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वाटरशेड योजना बनी किसान छबी लाल की समृद्धि का आधार

  रायपु  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत संचालित वाटरशेड विकास परियोजनाओं ने छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में कई किसानों की किस्मत बदल दी है। ये परियोजनाएं जो वर्षा जल संरक्षण और भूमि की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, छोटे और सीमांत किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग बन गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित वाटरशेड विकास योजना आज अनेक परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। धमतरी जिले के बेलौदी (विकासखंड-मगरलोड) निवासी एक छोटे से कृषक श्री छबी लाल इस योजना के सफल क्रियान्वयन की एक जीवंत और प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। पारंपरिक खेती से आधुनिक सब्जी उत्पादन तक का सफर पूर्व में श्री छबी लाल सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भरता और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण उनकी आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहती थी। वाटरशेड योजना के अंतर्गत आजीविका मद से प्राप्त सहयोग और कृषि विशेषज्ञों के तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने अपनी लगभग 1.5 एकड़ भूमि में सब्जी उत्पादन का एक सफल और उन्नत मॉडल विकसित किया।  बदलाव की शुरुआत       आज वे अपने खेत में निम्नलिखित फसलों की सफल खेती कर रहे हैं, जिनमें सब्जियाँ बरबट्टी, भिंडी, करेला, भाटा (बैंगन) और गिल्की शामिल हैं। जल संरक्षण, नमी संरक्षण और बहुफसली चक्र का समावेश किया है। आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर जीवन स्तर           योजना के तहत मिली प्रोत्साहन राशि और जल प्रबंधन के कार्यों से खेत की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। श्री छबी लाल अब स्थानीय बाजारों में ताजी सब्जियों की निरंतर आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और जीवन स्तर में व्यापक सुधार आया है। भारत सरकार के सचिव ने थपथपाई पीठ          हाल ही में धमतरी प्रवास के दौरान भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (भूमि संसाधन विभाग) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने स्वयं श्री छबी लाल के प्रक्षेत्र (खेत) का अवलोकन किया। वाटरशेड योजना केवल जल एवं भूमि संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।         किसान छबी लाल की यह सफलता साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सही तकनीकी मार्गदर्शन और किसान की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण विकास की एक नई और सुनहरी तस्वीर गढ़ी जा सकती है।

संघर्ष से सफलता तक! नक्सल मुक्त क्षेत्र में आधुनिक खेती से गोपाल एर्रागोला ने बदली किस्मत

