samacharsecretary.com

पटना का ट्रैफिक जाम होगा कंट्रोल, सड़क पर गलत पार्किंग करते ही बजेगा अलर्ट

पटना अवैध पार्किंग की वजह से राजधानी में लगने वाले ट्रैफिक जाम पर नियंत्रण को ले अब तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इस तकनीक के मूल में यह है कि वाहन अगर सड़क पर वैसी जगह लगी दिखी, जहां पार्किंग निषिद्ध है, तो तुरंत एक स्वचालित अलर्ट संबंधित इलाके के नियंत्रण कक्ष को चला जाएगा। उक्त इलाके में ट्रैफिक नियंत्रण को तैनात पुलिसकर्मी को तुरंत नियंत्रण कक्ष संपर्क कर इस बारे में जवाब तलब करेगा। पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी पटना में पार्किंग व स्टॉपेज आरंभ से ही बेमानी रही है। सिटी सर्विस की बसों के लिए मोटी राशि खर्च दो बार आधुनिक बस स्टॉपेज का निर्माण कराया गया, लेकिन इन स्टॉपेज पर बसें कभी नहीं रूकी। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बसें जहां पैसेंजर दिखा वहां रुक जाती हैं। ट्रैफिक के दबाव से उनका कोई मतलब नहीं। ऑटो व ई रिक्शा चालकों ने अपनी इच्छा से बना लिए हैं स्टॉपेज पथ निर्माण विभाग ने जब केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ राजधानी के जाम को नियंत्रित किए जाने की योजना पर काम आरंभ किया तो यह बात सामने आयी कि ऑटो व ई रिक्शा चालकों की वजह से समस्या अधिक है। इन लोगों ने अपनी इच्छा से शहर के कई जगहों पर स्टॉपेज बना लिया है। उन जगहों पर ट्रैफिक पुलिस और यहां तक कि अधिकारियों तक की तैनाती पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा। अब तकनीक का इस्तेमाल कर इस बड़ी समस्या को नियंत्रित करने की योजना पर काम होना है। यहां तक कि यह भी देखा जाना है कि जिस ट्रैफिक जवान की तैनाती संबंधित इलाके में है वह अपने जगह पर मौजूद है कि नहीं। इसे देखने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है। हर इलाके की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक हर इलाके में ट्रैफिक जाम की ट्रैकिंग के लिए खास तरह की तकनीक की व्यवस्था की जा रही है। संबंधित इलाके में ट्रैफिक जाम को नियंत्रित किए जाने काे ले पहले ही मैजिस्ट्रेट व डीएसपी स्तर के अधिकारी की तैनाती है। ट्रैकिंग की रिपोर्ट तुरंत उन्हें दी जाएगी। उन्होंने सूचना पर क्या किया इस पर भी तुरंत रिपोर्ट उपलब्ध होगी।  

बिहार के खनिज भंडार पर सरकार की नजर, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल से होगी बड़े ब्लॉकों की ई-नीलामी

 पटना  बिहार में खनिज संसाधनों की खोज और उनके व्यवस्थित दोहन की दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग ने पहल तेज कर दी है। केंद्र सरकार के सहयोग से खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर खनिज अन्वेषण और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है। इसके जरिए राज्य में मौजूद खनिज संसाधनों की संभावनाओं को चिह्नित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। विशेष बैठक का एजेंडा तैयार सरकार ने खनिज खोज को गति देने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के पदाधिकारियों के साथ विशेष बैठक का मसौदा तैयार किया है। खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों की संभावनाओं का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करने और नए क्षेत्रों में अन्वेषण गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जीआइएस अधिकारियों से बैठक की तिथि जल्द घोषित होगी। प्रस्तावित बैठक में खनिजों की उपलब्धता, गुणवत्ता और भंडार की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। उद्देश्य ऐसे संभावित क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां अभी तक खनिज संसाधनों का पर्याप्त अन्वेषण नहीं हो सका है। अन्वेषण के बाद उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर खनिज ब्लाकों को विकसित करने और नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना है। बड़े खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी पर जोर बिहार में वृहद खनिजों के खनिज ब्लाकों की ई-नीलामी को और पारदर्शी बनाने के लिए यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल के इस्तेमाल पर भी विस्तार से विचार किया जा रहा है। पोर्टल के माध्यम से नीलामी प्रक्रिया को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने का प्रयास है। इससे नीलामी में अधिक प्रतिस्पर्धा आने के साथ प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बेहतर होने की उम्मीद है। खान एवं भू-तत्वि विभाग के मंत्री डाॅ. प्रमोद कुमार के अनुसार वैज्ञानिक अन्वेषण, तकनीक के इस्तेमाल और पारदर्शी ई-नीलामी को साथ लेकर चलने से खनन क्षेत्र में निवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, 211 नए डिग्री कॉलेज शुरू; 100 प्राध्यापकों को विदेश में प्रशिक्षण

