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सरकार और संगठन के बीच तालमेल बढ़ाने की कवायद, NDA नेताओं के साथ सीएम की अहम बैठक

पटना  बिहार में सरकार-संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सभी पांच सहयोगी दलों के जिलाध्यक्षों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। 10 जुलाई को लोक सेवक आवास परिसर में यह बैठक होगी। माना जा रहा है कि पहली बार एक साथ सभी सहयोगी दलों के जिला स्तर के संगठनात्मक नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री का सीधा संवाद होगा। बैठक में पूर्व सीएम नीतीश कुमार के अलावा भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के जिलाध्यक्ष शामिल होंगे व‍िभ‍िन्‍न बिंदुओं पर चर्चा करेंगे मुख्‍यमंत्री सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री संगठन के पदाधिकारियों से जिलों की राजनीतिक स्थिति, सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसरोकार के मुद्दों तथा गठबंधन के बीच बेहतर तालमेल पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक और स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी भी ली जाएगी। सीएम जिलाध्यक्षों से अपेक्षा करेंगे कि वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। बैठक में विकास कार्यों की प्रगति, जन शिकायतों के त्वरित समाधान तथा सरकार के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। बांकीपुर विधानसभा चुनाव के मध्य केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं, बल्कि आगामी चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जिला स्तर के पदाधिकारी किसी भी राजनीतिक दल की सबसे मजबूत कड़ी माने जाते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का सीधे उनसे संवाद करना सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। गठबंधन सहयोग‍ियों में समन्‍वय पर भी हो सकती चर्चा सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रत्येक जिले की राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन की सक्रियता, बूथ स्तर की तैयारियों तथा गठबंधन सहयोगियों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है। मुख्यमंत्री जिलाध्यक्षों से यह भी जानना चाहेंगे कि सरकार की योजनाओं को लेकर जनता की क्या प्रतिक्रिया है और किन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। एनडीए सरकार बनने के बाद यह अपनी तरह की पहली व्यापक बैठक मानी जा रही है, जिसमें गठबंधन के सभी पांच दलों के जिला अध्यक्ष एक मंच पर मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहेंगे। राजनीतिक हलकों की नजर इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि इससे सरकार और गठबंधन की आगे की रणनीति के संकेत मिलने की संभावना है। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर आगामी दिनों में संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत करने तथा जनसंपर्क अभियान को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं। बताया जाता है कि बैठक में प्रवेश करने से पूर्व पूरी जांच की जाएगी। सूची में नाम है या नहीं, यह देखने के बाद ही प्रवेश द‍िया जाएगा।   घोषणापत्र की बातों को जमीन पर उतारेंगे बैठक की बाबत जदयू के राष्‍ट्रीय कार्यकारी अध्‍यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि, हम लोग आपस में बैठते रहते हैं। सभी पार्टी के जिलाध्‍यक्ष, सरकार के मंत्री और पार्टी नेता रहेंगे। बैठक में जदयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष व पूर्व सीएम नीतीश कुमार की भी उपस्‍थ‍िति‍ रहेगी। इसके अलावा एनडीए के शीर्ष नेता भी बैठक में रहेंगे। उन्‍होंने कहा कि एनडीए में समन्‍वय की कोई कमी नहीं है। इंड‍ी गठबंधन वाली बात थोड़े है कि चुनाव लड़े और अगले दिन से गालीगलौज करने लगे। सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्‍य है कि मैनीफेस्‍टों में कही गई बातों को जमीन पर उतारा जाए।    

