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श्रद्धालुओं के लिए जरूरी खबर: मैहर शारदा मंदिर का रोपवे 14 मार्च तक बंद, टिकट बुकिंग वालों को रिफंड

सतना मैहर जिला में स्थित मां शारदा देवी मंदिर में संचालित दामोदर रोपवे सेवा 5 मार्च से 14 मार्च तक मेंटेनेंस कार्य के कारण बंद कर दी गई है। रोपवे प्रबंधन ने ऑनलाइन टिकट बुक कराने वाले यात्रियों को टिकट कैंसिल कर रिफंड लेने की सुविधा दी है। मैहर स्थित मां शारदा देवी मंदिर में संचालित दामोदर रोपवे सेवा 5 मार्च से 14 मार्च तक मेंटिनेंस कार्य के चलते पूरी तरह बंद कर दी गई है। इस अवधि में रोपवे का संचालन स्थगित रखा गया है। टिकट बुकिंग पर रोक और रिफंड की मांग रोपवे बंद होने के साथ ही ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी अस्थायी रूप से रोक दी गई थी, लेकिन इससे पहले कई श्रद्धालुओं ने लगभग एक सप्ताह पहले ही एडवांस टिकट बुक करा ली थी। इसके चलते कुछ यात्री पहले से बुक टिकट लेकर मैहर पहुंच रहे हैं और रिफंड की मांग कर रहे हैं। रोपवे प्रबंधन के अनुसार 5 मार्च से 15 मार्च के बीच कुल 18 लोगों ने 77 एडवांस टिकट बुक किए थे।   रिफंड प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति आठ टिकट धारकों को रिफंड, 30 यात्रियों का मिलना बाकी: 5 मार्च से 15 मार्च के बीच कुल 18 लोगों की 77 एडवांस टिकट बुक हुए थे। इनमें से 8 टिकटों का रिफंड, जिसमें 33 यात्रियों की राशि शामिल है, पूरा कर दिया गया है। वहीं 5 टिकट धारकों के 30 यात्रियों का रिफंड अभी लंबित है क्योंकि उनके बैंकिंग विवरण का इंतजार किया जा रहा है। प्रबंधन ने बताया कि शेष 5 टिकट धारकों ने कॉल का जवाब नहीं दिया है।   प्रबंधन की अपील और हेल्पलाइन नंबर उन्हें दिन में दो बार संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। उम्मीद जताई गई है कि मंगलवार तक सभी शेष रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी, बशर्ते यात्रियों से बैंक खाते की जानकारी समय पर मिल जाए। प्रबंधन ने यात्रियों से अपील की है कि रोपवे सेवा शुरू होने तक यात्रा की योजना बनाने से पहले जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। रिफंड या टिकट से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए यात्री हेल्पलाइन नंबर 08065130000 पर संपर्क कर सकते हैं या ईमेल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

रंगों से सराबोर होगा इंदौर: लाखों लोगों की मौजूदगी में 4 किमी लंबा रंगोत्सव, आसमान से बरसेंगे फूल

