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स्पेन के साथ फिल्म को-प्रोडक्शन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने किया एमओयू

मध्यप्रदेश और स्पेन के बीच फिल्म को-प्रोडक्शन को बढ़ावा देने हुआ एमओयू मध्यप्रदेश और स्पेन के बीच फिल्म निर्माण सहयोग के लिए ऐतिहासिक समझौता स्पेन के साथ फिल्म को-प्रोडक्शन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने किया एमओयू फिल्मी दुनिया में नए द्वार: एमपी और स्पेन में को-प्रोडक्शन को लेकर साझेदारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पेन फिल्म आयोग के साथ हुई महत्वपूर्ण चर्चा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पेन यात्रा के पहले दिन मैड्रिड में फिल्म आयोग के अध्यक्ष जुआन-मैनुअल गइमेरेन्स एवं अन्य प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में भारत और स्पेन के बीच फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में दोनों देशों को रचनात्मक और व्यावसायिक रूप से लाभ पहुँचाने वाले फिल्म को-प्रोडक्शन के अवसरों पर महत्वपूर्ण चर्चा के साथ फ़िल्म सह निर्माण को बढ़ावा देने एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता स्पेनिश फिल्म निर्माताओं को मध्यप्रदेश में शूटिंग स्थानों की पहचान करने के लिए प्रोत्साहित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेनिश प्रोडक्शन कंपनियों को मध्यप्रदेश में फिल्मांकन के लिए आमंत्रित किया और राज्य की विविधता, सरकारी सहयोग और अनुकूल माहौल का प्रमुखता से उल्लेख किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म आयोग के अध्यक्ष जुआन-मैनुअल गइमेरेन्स को सम्मानित भी किया। बैठक में स्पेन फिल्म आयोग ने स्पेन में विदेशी फिल्म प्रोडक्शंस के लिए उपलब्ध विभिन्न इंसेंटिव्स, सब्सिडी और सहूलियतों की जानकारी साझा की, जिससे भविष्य के सहयोग को प्रभावी स्वरूप दिया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की विविध और दर्शनीय लोकेशन्स और राज्य की फिल्म-फ्रेंडली नीति को विस्तार से प्रस्तुत किया, जो अंतर्राष्ट्रीय प्रोडक्शंस के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करती है। उन्होंने स्पेनिश निर्माताओं को मध्यप्रदेश में लोकेशन स्काउटिंग विज़िट के लिए आमंत्रित किया। बैठक में दोनों देशों की फिल्म नीतियों के बीच संभावित तालमेल और प्रक्रिया सरलता के बिंदुओं पर चर्चा हुई। भारत और स्पेन के बीच संयुक्त फिल्म समारोहों, वर्कशॉप्स और सांस्कृतिक आयोजनों की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मजबूत हो सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पोस्ट-प्रोडक्शन, वीएफएक्स, स्क्रिप्ट लेखन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसरों पर सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा की। स्पेन के प्रमुख फिल्म संस्थानों के साथ शॉर्ट टर्म कोर्स और एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। स्पेन में एक "मध्यप्रदेश फिल्म शोकेस" जैसे आयोजन की संभावना पर विचार किया गया, जिसका उद्देश्य राज्य की रचनात्मक क्षमता और लोकेशन्स को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है। बैठक से दोनों देशों के बीच फिल्म उद्योग में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी जिससे भविष्य में कई रोमांचक संयुक्त परियोजनाएं भी मूर्त-रूप ले सकेंगी।       

