samacharsecretary.com

बिहार विधानमंडल का 5 दिवसीय शीतकालीन सत्र तय, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर दिखेगी तीखी बहस

पटना बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस सत्र को बुलाने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया। विधानमंडल का पांच दिवसीय यह सत्र नई सरकार तथा विपक्षी दलों दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। सत्र के दौरान राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं, विभिन्न विकास योजनाओं और प्रदेश से जुड़े प्रमुख विषयों को सदन के समक्ष रखकर उन पर चर्चा करेगी। दोनों सदनों की कुल पांच बैठकें यह शीतकालीन सत्र सोमवार से प्रारंभ होकर शुक्रवार तक चलेगा। इस पांच दिवसीय अवधि में बिहार विधानसभा तथा विधान परिषद दोनों सदनों की कुल पांच बैठकें होंगी। सत्र के दौरान राज्य सरकार अपने विधायी कार्यों को आगे बढ़ाएगी। इसके अंतर्गत विभिन्न विभागों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी, साथ ही नए विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों को सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। विधान परिषद चुनाव संपन्न होने के पश्चात सदन में नए चेहरे भी नजर आएंगे। इसके साथ ही, विपक्ष को भी जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने का अवसर मिलेगा। सम्राट सरकार का दूसरा सत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार का यह दूसरा सत्र होगा। इससे पूर्व जुलाई में पांच दिवसीय मानसून सत्र आयोजित हुआ था। वह मानसून सत्र 20 जुलाई से 24 जुलाई तक चला था। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 100 दिन पूरे होने के बाद वह पहला सत्र था। उस मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मामलों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे थे और विपक्षी दलों ने सरकार का जोरदार विरोध किया था।

बिहार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव संभव, नीतीश के ‘खास’ IAS बन सकते हैं सम्राट के प्रधान सचिव

पटना  बिहार मूल के ओडिशा कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजय कुमार सिंह (IAS Sanjay Kumar Singh) मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (CM Samrat Choudhary) के प्रधान सचिव हो सकते हैं। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने संजय को बिहार में अंतर राज्यीय प्रतिनियुक्ति का अनुरोध केंद्र से किया था। 1997 बैच के अधिकारी हैं संजय कुमार सिंह संजय 1997 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। वर्तमान में वह ओडिशा सरकार में प्रधान सचिव के रूप में कार्यरत हैं। पूर्व में भी संजय बिहार में अंतरराज्यीय प्रतिनियुक्ति पर आ चुके हैं। नीतीश कुमार की सरकार में सात वर्षों तक काम कर चुके हैं। नीतीश के करीबी हैं संजय नीतीश कुमार के करीबी संजय पटना व गयाजी के जिलाधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं। नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव भी बनाया था। नालंदा के रहने वाले हैं संजय कुमार सिंह संजय कुमार सिंह नालंदा जिले के रहने वाले हैं। ओडिशा सरकार से उनकी विजिलेंस रिपोर्ट आने के बाद उन्हें अंतर राज्यीय प्रतिनियुक्ति पर बिहार के लिए विरमित कर दिया जाएगा। संभव है हफ्ते भर के भीतर वह बिहार आ जाएंगे। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय ने उनके अंतर राज्यीय प्रतिनियुक्ति के लिए ओडिशा सरकार को लिखा था। ओडिशा सरकार की मंजूरी के बाद विजिलेंस रिपोर्ट मंगाई गई है।

BPSC ASO Result 2026: संतोष कुमार बने टॉपर, टॉप-10 में सरिता कुमारी इकलौती महिला; देखें कटऑफ

 पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सहायक अनुभाग पदाधिकारी (ASO) मुख्य परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। 27 फरवरी 2026 को आयोजित इस परीक्षा में कुल 609 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। जारी परिणाम में संतोष कुमार ने पहला स्थान हासिल किया है। उनका रोल नंबर 841942 है। वहीं, सरिता कुमारी 873314 रोल नंबर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। राहुलराज कुमार ने 873577 रोल नंबर के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। टॉप-10 में सरिता कुमारी इकलौती महिला परिणाम में सरिता कुमारी का प्रदर्शन खास रहा। वह शीर्ष 10 रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थियों में एकमात्र महिला हैं। उन्होंने दूसरा स्थान हासिल कर अपनी जगह बनाई। आयोग की ओर से परिणाम के साथ श्रेणीवार कटऑफ अंक भी जारी किए गए हैं। इससे अभ्यर्थी अपनी श्रेणी के अनुसार परीक्षा के परिणाम का आकलन कर सकते हैं। अनारक्षित वर्ग का कटऑफ 115 अंक आयोग के अनुसार, अनारक्षित वर्ग का कटऑफ 115 अंक रहा, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) का कटऑफ 108 अंक निर्धारित किया गया। अनुसूचित जाति (SC) के लिए 102 और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 104 अंक कटऑफ रहा। अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) का कटऑफ 113 अंक रहा। वहीं, अनारक्षित महिला अभ्यर्थियों का कटऑफ 105 अंक दर्ज किया गया। महिला और दिव्यांग श्रेणियों का कटऑफ भी जारी महिला अभ्यर्थियों में EWS का कटऑफ 103, SC का 91 और BC का 103 अंक रहा। बीसीएल श्रेणी का कटऑफ 103 अंक निर्धारित किया गया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों की DD श्रेणी के लिए 87 और MD श्रेणी के लिए 85 अंक कटऑफ रहा। स्वतंत्रता सेनानियों के पोते-पोतियों की श्रेणी का कटऑफ 100 अंक है। श्रेणीवार आंकड़ों के अनुसार 41 अभ्यर्थियों का चयन जारी चयन सूची के मुताबिक, अनारक्षित वर्ग से कुल 16 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। इनमें 10 पुरुष और 6 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। EWS श्रेणी से 4, SC से 9, ST से 1, EBC से 1, BC से 9 और BCL श्रेणी से 1 अभ्यर्थी चयनित हुआ है। उपलब्ध श्रेणीवार आंकड़ों के अनुसार कुल 41 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। EWS श्रेणी के अभ्यर्थी की नियुक्ति कोर्ट के फैसले पर निर्भर आयोग ने EWS श्रेणी में क्रम संख्या 2 पर दर्ज ऋषु कुमार (रोल नंबर 817089) को लेकर भी जानकारी दी है। आयोग के अनुसार, उनका नाम आपराधिक मामला संख्या 995/2019 से जुड़ा है। यह मामला मुजफ्फरपुर के अपर सत्र न्यायाधीश-III की अदालत में सत्र विचारण संख्या 153/2025 के तहत लंबित है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उनकी नियुक्ति इस मामले में अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।

झारखंड में वित्त रहित शिक्षण संस्थानों को अनुदान देने में लापरवाही, 19 जिलों के DEO को कार्रवाई की चेतावनी

