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Train Delay Alert: यात्रियों के लिए बड़ी राहत, 15 मिनट से ज्यादा देरी पर मोबाइल ऐप देगा तुरंत सूचना

भोपाल  भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। आने वाले समय में ट्रेनों के लेट होने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही पर सटीक और रियल-टाइम नजर रखने के लिए एक आधुनिक एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस खास ऐप का नाम 'Punctuality BZA' है, जिसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है। इस डिजिटल तकनीक के आने से अब रेलवे के परिचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर ही किसी भी ट्रेन की सटीक लोकेशन, उसकी गति और देरी से जुड़ी पल-पल की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले जिस काम के लिए सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, वह काम अब बेहद तेज और आसान हो गया है। एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी पूरी कुंडली 'Punctuality BZA' एप्लीकेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिंगल डैशबोर्ड पर ही यूजर को ट्रेन संचालन से जुड़ी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इस ऐप में मिलने वाली मुख्य सुविधाएं इस प्रकार हैं:     लाइव ट्रैकिंग: अलग-अलग रूट और सेक्शन पर ट्रेनों की मौजूदा स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग।     इंटेलिजेंट अलर्ट सिस्टम: यदि कोई ट्रेन अपने निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक लेट होती है, तो यह ऐप अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।     जीपीएस कनेक्टिविटी: यह ऐप सीधे 'जीपीएस आधारित लेट ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम' से जुड़ा है, जो ट्रेनों की आवाजाही को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करता है।     कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ट्रेन के लेट होने की वजहों को डिजिटल माध्यम से तुरंत दर्ज कर लिया जाता है, जिससे पुराना कागजी काम बेहद कम हो गया है। इससे ट्रेन मैनेजरों को सुरक्षित ट्रेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। पुराने सिस्टम (ICMS) की कमियों से मिलेगा छुटकारा इस नई तकनीक के आने से पहले रेलवे मुख्य रूप से 'इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम' (ICMS) के वेब पोर्टल का इस्तेमाल करता था। पुराने सिस्टम में अधिकारियों को बार-बार वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगइन करना पड़ता था। साथ ही, अलग-अलग जानकारियों के लिए बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नया ऐप इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और 'यूजर-फ्रेंडली' बनाता है। यात्रियों और रेलवे को क्या होगा बड़ा फायदा? इस ऐप के जरिए मिलने वाले सटीक डेटा से रेलवे के उच्च अधिकारियों को विपरीत परिस्थितियों में तुरंत और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जब रेलवे स्टाफ के पास हर ट्रेन की रियल-टाइम लोकेशन होगी, तो वे ट्रेनों को ज्यादा कुशलता से री-शेड्यूल कर पाएंगे, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को होगा और उनकी असुविधाएं कम होंगी। विजयवाड़ा डिवीजन में इस ऐप के सफल प्रयोग के बाद अब इसे भारतीय रेलवे के अन्य डिवीजनों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।  

