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इंदौर को मिलेगी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा, मोहन भागवत करेंगे 96 करोड़ के हॉस्पिटल का उद्घाटन

इंदौर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 10 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व के अगले दिन इंदौर प्रवास पर रहेंगे। वे यहां 96 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कैंसर केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन करेंगे। साथ ही शहर में विभिन्न समाजों से जुड़े लोगों के साथ अलग-अलग सत्रों में चर्चा भी करेंगे। यह मोहन भागवत का पिछले सात महीनों में तीसरा इंदौर दौरा होगा। इससे पहले वे 3 जनवरी और 13 जनवरी 2025 को भी इंदौर आ चुके हैं। पूरे दिन रहेंगे इंदौर, समाजजनों से करेंगे संवाद संघ सूत्रों के मुताबिक, डॉ. भागवत इंदौर में दिनभर रहेंगे। वे विजय नगर स्थित एक सभागृह में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम अलग-अलग सत्रों में होगा, हालांकि इसका आधिकारिक शेड्यूल अब तक जारी नहीं किया गया है। डॉ. भागवत का आगमन श्री गुरुजी सेवा न्यास द्वारा निर्मित माधव सृष्टि आरोग्य केंद्र एवं कैंसर केयर सेंटर के उद्घाटन हेतु हो रहा है। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। – पहले चरण में 26 करोड़ की लागत से दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और तीन मंजिलें तैयार की गई हैं। – दूसरे चरण में हाईटेक मेडिकल मशीनरी और अन्य फ्लोर का निर्माण किया जाएगा। जनभागीदारी से बन रहा है अत्याधुनिक सेंटर 96 करोड़ के इस कैंसर केयर प्रोजेक्ट का निर्माण जनभागीदारी के माध्यम से किया जा रहा है। इसमें कई कंपनियों ने CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड के तहत सहयोग किया है, जबकि अन्य दानदाता भी आगे आए हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत एक रियायती दर वाली ओपीडी से हुई थी, जहां कई वरिष्ठ चिकित्सक नि:शुल्क सेवा दे रहे हैं। प्रबंधन समिति में मुकेश हजेला अध्यक्ष और दिनेश अग्रवाल उपाध्यक्ष हैं। 2021 में हुई थी OPD की शुरुआत इस कैंसर सेंटर की OPD सेवाएं मार्च 2021 में शुरू हुई थीं। इसका उद्घाटन तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और RSS के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने किया था। 

भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न

भोपाल बन रहा देश का टैक हब, युवाओं के कॅरियर को मिलेगी नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल उभर रहा टेक्नोलॉजी हब के रूप में, युवाओं को मिलेंगे नए अवसर : सीएम डॉ. यादव टैक्नोलॉजी के नए नक्शे पर भोपाल, सीएम बोले– युवाओं का भविष्य होगा उज्जवल भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब नवाचार का केंद्र बनकर भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यहां ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के अग्रणी केंद्र और उद्योग साझेदारियां आकार ले रही हैं। भोपाल जल्द ही ड्रोन टेक्नोलॉजी का भी हब बनेगा। एनीमेशन ग्राफ़िक्स जैसे नए सेक्टर्स भी प्रदेश के युवाओं के कॅरियर को नई उड़ान देने तैयार हैं। भोपाल में सेमी-कंडक्टर और डाटा-सेंटर जैसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स भी विकसित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विकासमूलक रणनीतिक सोच से भोपाल का हाई-टैक इंडस्ट्रीज के लिए एक मनपसंद गंतव्य के रूप में उभरना कोई संयोग नहीं है, बल्कि, योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ईको सिस्टम का विकास और भविष्योन्मुखी नीतियों के निर्माण का परिणाम है। देशी-विदेशी कंपनियां मध्यप्रदेश में उद्यमिता को चुन रही हैं। उन्हें प्रदेश में ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस और नीतिगत प्रक्रिया सहयोग भी मिल रहा है। सेमी-कंडक्टर और ड्रोन जैसे डीप-टैक उपक्रमों से लेकर एवीजीसी और डाटा सेंटर्स तक के लिये मध्यप्रदेश भारत के डिजिटल भविष्य का लॉन्चपैड बनता जा रहा है। एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: ग्लोबल स्किल्स पार्क में नया क्रिएटिव हब ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में स्थापित हो रहा एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस युवाओं को गेमिंग, एनीमेशन और वीएफएक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप्स के लिए मंच देगा। इसमें एलईडी वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, एआई लैब्स, मोशन कैप्चर सिस्टम और रेंडर फार्म्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह केंद्र देश के मेट्रो शहरों पर निर्भरता को कम करते हुए एक नया डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करेगा। आइसर का ड्रोन ट्रेनिंग और शोध केन्द्र बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईसर भोपाल में बन रहा ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एआई-एनेबल्ड ड्रोन निर्माण, स्वदेशी प्रोटोटाइपिंग और एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण के अनूठे मंच के रूप में विकसित हो रहा है। यहां देश की पहली एआई-यूएवी डाटा रिपॉजिटरी भी स्थापित होगी, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के लिए नवाचारों को प्रेरित करेगी। सेमीकंडक्टर निर्माण की कायनेस सेमिकॉन की इकाई भोपाल में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अहम भागीदार कायनेस सेमिकॉन अब भोपाल के आईटी पार्क में अपनी इकाई स्थापित कर रहा है। इससे चिप डिज़ाइन, असेंबली और अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी। यह कदम प्रदेश की डीप-टैक नीति को सशक्त करेगा। भोपाल में बनेगा मध्यप्रदेश का पहला निजी ग्रीन डाटा सेंटर एशिया का सबसे बड़ा रेटेड-4 हाइपरस्केल डाटा सेंटर ऑपरेटर, भोपाल के आईटी पार्क में ग्रीन डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है। इमर्सिव कूलिंग जैसी तकनीकों से युक्त यह डाटा सेंटर जीरो-एमिशन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। यह क्लाउड और एआई कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ईएमसी 2.0: 209 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भोपाल के बांदाखेड़ी में 209 एकड़ में फैला ईएमसी2.0 क्लस्टर मोबाइल, सेमीकंडक्टर, पीसीबी, एलईडी और ई-मोबिलिटी उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें रेडी-बिल्ट फैक्ट्री, टेस्टिंग लैब्स और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। इसमें 1500 करोड़ रूपये का निवेश होगा और इससे 75 हजार रोजगार सृजित होंगे। सिक्योर सर्किट: पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर भोपाल में स्थापित हो रही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण इकाई राज्य के सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगी। यह रक्षा, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा। राज्य सरकार उद्योगों को न केवल कम समय में मंजूरी और समाधान उपलब्ध करा रही है,बल्कि निवेशकों में दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसा भी जगाने में सफल हो रही है। भोपाल की यह यात्रा केवल तकनीकी विकास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई कहानी लिखने का प्रारंभ है। प्रदेश अब नवाचार, ज्ञान और डिजिटल कौशल के केंद्र के रूप में नया उदाहरण बनकर उभर रहा है।

