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जेएसएससी ने जारी किया शेड्यूल, जून के आखिरी सप्ताह में मिलेगा एडमिट कार्ड

 रांची झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 की तिथि घोषित कर दी है। यह लिखित परीक्षा पांच जुलाई केा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित होगी। आयोग के अनुसार, परीक्षा से संबंधित प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए लिंक आयोग के वेबसाइट पर जून माह के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराया जाएगा। अभ्यर्थी उक्त लिंक के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाक अथवा किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नही कराया जाएगा। आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि परीक्षा से संबंधित सुचिता को बरकरार रखेंगे तथा किसी प्रकार के कदाचार संबंधी प्रयास में शामिल नहीं होंगे। अन्यथा दोषी पाए जाने पर झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस परीक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्ता के कुल 510 पदों पर नियुक्ति होनी है। JPSC: 14 जून को होगी जेट की शिक्षा व उड़िया विषय की परीक्षा झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के तहत शिक्षा तथा उड़िया विषय की परीक्षा 14 जून होगी। झारखंड लोक सेवा आयाेग ने साेमवार को परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी। यह परीक्षा उक्त तिथि को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक रांची में आयोजित की जाएगी। आयोग के अनुसार, उक्त दोनों विषयों के लिए अभ्यर्थी प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक 10 जून से आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें कि पूर्व में इन दोनों की परीक्षा निर्धारित तिथि 26 अप्रैल को नहीं हो सकी थी।

बिहार में आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए बड़े ऐलान, मैराथन विजेताओं को मिलेगा ₹1 लाख तक इनाम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदिवासियों के लिए बड़े ऐलान किए हैं। आदिवासी बाहुल्य जनजातीय क्षेत्रों में मैराथन का आयोजन होगा। इसमें प्रथम विजेता को 1 लाख, द्वितीय विजेता को 75 हजार एवं तृतीय विजेता को 50 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। इसके अलावा कैमूर के अधौरा में जहां आदिवासी समाज के लोग संघर्ष का जीवन जी रहे हैं, वहां भी डिग्री कॉलेज खोला जाएगा। पश्चिम चंपारण जिले के वाल्मीकिनगर और कैमूर में हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे, इससे इको टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद सभागार में बुधवार को जनजातीय गरिमा उत्सव 2026 के अन्तर्गत 'बिरसा लिब्स इन न्यू भारत' थीम के तहत पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के लाभार्थियों के साथ सीएम सम्राट चौधरी ने संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिहार में एकलव्य स्कूलों की स्थापना की गई है, जिसमें बिहार बोर्ड के साथ सीबीएसई बोर्ड के सिलेबस की पढ़ाई कराई जाएगी। इससे अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे। होम स्टे को बढ़ावा सीएम ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में पर्यटन के लिए होम स्टे को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे लोग आदिवासी संस्कृति को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति के तहत लगभग 1 लाख 4 हजार एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है। इसमें 4155 आदिवासी समाज के विद्यार्थी हैं। प्री मैट्रिक छात्रवृति के तहत इस साल 20 लाख 46 हजार छात्र-छात्राओं को लाभ दिया गया है, जिसमें 1.41 लाख छात्र-छात्राएं एसटी वर्ग के हैं। बिहार में वन क्षेत्र बढ़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बना तो बिहार का हरित आवरण 8-9 प्रतिशत ही रह गया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वन क्षेत्र बढ़ाने के काम किया। इससे बिहार का वन क्षेत्र 15 प्रतिशत हो गया। अब इसे 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य है। सम्राट चौधरी ने कहा कि यह साल भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। इसकी शुरुआत 15 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। देश की आजादी और आदिवासी समाज के उत्थान में भगवान बिरसा मुंडा का बहुत बड़ा योगदान रहा। वे आदिवासी समाज के नायक थे। बिरसा लिब्स इन न्यू भारत तीम के तहत एससी-एसटी पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति योजना की बुधवार को शुरुआत की गई, यह अपने आप में ऐतिहासिक है। इस कार्यक्रम में एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन, विभाग के सचिव संदीप कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सीएम के ओएसडी गोपाल सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