संघर्ष से समृद्धि- नक्सल मुक्त क्षेत्रों में आधुनिक खेती से कृषक गोपाल एर्रागोला ने रची सफलता की नई इबारत रायपुर नक्सल मुक्त क्षेत्रों (जैसे छत्तीसगढ़ के बस्तर, सुकमा, नारायणपुर) में अब पारंपरिक खेती की जगह आधुनिक और लाभकारी खेती (केला, सुगंधित पौधे) ले रही है, जिससे किसानों की आय दोगुनी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्रों की मदद से वैज्ञानिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों का उपयोग कर किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और कृषि अब एक सुरक्षित आजीविका बन रही है              बीजापुर जिले के ग्राम फुतकेल निवासी कृषक गोपाल एर्रागोला ने कठिन भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच आधुनिक एवं बहुफसली खेती अपनाकर जिले के किसानों के लिए एक नई मिसाल पेश की है। जो गोपाल कभी केवल वर्षा आधारित धान की खेती पर निर्भर थे, आज वे विविध फसलों और एकीकृत कृषि के जरिए लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। चुनौती से अवसर तक का सफर                नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण पहले खेती करना गोपाल के लिए कभी एक बड़ी चुनौती थी। कृषि विभाग के अधिकारियों ने जब उनके खेत का निरीक्षण किया, तो पाया कि तालपेरू नदी के किनारे स्थित होने के कारण उनकी भूमि व्यावसायिक फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। जिला प्रशासन की पहल पर नदी किनारे विद्युत विस्तार कराया गया, जिससे सिंचाई की बाधा दूर हुई। तकनीक और फसल चक्र से बढ़ी आय             सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद कृषि विभाग और आत्मा (।ज्ड।) योजना के मार्गदर्शन में गोपाल ने पारंपरिक खेती छोड़कर फसल चक्र अपनाया। उन्होंने धान के साथ-साथ रबी फसलों में मक्का, मूंगफली और मिर्च की खेती कर रहे हैं। एकीकृत कृषि के रूप में सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मछली पालनकरते हैं। विशेष रूप से मिर्च के उत्पादन ने उनकी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव लाया। शासन की योजनाओं का मिला संबल           गोपाल की सफलता में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने श्बैकबोनश् का काम किया। किसान क्रेडिट कार्ड (ज्ञब्ब्)रू बीज, उर्वरक और नगद सहायता, शाकम्भरी योजना से डीजल पंप और नेक स्प्रेयर पंप की प्राप्ति हुई। सौर सुजला योजना (क्रेडा) से सोलर प्लेट्स के माध्यम से निर्बाध ऊर्जा की आपूर्ति हो रही है। नियद नेल्ला नार योजना से धान बीज, उर्वरक और जुताई हेतु आर्थिक मदद, माइक्रो इरीगेशनके माध्यम से टपक (क्तपच) सिंचाई से जल प्रबंधन, किसान सम्मान निधि के रूप में प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता मिल रही है। प्राकृतिक खेती की ओर कदम              गोपाल का चयन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के कलस्टर में भी हुआ है। उन्होंने एक एकड़ भूमि में जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों का प्रयोग कर लागत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि की है। आय का आंकड़ा और सामाजिक प्रभाव             खेती, पशुपालन और मछली पालन के समन्वित प्रयासों से गोपाल को वर्ष में 3 लाख 93 हजार 750 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई है। आज उनकी सफलता को देखकर गांव के अन्य युवा और किसान भी वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित हो रहे हैं। कृषक गोपाल एर्रागोला का कहना है कि अधिकारियों के सतत मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं ने मेरी खेती और जीवन के प्रति नजरिया बदल दिया। आज मेरे परिवार न केवल आर्थिक रूप से सशक्त है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा भी बना है।

दो माह में भारत सरकार के अधिकारियों का तीसरा दौरा, सचिव ने की सराहना

रायपुर छत्तीसगढ़ का स्मार्ट रजिस्ट्री मॉडल अब देशभर के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है। भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग (Department of Land Resources) के सचिवनरेंद्र भूषण ने राज्य के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए गए तकनीकी नवाचारों और नागरिक-केंद्रित सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी है। भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा पिछले दो माह में यह तीसरा दौरा है, जो राज्य में लागू स्मार्ट रजिस्ट्री प्रणाली, ऑटो म्यूटेशन और डिजिटल सेवाओं के प्रति बढ़ती राष्ट्रीय रुचि को दर्शाता है। दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सचिवनरेंद्र भूषण ने मंत्रालय महानदी भवन में पंजीयन विभाग की विस्तृत समीक्षा की। इस अवसर पर भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिवनितिन खाडे तथा निदेशकश्याम कुमार भी उपस्थित थे। समीक्षा बैठक में सचिव पंजीयन भुवनेश यादव तथा महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने विभाग द्वारा पिछले दो वर्षों में किए गए प्रमुख सुधारों और नवाचारों का प्रस्तुतीकरण दिया। प्रस्तुतीकरण में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, पंजीयन प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार से संबंधित पहलों की जानकारी दी गई। साथ ही विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे “नेक्स्ट जनरेशन रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म” की रूपरेखा और भावी कार्यप्रणाली से भी अवगत कराया गया। सचिवनरेंद्र भूषण ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा राज्य के नागरिकों को सर्वोत्तम सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की विशेष सराहना की। इसके पश्चात उन्होंने सीबीडी, नवा रायपुर अटल नगर स्थित स्मार्ट उप पंजीयक कार्यालय का निरीक्षण किया और ऑटो म्यूटेशन से एकीकृत एंड-टू-एंड डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया का अवलोकन किया। अधिकारियों ने उन्हें संपूर्ण पंजीयन प्रक्रिया, डिजिटल व्यवस्थाओं और नागरिक सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सचिवभूषण ने कहा कि पारदर्शी, सरल और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ की यह पहल अत्यंत प्रभावी है। उन्होंने कहा कि राज्य का स्मार्ट ऑफिस मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की नीति पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कार्यालय में नागरिकों के लिए उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-अनुकूल वातावरण की भी विशेष सराहना की। भारत सरकार के सचिव ने विश्वास व्यक्त किया कि तकनीक आधारित रजिस्ट्री सेवाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश का मार्गदर्शन करेगा।