धरती के नीचे दबा है लाखों टन सोना: जबलपुर के सिहोरा में मिला विशाल सोना भंडार

जबलपुर अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के लिए मशहूर मध्य प्रदेश का जबलपुर काफी सुर्खियों में है। जबलपुर की सिहोरा तहसील के महंगवा केवलारी क्षेत्र में भू-वैज्ञानिकों ने एक विशाल सोने के भंडार की खोज की है। यह खोज भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम द्वारा कई वर्षों की मेहनत और मिट्टी के नमूनों के रासायनिक विश्लेषण के बाद सामने आई है। लगभग 100 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में लाखों टन सोना होने का अनुमान है, जो मध्य भारत की सबसे बड़ी खनिज खोजों में से एक हो सकती है। वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई भू-वैज्ञानिकों की टीम ने महंगवा केवलारी में मिट्टी और चट्टानों के सैंपल की स्टडी की। रासायनिक परीक्षणों में न केवल सोने की मौजूदगी की पुष्टि हुई, बल्कि तांबा और अन्य कीमती धातुओं के अंश भी मिले। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और संगमरमर जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन सोने की खोज ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों के चेहरों पर इस खोज ने नई चमक ला दी है और वे इसे मध्य प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए गेम-चेंजर मान रहे हैं। जबलपुर बना खनिज संपदा का नया केंद्र जबलपुर पहले से ही 42 खदानों के साथ खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां से लौह अयस्क चीन सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है। अब सोने के भंडार की खोज ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और आकर्षक बना दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह भंडार आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित होता है, तो जल्द ही व्यावसायिक खनन शुरू हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। क्या बदलेगी मध्य प्रदेश की किस्मत? यह खोज न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पल हो सकता है। पहले पन्ना की हीरे की खदानों ने मध्य प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर जगह दिलाई थी और अब जबलपुर का सोना इसे और चमका सकता है। हालांकि, अगला कदम इस भंडार की मात्रा और खनन की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह खोज मध्य प्रदेश को खनिज संपदा के मामले में देश का एक नया सितारा बना सकती है।

₹1.80 लाख की सब्सिडी का मौका! PM Awas Yojana 2.0 में जानें कैसे उठाएं फायदा

भोपाल  प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत अब एलआईजी (Low Income Group) और एमआईजी (Middle Income Group) वर्ग के लिए खुशखबरी है। सरकार ने अब इस योजना के दूसरे चरण में मकान ऋण पर 1.80 लाख रुपये तक की छूट देने की घोषणा की है। यह छूट सीधे बैंक के माध्यम से ब्याज अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी। यदि आप घर खरीदने या बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 (PMAY) प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत अब एलआईजी और एमआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 1.80 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान मिलेगा। यह योजना उन लाभार्थियों पर भी लागू होगी जिनका होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत या वितरित हुआ है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम आयुक्त प्रीति यादव ने जबलपुर के नागरिकों से इस योजना का भरपूर लाभ उठाने की अपील की है। अधिक से अधिक पात्र लोगों तक योजना की जानकारी पहुँचाने के लिए शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। योजना के नोडल अधिकारी सुनील दुबे के अनुसार, EWS (Economically Weaker Section), LIG और MIG श्रेणी के पात्र लाभार्थी इस योजना के अंतर्गत नया मकान खरीदने, मकान का निर्माण कराने या फ्लैट लेने के लिए होम लोन पर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। ब्याज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाएगी, जिससे मकान की EMI में बड़ी राहत मिल सकती है। यह योजना खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पहली बार घर खरीदना चाहते हैं। योजना का लाभ कैसे उठाएं? 1. PMAY 2.0 के अंतर्गत आवेदन करने के लिए सरकारी पोर्टल या बैंक से संपर्क करें। 2. आवेदक की वार्षिक आय और योजना की पात्रता की शर्तें ध्यानपूर्वक जांचें। 3. योजना के लिए होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत/वितरित होना चाहिए। 4. आवेदन के बाद पात्रता की जांच के उपरांत ब्याज अनुदान सीधे बैंक खाते में आएगा।

