samacharsecretary.com

अमृतसर-न्यू जलपाईगुड़ी ट्रेन को आज मिलेगी हरी झंडी, मंत्री रवनीत बिट्टू करेंगे रवाना

अमृतसर नरकटियागंज और बगहा को नई सौगात मिली है. रेलवे बोर्ड ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए 14663/14664 अमृतसर-न्यू जलपाईगुड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस के संशोधित रूट और समय-सारणी की घोषणा कर दी है. इस नए फैसले से पश्चिम चंपारण जिले के रेल यात्रियों में खुशी की लहर है. खासकर नरकटियागंज, बगहा और इसके आसपास के सीमावर्ती इलाकों के लोगों को अब पंजाब और पूर्वोत्तर भारत (NJP) जाने के लिए सीधी और बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिल सकेगी।   इन स्टेशनों पर होगा ठहराव  रेलवे बोर्ड के आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह ट्रेन गोरखपुर, पनियहवा, नरकटियागंज और फारबिसगंज जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी. आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘अमृत भारत’ रेक के साथ चलने वाली यह ट्रेन रोजगार, शिक्षा और व्यापार के सिलसिले में बाहर जाने वाले लोगों के लिए लाइफलाइन साबित होगी. यह ट्रेन कम समय में लंबी दूरी तय कर यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करेगी।  39 घंटे की यात्रा के बाद पहुंचेगी न्यू जलपाईगुड़ी यह ट्रेन दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर अमृतसर से रवाना होगी। लगभग 39 घंटे की यात्रा के बाद सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचेगी। वहीं वापसी दिशा में ट्रेन संख्या 14663 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस 16 मई से प्रत्येक शनिवार को चलेगी। यह ट्रेन सुबह 8 बजे न्यू जलपाईगुड़ी से प्रस्थान करेगी और लगभग 42 घंटे बाद रात 2 बजकर 20 मिनट पर अमृतसर पहुंचेगी। मार्ग, ठहराव और कोच की जानकारी यात्रियों की सुविधा के लिए यह ट्रेन मार्ग में जलंधर सिटी, लुधियाना, अंबाला कैंट, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, रक्सौल, सीतामढ़ी, अररिया, बागडोगरा और सिलीगुड़ी सहित कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर दोनों दिशाओं में ठहराव करेगी। यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाएं इस अमृत भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए स्लीपर श्रेणी के 8 कोच और जनरल श्रेणी के 11 कोच उपलब्ध रहेंगे, जिससे आम यात्रियों को किफायती और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे इस नई सेवा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपनी यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक बनाएं। जानें क्या है समय-सारणी  ट्रेन संख्या 14664 अमृतसर से प्रत्येक गुरुवार को रवाना होगी और गोरखपुर के रास्ते शनिवार को न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचेगी. वापसी में ट्रेन संख्या 14663 न्यू जलपाईगुड़ी-अमृतसर अमृत भारत एक्सप्रेस प्रत्येक शनिवार को एनजेपी से खुलेगी. रेलवे सूत्रों का कहना है कि चंपारण और सीमांचल के रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है, जिससे हजारों यात्रियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। 

पंजाब में रेल रोको आंदोलन तीन दिन के लिए स्थगित, किसान यूनियनों का अहम फैसला

चंडीगढ़  पंजाब की मंडियों में गेहूं खरीद शुरू न होने से नाराज किसानों ने आज रेल रोको आंदोलन का एलान किया था। अब इसे तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि यह फैसला रणनीति के तहत लिया गया है।  पंधेर ने सरकार के रवैए पर नाराजगी जताते हुए कहा कि किसानों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बातचीत के बजाय टालमटोल की नीति अपना रही है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तो किसान फिर से आंदोलन को तेज करेंगे। पंधेर ने स्पष्ट किया कि किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो ‘रेल रोको’ आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि से फसल पहले ही प्रभावित है लेकिन सरकार खरीद को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। मंडियों में गेहूं खराब हो रहा है और कीमतों में कटौती की जा रही है। किसानों ने तुरंत खरीद शुरू करने बारदाने की कमी दूर करने और मंडियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी है। 

मध्यप्रदेश में रेल सेवाओं का हुआ ऐतिहासिक विस्तार, पिछले दो सालों में बड़ी उपलब्धि

मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं में हुआ अभूतपूर्व विस्तार रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर हुई 5,200 किमी देश का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क डबल इंजन सरकार का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा मध्यप्रदेश बेहतर रेल संपर्क से अगले दो सालों में अर्थ-व्यवस्था में आएगा बदलाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों का परिणाम, केंद्र से मिला सहयोग भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अथक प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में रेल सेवाओं और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। मध्यप्रदेश 'डबल इंजन सरकार' का एक शानदार उदाहरण बनकर उभरा है। अब प्रदेश भारत का चौथा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है और रेल कनेक्टिविटी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाले शीर्ष दस राज्यों में से एक है। रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़कर 5,200 किलोमीटर हो गई है, जो देश के कुल रेल नेटवर्क का 7.6% है। बेहतर रेल सेवाओं के माध्यम से देश के सभी हिस्सों तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मध्यप्रदेश के लिए आवंटित रेलवे बजट में 24 गुना वृद्धि हुई है। इस वर्ष 15,188 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो एक रिकॉर्ड है। पिछले वर्ष यह राशि 14,745 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2009 से 2014 तक, वार्षिक बजट केवल 632 करोड़ रुपये था। वर्तमान में 1,18,379 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न रेल परियोजनाएँ अलग-अलग चरणों में चल रही हैं। आर्थिक विकास में आयेगी तेजी मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केंद्र सरकार ने कई प्रमुख रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिससे राज्य को आर्थिक परिवर्तन की गति तेज करने में मदद मिली है। इस प्रगति का श्रेय केंद्र और राज्य सरकारों के बीच गहरी आपसी समझ और समन्वय को जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जबलपुर-गोंदिया रेलवे लाइन और इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन के दोहरीकरण, तथा सिंहस्थ कुंभ मेला : 2028 के संदर्भ में अन्य अधोसंरचना विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। बड़ी उपलब्धि यह है कि राज्य में रेल लाइनों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। अमृत भारत स्टेशन योजना में छह स्टेशनों – कटनी दक्षिण, नर्मदापुरम, ओरछा, सिवनी, शाजापुर और श्रीधाम – पर पुनर्विकास का काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा, पूरे राज्य में 74 स्टेशनों को अपग्रेड किया जा रहा है। यात्रियों के लिये 3,163 करोड़ रुपये की आधुनिक सुविधाएँ विकसित की जा रही है। वंदे भारत ट्रेनें यात्रियों के लिए वरदान साबित हुई हैं। इनमें भोपाल-नई दिल्ली, इंदौर-नागपुर, भोपाल-रीवा और खजुराहो-बनारस शामिल हैं। इंदौर और भोपाल में 2 मेट्रो ट्रेनें चल रही हैं, जिनसे शहरी आबादी को राहत मिली है। रायसेन ज़िले के उमरिया गाँव में 1800 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक रेल कोच निर्माण इकाई बनाई जा रही है। इससे 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। बड़े राज्यों में सीधा संपर्क जबलपुर-गोंदिया रेल लाइन के दोहरीकरण से महाकौशल क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा। इससे पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट में 5,200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया है। कान्हा नेशनल पार्क और धुआँधार जलप्रपात जैसे पर्यटन स्थलों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। इससे जबलपुर सहित मण्डला, सिवनी और बालाघाट जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा। कोयला, इस्पात, सीमेंट, खाद्यान्न और उर्वरक के परिवहन में तेजी आयेगी। उद्योगों के लिये मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर-मनमाड रेलवे लाइन 18,036 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत से बनाई जा रही है। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स से मध्यप्रदेश को बड़े आर्थिक लाभ की उम्मीद है। इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन धार, खरगौन और बड़वानी जिलों को सीधा लाभ होगा। कृषि और व्यापार बढ़ेगा। बाजरा और अनाज उत्पादक जिलों की पहुँच बड़े बाजारों तक बनेगी। उज्जैन और ओंकारेंश्वर जैसे धार्मिक महत्व के शहरों से सम्पर्क बढ़ेगा। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, 3 नई ट्रेनें शुरू की गई हैं। रीवा से पुणे (जबलपुर और सतना होते हुए), जबलपुर से रायपुर (नैनपुर, बालाघाट और गोंदिया होते हुए), और ग्वालियर से बेंगलुरु (गुना और भोपाल होते हुए)। ये सेवाएँ कनेक्टिविटी को और भी बेहतर बनाएँगी। केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 2 बड़े कमर्शियल हब-मुंबई और इंदौर – के बीच 309 किलोमीटर लंबी एक नई रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी है। इन कमर्शियल केंद्रों को जोड़ने के अलावा, यह प्रोजेक्ट महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के उन क्षेत्रों को भी जोड़ेगा जहाँ अभी रेलवे कनेक्टिविटी नहीं है। यह रेलवे लाइन महाराष्ट्र के 2 ज़िलों और मध्यप्रदेश के 4 ज़िलों से होकर गुज़रेगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 18,036 करोड़ रुपये है, और यह 2028-29 तक पूरा हो जाएगा। यह प्रोजेक्ट पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। एकीकृत योजना के माध्यम से, यह यात्रा को आसान बनायेगा। सामान और सेवाओं के निर्बाध प्रवाह को संभव बनाएगा। यह परियोजना महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के 6 जिलों को कवर करेगी। इसमें 30 नए स्टेशन बनाए जाएंगे। इससे बड़वानी जैसा आकांक्षी जिला भी रेलवे कनेक्टिविटी से लाभान्वित होगा। लगभग 1,000 गांवों और लगभग 30 लाख लोगों को रेलवे कनेक्टिविटी की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना जवाहरलाल नेहरू पोर्ट गेटवे पोर्ट और अन्य बंदरगाहों को पीथमपुर ऑटो क्लस्टर औद्योगिक केंद्र से भी जोड़ेगी। इस क्लस्टर में 90 बड़े उद्योग और 700 छोटे और मध्यम उद्यम हैं। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना मध्यप्रदेश के बाजरा उत्पादक जिलों को महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों से जोड़ेगी, जिससे इन उत्पादों का देश के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों तक परिवहन आसान हो जाएगा। नई परियोजनाओं की शुरूआत भोपाल-रामगंज मंडी रेललाइन से राजगढ़ और भोपाल का सीधा संपर्क राजस्थान में हो जायेगा। इस 276 किमी लाइन में से 169 किमी पर काम पूरा हो गया है। इससे व्यापार, खेती और आम नागरिकों को सुविधा होगी। इटारसी-भोपाल-बीना और इटारसी-नागपुर चौथी रेललाइन को मंजूरी मिल चुकी है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच जहां 145 कि.मी. नई रेल पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 29 कि.मी. प्रति वर्ष रहा वहीं 2014 से 2025 तक, 2,651 कि.मी. नई पटरियाँ बिछाई गईं, जिनका औसत 241 कि.मी. प्रति वर्ष रहा, जो कि लगभग 8 गुना ज़्यादा है। वर्तमान में, 4,740 किमी के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनकी अनुमानित लागत 89,543 करोड़ रूपये है। ये प्रोजेक्ट्स विकास के अलग-अलग चरणों में हैं। अब तक 2,092 किमी पर … Read more

