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स्कूल भवन पर तालाबंदी, किराया विवाद में फंसे बच्चे – मकान मालिक ने उठाया ये कदम

इंदौर लोहा गेट पर निजी स्कूल में हंगामा हो गया। इमारत मालिक के रिश्तेदारों ने ताला लगाकर बच्चों को रोक दिया। पुलिस ने आपसी विवाद बता कर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। बच्चों को बगैर पढ़ाई के लौटाना पड़ा। घटना गली नंबर-8 की है। मेहरुन बी की इमारत में अल हीरा पब्लिक स्कूल का संचालन होता है। याकूब और अय्यूब मुल्तानी ने ताला लगा दिया सोमवार रात मेहरुन बी के भतीजें याकूब और अय्यूब मुल्तानी ने ताला लगा दिया। सुबह नर्सरी से आठवीं तक के बच्चे पढ़ने पहुंचे तो ताला लगा मिला। स्टाफ और बच्चे प्रांगण में प्रवेश ही नहीं कर सके। प्रिंसिपल याकूब मेनन के अनुसार इमारत साल 2008 में किराये पर ली थी। हर महीने 22 हजार रुपये किराये देते है। मेहरुन बी के भजीतों ने कहा कि किराया बढ़ाकर उन्हें दें। ताला लगाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित अनुबंध मेहरुन बी के नाम से होने के कारण मेनन ने मना कर दिया। सोमवार को वह थाने गया पर पुलिस ने कहा आपसी विवाद है। जिस इमारत में स्कूल संचालित होता है वह निजी संपत्ति है। किरायेदार और इमारत मालिक के विवाद में पुलिस नहीं बोल सकती है। मंगलवार को ताला लगाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई।

एम्स भोपाल से मरीजों को राहत, PET स्कैन से जुड़े खर्च होंगे कम

भोपाल अब एम्स भोपाल में भी कैंसर, हृदय और मस्तिष्क रोगों की पहचान के लिए अत्याधुनिक पीईटी स्कैन की सुविधा शुरू होने जा रही है। निजी अस्पतालों में जहां इसकी कीमत 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंचती है, वहीं एम्स में यह जांच बेहद कम शुल्क में उपलब्ध होगी। इसके लिए अस्पताल परिसर में विशेष भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सुविधा खासतौर से उन मरीजों के लिए राहत लेकर आएगी जिन्हें अब तक निजी अस्पतालों में महंगी जांच के लिए जाना पड़ता था। क्या है पीईटी स्कैन पीईटी स्कैन एक न्यूक्लियर इमेजिंग तकनीक है, जो शरीर के भीतर सेल स्तर की गतिविधियों को दिखाती है। इसमें एक रेडियोएक्टिव ट्रेसर इंजेक्ट किया जाता है, जो तेजी से सक्रिय अंगों में जाकर जमा होता है। ये ट्रेसर विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं, हृदय की क्षतिग्रस्त मांसपेशियों और मस्तिष्क के असामान्य हिस्सों में अधिक एकत्र होते हैं। स्कैनर इन सिग्नलों को पकड़कर 3डी इमेज बनाता है, जिससे बीमारी की सटीक स्थिति पता चलती है। कितना खर्च आता है निजी अस्पतालों में एक बार के पीईटी स्कैन पर 20,000 से 30,000 रुपये तक का खर्च आता है। जबकि एम्स भोपाल में यह सुविधा लगभग 2,000 से 3,000 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी। एम्स का उद्देश्य इसे आम और गरीब मरीजों के लिए सुलभ बनाना है। इन बीमारियों में मददगार कैंसर: किस अंग में है, कितना फैला है, इलाज का असर हो रहा है या नहीं हृदय रोग: हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह की स्थिति मस्तिष्क विकार: अल्जाइमर, पार्किंसन, एपिलेप्सी आदि। क्या है इसकी खासियत जहां सीटी और एमआरआई केवल शरीर की संरचना दिखाते हैं, वहीं पीईटी स्कैन शरीर की कार्यप्रणाली और मेटाबोलिक गतिविधियों को भी दिखाता है। इससे डाक्टर इलाज की दिशा बेहतर तय कर पाते हैं।

70 साल बाद इस गांव में पहली बार पक्की रोड का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ, ग्रामीणों जताई खुशी