राशन के लिए लंबी कतार खत्म! बिहार सरकार की नई योजना से 28 लाख उपभोक्ताओं को फायदा

 पटना बिहार के राशनकार्डधारियों और गरीब परिवारों के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सम्राट सरकार की इस नई पहल के बाद अब सूबे के लाखों बुजुर्गों और असहाय लोगों को डीलर की दुकान पर लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के निर्देश पर अब एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे सीधे योग्य परिवारों के दरवाजे तक सरकारी लाभ पहुंचाया जा सके। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य के करीब 28 लाख उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए जिलों में युद्धस्तर पर सूचियां तैयार की जा रही हैं। 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए सरकार की खास पहल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 80 वर्ष से अधिक उम्र वाले मुख्य राशनकार्डधारियों की संख्या लगभग 6 लाख 87 हजार है। इन परिवारों में कुल मिलाकर 28 लाख उपभोक्ता शामिल हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर सरकार ने अपनी रणनीति बदली है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि जिन राशनकार्डधारी परिवारों में कोई भी सदस्य 80 वर्ष से कम आयु का नहीं है, उनके घरों तक अब सरकार खुद हर महीने उनका तय मानक के अनुसार अनाज (गेहूं और चावल) पहुंचाएगी। जिलों से मांगी गई सूची, तैयार हो रहा है SOP इस महात्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग पूरी तरह एक्शन में आ गया है। विभाग के निर्देश पर बिहार के सभी जिलों से ऐसे राशनकार्डधारी परिवारों की सूची मांगी गई है, जिनकी उम्र 80 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है। इन बुजुर्गों को घर बैठे उनका निर्धारित कोटा बिना किसी परेशानी के कैसे मिले, इसके लिए विभाग दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। तीन जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगी योजना बुजुर्गों को सम्मान और राहत देने वाली इस योजना को फुलप्रूफ बनाने के लिए विभाग इसे शुरुआत में पूरे राज्य में एक साथ लागू नहीं करेगा। विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले राज्य के तीन चुनिंदा जिलों में इसे 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू करने की तैयारी चल रही है। इन तीन जिलों में शुरुआती नतीजे और व्यवस्था की समीक्षा करने के बाद, जल्द ही इसे बिहार के सभी जिलों में अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा

पंचायत स्तर पर विकसित होंगे मुक्तिधाम, कैमूर में चारदीवारी समेत कई सुविधाओं की तैयारी

भभुआ. जिले के सभी पंचायतों में सुविधाओं से युक्त मुक्तिधाम का निर्माण होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार की बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार के सात निश्चय योजना तीन के तहत पंचायतों में सुविधाओं से युक्त मुक्ति धाम निर्माण का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जिला पंचायती राज पदाधिकारी मनोज कुमार पवन ने बताया कि पंचायती राज विभाग ने पत्र जारी कर आधुनिक मुक्तिधाम बनाने को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किया है।इसके लिए जिले के सभी प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। बता दें कि ग्रामीण इलाकों में व्यवस्थित श्मशान घाटों की कमी के कारण लोगों को खुले स्थानों पर या फिर नदी घाटों पर अंतिम संस्कार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सरकार के सात निश्चय तीन में इस योजना को शामिल किया गया है। पंचायत स्तर पर बनने वाले शवदाह गृह में आवश्यकता अनुसार सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी। यहां चबूतरा के साथ एक पूरे परिसर को सुव्यवस्थित किया जाएगा। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों के बैठने के लिए बेंच और प्रतीक्षालय के साथ साथ बेहतर ड्रेनेज की व्यवस्था, बेहतर रास्ता, साफ-सफाई, पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी पर्यावरण के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि लोगों को अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित व सुविधाजनक स्थान मिल सके। योजना के कार्यान्वयन के लिए पंचायतों को भूमि चिह्नित की गई है। इस पहल से जहां प्रदूषण में कमी आएगी वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान को भी मजबूती मिलेगी। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार को गरिमापूर्ण, पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक बनाना है। यह योजना सबका सम्मान-जीवन आसान का हिस्सा है। शेड चारदीवारी शौचालय की व्यवस्था जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने बताया कि सरकार की सात निश्चय योजना तीन के पंचायतों में आधुनिक मुक्तिधाम श्मशान घाट बनाए जा रहे हैं। इन अत्याधुनिक केंद्रों में शेड, चारदीवारी, शौचालय, स्नानागार आदि सुविधाएं होगी। जिससे ग्रामीण इलाकों में अंतिम संस्कार के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सके। परियोजनाओं के लिए भूमि सर्वेक्षण का काम शुरू हो चुका है। जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने बताया कि पंचायत क्षेत्र में किसी की मृत्यु होने पर उसका दाह संस्कार पंचायत के अंतर्गत दाह संस्कार स्थल में किए जाने पर 24 घंटे के अंदर आवेदन देने पर मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत करने की व्यवस्था की गई है मृत्यु प्रमाण पत्र पंचायत में निधन होने वाले ही व्यक्ति को दिया जाएगा। प्रखंडवर चिह्नित किए गए स्थलों की संख्या प्रखंड का नाम     चिह्नित स्थलों की संख्या चैनपुर                   47 कुदरा                    30 चांद                      26 भगवानपुर              19 नुआव                    15 भभुआ                    12 अधौरा                    10 रामगढ़                   9 मोहनियां                  8 करौं                      9 कसैया                   9 डिंडाकोली             3 रामपुर                  4