किसानों की राहत से जुड़ी खबर: PM धन-धान्य कृषि योजना आधिकारिक रूप से स्वीकृत

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' को मिली मंजूरी नई पहल: प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना को मिली मंजूरी, किसानों को मिलेगा लाभ किसानों की राहत से जुड़ी खबर: PM धन-धान्य कृषि योजना आधिकारिक रूप से स्वीकृत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  मोदी का माना आभार भोपाल  केंद्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा "प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना" को मंजूरी दे दी गई। देश के 100 जिलों के किसानों का जीवन बदलने वाली इस योजना की मंजूरी पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ह्रदय से आभार जताया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रि-परिषद द्वारा इस कृषि योजना को मिली स्वीकृति अत्यंत अभिनंदनीय है। देश के 100 जिलों के समग्र विकास को समर्पित यह विशिष्ट योजना' उन्नत कृषि- समृद्ध किसान' और 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने के संकल्प को नई दिशा और नई शक्ति देने जा रही है। उन्होंने कहा कि इस योजना से देश के अन्नदाताओं के जीवन में एक नया सूर्योदय होगा। 11 विभागों की 36 योजनाओं एवं प्राईवेट पार्टनरशिप से होगी संचालित केंद्रीय मंत्रि-परिषद ने 16 जुलाई को जारी वित्त वर्ष 2025-26 से आरंभ होकर 6 वर्ष की कालावधि के लिए शुरू होने वाली 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' को मंजूरी दी है, जो देश के 100 जिलों को कवर करेगी। योजना 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, अन्य प्रादेशिक योजनाओं और निजी क्षेत्र के साथ पब्लिक पार्टनरशिप (जन साझेदारी) के जरिए लागू की जाएगी। इसमें 100 जिलों का चयन तीन प्रमुख संकेतकों यथा कम उत्पादकता, कम फसल तीव्रता और कम ऋण वितरण के आधार पर होगा। योजना के प्रभावी नियोजन, क्रियान्वयन और निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। प्रत्येक धन-धान्य जिले में योजना की प्रगति की निगरानी 117 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) के आधार पर की जाएगी। योजना का प्रमुख उद्देश्य कृषि उत्पादकता में वृद्धि करना, फसल विविधिकरण और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को अपनाने को बढ़ावा देना है। पंचायत और ब्लॉक स्तर पर फसलोत्तर भंडारण को बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना तथा दीर्घकालिक और अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता को सुगम बनाना भी योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।  

CM यादव ने सांस्कृतिक महत्ता की सराहना की और स्पेन तथा भारत को संस्कृतियों को सहेजने वाला राष्ट्र बताया

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  अपने स्पेन दौरे के पहले दिन मैड्रिड स्थित विश्व के सबसे प्रतिष्ठित कला संग्रहालयों में से एक प्राडो म्यूजियम का भ्रमण किया। उन्होंने संग्रहालय के भव्य संग्रह और इसकी सांस्कृतिक महत्ता की सराहना की और स्पेन तथा भारत को संस्कृतियों को सहेजने वाला राष्ट्र बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राडो म्यूजियम सिर्फ कला प्रेमियों के लिए एक गंतव्य नहीं है, बल्कि यह शिक्षा,कला के संरक्षण और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का एक सशक्त मंच भी है। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय स्पेन की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और उसकी ऐतिहासिक कला परंपरा का जीता-जागता प्रतीक है। मैड्रिड में 1819 में स्थापित यह ऐतिहासिक संग्रहालय यूरोपीय कला के विशाल संग्रह के लिए जाना जाता है, जिसमें 12वीं शताब्दी से लेकर 20वीं शताब्दी की शुरुआत तक की उत्कृष्ट कृतियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेनिश, इतालवी और फ्लेमिश कलाकारों की अमूल्य पेंटिंग्स को करीब से देखा। विशेष रूप से उन्होंने फ्रांसिस्को गोया, डिएगो वेलाज़क्वेज़, एल ग्रीको, हिरोनिमस बॉश, पीटर पॉल रूबेंस और टिटियन जैसे महान कलाकारों की अमर कृतियों में गहरी रुचि दिखाई। प्राडो म्यूजियम में लगभग 8 हजार से अधिक चित्र, 700 से अधिक मूर्तियाँ और विभिन्न प्रकार के ड्रॉइंग्स तथा मुद्रित दस्तावेजों का एक विशाल संग्रह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस बात को भी रेखांकित किया कि यह संग्रहालय स्पेन की "सॉफ्ट पावर" और सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अंतर्राष्ट्रीय मंच पर देश की कलात्मक विरासत मजबूत उपस्थिति दर्ज करता है।  