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को बापू सभागार में नवसृजित 211 डिग्री कॉलेजों के 2,451 नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान देने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला पहला राज्य उन्होंने सहायक प्राध्यापकों से पूरी प्रतिबद्धता और मनोयोग के साथ काम करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान की भूमि रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसी शिक्षण परंपराओं ने पूरी दुनिया को ज्ञान का मार्ग दिखाया। अब जरूरत है कि इस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के साथ आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि बिहार एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था और शैक्षणिक आधारभूत संरचना का और विस्तार किया जाएगा। 100 प्राध्यापकों को ऑक्सफोर्ड समेत प्रतिष्ठित संस्थानों में भेजने की तैयारी मुख्यमंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 100 प्राध्यापकों को चिन्हित कर ऑक्सफोर्ड सहित दुनिया के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए भेजने की पहल की जाएगी। इसके अलावा विश्व के बेहतर शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और विशेषज्ञों के साथ बिहार के शिक्षकों को संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर भी उपलब्ध कराया जाएगा। शिक्षा बजट का 21 प्रतिशत खर्च कर रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। राज्य के कुल बजट का 21 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र पर खर्च किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य केवल शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है जो आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उपयोगी हो। 700 मॉडल स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मुख्यमंत्री ने विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल विकसित किए जा रहे हैं।इन स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ विद्यार्थियों को NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग, लाइव क्लास और 24 घंटे ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थी नियमित रूप से कॉलेज आएं और कक्षाओं में सक्रिय रूप से भाग लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों के साथ संवाद और उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग ही उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के उद्देश्य को पूरा करेगा। प्रतिभा की कमी नहीं, बेहतर मार्गदर्शन की जरूरत सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधन और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है। नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खबरें और भी उन्होंने विश्वास जताया कि नए सहायक प्राध्यापकों के योगदान से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और राज्य के युवाओं के भविष्य को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम को उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर तथा राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर भारत सरकार में अपर सचिव राहुल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. वाजपेयी, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रास बिहारी सिंह समेत अन्य प्राध्यापक और वरीय अधिकारी मौजूद रहे।  

शिक्षक नियुक्ति विवाद में बड़ा अपडेट, हाई कोर्ट ने JSSC को विषयवार-कोटिवार मेरिट लिस्ट देने का दिया निर्देश