बिजली व्यवस्था सुधारने मैदान में उतरे MD, भागलपुर में अफसरों को अल्टीमेटम

भागलपुर. जिले में भीषण आंधी-तूफान के बाद बिजली संकट गंभीर रूप ले चुका है। भागलपुर में पिछले 38 घंटे से अधिक समय से बिजली आपूर्ति बाधित है, जिससे पूरे जिले के लोग परेशान हैं। नवगछिया, बिहपुर, नारायणपुर, कहलगांव, अजगैवीनाथ धाम, पीरपैंती, कजरैली, नाथनगर और सन्हौला सहित लगभग सभी क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था ठप पड़ी हुई है। सोमवार की रात करीब 12 बजे आए भीषण तूफान ने पूरे जिले में भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं की रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जा रही है। इस दौरान जगह-जगह बिजली के पोल गिर गए, तार टूट गए और कई इलाकों में बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। घरों, दुकानों और टेंटों को भारी नुकसान तूफान का असर सिर्फ बिजली व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। कई इलाकों में लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। जहां-जहां टेंट और अस्थायी दुकानें लगी थीं, वहां सब कुछ उड़ गया। झोपड़ी में दुकान चलाने वाले छोटे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कई परिवारों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। 38 घंटे बाद भी बिजली बहाल नहीं लगातार 38 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश इलाकों में बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो पाई है। लोग पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और दैनिक कार्यों के लिए परेशान हैं। नगर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अंधेरे की स्थिति बनी हुई है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। एमडी पहुंचे भागलपुर, हुई उच्चस्तरीय बैठक बिजली संकट को गंभीरता से लेते हुए बिहार बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) राहुल कुमार हेलीकॉप्टर से भागलपुर पहुंचे। उनके साथ मुख्य अभियंता और तकनीकी टीम भी मौजूद रही। भागलपुर पहुंचकर एमडी ने जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, अधीक्षण अभियंता और तीनों डिवीजन के कार्यपालक अभियंताओं के साथ बैठक की। बैठक में भागलपुर, कहलगांव और नवगछिया डिवीजन की बिजली स्थिति की समीक्षा की गई। डीएम के अनुरोध पर तेज हुई कार्रवाई इससे पहले जिलाधिकारी ने स्वयं एमडी से बातचीत कर बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने का अनुरोध किया था। इसके बाद उच्चस्तरीय टीम को तत्काल भागलपुर भेजा गया। अधिकारियों को सख्त निर्देश बैठक के दौरान एमडी ने सभी कार्यपालक अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन इलाकों में अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं हुई है, वहां प्राथमिकता के आधार पर काम पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी संसाधनों का उपयोग कर युद्धस्तर पर बहाली कार्य किया जाए, ताकि जल्द से जल्द जिले में बिजली व्यवस्था सामान्य हो सके। राहत की उम्मीद प्रशासन और बिजली विभाग की टीमें लगातार फील्ड में काम कर रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही अधिकतर इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। हालांकि फिलहाल लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन बहाली कार्य तेज कर दिया गया है।

आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: पटना IGIMS में बड़ा खुलासा

पटना पटना स्थित आईजीआईएमएस (IGIMS) में आयुष्मान घोटाले की जांच के लिए पुलिस और संस्थान की ओर से मंगलवार को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गईं। आईजीआईएमएस ने छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो घोटाले के हर बिंदु पर जांच करेगी। इधर पुलिस ने इस मामले के आरोपित चार संविदा कर्मियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी गठित की है। आईजीआईएमएस में अब तक 45 लाख का आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) में घोटाले की बात सामने आई है, लेकिन संस्थान के अधिकारियों की मानें तो यह राशि और बढ़ सकती है। आईजीआईएमएस में एक प्रशासनिक अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। कमेटी में संस्थान के पदाधिकारियों के अलावा एक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। कमेटी की बुधवार को इस विषय पर बैठक होनी है। संस्थान के पदाधिकारियों की मानें तो आयुष्मान कार्ड का सॉफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी और आउटसोसिंग एजेंसी के कर्मियों की मिलीभगत से आयुष्मान कार्ड धारकों के साथ छलावा किया है। इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। आईजीआईएमएस में आयुष्मान भारत योजना का लाभ मरीजों को 2018 से मिल रहा है। इधर, इस मामले में आरोपित आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मी अमरजीत राय, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी चल रही है। एक कर्मी को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। टाउन डीएसपी-2 साकेत कुमार ने बताया कि आईजीआईएमएस ने शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है। कैसे खुला राज अक्तूबर 2025 में मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड के बाघाखाल गांव निवासी 46 वर्षीय मनोज झा को दलालों ने उनके आयुष्मान कार्ड के इस्तेमाल करने के बदले में 40 हजार देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने अपना कार्ड तो दे दिया, पर दलालों ने उन्हें 40 हजार नहीं दिये। इसकी उन्होंने आईजीआईएमएस में लिखित शिकायत की। मामले की छानबीन की गई तो पाया गया कि मनोज झा का अस्पताल में उपचार ही नहीं हुआ है, जबकि आयुष्मान भारत योजना के तहत बने कार्ड से 40 हजार की निकासी कर ली गई है। यह कैसे हुआ? संस्थान के पदाधिकारी भी नहीं समझ पाए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने योजना के अंतर्गत बने कार्ड से अन्य मरीजों की जांच शुरू की तो पता चला कि बड़े पैमाने पर इस प्रकार का फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। इन बिंदुओं पर होगी जांच – किस स्तर तक गड़बड़ी की गई है, किन कारणों से ऐसी गड़बड़ी हुई – आयुष्मान के लिए जो सॉफ्टवेयर बनाया गया है उसमें क्या खामी थी – जिस एजेंसी ने सॉफ्टवेयर बनाया था वह कैसे निगरानी रख रही थी – आरोपित का कहां-कहां नेटवर्क है, इसमें कौन-कौन लोग हैं शामिल