मैहर मैहर जनपद के रिगरा गांव में वर्षों पुराने सपने ने आखिरकार साकार रूप ले लिया है। गांव में पहली बार पीसीसी (पक्की) रोड का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ, जिससे ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। दशकों से कीचड़ भरे रास्तों से गुजरते आ रहे ग्रामीणों के लिए यह सड़क एक बड़ी सौगात बनकर आई है। ग्रामीणों ने दीप जलाकर किया खुशी का इजहार जानकारी के अनुसार, रिगरा गांव की स्थिति लंबे समय से दयनीय थी। गांव की मुख्य सड़क कच्ची होने के कारण बारिश में कीचड़ और फिसलन की समस्या आम थी। करीब 70 वर्षों से इस गांव की जनता बदहाली झेल रही थी, जहां पीढ़ियों ने कीचड़ से भरे रास्तों पर चलकर जीवन बिताया। लेकिन अब जब पहली बार पीसीसी रोड का निर्माण कार्य पूरा हुआ, तो गांव वासियों ने दीप जलाकर और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों ने सरकार और अधिकारियों का आभार जताया महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़क पर खड़े होकर एक-दूसरे को बधाई दी और इसे विकास की ओर पहला कदम बताया। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि "इतने सालों में पहली बार हमारे गांव में सरकार की कोई योजना जमीन पर उतरी है। अब बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी नहीं होगी और बीमारों को अस्पताल तक लाने में राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों का आभार जताया और आशा व्यक्त की कि इसी तरह अन्य आवश्यक सुविधाएं भी गांव में जल्द पहुंचेंगी।" 

समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। इससे बढ़ती नगरीय जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे। इसे साकार करने के लिए मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। 'नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमॉरो' थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के शहरी विकास और निवेश पर देश की रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लिए शहरी विकास के ब्लूप्रिंट पर चर्चा करेंगे। शहरी क्षेत्रों में विकास की प्रगति मध्यप्रदेश में शहरी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। प्रदेश में 4 शहर ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। साथ ही केन्द्र की स्मार्ट सिटी परियोजना में 7 शहर शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में अधो-संरचाना विकास के संबंधित 72 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ करीब 88 हजार करोड़ रुपये की शहरी क्षेत्र से जुड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के लिये देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इंदौर देश में पिछले 7 वर्षों से स्वच्छतम शहरों की श्रेणी में पहले नम्बर पर रहा है। भोपाल को देश की दूसरे नंबर की स्वच्छतम राजधानी बनने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश के बजट में शहरी क्षेत्र के विकास के लिए 15 हजार 780 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में शहरी क्षेत्र का योगदान 35.55 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में संचालित केन्द्र की फ्लैग शिप योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों शामिल है। नगरीय विकास से जुड़ी योजनाओं की गति तेज बनाए रखने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। हाउसिंग सेक्टर में बेहतर निवेश की संभावना प्रदेश में हाउसिंग सेक्टर में निवेश की अच्छी संभावना है। अफोर्डेबल हाउसिंग में8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके है। प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जा रहे है। इनमें 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा। रियल एस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में मानव संसाधन की गुणवत्तापूर्ण वर्क फोर्स उपलब्ध है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 6 हजार किलोमीटर सड़क, 80 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शत् प्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई है। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाईज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।  

हृदय अभियान की राज्य नीति आयोग ने भी सराहना की, जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा

विकास प्रक्रियाओं में बढ़ा नवाचार हरदा का हृदय अभियान बना आदर्श उदाहरण, राज्य नीति आयोग ने की सराहना नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ हृदय अभियान की राज्य नीति आयोग ने भी सराहना की, जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा  भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर विकास प्रक्रियाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ। राज्य नीति आयोग ने भी इस अभियान की सराहना की है। जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हरदा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा शैक्षिक सेवाओं को "हृदय अभियान" के अंतर्गत माताओं, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। सभी हितग्राही माताएँ और 18 वर्ष तक के बच्चों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया गया। मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु के आंकड़ों में कमी लाने और कुपोषण को कम करने के लिये एक साथ विशेष गतिविधियां चलाई गई। इसके लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर जानकारी प्रदान करना, गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और बालक-बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां चलाई गई। ऐसे गांवो का चयन किया गया जिनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा संबंधी सूचकांक पिछले कुछ वर्षों में न्यूनतम रहे। कैसे हुई हृदय अभियान की शुरुआत जिले में नवाचार के रूप में कुपोषण मुक्त करने और जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा तथा स्वास्थ्य की सुविधाओं की पहुंच बच्चों और महिलाओं तक बढ़ाने के उद्देश्य से हृदय अभियान चलाया गया। दूर दराज के 50 गांवों को चिन्हित किया गया, जिनमें गर्भवती माताओं और बच्चों की समस्या दूसरे गांवों की अपेक्षा ज्यादा थी। स्वास्थ्य, महिला बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभागों का संयुक्त सर्वे कराया गया। संयुक्त दल ने डोर-टू-डोर सर्वे कर रिपोर्ट दी। गर्भवती माताओं का पंजीयन, टीकाकरण और हाई रिस्क महिलाओं का प्रबंध ग्राम और संस्था स्तर पर किया गया। जननी सुरक्षा योजना, प्रसूति सहायता योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी तथा भुगतान संबंधी समस्याओं का शिविर लगाकर निराकरण किया गया। पोषण सलाह, आयरन टेबलेट, कैल्शियम टेबलेट उपलब्ध कराई। सर्वे में प्राप्त कुपोषण प्रभावित बच्चों के लिए विशेष पोषण प्लान तैयार किया गया। शाला त्यागी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए फील्ड स्तर पर जनशिक्षक, प्रधानाध्यापकों के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया। "हृदय अभियान" का परिणाम यह रहा कि बच्चों में कुपोषण से मुक्त कराने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार, शाला त्यागी बच्चों को पुनः शाला में प्रवेश दिलाने में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पोषण स्तर में सुधार के लिए ग्रेन्यूल फॉर्म में कुपोषित बच्चों को फ्लेवर मुनगा ग्रेन्यूल पाउडर 10 ग्राम, दूध पाउडर 10 ग्राम के साथ प्रतिदिन दो बार दिया गया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अति कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया गया। इस प्रकार 225 कुपोषित बच्चों में सुधार हुआ। स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित 739 गर्भवती माताओं का बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। उनके समग्र आईडी बनाए गए। बैंकों में खाते खुलवाए गए। संस्थान प्रसवों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई। स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन से ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हुई। टीकाकरण कार्यक्रम में चिन्हित गांवों के बच्चों को टीके लगाए गए। इनमें 38 बच्चे टिमरनी, 26 खिरकिया और 29 बच्चे हंडिया ब्लॉक में हैं। स्वास्थ्य के अलावा 1752 शाला त्यागी बच्चों में से 562 को पुनः शाला में प्रवेश कराया गया।  

शैक्षिक ओलंपियाड : विद्यार्थी कर सकेंगे 30 जुलाई तक ऑनलाइन पंजीयन

भोपाल  प्रदेश के समस्त शासकीय प्राथमिक माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 2 से 8 के विद्यार्थियों को प्रदेश, देश और विश्व के सांस्कृतिक, भौगोलिक ऐतिहासिक परिदृश्य, समसामयिक सामान्य ज्ञान तथा हिन्दी, इंग्लिश, विज्ञान और गणित विषयों से जोड़ने के लिये मंच क्विज प्रतियोगिता ओलंपियाड का आयोजन इस वर्ष दो चरणों में जन शिक्षा केन्द्र और जिलास्तर पर किया जा रहा है। इस वर्ष जन शिक्षा केन्द्र स्तरीय आयोजन सितंबर और जिला स्तरीय आयोजन नवंबर माह में होगा। ओलंपियाड में सहभागिता के लिये विद्यार्थी शिक्षकों के सहयोग से ऑनलाइन पंजीयन rskmp पोर्टल पर 30 जुलाई तक कर सकेंगे। दूसरी कक्षा के बच्चे ओएमआर शीट पर प्रश्न हल करेंगे इस वर्ष ओलंपियाड में कक्षा दूसरी से लेकर 8वीं तक प्रारंभिक कक्षाओं के विद्यार्थी ओएमआर शीट पर प्रश्न हल करेंगे। इस व्यवस्था से बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये प्रारंभिक काल से अनुभव प्राप्त होगा। कक्षा 2 और 3 के लिये इंग्लिश, हिन्दी और गणित, कक्षा 4 और 5 के लिए इंग्लिश, हिन्दी, गणित एवं पर्यावरण विषय पर और कक्षा 6, 7 और 8 के लिए हिन्दी, संस्कृत, इंग्लिश, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान विषय में ओलंपियाड प्रतियोगिता होगी। ओलंपियाड के संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के राज्य शिक्षा केन्द्र ने विस्तृत दिशा-निर्देश जिला शिक्षा केन्द्र और शालाओं को प्रेषित किए है। कक्षा 2 और 3 में प्रत्येक जन शिक्षा केन्द्र से कुल 28 विद्यार्थी जिला स्तर की प्रतियोगिता के लिये चयनित होंगे। कक्षा 6 से 8 में जन शिक्षा केन्द्र स्तर पर सर्वाधिक अंको के आधार पर 36 विद्यार्थियों का चयन जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिये होगा। राज्य शिक्षा केन्द्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने ओलंपियाड प्रतियोगिता के आयोजन के लिये जिला कलेक्टर्स और राज्य शिक्षा केन्द्र अधिकारियों को भी निर्देश जारी किये है।     