इंदौर एक बार फिर इंदौर की रंग-रंगीली रंगपंचमी का उल्लास रविवार को राजवाड़ा पर दिखाई देगा। इसमें लाखों लोग अपनेपन रंग-गुलाल में रमने के लिए शामिल होंगे। 77 वर्ष से चली आ रही संस्थाओं के बैनर तले निकलने वाली गेर परंपरा को निभाने के लिए एक के बाद एक रसिया कॉर्नर, टोरी कॉर्नर, मारल क्लब, संगम कॉर्नर की गेर और नगर-निगम, हिंदरक्षक संगठन फाग यात्रा निकलेगी। रंग-गुलाल से हर एक को भिगोते हुए जब चार किलोमीटर लंबे मार्ग से हजारों लोगों की भागीदारी वाला यह कारवां जब निकलेगा तो यह दृश्य देखते ही बनेगा। धार्मिक, सामाजिक और देशभक्ति के रंग इसमें धार्मिक-सामाजिक के साथ ही देश भक्ति के रंग नजर आएंगे। हिंद रक्षक की फाग यात्रा में महाकाल मंदिर की प्रतिकृति तो संगम कॉर्नर की गेर में महाकाल की जटा से गंगाजी के अवतरित होने का दृश्य नजर आएंगे। किसी का गीत-संगीत युवाओं को उत्साहित करने तो कहीं रंगों से बनने वाला तिरंगा देशभक्ति भक्ति की भावना को प्रबल करेगा। शहर की हृदय स्थली पर जब सुबह 10 से दोपहर 3 बजे तक टैंकरों, बोरिंग मशीन, मिसाइलों के साथ ही विभिन्न उपकरणों से लाल-गुलाबी, हरे, पीले, नीले रंग उत्साह से उड़ाकर धरती के साथ आसमान भी रंगों से सराबोर होगा।   गेर मार्ग पर दर्शकों के लिए विशेष व्यवस्था स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा रंगपंचमी पर इंदौर में निकलने वाली पारंपरिक गेर को निहारने के लिए तीन इमारतों की छतों पर बैठक व्यवस्था की है। इसमें गौराकुंड के पास पृथ्वीलोक होटल की दो इमारत व बालाजी टावर पर यह बैठक व्यवस्था है। यहां की छतों पर तिरपाल लगाई गई है और दर्शकों के लिए पेयजल व सुविधाघर की व्यवस्था भी रहेगी। ऑनलाइन सीट बुकिंग और एनआरआई का उत्साह बुक माय शो से यहाँ पर 150 सीटों की बुकिंग की प्रक्रिया की गई, हालांकि शनिवार शाम 6 बजे तक 50 सीटें ही बुक हुई थीं। एक सीट का शुल्क 100 रुपये लिया गया है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी इसी तरह ऑनलाइन सीट बुकिंग की व्यवस्था की गई थी। इसमें 90 सीटों पर बुकिंग हुई थी। कई एनआरआई खास तौर पर गेर को देखने के लिए इंदौर आए थे और उन्होंने अपनी सीट बुक की थी।

स्वदेश का धागा – ग्रामीण भारत की करघे से बुनी कहानी

भोपाल  हाउस ऑफ़ तसल्ली स्टार्टअप- राफ्टएंडरसन प्रायवेट लिमिटेड के प्रयास और “विमेन वीव” के सहयोग से मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के मेहंदीवाड़ा (वारा सिवनी) गांव की बुनकर मती नसीबा खान अपने करघे से परंपरा और स्वावलंबन की अनूठी मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं। उनके हाथों से हाथ-कांते ऑर्गेनिक कपास पर बुना गया स्टोल केवल वस्त्र नहीं, बल्कि सादगी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की भावना का प्रतीक है। इसमें बुना गया चरखे का मोटिफ महात्मा गांधी के स्वदेशी और महिला स्वावलंबन के विचारों को समर्पित है। करीब 2 दिनों के अथक श्रम से तैयार यह डिजाइन करघे की लय और ग्रामीण भारत की रचनात्मकता को दर्शाता है। यह पहल न केवल पारंपरिक हथकरघा कला को जीवित रखने का प्रयास है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। स्पर्श में कोमल और आकर्षण में कालातीत यह स्टोल ग्रामीण भारत की उस सृजनशील शक्ति का प्रतीक है, जो परंपरा और आधुनिकता को एक साथ बुनती है। सृजन को सु अनुराधा शंकर से.नि. आईपीएस जो कि गांधी पीस फाउंडेशन से संबद्ध हैं के द्वारा वेटिकन सिटी के धर्मगुरू पोप तथा अन्य को रोम के एक कार्यक्रम में 26 अक्टूबर 2025 को भेंट किया गया। इस कल्पना को साकार करने में नर्मदापुरम की महिला उद्यमी रत्नम  और राकेश ने अपना योगदान दिया है।  

लाड़ली बहना योजना ने बदली मंजू यादव की जिंदगी, सिलाई सेंटर खोलकर बनीं आत्मनिर्भर

भोपाल  कभी सीमित आय और जिम्मेदारियों के बीच अपने परिवार का सहारा बनने का सपना देखने वाली नर्मदापुरम की मती मंजू यादव आज आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से मिली आर्थिक सहायता ने न केवल उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होकर आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया। नर्मदापुरम जिले के वार्ड क्रमांक 31 दीवान चौक ग्वालटोली निवासी 30 वर्षीय मती मंजू यादव को जून 2023 से योजना के अंतर्गत नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। इस राशि का उन्होंने सोच-समझकर उपयोग किया और अपने घर से सिलाई का छोटा-सा काम शुरू किया। मेहनत और लगन से शुरू किया गया यह प्रयास धीरे-धीरे एक सफल व्यवसाय में बदलने लगा। फरवरी 2026 तक उन्हें योजना की 33वीं किश्त सहित कुल 43 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हो चुकी है। इस आर्थिक सहयोग और सिलाई कार्य से हुए मुनाफे का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और एक सिलाई सेंटर शुरू कर दिया, जिसमें अब पांच सिलाई मशीनें संचालित हो रही हैं। आज मंजू यादव न केवल स्वयं नियमित आय अर्जित कर रही हैं, बल्कि अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से अन्य महिलाओं को भी रोजगार का अवसर प्रदान कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और आत्मनिर्भरता की नई राह खुली है। मती मंजू यादव भावुक होकर कहती हैं कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने उनके जीवन में नया विश्वास जगाया है। इस योजना ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर दिया और आज वे गर्व के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियों में योगदान दे रही हैं।  

