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अमित शाह के ऐलान के बाद बिहार में UCC पर घमासान, JDU ने साफ किया रुख

पटना अभी हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया था कि भाजपा शासित राज्यों में यूसीसी लागू होगा। लेकिन यूसीसी को लेकर बिहार में अब पेंच फंसता नजर आ रहा है। दरअसल बिहार में सरकार में सहयोगी जदयू की तरफ से कहा गया है कि बिहार में यूसीसी लागू करने का सवाल ही खड़ा नहीं होता है। बिहार सरकार के मंत्री और जदयू के दिग्गज विधायक श्याम रजक ने कहा कि संसद में उनकी पार्टी यूसीसी का समर्थन किया था लेकिन यह भी कहा था कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। श्याम रजक ने कहा, ‘जब संसद में यह पास हो रहा था तब हमने उसी समय कहा था और हमारे नेता ने कहा था कि इसको हम अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। हमने उस बिल का समर्थ किया था। लेकिन समर्थन के साथ-साथ हमने कहा था कि बिहार में लागू नहीं होगा और आज तक हम उसी पर कायम हैं।’ श्याम रजक ने आगे कहा कि बिहार में बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं। लेकिन एनडीए का जो गठबंधन है उसमें जनता दल (यू), लोजपा (आर) और रालोमो सभी लोग मिलजुले हुए हैं। यहां स्वतंत्र सरकार नहीं है। श्याम रजक ने कहा कि किसी भी सूरत में इसके लागू होने का सवाल ही नहीं उठता है। आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में ऐलान किया था कि देश के 21 राज्यों में भाजपा और भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करेंगी। गृहमंत्री शाह ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए पिछले 12 वर्षों के दौरान केंद्र की उपलब्धियों और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की 25 साल की यात्रा का जिक्र किया। इस दौरान शाह ने तीन तलाक, भारतीय न्याय संहिता समेत मोदी सरकार द्वारा लिए गए कई बड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के जरिए देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में एक ही वर्ष में सजा दिलाने की दर में करीब 30 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है, जिससे यह तय हो सके कि पीड़ित को तीन साल के भीतर न्याय मिल सके। 17 से सेवा संकल्प अभियान अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और गुजरात तथा केंद्र में मोदी शासन के 25 साल पूरे होने पर 17 सितंबर से 17 अक्तूबर तक देशभर में सेवा संकल्प अभियान की घोषणा की थी। समान नागरिक संहिता समान नागरिक संहिता का अर्थ है एक देश, एक कानून। इसमें विवाह और तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारा, गोद लेना, भरण-पोषण, वसीयत, पारिवारिक अधिकार से जुड़े विषयों पर सभी के लिए एक जैसा कानून होता है। अभी भारत में आपराधिक मामलों के लिए तो एक ही कानून है, लेकिन सिविल मामलों में धर्मों के अपने पर्सनल लॉ लागू होते हैं।

समस्तीपुर में PM आवास योजना की सूची होगी सार्वजनिक, 15 दिन में आपत्ति और फिर जारी होगी अंतिम सूची