रेलवे का सख्त नियम, महिला कोच में यात्रा करने वाले पुरुषों पर ₹2500 का जुर्माना

नई दिल्ली  ट्रेन से सफर के दौरान कुछ जरूरी नियमों का पालन भी करना होता है. रेलवे ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए खास नियम बनाएं हुए हैं और खासकर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग से आरक्षित कोच, सीट और बर्थ की व्यवस्था भी की हुई है. लेकिन अभी भी कुछ पुरुष यात्री महिलाओं के कोच में बैठ जाते हैं, लेकिन ऐसा करना अब भारी पड़ सकता है।  ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने नियमों को पहले से ज्यादा सख्त कर दिया है. अब अगर कोई पुरुष यात्री महिला आरक्षित कोच, सीट या बर्थ पर बैठता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।   जुर्माना न भरने पर कोर्ट में ₹5000 जुर्माना भी लगेगा। कितना लगेगा जुर्माना?     अगर कोई पुरुष यात्री जानकर महिला कोच में सफर करता है तो ऐसे मामलों में 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।      साथ ही यात्री को तुरंत महिला कोच से बाहर निकाल दिया जाएगा।      वहीं अगर कोई यात्री जुर्माना देने से इनकार करता है तो मामला सीधे कोर्ट तक जा सकता है।      इसके अलावा उस व्यक्ति पर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।      रेलवे ने सख्त आदेश दिए है कि सफर के दौरान कोई भी पुरुष यात्री महिला कोच में प्रवेश न करें।  गलती से महिला कोच में आ गए तो क्या होगा? अगर गलती से आप महिला कोच में आ जाते हैं तो ऐसे मामलों में आपको घबराने की जरूरत नहीं है. आप सबसे पहले अगले स्टेशन या फिर मौका देखते ही अपने कोच में चले जाएं. साथ ही आप इसकी जानकारी टीटीई को दे सकते हैं और उसे अपनी स्थिति के बारे में बता सकते हैं।  रेलवे ने सख्त किए नियम रेलवे मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नए नियम 20 जून से लागू हो गए हैं. अब अगर कोई यात्री बिना टिकट सफर करता है या पहले इस्तेमाल हुई टिकट के साथ कोई यात्री दोबारा सफर करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और महिलाओं के कोच में सफर करना नियमों का उल्लंघन करना है. रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि रेलवे के नियमों का अच्छे से पालन करें, ताकि किसी भी तरह की दिक्कत का सामना न करना पड़े।  यह एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है सच कहें तो, यह कोई अलग-थलग बदलाव नहीं है। यह 1 जुलाई, 2026 से यात्रियों के लिए लागू किए गए अन्य सख्त रेलवे नियमों के साथ जुड़ा हुआ है, जैसे कि बिना टिकट यात्रा करने पर जुर्माना दोगुना कर दिया गया है, और ट्रेनों में धूम्रपान और सामान बेचने पर अब 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इन सभी रेलवे जुर्माना नियमों का उद्देश्य पूरे नेटवर्क में अनुशासन को बढ़ावा देना है, जो वास्तव में प्रतिदिन 25 लाख से अधिक लोगों को यात्रा कराता है। जमीनी स्तर वैध टिकट, पहचान पत्र साथ रखें और बुनियादी नियमों का पालन करें। भारतीय रेलवे के नए जुर्माने के नियम अब सख्त हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में ये सिर्फ सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं। रेलवे टिकट के लिए न्यूनतम जुर्माना कितना है? 1 जुलाई, 2026 से, वैध टिकट के बिना यात्रा करने पर न्यूनतम जुर्माना 250 रुपये से बढ़कर 500 रुपये हो गया है, और इसके अलावा आपको वास्तविक किराया भी देना होगा। क्या रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ने वाले यात्री टिकट चेक कर सकते हैं? सामान्यतः नहीं, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच स्लीपर या एसी डिब्बों में ट्रेन में चढ़ने वाले यात्रियों को छोड़कर, बाकी सभी यात्रियों को रात 10 बजे के बाद टिकट चेक करने की अनुमति नहीं होती है।    

रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी, पसंदीदा सीट चुनने की सुविधा और तेज होगी टिकट बुकिंग

भोपाल  ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट हैंग होना, सीट उपलब्धता देखने में देरी और तत्काल टिकट के समय सर्वर पर बढ़ते दबाव जैसी परेशानियां अब जल्द ही बीते दिनों की बात हो सकती हैं। रेलवे अपने करीब चार दशक पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) को आधुनिक क्लाउड आधारित तकनीक से बदलने जा रहा है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद टिकट बुकिंग की रफ्तार पांच गुना तक बढ़ जाएगी और यात्रियों को बस और एयरलाइन की तर्ज पर अपनी पसंद की सीट चुनने की सुविधा भी मिलेगी। वर्तमान पीआरएस वर्ष 1986 से काम कर रहा है। इसी नेटवर्क के जरिए रेलवे आरक्षण काउंटर, आइआरसीटीसी वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर टिकट बुकिंग की जाती है। मध्यप्रदेश सहित देश में होने वाली करीब 88 प्रतिशत ऑनलाइन टिकट बुकिंग इसी सिस्टम से संचालित होती है। बढ़ती यात्री संख्या और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए रेलवे ने इसे अपग्रेड करने का फैसला लिया है। कई गुना हो जाएगी क्षमता रेलवे सूत्रों के अनुसार अभी सिस्टम एक मिनट में करीब 32 हजार टिकट बुक करने में सक्षम है। नया क्लाउड आधारित सिस्टम यह क्षमता बढ़ाकर 1.5 लाख टिकट प्रति मिनट तक पहुंचा देगा। वहीं सीट उपलब्धता जांचने की क्षमता भी 4 लाख से बढ़कर 40 लाख रिक्वेस्ट प्रति मिनट हो जाएगी। इसका सीधा फायदा त्योहारों, गर्मी की छुट्टियों और अन्य व्यस्त सीजन में मिलेगा, जब टिकटों की मांग अचानक बढ़ जाती है। बहुभाषी इंटरफेस से बुकिंग आसान नए सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यात्रियों को सीट चयन का विकल्प देना होगी। बस और फ्लाइट बुकिंग की तरह यात्री कोच में उपलब्ध सीटों में से अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे। परिवार या समूह में यात्रा करने वाले लोग एक साथ बैठने के लिए सीटें चुन पाएंगे। दिव्यांगजन और मरीजों के लिए भी विशेष सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। साथ ही बहुभाषी इंटरफेस के कारण टिकट बुकिंग और आसान हो जाएगी। रेल वन ऐप निभाएगा मुख्य भूमिका नई व्यवस्था में रेलवन ऐप मुख्य प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएगा। एआइ आधारित यह ऐप वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का भी अनुमान बताएगा। रेलवे का दावा है नई तकनीक से टिकट बुकिंग प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी, जिससे यात्रियों का सफर और आसान होगा।

