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बिहार में बदलेगी कॉलेज शिक्षा, छात्रों को डिग्री के साथ AI और कौशल प्रशिक्षण

पटना नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आलोक में कुलाधिपति सचिवालय द्वारा स्नातक संकाय में छात्र-छात्राओं के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण की व्यवस्था लागू करने की तैयारी हो रही है। इसके लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स स्किल डेवलपमेंट सेल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज्यपाल व कुलाधिपति के स्तर से जल्द ही कुलपतियों को निर्देश जारी होगा। चूंकि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) स्नातक पाठ्यक्रम लागू है। इसलिए अब राज्यपाल द्वारा स्नातक संकाय में एआई की पढ़ाई, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण की शुरुआत कराने को लेकर एक काॅमन प्रोग्राम तैयार कराया जा रहा है। गाइडलाइन क‍िया जा रहा तैयार राज्यपाल सचिवालय के मुताबिक स्नातक संकाय के छात्र-छात्राओं छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास प्रशिक्षण के लि‍ए गाइडलाइन भी तैयार किया जा रहा है। इसे सभी अंगीभूत महाविद्यालयों तथा संबद्धता प्राप्त कालेजों को जारी किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को अब डिग्री लेने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि एआई शिक्षा, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 268 कॉलेजों के छात्रों को इंडस्‍ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग इसके लिए सभी 268 अंगीभूत महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को सीधे इंडस्ट्री से जुड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी और एआई कंपनियों में काम कर चुके एक्सपर्ट छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन कराएंगे। इससे छात्र-छात्राओं को पढ़ाई कराने के साथ-साथ रोजगार के लिए भी तैयार किया जा सकेगा। सभी महाविद्यालयों में अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (एईडीपी) संचालित किया जाएगा।  

रांची समेत छह शहरों में बनेंगे कैंसर रेडिएशन सेंटर, डे-केयर सुविधा होगी बहाल

रांची  कैंसर मरीजों के इलाज के लिए राज्य में छह जगहों पर रेडिएशन सेंटर की स्थापना होगी। साथ ही डे-केयर की सुविधा बहाल होगी। रांची सदर अस्पताल के अलावा धनबाद, जमशदेपुर, पलामू, हजारीबाग तथा दुमका स्थिति मेडिकल कालेजों में पीपीपी माडल पर इन सुविधाओं को बहाल किया जाएगा। इसे लेकर शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें इस योजना पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने जिला अस्पतालों एवं मेडिकल कालेजों में उपलब्ध संसाधनों, मशीनों, मानवबल और आवश्यक खर्च का आकलन कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में रेडिएशन उपचार के लिए आधुनिक लीनैक मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रेडिएशन के लिए मशीन के साथ रेडिएशन विशेषज्ञ, टेक्नीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित मानवबल की आवश्यकता होती है। राज्य में रेडियो फिजिसिस्ट की कमी को इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौती माना गया। मशीन के खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और रखरखाव की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। तय हुआ कि डे-केयर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था अलग-अलग होगी। डे-केयर सेंटर में चिकित्सा पदाधिकारी के माध्यम से सेवाएं संचालित करने तथा रेडिएशन सेंटर के लिए विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षित तकनीकी मानवबल की व्यवस्था की जाएगी बिहार में संचालित डे-केयर माडल का भी बैठक में संदर्भ लिया गया, जहां चिकित्सा पदाधिकारी को प्रशिक्षण देकर डे-केयर सेवा संचालित की जाती है। रेडिएशन सेंटर व डे-केयर सेंटरों में आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को संबंधित योजना के निर्धारित पैकेज और दर के अनुसार उपचार मिलेगा। वहीं, अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस की निर्धारित दरों को आधार बनाने पर सहमति बनी। पूरी योजना की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर समिति गठित की जाएगी। अपर सचिव सह झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में समिति प्रस्ताव, संसाधनों के आकलन, टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था की निगरानी करेगी। विभाग की ओर से भारत सरकार के बीजीएफ कार्यक्रम के तहत भी प्रस्ताव भेजकर आवश्यक स्वीकृति लेने की तैयारी की जा रही है। बैठक में विभाग की विशेष सचिव डा. नेहा अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, सदर अस्पताल क उपाधीक्षक डाॅ. विमलेश कुमार सिंह आदि उपस्थित थे। दो समूह में मेडिकल कालेजों को रखने पर विचार प्रस्तावित रेडिएशन सेंटर के लिए मेडिकल कालेजों को दो समूह रखने पर विचार किया गया। पहले समूह में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका तथा दूसरे समूह में रांची, हजारीबाग और पलामू को सम्मिलित करने का प्रस्ताव है। रिम्स, रांची से होगी डे-केयर सेंटरों की निगरानी बैठक में कैंसर डे-केयर सेंटरों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए रिम्स में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर विकसित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पैट स्कैन की सुविधा के विस्तार तथा इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई।  

