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देशभर में नक्सलियों के बुरे दिन, नक्सलियों का कबूलनामा कुल 357 साथी मारे गए

रायपुर  नक्सली संगठनों ने अपने कबूलनामे में माना है कि सुरक्षाबलों के हाथों पिछले एक साल में उनके 357 माओवादी मारे जा चुके हैं. कबूलनामे के मुताबिक सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार हुए नक्सलियों में महिला नक्सली भी शामिल हैं, जिनकी संख्या 136 बताई गई है. नक्सलियों के खिलाफ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त मुहिम से नक्सल संगठनों की हालत खराब है. लगातार नक्सली निशाने पर आ रहे नकस्ली या तो सरेंडर करने को मजबूर हैं या गिरफ्तार हो रहे हैं वरना सुरक्षाबलों के गोलियों के शिकार होकर मारे जा रहे हैं. जहां, 281 नक्सली मारे गए  रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. जबकि, कुछ महीने पहले भी नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता ने लेटर जारी किया था। जिसमें डेढ़ साल में 400 से ज्यादा नक्सलियों के मारे जाने का जिक्र था। इधर, पुलिस के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में सिर्फ बस्तर में ही करीब 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ है। वहीं इस बीच बीजापुर में नक्सलियों ने 2 शिक्षा दूतों की हत्या कर दी है। 15 जुलाई की सुबह पीलूर गांव में के जंगल में लाश बरामद हुई है। एक की पहचान विनोद मडे के तौर पर हुई है। वो शिक्षा दूत था। इन पर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाया गया है। फिलहाल घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इससे पहले, बीजापुर में नक्सलियों ने 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की थी। जिसमें 4 ग्रामीण और 2 छात्र शामिल हैं। 136 महिला नक्सली भी शामिल दरअसल, नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी के नाम से जारी इस बुकलेट में लिखा है कि सालभर में नक्सलियों के पोलित ब्यूरो मेंबर और नक्सल संगठन के महासचिव बसवा राजू समेत सेंट्रल कमेटी के 4 सदस्य, स्टेट कमेटी के 16 सदस्य मारे गए हैं। इन 357 में 136 महिला नक्सली भी मारी गई हैं। सबसे ज्यादा दंडकारण्य में 281 नक्सली ढेर हुए हैं। इन राज्यों में इतने नक्सली मारे गए नक्सलियों के इन आंकड़ों के मुताबिक, 14 बिहार-झारखंड, 23 तेलंगाना, 281 दंडकारण्य, 9 आंध्र-ओडिशा विशेष क्षेत्र/आंध्र प्रदेश, 8 महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी), 20 ओडिशा, 1 पश्चिमी घाट और 1 पंजाब से हैं। उनके 4 साथी खराब स्वास्थ्य और अनुचित उपचार के कारण, 1 दुर्घटना में, 80 फर्जी मुठभेड़ों में और 269 घेराबंदी हमलों में मारे गए। इन कैडर्स के नक्सली ढेर मारे गए नक्सलियों में बसवा राजू समेत राज्य समिति स्तर के 16, जिला समिति के 23, एसी/पीपीसी के 83, पार्टी के 138 सदस्य, PLGA के 17 सदस्य, जन संगठनों के 6 सदस्य और 34 लोग शामिल हैं। 36 लोगों का विवरण उपलब्ध नहीं है। नक्सलियों का कहना है कि अधिकांश कगार युद्ध में मारे गए हैं। घेराबंदी के दौरान कुछ साथी पकड़े गए। जिनकी हत्या की गई। सिर्फ बस्तर में ही मारे गए 420 से ज्यादा नक्सली बस्तर में 1 जनवरी 2024 से जून 2025 तक हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 420 से ज्यादा नक्सलियों का एनकाउंटर किया गया है। पुलिस के मुताबिक इनमें 2024 में 217 नक्सली और पिछले 6 महीने में 200 से ज्यादा नक्सली मारे गए हैं। वहीं नक्सलियों के अलग-अलग लेटर में जारी आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि नक्सल संगठन भी मारे गए नक्सलियों के स्पष्ट आंकड़े जारी नहीं कर रहा है। पिछले डेढ़ साल में नक्सलियों को बड़ी क्षति पहुंची है। शहीदी सप्ताह मनाएंगे नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में नक्सली 28 जुलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे। इस दौरान मारे गए साथियों को श्रद्धांजलि देंगे। गांव-गांव में सभा करेंगे। वहीं इस दौरान नक्सली किसी बड़े हमले की भी प्लानिंग करते हैं। नक्सलियों के बुकलेट में लिखा है कि देश में क्रांतिकारी आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के 'कगार' युद्ध को विफल किया जाएगा। जनसमुदाय को वर्ग संघर्ष और गुरिल्ला युद्ध में लामबंद करने की बात लिखी है। 24 पेजों वाला बुकलेट जारी  नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी ने जारी एक प्रेस नोट में यह कबूल किया है. करीब 24 पेज वाले गोंडी बोली व इंग्लिश भाषा में नक्सलियों ने कबूलनामे का बुकलेट भी जारी किया हैं. कबूलनामे के मुताबिक नक्सली संगठन मारे गए साथियों की याद में 28 जूलाई से 3 अगस्त तक शहीदी सप्ताह मनाएंगे. पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के हाथों मारे गए नक्सलियों में 4 सीसी मेम्बर 15 राज्य कमेटी के नक्सली शामिल बताए जाते हैं. कबूलनामे के मुताबिक एंटी नक्सल ऑपरेशन से नक्सल संगठन को सबसे बड़ा नुकसान दण्डकारण्य में हुआ है, जहां, 281 नक्सली मारे गए हैं. मार्च, 2026 तय है नक्सल उन्मूलन! केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे देश से नक्सलियों को उखाड़ फेंकने के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दे रखी है. शाह ने नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए मार्च, 2026 की तारीख भी तय कर दी है. सुरक्षाबलों की कार्रवाई से हलकान होकर लगातार नक्सली सरेंडर कर रहे हैं,  जिससे संगठन लगातार कमजोर हुआ है.  