सस्ती दवाओं का विस्तार: पैक्स के जरिए हर पंचायत तक पहुंचेंगे जन औषधि केंद्र – मंत्री सारंग

भोपाल सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग शनिवार को भोपाल स्थित मैनिट (मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में जन औषधि दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के महत्व के लिये स्वस्थ और सशक्त समाज के निर्माण के लिए मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार और विस्तार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, देशभर में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयास तथा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना जैसी पहल ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दी है। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के माध्यम से आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके लिए देशभर में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां सरकार द्वारा खरीदी गई जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध हैं। इन दवाइयों की कीमतें खुले बाजार में मिलने वाली ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में लगभग 50 से 80 प्रतिशत तक कम होती हैं, जिससे आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है। मंत्री  सारंग ने बताया कि विगत 11 वर्षों में जन औषधि परियोजना के माध्यम से देश की जनता के लगभग 40 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। यह योजना न केवल लोगों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध करा रही है, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मंत्री  सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा निर्धारित विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए देश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है। जन औषधि परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराकर उनके जीवन को आसान बना रही है। हर पंचायत में पैक्स के माध्यम से जन औषधि केंद्रों का विस्तार मंत्री  सारंग ने कहा कि सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाते हुए जनहित की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में सहकारी समितियों के माध्यम से भी जन औषधि केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। आने वाले समय में प्रदेश की प्रत्येक पंचायत में पैक्स (प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति) के माध्यम से जन औषधि केंद्रों का विस्तार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की सुविधा सहज रूप से उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम में वरिष्ठ संयुक्त संचालक एनएचएम डॉ. प्रभाकर तिवारी, अध्यक्ष फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (मध्यप्रदेश) डॉ. संजय जैन, जोनल मैनेजर पीएमबीआई (जनऔषधि विभाग)  विवेक शर्मा उपस्थित रहे।  

3 हजार करोड़ की लागत के बनेगा मार्ग इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में विकास के नए युग का होगा सूत्रपात

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड के किसानों के हित में जमीनी स्तर पर मार्ग निर्माण को स्वीकृति और उचित मुआवजे की व्यवस्था किए जाने पर इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र के निवासियों ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पगड़ी और बड़ी माला पहनाकर उनका अभिवादन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे सभी लोगों को होली और रंगपचमी की बधाई दी। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 3 हजार करोड़ रुपए की लागत से इंदौर और उज्जैन के बीच बनने वाली सड़क से इंदौर और उज्जैन का सफर सवा घंटे की जगह आधे घंटे का रह जायेगा। दोनों शहरों के बीच तेज कनेक्टिविटी से क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। स्थानीय स्तर पर उद्योग, लॉजिस्टिक पार्क, किसानों को मण्डियों तक पहुंच और व्यापारियों तथा उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग, देश के व्यापार व्यवसाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। देश के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रो के बीच इस मार्ग से यात्रा सुगम और कम समय में होगी। परिणामस्वरूप आवागमन बढ़ेगा और देश में इंदौर-उज्जैन क्षेत्र का महत्व और अधिक बढ़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारम्परिक और ऐतिहासिक रूप से इंदौर और उज्जैन के बीच इस मार्ग का ही उचित उपयोग होता था। इस मार्ग से इंदौर के 20 और उज्जैन के 6 गांव लाभान्वित होंगे। सिंहस्थ के लिए भी यह मार्ग सुविधाजनक और उपयोगी होगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में विकास की दृष्टि से नए युग का सूत्रपात हो रहा है। राज्य सरकार के लिए किसान हित सर्वोपरि है। किसानों के सुझावों के अनुसार इस मार्ग का निर्माण कराना और उसके लिए उचित मुआवजे की व्यवस्था करना इस बात का परिचायक है कि सरकार जो कहती है वह करके दिखाती है। यह परियोजना किसान और सरकार के बीच विश्वास की मिसाल बनेगी। जल संसाधन मंत्री  तुलसी सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव अन्नदाता किसान की पीड़ा और कष्ट को समझते हैं। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग को इस रूप में स्वीकृति मिलना उनकी संवेदनशीलता का ही परीणाम है। किसानों को इस परियोजना में अब 816 करोड़ रुपए से अधिक की मुआवजा राशि वितरित की जाएगी। मंत्री  सिलावट ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस पहल के लिए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।  