 रांची  वित्त रहित स्कूलों, कालेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान देने में कई जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद के सख्त निर्देश के बाद भी राज्य के पांच जिलों रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद एवं पूर्वी सिंहभूम में ही अपील के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत अनुदान राशि संबंधित संस्थानों के खाते में हस्तांतरित की जा सकी है। शेष 19 जिलों में राशि अभी तक हस्तांतरित नहीं हुई। बुधवार को यह मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय सचिव के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इन 19 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इसके लिए नाराजगी प्रकट की। इसमें कहा गया है कि अपील आवेदन के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 की विभागीय अनुदान समिति द्वारा स्वीकृत अनुदान की राशि छह अक्टूबर को ही जिलों को उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से संस्थानों को भुगतान करने एवं इसमें किसी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिए जाने के निर्देश दिए गए थे। रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम ने लिया एक्शन इसके बाद भी जानकारी के अनुसार, रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद तथा पूर्वी सिंहभूम जिलों के द्वारा ही संस्थानों को स्वीकृत अनुदान की राशि वितरित की गई है। शेष जिलों द्वारा अब तक उक्त राशि का वितरण संबंधित संस्थानों को नहीं किया गया है, जो विभागीय आदेश की अवहेलना है। निदेशक ने अन्य जिलों को तीन दिनों में अनुदान की राशि वितरित करने के निर्देश दिए ताकि संस्थान समय पर उपयोगिता प्रमाण के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन कर सकें। उन्होंने इसका अनुपालन नहीं होने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। दरअसल, बुधवार को ही वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने इन जिलों में अभी तक अनुदान की राशि वितरित नहीं होने की जानकारी सचिव को दी थी। मोर्चा ने 75 प्रतिशत अनुदान बढ़ाने तथा वित्त रहित संस्थानों की छात्राओं का भी सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने पर शीघ्र निर्णय का भी आश्वासन दिया। मोर्चा ने विधानसभा में सरकार द्वारा दिए आश्वासन का जिक्र करते हुए इसे लागू करने की मांग की। इसपर सचिव ने कहा कि सरकार ने आश्वासन दिया है तो उसे पूरा किया जाएगा। इसपर कुछ नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने पर सीएसआर से जुड़ी संस्थाओं ने किया विमर्श महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग और यूनिसेफ ने मिलकर बुधवार को धुर्वा में राज्य स्तरीय सीएसआर कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी विभागों और अन्य स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना और सेवाओं को मजबूत करने के लिए साझेदारी के अवसर तलाशना था। समाज कल्याण निदेशालय के सहायक निदेशक ने उपस्थित लोगों को विषय की जानकारी दी। विभाग के सचिव ने खनन एवं उद्योग विभाग के साथ समन्वय कर उच्च स्तरीय बैठक और सार्वजनिक-निजी सीएसआर सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया। यूनिसेफ झारखंड के सीएफओ और आइपीई ग्लोबल के राज्य प्रमुख ने पोषण एवं बाल विकास पहलों को प्रभावी बनाने के प्रस्ताव रखे। तकनीकी सत्रों में सीएसआर से आंगनबाड़ी ढांचे को सुदृढ़ करने, साझेदारी माडल और पोषण परिणामों पर चर्चा हुई। कार्यशाला में बेहतर पोषण और विकास के लिए मिलकर काम करने का रोडमैप तय हुआ।  

बिहार में शराब तस्करों पर कार्रवाई, पिकअप वैन जब्त और टाइल्स गोदाम सील; पंजाब से जुड़ा खेप का कनेक्शन