पैरामेडिकल कोर्सेस को हरी झंडी: जीवाजी विश्वविद्यालय में 13 अगस्त तक लें प्रवेश

ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ पैरामेडिकल साइंसेज के अंतर्गत संचालित पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों को मध्यप्रदेश सह-चिकित्सीय परिषद, भोपाल द्वारा सत्र 2024-25 के लिए मान्यता प्रदान कर दी गई है। यह मान्यता 15 जुलाई को जारी की गई। साथ ही परिषद द्वारा पाठ्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि 13 अगस्त 2025 निर्धारित की गई है। इंस्टीट्यूट के समन्वयक प्रो नवनीत गरुड़ ने बताया कि छात्रों की रुचि और मांग को देखते हुए पिछले वर्ष सीटों में वृद्धि भी की गई थी। वर्तमान में संस्थान में तीन प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं- बीपीटी (बैचलर आफ फिजियोथेरेपी) साढे चार वर्ष, बीएमएलटी (बैचलर आफ मेडिकल लैब टेक्नोलाजी) तीन वर्ष तथा डीएमएलटी (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलाजी) दो वर्ष। विश्वविद्यालय के इन कोर्सेस की विशेषता यह है कि यहां नियमित रूप से कक्षाएं संचालित होती हैं तथा परीक्षाएं समय पर सम्पन्न कराई जाती हैं। इसके साथ ही छात्रों को व्यावहारिक अनुभव दिलाने के उद्देश्य से उन्हें जिला अस्पताल ग्वालियर में प्रशिक्षण भी दिया जाता है। मान्यता मिलने के बाद इन पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे अंचल के छात्रों को न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य में बेहतर करियर विकल्प भी प्राप्त होंगे।  संगीत विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए तिथि बढ़ी     राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में सत्र 2025- 26 के लिए प्रवेश की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी अंतिम तिथि 15 जुलाई रखी गई थी। इस तिथि में बदलाव कर अब इस बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से सूचना जारी की गई है। ये होंगी तय सीटें     कुलसचिव अरुण सिंह चौहान ने बताया कि सभी शासकीय और अशासकीय संगीत एवं कला महाविद्यालयों व अध्ययनशाला विभागों में स्नातक स्तर प्रति कक्षा प्रति विषय 40 सीट और स्नातकोत्तर स्तर प्रति कक्षा प्रति विषय 30 सीटें निर्धारित की गई हैं।     महाविद्यालयों व अध्ययनशाला विभागों में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अतिरिक्त सीट का प्रविधान रहेगा।     इसके अलावा लोक संगीत, लोक वाद्य, लोक नृत्य, लोक नाट्य एवं लोक कलाओं पर आधारित विशेष तिमाही स्ववित्तीय शार्ट टर्म कोर्सेस में भी एडमिशन लिया जा सकता है। यह होगी पूरी प्रकिया सबसे पहले छात्रों को एमपी ऑनलाइन के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन फार्म को विश्वविद्यालय अध्ययनशाला अथवा संबंधित महाविद्यालयों में जमा कराना होगा। संबंधित कोर्स संबंधी आवश्यक योग्यताएं पूर्ण होने पर ही अभ्यर्थियों का प्रवेश दिया जाएगा।

हेल्पलाइन लापरवाही मामला: सरकार का बड़ा एक्शन, दो सचिवों पर गिरी गाज

श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन के निराकरण को लेकर प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है तथा सभी को निर्देश गए गए हैं कि सीएम हेल्पलाइन का निराकरण तत्परतापूर्वक गंभीरता से किया जाए। इसी क्रम में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत अतेन्द्र सिंह गुर्जर द्वारा सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में रुचि नहीं लेने एवं कार्यों में लापरवाही के चलते जहां दो पंचायत सचिवों के विरूद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है।   13 अधिकारियों को नोटिस वहीं जनपद पंचायतों के 7 उपयंत्रियों, 3 एडीईओ सहित 13 पंचायतों के सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार जनपद पंचायत विजयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गोहर के सचिव सोबरन कुशवाह और ग्राम पंचायत जाखेर के पंचायत सचिव राजेश जादौन को शासकीय कार्यों में लापरवाही एवं सीएम हेल्पलाइन में रुचि नहीं लेने के चलते निलंबित किया गया है। इन अधिकारियों को भेजे गए नोटिस निलंबन अवधि में दोनों सचिवों का मुख्यालय जनपद पंचायत विजयपुर किया गया है। इसी प्रकार सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण नहीं करने पर जनपद पंचायत कराहल के उपयंत्री अजीत गिरी, जनपद पंचायत श्योपुर के दीपक धाकड़ एवं प्रेमनारायण राठौर, जनपद पंचायत विजयपुर के रामेश्वर गुप्ता, रामनिवास धाकड, शरद उच्चारिया एवं प्रियंका जादौन, सहायक विकास विस्तार अधिकारी जनपद श्योपुर अमन शिवहरे, एडीईओ विजयपुर अभिनंदन भदौरिया एवं देवेन्द्र प्रजापति को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसी प्रकार जनपद पंचायत विजयपुर के ग्राम पंचायत पार्वती बड़ौदा, गसवानी, गढी, वीरपुर, रघुनाथपुर, देवरी, लाडपुरा, इकलौद, फरारा, सहसराम, कींजरी, आरोदा एवं मैदावली के पंचायत सचिवों और जीआरएस को नोटिस जारी किए गए हैं।