प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल पर बिहार में सेवा संकल्प, हर घर जलेगा आशीर्वाद का दीया

 पटना PM Narendra Modi Birthday: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेक संवाद में सरकार के सभी मंत्रियों की बैठक चल रही है। मुख्‍यमंत्री की अध्‍यक्षता में चल रही बैठक में 17 सितंबर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मतिथि पर शुरू होने वाले महीने भर के सेवा संकल्प अभियान को लेकर मंत्रियों से विचार-विमर्श कर रहे हैं। 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्‍य में अभ‍ियान विदित हो कि मुख्यमंत्री पद से लेकर संसदीय जीवन में प्रधानमंत्री पद पर नरेन्द्र मोदी के लगातार काम करते हुए 17 सितंबर को 25 वर्ष पूर हो रहे हैं। इसे लेकर सरकार ने अभियान चलाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने अभियान के सभी 13 प्रमुख घटकों की विभागवार तैयारियां पर चर्चा की। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर की संध्या को 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम से होगी, जिसके तहत राज्य के प्रत्येक घर तथा हर जिले के कम-से-कम 10 प्रमुख व प्रतीकात्मक सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक दीप प्रज्वलन कराया जाएगा। इसके लिए जीविका, नगर निकायों और जन वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभार्थियों तक दीया पहुंचाया जाएगा। वहीं, 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी सरकारी एवं निजी स्कूलों में 'सेवा चित्र' के अंतर्गत 'विकसित भारत संकल्प' विषय पर चित्रकला व भाषण प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक बैठक भी आयोजन किया जाएगा। जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 'सेवा स्मरण' के तहत पिछले 25 वर्षों के सेवा कार्यों और योजनाओं पर आधारित 18-20 नाट्य टोलियां गठित की जाएंगी। स्‍कूल-कॉलेजों से लेकर पंचायत तक में नुक्‍कड़ नाटक स्कूलों, कालेजों और पंचायतों में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करेंगी। दो अक्टूबर को विशेष मंचन करेंगी। इसके साथ ही 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 'आंगन का मिलन' कार्यक्रम के तहत सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का सम्मान, लाभार्थी माताओं से संवाद और बच्चों की मनोरंजक गतिविधियों के साथ-साथ पोषण व स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। सरकारी योजनाओं से लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को उजागर करने के लिए 'कहानी बदलाव की' घटक के अंतर्गत वास्तविक रील्स व लघु वीडियो का संकलन कर जिला और राज्य स्तरीय डिजिटल डेटा-बैंक तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, 'सेवा ज्योति यात्रा' के माध्यम से राज्य व जिलों में पदयात्रा, साइकिल और बाइक रैलियां निकाली जाएंगी, जिनमें 'मेरा युवा भारत' के स्वयंसेवक भाग लेंगे और समापन पर 'विकसित भारत 2047' का सामूहिक संकल्प लिया जाएगा।  

बिहार में जमीन खरीदने वालों के लिए जरूरी खबर, प्लॉट लेने से पहले ऑनलाइन चेक करें ये 5 बातें