जनजातीय गांवों तक पहुंचेगी योजनाओं की सुविधा 18 से 25 मई तक चलेगा “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 18 से 25 मई 2026 तक “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के 1544 तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान  के 6691 गांवों में संचालित होगा। मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश के अनुसार रायपुर को छोड़कर प्रदेश के सभी जिलों में अभियान के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, पोषण और पेयजल जैसी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाएगा। अधिकारी गांवों में पहुंचकर जन सुनवाई करेंगे तथा “आदि सेवा केन्द्रों” में शिकायतों का निराकरण किया जाएगा। अभियान में सिकल सेल और टीबी जांच के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। डिजिटल मॉनिटरिंग के तहत प्रतिदिन फोटो, वीडियो और लाभार्थियों के बयान “आदि प्रसारण” पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। शासन ने जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों, एनएसएस, एनसीसी और स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान का समन्वय “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” से भी किया जाएगा।

कोसमी में सफल बोर खनन से दूर हुआ जल संकट, ग्रामीणों के चेहरे खिले!

​रायपुर  प्रदेश की प्यास बुझाने वाले गंगरेल बांध के डूबान क्षेत्र में आने वाले गांवों के लिए राहत भरी बड़ी खबर है। जल जीवन मिशन के तहत शासन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की सजगता के चलते ग्राम कोसमी में किया गया नया बोर खनन पूरी तरह सफल रहा है। भीषण गर्मी के इस दौर में जहां भूजल स्तर गिरने से कुछ व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं, वहीं शासन के त्वरित एक्शन ने ग्रामीणों की इस बड़ी चिंता को दूर कर दिया है। ​त्वरित एक्शन से मिली बड़ी राहत    ​ हाल ही में भूजल स्तर में आई गिरावट को देखते हुए पीएचई विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाई। कोसमी और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए विभाग द्वारा युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया। इसी कड़ी में कोसमी में किया गया नया बोर खनन पूरी तरह सफल रहा, जिससे अब गांव में प्रचुर मात्रा में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है। ​'जल जीवन मिशन' के दावों को मिला बल      ​ डूबान क्षेत्र के ग्राम कोसमी, कोड़ेगांव-आर और तिर्रा जैसे गांवों में आ रही आंशिक दिक्कतों को दूर करने के लिए प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। कोसमी में सफल बोर खनन के बाद अब पाइपलाइन के जरिए घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। ​अधिकारियों का कहना है कि डूबान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और गिरते वॉटर लेवल को देखते हुए शासन स्तर पर विशेष योजना बनाई गई है। कोसमी की सफलता के बाद अब तिर्रा और कोड़ेगांव में भी बंद पड़े हैंडपंपों को सुधारने और नए विकल्पों पर तेजी से काम चल रहा है। किसी भी ग्रामीण को पानी के लिए परेशान नहीं होने दिया जाएगा। ​ग्रामीणों ने जताया आभार       कोसमी में पानी की सफल सुगबुगाहट और नए बोर से पानी निकलते देख ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी तकलीफ को समझा और गर्मी के चरम पर होने से पहले ही पानी की पुख्ता व्यवस्था कर दी। इस सफल प्रयास से अब आने वाले दिनों में क्षेत्र के अन्य गांवों में भी पानी की किल्लत पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद जाग गई है।

हजारों पंचायतों की बदली तस्वीर

रायपुर छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है। महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है।  31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं। राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है।  कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके। पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