नई रेल लाइन का 800 मीटर ट्रैक तैयार, जुलाई से शुरू होगी सेवा, कई गांवों को मिलेगी कनेक्टिविटी

इंदौर  इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के तहत बहुप्रतीक्षित टीही टनल का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर और धार विधायक नीना वर्मा ने निर्माणाधीन टनल में करीब 70 फीट नीचे उतरकर कार्यों का जायजा लिया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र की वर्षों पुरानी मांग है, जिसे तय समयसीमा में पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न करने पर विशेष जोर दिया। अधिकारियों ने दावा किया है कि आगामी जून-जुलाई तक टनल का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से धार के बीच सीधा रेल संचालन शुरू होने की संभावना है। हाल ही में पीथमपुर से धार के बीच टॉवर वैगन इंजन के माध्यम से सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। टनल में युद्धस्तर पर चल रहा काम रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 3 किमी लंबी टीही टनल में तेजी से कार्य जारी है। अब तक लगभग 800 मीटर हिस्से में ट्रैक और पटरी बिछाने का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य भी तेज गति से प्रगति पर है। फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती केंद्र सरकार की पहल पर क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। टीही टनल और इंदौर-दाहोद रेल परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है जो आने वाले समय में पूरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। कनेक्टिविटी से विकास को रफ्तार राज्यमंत्री ठाकुर ने कहा कि इंदौर-धार रेल लाइन शुरू होने से क्षेत्र में आवागमन आसान होगा और व्यापार-उद्योग को नई गति मिलेगी। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी खोलेगी। परियोजना की मुख्य विशेषताएं लंबाई और मार्ग: कुल लंबाई 204.76 किमी (183 किमी मप्र में, 22 किमी गुजरात में)। मार्ग: इंदौर-टीही-पीथमपुर-सागौर- गुणावद-धार-दाहोद। वर्तमान स्थिति : इंदौर-टीही (21 किमी) तक काम पूरा हो चुका है। टीही-धार के बीच 2.9 किमी लंबी सुरंग का काम पूरा हो चुका है, ट्रैक बिछाने की प्रक्रिया में है। रेलवे स्टेशन (धार) निर्माण अंतिम चरण में है। तकनीकी प्रगति: सागौर-धार खंड में ट्रैक बिछाने के लिए मशीन का उपयोग किया जा रहा है। फायदे: इस लाइन के शुरू होने से इंदौर और मुंबई के बीच की दूरी लगभग 55 किमी. कम हो जाएगी।

रोजाना चलाने की उठी मांग: चिरमिरी–रीवा एक्सप्रेस पर सांसद ज्योत्सना महंत का रेल मंत्री को पत्र

चिरमिरी–रीवा एक्सप्रेस को प्रतिदिन चलाने की मांग तेज सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेल मंत्री को लिखा पत्र मनेन्द्रगढ़/एमसीबी क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही अहम मांग को गंभीरता से उठाते हुए कोरिया लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर चिरमिरी–रीवा एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या 11751/11752) को प्रतिदिन संचालित करने की मांग की है। सांसद महंत ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि यह ट्रेन क्षेत्र के हजारों यात्रियों के लिए जीवनरेखा के समान है। कोविड-19 महामारी से पहले यह ट्रेन रोजाना चलती थी, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और व्यापारियों को बड़ी सुविधा मिलती थी। लेकिन वर्तमान में सीमित दिनों में संचालन होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन को जल्द से जल्द प्रतिदिन चलाने के निर्देश दिए जाएं, ताकि क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके और आवागमन सुगम हो। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने सांसद की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह मांग पूरी तरह जनभावनाओं से जुड़ी है। वहीं, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनेंद्रगढ़ शहर सौरव मिश्रा ने भी इसे आम जनता की आवाज बताते हुए कहा कि इस ट्रेन के नियमित संचालन से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में रेलवे बूस्ट: 7,470 करोड़ का बड़ा निवेश, सीएम साय ने सरकार का धन्यवाद किया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना विकास के लिए 7,470 करोड़ के ऐतिहासिक बजट प्रावधान किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आज रेलवे क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। वर्ष 2009–14 के दौरान वार्षिक औसत 311 करोड़ की तुलना में 2026–27 में 7,470 करोड़ का बजट प्रावधान लगभग 24 गुना वृद्धि का रिकॉर्ड है। वर्तमान में राज्य में 51,080 करोड़ के रेल कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए ट्रैक निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा सुरक्षा उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर में जगदलपुर को जोड़ने वाले रावघाट–जगदलपुर रेल प्रोजेक्ट का प्रारंभ होना बस्तर के जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अमूल्य उपहार है, जो क्षेत्रीय विकास की नई राह प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि परमलकसा–खरसिया कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में यात्री गाड़ियों की संख्या आने वाले समय में लगभग  दोगुनी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिनमें डोंगरगढ़ (फेज-I), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की 2 जोड़ी तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की 1 जोड़ी सेवाएँ यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सुविधा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 फ्लाईओवर/अंडरपास तथा ‘कवच’ जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना से रेल सुविधा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए हृदय से धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आमजन के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

कुसमुंडा-जटगा रेल लाइन पर चोरी, प्लेट और हैवी मशीनरी समेत 2 करोड़ का माल ले गए चोर

