड़ी संख्या में धमतरी पहुंचे। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने पैदल मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन और शासन की ओर से केवल आश्वासन ही दिए गए हैं। धरातल पर कोई ठोस काम नहीं होने से लोगों में भारी नाराजगी है। जानकारी के अनुसार, आदिवासी ग्रामीण बड़ी संख्या में वाहनों के माध्यम से धमतरी पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने शोभाराम देवांगन चौक के पास एकत्र होकर कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। प्रशासन और पुलिस ने उन्हें रोकने तथा समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट घेराव के लिए आगे बढ़ गए। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य दिखाई देने चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। अनुमान है कि प्रदर्शन में 500 से 2000 तक ग्रामीण शामिल है। बड़ी संख्या में आदिवासियों के जुटने को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया और सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई। वहीं, प्रदर्शनकारी ग्रामीण कलेक्टर से सीधे मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुनेगा और समाधान का भरोसा नहीं देगा, तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं, जिससे जिले में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि ने बदली दुर्गेश यादव के खेती की तस्वीर

रायपुर. ,  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सहारे का मजबूत आधार बन रही है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के ग्राम बिजरवार निवासी किसान दुर्गेश यादव भी उन लाभार्थियों में शामिल हैं, जिनके जीवन में इस योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद वे खेती-किसानी से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पहले खेती के लिए बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि सामग्री की व्यवस्था करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सहायता ने उनकी राह आसान कर दी है। दुर्गेश यादव बताते हैं कि योजना के तहत उन्हें प्रत्येक तीन माह में दो हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त होती है। समय पर मिलने वाली यह आर्थिक सहायता खेती के मौसम में आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने में मददगार साबित हो रही है। इससे खेती की लागत का बोझ कम हुआ है और उन्हें आर्थिक परेशानियों से काफी राहत मिली है। उन्होंने बताया कि पहले कृषि कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में कठिनाई होती थी, लेकिन अब योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग बीज, उर्वरक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किया जा रहा है। इससे खेती का कार्य अधिक व्यवस्थित ढंग से हो पा रहा है और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी मदद मिल रही है। दुर्गेश यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अनेक किसानों को मिल रहा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे खेती के कार्यों को बेहतर योजना और उत्साह के साथ कर पा रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी और सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से किसानों को समय पर सहायता मिल रही है, जिससे वे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना पा रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना आज ग्रामीण भारत के लाखों किसानों की तरह गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के किसान दुर्गेश यादव के जीवन में भी नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है।