जगदलपुर में शिक्षा सुधार की पहल, शिक्षकों को विनोबा ऐप अपनाने की सलाह

जगदलपुर : शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हेतु शिक्षक उपयोग करें विनोबा एप्प-सीईओ जैन शिक्षकों को विनोबा ऐप के उपयोग का सुझाव, शिक्षा गुणवत्ता में आएगा सुधार : सीईओ जैन जगदलपुर में शिक्षा सुधार की पहल, शिक्षकों को विनोबा ऐप अपनाने की सलाह शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश जगदलपुर जिले में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के दृष्टिकोण से सोमवार को जिले के शैक्षणिक गतिविधियों की समीक्षा बैठक कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन द्वारा ली गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जैन ने कहा कि सभी शिक्षक विनोबा एप्प के माध्यम से शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी नियमित तौर पर प्रदान करें। जिला स्तर से सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग की जाएगी और बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही अवंती फाउंडेशन के माध्यम से जिले के प्रतिभावान बच्चों को जेईई की तैयारी के लिए प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसके लिए मेघावी बच्चों के चयन की प्रक्रिया शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। उन्होने कहा कि जिले के प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रावीण्य सूची में स्थान दिलाने हेतु लक्ष्य के पूर्ति हेतु शिक्षकों को आवश्यक प्रयास करने के संबंध में निर्देशित किया गया है। इसे मद्देनजर रखते हुए बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने सहित उत्कृष्ट नतीजे हासिल करने के लिए समन्वित प्रयास सुनिश्चित करें।      बैठक के दौरान मासिक टेस्ट एवं परीक्षा, यु-डाईस प्रोग्रेशन, शाला त्यागी के प्रवेश, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब क्रियान्वयन एवं निर्माण कार्यों की विस्तृत संमीक्षा की गई। बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा अखिलेश मिश्रा, एपीसी राकेश खापर्डे एवं जयनारायण पाणीग्राही, विनोबा ऐप की जिला समन्वयक नीलिमा, अवंती फाउंडेशन के प्रतिनिधि सहित जिले में पदस्थ खंड शिक्षा अधिकारी, खंड स्त्रोत समन्वयक एंव प्राचार्य उपस्थित थे। शिक्षा में बदलाव और सीखने के प्रयासों में सुधार लाने हेतु व्यापक डिजिटल मंच है विनोबा एप्प            विनोबा ऐप ओपन लिंक फाउंडेशन द्वारा विकसित की गई है ऐप का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को शैक्षिक सहायता प्रदान करना है। जो शिक्षण सामग्री की उपलब्धता के साथ ही यह शिक्षकों को दैनिक एवं साप्ताहिक योजनाएँ, गतिविधियां, वर्कशीट और वीडियो सहित विभिन्न प्रकार की शिक्षण सामग्री प्रदान करती है। इससे शिक्षक अपनी कक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं और बच्चों को रुचिकर तरीके से पढ़ा सकते हैं।        विनोबा ऐप शिक्षकों को अपने काम को सुविधाजनक बनाने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद करता है। दूरस्थ अंचलों के स्कूलों में जहां शिक्षकों की कमी होती है, वहां ऑडियो-वीडियो माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया में सहायता मिलती है। शिक्षक अपनी कक्षागत गतिविधियों, स्कूल में होने वाले कार्यक्रमों, फोटो और वीडियो को ऐप पर साझा कर सकते हैं। यह शिक्षकों को एक-दूसरे के काम से सीखने, सर्वोत्तम उदाहरण को अपनाने और एक जीवंत शिक्षक समुदाय बनाने में मदद करता है। ऐप के माध्यम से स्कूलों की गतिविधियों और शिक्षकों के प्रदर्शन की निगरानी की जा सकती है। संकुल, ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारी स्कूलों की गतिविधियों को देख सकते हैं और आवश्यक निर्देश या मार्गदर्शन दे सकते हैं। यह दैनिक और मासिक छात्र उपस्थिति की निगरानी में भी योगदान देता है, जिससे शीर्ष प्रदर्शन करने वाले स्कूलों की पहचान की जा सकती है। यह डेटा विश्लेषण के आधार पर त्वरित उपाय और मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद करता है। शिक्षा अधिकारी स्कूल दौरों, स्कूल गतिविधियों और कक्षाओं पर अपने अनुभव और टिप्पणियों को आसानी से रिकॉर्ड और साझा कर सकते हैं। यह ऐप विभिन्न डेटा संग्रह चैनलों जैसे फॉर्म, एक्सेल शीट, ओएमआर शीट आदि के माध्यम से शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों से जानकारी एकत्र करने में मदद करता है। साथ ही अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और स्कूलों की पहचान की जाती है। ऐसे शिक्षकों को ब्लॉक या जिला स्तर पर सम्मानित किया जाता है, जिससे अन्य शिक्षकों को प्रेरणा मिलती है। यह ऐप समग्र शिक्षा अकादमिक कार्यक्रमों जैसे मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान, जीवन कौशल कार्यक्रम जैसे कविता पाठ, कहानी सुनाना, विज्ञान क्लब, पर्यावरण क्लब, किचन गार्डन, स्पोकन इंग्लिश इत्यादि को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता प्रदान करता है। विनोबा ऐप ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा में बदलाव लाने और सीखने के परिणामों में सुधार लाने के लिए एक व्यापक डिजिटल मंच है, जो शिक्षकों को सशक्त बनाता है और संचार को सुव्यवस्थित करता है।    

बीजापुर में शिक्षा दूत की हत्या, शिक्षा दूतों का नक्सलियों पर पुलिस मुखबिर होने के शक में हत्या का