पटना बिहार में अगर आप जमीन या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो थोड़ी सी जल्दबाजी आपकी गाढ़ी कमाई डुबा सकती है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग (Bihar Bhumi) ने आम जनता को जमीन विवादों और धोखाधड़ी से बचाने के लिए सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे आप जमीन की जांच कर सकते हैं। सरकार का स्पष्ट कहना है कि यदि आपने खरीदारी से पहले इन 5 जरूरी ऑनलाइन जांचों को पूरा नहीं किया, तो आप जमीन नहीं, बल्कि जमीन विवाद खरीदने जा रहे हैं। जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन जरूर जांचें ये 5 बातें 1. ऑनलाइन जमाबंदी: सबसे पहले यह जांच लें कि जमीन विक्रेता की जमाबंदी ऑनलाइन (Online Land Record) दर्ज है या नहीं। इसके लिए बिहारभूमि पोर्टल पर जाएं और 'जमाबंदी देखें' विकल्प पर क्लिक करें। 2. सरकारी या गैर मजरुआ जमीन की पहचान: यह सुनिश्चित करें कि खतियान में जमीन सरकारी या गैर मजरुआ तो दर्ज नहीं है। इसकी जांच भू-अभिलेख पोर्टल bhuabhilekh.bihar.gov.in के जरिए की जा सकती है। 3. खाता, खेसरा और रकबा का मिलान: ऑनलाइन जमाबंदी में उस खाता, खेसरा (प्लॉट संख्या) और पर्याप्त रकबा (एरिया) का सही-सही विवरण दर्ज है या नहीं, इसे ध्यान से मिला लें। 4. विक्रेता का नाम: यह देखना बेहद जरूरी है कि ऑनलाइन जमाबंदी खुद विक्रेता के नाम पर ही है या किसी पुराने पूर्वज के नाम पर। 5. अन्य हिस्सेदारों की लिखित सहमति: यदि जमाबंदी विक्रेता के अकेले नाम पर नहीं है, तो क्या उसके पास अन्य सभी वैध हिस्सेदारों की बिक्री से संबंधित लिखित सहमति मौजूद है? दाखिल-खारिज के लिए क्या है जांच जरूरी? विभाग ने स्पष्ट किया है कि जमीन पर पूर्ण मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए दाखिल-खारिज बेहद जरूरी है। इसके लिए विक्रेता का सही हक होना अनिवार्य है, जो केवल खतियान और ऑनलाइन जमाबंदी से ही प्रमाणित होता है। जमीन हमेशा उसी व्यक्ति से खरीदें, जिसके नाम पर सरकारी रिकॉर्ड में ऑनलाइन जमाबंदी दर्ज हो। जमीन खरीदने से पहले biharbhumi.bihar.gov.in पोर्टल पर जाकर यह पक्का कर लें कि जमाबंदी ऑनलाइन (Bihar Land Record Online) दिख रही है या नहीं। पोर्टल पर यह जरूर चेक करें कि जो जमीन आप खरीद रहे हैं, उसका खाता नंबर, खेसरा (प्लॉट नंबर) और जमीन का कुल क्षेत्रफल (रकबा) ऑनलाइन सही-सही दर्ज है। अगर आपको जमीन संबंधी कोई शिकायत दर्ज करानी है या सुझाव देना है, तो बिहारभूमि पोर्टल के 'जन शिकायत पोर्टल' सेक्शन पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

रांची में अक्टूबर के त्योहारों पर ट्रैफिक पुलिस अलर्ट, जाम-अतिक्रमण और गलत पार्किंग पर चलेगा अभियान