आवास मेला-2025 के लक्की ड्रॉ का सफल आयोजन, विजेताओं की हुई घोषणा

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय आवास मेला-2025 तथा इसके उपरांत 31 दिसम्बर 2025 तक मंडल की विभिन्न आवासीय एवं व्यावसायिक योजनाओं में पंजीयन कराकर भवन आबंटन प्राप्त करने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए विशेष लक्की ड्रॉ का आयोजन आज दिनांक 22 जून 2026 (सोमवार) को अपराह्न 3:00 बजे मंडल मुख्यालय, सेक्टर-19, नवा रायपुर अटल नगर में हितग्राहियों एवं पत्रकारों के उपस्थिति में किया गया। लक्की ड्रॉ कार्यक्रम छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव तथा आयुक्त अवनीश शरण की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया। ड्रॉ की संपूर्ण प्रक्रिया लॉटरी पद्धति के माध्यम से पारदर्शी एवं निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराई गई, जिसका अवलोकन उपस्थित हितग्राहियों एवं अधिकारियों द्वारा किया गया। आवास मेले तथा निर्धारित अवधि में पंजीयन कराने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए आयोजित इस विशेष लक्की ड्रॉ में मारुति स्विफ्ट कार, होंडा शाइन मोटरसाइकिल, होंडा एक्टिवा स्कूटी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), एलईडी टेलीविजन सहित अन्य आकर्षक उपहारों के लिए विजेताओं का चयन किया गया। विशेष लक्की ड्रॉ के अंतर्गत बम्पर उपहार "मारुति स्विफ्ट कार" सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की पूजा बरेठ ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, दानसरा में एल.आई.जी. भवन क्रमांक-32 बुक कराया था। होंडा शाइन मोटरसाइकिल कोरबा जिले के खरमोरा निवासी रवि प्रकाश राठौर को मिली। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में कमर्शियल-कम-रेजिडेंशियल फ्लैट की दुकान क्रमांक-06 क्रय की है। होंडा एक्टिवा स्कूटी भी खरमोरा, कोरबा के कृष्ण कुमार को प्राप्त हुई। उन्होंने अटल विहार योजना अंतर्गत गोकुल नगर, खरमोरा, कोरबा में एम.आई.जी. फ्लैट ब्लॉक क्रमांक-1, तृतीय तल, फ्लैट क्रमांक एफ-302 बुक किया है। रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) की प्रथम विजेता श्रीमती सुषमा गुप्ता रहीं, जिन्होंने अटल विहार योजना, जगदीशपुर में ई.डब्ल्यू.एस. मकान बुक किया है। दूसरा रेफ्रिजरेटर अरुण कुमार प्रधान ने जीता, जिन्होंने वन टाइम सेटलमेंट योजना-2 अंतर्गत अभिलाषा परिसर में एच.आई.जी. फ्लैट बी-सी-604 बुक कराया था। वाशिंग मशीन के विजेताओं में ओम सोनी शामिल हैं, जिन्होंने अटल विहार योजना, बोदरी (बिलासपुर) में ई.डब्ल्यू.एस. मकान क्रमांक-414 बुक किया है। दूसरी वाशिंग मशीन कोहका, तिल्दा की रेणुका घृतलहरे ने जीती। उन्होंने अटल विहार योजना, कोहका-तिल्दा में एरिका पाम एल.आई.जी. स्वतंत्र मकान क्रमांक-126 क्रय किया है। एलईडी टेलीविजन के विजेताओं में गजेन्द्र कुमार यादव शामिल हैं, जिन्होंने पुलगांव फेस-2, दुर्ग में एच.आई.जी. डीएक्स-34 मकान बुक कराया है। दूसरे विजेता संजीत कुमार साह रहे, जिन्होंने सामान्य आवास योजना, सेक्टर-12, नवा रायपुर अटल नगर में जूनियर एम.आई.जी.-1 मकान क्रमांक-555 बुक कराया है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय आवास मेले के दौरान भी प्रतिदिन कूपन के माध्यम से भाग लेने वाले हितग्राहियों के लिए लक्की ड्रॉ आयोजित कर आकर्षक उपहार वितरित किए गए थे। प्रथम दिवस (23 नवम्बर 2025) को हिया साहू ने एलईडी टीवी, गौरव सौंपिपरे ने वाशिंग मशीन तथा राजेन्द्र धृतलहरे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं आर.के. साहू, प्रदीप चन्द्रवंशी एवं आनंद जावुलकर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। द्वितीय दिवस (24 नवम्बर 2025) को जीतेन्द्र कुमार साहू ने एलईडी टीवी, प्रिया कर्मकार ने वाशिंग मशीन तथा विशाल टीकम ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं त्रिलोचन पांडेय, भुनेश्वरी वर्मा एवं तुलेश्वर भोड़कर ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। तृतीय दिवस (25 नवम्बर 2025) को प्रदीप वर्मा ने एलईडी टीवी, संजय शुक्ला ने वाशिंग मशीन तथा राजा बंजारे ने रेफ्रिजरेटर (फ्रिज) जीता था। वहीं उन्नति पाल, नीलू साहू एवं पवन रेड्डी ने मिक्सर ग्राइंडर जीता था। इसके अतिरिक्त पांच अन्य विजेताओं ने स्टीम आयरन प्राप्त किया था। विशेष लक्की ड्रॉ बम्पर उपहार के चयनित विजेताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपहार प्रदान किए जाएंगे। उपहार वितरण समारोह 25 जून 2026 को सर्किट हाउस, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित किया जाएगा, जहां विजेताओं को सम्मानपूर्वक उनके उपहार प्रदान किए जाएंगे। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल राज्य के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने तथा हितग्राही-केंद्रित योजनाओं के माध्यम से उन्हें अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुक्त अवनीश शरण ने सभी हितग्राहियों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मंडल के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी । साथ ही उन्होंने भविष्य में भी मंडल की योजनाओं में इसी प्रकार सहभागिता बनाए रखने की अपील सभी हितग्राहियों से की।