बीजापुर  नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहे दो शिक्षादूतों की बीती रात नक्सलियों ने अपहरण के बाद निर्मम हत्या कर दी. मृतक शिक्षादूतों की पहचान पिल्लूर निवासी विनोद मड्डे (32 वर्ष) जो कोंडापड़गु प्राथमिक शाला में पदस्थ थे. दूसरे शिक्षा दूत की पहचान सुरेश मेटा (28 वर्ष) के रूप में हुई है जो प्राथमिक शाला, टेकमेटा में पदस्थ थे. दोनों के शव गांव के पास जंगल में फेंके गए मिले हैं. जबरन घर से उठाकर नक्सलियों ने की हत्या: ग्रामीणों के अनुसार, बीती रात अज्ञात नक्सलियों ने दोनों को जबरन घर से उठाया, उनसे पूछताछ के बाद कुछ ही घंटों बाद उनकी हत्या कर दी. यह घटना फारसेगढ़ थाना क्षेत्र की है, परंतु इलाके में फैले डर के कारण ग्रामीण अब तक पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं करवा सके हैं.  इससे पहले, बीजापुर में नक्सलियों ने 15 दिनों में मुखबिरी के शक में 6 लोगों की हत्या की थी। जिसमें 4 ग्रामीण और 2 छात्र शामिल हैं। नक्सलियों ने पिछले 25 साल में 1821 लोगों का मर्डर किया है। 17 जून को 3 लोगों की हुई थी हत्या इससे पहले, 17 जून 2025 को नक्सलियों ने बीजापुर जिले के एक गांव में 3 ग्रामीणों की रस्सी से गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इनमें एक 13 साल का 7वीं और दूसरा 20 साल का कॉलेज का छात्र और तीसरा ग्रामीण युवक शामिल है। पूरा मामला पेद्दाकोरमा गांव का है। गांववालों का कहना था कि, 17 जून की शाम करीब 70 से 80 की संख्या में हथियार बंद नक्सली पहुंचे थे। उन्होंने छात्र सोमा मोड़ियाम (20), अनिल माड़वी (13) समेत एक अन्य ग्रामीण को घर से उठा लिया था।सोमा इसी साल 12वीं पास कर कॉलेज में दाखिल हुआ था, जबकि अनिल 7वीं का छात्र था। नक्सली गांव के 10 से ज्यादा लड़कों को बंधक बनाकर अपने साथ लेकर गए। हालांकि, उनकी बेदम पिटाई करने के बाद उन्हें छोड़ दिया। पुलिस के एक्शन से बौखलाए नक्सली अब स्कूल और कॉलेज के बच्चों का कत्ल कर रहे हैं। सरेंडर नक्सली के रिश्तेदारों की हत्या दरअसल, मारे गए सभी ग्रामीण DVCM कैडर के सरेंडर नक्सली दिनेश मोड़ियम के रिश्तेदार थे। नक्सलियों ने आरोप लगाया कि इन्हीं लोगों ने उसे सरेंडर करने के लिए उकसाया, उससे पैसे लिए। इसी वजह से इनकी हत्या कर मौत की सजा दे दी। 22 जून को भी 2 लोगों को मार डाला इसके बाद बीजापुर जिले में 22 जून को नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक पर समैय्या और वेको देवा की हत्या की थी। समैय्या पहले नक्सली था। उसने 2025 में आत्मसमर्पण किया है। वहीं वेको देवा ग्रामीण है। दोनों नक्सल प्रभावित गांव सेंड्राबोर और एमपुर के रहने वाले थे। मामला पामेड़ थाना क्षेत्र का है। कौन है शिक्षा दूत: विनोद मड्डे और सुरेश मेटा, दोनों ही शिक्षादूत योजना के तहत नक्सल प्रभावित बंद स्कूलों को फिर से शुरू करने की मुहिम में लगे थे. गृहमंत्री विजय शर्मा कुछ समय पहले जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव में पहुंचे थे, उस दौरान इन शिक्षादूतों की सराहना भी की थी, जो विषम हालात में भी बच्चों को शिक्षा देने के कार्य में जुटे थे. इन शिक्षकों को राज्य सरकार की ओर से 10,000 से 12,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है. जिले में इस समय लगभग 350 शिक्षादूत कार्यरत हैं, जो दुर्गम इलाकों में जाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं. परिवार में रो रोकर बुरा हाल: शिक्षादूत विनोद मड्डे के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, जबकि सुरेश मेटा अब तक अविवाहित थे. उनके परिवारजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पिल्लूर और टेकमेटा गांव में मातम छाया हुआ है. गांववाले इस क्रूर घटना से सदमे में हैं और लगातार सुरक्षा की मांग कर रहे हैं. मुखबिरी के शक में अबतक हुई हत्याएं     2 जुलाई 2025: बीजापुर के उसूर में युवक की हत्या, मुखबिरी का आरोप     20 फरवरी 2025: दंतेवाड़ा में पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर दो लोगों की नक्सलियों ने की हत्या     4 फरवरी 2025: दंतेवाड़ा के ककाड़ी के रहने वाले हड़मा हेमला की हत्या, पुलिस मुखबिरी का आरोप     21 दिसंबर 2024: बीजापुर में नक्सलियों ने कथित जनअदालत लगाकर एक ही परिवार के 2 लोगों की हत्या की     11 दिसंबर 2024: बीजापुर के फरसेगढ़ में युवक पर मुखबिरी का आरोप लगाकर हत्या     6 दिसंबर 2024: बासागुड़ा थाना इलाके के तिम्मापुर गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हत्या     8 दिसंबर 2024: मद्देड़ इलाके के लोदेड़ गांव में 40 साल की महिला की हत्या     12 नवंबर 2024: बीजापुर में ग्रामीण माड़वी दुलारू की हत्या, पुलिस मुखबिर का आरोप     29 अक्टूबर 2024: बीजापुर में 35 साल के ग्रामीण दिनेश पुजार की हत्या     23 अक्टूबर 2024: सुकमा में ग्रामीण को अगवा कर उसकी हत्या की थी.     19 अक्टूबर 2024: सुकमा में पुलिस मुखबिरी के शक में युवक की हत्या     25 सितंबर 2024: सुकमा के भंडारपदर गांव में 50 साल के ग्रामीण पीट पीटकर हत्या     12 सितंबर 2024: बीजापुर के जप्पेमरका में 2 ग्रामीणों का अपहरण कर फांसी पर लटकाया     28 अगस्त 2024:बीजापुर के मिरतुर में 27 साल के युवक की तिमनार गांव में हत्या     28 अगस्त 2024: भैरमगढ़ में नक्सलियों ने की युवक की हत्या     23 अगस्त 2024: गंगालूर थाना इलाके के पूसनार गांव के जमींदार की हत्या     11 अगस्त 2024: कोंटा में उप सरपंच की हत्या     11 जुलाई 2024: सुकमा में नक्सलियों ने की युवक की हत्या 25 साल में 1821 लोगों की हत्या बता दें कि, नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक यानी पिछले 25 सालों में बस्तर के अलग-अलग जिलों में कुल 1821 लोगों की हत्या की है। इनमें आम नागरिक समेत जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा हत्या बीजापुर जिले में ही हुई है।  