दरभंगा मद्यनिषेध विभाग की टीम ने गुरुवार की सुबह सदर थाना क्षेत्र के रानीपुर बेला वार्ड नौ में छापेमारी कर एक पिकअप वैन और टाइल्स गोदाम से करीब 459 कार्टन विदेशी शराब बरामद की। कार्रवाई के दौरान पिकअप वैन को जब्त कर लिया गया, जबकि गोदाम को सील कर दिया गया है। छापेमारी का नेतृत्व मद्यनिषेध के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार ने किया। देर रात मिली थी सूचना जानकारी के अनुसार, बुधवार की देर रात मद्यनिषेध विभाग को सूचना मिली थी कि रानीपुर बेला वार्ड नौ में किसान ट्रेडर्स के पास एक पिकअप वैन खड़ी है, जिस पर शराब लदी हुई है। सूचना मिलने के बाद मद्यनिषेध की टीम रात में ही मौके पर पहुंची और पिकअप वैन को कब्जे में ले लिया। गोदाम मालिक से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। ताला तोड़कर हुई जांच इसके बाद सदर थाना पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया गया। गुरुवार की सुबह रानीपुर के मुखिया राजकुमार दास और गोदाम मालिक के एक रिश्तेदार की मौजूदगी में गोदाम का ताला तोड़ा गया। जांच के दौरान गोदाम में टाइल्स रखे मिले, जबकि उसके भीतरी हिस्से में शराब की कार्टन छिपाकर रखी गई थी। पंजाब निर्मित है शराब पिकअप वैन और गोदाम से करीब 459 कार्टन विदेशी शराब बरामद हुई। बरामद शराब पंजाब निर्मित है और इसमें आइबी व आरएस ब्रांड शामिल हैं। गोदाम रानीपुर वार्ड आठ निवासी स्व. विद्यानंद चौधरी के पुत्र सरोज चौधरी और संतोष चौधरी का बताया गया है। संचालन को लेकर जांच जारी हायक आयुक्त प्रदीप कुमार ने बताया कि यह जानकारी जुटाई जा रही है कि सरोज और संतोष गोदाम का संचालन खुद करते थे या उन्होंने इसे किसी को किराये पर दे रखा था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद शराब की आपूर्ति कहां की जानी थी। मामले में गोदाम के संचालन और शराब की खेप से जुड़े अन्य बिंदुओं की भी जांच की जा रही है। सीमा पर होती है चेकिंग इतनी सख्ती के बावजूद शराब की आपूर्ति होने के सवाल पर सहायक आयुक्त ने बताया कि सीमावर्ती राज्य और नेपाल की सीमा पर नियमित चेकिंग की जाती है तथा शराब की खेप भी पकड़ी जाती है। हालांकि, सीमा पर हर ट्रक की चेकिंग संभव नहीं है, क्योंकि इससे जाम लगने के साथ विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसी का लाभ शराब तस्करी में संलिप्त असामाजिक तत्व उठाते हैं और शराब बिहार के विभिन्न जिलों तक पहुंच जाती है, जहां उसे पकड़ा जाता है।  

सम्राट चौधरी कैबिनेट के बड़े फैसले, सोनपुर में बनेगी सैटेलाइट टाउनशिप और पटना में भूमिगत सड़क की तैयारी

पटना सम्राट चौधरी की कैब‍िनेट ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप एरिया में जमीन की खरीद-ब‍िक्री को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बैठक में लिए गए निर्णय की बाबत मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने विस्‍तार से जानकारी दी। डीसीआर के अनुसार होगा जमीन का उपयोग उन्‍होंने कहा कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण पर लगी रोक को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय सरकार ने ले लिया है। टाउनशिप के विकास योजना के अधिसूचित होने के बाद भवनों का निर्माण एवं भूमि का विकास संबंधित विकास योजना में निर्धारित भूमि उपयोग तथा उसके अंतर्गत लागू डीसीआर के अनुरूप किया जाएगा। इसके अलावा सोनपुर क्षेत्र के अंतर्गत सैटेलाइट टाउनशिप में अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफिल्ड हवाई अड्डा, फिल्म सिटी, शैक्षणिक संस्थानों और विकास कार्य का निर्मण होगा। साथ ही सोनपुर सैटेलाइट टाउनशिप के क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा। पटना में बनेगी अंडरग्राउंड रोड कॉरिडोर पटना में बढ़ते ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए अंडरग्राउंड रोड कॉरिडोर को विकसित करने पर राज्य सरकार के स्तर से सहमति मिली है। इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी कार्य के लिए 18 करोड़ 21 लाख रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई है। यह भूमिगत सड़क पटना के विभिन्न इलाकों आर ब्लॉक चौराहा से कंकड़बाग, डाकबंगला चौराहा से पटना वीमेंस कॉलेज तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को भूमिगत मार्गों से जोड़ने के लिए अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) कराया जाएगा। इसके अलावा विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ) की लंबाई 90 किमी है। इसके निर्माण के लिए विस्तृत डीपीआर, भूमि अधिग्रहण समेत अन्य अनुमति प्राप्त करने के लिए 2.60 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी तरह नारायणी पथ (दरिहारा (कोन्हुआ)- डुमरिया घाट, गोपालगंज) की लंबाई 73.51 किमी है। इसका डीपीआर तैयार करने समेत अन्य कार्यों के लिए 2.10 करोड़ रुपये की स्वीकृत दी गई है।