रांची झारखंड हाई कोर्ट द्वारा गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने स्नातक स्तरीय प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में हुई गड़बड़ियों को लेकर शनिवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कमेटी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) को निर्देश दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बनाई गई विषयवार, कोटिवार संशोधित राज्य मेधा सूची प्रस्तुत करे। राज्य सरकार की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने जेएसएससी द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई गई अनुशंसा के आधार पर की गई नियुक्तियों के संदर्भ में शपथ पत्र दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि निर्धारित की गई। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, तान्या सिंह, राजेश कुमार एवं अन्य ने पक्ष रखा। बता दें कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की ओर से शिक्षक नियुक्ति में हुई गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। वर्ष 2016 में जेएसएससी ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें नियुक्ति जिलावार मेधा सूची और राज्यस्तरीय मेधा सूची के आधार पर की गई है। एक ही नियुक्ति परीक्षा में दो तरह की मेधा सूची होने से योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो गए हैं। इसकी जांच के लिए हाई कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। सामुदायिक स्वास्थ्य कोर्स करने वाले अभ्यर्थियों को राहत हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स उत्तीर्ण अभ्यर्थियों सुनील कुमार एवं अन्य को राहत मिली है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह सामुदायिक स्वास्थ्य के स्नातक विज्ञान कोर्स में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार के वर्ष 2019 के गजट नोटिफिकेशन के आधार पर इन्हें 4200 का ग्रेड पे उसी तिथि से दें, जिस तिथि से उन्होंने इस परीक्षा को पास किया है। प्रार्थियों की ओर अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार ने संकल्प जारी कर सामुदायिक स्वास्थ्य में स्नातक विज्ञान डिग्री लेने के बाद अभ्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सहायक पद पर नियुक्त कर उन्हें 4200 का ग्रेड पे देने का निर्णय लिया है। इनकी नियुक्ति के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य सहायक नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2025 गठित की है, लेकिन उक्त डिग्री लेने के बाद भी इन्हें 4200 का ग्रेड पे नहीं दिया गया और इनकी नियुक्ति न कर उन्हें संविदा पर रखा गया है। सरकार के वर्ष 2019 संकल्प के तहत इनकी नियुक्ति नहीं की गई।

चूल्हे-चौके से लाइब्रेरी तक पहुंचीं बिहार की महिलाएं, बनीं ‘डिजिटल एडुप्रेन्योर’; 61% छात्राएं उठा रहीं लाभ

पटना कल तक जो महिलाएं घर की चारदीवारी, चूल्हे-चौके और सामाजिक बंदिशों में कैद थीं, जिन्हें आर्थिक तंगी और रूढ़िवादी सोच के कारण कभी पढ़ाई का अवसर नहीं मिला। आज वही महिलाएं ग्रामीण बिहार में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग की जीविका योजना के तहत संचालित जीविका-दीदी की लाइब्रेरी सशक्त माध्यम बन चुकी है। राज्य में संकुल स्तरीय संघ (सीएलएफ) के माध्यम से 118 जीविका-दीदी की लाइब्रेरी(सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र) का सफल संचालन हो रहा है। 1 लाख से अधिक युवा एवं क‍िशोर जुड़े इनसे अब तक 1 लाख से अधिक किशोर एवं युवा जुड़ चुके हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, ये लाइब्रेरी सप्ताह के सातों दिन सुबह 9.30 से शाम 5.00 बजे तक खुलते हैं। प्रत्येक केंद्र पर प्रतिदिन औसतन 50 से 70 शिक्षार्थी पहुंचते हैं। इन शिक्षार्थियों में 61 फीसदी लड़कियां हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्यभर में रोजाना करीब 5,000 से 7,000 बच्चे लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ते हैं। इसमें एक बड़ी संख्या दीदियों की बच्चों की भी है जो आज इस सुविधा के बदौलत खुद का भविष्य संवार रहे हैं। पुस्तकालयों में शांत वातावरण के साथ कंप्यूटर, टैबलेट, हाई-स्पीड इंटरनेट, किताबें, समाचार पत्र और आनलाइन पठन-पाठन की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि लाइब्रेरी में बढ़ने के लिए आने वाले बच्चों में कई ऐसे हैं जिन्होंने पूर्व में अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी। आज उन्हें एनआईओएस, बीबीओएसइ और इग्नू जैसे संस्थानों में नामांकन कराकर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। साथ ही, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मार्गदर्शन, ऑनलाइन आवेदन में सहायता और विशेषज्ञों द्वारा करियर काउंसिलिंग व मेंटरिंग दी जा रही है। दहलीज लांघकर विद्या-दीदी बनीं डिजिटल एडुप्रेन्योर ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समस्याओं और संसाधनों के अभाव में जो महिलाएं कभी घर से निकलने में भी झिझकती थीं, आज वे इन सेंटरों का पूर्ण स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन खुद संभाल रही हैं। प्रत्येक केंद्र पर एक प्रशिक्षित सामुदायिक पेशेवर विद्या-दीदी (डिजिटल एडुप्रेन्योर) के रूप में तैनात हैं। वे दैनिक संचालन से लेकर बच्चों को डिजिटल सेवाएं देने तक की कमान संभाल रही हैं। आर्थिक तंगी से मुक्ति और बढ़ता सामाजिक मान-सम्मान विद्या-दीदी और लाइब्रेरी मैनेजर के रूप में काम करके हजारों महिलाएं अब नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार का जीवन स्तर सुधरा है, बल्कि घर और समाज के फैसलों में भी उनकी बात को सम्मान मिल रहा है। पढ़ाई और डिजिटल हुनर से जुड़कर दीदियों ने साबित किया है कि दिया है कि अगर सही अवसर मिले तो ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदली जा सकती है।     जीविका-दीदी की लाइब्रेरी केवल किताबों का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी उन बहनों के आत्मसम्मान और सफलता की कहानी है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों को हराकर नया इतिहास रचा है। राज्य में संचालित 118 पुस्तकालयों के माध्यम से आज 1 लाख से अधिक युवाओं और 61 फीसदी बेटियों को अपने ही गांव में डिजिटल शिक्षा और करियर मार्गदर्शन मिल रहा है। हमारी विद्या-दीदियां आज गांव-गांव में ज्ञान का दीप जलाकर ग्रामीण बिहार को आत्मनिर्भर बना रही हैं।     श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग।  