भोपाल में आयोजित हुआ डॉ. अजय खरे का 12वां स्मृति व्याख्यान

जन स्वास्थ्य को केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता से जोड़कर देखने की जरूरत: सुनील कौल भोपाल 7 मार्च 2026 को भोपाल में 12वां डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, टी.टी. नगर, भोपाल में जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश और मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस वर्ष के स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कौल थे, जिन्होंने “स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक: स्वास्थ्य और चिकित्सा पर पुनर्विचार” विषय पर व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय खरे की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो जन-स्वास्थ्य और विज्ञान आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे थे। इस अवसर पर जन स्वास्थ्य सम्मान 2025 भी प्रदान किए गए जिसकी घोषणा डॉक्टर अनंत भान द्वारा की गई। जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिवंगत डॉ. सी. एम. गुलाठी को मरणोपरांत विशेष जन स्वास्थ्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने दवाओं और दवा नीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था। इसके साथ ही डॉ. सी. सत्यामाला, वरिष्ठ जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, तथा विवेक पवार, जन स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यकर्ता, को स्वास्थ्य और उससे जुड़े सामाजिक कारकों पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. सुनील कौल ने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल इलाज के दायरे में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि पानी पर टैक्स लगाने की सोच विकसित होती है तो वह दिन दूर नहीं जब हवा पर भी टैक्स लगाया जाने लगे। उन्होंने कहा कि जब राजनीति खराब होती है तो उसका सीधा असर जन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने डॉ. अनुराग भार्गव द्वारा टीबी (तपेदिक) पर किए गए महत्वपूर्ण शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने टीबी और भूख के बीच के संबंध को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया। आज पूरी दुनिया यह मानती है कि दवा के साथ-साथ पर्याप्त और पोषक भोजन भी टीबी के इलाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आज भी देश में लगभग 4 लाख लोग हर साल टीबी से मर रहे हैं। पहले जहां टीबी से मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य था, आज हम केवल लगभग 25 प्रतिशत कमी ही हासिल कर पा रहे हैं, जबकि टीबी की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य में लोगों को बचाने के लिए केवल स्वास्थ्य बजट ही नहीं, बल्कि पोषण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समानता जैसे अन्य कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पैसों का खेल बढ़ता जा रहा है, जिसका उदाहरण नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में दिखाई देता है। “हम जिस रास्ते पर जा रहे हैं, वह भटकाव का रास्ता है,” उन्होंने कहा। मध्यप्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आंगनवाड़ी मॉडल पर्याप्त है या उसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पहले 1000 दिनों (गर्भधारण से दो वर्ष तक) के पोषण और देखभाल के मॉडल पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि देश के बजट का बड़ा हिस्सा गृह मंत्रालय और सेना पर खर्च होता है, जबकि सामाजिक क्षेत्र और जन स्वास्थ्य पर पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उन्होंने एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट बताया। उनके अनुसार सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश में हर साल लगभग 35 हजार महिलाएं दहेज या घरेलू हिंसा के कारण जलकर मर जाती हैं, जबकि गैर सरकारी संस्थाओ के अनुसार करीब 75 हजार महिलाएं दहेज या घरलू हिंसा के कारण जलने से अपनी जान गंवाती हैं। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु को रोकने के प्रयासों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने असम में किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि 58 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ किसी न किसी प्रकार की हिंसा की है। इसलिए हिंसा को केवल महिला का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और जन स्वास्थ्य का मुद्दा मानना होगा। उन्होंने कहा कि घृणा, जातिवाद और सांप्रदायिक हिंसा भी जन स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। 2020 में अमेरिका की एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था ने भी घृणा को जन स्वास्थ्य का मुद्दा माना है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल विचार सभी के लिए समान उपचार का था, लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि “अगर आपके पास पैसा नहीं है तो इलाज भी नहीं मिलेगा।” इससे अमीर और गरीब दोनों ही असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग आधारित भेदभाव से ऊपर उठना होगा और लोगों की स्वायत्तता और सम्मान को मजबूत करना होगा। जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने एक बड़ा जन स्वास्थ्य संकट बताते हुए कहा कि हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कई अध्ययन बताते हैं कि आने वाले वर्षों में इनमें भारी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयारी करनी चाहिए।” उन्होंने विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आशा कार्यकर्ताओं को दवाएं देने और प्राथमिक उपचार की अधिक ट्रेनिंग दी जा सकती है, ताकि संकट की स्थिति में समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं टिकाऊ बन सकें। उन्होंने कहा कि सामाजिक निर्धारक (Social Determinants) स्वास्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं और जन स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इन्हें केंद्र में रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानव शरीर स्वयं में पूर्ण नहीं होता, इसलिए समाज, पर्यावरण और जीवन परिस्थितियां मिलकर स्वास्थ्य की स्थिति को तय करती हैं। मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि और सीएमएचओ, इंदौर डॉ. माधव हसानी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अजय खरे द्वारा जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो दीप जलाया गया था, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने डॉ. खरे के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने संगठन … Read more