बेतला नेशनल पार्क में जानवर पानी को तरसे, जंगलों में लू और प्यास का कहर

 लातेहार बेतला नेशनल पार्क सहित पूरा पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) इस समय भीषण और जानलेवा गरमी की चपेट में है. कभी ठंडी बयार के लिए मशहूर रहने वाले पलामू टाइगर रिजर्व का पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. जंगलों में भी गर्म हवाएं चल रही है. जंगल सफारी के दौरान हीटवेव (लू ) का कहर का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए पर्यटकों का आगमन बैकफुट पर चला गया है. आसमान से बरसती आग ने इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों का जीना भी दूभर कर दिया है. भीषण तपिश और लू के थपेड़ों से जंगलों में हाहाकार मचा है, जिससे जंगली जानवर अत्यधिक बेचैन हैं. नवजात और नन्हें जंगली जानवरों की मौत की अपुष्ट खबरें मिल रही है. सदियों पुराने कई प्राकृतिक जलस्रोतों को सुख गए है. पानी की एक-एक बूंद के लिए जंगलों में त्राहि-त्राहि मची है. बेकाबू प्यास और भीषण बेचैनी से तड़पते जानवर अब रिजर्व की सुरक्षित सीमा को छोड़कर बाहरी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं, जहां मौत के सौदागर (शिकारी) हाथ में फंदे और जहर लिए उनके इंतजार में बैठे शिकार कर रहे हैं. सूख गए प्राकृतिक जलस्रोत, कृत्रिम व्यवस्थाएं नाकाफी हिरण बंदर, लंगूर,गौर और जंगली सुअर पानी की तलाश में पागलों की तरह भटक रहे हैं. हालांकि वन विभाग ने कुछ जगहों पर टैंकरों के जरिए कृत्रिम वॉटर होल (जलपात्र) भरने का दावा किया है, लेकिन यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है. कड़कड़ाती धूप में इन कृत्रिम गड्ढों का पानी भी कुछ ही घंटों में खौलने लगता है, जो जानवरों के पीने लायक नहीं बचता. जंगल में पानी न मिलने के कारण मजबूरन वन्यजीवों के झुंड रिजर्व से सटे ग्रामीण इलाकों, खेतों और रिहायशी बस्तियों की तरफ आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार बाहरी इलाकों और बचे-खुचे पानी के गड्ढों के पास शिकारियों ने गुप्त फंदे (फांस) लगा दिये हैं. प्यास से बेहाल जानवर जैसे ही पानी पीने नीचे झुकते हैं, वे इन फंदों का शिकार हो जा रहे हैं. इसके अलावा, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पानी में जहरीले पदार्थ मिलाने की भी आशंका बनी हुई है, जिससे सामूहिक शिकार का खतरा मंडरा रहा है. रात भर गांवों के आसपास मंडराते हैं जानवर: ग्रामीण पीटीआर की सीमा से सटे गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि ऐसी गर्मी पहले कभी नहीं देखी थी. पानी की तलाश में हिरण, बाइसन और जंगली सुअर रोज हमारे खेतों की तरफ आ रहे हैं. हाल ही में बाइसन ने एक को मार डाला है. रात को डर के मारे कोई घर से बाहर नहीं निकलता. जंगल के अंदर पानी बिल्कुल नहीं है. कुछ बाहरी लोग रात के समय पानी के गड्ढों के पास संदिग्ध हालत में घूमते देखे गए हैं, जो पक्के तौर पर शिकार के इरादे से आते हैं. हम अलर्ट पर हैं, टैंकरों से की जा रही पानी की सप्लाई: रेंजर रेंजर उमेश कुमार दुबे ने कहा कि तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है,स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए हैं. कृत्रिम वॉटर होल्स में टैंकरों के जरिए लगातार पानी भरा जा रहा है. इसके साथ ही कुछ चुनिंदा बोरवेल को सोलर पंप से जोड़ा गया है जिससे पानी की निरंतर आपूर्ति हो सके. वहीं शिकार की आशंका को देखते हुए हमारी एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) टीम और वनकर्मियों की गश्त चौबीसों घंटे बढ़ा दी गई है. ग्रामीणों के साथ मिलकर इको-विकास समिति को सक्रिय किया गया है जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना मिल सके.

