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बिहार का बलिराजगढ़ बना पुरातत्व का केंद्र, 10 साल तक चलेगी एएसआई खुदाई

पटना  बिहार का मधुबनी जिला इन दिनों चर्चा में है। दररअसल मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल से अनेक बहुमूल्य संरचनात्मक अवशेष और प्राचीन वस्तुएं पूरा शेष प्राप्त हुई हैं। यह जानकारी जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद एवं पर्यटन, परिवहन तथा संस्कृति संबंधी संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी है। संजय झा ने अधिकारियों से प्राप्त विस्तृत जानकारी साझा करते हुए लिखा है कि बलिराजगढ़ पुरातात्विक स्थल पर वर्तमान में चल रही खुदाई मुख्य रूप से दो हिस्सों- किले की दीवार और उसके दक्षिणी क्षेत्र में केंद्रित है। उन्होंने बताया है कि बलिराजगढ़ में उत्खनन के दौरान प्राचीन ईंटों की दीवार, 7 परतों वाली ईंटों की संरचना, आंगन, फर्श, रिंग वेल-कुआं और विशेष जल निकासी प्रणाली के साथ सोख्ता गड्ढा आदि मिले हैं। इसके साथ ही विभिन्न आकृतियों के बर्तन, सिक्के, मुहरें, मिट्टी की मूर्तिया, खिलौने और पत्थर की गेंदें भी मिली हैं। यह इस क्षेत्र के विभिन्न सांस्कृतिक चरणों और प्राचीन समृद्ध जीवनशैली को दर्शाती हैं। यहां फिलहाल एएसआई का दफ्तर खोलने पर काम चल रहा है। बताया ज रहा है कि यहां अगले 10 सालों तक खुदाई होगी। संजय झा ने बलिराजगढ़ में हो रही खुदाई की प्रगति के संबंध में शनिवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से बात की। सचिव द्वारा उन्हें बताया गया कि मंत्रालय बलिराजगढ़ में आगामी 10 वर्षों तक निरंतर खुदाई कराने, वहां एएसआई का कार्यालय खोलने और एक संग्रहालय के निर्माण पर आगे की कार्रवाई कर रहा है। इससे पहले उन्होंने इस सिलसिले में गत 19 मई को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर बलिराजगढ़ के संरक्षण और वैज्ञानिक उत्खनन के संबंध में विस्तृत चर्चा की थी। पर्यटन और आर्थिक विकास की संभावनाएं रामायण सर्किट और मिथिला पर्यटन में इस स्थल के पूर्ण उत्खनन से यह बिहार में रामायण सर्किट और सांस्कृतिक पर्यटन का एक बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। पर्यटकों को यह जगह काफी पसंद आ सकती है। खुदाई में हाई-टेक उपकरणों का इस्तेमाल एक खास बात यह भी है कि इस बार की खुदाई में पिछली बाधाओं (जैसे भूजल स्तर का ऊपर आना) से निपटने के लिए सैटेलाइट इमेजिंग, जीपीएस मैपिंग और आधुनिक वैज्ञानिक ट्रेंचिंग का उपयोग किया जा रहा है।

IMD पूर्वानुमान के बाद कृषि विभाग सक्रिय, धान की कम अवधि वाली किस्में अपनाने की अपील

