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26 सितंबर को सुनाई जाएगी अहम तारीख, सिद्धू मूसेवाला मामले में कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश

मानसा पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में अदालत ने जेल प्रशासन को आरोपियों को फिजिकल तौर पर पेश करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने 26 सितंबर को मामले के 6 आरोपियों को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, आज मानसा की सेशन कोर्ट में इस केस की सुनवाई हुई, जिसमें सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह की गवाही शुरू हुई। इस दौरान वे थोड़े भावुक भी हो गए। हत्याकांड के आरोपियों की पहचान के बारे में बात करते हुए बलकौर सिंह ने कहा कि उनकी नजर कमजोर है और वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपियों की पहचान नहीं कर सकते। उन्होंने आरोपियों को अदालत में सामने पेश करने की अपील की। इस अपील को स्वीकार करते हुए अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों को फिजिकली पेश किया जाए। इसके लिए 26 सितंबर की तारीख तय की गई है। इस दौरान संदीप केकड़ा, अंकित सिरसा और दीपक मुंडी समेत 6 आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

महिला ने उठाया शिवलिंग का मामला, HC में जज ने किया चौंकाने वाला सवाल

पंजाब  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू धार्मिक प्रतीक शिवलिंग के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। याचिका में एक निजी कंपनी द्वारा शिवलिंग को ट्रेडमार्क के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजिव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में अत्यधिक संवेदनशील हो रही हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा, “आप इन चीजों को लेकर इतने संवेदनशील क्यों हो रही हैं? मैंने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। यह सालों से चल रहा है। अचानक यह धार्मिक भावनाओं का उफान क्यों? आप जरूरत से जायादा संवेदनशील हो रही हैं।” याचिकाकर्ता मेघना खुल्लर ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि शिवलिंग जैसे पवित्र प्रतीक का व्यावसायिक उपयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और इसे रोकने के लिए हस्तक्षेप होना चाहिए। इसपर कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से ही अपील मंच और कानूनी प्रक्रिया मौजूद है। कोर्ट ने कहा, “इन ब्रांड्स के लोगो होते हैं, जिन्हें अलग-अलग कानूनों के तहत सुरक्षा मिली होती है। आपको वहीं जाना चाहिए। कोर्ट नहीं आना चाहिए।” एएसजी सत्य पाल जैन ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार पहले ही याचिकाकर्ता से कथित व्यावसायिक उपयोग की जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कोर्ट ने पाया कि शिकायत पहले से ही संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है और उस पर कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में यह कोर्ट उस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करना चाहेगा। इस आधार पर याचिका खारिज की जाती है।” हालांकि, हाईकोर्ट ने शिकायत का हल नहीं निकलने की स्थिति में याचिकाकर्ता को पुनः कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी है।  

किसानों के लिए बड़ी राहत: पंजाब में शुरू हुई फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना

पंजाब  पराली जलाने की समस्या पर्यावरण के लिए गंभीर बन जाती है. इस समस्या से निपटने और सतत खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया गया है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने पूरे प्रदेश के सहकारी बैंकों के जरिए से संशोधित फसल अवशेष प्रबंधन ऋण योजना की शुरुआत की है. पैदा होंगे नए रोजगार के अवसर इस योजना के जरिए किसानों और सहकारी सभाओं को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी खरीदने में सहायता मिलेगी. इससे वायु प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी. इसी के साथ ग्रामीण समुदायों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इस पहल को वित्त आयुक्त सहकारिता सुमेर सिंह गुरजर और सहकारी सभाओं के रजिस्ट्रार गिरीश दियालन की अगुवाई में मंजूरी मिली है, जिसमें कृषि क्षेत्र में सहकारी सभाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की गई है. अग्रिम राशि के रूप में दिया जाएगा 10 प्रतिशत इस योजना की मुख्य विशेषता है कि प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं और बहु-उद्देश्यीय सहकारी सभाओं में मशीनरी पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिल सकेगी. इसमें अधिकतम 24 लाख रुपये के लिए पात्रता का प्रावधान है. इस बारे में हुई एक मीटिंग में बताया गया कि अग्रिम राशि के रूप में ऋण की 10 प्रतिशत राशि दी जाएगी. व्यक्तिगत किसान मशीनरी पर 50 प्रतिशत सब्सिडी के पात्र होंगे. इसी के साथ ऋण की राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा उन्हें स्वयं उठाना पड़ेगा. यह एक ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है. इससे आधुनिक उपकरणों तक पहुंच आसान होगी, इसी के साथ फसल अवशेष के प्रभावी प्रबंधन को भी सुनिश्चित करेगा, जिससे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी. पंजाब सरकार बायो-ऊर्जा प्लांटों में फसल अवशेष का उपयोग भी प्रोत्साहित कर रही है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी के साथ प्रदेश की हरित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.  