टीही टनल परियोजना में अभी बाकी है काम, 60 मीटर हिस्से का निर्माण शेष

इंदौर  इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत टीही के आगे टनल बन रही है। टनल के एक हिस्से (टीही एंड, पी-1) पर 60 मीटर का काम बचा है। सारी मशीनरी और लेबर यहीं लगी हुई है। इसे रेलवे 15 दिन में पूरा कर लेगा। इसके बाद तीन किमी लंबी टनल की लाइनिंग का काम पूरा हो जाएगा। इसी टनल के बीच के हिस्से में कट एंड कवर था, उसे रेलवे ने पूरा कर लिया है, अब यहां लिफ्ट और सीढ़ियों का काम चल रहा है। टनल के सबसे आखिरी हिस्से (पीथमपुर एंड, पी-2) में काम पूरा कर ट्रैक बिछाने के लिए यह हिस्सा दे दिया गया है। कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने कहा– टनल का कुल 261 मीटर का काम बचा था, इसमें से 201 मीटर काम कर लिया है। बचा काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं टनल का लाइनिंग काम 8 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। दो पारियों में 12-12 घंटे की शिफ्ट में 300 मजदूर काम कर रहे हैं। ऐसे तैयार हो रहा प्रोजेक्ट     शिलान्यास: 18 फरवरी 2008     लागत वर्तमान में: 1680 करोड़ से ज्यादा।     कुल 200.97 किमी लंबी लाइन।     वर्तमान स्थिति: टीही तक का काम पूरा हो गया है। दूसरी ओर दाहोद से कटवाड़ा और आगे कुछ हिस्से में काम चल रहा है।     देरी का खामियाजा: 678.56 करोड़ रुपए लागत थी। प्रोजेक्ट के हर साल देरी के साथ लागत भी बढ़ती जा रही है। टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हर दिन की टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। टीही एंड पर जिस हिस्से में टनल का काम चल रहा है, उससे 1208 मीटर आगे तक रेलवे ने ट्रैक बिछा लिया है। यहां बैलास्ट लेस ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो आम ट्रैक से अलग और खास होता है। करीब 1800 मीटर से ज्यादा हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम बचा है। रेलवे का कहना है कि हर दिन 50 से ज्यादा मीटर हिस्से में ट्रैक का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। टनल के अंदर केबल-ट्रे, सीसीटीवी, ओएचई ब्रैकेट लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है। फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था रेलवे ने पहले टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य फरवरी-2026 रखा था। अब संभावना है कि सितंबर-अक्टूबर तक धार तक ट्रेन चलाई जा सकती है। हालांकि रेलवे का कहना है कि टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय लग रहा है। दो-तीन महीने का समय और लग सकता है। बारिश के कारण फिर काम की गति धीमी हो सकती है। टनल की वजह से ही अटका है काम रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा- 2017-18 से टनल का काम चल रहा है। कोरोना के बाद कॉन्ट्रैक्ट भी शॉर्ट टर्मिनेट हुए। फिर नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट होकर काम शुरू हुआ। टनल की वजह से काफी समय लग गया। रेलवे को चाहिए कि अब तेजी से काम कर जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा- 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी। यह प्रोजेक्ट हमारे लिए महत्वपूर्ण     इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट हमारे लिए सबसे अहम है। टीही टनल का काम जल्द पूरा हो और धार तक ट्रेन का संचालन शुरू हो, इसके लिए हम टाइम लाइन बनाकर काम काम कर रहे हैं। हर दिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। टनल में हमने सारे संसाधन लगाए हैं, 300 से ज्यादा मजदूर 24 घंटे काम कर रहे हैं। – विनीत अभिषेक, सीपीआरओ, पश्चिम रेलवे