MP में निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मैड्रिड में निवेशकों संग वन-टू-वन चर्चा निवेशकों ने मध्यप्रदेश में निवेश का बनाया मन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव MP में निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा एमपी बना वैश्विक निवेश का आकर्षण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ स्पेन के निवेशकों के साथ हुई वन-टू-वन बैठक में मध्यप्रदेश की सरल औद्यौगिक नीतियों से निवेश की संभावनाएं बढ़ी है। अनेक निवेशकों ने प्रदेश में निवेश का मन भी बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पेन यात्रा के पहले दिन मैड्रिड में निवेशकों के साथ बैठकें आयोजित हुईं, जिनमें मध्यप्रदेश में निवेश की अपार संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इन बैठकों में राज्य के औद्योगिक विकास, अधोसंरचना, पर्यटन, ऊर्जा और अन्य उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को लेकर विशेष रुचि दिखाई गई। नेचर बायो फूड्स (एलटी फूड्स लिमिटेड की सहायक इकाई) के सीईओ ने मध्यप्रदेश में 200 करोड़ रूपये के संभावित निवेश के साथ जैविक खाद्य और मूल्यवर्धित उत्पाद इकाई की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की। यह निवेश किसान भागीदारी, रोजगार सृजन एवं निर्यातोन्मुख उत्पादन को प्रोत्साहित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सैंटेंडर समूह के सीनियर एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट डेवलपमेंट) जोसे लुइस दे मोरा गिल-गालाडॉ ने सौजन्य भेंट की। सैंटेंडर समूह की भारत में प्रत्यक्ष उपस्थिति नहीं होने के बावजूद, यह भारत से जुड़े वित्त-पोषण, व्यापार सेवाओं और परियोजनाओं में भागीदारी करता रहा है। बैठक के दौरान आधारभूत संरचना परियोजनाओं के वित्त पोषण, व्यापार एवं निवेश प्रवाह को सशक्त बनाने तथा नवाचार आधारित वित्तीय समाधान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के साथ संभावित सहयोग पर चर्चा हुई। मोएवे ग्रुप के प्रतिनिधि कार्लोस डियाज़ और बायोफ्यूल्स बिजनेस यूनिट की सुपिलार सिएनफुएगोस ने राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन, 2G बायोफ्यूल्स (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल्स) तथा रसायन क्षेत्र में संभावित साझेदारी को लेकर रुचि जताई। कंपनी स्थानीय एजेंटों के साथ दीर्घकालिक फीडस्टॉक आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं उत्पादन संयंत्रों की स्थापना की संभावनाओं का अन्वेषण कर रही है। ग्रुपो ग्रैनसोलर, एसएल के कॉर्पोरेट व्यवसाय निदेशक सईद इस्ताम्बुली ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। ग्रैनसोलर, 30 से अधिक देशों में सक्रिय है, मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के बरेठी में इंफ्राकॉन के सहयोग से दो परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये एनटीपीसी की मंजूरी के लिए उन्होंने अपेक्षा की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरो जॉयरोकॉप्टर स्पेन एस.ए. के सीईओ एवं पार्टनर मनीष जैन ने मुलाकात कर अल्ट्रालाइट जॉयरोकॉप्टर की श्रृंखला “डायमंड फ्लाई” को लेकर राज्य में संभावित निवेश पर चर्चा की। यह प्रणाली रक्षा, आपातकालीन सेवाएं, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स एवं कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। उन्होंने संभावित लोकेशन, राज्य सरकार की सब्सिडी, कर लाभ एवं विमानन अवसंरचना पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेंटर फॉर एंटरटेनमेंट आर्ट्स के सह-संस्थापक एवं सह-प्रमुख दिवाकर गांधी ने राज्य में वैश्विक एवीजीसी स्किलिंग कंपनी की स्थापना के लिये चर्चा की। बैठक में एमपी एवीजीसी नीति के अंतर्गत मिलने वाले प्रोत्साहनों, कौशल विकास, युवा रोजगार और डिजिटल मीडिया उद्योग को सशक्त करने के लिये भी संभावित सहयोग के विषय पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। ग्रुप के सीएफओ फेहमी ने भी निवेश संबंधी चर्चा की। इन बैठकों ने मध्यप्रदेश में विविध क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रस्तुत किया है, जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति और रोजगार निर्माण को नई गति मिलने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि वे एक बार मध्यप्रदेश का भ्रमण जरूर करें, उन्हें निवेश के बेहतर अवसर मिलेंगे।  