समस्तीपुर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत पक्का मकान पाने की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों के लिए बड़ी खबर है। अगर आवास सर्वे की सूची में आपका नाम दर्ज है, तो भी आपको थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। सर्वे में नाम शामिल होना योजना का लाभ मिलने की अंतिम गारंटी नहीं माना जाएगा। ग्रामसभा में सार्वजनिक होगी सूची सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अब पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली ग्रामसभा में आवास लाभार्थियों की प्रारूप सूची सार्वजनिक की जाएगी। ग्रामीणों को इस सूची को देखने का पूरा मौका मिलेगा। पात्र व्यक्ति का नाम छूटने या किसी अपात्र का नाम शामिल होने पर आम लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। सत्यापन के बाद बनेगी लिस्ट प्राप्त शिकायतों की गहन जांच और भौतिक सत्यापन के बाद ही लाभार्थियों की अंतिम प्राथमिकता सूची तैयार होगी। बता दें कि 'आवास प्लस-2024' के तहत पांच लाख से अधिक परिवारों का सर्वे हुआ था, जिसमें प्राथमिक जांच के दौरान ही 45 हजार से अधिक लोगों को अयोग्य पाकर बाहर कर दिया गया है। 30 सितंबर तक का समय विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रारूप सूची पंचायत के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित की जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी दिखने पर ग्रामीण पंचायत, प्रखंड या जिला स्तर पर अपनी दावा-आपत्ति जमा कर सकते हैं। ग्रामसभा में विचार-विमर्श के बाद अनुमोदित सूची 30 सितंबर तक संबंधित प्रखंड कार्यालय को भेजनी होगी। अपील करने का मिलेगा मौका प्रखंड स्तर से यह सूची जिला स्तरीय कमिटी को भेजी जाएगी। अगर कोई परिवार ग्रामसभा के फैसले से असंतुष्ट रहता है, तो उसे जिला स्तरीय अपीलीय कमिटी के समक्ष अपनी शिकायत रखने का अवसर मिलेगा। अपीलीय कमिटी महज 15 दिनों के भीतर ऐसी सभी शिकायतों का पारदर्शी तरीके से निपटारा करेगी। 31 अक्टूबर को फाइनल लिस्ट तमाम दावा-आपत्तियों, जांच और संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 31 अक्टूबर को 'आवास प्लस-2024' की अंतिम प्राथमिकता सूची का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा। इससे पहले 2016 से 2021 तक SECC-2011 और उसके बाद आवास प्लस-2018 के सर्वे के आधार पर पक्के मकान बांटे गए थे। दोबारा सर्वे की क्यों पड़ी आवश्यकता आवास प्लस-2018 की सूची संतृप्त होने, कई योग्य परिवारों के नाम छूट जाने और नए परिवारों के गठन के कारण 'आवास प्लस-2024' के जरिए दोबारा सर्वेक्षण कराया गया। अब इसी सर्वे की ग्रामसभा में पड़ताल होनी है, इसलिए जिन ग्रामीणों ने आवेदन किया है, उनके लिए ग्रामसभा की बैठक बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। आवास सर्वे में शामिल 4.5 लाख से अधिक परिवारों को आवास योजना का लाभ दिए जाने को लेकर पंचायत स्तर पर ग्रामसभा कर सूची अनुमोदित करने का निर्देश दिया गया है। अनुमोदित सूची को सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किया जाएगा। 15 दिनों के भीतर लोग अपना दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। 31 अक्टूबर को अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा। – सूर्य प्रताप सिंह, डीडीसी, समस्तीपुर  

चीन को हराकर भारत बना जूनियर एशिया चैंपियन, रांची की तीन बेटियों का शानदार प्रदर्शन

रांची भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने चीन के मोकी में आयोजित एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप 2026 के फाइनल में मेजबान चीन को 1-0 से हराकर लगातार तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत ने आगामी जूनियर विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई कर लिया। भारतीय टीम की इस उपलब्धि में रांची के सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस गर्ल्स, बरियातू रांची की तीन छात्राओं रौशनी आईंद, विनिमा धान और पार्वती टोपनो की अहम भूमिका रही। मिडफील्डर रौशनी आईंद ने पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे। भारत ने यह मुकाबला 19-0 से जीता था। वहीं मिडफील्डर विनिमा धान ने मलेशिया के खिलाफ 11-1 की जीत में एक गोल किया। पाकिस्तान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में भी उन्होंने गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। डिफेंडर पार्वती टोपनो ने पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम की रक्षापंक्ति को मजबूती दी और कई मौकों पर विपक्षी टीम के हमलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तीनों खिलाड़ी बरियातू स्थित विद्यालय के एस्ट्रोटर्फ मैदान पर नियमित अभ्यास करती रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से विद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। विद्यालय की हॉकी कोच करुणा पूर्ति ने तीनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता प्रतिभा, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और कठिन परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बरियातू के एस्ट्रोटर्फ मैदान से एशिया चैंपियन बनने तक का सफर विद्यालय की अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणादायी है। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि तीनों खिलाड़ी आगे भी भारतीय हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने में योगदान देंगी।

