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सिक्किम हाईकोर्ट की जज मिनाक्षी एम. राय को पटना हाईकोर्ट की कमान

पटना पटना हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने वाला है।। मिनाक्षी एम राय पटना उच्च न्यायालय की नई चीफ जस्टिस होंगी। सिक्किम हाईकोर्ट की जज रह चुकीं मिनाक्षी एम राय पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगी। सिक्किम के पूर्व गृह सचिव के घर 12 जुलाई 1964 को जन्मी मीनाक्षी एम राय ने वर्ष 1980 में दसवीं पास कर इंटर में दाखिला ली थी। मार्च 1983 में बारहवी पास कर उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति शास्त्र से स्नातक की थी। उसके बाद दिल्ली के कैंपस लॉ सेंटर से कानून की डिग्री लेकर मिनाक्षी ने खुद को दिल्ली बार काउंसिल में वकालत करने के लिए इनरोलमेंट कराया था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट एंव सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की थी। 11 दिसम्बर1990 को सिक्किम में बतौर न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर बहाल हुई थीं। 15 अप्रैल 2015 को सिक्किम हाई कोर्ट में पहली महिला जज के रूप में नियुक्त हुई थीं। बताया जा रहा है कि मिनाक्षी मदन राय के पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सिक्किम के लोगों के लिए गौरव भरा पल है। अपने बयान में सिक्किम के मुख्यमंत्री ने कहा कि मिनाक्षी एम राय का पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में चुने जाने एक ऐतिहासिक क्षण है। वो सिक्किम से पहली महिला जज हैं तो इतने उच्च पद पर आसीन हुई हैं। मुख्यमंत्री ने न्यायिक प्रक्रिया में मिनाक्षी एम राय के योगदान को सराहनीय और अतुल्नीय बताया है। सीएम ने सिक्किम की जनता और सरकार की तरफ से मिनाक्षी एम राय को बधाई दी है। सीएम ने कहा कि मिनाक्षी एम राय के द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में दिए गए योगदान को सिक्किम तथा देश के लोग याद रखेंगे। मिनाक्षी एम राय के आत्मविश्वास की तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम में हाईकोर्ट के जज के तौर पर मिनाक्षी एम राय ने जिस तरह से निष्पक्षता से अपने न्यायिक दायित्वों को निभाया उसका लाभ अब पटना हाईकोर्ट को भी मिलेगा।

तलाक मामलों में सख्ती: व्यभिचार के आरोप के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी, पटना HC का आदेश

पटना  वैवाहिक विवादों और तलाक के मामलों पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक दूरगामी फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति नानी तगिया और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ ने साफ किया कि किसी भी जीवनसाथी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाकर विवाह विच्छेद (तलाक) की डिक्री तब तक प्राप्त नहीं की जा सकती, जब तक कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य मौजूद न हों। कोर्ट ने कहा कि व्यभिचार (Adultery) जैसे गंभीर आरोपों के लिए घटना का समय, स्थान और संबंधित व्यक्ति के विवरण जैसे स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख याचिका में होना अनिवार्य है। ये फैसला उन मामलों में नजीर बनेगा जहां केवल संदेह के आधार पर रिश्तों को खत्म करने की कोशिश की जाती है। सिवान परिवार न्यायालय का फैसला बरकरार हाईकोर्ट ने श्याम बिहारी मिश्रा द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पहले ही पत्नी संजू देवी से तलाक की उनकी अर्जी को नामंजूर कर दिया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के तर्क को सही माना कि बिना सबूत के ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। ठोस साक्ष्य और तथ्यों की अनिवार्यता जरूरी अदालत ने अपने आदेश में जोर देकर कहा कि अगर पति अपनी पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाता है, तो उसे उस व्यक्ति का नाम, घटना का समय और स्थान स्पष्ट करना होगा। कोर्ट ने पाया कि वर्तमान केस में पति ने जिस व्यक्ति के साथ पत्नी को सिनेमा हॉल से निकलते देखने का दावा किया था, न तो उसका विवरण दिया और न ही उसे मामले में पक्षकार बनाया। पटना हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां मतलब, पटना हाईकोर्ट ने तलाक के एक केस में कहा कि केवल संदेह के आधार पर तलाक नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाकर तलाक नहीं लिया जा सकता। व्यभिचार जैसे आरोपों के लिए ठोस साक्ष्य और स्पष्ट तथ्यों का उल्लेख होना जरूरी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कई अहम कानूनी बिंदुओं को रेखांकित किया।     केवल संदेह के आधार पर तलाक की डिक्री जारी नहीं की जा सकती।     याचिका में आरोपों से संबंधित जरूरी विवरण (नाम, समय, स्थान) का अभाव था।     जिस तीसरे व्यक्ति पर आरोप लगाया गया, उसे कानूनी प्रक्रिया में शामिल (पक्षकार) नहीं किया गया।     गवाही के दौरान आए अधूरे तथ्यों के आधार पर अदालत राहत प्रदान नहीं कर सकती। अवैध संबंधों के आरोपों पर कानूनी रुख हाईकोर्ट ने साफ किया कि वैवाहिक जीवन में 'व्यभिचार' एक गंभीर आरोप है और इसे साबित करने की जिम्मेदारी आरोप लगाने वाले पक्ष पर होती है। बिना किसी ठोस विवरण के केवल यह कहना कि पत्नी बिन बताए घर से चली जाती है या किसी के साथ देखी गई है, तलाक का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने अंततः पति की दलीलों को अपर्याप्त पाते हुए उसकी याचिका को निष्प्रभावी कर दिया। पटना हाईकोर्ट में तलाक जुड़ा मामला क्या था? पति ने बिहार के सिवान परिवार न्यायालय के फैसले को हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने पत्नी से तलाक अर्जी को खारिज कर दिया था। पति का आरोप था कि उसकी पत्नी संजू देवी का किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध हैं और वह बिन बताए घर से चली जाती हैं। पत्नी को एक युवक के साथ सिनेमा हॉल से साथ निकलते हुए देखा गया।  