कोरबा   छत्तीसगढ़ में कबाड़ के अवैध कारोबार से जुड़े गिरोह लगातार सक्रिय होते जा रहे हैं। कोरबा जिले में पहले ब्रिज से भारी मात्रा में लोहा चोरी होने के बाद अब चोरों ने कुसमुंडा–जटगा के बीच निर्माणाधीन रेल लाइन को निशाना बनाया है। चोर रेलवे पटरी काटकर ले गए हैं और भारी मशीनरी को नुकसान पहुंचाते हुए करीब दो करोड़ रुपये के लोहे पर हाथ साफ कर दिया है। जानकारी के अनुसार गेवरा–पेंड्रा नई रेल लाइन परियोजना के तहत उरगा से पेंड्रा तक करीब 140 किलोमीटर में पटरी बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी दौरान कुसमुंडा से कुचेना जटगा के बीच लगभग 60 से 65 किलोमीटर के क्षेत्र में रेल पटरी, लोहे की प्लेटें और अन्य सामग्री गायब पाई गई। बताया जा रहा है कि चोरी की घटनाओं को अलग-अलग दिनों में अंजाम दिया गया। इससे पहले भी कोरबा जिले में ब्रिज से करीब 30 टन लोहे की चोरी की जा चुकी है, जिससे कबाड़ माफिया के संगठित नेटवर्क की आशंका और गहराती जा रही है। ताजा मामले में चोरों ने निर्माण स्थल पर खड़ी एक हाइड्रा मशीन के शीशे भी तोड़ दिए, जिससे मशीनरी को नुकसान हुआ है। रेल लाइन बिछाने का कार्य कर रही शिवाकृति प्राइवेट कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एस. कुमार जांगिड़ ने बताया कि बांकी मोंगरा और कटघोरा थाना क्षेत्र में चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। लगातार हो रही चोरी के बाद पूरे क्षेत्र में सर्वे कराया जा रहा है और संबंधित थानों में शिकायत दर्ज कराई गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि शिवाकृति प्राइवेट कंपनी द्वारा उरगा से पेंड्रा तक रेल लाइन निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इससे पहले उरगा इलाके में भी चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल ही में कुसमुंडा से लगभग 65 किलोमीटर दूर रेल लाइन निर्माण सामग्री चोरी होने की शिकायत मिली है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटनास्थलों का निरीक्षण किया जा रहा है। लगातार हो रही इस तरह की वारदातों से न केवल करोड़ों की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब संगठित कबाड़ गिरोह की तलाश में जुटी हुई है।

285 किमी का जबलपुर-गोंदिया रेल प्रोजेक्ट: नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कनेक्टिविटी में इजाफा

जबलपुर  मध्यप्रदेश के लिए एक अहम रेल प्रोजेक्ट की घोषणा हुई। केंद्र सरकार ने छोटी लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का ऐलान किया तो प्रदेशवासी खुश हो उठे। बड़ी लाइन से उनका आवागमन और आसान होनेवाला था। हालांकि उनकी खुशी तब निराशा में बदल गई जब ब्रॉड गेज के लिए करीब 13 साल में नाममात्र का काम हुआ। संयोगवश उसी समय प्रगति पोर्टल चालू हो गया जिससे रेलवे प्रोजेक्ट में आती सभी दिक्कतें दूर होती चली गईं। 2021 में ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पूरा हो गया और इसे राष्ट्र को सम​र्पित कर दिया गया। 285 किमी लंबी यह रेल लाइन मानो वरदान बन गई। इससे प्रदेशवासियों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई से कनेक्टिविटी बढ़ गई।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियां बताईं। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया। इस मौके पर उन्होंने प्रगति पोर्टल की अहमियत भी प्रतिपादित की। पोर्टल की वजह से अटके प्रोजेक्ट को रफ्तार मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इसके लिए रेलवे के जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट का जिक्र किया। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने का श्रेय प्रगति पो​र्टल को ही दिया। सीएस अनुराग जैन ने स्पष्ट कहा कि पोर्टल की वजह से ही अटके पड़े प्रोजेक्ट को रफ्तार मिल सकी थी। अन्यथा जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट 2028 या 2030 तक पूरा हो पाता। सीएस अनुराग जैन ने बताया कि जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज प्रोजेक्ट पर सन 2003 में काम शुरु हुआ। इसमें कई व्यवधान आए और 2016 तक नाममात्र का ही काम हुआ। प्रगति पोर्टल आया तो जबलपुर गोंदिया ब्रॉड गेज से संबंधित सभी समस्याएं तुरंत हल की जाने लगीं। इसके परिणामस्वरूप रेल लाइन के काम में तेजी आई और 2021 में इसका शुभारंभ कर दिया गया। सीएस ने कहा कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से देश में इन्फ्रास्ट्रक्चर के कामों को किस तरह गति मिली, इस उदाहरण से समझा जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी जबलपुर-गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि रेलवे की 285 किमी लंबी इस रेल लाइन से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और अधिक क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हो गया है। इतना ही नहीं, इस प्रोजेक्ट से प्रदेश के जबलपुर, बालाघाट, मंडला, सिवनी जिलों की नागपुर, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नई जैसे प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी भी बढ़ गई है। अब जबलपुर से गोंदिया, कोलकाता और चेन्नई के लिए सीधी ट्रेन उपलब्ध हैं।