रेलवे की पहल: अब यात्री गाड़ियों में स्टैंड अलोन सीसीटीवी कैमरे लगाए जायेंगे, कटनी से सतना के बीच शुरुआत

जबलपुर कटनी-सतना रेलमार्ग (Katni Satna Rail Line) और उस पर दौड़ रही ट्रेनों पर अब तीसरी नजर रहेगी। इस रेलखंड पर ट्रेनों में पथराव की घटनाएं हो चुकी हैं। यात्रियों के सामान चोरी के मामले भी सामने आते रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए अब आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित किया गया है। सतना से कटनी आउटर तक स्टैंड अलोन सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं। 24 घंटे करेंगे काम… जानिए स्टैंड अलोन सीसीटीवी कैमरों की खूबियां रेलखंड में स्थापित किए गए सीसीटीवी कैमरे सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। यह सीसीटीवी कैमरे चौबीस घंटे काम करेंगे। जीवंत दृश्य के साथ ही श्रव्य भी रिकार्ड करेंगे। इन सीसीटीवी कैमरों को पश्चिम मध्य रेल मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा गया है। संबंधित क्षेत्र के रेल सुरक्षा बल पोस्ट तक भी इन सीसीटीवी कैमरों की लाइव रिकॉर्डिंग पहुंचेगी। पश्चिम मध्य रेल की इस पहल ने संवेदनशील खंड में निवारक निगरानी और खुफिया-आधारित पुलिसिंग को काफी मजबूत किया है। दोनों स्टेशन के यार्ड भी नजर… बच नहीं पाएंगे अपराधी रेलवे के सीसीटीवी कैमरों की नजर में दोनों स्टेशन के यार्ड भी रहेंगे। स्टेशन में जगह नहीं होने पर कई ट्रेनें यार्ड में रुकती हैं। ट्रेन में चोरी, छीनाझपटी जैसी वारदात कर कई आरोपित ट्रेन के यार्ड में रुकने एवं धीरे होने पर उतरकर भाग जाते हैं। कई मामलों में आरोपी की पहचान तक नहीं हो पाती है। तीसरी नजर की सहायता से अब संदिग्धों की पहचान हो सकेगी। संदिग्ध गतिविधि के संदेह पर तुरंत कार्रवाई कर घटना को रोकना संभव होगा। नई डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था से यात्रा और सुरक्षित होगी।  

हमारी सरकार मेधावी स्टूडेंट्स को मेडिकल की पढ़ाई के लिए 80-80 लाख रुपए दे रही:सीएम यादव