फर्जी एफडी से ग्रामीण बैंक में बड़ा घोटाला, कोर्ट ने आर्थिक अपराध को बताया गंभीर

 पटना  पटना हाईकोर्ट ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में आरोपी धर्मेंद्र कुमार सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान इसे व्यापक जनहित का विषय मानते हुए मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया है।न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अपराध अलग श्रेणी के होते हैं। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अधिक सार्वजनिक हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। करीब ₹1.89 करोड़ के गबन से जुड़े इस मामले को अदालत ने गंभीर मानते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई। फर्जी एफडी के जरिए करोड़ों की हेराफेरी मामला उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के पूर्व कर्मी धर्मेंद्र कुमार सिंह से जुड़ा है, जिस पर 2013 से 2024 के बीच ग्रामीण ग्राहकों को फर्जी एफडी प्रमाणपत्र जारी कर सुनियोजित तरीके से धन की हेराफेरी करने का आरोप है। जांच में खुलासा हुआ कि कई मामलों में ग्राहकों की पासबुक में प्रविष्टि तो की गई, लेकिन बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) में खाते खोले ही नहीं गए। एक मामले में ₹15 लाख जमा करने वाले ग्राहक की राशि बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं पाई गई। अदालत ने टिप्पणी की कि यह धोखाधड़ी इतनी संगठित और तकनीकी रूप से जटिल थी कि करीब एक दशक तक इसका खुलासा नहीं हो सका। पैसे निकालने का प्रयास करते समय सामने आया मामला जब ग्राहकों ने अपनी जमा राशि निकालने का प्रयास किया, तब जाकर मामला सामने आया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे व्हाइट कॉलर क्राइम न केवल सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं। ये देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि 2014 की स्टाफ अकाउंटेबिलिटी पॉलिसी में निर्धारित समय-सीमा का लाभ धोखाधड़ी या आपराधिक कृत्यों में नहीं दिया जा सकता। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति भारतीय रिजर्व बैंक, गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है तथा कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की है।  

नीट छात्रा हत्याकांड: पटना HC ने जांच में हस्तक्षेप से किया इनकार, परिवार को दी कानूनी विकल्प की सलाह