जालंधर में विकास को मिलेगी रफ्तार, 112.93 करोड़ की लागत से बनेंगे दो नए ROB

जालंधर  केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू 24 जून को 112.93 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले गुरु नानक पुरा फाटक बी-67 और गढ़ा फाटक एस-4 का शिलान्यास करेंगे।गुरु नानक पुरा फाटक पर रवनीत बिट्टू, चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर कंस्ट्रक्शन व रोड सेफ्टी प्रोजेक्ट नॉर्दर्न रेलवे संजीव कुमार श्रीवास्तव, डीआरएम संजीव कुमार सहित भाजपा की लीडरशिप के साथ शाम चार बजे और गढ़ा फाटक पर पांच बजे नींवपत्थर रखेंगे। इस कारण गुरु नानक पुरा फाटक सुबह छह से शाम छह बजे तक बंद रखा जाएगा। 112.93 करोड़ रुपये की लागत से दोनों आरओबी का निर्माण होगा। इसमें 48.95 करोड़ रुपये गुरु नानक पुरा और 63.98 करोड़ रुपये गढ़ा के आरओबी के लिए रेलवे की तरफ से खर्च जाएंगे। आज यहां से ट्रैफिक डायवर्ट 1. लाडोवाली रोड पर कृष्णा फैक्ट्री से बीएसएफ चौक से पीपी चौक की तरफ – चोगिटी चौक से पीपी चौक की तरफ वाहन चालकों को जाना होगा जालंधर शहर और कैंट के मध्य अमृतसर-नई दिल्ली रेल लाइन पर पड़ने गुरु नानक पुरा फाटक सबसे व्यस्त रहता है। यहां से 110 रेलगाड़ियां रोज गुजरती हैं। ऐसे में आरओबी का कार्य शुरू होने पर इस फाटक से गुजरने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट करना बड़ी चुनौती होगा, क्योंकि पीपी सर्विस लेन बंद होने से पहले ही 95 प्रतिशत ट्रैफिक इसी फाटक से और पांच प्रतिशत रामामंडी से आ रहा है। डायवर्जन विकल्प में बशीरपुरा फाटक भी है, मगर वह एरिया बहुत तंग है। पीएपी की सर्विस लेन का काम जल्द पूरा होना जरूरी जालंधर शहर और कैंट के मध्य अमृतसर-नई दिल्ली रेल लाइन पर पड़ने गुरु नानक पुरा फाटक सबसे व्यस्त रहता है। यहां से 110 रेलगाड़ियां रोज गुजरती हैं। ऐसे में आरओबी का कार्य शुरू होने पर इस फाटक से गुजरने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट करना बड़ी चुनौती होगा, क्योंकि पीएपी सर्विस लेन बंद होने से पहले ही 95 प्रतिशत ट्रैफिक इसी फाटक से और पांच प्रतिशत रामामंडी से आ रहा है। डायवर्जन विकल्प में बशीरपुरा फाटक भी है, मगर वह एरिया बहुत तंग है। ट्रैफिक का भार बढ़ने से क्या स्थिति बनेगी। दूसरी तरफ सारा ट्रैफिक रामामंडी की तरफ डायवर्ट होता है, तब भी स्थिति बिगड़ेगी। ऐसे में बस विकल्प नहीं है कि पीएपी सर्विस लेन पर रैंप बनाने का कार्य जल्द पूरा करवाया जाए। यूं तो कंस्ट्रक्शन कंपनी ने एक तरफ से पीएपी की बाउंडर पीछे हटाकर बना दी है और दूसरी तरफ पिल्लर बनाए जा रहे हैं। ड्रेन सिस्टम भी तैयार कर दिया है। कंपनी का दावा है कि अक्टूबर तक इसका काम पूरा कर दिया जाएगा। रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बनने वाला दूसरा स्टील का बोर्डिंग ब्रिज जालंधर-दिल्ली रेलखंड पर स्थित गुरु नानकपुरा रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर स्टील का बोस्ट्रिंग ब्रिज ही बनाया जाएगा। रेलवे आरओबी के निर्माण के ऊपर आने वाले खर्च का 100 प्रतिशत वाहन करेगी। लद्देवाली में पहला बोस्ट्रिंग ब्रिज बनाया जा चुका है। तब रेलवे और राज्य सरकार की तरफ से आधा-आधा खर्च वहन किया था। लद्देवाली में आरओबी निर्माण को लेकर आने वाली सभी चुनौतियों गुरु नानक पुरा आरओबी बनाने में भी आएंगे। क्योंकि उसी तरह से सीवरेज सिस्टम, पानी की पाइपों आदि गुरु नानक पुरा में शिफ्टिंग करनी होगी।

खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से धमकी भरा मेल, दिल्ली जाने वाली ट्रेन में धमाके की चेतावनी

लुधियाना  महानगर में एक बार फिर बम धमाके की धमकी मिलने से सनसनी फैल गई है। बुधवार को नगर निगम (MC) और डिप्टी कमिश्नर (DC) दफ्तर की आधिकारिक ईमेल आई.डी. पर आए एक धमकी भरे मेल के बाद प्रशासनिक हलकों और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस बार शातिर ईमेल भेजने वाले ने किसी लावारिस बैग या टाइमर बम की नहीं, बल्कि 'ह्यूमन बम' (मानव बम) के जरिए इन दफ्तरों को उड़ाने की खौफनाक धमकी दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईमेल भेजने वाले सिरफिरे ने लुधियाना मेयर के दफ्तर, नगर निगम कार्यालय, डी.सी. दफ्तर और शहर के व्यस्त रेलवे ट्रैक पर बम धमाके करने की चेतावनी दी है। जैसे ही इसकी भनक उच्च अधिकारियों को लगी, तुरंत पुलिस के आला अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गईं। चंडीगढ़ और दिल्ली तक की खुफिया एजेंसियां अलर्ट, खंगाले जा रहे डिजिटल फुटप्रिंट्स  धमकी भरे ईमेल की गंभीरता को देखते हुए साइबर क्राइम की टीमें और देश की खुफिया एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गई हैं। इस मेल के ओरिजिन (कहाँ से भेजा गया) का पता लगाने और भेजने वाले शातिर को बेनकाब करने के लिए हाई-लेवल जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी पहलुओं, आई.पी. एड्रेस (IP Address) और डिजिटल फुटप्रिंट्स की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। सर्च ऑपरेशन में नहीं मिला कुछ संदिग्ध, एडिशनल DCP बोले- घबराएं नहीं  मामले की पुष्टि करते हुए एडिशनल डी.सी.पी. (ADCP) देव सिंह ने बताया कि बम की धमकी वाला ईमेल मिलने की सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीमों और बम निरोधक दस्ते ने तुरंत दोनों दफ्तरों के परिसरों की सघन चेकिंग की। पूरे इलाके को खंगालने के बाद पुलिस को वहां कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने जनता से अपील की है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मेल आने के बाद पुलिस व प्रशासन ने डीसी दफ्तर, नगर निगम दफ्तर में हर आने जाने वाले पर नजर रखनी शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मेल पहले भी आई थी। हालांकि तब भी कुछ नहीं निकला था। फिर भी प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। जानकारी के अनुसार प्रशासन को 17 जून 2026 को सुबह करीब 9:34 बजे मेल मिली। ईमेल भेजने वाले ने खुद को खालिस्तान नेशनल आर्मी' का सदस्य बताया है। ईमेल में बेहद आपत्तिजनक और डराने वाली बातें लिखी गई हैं। इस ईमेल के बाद लुधियाना मेयर दफ्तर, डीसी कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुट गई है कि यह ईमेल कहाँ से जनरेट हुआ है और इसके पीछे किसी शरारती तत्व का हाथ है या वाकई कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। प्रशासन को मिली मेल में लिखी अहम बातें… मेयर और DC ऑफिस पर फिदायीन हमला: आज दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर और डीसी ऑफिस को 'मानव बम' से उड़ाने की धमकी दी गई थी। CM भगवंत मान को निशाना बनाने का दावा: ईमेल में लिखा गया है कि 2027 तक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पूर्व सीएम बेअंत सिंह की तरह आत्मघाती हमला किया जाएगा। रेलवे ट्रैक और आम जनता को चेतावनी: ईमेल में साफ लिखा गया है कि 18 जून से 30 सितंबर के बीच अमृतसर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला के रेलवे ट्रैक को निशाना बनाया जाएगा। भेजने वाले ने खुलेआम चेतावनी दी है अपने बच्चे बचाओ, कोई भी 18 जून से 30 सितंबर के बीच दिल्ली वाली रेल से सफर न करे। गृह मंत्री अमित शाह को धमकी: ईमेल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाने और हरदीप सिंह निज्जर की मौत का बदला लेने की बात भी कही गई है। पहले भी आ चुकी हैं फर्जी धमकियां, सिंगर दिलजीत दोसांझ का घर भी था निशाने पर  काबिलेगौर है कि लुधियाना में बम धमाकों की धमकी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे करीब तीन हफ्ते पहले भी एक ऐसा ही फर्जी ईमेल आया था, जिसमें लुधियाना के मेयर दफ्तर और मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के घर को बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, लुधियाना में पिछले समय के दौरान आए ऐसे सभी बम थ्रेट ईमेल महज एक 'होक्स' (अफ़वाह या फर्जी कॉल) ही साबित हुए हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व का काम है, जिसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