क्रॉप कटिंग नहीं होने का बहाना पड़ा महंगा, बीमा कंपनी किसान को देगी 88,788 रुपये

पटना बाढ़ में पूरी फसल बर्बाद हो जाने के बाद क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट (सीसीई) नहीं होने का हवाला दे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का दावा रोकना बीमा कंपनी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में कमी व अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड को किसान राजेंद्र शर्मा को 88,788 रुपये फसल क्षतिपूर्ति, आठ प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 40 हजार और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। तीन माह में भुगतान नहीं करने पर पूरी राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज के साथ 10 हजार रुपये अतिरिक्त निष्पादन खर्च भी देना होगा। 8 सितंबर 2026 को अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य राजनिश कुमार की पीठ ने फैसला सुनाया। पुनपुन थाना क्षेत्र के पुनाढ़ी गांव निवासी वरिष्ठ नागरिक किसान राजेंद्र शर्मा ने खरीफ 2016 में धान की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। किसान क्रेडिट कार्ड से 887.88 रुपये प्रीमियम जमा किया था। बाढ़ में पुनाढ़ी व सबलपुर पंचायत की पूरी फसल नष्ट हो गई। जिला कृषि पदाधिकारी समेत संबंधित विभागों की रिपोर्ट में भी बाढ़ से फसल बर्बाद होने की पुष्टि की गई थी। बावजूद इसके बीमा कंपनी ने यह कहते हुए भुगतान करने से मना कर दिया कि संबंधित क्षेत्र का वैध क्राप कटिंग डाटा उपलब्ध नहीं है। किसान ने 19 नवंबर 2018 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की थी। उन्होंने 4.79 लाख रुपये फसल नुकसान का दावा किया था। सुनवाई में बीमा कंपनी ने सीसीई के आधार पर दावा निस्तारित करने की शर्त का हवाला दिया। इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि जब फसल पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हो तो क्राप कटिंग करना व्यावहारिक ही नहीं है। ऐसी स्थिति में केवल सीसीई डाटा नहीं होने से किसान का दावा रोकना फसल बीमा योजना के उद्देश्य को ही निष्फल कर देगा। आयोग ने किसान द्वारा जमा 887.88 रुपये प्रीमियम के 100 गुना यानी 88,788 रुपये को फसल क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित किया। डूबी फसल की क्राप कटिंग संभव नहीं आयोग ने कहा कि किसान की फसल बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई थी। सरकारी अधिकारियों की रिपोर्ट से भी इसकी पुष्टि हुई। ऐसे में खेत में फसल बची ही नहीं थी तो क्राप कटिंग कराकर नुकसान का आकलन करना संभव नहीं था।  

झारखंड मतदाता सूची SIR में 75 बूथों पर एक भी Form-6 नहीं, रांची के 62 केंद्र शामिल