पटना कोर्ट में खान सर की जमानत याचिका पर सुनवाई, फैसला 8 जुलाई तक टला

पटना  खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर फैजल खान (खान सर) की अग्र‍िम जमानत एवं उनके दो गार्डों प्रदीप कुमार एवं तालेबर सिंह जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश रूपेश कुमार देव ने करीब 40 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद पक्ष के वकील के आरोपों पर फैजल खान के आपराध‍िक इतिहास का ब्‍योरा कोर्ट ने मांगा। खान के वकील बोले- उस मामले में बरी हो चुके हैं खान सर के अधिवक्ता का कहना था कि उस केस में वे बरी हो गए हैं। इस पर अदालत ने अधिवक्ता को एक पूरक आवेदन देने को कहा और सुनवाई की तिथि 8 जुलाई को रखी है। इससे पूर्व जिला जज के छुट्टी पर रहने के कारण खान सर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई की तिथ‍ि 7 जुलाई तय की गई थी। इससे पहले 30 जून को कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया था।  उस दिन लोक अभ‍ियोजक ने कोर्ट में कहा था क‍ि फैजल खान के दोनों गार्ड के पास अवैध हथ‍ियार थे। 30 जून को डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का द‍िया था निर्देश दहशत फैलाने के उद्देश्‍य से 2 जून की रात फायरिंग की गई थी। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने हथ‍ियारों के लाइसेंसी होने की बात कही थी। उन्‍होंने दावा किया था कि दोनों के हथ‍ियार के दस्‍तावेज पुलिस ने जब्‍त कर लिए हैं।   इसके बाद कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॅक्‍यूमेंट जमा करने को कहा था। तीन जुलाई सुनवाई की तिथ‍ि तय की थी।  अब 7 जुलाई पर सबकी नजर टिक गई है।   2 जून की रात हुई थी फायरिंग पुलिस जांच में सामने आया था क‍ि जून की रात खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज कोचिंग सेंटर पर पथराव और मारपीट के बाद चार राउंड गोली गार्डों ने चलाई थी। फैजल खान के कहने पर ही गार्डों ने ऐसा किया था। इस आरोप में पूर्व में दर्ज एफआईआर में बाद में खान सर का नाम भी जोड़ा गया था।   उससे पूर्व ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके दो अन्‍य सहयोग‍ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में वे जमानत पर बाहर आए।

बिहार के वैशाली में अस्पताल पर गंभीर आरोप, इलाज के बदले महिला के शोषण और अश्लील वीडियो की जांच शुरू

 वैशाली बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल के एक्स-रे रूम के भीतर एक महिला के साथ अस्पताल के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर यौन शोषण किया. हालांकि, इस पूरे मामले की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।  मामले को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, एक महिला अपनी सास का एक्स-रे कराने राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी. आरोप है कि एक्स-रे कराने के नाम पर उससे पैसे मांगे गए. महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए असमर्थता जताई. इसके बाद उसकी मजबूरी का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया और अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में उसके साथ अनुचित हरकत की गई. इसी कथित घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।  वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में पहले से अवैध वसूली या अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही थीं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  उधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए वैशाली के सिविल सर्जन ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और घटना वास्तव में राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ही है या नहीं. इन सभी पहलुओं की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर अस्पताल भेजी गई है।  स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच टीम वीडियो की प्रामाणिकता, घटना के स्थान और समय सहित सभी तथ्यों की पड़ताल करेगी. रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई क्या है।   