अबुआ दवाखाना में एलोपैथी संग आयुर्वेद-होम्योपैथी की दवाएं भी मुफ्त, झारखंड सरकार ने मंजूर किए ₹37.25 करोड़

रांची  राज्य के 746 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में खुलनेवाली अबुआ दवाखाना में एलोपैथी के अलावा होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी तथा सिद्धा की दवाएं मिलेंगी। सबसे बड़ी बात यह है कि मरीजों को यह दवा मुफ्त मिलेगी। इसके लिए उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 37.25 करोड़ रुपये का एकमुश्त प्रविधान किया है। वहीं, इन दवाखानों के संचालन के लिए 7.45 प्रति वर्ष करोड़ रुपये खर्च होंगे। ये दवाखाना इंटीग्रेटेड मेडिकल स्टोर के रूप में काम करेगी। राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत योजना के तहत प्रत्येक केंद्र के संचालन के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) को एकमुश्त पांच लाख रुपये दिए जाएंगे। इस राशि से बुनियादी ढांचा का निर्माण होगा तथा रेक, आलमारी, कंप्यूटर, रेफ्रीजरेटर, पावर बैकअप आदि की व्यवस्था की जाएगी। दवाखाना का संचालन पूर्व से नियुक्त योग प्रशिक्षक द्वारा किया जाएगा, जिसे पारिश्रमिक के रूप में प्रतिमाह तीन हजार रुपये दिए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र को प्रोत्साहन राशि, इंटरनेट, रजिस्टर आदि के लिए एक लाख रुपये दिए जाएंगे। सभी केंद्रों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनिवार्य दवा की आपूर्ति सिविल सर्जन तथा जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से की जाएगी। गठित की जाएगी कमेटी इस योजना की निगरानी के लिए प्रखंड से लेकर राज्य स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव तथा सिविल सर्जन सदस्य होंगे। इसी तरह, प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी, जिसमें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सदस्य सचिव तथा सीएचओ सदस्य होंगे। राज्य स्तर पर प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना की जाएगी, जिसमें आयुष उपनिदेशक के अलावा आईटी के जानकार तथा फार्मासिस्ट भी शामिल रहेंगे। योजना के संचालन के लिए नोडल कार्यालय आयुष निदेशालय होगा।