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए बढ़ी खुशखबरी सुनाई है. उन्होने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले इच्छुक छात्रों सरकार की ओर से 80-80 लाख रुपए दिए जाएंगे. यही नहीं मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद इन छात्रों का लोन भी माफ कर दिया जाएगा. दरअसल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 4 जुलाई को इंटर में पास 75 प्रतिशत या उससे अधिक नंबर लाने वाले छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए  प्रोत्साहन राशि जारी की. सीएम मोहन ने  कुशाभाऊ सभागार में आयोजित हुए कार्यक्रम में शामिल हुए और प्रदेश के 94 हजार 234 मेधावी स्टूडेंट्स के खातों में लैपटॉप के लिए प्रोत्साहन राशि जारी की. इस दौरान उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक प्रदेश के प्रतिभाशाली छात्रों के लिए बड़ी सौगात दी. मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव ने ऐसे प्रतिभाशाली स्टूडेंट्स की बात की जो मेडिकल में पढ़ाई करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार मेडिकल की पढ़ाई के इच्छुक मेधावी स्टूडेंट्स को 80-80 लाख रुपए दे रही है। यही नहीं उन्होंने इस दौरान यह भी बताया कि कैसे मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद लोन माफ किया जा सकता है। जानें क्या बोले सीएम मोहन यादव… जानें कैसे माफ होगा लोन सीएम मोहन यादव ने बताया कि हमारी सरकार मेधावी स्टूडेंट्स को मेडिकल की पढ़ाई के लिए 80-80 लाख रुपए दे रही है। ताकि वो डॉक्टर बने। डॉक्टर बनने के बाद शासन उन्हें मेडिकल ऑफिसर बनाएगा। मेडिकल ऑफिसर के रूप में 5 साल पूरे करने के बाद, उनकी लोन राशि के 80 लाख रुपए भी माफ कर दिए जाएंगे। फिर उन्हें ये लोन राशि नहीं चुकानी पड़ेगी। ऐसे पूरा होगा बच्चों को आगे पढ़ाने का संपल्प बता दें कि सीएम मोहन यादव ने ये बातें मेधावी छात्र लैपटॉप योजना के तहत स्टूडेंट्स को लैपटॉप वितरित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि दो साल में हमारी सरकार प्रदेश भर में 50 मेडिकल कॉलेज खोलेंगे। कॉलेज खुलेंगे तो आने वाले समय में डॉक्टर्स की भर्ती भी तेजी से की जाएगी। बच्चों को आगे पढ़ाने, आगे बढ़ाने का संपल्प ऐसे ही तो पूरा होगा।  5 साल सेवा के बाद माफ हो जाएगा लोन इस योजना की सबसे बड़ी खासियत ये है कि अगर छात्र पढ़ाई के बाद सरकारी मेडिकल ऑफिसर के रूप में 5 साल सेवा करता है, तो उसका पूरा लोन माफ कर दिया जाएगा। यानी 80 लाख रुपए तक की राशि छात्र को लौटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौका सिर्फ मेधावी छात्रों को सीएम यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा जो प्रतिभाशाली हैं और आगे डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहते हैं। यह घोषणा उन्होंने उस कार्यक्रम के दौरान की जिसमें 12वीं में 75% से अधिक अंक लाने वाले 94,234 छात्रों को लैपटॉप के लिए प्रोत्साहन राशि दी गई। MP में बनेंगे 50 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले दो वर्षों में प्रदेश में 50 नए मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। इससे न केवल छात्रों को ज्यादा अवसर मिलेंगे, बल्कि प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी भी दूर होगी। भर्ती प्रक्रिया भी तेज की जाएगी, जिससे युवाओं को रोज़गार भी मिलेगा। डॉक्टर बनने का सपना अब दूर नहीं मध्य प्रदेश सरकार की इस योजना से उन छात्रों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा, जो मेडिकल की पढ़ाई करना तो चाहते हैं, लेकिन महंगी फीस और संसाधनों की कमी के कारण रुक जाते हैं। अब न सिर्फ उन्हें पढ़ाई के लिए आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि सेवा के बाद पूरा लोन भी माफ कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की इस नई पहल से मध्य प्रदेश के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है। यदि आप भी मेडिकल में करियर बनाना चाहते हैं, तो यह सुनहरा अवसर है।

भवन में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पर मकान मालिक पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना और सजा का भी प्रावधान