डॉक्टरों की कमी पर सवाल, CG के मेडिकल कॉलेजों में खाली पद भरने की मांग तेज

रायपुर. छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने मुख्य सचिव को 16 पन्नों का पत्र लिखा है। इस पत्र में प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा शैक्षणिक स्टाफ के रिक्त पदों को तत्काल नियमित भर्ती से भरने एवं लड़खड़ाती चिकित्सा व्यवस्था को सुदद करने की मांग की गई है। पत्र के अनुसार, छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में डॉक्टरों व शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर ला खड़ा किया है। हाल ही में सामने आए आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी हैं। ये आंकड़े साफ बयां करते हैं कि करोड़ों मरीजों का बोझ उठाने वाले प्रदेश के मुख्य चिकित्सा संस्थान खुद स्टाफ की किल्लत से बुरी तरह हांफ रहे हैं। विडंबना यह है कि एक तरफ सरकारें ‘डॉक्टरों की कमी’ का रोना रोती हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में हजारों योग्य डॉक्टर होने के बावजूद सालों से नियमित भर्ती प्रक्रिया ठप पड़ी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले संस्थानों में स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर मरीजों के इलाज पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही सूबे के भावी डॉक्टरों (मेडिकल छात्रों) की पढ़ाई और भविष्य भी भगवान भरोसे चल रहा है। आलम ये है कि प्रदेश से हर साल लगभग 2250 एमबीबीएस निकल रहे हैं। इसके एवज में पीजी में बमुश्किल 399 ही सीट हैं। इसके अलावा अन्य विशेषज्ञों की तो सीट भी नहीं है। रायपुर-बिलासपुर को छोड़ दें तो राज्य के अन्य कालेजों में 80 प्रतिशत डाक्टरों के पद खाली हैं। एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टारों को महज 530 प्रतिदिन रुपये मानदेय मिलता है, जबकि अन्य राज्यों में स्थिति बेहतर है। बांड की शर्तों के अनुरूप काम करने वाले डाक्टरों को भी केवल 49 हजार ही मानदेय मिलता है। दो साल तक उन्हें गांव में सेवा देनी पड़ती है। यही वजह है कि ज्यादातर युवा डॉक्टर स्वेच्छा से बांड शर्तों से मुक्त होकर 25 लाख रुपये जमा करके प्रदेश से ही मुक्ति पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। चिकित्सा व्यवस्था की दुर्दशा इसी से समझ सकते हैं कि प्रदेश में आज तक प्रदेश के सरकारी क्षेत्र में एक भी किडनी, लीवर या हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी नहीं हो सकी है। उच्च चिकित्सा के लिए राज्य के बाहर जाने की स्थिति बनी हुई है। रिक्त पदों का गणित: रीढ़ विहीन ढांचा सरकारी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो इस बदहाली का सबसे स्याह और डरावना चेहरा सीनियर रेजिडेंट्स (SR) के पदों पर देखने को मिलता है। किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के भीतर व्यावहारिक चिकित्सा और चौबीस घंटे मुस्तैद रहने वाली व्यवस्था की रीढ़ सीनियर रेजिडेंट्स ही होते हैं। राज्य में इनके कुल 518 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 375 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 72.3 प्रतिशत पदों पर डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं हुई है। यही वजह है कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्डों तक में मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है और गिने-चुने डॉक्टरों पर काम का मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है पद का नाम रिक्तता (प्रतिशत में) स्थिति का आकलन सीनियर रेजिडेंट 72.3% सर्वाधिक गंभीर असिस्टेंट प्रोफेसर 51.6% चिंताजनक एसोसिएट प्रोफेसर 49.1% गंभीर संकट प्रोफेसर 48.5% शैक्षणिक ढांचा प्रभावित जूनियर रेजिडेंट 41.6% जमीनी स्तर पर स्टाफ की कमी चिंता की बात यह भी है कि मेडिकल कॉलेजों में सिर्फ जूनियर डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि देश के भविष्य (डॉक्टरों) को तैयार करने वाले प्रोफेसरों की कुर्सियां भी सूनी हैं। चिकित्सा शिक्षकों की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर तीनों श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिशत पद खाली हैं। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि अगर समय रहते इन पदों को नियमित भर्ती के जरिए नहीं भरा गया, तो चिकित्सा सेवाओं का पूरी तरह चरमराना तय है। चिकित्सा विशेषज्ञ के 80 प्रतिशत तक पद खाली चिकित्सा विशेषज्ञ: प्रदेश में कुल स्वीकृत 1773 पदों में से केवल 355 कार्यरत हैं (नियमित: 320, तदर्थ: 2, संविदा: 33)। इसके चलते रिकार्ड 1418 पद खाली हैं, यानी लगभग 80% पद रिक्त हैं। चिंताजनक बात यह है कि मोहला-मानपुर और सुकमा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेषज्ञों की संख्या शून्य है, जिससे ग्रामीण अंचलों में गंभीर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। चिकित्सा अधिकारी : इसी तरह चिकित्सा अधिकारियों के कुल 2296 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1174 पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं और 305 पद रिक्त पड़े हैं। हालांकि, कार्यरत अमले में नियमित डॉक्टरों की संख्या (सिर्फ 37) बेहद कम है, जबकि तदर्थ (780) और संविदा (1991) कर्मियों की संख्या कहीं अधिक है। यह स्वास्थ्य ढांचे की संविदा और तदर्थ व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है। विरोधाभास: 17 हजार से अधिक डॉक्टर उपलब्ध, फिर भी नियुक्तियां बंद स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा के पीछे डॉक्टरों की अनुपलब्धता नहीं, बल्कि सरकारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत डॉक्टरों के ताजा आंकड़े इस विरोधाभास को पूरी तरह स्पष्ट करते हैं। राज्य में वर्तमान में कुल 17,142 डॉक्टर पंजीकृत हैं, जो चिकित्सा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त हैं। काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार: एमबीबीएस डॉक्टर: 11,132 एमडी (विशेषज्ञ): 2,850 एमएस (सर्जन): 2,740 सुपर स्पेशलिस्ट (DM): 190 सुपर स्पेशलिस्ट (MCh): 230 नियमित डॉक्टरों के अलावा, राज्य में करीब 5,000 अस्थायी डॉक्टर भी पंजीकृत हैं, जो समय-समय पर संविदा या अन्य माध्यमों से चिकित्सा कार्यों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते हैं। इतने बड़े पूल के बावजूद राज्य में साल 2020 के बाद से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) के माध्यम से कोई नियमित भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई है। योग्य डॉक्टरों की फौज सड़क पर है या निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रही है, और सरकारी अस्पताल खाली पड़े हैं।

