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प्रधानमंत्री आवास योजना को मिलेगा गति, ग्रामीण युवाओं को निःशुल्क निर्माण प्रशिक्षण

रायपुर, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण रूप से क्रियान्वित करने के लिए बलरामपुर जिला प्रशासन ने अभिनव पहल की है। कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज के मार्गदर्शन में जिले के ग्रामीण युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार एवं निर्माण कार्यों में दक्ष बनाने की योजना लागू की गई है। ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से जिले के वाड्रफनगर, रामचंद्रपुर, बलरामपुर, राजपुर एवं शंकरगढ़ जनपद पंचायतों में कुल 5 प्रशिक्षण बैच (प्रत्येक में 35 प्रशिक्षार्थी) प्रारंभ किए गए हैं। इस तरह 175 युवाओं को 30 दिवसीय निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण का लाभ दिलाया गया। जिसमें ले-आउट, नींव से छत तक निर्माण की तकनीकी ज्ञान, निर्माण सामग्री का अनुपात एवं गुणवत्ता निर्धारण, सुरक्षा मानक तथा फील्ड प्रैक्टिकल शामिल है। इस पहल से न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृत घरों का निर्माण तेज़ी और गुणवत्ता के साथ तेजी से पूरा पूरा कराया जा रहा है। ग्रामीण युवाओं को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण की व्यवस्था कर स्वरोजगार के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दक्ष श्रमिकों की उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं या उनके परिजन, मनरेगा में 100 दिवस कार्य कर चुके श्रमिक और इच्छुक ग्रामीण युवाओं को शामिल किया गया। जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर ने बताया कि, हमारा लक्ष्य है कि सभी प्रधानमंत्री आवास समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरे हों। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं को अपने गांव में ही रोजगार दिलाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है। जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक युवाओं से अपील की है कि वे इस प्रशिक्षण का लाभ उठाकर न केवल एक नया कौशल सीखें, बल्कि जिले के विकास में भी योगदान दें। इच्छुक उम्मीदवार अपने ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत अथवा सीधे ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान बलरामपुर से संपर्क कर सकते हैं।

CM साय के निर्देश पर तुरंत राहत: बाढ़ प्रभावितों को राशन, इलाज और दस्तावेज सेवा शुरू

तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत रायपुर, बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।       बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।       सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके। स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

रायपुर एनआईटी-एफआईई को राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार

स्टार्टअप्स को उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए मिलेगा पुरस्कार  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी शुभकामनाएँ एनआईटी-एफआईई ने छत्तीसगढ़ में अब तक 40 से अधिक स्टार्टअप्स को दिया बढ़ावा रायपुर एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एफआईई) को चौथे भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन 13 सितंबर को नई दिल्ली के संसद मार्ग स्थित एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में होगा। भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एनआईटी रायपुर-एफआईई के उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। संस्था को यह सम्मान राज्य में 35 से आधिक नये स्आर्टअप्स को मार्गदर्शन और उन्हें उत्कृष्ट तकनीकी सहयोग के लिए मिलेगा। भारत उद्यमिता शिखर सम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्यमी संघ (ईएआई) और एंटरप्राइजिंग जोन-ईजेड द्वारा किया जा रहा है, जो भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेशन केंद्र है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर संस्थान को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में लगातार स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिल रहा है। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ में तेजी से बदल रहे औद्योगिक वातावरण को प्रोत्साहित करेगा। एनआईटी रायपुर फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। स्टार्टअप्स के पोषण और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एनआईटी रायपुर-एफआईई की टेक्नोलॉजी आधारित गतिविधियां हमारे राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगी, और छत्तीसगढ़ को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। मुख्यमंत्री ने पूरी टीम को बधाई देते देते हुए उम्मीद जताई कि यह संस्था युवाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने और तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने में निरंतर सफलता हासिल करेगी। एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि राष्ट्रीय इन्क्यूबेटर पुरस्कार नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में संस्था की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि एफआईई लगातार एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने में जुटा है, जो तकनीकी स्टार्टअप्स को सहयोग देकर उन्हें सफल उद्यमों में बदलता है। यह उपलब्धि उन्हें नई पीढ़ी के उद्यमियों को और मजबूती देने की प्रेरणा देती है। गौरतलब है कि एनआईटी रायपुर-एफआईई एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में मार्च 2021 में स्थापित हुआ। जो एनआईटी रायपुर का प्रौद्योगिकी व्यापार इन्क्यूबेटर है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की राष्ट्रीय नवाचार विकास और दोहन पहल (निधि) योजना के तहत कार्य करता है। संस्था ने अब तक छत्तीसगढ़ में 35 से अधिक स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है। इनमें से कुछ स्टार्टअप्स गवर्नेंस और मेडिकल उपकरण निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। जबकि कुछ एनालिटिक्स, डीप-टेक, क्लीन टेक और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समेत अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े हैं। एनआईटी रायपुर एफआईई का संचालन निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव और कैरियर डेवलपमेंट सेंटर प्रमुख डॉ. समीर बाजपेयी के नेतृत्व में हो रहा है। परिचालन टीम में डॉ. अनुज कुमार शुक्ला (फैकल्टी प्रभारी), श्री पवन कटारिया (अधिकारी प्रभारी) और सीईओ श्रीमती मेधा सिंह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एफआईई ने तकनीकी स्टार्टअप्स को व्यापक सहयोग देकर खुद को देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। जिनमें स्टार्टअप शुरू करना, कंपनी बनाना, तकनीकी मार्गदर्शन समेत स्टार्टअप्स से जुड़े सभी तरह के समर्थन शामिल हैं। छत्तीसगढ़ का कोई भी युवा यदि अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो वह इसके लिए एनआईटी रायपुर एफआईई से संपर्क कर सकता है।

मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर त्वरित अमल, तत्काल मुआवजा और सहायता से मिली बड़ी राहत

बाढ़ पीड़ितों को राशन-ईलाज के साथ अब जरूरी दस्तावेज बनाने का काम भी शुरू रायपुर बस्तर संभाग में पिछले सप्ताह हुई अतिवृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया था। अपने विदेश दौरे से लौट कर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दंतेवाड़ा पहुंचकर संभागीय बैठक में जिला कलेक्टरों को राहत और बचाव कार्यो में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिये थे। अब मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर तेजी अमल किया जा रहा है।  बाढ़ पीड़ित नागरिकों को जहां एक ओर राशन, ईलाज और दवाईयां के साथ-साथ गैस चुल्हे और सिंलेण्डर दिये गये हैं वहीं राहत शिविरों में उनके दैनिक जीवन की उपयोगी सभी व्यवस्थाएं भी की गई है। अब बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही नुकसान का वास्तविक आंकलन और अन्य जरूरी सहायता तथा मुआवजा देने की कार्यवाही पर भी तेजी से अमल किया जा रहा है। बाढ़ के पानी में खराब या नष्ट हो गये जरूरी दस्तावेजों को बनाने का काम भी राजस्व विभाग ने शुरू कर दिया हैं। बाढ़ की इस भीषण आपदा में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय नेतृत्व में एक संवेदनशील पहल कर त्वरित राहत कार्य और सहायता-मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर पीड़ित परिवारों को एक बड़ी राहत दी है।       बाढ़ से प्रभावित गाँवों में राहत दल तेजी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के लोहन्डीगुड़ा तहसील के मांदर गांव के प्रभावित किसानों को किसान किताब वितरित की जा रही है, जो बाढ़ के कारण बह गई थी। किसान किताब के मिलने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और भविष्य में किसी भी सहायता के लिए पात्र बनने में मदद करेगी। वहीं प्रभावितों को नवीन राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड एवं बैंक पासबुक तैयार कर प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही जिला प्रशासन की टीमें नुकसान का आकलन करने के लिए घर-घर सर्वे कर रही हैं और पात्रता के अनुसार तत्काल राहत राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर भुगतान कर रही हैं।       सरकार का ध्यान इस बात पर है कि किसी भी पीड़ित परिवार को उनकी जरूरत के समय अकेला न छोड़ा जाए। इसके लिए, मकान क्षति सहित पशु, फसल और घरेलू सामग्री की क्षति का विस्तृत ब्यौरा तैयार कर, हर एक प्रकरण पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि जरूरतमंद प्रभावितों तक मुआवजा राशि सीधे और समय पर पहुँच सके। स्थानीय प्रभावित परिवारों ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। एक प्रभावित ग्रामीण श्री मुरहा पटेल ने कहा कि हमने सोचा था कि बाढ़ के बाद सब कुछ खत्म हो गया, लेकिन सरकार की इस त्वरित मदद ने हमें फिर से जीवन को नये सिरे से शुरू करने की उम्मीद दी है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला आधिकारियों की इस पहल को प्रशासन की ओर से एक मजबूत और मानवीय दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। जो यह दर्शाता है कि आपदा की घड़ी में सरकार न सिर्फ राहत कार्य बल्कि पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस तरह के प्रयास बाढ़ पीड़ितों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से सहारा देते हैं, जिससे उन्हें जीवन को सामान्य पटरी पर लाने में मदद मिलती है।

सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा रायपुर  मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बलरामपुर–रामानुजगंज जिले में स्थित लुत्ती बांध के टूटने की घटना पर गहरी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। श्री साय ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि मैदानी अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में जाकर नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को सतत रूप से फील्ड में जाकर बांधों सहित अन्य संरचनाओं का निरंतर निरीक्षण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग की गहन समीक्षा बैठक ली। उन्होंने सिंचाई परियोजनाओं के रखरखाव और मरम्मत पर विशेष ध्यान देने, सभी बांधों की जलभराव क्षमता, वर्तमान सिंचाई स्थिति और आगामी परियोजनाओं की प्रगति आदि के सम्बन्ध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा–निर्देश दिए। साथ ही विशेष रूप से बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 का कड़ाई से पालन करने तथा जिला प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने लक्षित सिंचाई क्षमता और वास्तविक सिंचाई क्षमता के बीच अंतर को कम करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग की अधूरी योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्माणाधीन वृहद परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर बल दिया, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। बैठक में विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में 04 वृहद परियोजनाएँ, 357 लघु परियोजनाएँ और 300 एनीकेट, इस प्रकार कुल 661 कार्य प्रगतिरत हैं। इसके अतिरिक्त 1036 जीर्णोद्धार कार्य भी चल रहे हैं। इस तरह कुल 1697 कार्य प्रगतिरत हैं, जिनमें लगभग ₹8966 करोड़ की राशि व्यय होगी। इस बैठक में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री रवि मित्तल, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, प्रमुख अभियंता श्री इंद्रजीत उईके तथा बस्तर, सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग मंडलों के मुख्य अभियंता सहित जल संसाधन विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।