भोपाल  विधानसभा के मानसून सत्र में नगरीय विकास विभाग ने फायर सेफ्टी विधेयक पेश करने की तैयारी कर ली है। ड्राफ्ट सतपुड़ा भवन में आग लगने के बाद तैयार किया गया था, लेकिन दो साल में भी लागू नहीं हो पाया। इसमें अलग से अग्नि सुरक्षा संचालनालय का गठन प्रस्तावित है। 10 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान और सजा भी इससे अग्नि सुरक्षा के बेहतर इंतजाम हो पाएंगे। भवन में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने पर मकान मालिक पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना और सजा का भी प्रावधान किया गया है। इस एक्ट के लागू होने से अग्नि सुरक्षा की स्थिति सुधरने की संभावना है। विभाग ने ड्राफ्ट पर सभी स्तर पर डिस्कशन पूरे कर लिए हैं। इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। अग्नि सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। अलग अग्नि सुरक्षा संचालनालय के साथ ही प्रदेश में सेटअप भी प्रस्तावित किया गया है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दिए हैं एक्ट बनाने के निर्देश प्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट के लिए ड्राफ्ट पहले भी बन चुका है, लेकिन लागू नहीं किया गया। राज्य अग्नि सुरक्षा नियमों के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता, ननि अधिनियम 1956 तथा नपा अधिनियम 1961 पर ही निर्भर है। राज्य सरकार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अग्नि सुरक्षा कानून बनाने के निर्देश दिए हैं। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त संकेत भोंडवे के अनुसार मानसून सत्र में विधेयक पेश करने की तैयारी हो गई है। पारित होने के बाद प्रदेश में लागू किया जाएगा। ये होंगे मुख्य प्रावधान –अग्निशमन सेवा का नया कैडर बनाया जाएगा, इससे उनकी अलग भर्ती और प्रशिक्षण हो सकेगा। –सभी जिलों में नए फायर स्टेशनखोले जाएंगे। –भवनों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम सती से लागू किए जाएंगे। ऐसा नहीं करने वालों पर 10 हजार तक का जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है। –प्रदेश में फायर ब्रिगेड की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए कर्मचारियों से लेकर उपकरणों के इंतजाम होंगे। –पुलिस फायर स्टेशनके कर्मचारियों का भी विलय किया जाएगा। केंद्र से भी मदद नए सेटअप के लिए 5 हजार करोड़ से अधिक का बजट की जरूरत होगी। हालांकि यह बजट पांच साल में खर्च किया जाएगा और केंद्र सरकार से भी इसके लिए राशि मांगी जाएगी। अग्नि सुरक्षा के पुराने उपकरणों और फायर ब्रिगेड को बदला जाएगा। अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। भविष्य को देखते हुए बहुमंजिला भवनों की आग बुझाने के लिए भी विशेष उपकरण खरीदे जाएंगे।

घी की शुद्धता को लेकर मध्यप्रदेश में एक बड़ा कदम, अधिकारी द्वारा लिए जाएंगे सैंपल, ब्यूटाइरो-रिफ्रैक्टोमीटर से गुणवत्ता को परखा जाएगा

ग्वालियर  घी की शुद्धता को लेकर मध्यप्रदेश में एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के निर्देश पर जुलाई माह में पूरे प्रदेश में घी की गुणवत्ता की जांच का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। खास बात यह है कि यह सैंपल सीधे भोपाल और इंदौर की जांच प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे। हर जिले से लिए जाएंगे पैक्ड और लूज घी के सैंपल प्रदेश के हर जिले में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजार में बिक रहे घी के सैंपल लें। हर अधिकारी को कुल 5 सैंपल लेने हैं, जिनमें से दो पैक्ड घी यानी ब्रांडेड कंपनियों के और तीन लूज (बिना ब्रांड वाले) घी के होंगे। इन सैंपलों को भोपाल की CES लैब और इंदौर की चौकसी लैब में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। घी की जांच के लिए ब्यूटाइरो-रिफ्रैक्टोमीटर तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह पता लगाया जाएगा कि उसमें रिफाइंड ऑयल, पाम ऑयल या किसी अन्य सस्ती सामग्री की मिलावट तो नहीं की गई है। ग्वालियर-चंबल संभाग नकली घी के लिए बदनाम ग्वालियर-चंबल अंचल नकली घी, मावा और पनीर जैसी खाद्य सामग्रियों में मिलावट के लिए कुख्यात है। भिंड, मुरैना जैसे जिलों में सक्रिय मिलावट माफिया ना सिर्फ प्रदेश बल्कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों में भी माल सप्लाई करता है। त्योहारों के मौसम में यह मिलावट चरम पर होती है, जिससे आमजन की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराता है। इसके बावजूद ग्वालियर में प्रस्तावित फूड टेस्टिंग लैब अब तक शुरू नहीं हो पाई है। ग्वालियर में अब तक शुरू नहीं हो सकी लैब ग्वालियर के हुरावली इलाके में फूड लैब के लिए 2019 में भूमिपूजन किया गया था। लेकिन छह साल बीतने के बाद भी यह प्रयोगशाला शुरू नहीं हो सकी है। अब जबकि ढाई करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल गई है, उम्मीद जताई जा रही है कि लैब जल्द शुरू होगी और अंचल के जिलों को भोपाल या इंदौर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जुलाई भर चलेगा घी की जांच का अभियान ग्वालियर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि यह अभियान पूरे जुलाई माह तक चलेगा। सैंपलिंग के बाद जैसे ही लैब रिपोर्ट आएगी, एफएसएसएआइ गुणवत्ता मानकों के आधार पर कार्रवाई करेगा। जिन घी उत्पादकों में मिलावट पाई जाएगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।