 पटना भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई महीने में बिहार के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा और सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भा.कृ.अनु.प.) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने किसानों के लिए विस्तृत कृषि परामर्श जारी किया है। विज्ञानियों ने कहा है कि शुरुआती मौसम में सूखे की स्थिति बनने की आशंका है, इसलिए किसानों को समय रहते फसल, जल और पोषक तत्व प्रबंधन के उपाय अपनाने चाहिए। कम अवधि वाली फसलें लगाएं परामर्श में किसानों को कम अवधि वाली एवं सूखा सहनशील धान की किस्मों जैसे स्वर्ण श्रेया, स्वर्ण उन्नत, प्रभात, तुरंता, सहभागी, राजेंद्र श्वेता, डीआरआर-46, एराइज-6129 तथा एराइज-6444 की खेती करने की सलाह दी गई है। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां धान के बजाय अरहर, मक्का, रागी, सोयाबीन और अन्य मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती करने की अनुशंसा की गई है। विज्ञानियों ने पर्याप्त वर्षा या सिंचाई वाले क्षेत्रों में धान की सीधी बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस) अपनाने, बीज दर में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि करने तथा मैट-टाइप या डेपोग नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है। सामुदायिक नर्सरी विकसित करने की सलाह साथ ही पानी की उपलब्धता के अनुसार, चरणबद्ध रोपाई के लिए सामुदायिक नर्सरी विकसित करने, बीजों की प्राइमिंग करने तथा बुवाई से पहले फफूंदनाशी और जैव उर्वरकों से बीज उपचार करने पर जोर दिया गया है। जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो चुकी है, उन्हें रोपाई से पहले लेजर लैंड लेवलर से खेत समतल करने की सलाह दी गई है। जल प्रबंधन के तहत खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय वैकल्पिक गीला एवं सूखा (एडब्ल्यूडी) सिंचाई पद्धति अपनाने की सलाह दी गई है। सिंचाई तभी करने को कहा गया है, जब मिट्टी में हल्की दरारें दिखाई दें या जलस्तर सतह से 15 सेंटीमीटर नीचे चला जाए। खेत की मेड़ों की मरम्मत और ऊंचाई बढ़ाकर वर्षा जल के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया है। किश्तों में डालें उर्वरक पोषक तत्व प्रबंधन के लिए नाइट्रोजन उर्वरक को एक साथ देने के बजाय तीन से चार किश्तों में प्रयोग करने, नीम लेपित यूरिया का उपयोग करने तथा सूखी मिट्टी में यूरिया नहीं डालने की सलाह दी गई है। सूखे की स्थिति में फसल को बचाने के लिए दो प्रतिशत यूरिया अथवा एनपीके घोल का पर्णीय छिड़काव करने की भी अनुशंसा की गई है। खरपतवार नियंत्रण के लिए अंकुरण-पूर्व पेंडीमेथालिन या प्रेटिलाक्लोर तथा बाद की अवस्था में बिस्पायरीबैक-सोडियम के प्रयोग की सलाह दी गई है। जहां संभव हो, वहां कोनो-वीडर से यांत्रिक निराई तथा फसल अवशेषों से मल्चिंग कर मिट्टी की नमी बनाए रखने की भी सिफारिश की गई है।  

इको टूरिज्म से झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने की तैयारी

 रांची प्राकृतिक सौंदर्य और संसाधनों से भरपूर झारखंड में इको टूरिज्म के जरिए अर्थव्यवस्था को गति देने की पहल की जा रही है। वन एवं पर्यावरण विभाग ने रांची जिले के जोन्हा में इको टूरिज्म की पहल की है। हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जोन्हा का दौरा किया था और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर अपलोड किया था। अभी दुमका जिले में मयूराक्षी नदी के किनारे इको टूरिज्म चलाया जा रहा है। यहां इको फ्रेंडली कॉटेज में रहकर पर्यटक मयूराक्षी नदी पर बने बांध और वहां के वन क्षेत्र को देखते हैं। इसके अलावा दलमा में भी इको टूरिज्म कराया जा रहा है। लातेहार जिले के लोध और चतरा के तमाशीन जलप्रपात क्षेत्र में भी इको टूरिज्म चलाने की योजना बनाई जा रही है। इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी जाएगी। युवाओं को स्वरोजगार के जरिए आजीविका के नए रास्ते बताए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटकों को मिलेंगी सुविधाएं राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने जोन्हा में इको टूरिज्म की संभावना देखते हुए पर्यावरण की सुरक्षा के साथ कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। स्थानीय वन प्रबंधन समिति को इस तरह के इको टूरिज्म स्थलों के प्रबंधन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधा देते हुए प्राकृतिक धरोहरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात भी कही है। क्या होता है इको टूरिज्म इको टूरिज्म में स्थानीय समुदाय की पारंपरिक मान्यताओं के प्रति प्रतिबद्धता रखते हुए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाती है। संरक्षित क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदाय के लिए पर्यावरण संरक्षण और स्थायी आजीविका का संतुलन बनाकर ही इको टूरिज्म किया जाता है।  

पटना एम्स में बढ़ेंगी सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं, 200 नए ICU बेड होंगे तैयार