सोनपुर मेले का अनोखा इतिहास: कैसे पशु व्यापार का केंद्र बना किसानों की आवाज और जनजागरण का मंच

 नयागांव (सारण)  गंगा-गंडक के संगम के पास लगने वाला विश्वविख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला केवल धार्मिक आस्था और पशु व्यापार के लिए ही प्रसिद्ध नहीं रहा, बल्कि इसने किसानों के अधिकारों की लड़ाई को भी नई पहचान दी। कभी जंगी हाथियों और घोड़ों की खरीद-बिक्री से चर्चा में रहने वाला यह मेला अंग्रेजी शासन के दौर में किसान आंदोलन और राजनीतिक जागरूकता का मंच बना। यहां जुटने वाली भीड़ ने व्यापार के साथ विचारों के आदान-प्रदान का रास्ता भी खोला। इस साल मेला 22 नवंबर से 23 दिसंबर तक आयोजित होगा। जंगी हाथियों और घोड़ों के कारोबार से बनी पहचान सोनपुर मेले की ऐतिहासिक पहचान इसके विशाल पशु बाजार से जुड़ी रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से व्यापारी और खरीदार हाथियों, घोड़ों, बैलों सहित अन्य पशुओं की खरीद-बिक्री के लिए यहां पहुंचते थे। पुराने समय में युद्ध और सैन्य गतिविधियों में हाथियों व घोड़ों की अहम भूमिका होने के कारण इनके व्यापार का विशेष महत्व था। मेले से जुड़ी जनश्रुतियों में चंद्रगुप्त मौर्य, मुगल बादशाह अकबर और वीर कुंवर सिंह के नाम भी लिए जाते हैं, हालांकि इन दावों के लिए ठोस ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि जरूरी है। जब पशु बाजार बना किसानों की आवाज का मंच अंग्रेजी शासन के दौरान किसानों को ऊंचे लगान और जमींदारी शोषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में सोनपुर मेले की विशाल भीड़ किसान नेताओं के लिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बनी। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने किसानों को संगठित करने और उनके अधिकारों की आवाज उठाने में अहम भूमिका निभाई। मेले में होने वाले किसान सम्मेलनों ने कृषि से जुड़े सवालों को व्यापक चर्चा का विषय बनाया। 17 नवंबर 1929 को बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना सोनपुर मेले के इतिहास में 17 नवंबर 1929 की तारीख खास महत्व रखती है। इसी दिन यहां बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना हुई थी। स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके प्रथम अध्यक्ष और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह महामंत्री बने। इस पहल ने बिहार में किसान आंदोलन को संगठित स्वरूप देने में योगदान दिया। आगे चलकर किसान आंदोलन का विस्तार हुआ और 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना हुई। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी बनी रही अहमियत सोनपुर मेला ब्रिटिश शासन के दौरान सामाजिक और राजनीतिक विचारों के प्रसार का माध्यम भी रहा। ऐतिहासिक विवरणों में 1908 में सोनपुर में हुई एक बैठक का उल्लेख मिलता है, जिसे बिहार में कांग्रेस संगठन के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। मेले में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क का अवसर मिलता था। इस तरह सोनपुर की पहचान पशु व्यापार से आगे बढ़कर जनजागरण से भी जुड़ गई। हरिहरनाथ मंदिर और गज-ग्राह की कथा से धार्मिक पहचान सोनपुर मेले की पहचान भगवान हरिहरनाथ मंदिर और गज-ग्राह की पौराणिक कथा से भी जुड़ी है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा-गंडक के संगम में स्नान और मंदिर में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ मेले में व्यापार, प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी विस्तार हुआ है। यही विविधता इसे दूसरे मेलों से अलग पहचान देती है। आज भी इतिहास, आस्था और परंपरा का संगम समय के साथ सोनपुर मेले के पशु बाजार का स्वरूप बदला है, लेकिन इसकी ऐतिहासिक पहचान कायम है। एक ओर यहां धार्मिक परंपराएं जीवित हैं, तो दूसरी ओर यह मेला बिहार के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक इतिहास की याद दिलाता है। जंगी हाथियों के कारोबार से लेकर किसानों के संगठित संघर्ष तक, सोनपुर मेले की कहानी बताती है कि यह आयोजन सिर्फ खरीद-बिक्री का बाजार नहीं, बल्कि जनजीवन और बदलावों का भी साक्षी रहा है।