इंतजार खत्म! फ्रीगंज ओवरब्रिज का काम शुरू, तय समय से पहले पूरा करने का लक्ष्य

उज्जैन  उज्जैन में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बहुप्रतिक्षित फ्रीगंज ओवरब्रिज का निर्माण धरातल पर शुरू हो गया। निर्माण सिंहस्थ-28 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद नए और पुराने शहर को जोड़ने के लिए 21.40 मीटर चौड़ा ब्रिज उपलब्ध हो जाएगा। उज्जैन के वर्तमान फ्रीगंज ओवरब्रिज के नजदीक 21.40 मीटर चौड़ा नया ब्रिज बनाया जाना है। इसके लिए पूर्व में टेंडर जारी कर निर्माण का ठेका दिया था लेकिन कंपनी ने काम नहीं किया था। दूसरी बार टेंडर जारी कर गुजरात की चेतन कंस्ट्रक्शन को ठेका दिया गया है। निर्माण से पूर्व कंपनी ने अपना कार्यालय और प्लांट स्थापित करने के साथ बोरिंग जैसी प्राथमिक तैयारी तो कर ली थी लेकिन मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।  कंपनी ने अब मौके पर निर्माण शुरू कर दिया है। ब्रिज निर्माण की शुरुआत रिटेनिंग वॉल बनाने से की जा रही है। सिंहस्थ से पहले बदलेगा उज्जैन! 2 एलिवेटेड ब्रिज मंजूर, 23,000 करोड़ से होंंगे कई प्रोजेक्ट्स प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य उज्जैन को बेहतर यातायात व्यवस्था से जोड़ना और आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से राहत देना है. मुख्यमंत्री ने कहा, “सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन न केवल आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा, बल्कि ट्रैफिक, सड़कें, सुरक्षा और जनसुविधाओं के लिहाज़ से एक आदर्श मॉडल भी बनेगा. हमारा लक्ष्य है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु सुविधाजनक यात्रा अनुभव ले जाए.” सीएम ने निर्देश दिए हैं कि उज्जैन के सभी धार्मिक स्थलों को ‘देवलोक’ की थीम पर विकसित किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आस्था के साथ अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलें. उज्जैन कलेक्टर  ने जानकारी दी कि ये दोनों कॉरिडोर उज्जैन की यातायात व्यवस्था को नया रूप देंगे. उन्होंने कहा, “इस बार सिंहस्थ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रस्तुति भी होगा.” पहला एलिवेटेड कॉरिडोर मकोडिया आम चौराहा से शुरू होकर देवासगेट, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज तक जाएगा. दूसरा निकास चौराहा से दौलतगंज होते हुए इंदौर गेट तक बनेगा. ये दोनों मार्ग शहर के सबसे व्यस्त रूट माने जाते हैं, जहां रोजाना ट्रैफिक की भारी भीड़ होती है.इन ब्रिजों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि भविष्य में मेट्रो रेल संचालन भी संभव हो सके. कॉरिडोर के नीचे व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी. निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जिम्मे होगा और जल्द ही फिजिकल सर्वे के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सिंहस्थ उज्जैन में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर हो रहीं  सिंहस्थ उज्जैन में हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक मेला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देशभर से आते हैं. यह सिर्फ पूजा-पाठ का आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन की पहचान और आस्था का प्रतीक भी है. भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ 2028 के लिए पूरी तरह से नया रूप दिया जा रहा है. शहर में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर की जा रही हैं. दो नए एलिवेटेड कॉरिडोर भी बनाए जाएंगे. इस बार सिंहस्थ उज्जैन को एक