शासकीय भूमि से अवैध कब्जे, मदरसे, फैक्ट्री और मांस की दुकानें हटाने के निर्देश

भोपाल  सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को नरेला विधानसभा के वार्ड क्रमांक 69, 70 और 71 का दौरा कर शासकीय भूमि से अवैध कब्जे, मदरसे, फैक्ट्री और मांस की दुकानें हटाने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा अवैध अतिक्रमण को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर मंत्री  सारंग स्वयं मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मंत्री  सारंग ने शासकीय भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने नगर निगम, राजस्व, पुलिस सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अवैध अतिक्रमण पर बने स्थानों को पेयजल, विद्युत सहित किसी भी प्रकार के शासकीय कनेक्शन नहीं दिए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि ऐसे स्थानों को पहले से कनेक्शन दिए गए हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए तथा यह जांच की जाए कि किन अधिकारियों की अनुमति से यह कनेक्शन दिए गए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री  सारंग ने गुप्ता कॉलोनी, सुभाष कॉलोनी और शहंशाह गार्डन, अशोका गार्डन क्षेत्र में पहुंचकर शासकीय भूमि की स्थिति का निरीक्षण किया और स्थानीय रहवासियों से भी चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना। कई स्थानों पर शासकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य किए गए हैं और कुछ जगहों पर बिना अनुमति के गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस पर मंत्री  सारंग ने मौके पर मौजूद नगर निगम, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे सभी अतिक्रमणों को चिन्हित कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि शासकीय भूमि जनता की संपत्ति है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासकीय भूमि पर अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसे, फैक्ट्री और मांस की दुकानों की विस्तृत जांच कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन कर शासकीय भूमि पर कब्जा किया है तो उसे तत्काल हटाया जाए और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र में शासकीय भूमि का सर्वे कर विस्तृत सूची तैयार की जाए और जहां-जहां अतिक्रमण पाया जाए वहां चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाकर उसे हटाया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा न कर सके। मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि नगर निगम, राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें। निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय नागरिकों ने मंत्री  सारंग को कई स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की जानकारी दी। मंत्री  सारंग ने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और शासकीय भूमि को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के विकास और नागरिकों की सुविधा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, अतिक्रमण या शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और निर्धारित समयसीमा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  