स्वास्थ्य में सुधार: पंजाब के मुख्यमंत्री मान डिस्चार्ज

चंडीगढ  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को बृहस्पतिवार को मोहाली के फोर्टिस अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मान को पांच सितंबर को थकान और हृदय गति सामान्य नहीं होने की शिकायत के बाद मोहाली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रशासन ने बुधवार को कहा था कि मान की हालत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अस्पताल से बाहर निकलते समय मुख्यमंत्री ने लोगों की ओर हाथ हिलाया और हाथ जोड़कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री ने सोमवार को अस्पताल से ही ‘वीडियो कॉन्फ्रेंस’ के माध्यम से मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता की थी। मान स्वास्थ्य कारणों से आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर भी नहीं जा सके थे।

स्कूल बंद: पंजाब के 28 स्कूलों में छुट्टियों का आदेश जारी, जानें कब से कब तक

कपूरथला  डिप्टी कमिश्नर अमित कुमार पांचाल ने बाढ़ और भारी बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी (सैकेंडरी व एलिमैंट्री) कपूरथला से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर, जिला कपूरथला के 28 सरकारी स्कूलों को 11 सितम्बर और 12 सितम्बर 2025 को बंद रखने के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि कपूरथला जिले में स्थित इन स्कूलों जैसे जी.एच.एस. बाउपुर जदीद, जी.एम.एस. मंड इंदरपुर, जी.एच.एस. अमृतपुर राजेवाल, जी.एच.एस. लक्ख वरियाह, जी.एम.एस. बाजा, जी.एच.एस. पंडोरी, जी.एम.एस. चकोकी, जी.एम.एस. मियानी बाकरपुर, जी.एम.एस. हम्बोवाल, जी.एम.एस. मलकपुर, जी.एम.एस. हुसैनपुर, जी.एम.एस. भेट, जी.एच.एस. काला संघिया गर्ल्स, चिरागवाला, कम्मेवाला, कोठे काला सिंह, एस.पी.आर.एस. कोठे चेता सिंह, लक्ख वरियाह, आहली खुर्द, बाउपुर, नूरोवाल, मुल्लाकलां, मुक्तरामवाला, रणधीरपुर, धक्कड़ां, कूका, मंड सरदार साहिब वाला और ताजपुर आदि सरकारी स्कूल अगले दो दिनों तक बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह आदेश जिला शिक्षा अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट और सिफारिशों के आधार पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। 

फ्लू से बचाव के लिए पंजाब में नई पाबंदियां, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट

अमृतसर  बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों में अलग-अलग प्रकार की बीमारियां फैलने का भय चेताया जा रहा था, जो सच होना शुरू हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांव धारीवाल कलेर में ‘अफरीकी स्वाइन फ्लू’ बीमारी फैल गई है। इस गांव को बीमारी का केन्द्र घोषित कर दिया गया है। गांव के एक किलोमीटर के आस-पास संक्रमित जोन व एक से दस किलोमीटर के इलाके को निगरानी जोन घोषित कर दिया गया है। इस इलाके में जीवित या मुर्दा सूअर, सूअर का मास, सूअर के मास से तैयार की गई वस्तुएं लाने व ले जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सूअर के मास व मास से बनी वस्तुओं के आवागमन से अन्य इलाकों में भी बीमारी फैलने का डर है। ए.डी.सी. रोहित गुप्ता ने आदेश जारी करते हुए पशुपालन विभाग के डायरैक्टर को सरकारी आदेश लागू करवाने के लिए निर्देश दिए हैं। 8 नहीं 20 से ज्यादा स्थानों से टूटा था धुस्सी बांध जैसे-जैसे रमदास व अजनाला के इलाकों में पानी निकलता जा रहा है, वैसे-वैसे कई हैरानीजनक खुलासे होने शुरू हो गए हैं। प्रशासन मान रहा था कि घोनेवाला, कोट रजादा व माछीवाल के तीन बड़े पाड़ (फाड़) से धुस्सी बांध टूटा था और पांच अन्य स्थान भी थे जहां बांध टूटा था, लेकिन अब पता चला है कि धुस्सी बांध आठ स्थानों से नहीं, बल्कि 20 से ज्यादा स्थानों से टूटा था, जिसमें से रावी दरिया का पानी 200 से ज्यादा गांवों में फैल गया और हजारों हैक्टेयर फसल को बर्बाद कर दिया। जानकारी के अनुसार डी.सी. साक्षी साहनी की तरफ से ए.डी.सी. रोहित गुप्ता व अन्य अधिकारियों के साथ उन स्थानों का दौरा किया गया, जहां बांध को जोड़ने का काम चल रहा था। माछीवाला का धुस्सी बांध संत बाबा सुक्खा सिंह सरहाली कलां वाले, संत बाबा जगतार सिंह तरनतारन वाले, कार सेवा गुरु का बाग, सेना और समाजसेवी संस्थाओं की मदद से जोड़ दिया गया है। दूसरे स्थानों पर जहां बांध टूटा था, वहां काम जारी है और उनको जोड़ने में समय लग सकता है। डी.सी. ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बांध जोड़ने में जिस प्रकार की भी मदद चाहिए उसको प्रशासन देने के लिए तैयार है।