मुख्यमंत्री श्री साय से भारत सरकार में भूमि संसाधन सचिव ने की सौजन्य भेंट

मुख्यमंत्री श्री साय से भारत सरकार में भूमि संसाधन सचिव ने की सौजन्य भेंट भू-अभिलेख सुधार, डिजिटल सर्वे और राजस्व न्यायालयों में मामलों के त्वरित निराकरण को लेकर हुई विस्तृत चर्चा रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर स्थित कार्यालय में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर भू-अभिलेख प्रणाली को सुदृढ़ करने, भूमि सर्वेक्षण में तकनीकी नवाचारों के उपयोग, तथा राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राजस्व मंत्री श्री टंकाराम वर्मा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार भू-राजस्व दस्तावेजों को अद्यतन करने और आवश्यक सुधार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड जितने व्यवस्थित होंगे, राजस्व न्यायालयों में मामलों का निपटारा उतना ही शीघ्र और प्रभावी रूप से हो सकेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों में सुधार संबंधी केंद्र सरकार की सभी पहल के साथ राज्य सरकार कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेगी, ताकि यह प्रणाली और अधिक प्रभावशाली व जनहितकारी बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा तकनीक आधारित नवाचारी पहलों के माध्यम से भू-राजस्व रिकॉर्ड में पारदर्शिता, गति और सटीकता लाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस दिशा में सभी आवश्यक कदम तत्परता से सुनिश्चित करें। केंद्रीय भूमि संसाधन सचिव श्री मनोज जोशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है और राज्य सरकार के सक्रिय सहयोग से इसमें और अधिक सुधार लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पूर्व में पारंपरिक पद्धति से किए जाने वाले भूमि सर्वेक्षण में समय अधिक लगता था, किंतु अब आधुनिक तकनीकों के उपयोग से यह प्रक्रिया तेज़, अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई है। श्री जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार भू-अभिलेख संधारण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है, जिसके अंतर्गत राज्यों को वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान नक्शों के अद्यतन में कई बार तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिन्हें डिजिटल सर्वेक्षण के माध्यम से प्रभावी रूप से दूर किया जा सकेगा। इससे प्रत्येक नागरिक को अद्यतन और प्रमाणिक नक्शा प्राप्त होगा, जिससे गड़बड़ियों में कमी आएगी और शहरी क्षेत्रों के विस्तार को बेहतर ढंग से नियोजित किया जा सकेगा। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री कुणाल सत्यार्थी, राजस्व सचिव श्री अविनाश चंपावत, संचालक भू-अभिलेख श्री विनीत नंदनवार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी

मोहला : छत्तीसगढ़ में खाद की कोई कमी नहीं डीएपी की कमी को पूरा करने एनपीके, एसएसपी और नैनो डीएपी का भरपूर स्टॉक राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारी           मोहला राज्य में रासायनिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।         राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है।         चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है।         कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमश: 25 हजार 266 मेट्रिक टन एवं 71 हजार 363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी।            यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी।         कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।         मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।

CG में रहने वाले अवैध बांग्लादेशियों को भेजा जा रहा बांग्लादेश, पुलिस प्लेन से बॉर्डर तक ले जाएगी

 रायपुर  छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को देश से बाहर निकालने की कार्रवाई तेज हो गई है। रायपुर पुलिस आज 30 बांग्लादेशी नागरिकों को देश की सीमा तक लेकर जाएगी। रायपुर एयर से गुवाहाटी एयरपोर्ट में छोड़ा जाएगा ।वहां उन्हें बीएसएफ के सुपुर्द किया जाएगा, जो आगे की प्रक्रिया पूरी कर बांग्लादेश भेजेगी। इन बांग्लादेशी नागरिकों को प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर और रायगढ़ जिलों से पकड़ा गया था। सभी लोग अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कर यहां वर्षों से रह रहे थे। इनकी धरपकड़ के बाद अब इन्हें डिपोर्ट किया जा रहा है। इस विशेष अभियान का नेतृत्व रायपुर के सीएसपी राजेश देवांगन कर रहे हैं। उनकी अगुवाई में गठित पुलिस टीम इन बांग्लादेशियों को लेकर आज सीमा क्षेत्र के लिए रवाना होगी। सूत्रों के मुताबिक, पकड़े गए लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगातार इस तरह के मामलों पर निगरानी रख रही हैं और आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं।  जानकारी के मुताबिक, घुसपैठियों को रायपुर पुलिस BSF के सौंपेगी, फिर असम से बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF के जरिए डिपोर्ट प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह सारी प्रकिया आज ही पूरी होगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि, घुसपैठियों के संदर्भ में एक एसटीएफ (विशेष कार्य बल) का गठन किया गया है। एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। जहां भी घुसपैठी मिलेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। रायपुर-दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ से पकड़े गए लोगों किया गया डिपोर्ट इस डिपोर्ट प्रक्रिया में रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और रायगढ़ जिलों से पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिकों को गुवाहाटी ले जाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि, यह छत्तीसगढ़ राज्य की पहली औपचारिक डिपोर्ट कार्रवाई है, जो केंद्र सरकार की मंजूरी से की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे राज्य में हुई छापेमारी और पहचान के बाद 30 लोगों को अभी तक पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक होने के तौर पर चिन्हित किया है. जिन्हें बांग्लादेश भेजने की कार्रवाई शुरू की जा रही है. जानकारी के अनुसार इन सभी लोगों को रायपुर पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले करेगी. उसके बाद बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स उन्हें बांग्लादेश को सौंप देंगे. रायपुर में पुलिस सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार जो भी बांग्लादेशी अभी तक डीटेन किए गए हैं. उन सभी लोगों को भेजने की प्रक्रिया चल रही है. जानकारी के अनुसार उन्हें आज बांग्लादेश के लिए भेजा जाएगा. सभी लोगों को हवाई जहाज के माध्यम से बॉर्डर तक ले जाया जाएगा. उसके बाद उन्हें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के हवाले कर दिया जाएगा.  भारत से बात करते हुए रायपुर पश्चिम के ASP दौलत राम पोर्ते ने बताया कि जो भी बांग्लादेशी पकड़े गए हैं, उनको बांग्लादेश भेजना है. जो भी सरकार के नियम निर्देश हैं, उसके तहत यह कार्रवाई की जा रही है. जो भी बांग्लादेशी अब तक पकड़े गए हैं, उन सभी लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत भेजा जा रहा है. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन सभी लोगों को किस समय बांग्लादेश के लिए रायपुर से भेजा जाएगा.  