पटना बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। पटना एम्स के विस्तार के लिए राज्य सरकार 24 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को पखवारे के भीतर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इससे एम्स में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का तेजी से विस्तार होगा। गंभीर मरीजों को राज्य में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। 200 नए आईसीयू बेड के साथ बढ़ेंगी सुविधाएं अतिरिक्त भूमि मिलने के बाद पटना एम्स में करीब 200 नए आईसीयू बेड विकसित किए जाएंगे। इसके साथ कई नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग भी शुरू किए जाएंगे। इससे गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। दिल्ली एम्स की तर्ज पर होगा विकास पटना एम्स के विस्तार को लेकर भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने एम्स निदेशक का अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने संबंधी अनुरोध पत्र भी सौंपा। भूमि मिलने के बाद संस्थान को दिल्ली एम्स की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। ट्रॉमा सेंटर, कैंसर उपचार और लीवर ट्रांसप्लांट जैसी अत्याधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इससे प्रदेश के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत होगी कम पटना एम्स में सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं बढ़ने से राज्य के मरीजों को बाहर इलाज के लिए कम जाना पड़ेगा। कई जटिल सर्जरी और गंभीर बीमारियों का इलाज बिहार में ही संभव हो सकेगा। इससे इलाज का समय और खर्च दोनों कम होंगे। सरकार का लक्ष्य राज्य में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करना है। पटना एम्स का यह विस्तार बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान: बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट होंगे स्थापित

पटना बिहार में 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खुलने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को इसकी घोषणा की है। सीएम ने कहा कि आपराधिक मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार बिहार में अभी 54 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट सक्रिय हैं। इनमें से 48 विशेष रूप से पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों सुनवाई करती हैं। अब 100 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खुलने से लंबित रहने वाले गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ितों को न्याय मिलने में और तेजी आएगी। नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कहां-कहां किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से फिलहाल नहीं दी गई है। सीएम सम्राट चौधरी ने शनिवार को नए आपराधिक कानूनों से जुड़े दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसका आयोजन बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) और बिहार न्यायिक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बोधगया स्थित महाबोधि सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किया जा रहा है। सीएम ने दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि लगभग 10 फीसदी आबादी और 14 करोड़ से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बिहार की न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन पर टिकी हुई है। बिहार की पहचान हमेशा से न्याय के साथ विकास की रही है। नए आपराधिक आपराधिक कानूनों का प्रभावी एवं जनहितकारी क्रियान्वयन इसी भावना को और मजबूत करेगा। अपराध से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। सहयोग शिविर में जनता की समस्याओं का निपटारा मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सहयोग कार्यक्रम चलाया जा रहा है, उसमें कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर आवेदन दे सकता है। उस समस्या का सरकार 30 दिनों के भीतर समाधान कर देगी। हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी प्रखंडों में सहयोग शिविर का आयोजन किया जाता है। यहां आने वाले आवेदन का 30 दिनों में निपटारा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को सीएम कार्यालय से निलंबित कर दिया जाता है। महीने में एक बार राज्यस्तरीय सहयोग शिविर सम्राट चौधरी ने कहा कि हर महीने के दूसरे मंगलवार को राज्य स्तर पर पटना में सहयोग शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें वैसे लोग शामिल होंगे जिनके आवेदन का निष्पादन प्रखण्ड स्तर पर हुआ है लेकिन वे फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी समस्याओं का समाधान होगा और न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका सहयोगी बनेंगे तो काम अच्छा होगा।

भाजपा विधायक को बड़ा झटका, 4 साल की सजा सुनाई; पीड़ित को ₹25 लाख मुआवजा देने के निर्देश