झारखंड के 7 जिलों में आधे से ज्यादा छोटे प्रतिष्ठान, गिरिडीह सबसे आगे; पाकुड़ में महिला उद्यमिता मजबूत

रांची  अनिगमित (अनइनकॉरपोरेटेड) गैर कृषि क्षेत्र राज्य भर में रोजगार, आजीविका तथा आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देता है। झारखंड में गिरिडीह जिला ऐसा है, जहां राज्य में सबसे अधिक अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। यहां के इन प्रतिष्ठानों से 3.20 लाख कामगार जुड़े हैं। राज्य के कुल अनिगमित प्रतिष्ठानों में 10.70 प्रतिशत प्रतिष्ठान इस जिला में हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा पहली बार अनिगमित गैर कृषि क्षेत्र पर किए गए जिला स्तरीय आकलन में यह तथ्य सामने आया है। गुरुवार को जारी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि राज्य के टॉप सात जिले ऐसे हैं, जहां राज्य के 50 प्रतिशत से अधिक ऐसे छोटे प्रतिष्ठान कार्यरत हैं। वहीं, 10 टॉप जिलों में 65 प्रतिशत से अधिक प्रतिष्ठान कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में पाकुड़ जिला ऐसा है, जहां सबसे अधिक प्रतिष्ठान महिलाओं के नेतृत्व में संचालित हैं। इतना ही नहीं, यहां सबसे अधिक महिला कामगार भी कार्यरत हैं। पिछड़ा जिला होने के बाद भी अधिक प्रतिष्ठानों में यह राज्य में सातवें स्थान पर है। दूसरी तरफ, रामगढ़ जिले के प्रतिष्ठानों में सबसे अधिक वैसे कामगार कार्यरत हैं, जो किसी न किसी एजेंसी से हायर किए गए हैं। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि आधे से अधिक प्रतिष्ठान सात जिलों में केंद्रित हैं। रिपोर्ट में महिला उद्यमिता और कार्यबल में उनकी भागीदारी में महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भिन्नताओं पर प्रकाश डाला गया है। कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी जिलों के अनुसार काफी भिन्न-भिन्न है। महिला श्रमिकों की सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले शीर्ष तीन जिले पाकुड़, साहिबगंज और पश्चिमी सिंहभूम में स्थित हैं। झारखंड के टॉप टेन जिले जहां अधिक अनिगमित प्रतिष्ठान हैं-     गिरिडीह : 2,26,339     धनबाद : 2,18,121     बोकारो : 1,52,123     पलामू : 1,35,295     रांची : 1,29,972     पूर्वी सिंहभूम : 1,14,650     पाकुड़ : 1,10,144     हजारीबाग : 1,06,857     देवघर : 97,763     गढ़वा : 91,553 महिला नेतृत्व वाले सबसे अधिक प्रतिष्ठान वाले टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)     पाकुड़ : 56.26     साहिबगंज : 41.70     गढ़वा : 37.20 अधिक महिला कामगार वाले प्रतिष्ठान में टाप तीन जिले (आंकड़े प्रतिशत में)     पाकुड़ : 55.30     साहिबगंज : 43.35     पश्चिमी सिंहभूम : 38.35  

घर बैठे मिल रही सरकारी सेवाएं: बिहार के RTPS पोर्टल पर 39 लाख से अधिक आवेदनों का हुआ निष्पादन