 रांची गणेश पूजा, करमा पूजा, दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ पूजा के साथ अक्टूबर में होने वाले क्रिकेट मैच को देखते हुए रांची की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक यातायात की अध्यक्षता में हुई बैठक में शहर की यातायात व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस दौरान सभी यातायात थाना प्रभारियों और संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को भीड़ और जाम वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। बैठक में आगामी त्योहारों और क्रिकेट मैच के दौरान संभावित यातायात दबाव को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। पुलिस अधीक्षक यातायात ने अधिकारियों को यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए। ब्लैक शीशा से लेकर नशे में ड्राइविंग तक पर होगी कार्रवाई यातायात पुलिस ब्लैक शीशा, फैन्सी नंबर प्लेट, मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हार्न, रेस ड्राइविंग और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई करेगी। निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर चलने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई की जाएगी। आटो और टोटो चालकों के यूनिफार्म में नहीं रहने तथा नाबालिगों के वाहन चलाने के मामलों में भी अभियान चलाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। नंबर प्लेट पर टेप लगाने वालों पर विशेष नजर वाहनों की नंबर प्लेट पर टेप लगाकर नंबर छिपाने या नंबर प्लेट पर गलत तरीके से नंबर लिखने वाले वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। ऐसे वाहनों पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। बैठक में यातायात पोस्ट के आसपास की व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि कई स्थानों पर लेफ्ट फ्री रहने के बावजूद वाहन सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं। इससे यातायात बाधित होता है और जाम की स्थिति बनती है। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। चौक चौराहों पर अनावश्यक रूप से आटो और टोटो खड़े करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यातायात थाना प्रभारियों को अपने अपने क्षेत्र में लगातार भ्रमणशील रहकर ऐसी स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। अतिक्रमण हटाने के लिए निगम के साथ समन्वय सड़क पर अतिक्रमण कर दुकान, ठेला या अन्य सामान लगाने से यातायात प्रभावित होने वाले स्थानों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए यातायात पुलिस रांची नगर निगम की टीम के साथ समन्वय स्थापित कर अतिक्रमण हटाएगी। बारिश के कारण जिन स्थानों पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है, वहां यातायात थाना प्रभारी भ्रमणशील रहेंगे। जरूरत के अनुसार क्यूआरटी और अभियान टीम को भी लगाया जाएगा, ताकि जाम की स्थिति बनने पर तत्काल यातायात सामान्य कराया जा सके। स्कूल खुलने और छुट्टी के समय विशेष निगरानी स्कूलों के शुरू होने और छुट्टी होने के समय यातायात पुलिस अपने-अपने क्षेत्र में विशेष रूप से भ्रमणशील रहेगी। इस दौरान स्कूलों के आसपास यातायात सुचारु रखने के साथ चौक चौराहों पर अनावश्यक रूप से वाहन खड़ा करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में पुलिस उपाधीक्षक यातायात प्रथम और द्वितीय, सभी यातायात थाना प्रभारी एवं यातायात शाखा के अन्य पदाधिकारी व कर्मी मौजूद थे। पुलिस अधीक्षक यातायात ने सभी अधिकारियों को बैठक में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए शहर में सुगम यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

पटना के सरकारी परिसरों में मिलेगी फास्ट EV चार्जिंग सुविधा, 9 स्थानों पर स्टेशन लगाने की तैयारी

पटना  राजधानी में मुख्य सचिवालय, विधानसभा, कलेक्ट्रेट, विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, मल्टी मॉडल हब, मल्टी लेवल कार पार्किंग, बेउर मोड़ और हार्डिंग रोड में फास्ट ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसको लेकर परिवहन विभाग और इंडियन आयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) के बीच शुक्रवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया। समझौते पर राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन तथा आइओसीएल, बिहार के स्टेट रिटेल सेल्स हेड राजीव कुमार ने हस्ताक्षर किए। राज्य परिवहन आयुक्त ने बताया कि इन चार्जिंग स्टेशनों के शुरू होने से सरकारी कार्यालयों में आने-जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों तथा आम लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध होगा। खासकर सचिवालय और अन्य प्रमुख सरकारी परिसरों में ईवी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध होने से इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। ई-वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके लिए निजी कंपनियों के सहयोग से चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। बिहार में अब तक 210 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित आईओसीएल के अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि कंपनी के स्तर से राज्य में अब तक 210 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। परिवहन विभाग के साथ हुए इस समझौते के तहत चिह्नित सरकारी परिसरों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को सुविधाजनक और भरोसेमंद चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

कोविड से मौत पर अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र पर्याप्त, तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत: हाईकोर्ट