मुजफ्फरपुर/नई दिल्ली दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में चार साल की सजा सुनाई. वह फिलहाल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. इस घटना में एक महिला डॉक्टर की मौत हो गई थी. कोर्ट ने विधायक पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. स्पेशल जज विशाल गोगने ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि दोषी को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II के तहत चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की सजा दी जाती है।  कोर्ट ने यह भी कहा कि जुर्माने की राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी. बिहार के साहेबगंज से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह ने कोर्ट से प्रोबेशन पर रिहाई की मांग की थी. उन्होंने दलील दी थी कि उनका किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और जनप्रतिनिधि के तौर पर उनका रिकॉर्ड बेदाग रहा है. राजू कुमार सिंह (56 वर्षीय) को आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II यानी गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी ठहराया गया. इसके अलावा उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का भी दोषी पाया गया।  हर्ष फायरिंग में गई थी महिला डॉक्टर की जान यह घटना 31 दिसंबर 2018 की है, जब राजू कुमार सिंह ने दिल्ली के वसंत कुंज स्थित अपने फार्महाउस में न्यू ईयर पार्टी आयोजित की थी. जश्न के दौरान राजू कुमार सिंह ने हर्ष फायरिंग की, जिसमें डॉ. अर्चना गुप्ता को गोली लग गई. वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने राजू कुमार सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया और अब सजा का ऐलान किया है।  राउज एवेन्यू कोर्ट ने 6 जून को अपने 97 पन्नों के फैसले में कहा था कि उत्सव और जश्न के दौरान की जाने वाली हर्ष फायरिंग देश में एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो अक्सर लोगों की जान ले लेती है. कोर्ट ने कहा था कि यह मामला भी ऐसी ही एक दुखद घटना का उदाहरण है, जहां बिहार के कई बार विधायक रहे राजू कुमार सिंह की कथित लापरवाह हर्ष फायरिंग के कारण न्यू ईयर पार्टी में शामिल एक महिला की मौत हो गई. कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि राजू कुमार सिंह ने ही वह गोली चलाई थी, जिससे अर्चना गुप्ता की मौत हुई. राउज एवेन्यू कोर्ट ने  इस मामले में सजा का ऐलान 7 जुलाई, 2026 को किया।  अब राजू कुमार सिंह की विधायकी जानी तय चूंकि राजू कुमार सिंह को दो साल से अधिक की सजा सुनाई गई है, इसलिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत उनकी विधायकी पर अयोग्यता लागू हो सकती है. ऐसे में बिहार विधानसभा की उनकी सदस्यता समाप्त की जा सकती है. अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें ऊपरी अदालत से दोषसिद्धि पर राहत मिलती है या नहीं. भारत में सांसद (MP) या विधायक (MLA) की सदस्यता जाने का नियम जनप्रतिनिधित्व कानून (Representation of the People Act), 1951 की धारा 8 के तहत तय होता है. अगर किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा किसी आपराधिक मामले में मिलती है, तो उसकी सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है।  यह नियम सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ऐतिहासिक फैसले (लिली थॉमस केस) के बाद लागू हुआ था. पहले दोषी जनप्रतिनिधियों को अपील के लिए कुछ समय मिल जाता था, लेकिन अब सजा होते ही अयोग्यता लागू हो जाती है. हालांकि, अगर ऊपरी अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) सजा पर स्टे (Stay on Conviction) दे दे, तो सदस्यता बच सकती है. सिर्फ सजा पर रोक (Stay on Sentence/Bail) पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि दोषसिद्धि पर रोक जरूरी होती है। 

बिहार B.Ed काउंसलिंग में कॉलेज आवंटन जारी, मेरिट और वरीयता के आधार पर चयन

मुजफ्फरपुर  CET BEd 2026: बिहार राज्य के दो वर्षीय बीएड एवं शिक्षा शास्त्री पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए आयोजित सीईटी-बीएड-2026 के प्रथम चरण की ऑनलाइन काउंसिलिंग का कॉलेज आवंटन जारी कर दिया गया है। कुल 36,872 अभ्यर्थियों को महाविद्यालय एवं विभाग आवंटित किए गए हैं। आवंटन सूची आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी गई है। महाविद्यालयों का आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट, आरक्षण नियमों तथा ऑनलाइन काउंसिलिंग के दौरान दी गई विश्वविद्यालय एवं कॉलेज वरीयता के आधार पर किया गया है। 4 से 10 जुलाई तक नामांकन कॉलेज आवंटित अभ्यर्थी 4 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक संबंधित महाविद्यालय या विभाग में उपस्थित होकर दस्तावेजों का सत्यापन कराने के बाद नामांकन करा सकेंगे। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रवेश नहीं लेने वाले अभ्यर्थियों का आवंटन स्वतः निरस्त माना जाएगा। 6.10 लाख से अधिक आवेदन इस वर्ष सीईटी-बीएड-2026 के लिए 6,10,811 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। विश्वविद्यालयों की वरीयता में सबसे अधिक पसंद बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर रहा, जिसे 1,13,824 अभ्यर्थियों ने प्राथमिकता दी। इन संस्थानों की रही सबसे अधिक मांग सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में भी अभ्यर्थियों ने बड़ी संख्या में वरीयता दी। सबसे अधिक पसंद किए गए कॉलेज इस प्रकार हैं:     शिक्षा विभाग, सीटीई, तुर्की (मुजफ्फरपुर) – 29,598     कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, गया – 27,288     राजकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय, समस्तीपुर – 22,885     महिला प्रशिक्षण महाविद्यालय, पटना – 20,206     कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, भागलपुर – 19,666     पटना ट्रेनिंग कॉलेज, पटना – 15,011 नामांकन के दौरान अभ्यर्थियों को निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे—     मैट्रिक, इंटरमीडिएट एवं स्नातक के अंकपत्र और प्रमाण-पत्र की छायाप्रति     स्नातकोत्तर अंकपत्र एवं प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     मूल सीएलसी/डीएलसी/टीसी     आवासीय प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     जाति प्रमाण-पत्र (आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए)     ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     दिव्यांग (PwD) प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     अन्य आरक्षण अथवा कोटा संबंधी प्रमाण-पत्र (यदि लागू हो)     हाल के चार पासपोर्ट आकार के रंगीन फोटोग्राफ समय पर पूरा करें नामांकन सीईटी-बीएड-2026 प्रशासन ने सभी आवंटित अभ्यर्थियों से निर्धारित तिथि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित महाविद्यालय में उपस्थित होकर नामांकन सुनिश्चित करने की अपील की है। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी प्रकार का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।  