शिक्षा विभाग का सख्त निर्देश: ग्रीष्मावकाश से पहले स्कूलों में पढ़ाई जारी रहेगी

पटना बिहार में शिक्षकों की छुट्टी पर 27 से 31 मई तक रोक लगा दी गई है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि ग्रीष्मावकाश से पहले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सभी शिक्षक ग्रीष्मावकाश शुरू होने से पहले अंतिम कार्य दिवस तक विद्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इस दौरान छात्रों को विषयवार गृहकार्य दिया जायेगा और उसकी प्रविष्टि छात्रों की डायरी में भी करनी होगी। विभागीय निर्देश में कहा गया है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में शिक्षक अवकाश आवेदन दे रहे हैं। ऐसे में ग्रीष्मावकाश से पहले विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। कॉलेजों का टॉप 10 विश्वविद्यालयों से करार टीचरों की छुट्टियों पर रोक लगाने के अलावा मंगलवार को सम्राट चौधरी सरकार ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई अहम फैसले लिए। जिसके तहत अब बिहार के कॉलेजों का देश के शीर्ष दस विश्वविद्यालयों से करार होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा विभाग को बिहार के कॉलेजों को संबद्ध करने के लिए देश के टॉप 10 विश्वविद्यालयों से करार करने का निर्देश दिया है, ताकि बाहर से भी बिहार आकर बच्चे शिक्षा हासिल कर सकें। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को लोक सेवक आवास में उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान पदाधिकारियों को कई निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जुलाई से उन 211 प्रखंडों में स्नातक की पढ़ाई शुरू कराएं, जहां पूर्व से डिग्री कॉलेज नहीं हैं। ऐसे प्रखंडों में नए महाविद्यालयों की स्थापना की जा रही है। उनमें शिक्षकों और कर्मियों की नियुक्ति के लिए कमेटी का शीघ्र गठन कर वैकेंसी को एक साथ अटैच करें। प्रखंडों में स्थापित होने वाले महाविद्यालय ऐसी जगह पर हों, जहां विद्यार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई न हो तथा सुगमतापूर्वक वे आ-जा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तरहित महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की संख्या, आधारभूत संरचना, भवन और दी जाने वाली अनुदान राशि का आकलन करें। भूमि देने वाले के नाम पर होंगे डिग्री कॉलेज मुख्यमंत्री ने कहा कि डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में महाविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि दान देने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर उस महाविद्यालय का नामकरण किया जाएगा। महाविद्यालय में भवन निर्माण/आंशिक रूप से सहयोग करने वाले व्यक्ति या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर भी महाविद्यालय परिसर के किसी हिस्से का नामकरण कराया जायेगा। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री संजय सिंह टाइगर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, उच्च शिक्षा सचिव राजीव रौशन सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे। राज्य में खुला विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ेगी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में संचालित ओपेन यूनिवर्सिटी का अध्ययन करें। इसके साथ ही बिहार में और अधिक संख्या में ओपेन यूनिवर्सिटी स्थापित करें, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया करायी जा सके। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों पर बोझ भी घटेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पुनर्स्थापित करने के लिए भारत सरकार को शीघ्र भूमि हस्तांतरित की जायेगा। इस संबंध में भारत सरकार को पत्र भेजकर सूचित किया जायेगा। बिहार के शोध संस्थानों को सुव्यवस्थित किया जाएगा मुख्यमंत्री ने एएन सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान को फिर से व्यवस्थित करने के लिए कहाा है, ताकि इसका अधिक से अधिक उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि बिहार में विश्वविद्यालय के साथ जितने भी रिसर्च सेंटर हैं, उन्हें फिर से व्यवस्थित कर नियमित और विशिष्ट बनाएं। शोध संस्थान सुव्यवस्थित होगा, तो नियमित रूप से शोध होगा और सरकार की पॉलिसी या प्लान का परीक्षण हो सकेगा।

वाणिज्य कर विभाग का प्रदर्शन: झारखंड ने दो महीने में 12% राजस्व लक्ष्य हासिल किया

 रांची  झारखंड में वाणिज्य कर विभाग ने शुरुआत के दो महीने में धीमी गति से ही सही 2,815 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने में सफलता पाई है। 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध राज्य सरकार के खाते में 25 मई तक 2,815 करोड़ रुपये आ चुके हैं। यह लक्ष्य के हिसाब से 12 प्रतिशत के करीब है। अनुमान के अनुसार सर्वाधिक राजस्व जीएसटी मद से प्राप्त हुआ है और सरकार के खाते में इस मद से अभी तक 2,111 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं। इस बार इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से सरकार को 84 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जबकि प्रोफेशनल टैक्स के माध्यम से 14 करोड़ रुपये वसूलने में वाणिज्य कर विभाग सफल रहा है। साेमवार को मुख्यमंत्री के स्तर से समीक्षा के क्रम में ये आंकड़े सामने आए हैं। वित्त मंत्री की मौजूदगी में पेश इन आंकड़ों के लिए मुख्यमंत्री और वरीय अधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों की सराहना की है। विभिन्न माध्यमों से प्राप्त राजस्व राजस्व की श्रेणी     लक्ष्य (करोड़ ₹)     उपलब्धि (करोड़ ₹)     प्राप्त प्रतिशत जीएसटी                       14,565          2,111                  14% वैट                              7,880             606                   8% इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी            355                84                    6% प्रोफेशनल टैक्स               200                14                     7% कुल राजस्व                      24,000          2,815                12%