पटना बिहार के चर्चित नीट छात्रा की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को पटना हाईकोर्ट से झटका लगा है। उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि यह केस सीबीआई को सौंप दिया गया है। ऐसे में इस मामले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है। पटना हाईकोर्ट में छात्रा के पिता की ओर से न्याय की गुहार लगाते हुए पिछले सप्ताह रिट याचिका दायर की गई थी। जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ में सुनवाई के लिए इसे मंजूर किया गया था। सोमवार को इस मामले पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने फिलहाल मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका को निष्पादित कर दिया। हाईकोर्ट से परिवार को क्या विकल्प? पटना हाईकोर्ट ने नीट छात्रा के परिवार को विकल्प देते हुए कहा कि अगर वे सीबीआई की जांच से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। मृतका के पिता की ओर से दायर इस याचिका में हॉस्टल संचालक, मकान मालिक, निजी अस्पतालों के डॉक्टर जहां छात्रा भर्ती थी, थानेदार से लेकर पटना एसएसपी और डीजीपी तक को प्रतिवादी बनाया गया था। क्या है मामला? बता दें कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा पिछले महीने अपने कमरे में बेहोश पाई गई थी। 4 दिन बाद पटना के एक निजी अस्पताल में उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। पुलिस ने पहले इसे सुसाइड बताया, लेकिन परिजन ने रेप के बाद हत्या का आरोप लगाया। जब छात्रा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमें यौन उत्पीड़न का खुलासा हुआ। इसके बाद हंगामा बढ़ गया। पुलिस ने एसआईटी का गठन कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को विस्तृत अध्ययन के लिए एम्स भेजा गया। हॉस्टल मालिक को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पता चला कि छात्रा नाबालिग थी, तो इस केस में पॉक्सो एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं। छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की भी बात सामने आई। एसआईटी की ओर से कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस मामले का खुलासा जल्द करने का दावा ही कर रही थी कि पिछले सप्ताह इस केस को नीतीश सरकार ने सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि वह सीबीआई को मामला सौंपे जाने से संतुष्ट नहीं हैं। वह हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में एक निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने हॉस्टल, पुलिस और अस्पताल के स्टाफ की मिलीभगत का भी आरोप लगाया। फिलहाल केंद्रीय एजेंसी केस की जांच कर रही है।

AI वीडियो मामले में कांग्रेस को कोर्ट से झटका, पटना HC ने दिए हटाने के निर्देश

पटना  कांग्रेस द्वारा पीएम मोदी और उनकी मां के AI वीडियो मामले पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है.अदालत ने कांग्रेस से तत्काल रूप से इस वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है. पटना हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पी.बी. बाजंतरी की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश जारी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां हीराबेन मोदी को अपमानित करने वाला ये वीडियो तत्काल प्रभाव से सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया जाए. दरअसल, 10 सितंबर को बिहार कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के सपने में उनकी मां का AI-आधारित चित्रण किया गया है.  वीडियो में दिवंगत हीराबेन मोदी का किरदार बेटे को राजनीतिक लाभ के लिए अपने नाम का दुरुपयोग करने पर फटकार लगाता नजर आता है. एक दृश्य में पीएम मोदी जैसा दिखने वाला शख्स बिस्तर पर लेटते हुए कहता है, 'आज की वोट चोरी हो गई, अब अच्छी नींद लो.' फिर सपने में उनकी मां प्रकट होकर उन्हें नसीहत देती हैं. वीडियो को AI GENERATED मार्क किया गया था, लेकिन बीजेपी ने इसे घिनौना और मां का अपमान करार दिया था. साथ ही इस वीडियो को खिलाफ पटना हाईकोर्ट का रुख किया था. बीजेपी ने दर्ज कराई FIR बीजेपी ने अपनी शिकायत में दावा किया गया कि ये वीडियो न केवल प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने वाला है, बल्कि महिलाओं की गरिमा का उल्लंघन भी है. दिल्ली पुलिस ने पहले ही 13 सितंबर को बीजेपी कार्यकर्ता संकेत गुप्ता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. FIR में वीडियो को पीएम मोदी और उनकी मां की छवि को बदनाम करने वाला बताया गया है. कांग्रेस ने किया था बचाव कांग्रेस ने अपनी इस वीडियो का बचाव किया था. पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, 'यह वीडियो किसी का अपमान नहीं करता. मां केवल अपने बच्चे को राजधर्म सिखा रही है, अगर पीएम को ये अपमानजनक लगता है तो ये उनकी समस्या है.' खेड़ा ने जोड़ा कि वीडियो में कोई असम्मान नहीं है और बीजेपी इसे सहानुभूति बटोरने के लिए इस्तेमाल कर रही है. बिहार कांग्रेस ने आंतरिक जांच शुरू की है ताकि पता लगाया जा सके कि वीडियो साझा करने वाले कौन जिम्मेदार थे.