50 साल पुरानी जमीन का रिकॉर्ड बदलेगा, गम्हरिया में जियाडा को मिलेगा मालिकाना हक

जमशेदपुर सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया अंचल में लगभग 50 वर्ष पूर्व अधिग्रहित की गई 3000 एकड़ सरकारी भूमि के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है। क्या था मामला? करीब 50 साल पहले झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के लिए इस भूमि का अधिग्रहण कर रैयतों को मुआवजा दे दिया गया था। लंबे समय तक राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त न होने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर जमीन पुराने रैयतों के नाम ही दिख रही थी। इसी विसंगति का फायदा उठाकर भू-माफिया द्वारा सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की जा रही थी। इससे अंचल कर्मचारियों और बिचौलियों के पौ बारह थे। अब क्या होगी कार्रवाई? गम्हरिया के अंचल अधिकारी (सीओ) प्रवीण कुमार के अनुसार, जियाडा के ऑनलाइन आवेदन के बाद प्रभावित पक्षों को नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगी जा रही हैं। विधिवत सुनवाई के बाद सरकारी अभिलेखों में जियाडा का मालिकाना हक दर्ज कर दिया जाएगा, जिससे धोखाधड़ी पर पूरी तरह लगाम लगेगी। औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार आदित्यपुर-गम्हरिया औद्योगिक क्षेत्र वर्तमान में गंभीर भूमि संकट से जूझ रहा है। जमीन न होने के कारण नए उद्योगों की स्थापना के लिए 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं। इस म्यूटेशन प्रक्रिया और हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद जियाडा को सुगम भूमि आवंटन सुनिश्चित करने में बड़ी सफलता मिलेगी, जिससे क्षेत्र में भारी निवेश के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।  

बिहार में हवाई सेवा का विस्तार, पताही एयरपोर्ट को कोड-बी एयरपोर्ट बनाने की तैयारी तेज

पटना बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित पताही एयरपोर्ट से छोटे विमानों की सेवा शुरू करने की तैयारी जोर पकड़ चुकी है। इसी कड़ी में पताही एयरपोर्ट को कोड-बी एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन निर्माण का काम अगले साल जून तक पूरा हो जाएगा। वहीं, रनवे के लिए दस दिन में टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। 43 करोड़ 13 लाख रुपये की लागत से एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण एवं विकास के प्रथम चरण का कार्य दो जुलाई से शुरू हो गया है। इसके तहत 23 करोड़ 47 लाख रुपये की लागत से टर्मिनल भवन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन, फायर स्टेशन भवन सहित अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड में पूरी की जाएगी। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार परियोजना के प्रथम चरण की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। पिछले महीने निर्माण एजेंसी को कार्य आवंटित करते हुए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था। दो जुलाई से निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत भी हो गई है। एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 11 माह की समय-सीमा दी गई है। निर्धारित समय के अनुसार टर्मिनल भवन अगले वर्ष जून तक तैयार हो जाएगा। उत्तर बिहार में हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। पटना, गयाजी, दरभंगा और पूर्णिया से नागरिक विमान सेवाएं शुरू होने के बाद अब मुजफ्फरपुर से भी उड़ान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। छोटे विमानों के संचालन की तैयारी एयरपोर्ट के रनवे को विकसित करने के लिए अगले दस दिनों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। नागरिक विमानों के संचालन के अनुरूप रनवे को तैयार करने के लिए उसका पक्कीकरण किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में यहां से छोटे विमानों के संचालन की योजना है। इसे ध्यान में रखते हुए टर्मिनल भवन की क्षमता एक समय में लगभग 150 यात्रियों के आवागमन के अनुरूप विकसित की जा रही है। दशकों पुरानी मांग पर दस साल पहले शुरू हुई पहल दशकों से पताही एयरपोर्ट को दोबारा चालू करने की मांग उठ रही थी, लेकिन 10 साल पहले ही इसपर गंभीर पहल शुरू हुई। तत्कालीन डीएम आनंद किशोर के समय दो निजी विमान कंपनियों ने निजी सेवा में रुचि दिखाई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद डीएम मो. सोहैल ने वाणिज्य मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी कि एयरपोर्ट चालू होने से यहां प्रति व्यक्ति आय में कम से कम चार फीसदी का इजाफा होने की संभावना है। इसके लिए उन्होंने एयर ट्रैफिक सर्वे भी कराया, जिसमें बताया गया कि उत्तर बिहार से करीब सात हजार यात्री पटना जाकर विमान पकड़ते हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट चालू करने के लिए 548 एकड़ जमीन की मांग के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लोगों की उम्मीदें तब जगी जब नरेंद्र मोदी ने चुनावी सभा में एयरपोर्ट के पुन: चालू करने की घोषणा की। इसके बाद ही इसे घरेलू विमान सेवा के लिए चुना गया और अब टर्मिनल अगले साल जून तक पूरा करने का टेंडर पास हुआ है।

झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, अब प्रोबेशन खत्म होने के बाद ही मिलेगा प्रमोशन का लाभ

रांची झारखंड सरकार ने राज्यकर्मियों की प्रोन्नति (प्रमोशन) से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है. अब राज्यकर्मी प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए पात्र होंगे. यानी प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित न्यूनतम सेवा अवधि की गणना शुरू होगी. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में संशोधित संकल्प जारी कर दिया. इस प्रस्ताव को दो जुलाई को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिली थी. प्रोबेशन के बाद ही जुड़ेगी प्रोन्नति की सेवा अवधि सरकार की ओर से जारी संशोधित संकल्प के अनुसार, जिन मूल पदों पर दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि निर्धारित है और अगले पद पर प्रोन्नति के लिए दो या तीन वर्ष की सेवा अवधि तय है, वहां अब दोनों अवधियां अलग-अलग मानी जाएंगी. यानी पहले कर्मचारी को प्रोबेशन अवधि पूरी करनी होगी, उसके बाद ही प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि की गणना शुरू होगी. चार साल बाद मिलेगी पहली प्रोन्नति नये प्रावधान के तहत यदि किसी कर्मचारी का मूल पद 4800 रुपये ग्रेड पे का है और प्रथम प्रोन्नति 5400 रुपये ग्रेड पे वाले पद पर होनी है, जहां प्रोन्नति के लिए दो वर्ष की सेवा अवधि निर्धारित है तथा मूल पद पर दो वर्ष का प्रोबेशन है, तो अब कर्मचारी को पहली प्रोन्नति के लिए कुल चार वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी. पहले दो वर्ष प्रोबेशन में बीतेंगे और उसके बाद दो वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने पर ही वह प्रोन्नति के लिए पात्र होगा. सरकार ने बताया संशोधन का कारण राज्य सरकार ने संशोधित संकल्प में कहा है कि वर्तमान व्यवस्था में कई सेवाओं में प्रोबेशन अवधि और प्रोन्नति के लिए निर्धारित सेवा अवधि लगभग एक साथ पूरी हो रही थी, जो प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं माना गया. इसी विसंगति को दूर करने के उद्देश्य से नियमों में संशोधन किया गया है. जहां नियम नहीं, वहां लागू होगा संशोधित संकल्प सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन ग्रेड पे के बीच प्रोन्नति की अवधि वर्ष 2014 के संकल्प में निर्धारित नहीं है, वहां बीच के सभी स्तरों की निर्धारित सेवा अवधि जोड़कर पात्रता तय की जाएगी. वहीं जिन सेवा नियमावलियों में पहले से प्रोन्नति की अलग व्यवस्था है, वहां वही नियम प्रभावी रहेंगे. जिन सेवाओं में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां वर्ष 2014 के संशोधित संकल्प के प्रावधान लागू होंगे. सचिवालय सेवा संघ ने किया विरोध इधर, झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने सरकार के इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर संशोधित संकल्प को तत्काल निरस्त करने का आग्रह किया है. संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में जारी संकल्प संख्या-3286 का उद्देश्य विभिन्न सेवा संवर्गों में प्रोन्नति के लिए सेवा अवधि में एकरूपता लाना था. नए संशोधन से यह व्यवस्था प्रभावित होगी और अलग-अलग सेवा संवर्गों के बीच फिर असमानता की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. 2014 के बाद अब बदलाव की क्या जरूरत: संघ संघ ने सवाल उठाया है कि वर्ष 2014 से लागू व्यवस्था में 12 वर्ष बाद संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी. संघ के अनुसार, संशोधित नियम लागू होने पर अन्य सेवाओं के कर्मचारियों को जहां लेवल-7 से लेवल-8 में प्रोन्नति के लिए केवल दो वर्ष की प्रतीक्षा करनी होगी, वहीं झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारियों को आठ वर्ष तक इंतजार करना पड़ेगा. संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि संशोधित नियम पर तत्काल रोक लगाकर पुराने प्रावधान को ही लागू रखा जाए, ताकि सभी सेवा संवर्गों के कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित हो सके.