पटना  बिहार में आरटीपीएस यानी लोक सेवाओं का अधिकार पोर्टल सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के साथ जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी जरूरी सेवाओं के लिए लोगों को अब कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हुई है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच सिर्फ पंचायत स्तर पर आरटीपीएस पोर्टल के जरिए 39 लाख 78 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 39 लाख 32 हजार से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया जा चुका है। 39 लाख से ज्यादा आवेदनों का निपटारा, डिजिटल व्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार आंकड़ों के मुताबिक बड़ी संख्या में आवेदनों का समय पर निपटारा किया गया है। इससे पंचायत स्तर पर सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और डिजिटल व्यवस्था की पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है। आरटीपीएस पोर्टल के जरिए नागरिक महत्वपूर्ण प्रमाणपत्रों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने के बाद उसकी स्थिति भी ऑनलाइन ट्रैक की जा सकती है और उपलब्ध होने पर प्रमाणपत्र डाउनलोड किया जा सकता है। निपटारे में मधुबनी सबसे आगे, 3.22 लाख से ज्यादा आवेदन हुए निष्पादित आवेदनों के निष्पादन के मामले में मधुबनी की पंचायतें पूरे बिहार में अव्वल रही हैं। जिले की 386 पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 3 लाख 24 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए इनमें से 3 लाख 22 हजार से अधिक आवेदनों का निपटारा किया जा चुका है। इस प्रदर्शन के साथ मधुबनी पंचायत स्तर पर आरटीपीएस आवेदनों के निष्पादन में राज्य में सबसे आगे है। सिवान दूसरे नंबर पर, करीब 3 लाख आवेदनों का हुआ निपटारा टॉप-5 जिलों की सूची में सिवान दूसरे स्थान पर है। यहां की पंचायतों में दो वर्षों के दौरान 2 लाख 97 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 2 लाख 95 हजार से अधिक का निष्पादन किया जा चुका है। वहीं सीतामढ़ी तीसरे स्थान पर है। जिले में 1 लाख 99 हजार से अधिक आवेदन आए, जिनमें से 1 लाख 97 हजार से ज्यादा आवेदन निपटाए जा चुके हैं। सारण और पश्चिम चंपारण भी टॉप-5 में, जानिए कितना हुआ काम आरटीपीएस आवेदनों के निपटारे के मामले में सारण चौथे स्थान पर है। यहां करीब 1 लाख 87 हजार आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1 लाख 84 हजार का निपटारा किया जा चुका है। वहीं पश्चिम चंपारण पांचवें स्थान पर है। जिले में करीब 1 लाख 53 हजार आवेदन आए और इनमें से 1 लाख 52 हजार आवेदनों का निष्पादन हो चुका है। RTPS पोर्टल पर 64 सेवाएं, घर बैठे ट्रैक कर सकते हैं आवेदन आरटीपीएस पोर्टल पर नागरिकों के लिए कुल 64 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध हैं। इनमें जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। ऑनलाइन आवेदन के बाद आवेदक अपने लॉग-इन के माध्यम से आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। प्रमाणपत्र तैयार होने के बाद उसे ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध है। सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ी, दफ्तरों के चक्कर से राहत आरटीपीएस की ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से नागरिकों तक पहुंचाना है। पंचायत स्तर पर लाखों आवेदनों का ऑनलाइन निष्पादन इस डिजिटल व्यवस्था की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।  

बिहार में पशुपालकों को बड़ी सौगात, लखीसराय में बनेगा 50 लाख डोज क्षमता वाला स्टेशन