रेलवे दोहरीकरण कार्य का असर: कई प्रमुख ट्रेनें डायवर्ट, सुवंसा स्टेशन पर बढ़ाया गया इंटरसिटी का ठहराव

लखनऊ गर्मी की छुट्टी में रेल यात्रियों की आफत थोड़ी बढ़ गई है। उत्तर रेलवे के गौरा-सुवंसा-जंघई रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के चलते रेलवे ने 23 से 30 जून तक अर्चना और नीलांचल एक्सप्रेस समेत नौ प्रमुख ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है। वहीं, यात्रियों की सुविधा के लिए वाराणसी-लखनऊ इंटरसिटी का सुवंसा स्टेशन पर अस्थाई ठहराव बढ़ाया गया है। सीनियर डीसीएम समर्थ गुप्ता ने यात्रियों से सफर पर निकलने से पहले हेल्पलाइन नंबर 139 पर स्थिति जांचने की अपील की है। मार्ग परिवर्तन के तहत लखनऊ-वाराणसी (24204), अमृतसर-हावड़ा पंजाब मेल (13006), जम्मूतवी-पटना अर्चना एक्सप्रेस (12356) और नई दिल्ली-वाराणसी विशेष गाड़ी (04210) लखनऊ-सुलतानपुर-जफराबाद-वाराणसी मार्ग से चलेंगी, जिससे रायबरेली, अमेठी और प्रतापगढ़ जैसे स्टेशनों पर इनका ठहराव नहीं होगा। दूसरी तरफ, हावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल (13005), पटना-जम्मूतवी अर्चना एक्सप्रेस (12355) और पुरी-आनंद विहार नीलांचल एक्सप्रेस (12875) वाराणसी-जफराबाद-सुलतानपुर-लखनऊ मार्ग से डायवर्ट रहेंगी। बनारस-देहरादून एक्सप्रेस (15119) 23 से 27 जून तक जंघई-फाफामऊ और 28 से 30 जून तक प्रयागराज के रास्ते चलाई जाएगी, जबकि फिरोजपुर-पटना साहिब गाड़ी (04616) 23 जून को उतरेठिया-सुलतानपुर होकर निकलेगी। बनारस इंटरसिटी का ठहराव सुवंसा पर रेलवे के अनुसार 26 से 30 जून तक बादशाहपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म न होने से 15108 लखनऊ-बनारस इंटरसिटी, 15107 बनारस-लखनऊ इंटरसिटी और 24203 वाराणसी-लखनऊ एक्सप्रेस का ठहराव सुवंसा स्टेशन पर 2 मिनट के लिए दिया जाएगा। जंघई पर ठहराव यथावत रहेगा। 29 मिनट में ट्रेन पलटाने की साजिश का रहस्य छुपा लखनऊ, संवाददाता। दिलकुशा के पास रेलवे पटरी पर लोहे का एंगल रखकर पंजाब मेल ट्रेन को पलटाने की साजिश का रहस्य 29 मिनट में छिपा। पुलिस, एजेंसियां, जीआरपी और आरपीएफ की विशेष टीमें इस दो ट्रेनों के बीच के इस अंतराल में ट्रैक पर हुई गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। इस दौरान ट्रैक पर कौन गया? वह किधर से आया? कितने लोग थे? टीमें तफ्तीश कर रही हैं। एसपी जीआरपी रोहित मिश्रा के मुताबिक शुक्रवार दोपहर एक ट्रेन ट्रैक से 1:36 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर लोहे का एंगल नहीं था। दूसरी पंजाब मेल 2:05 बजे निकली। उस समय ट्रैक पर एंगल रखा था। चालक ने काफी हद तक हादसा रोकने की कोशिश की पर आखिर में इंजन में एंगल फंस गया था। लोहे का एंगल करीब 50 किलो वजन का था। जिसे उठाने में करीब तीन से चार लोग लगे होंगे। एसीपी कैंट ज्ञानेंद्र सिंह निर्देशन में थाने की टीम के अलावा, जीआरपी, रेलवे, खुफिया एजेंसियां घटनास्थल को जाने वाले मार्ग पर लगे सीसी कैमरे खंगाल रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी

अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के तीसरे दिन भोपाल मंडल में सुरक्षा जागरूकता अभियान रहा जारी मिसरोद, हरदा, खिरकिया एवं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक पर सड़क उपयोगकर्ताओं को किया जागरूक भोपाल  संरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में अंतर्राष्ट्रीय समपार फाटक जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत 06 जून से 12 जून 2026 तक विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के तीसरे दिन भी मंडल के विभिन्न समपार फाटकों पर सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अंतर्गत संरक्षा विभाग द्वारा 08 जून 2026 को मिसरोद स्टेशन के समपार फाटक संख्या 246 पर 50 सुरक्षा पंपलेट वितरित किए गए तथा 50 सड़क उपयोगकर्ताओं की काउंसिलिंग की गई। इसी प्रकार हरदा स्टेशन के समपार फाटक संख्या 204 पर 60 पंपलेट वितरित कर 60 लोगों को समपार सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई। खिरकिया स्टेशन के समपार फाटक संख्या 196 पर 30 पंपलेट वितरित किए गए तथा 30 व्यक्तियों की काउंसिलिंग की गई। वहीं रुठियाई स्टेशन के समपार फाटक संख्या 71 पर 50 पंपलेट वितरित किए गए तथा 60 सड़क उपयोगकर्ताओं को समपार फाटक सुरक्षा नियमों के संबंध में जागरूक किया गया। रेल प्रशासन सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से अपील करता है कि समपार फाटकों पर निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करें, बंद फाटक को पार करने का प्रयास न करें तथा सुरक्षित रेल संचालन में सहयोग प्रदान करें। जनसहभागिता एवं जागरूकता से ही समपार दुर्घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सकता है।  

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न

छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन की बैठक सम्पन्न रायपुर छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।                 बैठक में कटघोरा- डोंगरगढ़ रेल लाइन सहित प्रदेश में चल रही अन्य रेल परियोजनाओं की प्रगति और बोर्ड के कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी पहलुओं और समयसीमा पर चर्चा की।            बैठक में सचिव वाणिज्य एवं उद्योग विभाग एवं रेल परियोजनाएं श्री रजत कुमार, विशेष सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय एवं आयुक्त जनसंपर्क तथा संचालक खनिज विकास निगम श्री रजत बंसल सहित वित्त विभाग एवं रेलवे कॉर्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

रेलवे की हाईटेक पहल, AI कैमरों से ट्रेनों की होगी मॉनिटरिंग; हादसे रोकने में मिलेगी मदद