किस वजह से उठी पंजाब विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग? पूरी जानकारी

लुधियाना दाखा विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनप्रीत अयाली ने पंजाब में बाढ़ से पैदा हुए हालातों के मद्देनजर पंजाब विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाने की मांग की है। इसे लेकर उन्होंने विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को पत्र लिखकर अपील की है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि बाढ़ के कारण पंजाब में गंभीर स्थिति पैदा हो गई है, इसलिए तुरंत विधानसभा का आपातकालीन सत्र बुलाया जाना चाहिए। अयाली ने कहा कि राज्य में आई बाढ़ से जान-माल और कृषि को भारी नुकसान हुआ है और हजारों परिवार गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति तुरंत विशेष ध्यान की मांग करती है ताकि नुकसान की पूरी जांच की जा सके। इस आपदा के मुख्य कारणों पर गंभीरता से विचार किया जा सके और तुरंत एक विस्तृत राहत एवं पुनर्वास योजना तैयार की जा सके। वहीं बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए एक ठोस नीति बनाई जा सके। 

किसानों को बड़ी राहत: CM भगवंत मान ने सबसे अधिक मुआवजा देने का किया ऐलान

पंजाब  पंजाब में बाढ़ ने किसानों की मेहनत और ख्वाबों को डुबो दिया, लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार ने किसानों को अकेला नहीं छोड़ा. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तुरंत बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि हर प्रभावित किसान को ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवज़ा दिया जाएगा. यह सिर्फ़ पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे देश में अब तक का सबसे बड़ा मुआवज़ा है. मान सरकार ने यह कदम सिर्फ़ काग़ज़ों पर नहीं बल्कि किसानों के दर्द को महसूस करते हुए उठाया है. जब हरियाणा में किसानों को अधिकतम ₹15,000 प्रति एकड़, गुजरात में करीब ₹8,900 प्रति एकड़, मध्य प्रदेश में करीब ₹12,950 प्रति एकड़, और उत्तर प्रदेश व राजस्थान में अधिकतर ₹5,000- ₹7,000 प्रति एकड़ तक राहत मिलती है, वहीं पंजाब के किसानों को सीधा ₹20,000 प्रति एकड़ देने का फैसला किसानों की ताक़त और मेहनत को सलाम करने जैसा है. मृतक के परिवार को 4 लाख-मान इतना ही नहीं, मान सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के परिवारों को ₹4 लाख की सहायता और खेतों में जमी रेत को बेचने की अनुमति भी दी है, ताकि किसानों को तुरंत नक़दी मिले और अगली बुवाई का रास्ता आसान हो सके. यह कदम साफ़ दिखाता है कि सरकार किसानों की मुश्किलें समझती है और उनके लिए हर मुमकिन राहत पहुंचाना चाहती है. यह मुआवज़ा सिर्फ़ पैसों की मदद नहीं, बल्कि किसानों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि सरकार उनकी पीड़ा को अपनी पीड़ा मानती है. संकट की इस घड़ी में यह संदेश पूरे पंजाब में गूंज रहा है कि यह सरकार किसानों को कभी अकेला नहीं छोड़ेगी. राहत की राशि को देशभर में सबसे ऊपर रखकर पंजाब को मिसाल बनाया गया है. किसान पंजाब की असली ताकत-मान मान सरकार ने राहत की राशि को सबसे ऊपर रखकर साबित कर दिया है कि किसान सिर्फ़ वोटर नहीं, बल्कि पंजाब की असली ताक़त हैं. यह फैसला किसानों को संघर्ष से सहारा और भविष्य के लिए विश्वास देता है. किसान की जीत ही पंजाब की जीत है, और मान सरकार हर हाल में किसानों के साथ खड़ी है.  