आधुनिक और धार्मिक नगरी के रूप में दुनिया के सामने पेश करेगा. सिंहस्थ 2028 के लिए 23,332 करोड़ की विकास योजनाएं अब तक सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए ₹23,332 करोड़ की लागत से 153 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें उज्जैन-मक्सी रोड, सिंहस्थ बायपास, इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग, और इंगोरिया-उन्हेल रोड जैसी प्रमुख सड़कें शामिल हैं. सिंहस्थ उज्जैन 2028 को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में अब तक 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की 150+ परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं. इनमें 2 एलिवेटेड कॉरिडोर, सड़क विस्तार, नए बायपास, धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं का विस्तार शामिल है. उज्जैन को आधुनिक और अध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है. ट्रैफिक जाम से राहत और भविष्य की मेट्रो योजना को ध्यान में रखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो. प्रमुख प्रगति कार्यों की स्थिति-     सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना का कार्य 20% पूर्ण हो चुका है और तेज गति से जारी है.     खान डायवर्सन योजना की प्रगति 15% के आसपास है और कार्य तेज़ी से चल रहा है.     इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन सड़क परियोजना, जो एमपीआरडीसी द्वारा संचालित है, उसमें भी 15% कार्य पूर्ण हो चुका है.     इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना डीपीआर स्तर पर है, जिसकी निविदा शीघ्र जारी की जाएगी. नए विकास कार्यों को मिली रफ्तार: फ्रीगंज ब्रिज का कार्य उल्लेखनीय प्रगति पर है. एजेंसी ऑन बोर्ड हो चुकी है और स्थल पर कार्य जल्द दिखाई देगा.  वहीं, हरि फाटक चौड़ीकरण परियोजना की डीपीआर बन चुकी है, और इसमें कितने भू-अर्जन की आवश्यकता होगी, इसका आकलन किया जा रहा है.  इस योजना की निविदा भी आगामी एक सप्ताह में जारी की जाएगी. सिंहस्थ सिटी योजना पर सक्रियता सिंहस्थ सिटी के प्रस्ताव का प्रकाशन हो चुका है, और इसमें दावा-आपत्ति की अवधि 25 मई तक तय की गई है. किसानों को लेआउट दिखाए जा रहे हैं, ताकि कोई भ्रम या शंका न रहे. प्रशासन की टीमें – जिसमें पटवारी, नगर निगम कर्मी और युडीए के अधिकारी शामिल हैं- घर-घर जाकर किसानों को जानकारी दे रही हैं और उनके डाउट्स को मौके पर क्लियर कर रही हैं. कलेक्टर ने बताया कि हर भू-स्वामी के सामने से 18 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत सरकार किसानों की 50% भूमि अधिग्रहित करेगी, जिसमें सड़क, पार्क, सीवरेज और अन्य विकास कार्य शामिल होंगे. एलिवेटेड कॉरिडोर पर काम मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित दो एलिवेटेड कॉरिडोर- मकोडिया आम से इंदौर गेट और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक की डीपीआर निर्माणाधीन है और उनकी निविदा भी शीघ्र जारी की जाएगी. जलप्रदाय योजना में सुधार की दिशा में कदम हरिया खेड़ी जलप्रदाय योजना की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है. इसके पूर्ण होने पर गर्मी के दिनों में शहर में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की समस्या से राहत मिलेगी. सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना से पेयजल की स्थिति सुधरेगी और शिप्रा नदी को 12 महीने प्रवाहमान रखने की योजना को बल मिलेगा. स चौड़ीकरण जैसे आंतरिक कार्यों में भी उत्साहजनक प्रगति स्थानीय रहवासी स्वयं अपने भवन पीछे हटाकर प्रशासन को सहयोग दे रहे हैं, जो … Read more