रांची  राज्य में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत 15 सितंबर को दावा-आपत्ति चरण पूरा हो जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए फॉर्म-6 नहीं लिया जाएगा। पूरे राज्य में शनिवार तक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए कुल 4,54,189 आवेदन (फॉर्म-6) प्राप्त हुए हैं। वहीं, मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के माध्यम से कुल 5,302 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मतदाता सूची में नाम, पता आदि में संशोधन के लिए कुल 2,88,090 आवेदन फॉर्म-8 के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। 15 सितंबर के बाद इन आवेदनों का निष्पादन शुरू होगा राज्य के कुल 31,892 मतदान केंद्रों में से अभी भी 75 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां पर एक भी फॉर्म-6 मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं, 5,591 मतदान केंद्रों पर महज एक से पांच की संख्या में ही ऐसे आवेदन प्राप्त हुए हैं। कुल 8,618 मतदान केंद्रों पर छह से 10, 11,329 पर 11 से 20 की संख्या में ही फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं। इसी तरह, 4,076 मतदान केंद्रों पर 21 से 30 तथा 2,203 मतदान केंद्रों पर 30 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। रांची में सर्वाधिक 62 मतदान केंद्र, जहां एक भी फॉर्म-6 नहीं मिला पूरे राज्य में जिन 75 मतदान केंद्रों पर एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है, उनमें 62 केंद्र सिर्फ रांची के हैं। इसके अलावा देवघर, गोड्डा, हजारीबाग, धनबाद तथा गुमला में ऐसे महज एक-एक केंद्र ही है। साहिबगंज में ऐसे तीन तथा दुमका में चार केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन मतदाता पंजीकरण के लिए प्राप्त नहीं हुआ है। अन्य जिलों में ऐसा कोई मतदान केंद्र नहीं है, जहां एक भी फॉर्म-6 प्राप्त नहीं हुआ है। विधानसभावार स्थिति की बात करें तो कांके विधानसभा क्षेत्र में सर्वाधिक 52 मतदान केंद्र हैं, जहां एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने की युवाओं से अपील राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों विशेषकर युवाओं से अनुरोध किया है कि जो अभी भी मतदाता सूची के ड्राफ्ट सूची में सम्मिलित नहीं हैं, वे ईसीनेट अथवा बीएलओ से संपर्क कर फॉर्म 6 एवं घोषणा पत्र अवश्य भरें। वैसे सभी पात्र भारतीय नागरिक जो अर्हता तिथि एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष पूरे कर चुके हैं वे 15 सितंबर तक अवश्य फॉर्म 6 भरकर अपना नाम एसआईआर की मतदाता सूची में जुड़वाना सुनिश्चित करें। क्यों महत्वपूर्ण है एसआईआर से मतदाता सूची में पंजीकरण एसआईआर द्वारा बने मतदाता सूची को स्थायी दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रहता है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, वर्तमान में अर्हता तिथि को 18 वर्ष पूरे किए हुए मतदाताओं द्वारा यदि फॉर्म 6 भरकर नहीं दिया जाएगा तो वर्तमान एसआईआर की मतदाता सूची में उनका नाम सम्मिलित नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने कहा जिस प्रकार वर्तमान एसआईआर में वर्ष 2003 के एसआईआर के दस्तावेज से मैपिंग कर मतदाताओं और उनके बेटा या बेटी को अन्य दस्तावेज में छूट प्राप्त हो रही है। उसी प्रकार आने वाले भविष्य में बच्चों को इसका लाभ प्राप्त होगा।

गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन पुनपुन-बागमती में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता

पटना बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर सोमवार सुबह तक खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है, हालांकि गंगा के अधिकांश घाटों और जलमापक केंद्रों पर पानी में कमी दर्ज की गयी है, जबकि पुनपुन और बागमती में बढ़त ने निचले इलाकों की चिंता बढ़ा दी है। जाहिर है ऐसे में अभी बिहार में बाढ़ का खतरा टला नहीं है। जल संसाधन विभाग के आज सुबह छह बजे के जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा पटना के दीघा में 50.81 मीटर, गांधी घाट पर 49.61 मीटर, हथिदह में 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर पर बह रही है और इन सभी स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। एहतियात की बात है कि गंगा के जलस्तर में कमी का रुख इन प्रमुख केंद्रों पर बना हुआ है। पटना के दीघा में नदी खतरे के निशान 50.45 मीटर से 0.36 मीटर ऊपर है, जबकि गांधी घाट पर 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 1.01 मीटर, हथिदह में 41.76 मीटर से 1.06 मीटर, मुंगेर में 39.33 मीटर से 0.05 मीटर, भागलपुर में 33.68 मीटर से 0.50 मीटर और कहलगांव में 31.09 मीटर से 1.40 मीटर ऊपर है। फरक्का में भी गंगा 23.80 मीटर पर खतरे के निशान 22.25 मीटर से 1.55 मीटर ऊपर है। पटना शहर और आसपास के घाटों की स्थिति भी अभी सामान्य नहीं हुई है। बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायता केंद्र के छह बजे के आंकड़ों में गांधीघाट पर गंगा 49.61 मीटर, दीघाघाट पर 50.81 मीटर, बांकाघाट पर 48.59 मीटर और पंडारक में 43.08 मीटर दर्ज की गयी। इनमें गांधीघाट, दीघाघाट और बांकाघाट समेत कई केंद्रों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर है। हथिदह में जलस्तर 42.82 मीटर, मुंगेर में 39.38 मीटर, सुल्तानगंज में 36.21 मीटर, भागलपुर में 34.18 मीटर, कहलगांव में 32.49 मीटर और साहेबगंज में 28.63 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के बक्सर केंद्र पर जलस्तर 59.42 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 60.32 मीटर से 0.90 मीटर नीचे है, हालांकि यह चेतावनी स्तर से ऊपर है। वाराणसी में जलस्तर 68.47 मीटर और प्रयागराज में 80.01 मीटर दर्ज किया गया, जहां जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। विभागीय आंकड़ों में गंगा के इन दोनों ऊपरी केंद्रों पर पानी घटने का रुख है जो आने वाले दिनों के लिए बेहतर संकेत है। उधर, अन्य नदियों में स्थिति मिश्रित बनी हुई है। कोसी बलतारा में 35.01 मीटर और कुरसेला में 31.32 मीटर पर है तथा दोनों स्थानों पर नदी खतरे के निशान से क्रमश: 1.16 और 1.32 मीटर ऊपर है। बूढ़ी गंडक खगड़िया में 37.96 मीटर पर खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर है। घाघरा दरौली में 61.30 मीटर पर है, जो खतरे के निशान से 0.48 मीटर ऊपर है। पुनपुन और बागमती की स्थिति विशेष रूप से निगरानी वाली बनी हुई है। पुनपुन श्रीपालपुर में 51.94 मीटर पर बह रही है और खतरे के निशान 50.60 मीटर से 1.34 मीटर ऊपर है। यहां जलस्तर बढ़ने का रुख दर्ज किया गया है। बागमती बेनीबाद में 49.20 मीटर पर है, जो खतरे के निशान 48.68 मीटर से 0.52 मीटर ऊपर है और इसमें भी बढ़त दर्ज की गयी है। इसके विपरीत कोसी, बूढ़ी गंडक और गंगा के अधिकांश केंद्रों पर जलस्तर घट रहा है। बराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। कोसी नदी के वीरपुर बराज से सोमवार सुबह आठ बजे 1,55,710 क्यूसेक पानी डाउनस्ट्रीम छोड़ा जा रहा था और इसमें बढ़ोतरी का रुख दर्ज किया गया। गंडक नदी के वाल्मीकिनगर बराज से 86,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था और प्रवाह स्थिर रहा। सोन नदी के इंद्रपुरी बराज से 52,097 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिसमें कमी का रुख दर्ज किया गया।