प्रदेश का सबसे मॉडल शहर बनेगा रायगढ़, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताई विकास की बड़ी योजना

प्रदेश का सबसे मॉडल शहर बनेगा रायगढ़ : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी शहर में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों का किया निरीक्षण, गुणवत्ता और समय-सीमा पर दिया विशेष जोर मरीन ड्राइव, आईएसबीटी, ऑक्सीजोन और जल संरक्षण परियोजनाओं का लिया जायजा रायपुर  वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी ने सोमवार को रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में संचालित विभिन्न महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने मरीन ड्राइव, अंतर्राज्यीय बस स्टैंड (आईएसबीटी), एफसीआई ऑक्सीजोन, मिट्ठूमुड़ा तालाब, किसान राइस मिल ऑक्सीजोन तथा कयाघाट पुल सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का स्थल पर पहुंचकर अवलोकन किया और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ को प्रदेश के सबसे आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधासंपन्न शहर के रूप में विकसित करना उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि सड़क, परिवहन, पर्यावरण, जल संरक्षण और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी ये परियोजनाएं पूर्ण होने के बाद रायगढ़ विकास का नया मॉडल बनकर उभरेगा। नवंबर तक पूरा होगा मरीन ड्राइव प्रगति नगर स्थित निर्माणाधीन मरीन ड्राइव का निरीक्षण करते हुए वित्त मंत्री ने कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने मुख्य बॉक्स कल्वर्ट एवं डायवर्सन निर्माण कार्य समय पर पूरा होने पर संतोष व्यक्त किया और संबंधित एजेंसियों की सराहना की।उन्होंने कहा कि मरीन ड्राइव केवल यातायात सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि रायगढ़ की नई पहचान बनने जा रही है। इससे शहर की सुंदरता बढ़ेगी, यातायात व्यवस्था सुगम होगी तथा नागरिकों को एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को आगामी नवंबर तक परियोजना पूर्ण करने के निर्देश दिए। रायगढ़ को मिलेगा अत्याधुनिक बस टर्मिनल वित्त मंत्री ने निर्माणाधीन अंतर्राज्यीय बस स्टैंड (आईएसबीटी) का निरीक्षण करते हुए कहा कि यह परियोजना आगामी चार दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि बस स्टैंड में एक साथ 30 बसों के संचालन की सुविधा होगी, जबकि अतिरिक्त 40 बसों के लिए भी पर्याप्त पार्किंग एवं स्थान आरक्षित रहेगा। यात्रियों के लिए आधुनिक प्रतीक्षालय विकसित किया जा रहा है, जहां लगभग 550 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। वहीं बसों के रखरखाव और मरम्मत के लिए पृथक वर्कशॉप क्षेत्र भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बस टर्मिनल रायगढ़ को प्रदेश और देश के प्रमुख शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा तथा यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। हरियाली और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री ने एफसीआई परिसर में विकसित किए जा रहे ऑक्सीजोन प्रोजेक्ट का भी अवलोकन किया। लगभग सात एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे इस हरित परिसर को उन्होंने रायगढ़ के पर्यावरणीय भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिकारियों को नागरिकों की सुविधा के लिए ऑक्सीजोन में दो प्रवेश द्वार विकसित करने के निर्देश दिए। चौधरी ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में ऐसे हरित क्षेत्रों का विकास समय की आवश्यकता है। यह परियोजना शहरवासियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को समान प्राथमिकता दी जा रही है। यही कारण है कि शहर में आधुनिक आधारभूत संरचना के साथ-साथ हरित परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अवसर पर नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ पहुंचा मानसून, दंतेवाड़ा से हुई दस्तक; 48 घंटे में झमाझम बारिश के आसार

रायपुर. प्रदेशवासियों के लिए राहत की खबर है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार छत्तीसगढ़ में मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने सोमवार को दंतेवाड़ा जिले से दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रदेश में प्रवेश की पुष्टि की है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। मानसून की दस्तक के साथ ही प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून 22 जून 2026 को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में पहुंच गया है। मानसून की उत्तरी सीमा 19° उत्तरी अक्षांश और 60° पूर्वी देशांतर, 19° उत्तरी अक्षांश और 65° पूर्वी देशांतर, 18.8° उत्तरी अक्षांश और 70° पूर्वी देशांतर, अलीबाग, पुणे, निजामाबाद, दंतेवाड़ा, बलांगीर, सुंदरगढ़, चतरा, गया, मुजफ्फरपुर और 28.3° उत्तरी अक्षांश तथा 83° पूर्वी देशांतर से होकर गुजर रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही प्रदेश के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। आने वाले दो दिनों में बारिश का दायरा और अधिक बढ़ सकता है। मानसून के आगमन से किसानों में भी खुशी का माहौल है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगी हैं। वहीं, आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी इसी बीच मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। दोपहर 12:26 PM से 12:27 PM के बीच जारी नाउकास्ट अलर्ट की वैधता 3:26 PM से 3:27 PM तक रहेगी। इस दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम अस्थिर रहने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार धमतरी, बालोद, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, दुर्ग, बेमेतरा, मुंगेली, सरगुजा और सूरजपुर सहित कई जिलों में मेघगर्जन, बिजली चमकने, हल्की बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। इन क्षेत्रों में हवा की गति 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर आंधी और तेज हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक जाने की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में येलो अलर्ट इसके अलावा सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिलों में मेघगर्जन, आकाशीय बिजली, अचानक तेज हवा (30–40 किमी प्रति घंटा) और वर्षा की संभावना जताई गई है।