सीएम भगवंत मान ने अस्पताल से सीधे वीडियो कॉल कर की बातचीत, मनकीरत औलख और प्रीतपाल सिंह जुड़े

पंजाब  पंजाब में आई भीषण बाढ़ के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान लगातार बाढ़ प्रभावित परिवारों और राहत कार्यों से जुड़े हुए हैं. अस्पताल में रहकर भी उन्होंने पंजाबी गायक मनकीरत औलख से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत की. सीएम ने उनके द्वारा किए जा रहे राहत प्रयासों की सराहना की. मुख्यमंत्री मान ने हंसपाल ट्रेडर्स के मालिक प्रीतपाल सिंह हंसपाल का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया. हंसपाल ट्रेडर्स ने बाढ़ में फंसे लोगों और उनके पशुओं को सुरक्षित निकालने के लिए काफी काम किया है. उन्होंने अपनी तरफ से 150 से अधिक नावें बनवाईं. पंजाब सरकार का राहत प्रयासों में सहयोग मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आगे कहा कि संकट की इस घड़ी में पंजाबियों ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि उनके भीतर हिम्मत, सेवा की भावना और आपसी भाईचारे की मिसालें आज भी जिंदा हैं. जो भी लोग अपने लेवल पर दूसरों की मदद कर रहे हैं और जान बचाने में जुटे हुए हैं, पंजाब की सरकार उन सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है. सीएम ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक समर्थन नहीं है, बल्कि यह पंजाबियों की भावनाओं से भावनात्मक जुड़ाव भी है . यही वजह है कि आज हर पंजाबी को यह विश्वास है कि वो अकेला नहीं है उसकी सरकार उसके साथ खड़ी है और केवल सरकार ही नहीं बल्कि उसका समाज पूरी ताकत और संवेदनशीलता के साथ उसके साथ खड़ा है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 5 सितंबर को तबियत खराब के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. तबीयत में सुधार के बाद उन्होंने सोमवार को अस्पताल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट की बैठक की अध्यक्षता की. मुख्यमंत्री की तबियत खराब के चलते पहले यह बैठक स्थगित कर दी गई थी. सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर भी नहीं जा पाए थे.  

भ्रष्टाचार विरोधी फ्रंट का आरोप: समराला के लोग झेल रहे हैं असहनीय परिस्थितियाँ

समराला  भ्रष्टाचार विरोधी फ्रंट समराला की मासिक बैठक संरक्षक कमांडेंट रछपाल सिंह और प्रधान अमरजीत सिंह बालिओं की अध्यक्षता में स्थानीय ‘बागी भवन’ में हुई। बैठक में कामरेड जगजीत सिंह बागी के दामाद दविंदर सिंह जटाना विशेष तौर पर रोपड़ से पहुंचे। बैठक के दौरान वक्ताओं ने शहर की समस्याओं का गंभीर संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि समराला प्रशासन और नगर कौंसिल का कामकाज बेहद खराब है। शहर की प्रमुख समस्याओं में ट्रैफिक की दिक्कतें, समराला-खन्ना और माछीवाड़ा रोड की खराब हालत, मेन चौक पर पड़े बड़े गड्ढे, दुकानदारों द्वारा बाजार में किए गए अवैध कब्जे, एसडीएम कार्यालय के सामने जमा बरसात का पानी, कचहरियों के मुख्य द्वार और एसडीएम कार्यालय व कचहरियों की दीवारों के साथ उगा हुआ बड़ा-बड़ा घास शामिल है।  नगर कौंसिल द्वारा बाजार से अवैध कब्जे हटाने के नाम पर की जा रही खानापूर्ति मज़ाक बनकर रह गई है। प्रधान अमरजीत सिंह बालिओं ने कहा कि इस समय पूरे पंजाब में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसरशाही अपने दफ्तरों से बाहर नहीं निकलती, अधिकारी और कर्मचारी किसी की सुनवाई नहीं करते। जनता के चुने प्रतिनिधि अपना वोट बैंक टूटने के डर और अपनी कुर्सी बचाने के लिए चुपचाप बैठे हैं। समराला शहरवासी नरक जैसी स्थिति झेलने को मजबूर हैं।