झारखंड में SIR ड्यूटी को लेकर सख्ती, लापरवाह शिक्षकों पर होगी अनुशासनिक कार्रवाई

रांची  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को इसमें लापरवाही महंगी पड़ेगी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्त सभी शिक्षकों की उपस्थिति तथा एसआइआर के कार्यों में उनकी पूरी सहभागिता सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही इसमें रुचि नहीं लेने तथा जानबूझकर लापरवाही बरतनेवाले शिक्षकों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश सभी निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों को दिए है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों एवं सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि बच्चों के पठन-पाठन में अनावश्यक व्यवधान नहीं होना चाहिए। साथ ही एसआइआर की प्रक्रिया भी निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाना आवश्यक है। दोनों महत्वपूर्ण दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए उपलब्ध मानव संसाधन का अधिकतम एवं प्रभावी उपयोग किया जाना आवश्यक है। इसलिए शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार ही एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्ति की जाए। साथ ही प्रतिनियुक्त शिक्षकों के समय एवं सेवाओं का पूर्ण एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अतिरिक्त शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के भी निर्देश दिए हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रतिनियुक्त शिक्षकों के लिए प्रत्येक दिन रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने के भी निर्देश दिए हैं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिक्षक प्रतिनियुक्ति अवधि में निर्धारित निर्वाचन कार्य का वास्तविक रूप से निर्वहन कर रहे हैं अथवा नहीं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि कोई शिक्षक एसआईआर के लिए विधिवत प्रतिनियुक्त किए जाने के बावजूद निर्धारित कार्य का निष्पादन नहीं करता है, कार्य के प्रति अपेक्षित रुचि नहीं लेता है अथवा जानबूझकर कार्य में लापरवाही करता है, तो तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराते हुए उसके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की जाए। उन्होंने सभी जिलों में प्रतिनियुक्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों की सूची विधानसभा क्षेत्रवार तैयार कर दिनांक 16 सितंबर शाम पांच बजे तक उपलब्ध कराने को भी कहा है। कई शिक्षक न तो पढ़ा रहे और न ही SIR का कार्य कर रहे दरअसल, एसआईआर में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी तथा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह के बीच विमर्श हुआ था। इसमें शिक्षा सचिव ने उन्हें अवगत कराया कि विभिन्न विद्यालयों में कुछ शिक्षक मतदाता सूची का एसआइआर के लिए प्रतिनियुक्ति के नाम पर विद्यालय में नियमित शिक्षण कार्य नहीं कर रहे हैं और अनधिकृत रुप से अनुपस्थित हैं। इस कारण विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य प्रभावित हो रहा है।  