सुरक्षाकर्मियों को आधुनिक उपकरणों से आग बुझाने का दिया प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन एवं अग्नि सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार सुबह पुलिस मुख्यालय के भूतल पर सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों को स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर प्रभावी नियंत्रण करने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान अग्नि नियंत्रण से संबंधित मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई, जिसमें आधुनिक उपकरणों के माध्यम से आग बुझाने की विधियों का प्रदर्शन किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान तरल पदार्थों में लगी आग को अग्निशमन यंत्रों के प्रयोग से किस प्रकार सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बुझाया जा सकता है, इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सुरक्षाकर्मियों ने धुएं और लपटों से सुरक्षित रहते हुए आग पर काबू पाने की तकनीकों का अभ्यास किया। इस अवसर पर मानसेवी डीएसपी  मोहनलाल मेहरा, पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा इंचार्ज निरीक्षक  मुकेश सैनी, पुलिस फायर स्टेशन मंत्रालय, भोपाल के एसआई  बी.एस. हुड्डा एवं उनकी टीम उपस्थित रही। इन उपकरणों का दिया प्रशिक्षण मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न आधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में कलेक्टिंग ब्रिज, डिवाइडिंग ब्रिज, फायरमैन हेलमेट, फोम नोजल, अग्निशमन सिलेंडर, कॉर्टेज, टॉर्च, रिवॉल्विंग नोजल, यूनिवर्सल ब्रांच, न्यू लाइट (ब्रांच), ऑर्डिनरी ब्रांच, एडॉप्टर, जाली, फायरमैन एक्स, लॉक कटर, प्रॉक्सीमेटी सूट, एल्यूमिनियम सूट, कैमिकल सूट, ब्रीदिंग ऑपरेटर सेट, लाइफ जैकेट, हौज पाइप, फायर ब्लैंकेट एवं अग्निशमन यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई। 5 तरह की होती है आग – बुझाने में बरतें सावधानी प्रशिक्षण के दौरान एसआई  बी.एस. हुड्डा ने बताया कि आग मुख्यतः पांच प्रकार की होती है और प्रत्येक को बुझाने की प्रक्रिया अलग होती है। लकड़ी और कोयले में लगी आग को क्लास ‘ए’, तरल पदार्थों में लगी आग को क्लास ‘बी’, गैसों में लगी आग को क्लास ‘सी’, धातुओं में लगी आग को क्लास ‘डी’ तथा विद्युत से संबंधित आग को क्लास ‘ई’ श्रेणी में रखा जाता है। इन सभी प्रकार की आग को परिस्थितियों के अनुसार पानी या रासायनिक माध्यमों से बुझाया जाता है। अग्नि दुर्घटना होने पर यह करें      फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम, पुलिस थाना, विद्युत विभाग एवं चिकित्सालय को तत्काल सूचना दें।              फायर फाइटिंग दल फायर एक्सटिंग्यूशर, पानी या रेत की सहायता से प्रारंभिक अवस्था में आग बुझाने का प्रयास करें।              भवन के विद्युत प्रवाह को मेन स्विच से तुरंत बंद करें।                  फायर अलार्म दल अलार्म बजाकर सभी को अग्नि दुर्घटना की चेतावनी दें।                इवेक्युएशन टीम लोगों को निर्धारित सुरक्षित मार्गों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाए।                     भगदड़ से बचें।                  लिफ्ट का प्रयोग न करें।                      संपत्ति बचाव दल महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाए।                  अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, केरोसिन और प्लास्टिक को आग के स्थान से दूर करें। इन नंबरों पर करें सूचित आग की सूचना देने के लिए भोपाल में एमपीईबी के हेल्पलाइन नंबर 0755-2678251, 0755-2678369 पुलिस का हेल्पलाइन नंबर 0755-2555922, पुलिस फायर स्टेशन का हेल्पलाइन नंबर 0755-2441008 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0755-2542222 पर कॉल कर किया जा सकता है।  

किसान कल्याण के संकल्प को मजबूत करता निर्णय या समृद्ध किसान, सशक्त मध्यप्रदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि किसान कल्याण उसकी नीतियों और निर्णयों का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं खरीदी पर प्रति क्विंटल 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस देने का निर्णय किसानों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय के बाद किसानों को गेहूं का मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा, जो उनकी मेहनत के उचित सम्मान और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उपाय भी सुनिश्चित करे। गेहूं खरीदी पर बोनस की घोषणा इसी सोच का परिणाम है, जो यह दर्शाती है कि राज्य सरकार किसानों की आवश्यकताओं और चुनौतियों को गंभीरता से समझती है। प्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 मार्च करने का निर्णय भी लिया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें। यह निर्णय प्रशासनिक संवेदनशीलता और किसान-हितैषी दृष्टिकोण का परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी उसी दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए किसानों को बेहतर मूल्य, सुविधाएं और अवसर प्रदान करने का प्रयास कर रही है। स्पष्ट है कि यदि किसान सशक्त होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे। किसानों के परिश्रम को सम्मान और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए ऐसे निर्णय न केवल सराहनीय हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र को स्थायी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होंगे। जयपाल सिंह चावड़ा लेखक (मध्यप्रदेश भाजपा किसान मोर्चे के अध्यक्ष है)