प्रधानमंत्री मोदी 25 अगस्त को धार में करेंगे वस्त्रोद्योग पर केन्द्रित पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन

स्वदेशी की भावना प्रदेश में हो रही साकार युवाओं को राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ ही स्वच्छता और स्वदेशी से जुड़ने के लिए किया जाएगा प्रेरित एक लाख से अधिक युवाओं के लिए सृजित होंगे रोजगार के अवसर ब्रह्मा-भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड रेलवे हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग में बनेंगे वंदे भारत-अमृत भारत और मेट्रो के कोच लगातार चौथे वर्ष होगा हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्राओं का आयोजन राज्य सरकार भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिन सिटी के विकास की ओर हो रही अग्रसर स्वतंत्रता दिवस पर होगा नवाचार : जिला स्तरीय कार्यक्रमों में जिले की विकास गतिविधियों का होगा प्रस्तुतिकरण 14 अगस्त बलराम जयंती और 16 अगस्त जन्माष्टमी पर होंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम गोकुल-वृदांवन के समान होगा भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं से जुड़े उज्जैन, जानापाव, अमझेरा और नारायणा का महत्व भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वदेशी की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए देश को अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वर्तमान वैश्विक संदर्भ में देश को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी की दृढ़ता हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत है। सभी प्रदेशवासी प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस प्रतिबद्धता के साथ हैं। इसी क्रम में स्वदेशी की भावना को साकार करते हुए 10 अगस्त को भोपाल के पास रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज में ब्रह्मा (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग) का भूमिपूजन और शिलान्यास केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में किया जा रहा है। केन्द्रीय कृषि एवं पंचायतराज मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव भी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगे। प्रदेश में पहली बार रेल कोच, मेट्रो कोच आदि का निर्माण कर देश में आपूर्ति के साथ विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। लगभग 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली परियोजना से 1500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। प्रदेश में पहली बार इस प्रकार की रेलवे कोच निर्माण सुविधा स्थापित हो रही है, जो मध्यप्रदेश को देश के रेलवे विनिर्माण मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए रायसेन जिले के तहसील गौहरगंज के ग्राम उमरिया में 60.0630 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया जा चुका है। यहां वंदे भारत-अमृत भारत, मेट्रो कोच का निर्माण किया जाएगा। इस उद्योग से भोपाल और रायसेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छोटे उद्योगों भी विकसित होंगे, जिनसे आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। परियोजना से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों के जवानों को बहनें भेजेंगी राखियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में लगातार चौथे वर्ष हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। तिरंगा अभियान का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र भक्ति और स्वदेशी अपनाने की भावना से जोड़ना है। साथ ही आम जनमानस में भी राष्ट्र ध्वज के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो। राज्य सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान-2025 में स्वच्छता और स्वदेशी अभियान को भी शामिल किया है। अभियान के अंतर्गत 2 से 12 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तिरंगे पर केन्द्रित कार्यक्रम होंगे और 13 से 15 अगस्त तक हम सभी को घर, कार्यालयों और वाहनों पर तिरंगा लगाना है। अभियान के अंतर्गत ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों के जवानों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के उद्देश्य से उन्हें राखियां भेजी जाएंगी। स्कूलों में तिरंगे से जुड़ी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। तिरंगा संगीत और प्रदर्शनियों का आयोजन भी होगा। इस अभियान में सभी वर्गों को शामिल करते हुए 1 करोड़ तिरंगे की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। धार से विदेशों में भी होंगे वस्त्र निर्यात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्वदेशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रदेश की दो भावी मेट्रोपोलिटन सिटी भोपाल और इंदौर के विकास की और राज्य सरकार अग्रसर हो रही है। भोपाल के पास बनने वाली रेल कोच इकाई और धार के पास वस्त्र उद्योग पर केन्द्रित विकसित पीएम मित्र पार्क की सौगात से इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र को लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्र पार्क मध्य प्रदेश की समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी 25 अगस्त को धार में पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन करेंगे। रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की 2000 करोड़ रूपए की इस परियोजना से जनजातीय अंचल के एक लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धार का पीएम मित्र पार्क एक ओर जहां स्वदेशी के भाव को मजबूती देगा, वहीं धार, झाबुआ, रतलाम और निमांड़ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों को कॉटन का उचित दाम मिलेगा। यहां से विदेशों में भी वस्त्र निर्यात किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30.77 लाख करोड़ का अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ। प्रदेश में औद्योगिकरण का वातावरण बना है और देश-विदेश से निवेशक उद्योग लगाने के लिए मध्यप्रदेश आ रहे हैं। लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन का गिफ्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। सावन के पवित्र माह में लाड़ली बहनों को 250 रुपए का शगुन भेजा रहा है। कुल मिलाकर अगस्त में 1500 रुपए की राशि लाड़ली बहनों को भेजी। हमारी मंशा है कि बहनें रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे उल्लास और आनंद से मनाएं। दीपावली के बाद लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए भेजे जाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार एक के बाद एक विकास की सौगातें देती जाएगी। 15 अगस्त के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सभी जिलों में स्क्रीन पर होगा लाइव टेलीकास्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के लिए नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके अंतर्गत राजधानी भोपाल में होने वाले मुख्य कार्यक्रम को प्रत्येक जिले में स्क्रीन पर लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। इस दौरान प्रदेशवासियों के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया जाएगा। प्रभारी मंत्री जिला … Read more