बिहार सरकार की बड़ी घोषणा: अब हाईवे और बड़े पुलों पर देना होगा टोल, जारी हुई नई नियमावली

पटना बिहार में स्टेट हाईवे, बड़े पुलों, बाइपास और सुरंगों पर टोल टैक्स लगेगा। इसको लेकर राज्य में बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली 2026 की अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी गई। इसके साथ ही राज्य का टोल टैक्स नीति प्रदेश में लागू हो गई। दो लेन से अधिक तथा चार लेन से कम के स्टेट हाईवे पर तय राशि का 60 प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। चार लेन तथा इससे अधिक चौड़ी सड़कों पर तय राशि का सौ प्रतिशत टोल टैक्स लगेगा। इसी प्रकार मध्यवर्ती लेन (5.5 मीटर चौड़ी) सड़क पर 50 प्रतिशत टैक्स लगेगा। अब इसी नीति के आधार पर टोल टैक्स वसूली की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसको लेकर पथ निर्माण विभाग उन पथों और पुलों का चयन कर रहा है, जिसपर टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। विभाग एक आकलन कर लेगा कि किस पथ से कितने वाहन गुजरते हैं। इसके बाद टोट टैक्स की जिम्मेदारी देने के लिए निजी एजेंसी का चयन किया जाएगा। इन एजेंसियों के चयन के लिए निविदा कुछ दिनों में जारी की जाएगी। इसके बाद टोल वसूली निजी एजेंसी के माध्यम से शुरू हो जाएगी। यदि वाहन मालिक निर्धारित शुक्ल का भुगतान नहीं करता है तो उस पर तिगुना जुर्माना लगेगा। पुल पर निर्धारण अलग पुल पर टोल टैक्स का निर्धारण उसकी लंबाई में दस गुना जोड़कर किया जाएगा। यानी कोई 50 किमी सड़क है, उसमें पांच किमी लंबा पुल और 45 किमी सड़क का हिस्सा है तो उस पर कुल टोल टैक्स 45 प्लस 50 अर्थात 95 किमी पर तय होगा। दोपहिया, तिपहिया, ट्रैक्टरों और कंबाइन हार्वेस्टरों और पशु-चलित वाहन पर कर नहीं लगेगा। सर्विस रोड होगा तो यह छूट नहीं मिलेगी। वाहनों से टोल टैक्स की निर्धारित दर गाड़ी में लगे फास्ट टैग या अन्य स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के माध्यम से ही कटेगी। विशिष्ट श्रेणियों के लिए छूट एवं पात्र उपयोगकर्ताओं के लिए रियायती पास एवं बहु-यात्रा रियायतों का भी प्रावधान किया गया है। इसमें बिना फास्ट टैग वाले वाहनों के मामलों में अधिक शुल्क और अधिक भारयुक्त वाहनों के मामले में भी अधिक शुल्क लेने के प्रावधान किए गए हैं। इस तरह लगेंगे शुल्क ● वैन, कार, जीप समेत जैसे अन्य हल्के वाहनों पर 1.25 रुपये प्रति किमी। ● छोटे व्यावसायिक वाहनों (मिनी बस-माल वाहन) पर 2 रुपये प्रति किमी। ● बस और ट्रक, जो दो धुरी वाले हैं, उनपपर 4.25 रुपये प्रति किमी। ● तीन धुरी वाले वाणिज्यिक वाहन पर 4.60 रुपये प्रति किमी। ● भारी निर्माण मशीनरी या उर्थ मूविंग उपस्कर, छह धुरी वाले से 6.65 6.65 रुपये प्रति किमी। ● विशाल आकार के वाहन (सात या अधिक धुरी वाले) से 8.10 रुपये प्रति किमी।