पीके का फंडा’ की पहली प्रति राज्यपाल को भेंट

पीके का फंडा' की पहली प्रति राज्यपाल को भेंट   प्रवीण कक्कड़ ने माँ की स्मृति को किया समर्पित  भोपाल/इंदौर  प्रख्यात सामाजिक चिंतक, लेखक और पूर्व पुलिस अधिकारी प्रवीण कक्कड़ ने अपनी नई चिंतनपरक कृति "पीके का फंडा" की प्रथम प्रति आज मध्य प्रदेश के राज्यपाल, माननीय श्री मंगूभाई पटेल को राजभवन में सादर भेंट की। यह अवसर केवल एक पुस्तक भेंट नहीं, बल्कि प्रेरणा, श्रद्धा और सार्थक विचारों के संगम का साक्षी बना। श्री कक्कड़ ने इस दिन को अपने जीवन का एक अत्यंत भावपूर्ण क्षण बताया, क्योंकि 16 जुलाई उनकी पूज्यनीय माता, स्व. श्रीमती विद्यादेवी कक्कड़ जी की जयंती भी है। उन्होंने भावुकता से कहा, "यह पुस्तक मैंने माँ की पावन स्मृति को समर्पित की है। जीवन में जो कुछ भी मैंने पाया, उसमें उनकी प्रेरणा, संस्कारों और मूल्यों की गहरी छाया है।" यह समर्पण पुस्तक के मूल भाव—आत्मिक जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन—से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है। शिवना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह कृति प्रवीण कक्कड़ के प्रशासनिक, सामाजिक और निजी अनुभवों का ऐसा समावेश है, जो पाठकों को न केवल प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें आत्ममंथन की दिशा में ले जाती है—यह स्पष्ट करते हुए कि वास्तविक परिवर्तन की शुरुआत भीतर से होती है, न कि बाहरी परिवेश से। माननीय राज्यपाल महोदय को पुस्तक भेंट करने के इस विशेष अवसर पर प्रवीण कक्कड़ के सुपुत्र सलिल कक्कड़, तथा "पीके का फंडा" टीम से सुमित अवस्थी और प्रकृति चटर्जी भी उपस्थित रहे।  आत्ममंथन का निमंत्रण  शिवना प्रकाशन प्रमुख पंकज सुबीर ने एक प्रेरक और चिंतनपरक कृति बताया। उन्होंने कहा, "यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि जीवन की आपाधापी में कुछ पल ठहरकर, भीतर झाँकने और स्वयं से संवाद करने का हार्दिक निमंत्रण है।"  बेस्टसेलर: पाठकों का अपार स्नेह  शिवना प्रकाशन के संपादक शहरयार ख़ान ने बताया कि "पीके का फंडा" ने अपनी रिलीज़ से पहले ही पाठकों के बीच असाधारण लोकप्रियता प्राप्त की है। अमेज़न की प्री-बुकिंग बेस्टसेलर रैंकिंग में यह पुस्तक पहले स्थान पर रही, और अब तक 1000 से अधिक प्रतियाँ ऑनलाइन प्री-बुक हो चुकी हैं। यह उपलब्धि लेखक की विचारशील लेखनी और पाठकों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रवीण कक्कड़ की पहली पुस्तक "दंड से न्याय तक" को अंतरराष्ट्रीय "शिवनाकृति सम्मान" प्राप्त हो चुका है।