पटना पटना हाईकोर्ट ने कोरोना से मौत मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। कहा कि कोविड से मौत मामले में तकनीकी आधार पर मुआवजा रोकना गलत है। अस्पताल का मृत्यु प्रमाण पत्र विश्वसनीय सबूत होता है। सिर्फ आरटीपीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर विधवा का हक नहीं छीना जा सकता। न्यायमूर्ति आलोक कुमार ने मुंगेर की आशा देवी की अर्जी पर अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि भुगतान करने का आदेश दिया। कोर्ट को बताया गया कि आवेदिका के पति अजय कुमार शर्मा की मृत्यु 21 मई 2021 को मुंगेर के सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल में हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत का कारण कोविड-19 दर्ज है। जिला प्रशासन ने उन्हें कोविड मृतकों की सूची में रखा और राशि भी आवंटित की। लेकिन भुगतान नहीं किया गया। मृतक की पत्नी ने आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग और मुंगेर डीएम को विस्तृत अभ्यावेदन दिया। पर जिला स्वास्थ्य समिति ने आरटी पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने का हवाला दे दावा खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में किसी को मुआवजे से वंचित करने का आधार नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि कोविड सर्टिफिकेट या टेस्ट रिपोर्ट नहीं होना निर्णायक नहीं हो सकता है। अस्पताल का प्रमाण पत्र और जिला स्तरीय सूची में नाम है, तो तकनीकी आधार पर राशि नहीं देना गलत है। कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर अस्पताल सील कोविड के दौरान इलाज में लापरवाही पर पटना के कुम्हरार स्थित भागवत नगर स्थित पुष्पांजलि मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को सिविल सर्जन ने सील कर दिया। जिला प्रशासन और पुलिस से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाने को आवेदन भी दिया गया है। यह कार्रवाई 2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भारती देवी नाम की महिला की मौत के मामले में की गई है। मामले में परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही बरतने और अधिक बिल देने का आरोप लगाया था। परिजनों ने सिविल सर्जन के पास शिकायत की थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठी थी। सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की गई। अस्पताल के साथ वहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के खिलाफ भी शिकायत का उल्लेख है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना प्रभारी को आवेदन दिया गया है। जांच में जो तथ्यों आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई होगी।

झारखंड वोटर लिस्ट में नाम के लिए दूसरे राज्य का दस्तावेज भी चलेगा

 रांची यदि आप झारखंड में निवास कर रहे हैं और आपका जन्म दूसरे किसी राज्य में हुआ है तो विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वहां का भी बना आपका दस्तावेज मान्य होगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम सम्मिलित होने के लिए उसका भारत का नागरिक होना, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी होना तथा संबंधित अर्हता तिथि (वर्तमान एसआइआर के लिए एक अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करना आवश्यक है। उनके अनुसार, झारखंड की मतदाता सूची में ऐसे मतदाता भी पंजीकृत हैं, जिनका जन्म अथवा पूर्व निवास किसी अन्य राज्य में रहा है। दावा-आपत्ति एवं सुनवाई की प्रक्रिया के क्रम में यदि ऐसे मतदाताओं को आयु, जन्म अथवा अन्य विवरण के सत्यापन के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने का नोटिस प्राप्त हुआ है, तो वे इससे संबंधित भारत निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में अपने संबंधित राज्य के द्वारा जारी किए गए दस्तावेज को प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित दस्तावेज का झारखंड से ही निर्गत होना आवश्यक नहीं है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाता अपने जन्म स्थान, आयु अथवा पारिवारिक संबंध के सत्यापन के लिए वंशावली अथवा सक्षम पदाधिकारी द्वारा निर्गत पारिवारिक सूची, खतियान, शैक्षणिक दस्तावेज सहित निर्वाचन आयोग द्वारा एसआइआर के लिए निर्धारित अन्य मान्य दस्तावेज अपने संबंधित राज्य से प्रस्तुत कर सकते हैं। इन दस्तावेज का परीक्षण संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि नोटिस प्राप्त होने पर निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर उपलब्ध मान्य दस्तावेज प्रस्तुत करें। उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले में प्रस्तुत दस्तावेज का नियमानुसार परीक्षण करते हुए पात्रता के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय सुनिश्चित करें, ताकि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र अथवा विदेशी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।  