एक बगिया मां के नाम: 15 अगस्त से शुरू होगा पौधे लगाने का कार्य

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएगी मध्यप्रदेश सरकार स्वयं सहायता समूह की 16 हजार से अधिक महिलाओं ने बगिया लगाने का पंजीयन भोपाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को प्रदेश सरकार आर्थिक रूप से समृद्ध बनाएगी। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में "एक बगिया मां के नाम" परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्वसहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया विकसित की जाएगी। अब तक स्वयं सहायता समूह की 16 हजार 752 से अधिक महिलाओं ने परियोजना का लाभ पाने के लिए पंजीयन कराया है। पंजीयन "एक बगिया मां के नाम" ऐप के माध्यम से किया जा रहा है। परियोजना के अंतर्गत हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्‌ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान की जाएगी। इलेक्ट्रानिक डवलपमेंट कार्पोरेशन ने किया ऐप का निर्माण "एक बगिया मां के नाम" परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा रहा है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से कराया गया है। हितग्राही का चयन ऐप के माध्यम से किया जाएगा। चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति-पिता-ससुर-पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जाएगा। पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से होगा पौधरोपण प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तरीके पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहा पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। साथ ही, जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। पौधरोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। 31 हजार 300 महिलाओं को मिलेगा लाभ “एक बगिया माँ के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक स्व-सहायता समूह की महिलाओं को लाभ मिलेगा। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। हर ब्लॉक में 100 हितग्राहियों का किया जाएगा चयन "एक बगिया मां के नाम" परियोजना अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जाएगा। चयनित हुई समूह की पात्र महिलाओं को बकायदा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण महिलाओं को वर्ष में दो बार दिया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होगी अनिवार्य "एक बगिया मां के नाम" परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। प्रति 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की होगी तैनाती फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार कराने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहा लगे हैं, कहा नहीं लगे हैं, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत एवं 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। हितग्राहियों के चयन में टॉप 10 जिले "एक बगिया मां के नाम" परियोजना के लिए हितग्राहियों के चयन में 6 अगस्त की स्थिति में 10 जिले अग्रणी हैं। इनमें देवास,खंडवा, बैतूल, सिंगरौली, शिवपुरी, झाबुआ, रायसेन, अशोकनगर, धार, विदिशा जिला शामिल है। जल्‍द पूरी कर ली जायेगी महिला हितग्राहियों के चयन की प्रक्रिया एसआरएलएम सीईओ एवं प्रभारी आयुक्‍त मनरेगा श्रीमती हर्षिका सिंह ने बताया कि "एक बगिया मां के नाम" परियोजना अन्‍तर्गत पात्र महिला हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। अब तक 16 हजार से अधिक महिला हितग्राहियों का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा चुका है। जल्‍द ही हितग्राहियों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली जायेगी। 15 अगस्‍त से पौधे लगाने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।  

8 अगस्त को भद्रा मुक्त रक्षाबंधन: सौ साल बाद बना दुर्लभ योग, देखें शुभ चौघड़िया मुहूर्त