करमा तिहार के रंग में डूबा मुख्यमंत्री निवास

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ आदिवासी कंवर समाज युवा प्रभाग रायपुर द्वारा आयोजित प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत – 2025 करमा तिहार कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधान से पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।  मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति हमारे पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है। इस संस्कृति एवं परंपरा को जीवंत बनाए रखना न केवल हमारी जिम्मेदारी, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। ऐसे पर्व और परंपराएँ समाज को एकजुट होने का अवसर देती हैं, जिससे स्नेह, सद्भाव एवं सौहार्द की भावना विकसित होती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि कंवर समाज के युवाओं द्वारा राजधानी रायपुर में करमा तिहार का आयोजन किया जा रहा है। हमारी आदिवासी संस्कृति में अनेक प्रकार के करमा तिहार मनाए जाते हैं। आज एकादशी का करमा तिहार है, जो हमारी कुंवारी बेटियों का पर्व है। इस करमा तिहार का उद्देश्य है कि हमारी बेटियों को उत्तम वर और उत्तम गृहस्थ जीवन मिले। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर बेटियाँ अच्छे वर और अच्छे घर की कामना करती हैं। इसके बाद दशहरा करमा का पर्व आता है, जिसमें विवाह के पश्चात पहली बार जब बेटी मायके आती है, तो वह उपवास रखकर विजयादशमी का पर्व मनाती है। इसी प्रकार जियुत पुत्रिका करमा मनाया जाता है, जिसमें माताएँ पुत्र-पुत्रियों के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं। यह एक कठिन व्रत होता है, जिसमें माताएँ चौबीस घंटे तक बिना अन्न-जल ग्रहण किए उपवास करती हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यदि छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां अंग्रेजों के विरुद्ध 12 आदिवासी क्रांतियाँ हुईं। हमारी सरकार नया रायपुर स्थित ट्राइबल म्यूजियम में आदिवासी संस्कृति के महानायकों की छवि को आमजन की जागरूकता के लिए प्रदर्शित करने मॉडल के रूप में उकेरा जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती समारोह में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को आमंत्रित किया जा रहा है। उनके करकमलों से इस म्यूजियम का शुभारंभ किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार आदिवासी समाज के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देती रही है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने आजादी के लगभग 40 वर्षों बाद आदिवासी विभाग का पृथक मंत्रालय बनाकर आदिवासी समाज के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हीं के बताए मार्ग पर वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी आदिवासी समाज के बेहतरी एवं समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं विशेष पिछड़ी जनजाति समाज के लिए पीएम जनमन योजना का संचालन कर रहे हैं, जिससे हितग्राहियों को शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ मिल रहा है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ में 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह ने बस्तर, सरगुजा एवं मध्य क्षेत्र प्राधिकरण का गठन कर विकास को गति प्रदान करने का कार्य किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि युवा आदिवासियों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हमने नई उद्योग नीति बनाई है, जिसमें बस्तर एवं सरगुजा क्षेत्रों के लिए विशेष रियायतें दी गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में कोई कठिनाई न हो। इसके लिए राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना राज्य में ही की जा रही है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी आदिवासी संस्कृति अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली परंपरा रही है। इसी परंपरा के निर्वहन में आज हम करमा तिहार मना रहे हैं। हमारी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। साय जी के नेतृत्व में ही बस्तर संभाग में बस्तर पांडुम के नाम से ओलंपिक का आयोजन किया गया, जिसकी चर्चा पूरे भारत में हुई। श्री कश्यप ने इस अवसर पर समस्त छत्तीसगढ़वासियों को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। संरक्षक, अखिल भारतीय कंवर समाज विकास समिति पमशाला, जशपुर, श्रीमती कौशिल्या साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी समाज और प्रकृति एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। आदिवासी समाज के लिए प्रकृति सदैव आराध्य रही है। करमा पर्व प्रकृति प्रेम का पर्व है। हमारी संस्कृति अत्यंत गौरवशाली रही है और उसका संरक्षण तथा समय के साथ संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि समाज की महिलाएँ आगे आकर इस संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने सभी को प्रकृति पर्व भादो एकादशी व्रत करमा तिहार की बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।  

गरीब परिवारों का पक्का घर का सपना हो रहा साकार

135 दिवस में आवास पूर्ण रायपुर, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए पक्के और सुरक्षित मकान उपलब्ध कराए जा चुके हैं। कच्चे घरों से पक्के घरों में शिफ्ट हुए परिवार अब सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जनपद पंचायत दंतेवाड़ा के ग्राम पंचायत गामावाड़ा के नियद नेल्ला नार क्षेत्र में मात्र 135 दिनों में एक आवास का निर्माण कार्य पूरा किया गया, जबकि सामान्य परिस्थितियों में जिले में निर्माण कार्यों में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। रिकॉर्ड समय में मकान का तैयार होना प्रशासन की दक्षता और प्रतिबद्धता का परिचायक है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को तीन किस्तों में 1 लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही 90 दिन का मनरेगा रोजगार भी उपलब्ध कराया जाता है, ताकि ग्रामीणों को न केवल आवास बल्कि रोजगार का भी सहारा मिल सके। “सबका साथ, सबका विकास” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। सुदूर वनांचल के दंतेवाड़ा जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्र में भी इस योजना से लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में आवास निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा रहे हैं। बरसात और निर्माण सामग्री की कमी जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रशासन ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। जिले में अब तक कुल 2118 पक्के मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, जिनमें केवल जनपद दंतेवाड़ा में 547 मकानों का निर्माण संपन्न हुआ है। जिला प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में और अधिक पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले का कोई भी परिवार पक्के घर से वंचित न रहे और प्रत्येक परिवार का पक्का मकान का सपना साकार हो सके।