झारखंड में बाल विवाह पर रोक को लेकर सीएम सख्त, जागरूकता अभियान तेज करने के आदेश

रांची  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में हो रहे बाल विवाह पर चिंता जताई है। साथ ही उन्होंने इसपर हर हाल में रोक लगाने को कहा है। मंगलवार को महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा के क्रम में उन्होंने कहा कि गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा जैसे जिलों में बाल विवाह के ज्यादा मामले आ रहे हैं। वहां अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाए। बाल विवाह में सम्मिलित तथा इसे बढ़ावा देने वालों पर की जाने वाली कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी आम लोगों को दें, ताकि कानून के प्रति उनमें डर हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि आडियो-वीडियो के माध्यम से एवं विभिन्न इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से भी लोगों में बाल विवाह को लेकर प्रभावी जागरूकता लाई जा सकती है। साथ ही स्कूल-कालेज की छात्राओं सहित आम लोगों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह मुक्त झारखंड की दिशा में अपनी साहस और दृढ़ संकल्प को दिखाने वाली बालिकाओं को ब्रांड एंबेसडर/वालेंटियर बनाकर समाज में जागरूकता फैलाएं, ताकि बालिकाओं के अल्प आयु में विवाह करने की सामाजिक विसंगति पर रोक लगाई जा सके। मुख्यमंत्री ने विभाग को बजट की राशि शत-प्रतिशत खर्च करते हुए योजनाओं का सीधा लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि सीडीपीओ के 106 पद, महिला पर्यवेक्षिका के 433 पद, आंगनबाड़ी सेविका के 583 पद एवं आंगनबाड़ी सहायिका के 897 पद रिक्त हैं। इन पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर मिशन मोड में माडल आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएं। आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण के लिए सीएसआर एवं डीएमफटी फंड का उपयोग कर पहले जीर्ण-शीर्ण एवं किराए के भवन में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को शिफ्ट कराना सुनिश्चित करें। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करें। मुख्यमंत्री ने सखी वन स्टाप सेंटर की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि सखी वन स्टाप सेंटर के उपयोग के प्रति महिलाओं को जागरूक कर विभिन्न हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता प्रदान करें। साथ ही इसे स्थानीय पुलिस प्रशासन के साथ जोड़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला हेल्पलाइन नंबर को लेकर लोगों में जागरूकता लाएं और इस नंबर पर प्राप्त शिकायतों को तत्परता के साथ निराकरण करना सुनिश्चित की जाए। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, निदेशक समाज कल्याण किरण कुमार पासी, विभाग के अपर सचिव अभय नंदन अम्बष्ट, निदेशक आइसीपीएस विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में हो बिजली, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली, शौचालय एवं पेयजल आपूर्ति की बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि किराए पर संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को सरकारी विद्यालय परिसरों में शिफ्ट किए जाने का कार्य भी विभाग द्वारा किया जा रहा है। इससे बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा और इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर पड़ेगा। मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि पोषण अभियान योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविकाओं को मोबाइल फोन उपलब्ध कराने के पश्चात पोषण ट्रैकर पोर्टल के माध्यम से प्रत्येक दिन की गतिविधियों को अपलोड किया जा रहा है। इससे पर्यवेक्षण में आसानी हो रही है। छूटे हुए पात्र लाभुकों को मिले मंइयां सम्मान एवं सर्वजन पेंशन योजना का लाभ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री सर्वजन पेंशन योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्धारित आयु वर्ग के सभी पात्र व्यक्तियों को पेंशन योजना का लाभ मिले। जो पात्र लाभुक छूटे हुए हैं, उन्हें भी शीघ्र योजना से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने मंइयां सम्मान योजना की कार्य प्रगति की भी जानकारी ली एवं अहर्ता पूरा करने वाले छूटे हुए लाभुकों को भी इस योजना से जोड़ने के निर्देश दिए।