मुख्य सचिव ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

मुख्य सचिव ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की विभागीय सचिवों की ली उच्च स्तरीय बैठक रायपुर मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में राज्य शासन के समस्त विभागों के भार सादक सचिवों की बैठक ली। बैठक में विभागों के महत्वपूर्ण कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की। मुख्य सचिव सभी ऑनलाइन सेवाओं को सेवा सेतु में लाने के लिए कार्यवाही करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। मुख्य सचिव ने आगामी 13 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक आयोजित छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र के लिए विभागों के अंतर्गत सभी जरूरी तैयारियों के साथ विभागीय अधिकारियों को विधानसभा में उपस्थित रहने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यों को वरीयता देने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने योजनाओं के क्रियान्वयन एवं प्रगति की लगातार मानिटरिंग करने के निर्देश दिए है। बैठक में ई-ऑफिस, लोक सेवा गारंटी, नियद नेल्लानार डेसबोर्ड, सुघ्घर छत्तीसगढ़, पीएम प्रगति पोर्टल, ई-प्रगति सीजी स्टेट पोर्टल, डी रेगुलेशन ई-गजट, सेवा सेतु, मनरेगा, पीएम सूर्य घर बिजली सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को विभागों के अंतर्गत रिक्त पदों की सूची अद्यतन करने एवं कर्मचारी चयन मंडल के कार्यों की प्रगति की विस्तार से जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से ली।  बैठक में गृह एवं जेल विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सुषमा सावंत, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमख सचिव श्रीमती शहला निगार, मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, मुख्यमंत्री एवं सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग की सचिव श्रीमती नेहा चम्पावत, सामान्य प्रशासन एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी एवं आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, सामान्य प्रशासन, जनशिकायत निवारण एवं उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उभोक्ता संरक्षण एवं वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की सचिव सुरीना बाबा साहेब कंगाले, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुआर.शंगीता, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग के सचिव बसवराजु एस., जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुल हक, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) सचिव भुवनेश यादव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित राज्य शासन के अन्य विभागों के सचिव मौजूद थे।

तकनीकी दिक्कत बनी छात्रों की परेशानी, स्कैनिंग समस्या के कारण किताबों का वितरण प्रभावित

दुर्ग. ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूलों को खुले करीब एक सप्ताह हो गया है। मगर सभी बच्चों को पाठ्य पुस्तक नहीं मिल पाई है। किताबों की स्कैनिंग में हो रही तकनीकी परेशानी के चलते समय पर बच्चों को पाठ्य पुस्तक वितरित नहीं किया जा सका है। शिक्षक रोजाना स्कैनिंग के समस्या से जूझते नजर आ रहे हैं, क्योंकि स्कैनिंग के बिना बच्चों को पुस्तक देने की मनाही है। शुरुआती दौर में पुस्तक वितरण को लेकर भी तरह-तरह की समस्याएं आई थी। नई प्रक्रिया के तहत सप्लाई किए जाने पाठ्य पुस्तक से भरी वाहनों के लोकेशन ट्रेस करने की सुविधा दी गई। स्कूलों में किताबें पहुंचने के बाद स्कैनिंग में तरह तरह की समस्या आई । कुल संकुल के शिक्षकों ने चालान का डिटेल अपलोड नहीं होना बताया । वही कुछ ने लॉगिन नहीं होने, लिंक में आईडी पासवर्ड इंट्री करने पर बार बार रिवर्स होना, प्रोसेस आगे नहीं बढ़ना बताया। कुछ स्कूलों में लॉगिन का होना बताया गया मगर बच्चों की संख्या जीरो दर्शाये जाने की जानकारी मिली है। यह भी तथ्य सामने आया है कि जीरो कोड से शुरू होने पर स्कैनिंग में दिक्कत आने लगी है। कमोबेश यही समस्या यूडाइस नंबर से भी होने की खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस बार 16 जून से ही बच्चों को निःशुल्क किताब देने की व्यवस्था बनाई थी । किताबों की स्कैनिंग में आ रही तकनीकी समस्या ने समय पर बच्चों को पाठ्य पुस्तक देने की योजना पर पानी फेर गया। इस वजह से स्कूलों में किताब होने के बावजूद भी बच्चों को बांटा नहीं जा सका है। स्कैनिंग की समस्या को लेकर शिक्षकों ने अधीनस्थ अधिकारियों को अवगत कराया है।