बिहार में 7 लाख करोड़ की लागत से विकसित होंगे 12 नए स्मार्ट सैटेलाइट शहर

पटना  बिहार में 12 नए सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने हुडको (हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड) से 1 लाख करोड़ रुपये का करार किया है। इन नए शहरों को विकसित करने के लिए कुल 7 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। हुडको के अलावा 6 लाख करोड़ रुपये का निवेश बाहर से किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में शुक्रवार को पटना स्थित लोक सेवक आवास (सीएम हाउस) में नगर विकास एवं आवास विभाग और हुडको के बीच इसको लेकर करार हुआ। सीएम ने कहा कि किसानों को महज 30 दिन के भीतर जमीन का मुआवजा दिया जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि यह समझौता बिहार के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। राज्य में आधुनिक, सुव्यवस्थित एवं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सैटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जिससे लोगों को बेहतर आवास, उच्चस्तरीय नागरिक सुविधाएं तथा गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि लगभग तीन लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में टाउनशिप विकसित करने की योजना है। 30 दिनों में मिलेगा जमीन का मुआवजा मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में टाउनशिप बसाई जाएगी, वहां के स्थानीय किसानों और जमीन मालिकों को लैंड पुलिंग के जरिए इसमें भागीदार बनाया जाएगा। इसके अलावा, जो भी किसान मुआवजा के लिए आवेदन देंगे उन्हें 30 दिन के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा। यानी महज एक महीने के भीतर ही मुआवजा की राशि रैयतों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। बड़े पैमाने पर आएगा निवेश सम्राट चौधरी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से बिहार की आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। बड़े पैमाने पर निजी और संस्थागत निवेश आएगा। निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। पूर्व में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि इन नए शहरों को इंडस्ट्रियल और एजुकेशन के हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे बिहार में बड़े पैमाने पर उद्योग-धंधे खुलेंगे। सैटेलाइट टाउनशिप में होंगी ये सुविधाएं नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट शहरों में सभी तरह की आधुनिक नगरीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें सड़क के नेटवर्क से लेकर पेयजल, सीवरेज, बिजली आदि मूलभूत सुविधाएं होंगी। शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधा मिलेगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा। कमर्शियल और सामाजिक संरचनाएं भी बनाई जाएंगी, ताकि लोगों को वर्ल्ड क्लास शहरी जीवन का अनुभव हो सके। इन प्रमुख शहरों के पास बनेंगी सैटेलाइट टाउनशिप     पटना – पाटलिपुत्र टाउनशिप     गयाजी- मगध टाउनशिप     मुजफ्फरपुर – तिरहुत टाउनशिप     भागलपुर – विक्रमशिला टाउनशिप     छपरा – सारण टाउनशिप     सोनपुर – हरिहरनाथ टाउनशिप     दरभंगा – मिथिला टाउनशिप     पूर्णिया – पूर्णिया टाउनशिप     मुंगेर – अंग टाउनशिप     सहरसा – कोसी टाउनशिप     सीतामढ़ी – सीतापुरम टाउनशिप     रोहतास – डेहरी टाउनशिप