फरीदाबाद  देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल दिल्ली-मुंबई रूट पर ट्रेन हादसों को रोकने के लिए रेलवे अब हाईटेक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। फरीदाबाद रेल सेक्शन में एमवीआईएस ( मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम ) लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह सिस्टम ट्रेनों के पहियों और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों की निगरानी करेगा और किसी भी तकनीकी खराबी की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा। इस सिस्टम को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाने की तैयारी है। ये सिस्टम एआई आधारित एक तकनीक है जिसे चलती ट्रेनों में लटके हुए कल पुर्जे, ढीले या गायब पुर्जों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। रेल मंत्रालय की टीम ने इस परियोजना को लेकर सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। यह सिस्टम निजामुद्दीन से पलवल के बीच लगाया जाना है। 300 से अधिक ट्रेनों का होता है परिचालन दिल्ली मुंबई रूट का यह रेल मार्ग देश के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त कॉरिडोर में शामिल है। क्योंकि इस रूट से देश की सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस, वंदे भारत समेत रोजाना करीब 300 से अधिक ट्रेनें देश के अलग अलग हिस्सों के लिए आती जाती हैं। इनमें मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या करीब 220 है। जबकि 80 से अधिक मालगाड़ियां संचालित होती हैं। इस रूट से दौड़ने वाले ट्रेनों की रफ्तार 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है। बल्लभगढ़ स्टेशन से आगे गतिमान की रफ्तार 140 से 150 किमी की हो जाती है। एमवीआईएस सिस्टम रखेगा नजर रेलवे अधिकारियों के अनुसार एमवीआईएस एक अत्याधुनिक एआई आधारित तकनीक है। इसमें ट्रैक के किनारे विशेष कैमरे और सेंसर लगाए जाएंगे, जो तेज गति से गुजर रही ट्रेनों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। यह सिस्टम खास तौर पर ट्रेनों के पहियों, एक्सल, ब्रेक सिस्टम और अन्य बाहरी हिस्सों की जांच करेगा। यदि किसी ट्रेन में कोई पुर्जा ढीला, टूटा, लटका हुआ या गायब पाया जाता है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। सिस्टम की मॉनिटरिंग दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से की जाएगी। वहां मौजूद तकनीकी विशेषज्ञ लगातार ट्रेनों से प्राप्त डेटा और तस्वीरों पर नजर रखेंगे। किसी भी संदिग्ध स्थिति में संबंधित स्टेशन और रेलवे अधिकारियों को तुरंत सूचना भेजी जाएगी, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। अभी मैन्युअल तरीके होती है जांच रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस एमवीआईएस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह चलती ट्रेन की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगी। अभी तक ट्रेनों की तकनीकी जांच मुख्य रूप से मैन्युअल तरीके से की जाती रही है, जिसमें समय अधिक लगता है और कई बार छोटी तकनीकी खामियां पकड़ में नहीं आ पातीं। यही दुर्घटना का कारण बनती है। सिस्टम ऐसे करेगा काम     रेल अधिकारियों के मुताबिक एमवीआईएस सिस्टम की ट्रैक के किनारे लगाए जाने वाला हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों और सेंसर का एक नेटवर्क है।     जब ट्रेनें तेजी से गुजरती हैं, तो यह सिस्टम उनके पहियों, बोगियों और निचले हिस्सों (अंडर-गियर) की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है।     इसका एआई सॉफ्टवेयर इन तस्वीरों को पल भर में स्कैन करके पता लगा लेता है कि कोई पुर्जा असामान्य रूप से लटक तो नहीं रहा है, कोई स्प्रिंग टूटी हुई तो नहीं है, या कोई बोल्ट/पार्ट्स गायब तो नहीं हैं।     यदि कोई तकनीकी खराबी मिलती है, तो यह सिस्टम तुरंत संबंधित अधिकारियों को अलर्ट भेज देता है। सर्वे शुरू, जल्द लगाने की तैयारी रेल अधिकारियों के मुताबिक उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में इसे फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। भविष्य में इसे देश के अन्य महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर भी लगाया जाएगा। रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित सफर कर सकेंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसे लगाने के लिए सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। संभवत: इसे नीलम पुल के या उसके आसपास इसे लगाया जाएगा।