बिहार के दो नए औद्योगिक पार्कों में 95 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, 20 हजार करोड़ निवेश

मुजफ्फरपुर दरभंगा और मुजफ्फरपुर में विकसित हो रहे दो नए औद्योगिक पार्क में 95 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। रोजगार यहां स्थापित होने वाली इकाइयों में मिलेगा। औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार कर ली गई है। केंद्र सरकार की भारत औद्योगिक विकास योजना (भाव्या) के तहत बिहार सरकार ने इसका प्रस्ताव किया है। इसकी डीपीआर और मास्टर प्लान सहित निवेश-रोजगार का पूरा ब्योरा केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। दरभंगा में विकसित हो रहे औद्योगिक पार्क में 32 हजार 900 और मुजफ्फरपुर में 59 हजार 600 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। यहां बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्रस्तावित है। दोनों औद्योगिक पार्क में प्लग एंड प्ले योजना के तहत औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटित की जानी है। दरभंगा के बहादुरपुर और हनुमान नगर प्रखंड में 385 एकड़ और मुजफ्फरपुर के पारू में 700 एकड़ में औद्योगिक पार्क विकसित हो रहा है। दोनों जगह भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है। दरभंगा के बहादुरपुर और हनुमान नगर के तरलाही, मोटनाजा, बिहारीमुकुंद, अम्माडीह में औद्योगिक पार्क के लिए जमीन ली जाएगी। वहीं, मुजफ्फरपुर के पारू में चानपुर-चिहुटहा, भोजपट्टी, चतुर्पट्टी, विष्णुपुर-सरैया में जमीन ली जाएगी। दरभंगा में भूमि अधिग्रहण पर 601 करोड़ और मुजफ्फरपुर में 474.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। डीपीआर के अनुसार दोनों औद्योगिक इकाइयों में मिश्रित श्रेणी के उद्योग लगेंगे। प्लग एंड प्ले योजना के तहत स्थापित होने वाली इकाइयों में 6000 से 8100 करोड़ रुपये के बीच निवेश प्रस्तावित है। वहीं, मुजफ्फरपुर में 11 हजार करोड़ से 13500 करोड़ रुपये निवेश प्रस्तावित है। दोनों औद्योगिक पार्क में प्रशिक्षण केंद्र भी होंगे। साथ ही उत्पादों की टेस्टिंग के लिए भी सेंटर की स्थापना की जाएगी। ● दोनों औद्योगिक पार्क की डीपीआर तैयार, मिश्रित उद्योग लगेंगे ● दरभंगा में 385 और मुजफ्फरपुर में 700 एकड़ में बनेगा पार्क ● भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत किया जाना है विकसित

अप्रैल-मई 2027 में पंचायत चुनाव संभव, 19 अक्टूबर की मतदाता सूची से तय होगा वोटिंग अधिकार