हर ब्लॉक में मॉडल स्कूल, हर जिले में मेडिकल कॉलेज की योजना

 पटना  मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को दैनिक जागरण के यूफोरिया कार्यक्रम में राज्य की कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर दूरगामी कार्ययोजना स्पष्ट की। बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक वर्ष में बिहार में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की आधारशिला रख देंगे। सभी 534 ब्लाॅक में माॅडल स्कूल और 38 जिलों में खुलेंगे मेडिकल काॅलेज राज्य के 14 हजार से अधिक हाई स्कूलों में से सभी 534 ब्लाॅकों को चिन्हित कर वहां शानदार माॅडल स्कूल बनाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 में वोट मांगने से पहले बिहार के सभी 38 जिलों में सर्वसुविधायुक्त मेडिकल काॅलेज व अस्पताल बना दिए जाएं। इसके पहले कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्यमंत्री, कला संस्कृति मंत्री डाॅ. प्रमोद चंद्रवंशी, दैनिक जागरण बिहार के मुख्य महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी, राज्य संपादक आलोक मिश्रा, दैनिक जागरण बिहार के डिप्टी एडिटर अश्विनी कुमार सिंह आदि ने किया। 126 किमी लंबा मरीन ड्राइव बनेगा राज्य की समृद्धि में दैनिक जागरण की बड़ी भूमिका की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी माह से 213 नए डिग्री काॅलेज स्थापित करने का काम शुरू किया जा रहा है। राज्य में 126 किलोमीटर लंबा शानदार मरीन ड्राइव बनाने का काम किया जाएगा। उन्‍होंने कई अन्‍य बिंदुओं पर भी अपनी बातें रखीं। कला संस्कृति मंत्री डॉ प्रमोद चंद्रवंशी ने कहा कि बिहार के सारे जिलाधिकारियों व एसपी को पत्र भी लिख दिया गया है।राज्य में कहीं भी किसी तरह से कोई फूहड़ गाने बजते हैं, उसको कड़ाई से बंद कराएं। इसमें किसी तरह की कोताही स्‍वीकार्य नहीं है।  

बाबा बैद्यनाथ से टांगीनाथ धाम तक, जानिए झारखंड के प्रमुख शिवालय

 रांची  भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना सावन शुरू होते ही झारखंड पूरी तरह शिवमय हो गया है। राज्य के प्रसिद्ध शिवालयों में सुबह से ही बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं। देवघऱ से लेकर रांची, गुमला और खूंटी तक लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। अगर आप भी इस सावन बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेना चाहते हैं, तो झारखंड के इन प्रसिद्ध शिव मंदिरों की यात्रा आपकी आस्था को और मजबूत बना सकती है। बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। सावन के महीने में यहां लाखों कांवरिये और श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। हर साल आयोजित होने वाला श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है, इसलिए इसे मनोकामना लिंग भी कहा जाता है। बासुकीनाथ धाम, देवघर-दुमका मार्ग देवघर-दुमका मार्ग पर स्थित बासुकीनाथ धाम का धार्मिक महत्व बेहद खास है। मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ में पूजा किए बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। सावन के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा रहता है। पहाड़ी मंदिर, रांची राजधानी रांची का प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर सावन में श्रद्धालुओं का प्रमुख आकर्षण बन जाता है। करीब 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 468 सीढ़ियां चढ़़नी पड़ती है। सावन में रोजाना फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार होता है और सुबह तड़के से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। आमरेश्वर धाम (अंगराबाड़ी), खूंटी खूंटी जिले में स्थित आमरेश्वर धाम, जिसे श्रद्धालु अंगराबाड़ी के नाम से भी जानते हैं, सावन में आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। इस प्राचीन मंदिर को झारखंड का मिनी बाबा धाम कहा जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करने और भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। टांगीनाथ धाम, गुमला गुमला जिले का टांगीनाथ धाम अपने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान शिव के अनेक प्राचीन शिवलिंग और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं मौजूद हैं। मान्यता है कि भगवान परशुराम का दिव्य फरसा आज भी यहां स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। सावन में यहां विशेष पूजा और श्रावणी मेले का आयोजन होता है। क्यों खास है झारखंड का सावन? झारखंड में सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का भी प्रतीक है। सुल्तानगंज से देवघर तक की कांवर यात्रा, लाखों श्रद्धालुओं की पदयात्रा और शिवालयों में होने वाले विशेष अनुष्ठान इस महीने को और भी खास बना देते हैं। अगर आप इस सावन आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो झारखंड के ये शिव मंदिर आपकी सूची में जरूर होने चाहिए।  