क्यों उठाया गया ये कदम ? राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान पिछले कुछ सालों में इंटेलिजेंस इनपुट और स्थानीय शिकायतों के आधार पर की गई थी। रायपुर समेत कई जिलों में ऐसे नागरिकों को पकड़ा गया था जो बिना वैध दस्तावेजों के भारत में रह रहे थे। भारत-बांग्लादेश की बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ तैनात है। बॉर्डर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है, इसलिए केंद्र सरकार ने उन्हें ही जिम्मेदारी दी है। साथ ही बांग्लादेश दूतावास से भी चर्चा चल रही है। उन्हें इस संबंध में जानकारी भी भेजी गई है। जिन पर केस, उनको बाद में भेजा जाएगा बताया जा रहा है कि जिनके खिलाफ केस दर्ज है। उन्हें मामले की सुनवाई पूरी होने तक यहीं रहना होगा। कोर्ट के फैसले के बाद ही उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा। रायपुर में 6 बांग्लादेशियों के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें तीन भाई, एक दंपती और उसकी नाबालिग बेटी शामिल हैं। दुर्ग में भी 7 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज है। राजनांदगांव में चोरी के मामले में बांग्लादेशी बंद है, जबकि रायपुर में 10 बांग्लादेशियों पर केस दर्ज नहीं किया है। उन्हें प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए जेल में रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेख आधुनिकीकरण एवं नक्शा परियोजना की समीक्षा हेतु तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) तथा नक्शा परियोजना के कार्यों की प्रगति की समीक्षा के लिए भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भूमि संसाधन विभाग (DOLR) के वरिष्ठ अधिकारियों का तीन दिवसीय दौरा कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इस क्रम में भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी एवं संयुक्त सचिव श्री कुणाल सत्यार्थी ने आज न्यू सर्किट हाऊस नवा रायपुर में डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) तथा ‘नक्शा परियोजना’ की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में राजस्व विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत,महानिरीक्षक पंजीयन श्री पुष्पेंद्र मीणा,भू संचालक श्री विनीत नन्दनवार, भूमि संसाधन विभाग के डॉ. एम.के.स्टॅलिन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।      बैठक के दौरान केंद्रीय सचिव भूमि संसाधन श्री मनोज जोशी  विभागीय अधिकारियों के साथ भू-अभिलेख के संधारण, सर्वे आदि की प्रगति की विस्तृत समीक्षा एवं परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व न्यायालय के लंबित प्रकरणों को शीघ्र निराकरण करने के लिए अनावश्यक तिथि बढ़ाये जाने की परंपरा को रोका जाए। जिओरिफ्रेंसिंग के कार्य को पूर्ण कर किसानों के हित मे उपयोग करें। इसके लिए ध्यान रखें कि भूमि के क्षेत्र और सीमा में वेरिएशन कम से कम हो। जमीन से संबंधित प्रकरणों को निराकृत करने के लिए विशेष राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति की जा सकती है। राज्य में भूमि सर्वे या रिसर्वे के कार्याे को क्षेत्रानुसार अलग-अलग वेंडरों को दिया जाय ताकि काम समय पर पूरा हो। उन्होंने कहा कि राज्य में भूमि सर्वे या रिसर्वे के काम को प्रशासन द्वारा कुछ गांव को मॉडल के रूप में लेकर भी किया जा सकता है। इसी तरह जमीन दस्तावेजों के साथ भू-स्वामियों के बारे में यथा आधार कार्ड,मोबाइल नंबर आदि की सम्पूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखा जाए। इस जानकारी का उपयोग भू-स्वामियों के लिए जमीन के उपयोग,बैंक ऋण या खरीदी-बिक्री आदि में हो सकेगा।इस समीक्षा बैठक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य में भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण और नक्शा परियोजना की प्रगति को गति देना तथा सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।     गौरतलब है कि केंद्रीय राजस्व सचिव 14  से 16 जुलाई 2025 तक राज्य के दौरे में हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे का उद्देश्य राज्य में भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, पारदर्शिता तथा अद्यतन भू-अभिलेखों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है ताकि आमजन को समयबद्ध एवं सुगम सेवाएं प्राप्त हो सकें। छत्तीसगढ़ शासन एवं संबंधित विभागों द्वारा इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह समीक्षा बैठक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