रायपुर  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने आज संभागीय मुख्यालय दुर्ग में लोक निर्माण विभाग के दुर्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता तथा कार्यपालन अभियंताओं की बैठक लेकर भवनों, सड़कों और पुलों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने दुर्ग और पाटन में तीन कार्यस्थलों पर जाकर कार्यों का निरीक्षण भी किया। श्री बंसल ने बैठक में अधिकारियों को भविष्य की जरुरतों के अनुरूप सभी सड़क खंडों पर फ्लाई-ओवर्स की समग्र योजनाओं के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्ग परिक्षेत्र के लोक निर्माण विभाग के सभी संभागों में प्रगतिरत कार्यों में तेजी लाते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी बैठक में मौजूद थे। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के 15 दिनों के भीतर चयनित एजेंसी से अनुबंध की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता और समय-सीमा में काम सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय अधिकारी अपने सुव्यवस्थित और समयबद्ध कार्यों से नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच विभाग की अच्छी छवि बनाएं। सभी कार्यों को पूरी जवाबदेही, सक्रियता और गंभीरता से अंजाम दें। सचिव श्री बंसल ने सभी अधिकारियों को मुख्यालय में रहकर निर्माणाधीन कार्यों की पुख्ता और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र के सड़कों की स्थिति की पूरी जानकारी रखते हुए परफार्मेंस गारंटी वाली सड़कों में सुधार की जरूरत पर संबंधित ठेकेदारों से तत्काल मरम्मत कराने को कहा। उन्होंने मैदानी स्तर पर भू-अर्जन में आ रही बाधाओं से वरिष्ठ कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि निराकरण की कार्यवाही उच्च स्तर पर यथासमय की जा सके। उन्होंने इनके निराकरण में किसी भी प्रकार की देरी नहीं करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने शासकीय भवनों के निर्माण के लिए भूमि की उपलब्धता एवं उपयोगिता के अनुरूप हॉरिजांटल की जगह वर्टिकल निर्माण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक डिजाइनों और नई तकनीकों से निर्माण की कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने भवनों के निर्माण के दौरान निर्माण सामग्री से लेकर टाइल्स, पुट्टी और पेंट अच्छी गुणवत्ता का उपयोग करने को कहा। उन्होंने भूजल स्तर को रिचार्ज करने सभी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था के निर्देश दिए। कार्यस्थलों का दौरा कर कार्यों की देखी प्रगति  लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने दुर्ग के साइंस कॉलेज में बन रहे 750 सीटर आडिटोरियम के कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए जल्द इसका निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने जेल तिराहा से मिनीमाता चौक पुलगांव तक के सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव ने पाटन शासकीय कॉलेज के निर्माणाधीन भवन के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने यहां नए भवन में क्लास-रुम, लैब, शौचालय इत्यादि का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कॉलेज प्रबंधन से मिलकर विद्यार्थियों की जरूरतों और उपयोगिता के मुताबिक सभी कार्यों को संपादित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे कॉलेज परिसर को हरा-भरा, सुंदर और सुव्यवस्थित करने को कहा।