बिहार के किसानों के लिए कमाई का नया रास्ता, तुलसी और लेमनग्रास की खेती से बढ़ेगी आय

पटना  सरकार सुंगधित तेल के उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग एवं विपणन तक की समेकित व्यवस्था विकसित करने पर बल दे रही है। इससे किसानों के उत्पाद को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों के विकास एवं रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उक्त बातें कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मीठापुर स्थित कृषि भवन में बुधवार को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र विस्तार एवं मूल्य संवर्धन पर आयोजित कार्यशाला में किसानों से कही। सुगंधित तेलों के उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आमदनी उन्होंने कहा कि कृषि का विविधीकरण समय की आवश्यकता है। बिहार की कृषि-जलवायु परिस्थितियां तुलसी, लेमनग्रास एवं अन्य सुगंधित पौधों की खेती के अनुकूल हैं। इनकी वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुखी खेती से सुगंधित तेल के उत्पादन से किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ आसवन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, मानकीकरण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन से भी जोड़ना होगा। इससे मूल्य संवर्धन में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। गुणवत्ता जांच के लिए प्रयोगशालाओं, मानकों और बाजार संपर्क को मजबूत किया जाएगा। कार्यशाला के सुझावों के आधार पर उपयुक्त फसलों की पहचान, उत्पादन क्लस्टरों के विकास, किसान प्रशिक्षण और प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार की रणनीति तैयार होगी। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया कार्यशाला में एसेंशियल आयल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष एवं महासचिव, विभागीय वरीय पदाधिकारी, सभी जिलों के उद्यान पदाधिकारी और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती करने वाले किसान शामिल हुए। प्रत्येक जिले से तीन किसानों को आमंत्रित किया गया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय और इस्लामपुर स्थित औषधीय एवं सुगंधित पौधों से संबंधित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के कृषि वैज्ञानिक भी उपस्थित थे।  

दिल्ली से बिहार तक सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी, बक्सर से पटना तक सफर होगा तेज