पटना कोर्ट में खान सर केस: दस्तावेजों के आदेश के बाद अगली तारीख 7 जुलाई तय

पटना  खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर फैजल खान (खान सर) की अग्र‍िम जमानत याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी।   जिला जज के छुट्टी पर रहने के कारण खान सर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हुई। अब सुनवाई 7 जुलाई को होगी। इससे पहले 30 जून को कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया था।  उस दिन लोक अभ‍ियोजक ने कोर्ट में कहा था क‍ि फैजल खान के दोनों गार्ड के पास अवैध हथ‍ियार थे। 30 जून को डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का द‍िया था निर्देश  दहशत फैलाने के उद्देश्‍य से 2 जून की रात फायरिंग की गई थी। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने हथ‍ियारों के लाइसेंसी होने की बात कही थी। उन्‍होंने दावा किया था कि दोनों के हथ‍ियार के दस्‍तावेज पुलिस ने जब्‍त कर लिए हैं।   इसके बाद कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॅक्‍यूमेंट जमा करने को कहा था। तीन जुलाई सुनवाई की तिथ‍ि तय की थी।  अब 7 जुलाई पर सबकी नजर टिक गई है।   2 जून की रात हुई थी फायरिंग  पुलिस जांच में सामने आया था क‍ि जून की रात खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज कोचिंग सेंटर पर पथराव और मारपीट के बाद चार राउंड गोली गार्डों ने चलाई थी।  खान सर के कहने पर ही गार्डों ने ऐसा किया था। इस आरोप में पूर्व में दर्ज एफआईआर में बाद में खान सर का नाम भी जोड़ा गया था।   उससे पूर्व ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके दो अन्‍य सहयोग‍ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में वे जमानत पर बाहर आए। 

सिमरिया-टंडवा मार्ग के सुधार कार्य को मंजूरी, कोयला परिवहन होगा आसान और सुरक्षित

चतरा  जिले के सिमरिया-टंडवा मार्ग की जर्जर स्थिति अब जल्द ही अतीत बनने वाली है। पथ प्रमंडल, चतरा अंतर्गत सिमरिया-टंडवा पथ के कुल 26.85 किलोमीटर लंबी सड़क की राइडिंग क्वालिटी में सुधार कार्य के लिए 33 करोड़ 76 लाख 45 हजार 200 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।  गुरुवार को राज्य कैबिनेट की बैठक में इसकी प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। इस स्वीकृति के बाद सड़क के उन्नयन का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। यह सड़क उत्तर कर्णपुरा कोयलांचल क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।  कोयला एवं फ्लाई ऐश परिवहन प्रभावित टंडवा स्थित कोयला खदानों और उत्तरी कर्णपुरा मेगा विद्युत ताप परियोजना से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहनों का आवागमन इसी मार्ग से होता है। लंबे समय से सड़क की खराब स्थिति के कारण कोयला एवं फ्लाई ऐश परिवहन प्रभावित हो रहा था, वहीं आम यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।  सड़क दुर्घटनाएं लगातार हो रही है। अब सड़क की राइडिंग क्वालिटी बेहतर होने से कोयला व फ्लाई ऐश परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और सुचारु हो सकेगा। सड़क के उन्नयन से सिमरिया, टंडवा तथा आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों को भी सीधा लाभ मिलेगा।  सड़क बनने से यात्रा का समय कम होगा बेहतर सड़क बनने से यात्रा का समय कम होगा, दुर्घटनाओं की संभावना घटेगी तथा वाहनों के रखरखाव पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। बरसात के मौसम में जलजमाव और गड्ढों की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है। इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। कोयला परिवहन से जुड़े उद्योगों, व्यवसायियों और परिवहनकर्ताओं को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध होगी।  जिले की आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी साथ ही स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों के परिवहन और आवश्यक सेवाओं की पहुंच भी अधिक आसान हो जाएगी। झामुमो जिला अध्यक्ष नीलेश ज्ञानेश ने प्रशासनिक स्वीकृति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।  उनका कहना है कि यह सड़क चतरा जिले की आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी है और इसके बेहतर होने से विकास को नई गति मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की यातायात व्यवस्था मजबूत होगी तथा कोयला परिवहन के साथ-साथ आम जनजीवन भी अधिक सुगम और सुरक्षित बनेगा।