पुजारी के बहिष्कार से बच्चों की पढ़ाई बाधित, प्रशासन ने शुरू की जांच

उज्जैन बड़नगर तहसील के पीर झलार गांव में खाप पंचायत जैसा मामला सामने आया है। यहां मंदिर में हुई सामाजिक बैठक में पुजारी और उसके परिवार का बहिष्कार कर दिया गया। सुनाए गए फैसले में बच्चों की पढ़ाई से लेकर पूजन, मजदूरी, घर के आसपास सफाई तक पर रोक लगा दी गई। फैसले का उल्लंघन करने पर 51 हजार रुपये जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं।   मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश जानकारी के अनुसार पीर झलार गांव में करीब 300 साल पुराना देव धर्मराज मंदिर है। पूनमचंद चौधरी उर्फ पूनाजी यहां पुजारी हैं। मंदिर की करीब सात बीघा जमीन पर पुजारी खेती कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। चौधरी के मुताबिक कुछ ग्रामीण मंदिर की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्होंने मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लिया। उसी राशि से मंदिर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है, जिसका पुजारी परिवार ने विरोध किया। पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया पुजारी के बेटे मुकेश चौधरी ने बताया कि विरोध के बाद उन्हें और परिवार को निशाना बना लिया। गांव के प्रभावशाली लोगों ने 14 जुलाई को पंचायत बुलाकर बहिष्कार का फरमान सुना दिया। गांव के नागराज मंदिर परिसर में पूर्व सचिव गोकुल सिंह देवड़ा ने पंचायत का फैसला माइक पर पढ़कर सुनाया। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें ग्रामीण बैठे नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद पुजारी पूनमचंद चौधरी ने कलेक्टर रौशन कुमार सिंह से शिकायत की है। पुजारी परिवार के तीन बच्चों को स्कूल से निकाला पुजारी के बेटे मुकेश ने बताया कि उसके तीन बच्चे 13 वर्षीय संध्या (आठवीं), 10 वर्षीय सतीश (पांचवीं) और छह वर्षीय विराट (तीसरी कक्षा) निजी विद्यालय में पढ़ते हैं। पंचायत के फैसले के बाद तीनों को स्कूल से निकाल दिया गया है। स्कूल प्रबंधन ने कहा कि आपके परिवार का विवाद चल रहा है, इसलिए हम बच्चों को नहीं पढ़ा सकते। 'पुजारी परिवार की शिकायत पर जांच के आदेश दिए हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मंदिर का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।' रौशन कुमार सिंह, कलेक्टर

जबलपुर एवं ग्वालियर को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये मिलेगा मिनिस्ट्रियल अवार्ड