जिले में अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा

 जिले में अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा सर्वाधिक वर्षा पिथौरा तहसील में 416.0 मिलीमीटर आज 11.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज महासमुंद  महासमुंद जिले में चालू मानसून के दौरान 01 जून 2025 से अब तक 346.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है। भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सर्वाधिक औसत वर्षा पिथौरा तहसील में 416.0 मिलीमीटर, सरायपाली में 406.4 मिलीमीटर, बसना में 345.2 मिलीमीटर, महासमुंद में 323.0 मिलीमीटर, बागबाहरा में 312.9 मिलीमीटर और सबसे कम वर्षा 274.8 मिलीमीटर कोमाखान तहसील में दर्ज की गई। आज 15 जुलाई को 11.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। जिले के तहसीलवार वर्षा में बसना तहसील में 21.6 मिलीमीटर, सरायपाली में 19.8 मिलीमीटर, पिथौरा में 16.1 मिलीमीटर, महासमुंद में 5.1 मिलीमीटर, कोमाखान में 2.5 मिलीमीटर एवं बागबाहरा तहसील में 1.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

पीएम सूर्यघर योजना बनी आमजन के लिए वरदान: स्वाति यादव का बिजली बिल हुआ शून्य

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के जीवन में बदलाव ला रही है। इसी योजना का लाभ उठाते हुए जिले के अंतर्गत आने वाले चौकी विकासखंड के ग्राम मेटेपार निवासी श्रीमती स्वाति यादव ने अपने घर की छत पर सोलन पैनल लगाकर अपने घर को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना लिया है। उन्होंने अपने मकान की छत पर 2 किलोवॉट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित करवाया है, जिससे अब उनका बिजली बिल शून्य हो गया है। पूर्व में श्रीमती यादव ने बताया कि हर माह 3000 रूपए से 3200 रूपए तक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। लेकिन अब, इस योजना की बदौलत उन्हें पूरी राशि बचत के रूप में मिल रही है, जिससे उनके परिवार को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिली है। इस योजना के तहत उन्हें 78,000 रूपए की अनुदान राशि (सब्सिडी) शासन द्वारा प्रदान की गई, जिससे सोलर पैनल लगवाना उनके लिए आसान और किफायती हो गया। श्रीमती यादव ने बताया, यह योजना न केवल हमारे घर की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरी कर रही है, बल्कि यह पर्यावरण के संरक्षण में भी मददगार साबित हो रही है। हमारे घर का बिजली बिल अब पूरी तरह शून्य है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए श्रीमती यादव ने कहा कि यह योजना जनसामान्य के लिए अत्यंत उपयोगी है और इसका लाभ हर परिवार को उठाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्तयोजना का उद्देश्य घर-घर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है और प्रदूषण मुक्त रखना है। जिससे देशवासी बिजली संकट से राहत पाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। जिले में इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर साफ़ देखे जा रहे हैं।

रायपुर : प्रदेश में अब तक 378.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 378.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 598.8 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 189.2 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा में 292.0 मि.मी., सूरजपुर में 483.6 मि.मी., जशपुर में 507.2 मि.मी., कोरिया में 416.5 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 382.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर जिले में 362.1 मि.मी., बलौदाबाजार में 365.4 मि.मी., गरियाबंद में 323.1 मि.मी., महासमुंद में 346.3 मि.मी. और धमतरी में 323.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर में 398.7 मि.मी., मुंगेली में 266.1 मि.मी., रायगढ़ मंे 526.9 सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 387.6 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 510.6 मि.मी., सक्ती में 450.1 मि.मी., कोरबा में 471.9 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 394.2 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। दुर्ग जिले में 311.3 मि.मी., कबीरधाम में 274.2 मि.मी., राजनांदगांव में 303.0 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 488.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 251.5 मि.मी., बालोद में 381.4 मि.मी. और बस्तर जिले में 442.5 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। कोंडागांव में 265.4 मि.मी., कांकेर में 367.0 मि.मी., नारायणपुर में 315.7 मि.मी., दंतेवाड़ा में 400.1 मि.मी., सुकमा में 233.7 मि.मी. और बीजापुर में 452.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।