पटना दिल्ली से पटना की सड़क यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए कई एक्सप्रेसवे और हाईवे को जोड़ने की योजना पर जोर है। यमुना, आगरा-लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के साथ बिहार के सड़क नेटवर्क का बेहतर संपर्क बनने से यात्रियों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, 11-12 घंटे में सफर पूरा होने का दावा पूरे मार्ग के तैयार होने और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा। दिल्ली से पूर्वांचल तक एक्सप्रेसवे का सहारा प्रस्तावित यात्रा मार्ग में दिल्ली से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे, फिर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ से गाजीपुर तक पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन सड़कों से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों को पार करना आसान होता है। आगे बिहार तक पहुंचने के लिए गाजीपुर, बक्सर और पटना के बीच सड़क संपर्क अहम रहेगा। गाजीपुर से बक्सर की कनेक्टिविटी अहम गाजीपुर से बक्सर के बीच बेहतर सड़क संपर्क और गंगा पर पुल की सुविधा इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खंड में रास्ता सुगम होने पर उत्तर प्रदेश से बिहार आने-जाने वाले यात्रियों का समय बच सकता है। हालांकि, पूरे मार्ग पर यात्रा समय का आकलन संबंधित सड़क और पुल परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति के आधार पर ही किया जाना चाहिए। बक्सर से पटना तक फोरलेन और एलिवेटेड रोड बक्सर से पटना के बीच फोरलेन सड़क और एलिवेटेड रोड नेटवर्क से सफर आसान बनाने की संभावना है। बेहतर सड़क संपर्क से आरा समेत रास्ते के प्रमुख शहरों तक पहुंचने में सुविधा हो सकती है। बाईपास और चौड़ी सड़कों से शहरों के भीतर लगने वाले जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है। गंगा एक्सप्रेसवे से भी मिल सकता है वैकल्पिक रास्ता दिल्ली से पटना जाने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे और आगे के सड़क नेटवर्क को जोड़कर वैकल्पिक मार्ग की संभावना भी बताई जा रही है। इस रास्ते से प्रयागराज की ओर बढ़कर बिहार के बक्सर, आरा और पटना तक पहुंचने का विकल्प मिल सकता है। इस मार्ग की उपयोगिता संबंधित सड़कों की उपलब्धता और कनेक्टिविटी पर निर्भर करेगी। 11-12 घंटे का सफर कब संभव होगा? दिल्ली से पटना तक 11-12 घंटे में पहुंचने का अनुमान तभी व्यावहारिक होगा, जब पूरे मार्ग पर जरूरी सड़क संपर्क चालू हों और जाम, निर्माण कार्य या अन्य बाधाएं कम हों। फिलहाल इसे निश्चित यात्रा समय के बजाय संभावित अनुमान के तौर पर देखना चाहिए। एक्सप्रेसवे और हाईवे का बेहतर नेटवर्क तैयार होने से दिल्ली, लखनऊ, गाजीपुर, बक्सर, आरा और पटना के बीच सड़क यात्रा को लाभ मिल सकता है।

झारखंड में 321 पेयजल योजनाएं ठप, भुगतान नहीं मिलने से 40 से अधिक एजेंसियों ने रोका काम

रांची राज्य में आदिम जनजाति (प्रीमिटिव ट्राइव्स) के घरों तक पेयजल पहुंचाने की योजना रुकी पड़ी है। केंद्र सरकार ने इससे जुड़ी 321 योजनाओं को 2024-25 और 2025-26 में स्वीकृति दी है। इस योजना पर राज्य में कुल 235 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं। अपने हिस्से की 65 करोड़ राशि देने के बाद केंद्र सरकार ने बाकी की 65 करोड़ राशि रोक कर रखी हुई है। इस वजह से 40 से अधिक एजेंसियों को भुगतान नहीं हुआ है। एजेंसियों के काम बंद करने की वजह से योजना पूर्ण होने के बाद भी आदिम जनजाति के घरों तक जल नहीं पहुंच रहा है। प्रिमिटिव ट्राइव्स को घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना केंद्र सरकार द्वारा लाई गई है। जिसमें 30 प्रतिशत के करीब राज्य सरकार का अंशदान होता है। स्कीम आईडी नहीं बनने से हो रही समस्या जलापूर्ति योजना से जुड़े एजेंसी के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी स्कीम आईडी ही नहीं बन पा रही है। ऐसे में पेयजल स्वच्छता विभाग के पोर्टल पर अपने किए काम की जानकारी वो अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से योजना का भुगतान नहीं हो रहा है। इसके लिए विभाग स्तर पर कई बार कार्रवाई के लिए कहा गया है। राज्य में करीब तीन लाख आदिम जनजाति के लोग रहते हैं। इनके आसपास ही क्लस्टर बनाकर पेयजल के स्रोतों से जल उपलब्ध कराने के लिए यह योजना बनाई गई है। कई योजनाओं में साठ प्रतिशत तक काम पूरा हो चुका है।