भोपाल नई दिल्ली में गुरुवार 17 जुलाई को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्‍य एवं केन्‍द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर एवं केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री राज्‍य मंत्री श्री तोखन साहू की उपस्थिति में प्रात: 11 बजे विज्ञान भवन में स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 पुरस्कार समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में मध्यप्रदेश के आठ शहरों इन्दौर, उज्जैन, बुदनी, भोपाल, देवास, शाहगंज, जबलपुर एवं ग्वालियर को उनके उत्कृष्ट स्वच्छता प्रयासों के लिए विभिन्‍न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रदेश के विजेता शहरों के गौरवशाली पलों के साक्षी बनने के लिये नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी उपस्थित रहेंगी। प्रदेश के इन 8 शहरों ने स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। यह सम्मान उनके सतत प्रयासों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है। उल्‍लेखनीय है कि इस आयोजन में स्‍वच्‍छ भारत मिशन (शहरी) अंतर्गत केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरों के अथक प्रयासों को मान्‍यता देते हुए शहरी भारत के सबसे स्‍वच्‍छ शहरों को पुरस्‍कृत किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण-2024, जो कि भारत में शहरी स्वच्छता के आंकलन का विश्व का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। यह सर्वेक्षण इस वर्ष अपने 9वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष 'सुपर स्‍वच्‍छ लीग शहर, पाँच जनसंख्‍या श्रेणियों में शीर्ष, स्‍वच्‍छ शहर, विशेष श्रेणी : गंगा शहर, छावनी बोर्ड, सफाई मित्र सुरक्षा, महाकुंभ, राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार आदि श्रेणियों में पुरस्‍कार प्रदान किए जाएंगे। प्रदेश के इन्‍दौर, उज्‍जैन एवं बुदनी को सुपर स्‍वच्‍छ लीग श्रेणी, भोपाल, देवास और शाहगंज को राष्‍ट्रपति पुरस्‍कार, जबलपुर को विशेष श्रेणी एवं ग्‍वालियर को राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाएगा। इसके अलावा कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग और खुले में शौच से मुक्‍त शहरों की श्रेणियों (ओडीएफ++, वॉटर+) के परिणाम भी इसी दिन जारी किए जाएंगे। इस वर्ष का सर्वेक्षण “रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल” की थीम पर आधारित था। इसमें शहरी स्‍वच्‍छता और सेवा स्‍तर का आंकलन करने के लिए एक सजग, संरचित दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें 54 संकेतकों सहित 10 सुपरिभाषित मापदंडों पर शहरों में स्‍वच्‍छता और अपशिष्‍ट प्रबंधन के आधार पर लगभग 3 हजार से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा 45 दिनों तक देशभर के लगभग 4 हजार 500 से अधिक शहरों के प्रत्‍येक वार्ड का गहन निरीक्षण किया गया। स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न मापदण्‍डों में समावेशिता, पारदर्शिता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता सहित 11 लाख से अधिक घरों का मूल्‍यांकन किया गया। यह राष्‍ट्रीय स्‍तर पर शहरी जीवन और स्‍वच्‍छता के मायने को समझने के लिए एक व्‍यापक और दूरगामी दृष्टिकोण को दर्शाता है। वर्ष-2024 के स्‍वच्‍छ सर्वेक्षण के मूल्‍यांकन में लगभग 14 करोड़ देशवासियों द्वारा प्रत्‍यक्ष संवाद, स्‍वच्‍छता ऐप, माईगव और सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म के माध्‍यम से अपना फीडबैक भी दिया गया। स्‍वच्‍छता में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने वाले शहरों के लिए एक नई पहल सुपर स्‍वच्‍छ लीग (एसएसएल) की शुरूआत की गई है। सुपर स्‍वच्‍छ लीग का उद्देश्‍य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले शहरों को स्‍वच्‍छता के उच्‍च मानकों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करने के साथ ही अन्‍य शहरों को भी अपने प्रदर्शन में सुधार करने और शीर्ष रैंकिंग के लिए प्रतिस्‍पर्धा करने के लिये प्रोत्‍साहित करना है। स्‍वच्‍छ शहर लीग में वे शहर शामिल होंगे, जो पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार शीर्ष तीन में शामिल हुए हैं और वर्तमान में अपनी संबंधित जनसंख्‍या श्रेणी में शीर्ष 20 प्रतिशत में बने हुए हैं। इस अवसर पर देश के सभी शहरों के लिये कचरा मुक्त शहरों की स्टार रेटिंग, खुले में शौच से मुक्ति ओडीएफ़ और उपयोगित जल के प्रबंधन के लिये वॉटर प्लस प्रमाणीकरण भी जारी किए जाएंगे। इनके अलावा 44 नगरीय निकायों ने वॉटर प्लस के लिये भी अपने दावे प्रस्तुत किए हैं। आठ शहरों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी विजेता शहरों को बधाई दी है। उन्होने अपने संदेश में इस उपलब्धि के लिए सभी सफाई मित्रों, नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों, कर्मचारियों, अधिकारियों और सभी सहयोगियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि “प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्वच्छता का जो संकल्प लिया है, उसमें मध्यप्रदेश कदम से कदम मिलाकर चल रहा है।’’ समारोह में महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, महापौर उज्जैन श्री मुकेश टटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, महापौर ग्वालियर डॉ. शोभा सिकरवार, महापौर जबलपुर श्री जगत बहादुर सिंह और महापौर देवास श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल अपनी टीम के साथ भाग ले रहे हैं। इनके साथ नगर पालिका अध्यक्ष बुदनी श्रीमती सुनीता अर्जुन मालवीय एवं अध्यक्ष शाहगंज सुश्री सोनम भार्गव भी अपने टीम सदस्यों के साथ पुरुस्कार समारोह में उपस्थित रहेंगी। आयुक्त नगरीय प्रशासन श्री संकेत भोंडवे, मिशन संचालक डॉ. परीक्षित झाड़े, नगर निगम आयुक्त और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के साथ इस समारोह में शामिल हो रहे हैं। इस आयोजन में अधिकारी, कर्मचारी, जन-प्रतिनिधि, स्वच्छता सहयोगियों और सफाई मित्रों सहित 100 से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधि मण्डल मध्यप्रदेश का नेतृत्त्व करेगा।  

किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गयी, आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता

भोपाल ब्रिज परियोजनाओं का तकनीकी मापदंडों के अनुसार निर्माण सुनिश्चित करने की दिशा में लोक निर्माण विभाग द्वारा सतत कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक व्यापक दक्षता संवर्द्धन कार्यक्रम निर्धारित किया है, जिसके अंतर्गत राज्य के सभी अभियंताओं को इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) कोड्स और मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज़ (मोर्थ) के दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर उनके आधार पर कार्यों का क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए हैं। ब्रिज परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण निर्माण, मापदंड अनुसार डिजाइन, सतत सुपरविजन प्रणाली अपनाने एवं निर्माण के दौरान सतत निरीक्षण के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। रेलवे अथवा नगर निगम जैसे विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया भी स्पष्ट की गई है। मुख्य अभियंता सेतु परिक्षेत्र पीसी वर्मा द्वारा स्पष्ट किया गया है कि पुराने अलाइनमेंट्स को रद्द नहीं किया गया है अपितु गलती से जारी हुआ एक त्रुटिपूर्ण आदेश उसी दिन निरस्त कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि पुलों और फ्लायओवर की जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जीएडी) रेलवे और लोक निर्माण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से जारी की जाती हैं। मुख्य अभियंता को इन्हें निरस्त करने का कोई अधिकार नहीं है और ऐसी कोई आवश्यकता किसी परियोजना में परिलक्षित नहीं हुई है। निर्माण कार्यों के दौरान अक्सर स्थान विशेष की परिस्थिति अनुसार अलाइनमेंट और डिजाइन में परिवर्तन की आवश्यकता होती है, जो कि सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे परिवर्तनों के दौरान संबंधित आईआरसी कोड और मोर्थ के मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाता है। राज्य शासन ने निर्देश जारी किए हैं कि निर्माण के दौरान होने वाले सभी परिवर्तन अन्य स्टेकहोल्डर्स जैसे नगर निगम और रेलवे के समन्वय से ही किए जाएं। परियोजनाओं के रुकने जैसी कोई स्थिति नहीं है। ब्रिज परियोजनाओं में आने वाली जटिल बाधाओं के शीघ्र निराकरण के लिये प्रमुख अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें आवश्यकता अनुसार शासकीय या निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जा सकता है। अब समस्याओं का तकनीकी स्तर पर शीघ्र समाधान हो सकेगा और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। राज्य शासन ने यह भी निर्णय लिया है कि प्रदेश के सभी अभियंताओं का दक्षता संवर्द्धन किया जाए। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के तकनीकी सलाहकार को इंडियन अकादमी फॉर हाईवे इंजीनियरिंग के साथ मिलकर पुलों के गुणवत्तापूर्ण निर्माण हेतु प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग बड़ी परियोजनाओं के लिए अनुबंध के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता और डिजाइन में निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। बड़ी परियोजनाओं को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर करने की कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। साथ ही राज्य शासन विभागीय क्रियान्वयन में अधिकतम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग पर भी विचार कर रहा है, जिसमें बड़ी परियोजनाओं की कैमरा युक्त निगरानी भी शामिल है। इस संबंध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेतु परिक्षेत्र द्वारा किसी भी कार्य की जीएडी निरस्त नहीं की गई है और ना ही किसी कार्य को रोका गया है।