गांव की बदहाल सड़क से परेशान युवाओं ने चंदा जुटाकर खुद रास्ता बनाया

 इटकी  जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के उपेक्षापूर्ण रवैये से तंग आकर इटकी प्रखंड के रानीखटंगा गांव के युवाओं ने आत्मनिर्भरता की एक मिसाल पेश की है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे ग्रामीणों ने खुद ही बीड़ा उठाते हुए श्रमदान किया और लगभग 600 मीटर लंबी कच्ची सड़क का मोरमीकरण कर उसे चलने लायक बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में इस ग्रामीण सड़क पर कीचड़ का अंबार लग जाता था, जिससे यहां पैदल चलना भी दूभर हो जाता था। स्थिति इतनी दयनीय थी कि स्कूली बच्चों का आवागमन और बुजुर्गों का घर से बाहर पैदल चलना मुश्किल हो गया था। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग ने कोई सुधि नहीं ली, तो युवाओं ने खुद ही इस समस्या का समाधान निकालने का फैसला किया। समस्या के समाधान के लिए रानीखटंगा के युवाओं ने आपसी सहयोग से चंदा एकत्र किया और मिट्टी मोरम की व्यवस्था की। इसके बाद सभी युवाओं ने हाथों में कुदाल और फावड़ा थाम लिया और मुख्य मार्ग से बाड़ी मस्जिद तक करीब 600 मीटर के रास्ते पर मोरमीकरण का कार्य पूरा किया। अब इस काम चलाऊ सड़क के बन जाने से ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिली है। युवाओं के सराहनीय और प्रेरणादायक कार्य को पूरा करने में रानीखटंगा के युवा वर्गों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। श्रमदान करने वालों में मुख्य रूप से सदर अज़हर अंसारी, सेक्रेटरी इमरोज अंसारी, अब्दुल कुद्दूस, अतिकूल अंसारी, फज़ले अंसारी, सरबूल अंसारी और सफी नज़र सहित गांव के अन्य ऊर्जावान युवा शामिल रहे।

झारखंड में वेतन घोटाले पर CID का शिकंजा, 22.46 लाख की निकासी मामले में जल्द दाखिल होगी चार्जशीट

रांची खूंटी के स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियन-2 (एसआईआरबी-2) के खाते से 22.46 लाख रुपये की अवैध निकासी मामले में सीआइडी अपनी पहली चार्जशीट करने की तैयारी में है। इस मामले में एक लेखापाल सह सिपाही शुभम कुमार की गिरफ्तारी हुई थी। आने वाले 14 सितंबर को शुभम कुमार की गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में सीआईडी दो दिनों के भीतर चार्जशीट कर देगी। सीआइडी ने अब तक की जांच में पाया है कि सिपाही शुभम कुमार ने वर्ष 2019 से 2021 के बीच करीब 28 बार में कुल 22.46 लाख रुपये स्थानांतरित की थी। खूंटी पुलिस ने ही उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था उसका दूसरा सहयोगी सिपाही अजित कुमार अब भी फरार है। आरोपित शुभम कुमार ने अस्थाई आइडी बनाकर अवैध वेतन की राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित की है। अवैध निकासी के मामले में सबसे पहले खूंटी थाने में 21 मई 2026 को कांड संख्या 72/26 में खूंटी के कोषागार पदाधिकारी शिव कुमार सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तब वहां के अनुसंधान पदाधिकारी खूंटी के थानेदार अशोक कुमार सिंह ने ही मुख्य आरोपित सह लेखापाल सिपाही शुभम कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सीआइडी ने इस केस को 13 जुलाई को टेकओवर करते हुए कांड संख्या 15/2026 में केस री-रजिस्टर्ड की थी। इसके बाद से ही आरोपित शुभम कुमार के विरुद्ध सीआईडी ने साक्ष्य संकलित किया, ताकि उसके विरुद्ध निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल की जा सके। सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है CID सीआईडी झारखंड के सात जिलों में अवैध वेतन निकासी मामले की जांच कर रही है। सबसे पहला मामला बोकारो में आया था। इसके बाद एक-एक कर छह और जिलों में अवैध वेतन निकासी का मामला सामने आया। इन जिलों में हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, रामगढ़, देवघर व खूंटी में मामला सामने आया है। बोकारो में जिला कोषागार से 11 करोड़, हजारीबाग में 31 करोड़, पश्चिमी सिंहभूम में 27 लाख की अवैध निकासी का मामला उजागर हो चुका है। वहीं, रांची में 2.94 करोड़, रामगढ़ में 35 लाख व देवघर में 99.06 लाख रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। इन जिलों से गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। सीआईडी इन सभी जिलों से जुड़े मामले की जांच कर रही है।