नई रेललाइन तैयार, रामगंज मंडी-भोपाल ट्रैक पर ट्रायल रन की तारीख तय, जल्द शुरू होंगी ट्रेनें

भोपाल  मध्यप्रदेश की बहुप्रतीक्षित रामगंज मंडी- भोपाल रेल लाइन (bhopal ramganj mandi railway line) का काम अब अपने निर्णायक चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। करीब 3035 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में अब काम की रफ्तार काफी तेज है। रेलवे ने मार्च-2026 तक अलग-अलग सेक्शन में ट्रैक बिछाने और ट्रायल रन शुरू करने की डेडलाइन तय कर दी है। जिसके तहत जिले में खिलचीपुर से आगे राजगढ़ और ब्यावरा के साथ ही सोनकच्छ तक मार्च तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक तैयार होगा। केवल सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर वाला हिस्सा ही इसके बाद शेष रह जाएगा। जिसे भी सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। राजस्थान के हिस्से का काम पूरा बता दें कि राजस्थान में काफी पहले काम पूरा हो चुका है, लेकिन मप्र की सीमा में प्रशासकीय और रेलवे के ढीले रवैये के चलते काम पिछड़ा है। राजगढ़ जिले की बात करे यहां जमीन अधिग्रहण के कारण भी काम में देरी हुई है। यहीं कारण है कि वर्ष-2022 में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट अभी तक अधूरा है। हालांकि अब काम निर्णायक मोड में पहुंचता नजर आ रहा है। अर्थवर्क नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड़कर लगभग सभी जगह पूरा हो चुका है। अब केवल ट्रैक बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण का काम शेष है। खिलचीपुर और ब्यावरा में बिछीं पटरियां कोटा मंडल में आने वाले रामगंज मंडी से ब्यावरा का काम मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। खिलचीपुर से करीब 12 किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही ब्यावरा राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं भोपाल मंडल में ब्यावरा से आगे सोनकच्छ सेक्शन के लिए भी मार्च की डेडलाइन तय की है। जिसके तहत ब्यावरा से करीब चार किमी आगे तक पटरियां बिछाई जा चुकी है। उधर श्यामपुर से आगे अब कुरावर तक भी ट्रैक तैयार होने वाला है। ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रैक तैयार होने के बाद करीब 80 फीसदी काम भोपाल मंडल का भी पूरा हो जाएगा। केवल नरसिंहगढ़ के बीच का करीब 22-25 किमी सेक्शन में ही काम अधिक बाकी है। राजगढ़ जिले में रहेंगे ये स्टेशन रेल लाइन पर जिले में ब्यावरा जंक्शन सहित छह स्टेशन रहेंगे। राजस्थान तरफ से खिलचीपुर के भोजपुर से एंट्री करने वाले ट्रैक पर पहला स्टेशन भोजपुर ही है। इसके बाद खिलचीपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर शामिल है। इसके आगे श्यामपुर होते हुए हिरदाराम और भोपाल लाइन जुड़ेगी। ट्रैक की बात करे तो खिलचीपुर से राजगढ़ और एनएच-52 के सामानांतर और राजगढ़-ब्यावरा के बीच हाईवे को क्रॉस कर ब्यावरा पहुंचेगी। जहां से ब्यावरा से पांच किमी आगे मक्सी-रुठियाई ट्रैक के सामांतर और फिर ट्रैक पूर्व में अलग होकर करीब सात सौ मीटर आगे देवास हाईवे को क्रॉस करेगी, इसके बाद एनएच-46 के साइड में होते हुए कुरावर के पास फिर फोरलेन क्रॉस करेगी भोपाल रेल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी ने बताया कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक तैयार कर लिया जाएगा। इस सेक्शन में अर्थवर्क लगभग पूरा हो चुका है। पटरियां बिछाने के साथ ही विद्युतीकरण किया जा रहा है। मार्च तक 80 प्रतिशत हमारा काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद केवल एक ही सेक्शन का काम रह जाएगा। जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करा लिया जाएगा। कोटा मंडल के ट्रैक इंजीनियर गौरव मिश्रा का कहना है लगभग 90 फीसदी काम हमारा पूरा हो चुका है। अब केवल राजगढ़ ब्यावरा के बीच ट्रैक और कुछ हिस्सा खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच बाकी है। जिसे भी मार्च तक पूरा कराने की डेडलाइन तय है।