अड़ेंगा शिविर ग्रामीणों के लिए रहा लाभकारी

रायपुर  सुशासन तिहार अंतर्गत आज शुक्रवार को कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत ग्राम अड़ेंगा में आयोजित शिविर में जिले के प्रभारी मंत्री एवं प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य आबकारी व श्रम विभाग मंत्रीलखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभारी मंत्री ने शिविर में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री वितरित किए और लगभग 01 करोड़ 06 लाख रूपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इस अवसर पर कांकेर सांसदभोजराज नाग, केशकाल विधायकनीलकंठ टेकाम सहित कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना और स्थानीय जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।  शिविर में विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर कुल 210 आवेदन प्राप्त हुए। प्रभारी मंत्री ने 31 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र प्रदाय किया और दसवीं बारहवीं के 05 मेधावी विद्यार्थियों क़ो सम्मानित किया। साथ ही 12 श्रम पंजीयन कार्ड, 30 आधार कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 25 हितग्राहियों को चाबी, 15 जॉब कार्ड, 17 जाति प्रमाण पत्र, 30 लखपति दीदी प्रमाण पत्र, 06 किसान क्रेडिट कार्ड, 24 आयुष्मान कार्ड, 10 जन्म प्रमाण पत्र, 20 डिजिटल किसान कार्ड, राजस्व विभाग द्वारा 15 जाति प्रमाण पत्र और 10 निवासी प्रमाण पत्र, 11 राशन कार्ड, उद्यानिकी विभाग द्वारा 200 पौधों का वितरण, समाज कल्याण विभाग द्वारा 04 मोटराईज्ड सायकल, मत्स्य पालन विभाग द्वारा 01 मत्स्य जाल, 04 जन्म प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय परिवार सहायता पेंशन 03 को और क्रेडा विभाग द्वारा 01 हितग्राही को सौर सुजला योजना से लाभान्वित किया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 128 व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच की गई।  शिविर को संबोधित करते हुए मंत्रीदेवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णुदेव साय के नेतृत्व में इन दो वर्षों में जन समस्याओं के समाधान हेतु सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी को अल्प समय में पूरा किया। महतारी वंदन योजना, कृषि उन्नति योजना जैसे जनमानस के कल्याण हेतु कई योजनाएं संचालित की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाएं शिविर के माध्यम से आपके द्वार तक पहुंच रही है। नागरिकों के समस्याओं का त्वरित निराकरण का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार ने बस्तर क्षेत्र में शांति बहाल कर विकास के मार्ग में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।  सांसदभोजराज नाग ने कहा कि मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय सुशासन तिहार अंतर्गत गांव गांव में आयोजित शिविर में जाकर जनता से संवाद कर उनकी समस्याएं और मांगो को सुन रहे हैं और त्वरित निराकरण भी की जा रही है। प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने विकसित भारत की और मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की संकल्पना की है इसमें सभी की सहभागिता जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिविर में ज़रूरतमंद हितग्राही को अधिक से अधिक लाभ उठाएं।  विधायकनीलकंठ टेकाम ने कहा कि प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय गांव, महिला, किसान और गरीब परिवार के हित की चिंता करती है और उनके विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा क्षेत्र के सुदूर गांवों में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे यहां विकास के साथ साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान से गांव गांव तक स्वास्थ्य सेवा पहुंच रही है। सुशासन तिहार के माध्यम योजना गांव गांव तक पहुंच रहा है और शिविर में आवेदनों का निराकरण किया जा रहा है। कार्यक्रम में पूर्व विधायकसेवकराम नेताम ने भी संबोधित किया।  इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नंदनी पोटाई, नगर पंचायत अध्यक्षबिहारी लाल शोरी,धीरेन्द्र बघेल,राजकिशोर राठी,लंबोदर सलाम सहित सरपंचभूपेन्द्र ध्रुव, जिला पंचायत सीईओअविनाश भोई, एसडीएम सुश्री आकांक्षा नायक, तहसीलदारगणेश सिदार उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री श्विष्णु देव साय ने उच्च स्तरीय बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बस्तर में आयोजित होने वाली मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। यह महत्वपूर्ण बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित होगी, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।  बैठक के दौरान अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से राज्य सरकार द्वारा परिषद की बैठक में उठाए जाने वाले विभिन्न विषयों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। मुख्यमंत्री ने सभी बिंदुओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्रीसाय ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपते हुए निर्देश दिए कि आयोजन की तैयारियों में किसी प्रकार की कमी न रहे और सभी व्यवस्थाएं गंभीरता एवं समन्वय के साथ सुनिश्चित की जाएं।       मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में मध्य क्षेत्रीय परिषद के राज्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह परिषद देश की ऐसी क्षेत्रीय परिषद है जहां सदस्य राज्यों के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है, जो आपसी सहयोग और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिषदें राज्यों तथा केंद्र और राज्यों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद, सहयोग और समन्वय को मजबूत करने का प्रभावी मंच बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “मजबूत राज्य ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण करते हैं” और इसी भावना के साथ क्षेत्रीय परिषदें विकास, प्रशासनिक समन्वय और राष्ट्रीय एकता को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इन परिषदों ने राज्यों के बीच स्वस्थ सहयोग और विकासोन्मुखी सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।                  मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि बस्तर में इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना के बाद इस स्तर की राष्ट्रीय बैठक का आयोजन यह दर्शाता है कि राज्य सरकार क्षेत्र के विकास और नई संभावनाओं को लेकर पूरी तरह संकल्पित है। मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि प्रधानमंत्रीनरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह के नेतृत्व में नक्सल उन्मूलन से क्षेत्र में शांति स्थापित हुई है तथा अब बस्तर विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंद्रावती की गोद से बस्तर विकास की नई गाथा लिखेगा और मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की अहम मुलाकात

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा रायपुर, भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया। राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन            बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है। पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री           वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास          छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।          बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।