खाने में लापरवाही का मामला: आश्रम में छात्र हुए भूखे, प्रभारी अधीक्षक सस्पेंड

सुकमा बस्तर संभाग के सुकमा जिले से एक बार फिर छात्रावास में बच्चों के भोजन से जुड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। बीते दिनों जहां बच्चों के खाने में फिनाइल मिलने की घटना ने सबको चौंका दिया था, वहीं अब बालक आश्रम मानकापाल में छात्रों को केवल नमक और चावल परोसने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले की शिकायत पर जिला प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच करवाई। कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देश पर सहायक आयुक्त हेमंत सिन्हा और मंडल संयोजक मौके पर पहुंचे और जांच की। अधीक्षक निलंबित जांच में आरोप सही पाए जाने पर प्रभारी अधीक्षक जय प्रकाश बघेल को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 का उल्लंघन तथा पदीय कर्तव्यों में घोर लापरवाही बरतने का दोषी मानते हुए तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित की गई है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, सुकमा रहेगा तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। कलेक्टर ध्रुव ने स्पष्ट किया है कि आश्रमों एवं छात्रावासों में बच्चों के भोजन, स्वास्थ्य और देखभाल में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि छात्रावासों और आश्रमों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की सतत निगरानी सुनिश्चित करें।

नागपुर-पाराडोल रेलवे हॉल्ट सर्वे को लेकर बैठक संपन्न

नागपुर-पाराडोल रेलवे हॉल्ट सर्वे को लेकर बैठक संपन्न कलेक्टर बोले- रेलवे परियोजना में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं होगी मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में नागपुर-पाराडोल रेलवे हॉल्ट परियोजना से जुड़ी भूमि अधिग्रहण और संयुक्त मापन सर्वेक्षण (JMS) पर चर्चा के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डी. राहुल वेंकट की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में रेलवे, वन, लोक निर्माण, कृषि, उद्यानिकी, पीएचई और सीएसपीडीसीएल विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने कहा कि रेलवे परियोजना क्षेत्रीय विकास और नागरिक सुविधा दोनों के लिए अहम है, इसलिए कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय और समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में भूमि स्वामियों का विवरण, भू-खण्ड वर्गीकरण, फसल और संपत्तियों की स्थिति, भवनों व अन्य परिसंपत्तियों का सर्वे, फलदार व इमारती वृक्षों का मापन आदि बिंदुओं पर प्रारूप तय किए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता और भूमि स्वामियों की उपस्थिति में होनी चाहिए। प्रभावित गांव बंजी, सरोला, चिरई पानी, सरभोका, चिताझोर और पाराडोल में सप्ताहवार शिविर लगाकर सर्वे करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हितग्राही का फोटो-वीडियो रिकॉर्ड तैयार कर अलग फोल्डर में संकलित कर एसडीएम को सौंपा जाए। साथ ही जनपद सीईओ, सरपंच और सचिव की उपस्थिति भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर अनिल कुमार सिदार, संयुक्त कलेक्टर इंदिरा मिश्रा, एसडीएम लिंगराज सिदार, शशि शेखर मिश्रा, विजयेन्द्र सारथी, तहसीलदार, रेलवे विभाग के अधिकारी, आरआई और पटवारी उपस्थित रहे।

सीएम साय ने जताया आभार, पीएम मोदी के नेतृत्व में जीएसटी सुधारों की नई दिशा

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए ऐतिहासिक जीएसटी सुधारों का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय भारत की कर प्रणाली को आमजन के लिए अधिक सरल और उद्योग-व्यापार के लिए प्रोत्साहनकारी बनाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आयकर में 12 लाख तक की छूट देने के बाद अब जीएसटी दरों में की गई भारी कटौती से रोज़मर्रा की ज़रूरत की वस्तुएं, खेती-किसानी के उपकरण, खाने-पीने की चीज़ें, दवाइयां, शिक्षा सामग्री, मनोरंजन की वस्तुएं, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सस्ते हो गए हैं। कई आवश्यक वस्तुओं पर टैक्स दर शून्य कर दी गई है, जिससे नागरिकों के जीवन में सीधा लाभ पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि नवरात्रि पर्व से लागू होने वाला यह प्रावधान प्रधानमंत्री जी की Ease of Doing Business और Ease of Living की संकल्पना को साकार करेगा। इससे उद्योग-व्यापार को नई ऊर्जा मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का आभार व्यक्त करता हूँ। यह निर्णय आम आदमी के जीवन को सरल बनाने और देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई ऊँचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।