परिवार पहचान पत्र अपडेट पर सरकार का बड़ा फैसला, वृद्धावस्था पेंशन जारी रहेगी

चंडीगढ़  हरियाणा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद हजारों बुजुर्गों में यह आशंका पैदा हो गई थी कि यदि उनके पास उम्र साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं हुए तो उनकी वृद्धावस्था सम्मान भत्ता पेंशन बंद हो सकती है। सरकार ने अब इस चिंता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जा रही है, जिससे किसी भी पात्र बुजुर्ग की पेंशन केवल दस्तावेजों के अभाव में नहीं रुकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों की जन्मतिथि का सत्यापन अभी बाकी है, उन्हें पहले की तरह नियमित रूप से पेंशन मिलती रहेगी। हरियाणा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन बुजुर्गों की थी, जिनका जन्म कई दशक पहले हुआ था और जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की संख्या काफी अधिक है। इसे देखते हुए सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए नई व्यवस्था पर काम शुरू किया है। बुजुर्ग की आयु का होगा सत्यापन नई व्यवस्था के तहत यदि किसी बुजुर्ग के पास जन्मतिथि सत्यापित करने के लिए निर्धारित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो परिवार पहचान पत्र में दर्ज उसके सबसे बड़े बेटे या बेटी के जन्म संबंधी रिकार्ड के आधार पर बुजुर्ग की आयु का सत्यापन किया जा सकेगा। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला ने बताया कि इसके लिए जरूरी होगा कि बड़ी संतान का नाम परिवार पहचान पत्र में दर्ज हो तथा उसकी जन्मतिथि पहले से सत्यापित हो। इस व्यवस्था से हजारों ऐसे लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो केवल दस्तावेजों की कमी के कारण परेशान थे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल जन्मतिथि सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और इसका सीधा संबंध पेंशन भुगतान से नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश हैं कि कोई भी पात्र नागरिक केवल सत्यापन प्रक्रिया लंबित होने के कारण सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं होगा। जन्मतिथि सत्यापन के लिए चाहिएं पांच प्रमुख दस्तावेज वर्तमान में जन्मतिथि सत्यापन के लिए पांच दस्तावेज मान्य हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, दसवीं कक्षा की मार्कशीट, वर्ष 2019 तक बना मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट तथा पेंशन पेमेंट आर्डर (पीपीओ) शामिल हैं। जिन लाभार्थियों के पास इनमें से कोई भी दस्तावेज उपलब्ध है, उन्हें सरकार की ओर से भेजे गए संदेश के अनुसार 30 दिनों के भीतर संबंधित दस्तावेज परिवार पहचान पत्र पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार दिसंबर तक परिवार पहचान पत्र में दर्ज सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को अपडेट और सत्यापित करने का लक्ष्य रखा गया है। हरियाणा सरकार का उद्देश्य किसी भी पात्र व्यक्ति की पेंशन या अन्य सरकारी सुविधा बंद करना नहीं, बल्कि रिकार्ड को अधिक प्रमाणिक बनाना है ताकि भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी विवाद और रुकावट के पात्र लोगों तक आसानी से पहुंचता रहे।