CM विष्णुदेव साय के निर्देश पर अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, माफियाओं पर लगाम

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश लगातार कार्रवाई से अवैध खनन गतिविधियों पर लग रहा है प्रभावी अंकुश बलौदाबाजार में 6 क्रशर सीलबंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अवैध रेत उत्खनन में प्रयुक्त चैन माउंटेन जब्त ड्रोन सर्वे के माध्यम से की गई जांच, खनिज विभाग की केंद्रीय उड़नदस्ता टीम ने की बड़ी कार्रवाई रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हो रही है। शासन की मंशा खनिज संसाधनों के संरक्षण, उनके नियमानुसार उपयोग तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश सुनिश्चित करने की है।                 इसी कड़ी में खनिज साधन के विभाग के सचिव और संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर 21 एवं 22 जून 2026 को विभिन्न जिलों में औचक निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की। इस दौरान जिला बलौदाबाजार के ग्राम खपरीडीह में गौण खनिज निम्न श्रेणी चूनापत्थर से संबंधित स्वीकृत अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्ति स्थलों एवं खदानों का निरीक्षण किया गया। जांच में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं पाए जाने पर 06 क्रशर इकाइयों को सीलबंद किया गया तथा संबंधित संचालकों को जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किए गए।                 इसी प्रकार जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के ग्राम दहिदा में महानदी क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एक चैन माउंटेन मशीन द्वारा अवैध रूप से रेत उत्खनन किया जाना पाया गया। खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत उक्त मशीन को जब्त कर आगामी आदेश तक सीलबंद किया गया। मशीन को मशीन ऑपरेटर की सुपुर्दगी में दिया गया है तथा मशीन स्वामी को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उक्त सभी स्थलों की जांच एवं सत्यापन ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक के माध्यम से भी किया गया, जिससे खनन गतिविधियों का सटीक आकलन सुनिश्चित किया जा सके।            मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। खनिज सचिव पी. दयानंद ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्वेक्षण एवं सतत निगरानी के माध्यम से अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस कार्रवाई में केंद्रीय उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं संबंधित जिलों की जिला स्तरीय टीम के अधिकारी उपस्थित रहे।

बड़ा प्रशासनिक बदलाव: IAS श्रद्धा शुक्ला का ट्रांसफर, MP कैडर में हुईं शामिल

रायपुर. रायपुर की बेटी 2022 बैच की आईएएस अधिकारी श्रद्धा शुक्ला का कैडर बदलकर मध्यप्रदेश कर दिया गया है। इससे पहले वह तेलंगाना कैडर में पदस्थ थीं। विवाह के बाद केंद्र सरकार की कॉमन कैडर नीति के तहत उन्होंने अपने पति के साथ मध्यप्रदेश में सेवाएं देने का विकल्प चुना। IAS श्रद्धा शुक्ला कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला की पुत्री हैं। कुछ माह पहले उनका विवाह मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी ऐश्वर्या वर्मा से हुआ था। विवाह के बाद दंपती को एक ही राज्य में सेवाएं देने का अवसर मिले, इसके लिए लागू कॉमन कैडर व्यवस्था के तहत श्रद्धा शुक्ला ने मध्यप्रदेश कैडर का विकल्प चुना। इसके बाद उनका कैडर तेलंगाना से बदलकर मध्यप्रदेश आवंटित कर दिया गया। श्रद्धा शुक्ला के मध्यप्रदेश कैडर में स्थानांतरण को लेकर रायपुर और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है। इसे अखिल भारतीय सेवाओं में लागू उस व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पति-पत्नी दोनों अधिकारियों को यथासंभव एक ही राज्य में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाता है।