2500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीसरी रेल लाइन निर्माण में तेजी, 361 पुल और 4 टनल होंगे शामिल

 इटारसी भोपाल-इटारसी के बाद अब इटारसी-आमला के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। आमला से इटारसी के बीच 130 किमी क्षेत्र में तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद आगे काम होगा। 40 गांवों से ली गई 16 हेक्टेयर जमीन नर्मदापुरम और बैतूल जिले में जमीन अधिग्रहण में हुई देरी की वजह से इटारसी-आमला (Itarsi-Amla third railway line) सेक्शन में निर्माण कार्य देरी से शुरू हुआ। तीसरी रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए बैतूल जिले के 3 तहसीलों के 40 गांवों में रहने वाले 290 किसानों की 16.036 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है। तीसरी रेलवे लाइन का काम पूरा होने के बाद रेल यातायात ओर बेहतर होने की उम्मीद है। खास बात यह भी है कि इस रेल रूट पर घाट सेक्शन होने की वजह से भी यातायात में परेशानी आती है। तीसरी लाइन बनने के बाद राहत मिलने की उम्मीद है। चार स्थानों पर बनेंगे टनल तीसरी लाइन के लिए मरामझिरी-धाराखौह घाट सेक्शन में चार स्थानों पर कुल 1.40 किमी लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इटारसी से नागपुर के बीच 267 किलोमीटर की लंबाई में तीसरी लाइन बिछाई जाना है। जिसके बीच 27 रेलवे स्टेशन आएंगे। साथ ही 361 पुल-पुलियाओं का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट पर खर्च होंगे 2525 करोड़ से अधिक भोपाल से इटारसी तक तीसरी लाइन बिछाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे द्वारा इटारसी से नागपुर के बीच तीसरी लाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। प्रोजेक्ट पर 2525.73 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। वर्तमान में जो रेलवे लाइन मौजूद है, उसके समानांतर ही तीसरी लाइन बिछाने के लिए मिट्टी का बेस बनाया जा रहा है। इसलिए जरूरी तीसरी लाइन वर्तमान में रेलवे के पास नागपुर-इटारसी सेक्शन में केवल दो लाइन हैं। इन लाइनों से यात्री और और गुड्स ट्रेनों का संचालन किया जाता है। यात्री गाड़ियों को निकालने के लिए अक्सर गुड्स ट्रेनों को घंटों तक कहीं भी रोक दिया जाता है। इन्हीं समस्याओं के चलतेतीसरी लाइन बिछाई जा रही है. ताकि यात्री ट्रेनों के लिए गुड्स ट्रेनों को न रोकना पड़े और वे भी सही समय पर पहुंच सके। (MP News) बेहतर होगा रेल यातायात… रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य हो रहे हैं। भोपाल-इटारसी के में तीसरी लाइन के बाद इटारसी से नागपुर के बीच भी तीसरी रेल लाइन का काम कराया जा रहा है। – नवल अग्रवाल, पीआरओ रेल मंडल भोपाल