पटना बिहार में पशुधन की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने तथा दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए लखीसराय जिले में 100 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक फ्रोजन सीमेन स्टेशन स्थापित किया जाएगा। स्टेशन में प्रतिवर्ष 50 लाख डोज सीमेन के उत्पादन की क्षमता विकसित करने की योजना है। इसमें सेक्स-सार्टेड सीमेन के उत्पादन पर विशेष बल दिया जाएगा। पहल से दुधारू पशुओं के संतति सुधार को गति मिलेगी। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत स्वीकृत इस परियोजना का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग तथा बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (COMFED) करेगा। गाय-भैंस पालकों को मिलेगी बड़ी राहत, दुग्ध उत्पादन भी बढ़ेगा इसके निर्माण और तकनीक पहलुओं में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) तकनीकी सहयोग देगा। पहल से गाय-भैंस पालकों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में पूर्णिया में संचालित बिहार का एकमात्र सेक्स-सार्टेड सीमेन सेंटर आधा-अधूरा कार्यरत है। इससे बिहार की आवश्यकता की तुलना में दो प्रतिशत भी सेक्स-साॅर्टेड सीमेन उपलब्ध नहीं हो रहा है। पशुपालकों की इस समस्या की ओर सरकार का ध्यान जनप्रतिनिधि बिहार से लेकर दिल्ली तक सदन में भी समय-समय आकृष्ट करते रहे हैं। भाजपा सांसद डाॅ. भीम सिंह एवं विधान परिषद सदस्य सर्वेश कुमार के अतिरिक्त कई जनप्रतिनिधि व्यवस्था में सुधार के सुझाव भी दिए। दुधारू पशुओं के संतति सुधार की पहल होगी तेज संभवत: सुझावों पर पहल करते हुए केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पहल की है। लखीसराय केंद्रीय मंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी है। ऐसे में यह उनकी बड़ी उपलब्धि है। सेक्स-साॅर्टेड सीमेन से उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली मादा संतति को बढ़ावा मिलेगा। सेक्स-सार्टेड सीमेन तकनीक के इस्तेमाल से उच्च आनुवंशिक क्षमता और बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली मादा संतति के जन्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे राज्य में नस्ल सुधार कार्यक्रम को गति मिलने के साथ भविष्य में पशुधन की गुणवत्ता और दुग्ध उत्पादकता में सुधार हो सकेगा। आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से पशुपालकों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।  

चतरा से पत्थलगड़ा तक नई रेललाइन की तैयारी तेज, ड्रोन सर्वे को मिली हरी झंडी

 चतरा  चतरा से पत्थलगड़ा तक प्रस्तावित नई ब्राडगेज रेललाइन परियोजना को लेकर रेलवे ने सर्वे की प्रक्रिया तेज कर दी है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे के निर्माण, गया के उप मुख्य अभियंता ने उपायुक्त से प्रस्तावित रेललाइन के लिए ड्रोन वीडियोग्राफी कराने की अनुमति मांगी है। यह रेलखंड चतरा जिले में 25.234 किलोमीटर लंबा होगा। ईस्ट सेंट्रल रेलवे, गया के उप मुख्य अभियंता शशि कुमार ने उपायुक्त को पत्र भेजकर बताया है कि चतरा (किमी 75.100) से पत्थलगड़ा (किमी 100.334) तक प्रस्तावित नई ब्राडगेज रेललाइन को सक्षम प्राधिकार ने विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया है। परियोजना का विस्तृत प्राक्कलन तैयार कर रेलवे बोर्ड को स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। रेलवे की ओर से प्रस्तावित रेल लाइन के क्षेत्र की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसका उद्देश्य परियोजना के दस्तावेजीकरण, सर्वेक्षण और योजना तैयार करने में सहायता लेना है। ड्रोन से लिए गए वीडियो और तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तावित रेललाइन के क्षेत्र का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। पत्र में कहा गया है कि ड्रोन वीडियोग्राफी के दौरान निर्माण विभाग, गया के अभियंता अधिकृत रूप से टीम के साथ रहेंगे और सर्वे कार्य की निगरानी करेंगे। चतरा से पत्थलगड़ा तक नई रेललाइन का प्रस्ताव जिले के रेल संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है परियोजना के तहत प्रस्तावित रेलमार्ग के क्षेत्र का ड्रोन सर्वे पूरा होने के बाद योजना से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। रेलवे बोर्ड को विस्तृत प्राक्कलन पहले ही भेजे जाने के बाद अब ड्रोन वीडियोग्राफी की अनुमति मांगना परियोजना की अगली प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे के निर्माण, गया के उप मुख्य अभियंता के पत्र के आलोक में ड्रोन सर्वे के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया है। -रवि आनंद, डीसी, चतरा