 रांची झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले वर्ष अप्रैल-मई माह में होना है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर इसे लेकर जिलों में तैयारियां चल रही हैं। इसके तहत मतदान केंद्रों का निर्धारण किया जा रहा है। हालांकि पंचायत चुनाव ट्रिपल टेस्ट के बाद ही होना है। ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से ओबीसी श्रेणी को चुनाव में आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को दी जाएगी। वर्ष 2022 में पंचायत चुनाव ओबीसी को आरक्षण दिए बिना ही संपन्न हुआ था। इसपर काफी विवाद हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर ट्रिपल टेस्ट कराकर ओबीसी को आरक्षण देते हुए पिछले वर्ष नगर निकाय चुनाव संपन्न कराया था। ऐसे में पूरी संभावना है कि अगले वर्ष होनेवाले पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को आरक्षण दिया जाएगा। इसके लिए पंचायती राज विभाग को कैबिनेट से स्वीकृति लेनी होगी।ट्रिपल टेस्ट कराने में दो-तीन माह का समय लग सकता है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अक्टूबर माह तक सरकार इसपर निर्णय ले लेगी। 19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो सकता चुनाव चूंकि राज्य में पंचायत चुनाव अगले वर्ष होना है, इसलिए पूरी संभावना है कि यह चुनाव 19 अक्टूबर 2026 की अर्हता तिथि से हो। इस तिथि तक मतदाता बननेवाले नागरिक पंचायत चुनाव में मतदान कर सकेंगे। दरअसल, एसआइआर के तहत 19 अक्टूबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन होना है। इसके बाद तय हो जाएगा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या कितनी है। मतदाता सूची के प्रकाशन होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग भारत निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची का आंकड़ा देने का अनुरोध कर सकता है। यह आंकड़ा मिलने के बाद पंचायत स्तर पर मतदाता सूची का विखंडन किया जाएगा। फैक्ट फाइल     झारखंड में पंचायतों की संख्या : 4,345     ग्राम पंचायतों के सदस्यों की संख्या : 53,479     मुखिया के पद : 4,345     पंचायत समिति सदस्य के पद : 5,341     जिला परिषद सदस्य के पद : 536  

सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, 100 प्रोफेसरों को ऑक्सफोर्ड समेत विदेशी विश्वविद्यालयों में मिलेगी ट्रेनिंग

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा है कि राज्य के सहायक प्रोफेसर ऑक्सफोर्ड समेत विदेशों के अन्य मशहूर विश्विद्यालयों में ट्रेनिंग लेंगे। मुख्यमंत्री रविवार को बापू सभागार में 211 नये डिग्री कॉलेजों में नवनियुक्त शिक्षकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि जबतक कॉलेज में आकर बच्चे पढ़ेंगे नहीं, तबतक इस संस्थान का महत्व नहीं होगा। कॉलेज में पढ़ने विद्यार्थी जरूर आयें, इसे सुनिश्चित करायें। 75 प्रतिशत न्यूनतम हाजिरी हो1ानी ही चाहिए। नहीं तो सरकार की बड़ी तैयारी सफल नहीं होगी। इसको लेकर हमारी टीम भी काम करेगी। उन्होंने कहा कि लाइव क्लासेज की भी व्यवस्था शुरू करें। यह भी कहा कि राज्य के डिग्री कॉलेजों में भी खुला विश्वविद्यालय की मान्यता सरकार देगी। इस मौके पर बिहार की शिक्षा व्यवस्था को वर्ल्ड क्लास बनाने को लेकर सीएम सम्राट चौधऱी ने बड़ा ऐलान किया। सीएम ने कहा कि 100 प्रोफेसरोों को ऑक्सफोर्ड समेत दुनिया के बड़े विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। सबका खर्ज राज्य सराकर वहन करेगी। यह ट्रेनिंग एक महीने की होगी। सीएम सम्राट चौधऱी ने कहा कि बेहतर शिक्षा का सपना तब ही पूरा होगा जब हम अपनी तमाम चीजों को स्थापित करने का काम करेंगे। उसमें यह भी एक व्यवस्था है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की चीजों को हम कैसे इसमें जोड़ें। मैं जरूर कहूंगा कि 100 लोगों को चिन्हित करें जिनको ऑक्सफोर्ड में भेजकर वहां से भी कोर्स कराने का काम करें। तब तो हम दुनिया के मानक पर आ पाएंगे। सीएम ने आगे कहा कि दुनिया में जहां कहीं भी अच्छे संस्थान हैं वहां से जोड़ना हमारे बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देगा। एक जमाना था जब हमने क्वालिटी के साथ क्वांटिटी को लेकर समझौता किया। बड़ी संख्या में लोग पढ़ने लगे। अब क्वालिटी औऱ क्वांटिटी दोनों ही साथ चलाना होगा। इसलिए दुनिया में जहां भी अच्छे यूनिवर्सिटी हैं। मैं शिक्षकों से आग्रह करूंगा कि अगर आप लोगों को लगता है कि दुनिया में कहीं कोई अच्छा संस्थान है तो उसका सुझाव विभाग को दें। वैसे 10 संस्थानों को हम चिन्हित करेंगे जिनसे सीधा संवाद कराने का काम बिहार सरकार अपने खर्च पर करेगी।