इंदौर इस बार 100 साल बाद भद्रा रहित निर्विघ्न राखी 9 अगस्त को मनाई जाएगी। इसके चलते पूरे दिन बहन-भाई की कलाई पर रेशम की डोर बांध सकेगी। भ्रदा में राखी बांधना और होलिका दहन निषेध बताया गया है।भाई-बहन के स्नेह के पर्व पर दुर्लभ नवपंचम योग भी रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग भी दोपहर 2.24 बजे तक रहेगा।साथ इस दिन सूर्य व बुध कर्क, चंद्र मकर, मंगल कन्या, गुरु एवं शुक्र मिथुन, राहु कुंभ व केतु सिंह राशि में रहेगा। 9 अगस्त को बन रहे दुर्लभ महासंयोग में मनेगा रक्षाबंधन, आखिरी बार 1930 में बना था     ज्योतिर्विद् विनायक त्रिवेदी के अनुसार रक्षा बंधन श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को भद्रा रहित तीन मुहूर्त या उससे अधिक व्यापिनी पूर्णिमा तिथि को अपरान्ह व व प्रदोष काल में मनाया जाता है।     पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त को दोपहर 2.12 बजे से 9 अगस्त को दोपहर 1.24 बजे तक रहेगी।     भद्रा भी पूर्णिमा के साथ 8 अगस्त को शुरू होकर रात 1.49 बजे तक रहेगी।     सूर्योदय से पहले भद्रा के समाप्त होने से पर्व इस बार निर्विघ्न रूप से मनाया जाएगा।     9 अगस्त को श्रवण नक्षत्र और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा।     इसके स्वामी शनि है और इस दिन शनिवार है।     शास्त्रों के अनुसार श्रवण नक्षत्र के अधिपति विष्णु एवं सौभाग्य योग के अधिपति ब्रह्मा हैं।     इसके चलते यह पर्व सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा एवं जगत के पालनहार भगवान विष्णु के साक्षी में मनेगा।   इस बार Raksha Bandhan पर भाई की कलाई पर बांधे शुद्ध वैदिक राखी, जानें इसका महत्व चौघड़िया अनुसार राखी बांधने का समय शुभ : सुबह 07.39 से 09.16 बजे तक। चर : दोपहर 12.29 से 02.06 बजे तक। लाभ : दोपहर 2.07 से 03.43 एवं शाम 6.56 से 8.20 बजे तक। अमृत : दोपहर 3.44 से शाम 05.20 बजे तक।

पुलिस महानिदेशक मकवाना से वन बल प्रमुख अम्बाडे़ ने की भेंट

भोपाल पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना से प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री व्ही.एन. अम्बाड़े ने सौजन्य भेंट की। मुलाकात में प्रदेश स्तर पर विभिन्न टाईगर स्ट्राइक फोर्स की बैठकें आयोजित करने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश में जानवरों के अवैध शिकार को नियंत्रित किया जा सकेगा। पुलिस विभाग के सहयोग से अवैध अतिक्रमणों को हटाने एवं संगठित रूप से हो रही लकड़ी चोरी को रोकने में सहयोग भी मिलेगा। इसके अतिरिक्त अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।  

दिल्ली में म.प्र. के सरकारी भवनों के सोलराइजेशन के लिए हुई प्री-बिड मीटिंग

मीटिंग में रेस्को मॉडल पर सोलराइजेशन को लेकर वेंडर्स की शंकाओं का हुआ समाधान भोपाल  अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव की अध्यक्षता में नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के सरकारी भवनों के सौर ऊर्जीकरण के लिये गुरूवार को प्री-बिड मीटिंग हुई। इसमें एमडी मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम के श्री अमनबीर सिंह बैंस ने वेंडर्स को प्रेजेंटेशन देकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। बैठक में मध्यप्रदेश के विभिन्न सरकारी भवनों के RESCO मॉडल पर आधारित सोलराइजेशन को लेकर वेंडर्स की शंकाओं का समाधान किया गया। इसमें 70 से अधिक प्रतिभागियों ने सोलराइजेशन के संबंध में अपने विचार रखे। एसीएस श्री मनु श्रीवास्तव ने बताया कि सौर ऊर्जीकरण के लिये की जा रही यह प्री-बिड मध्यप्रदेश के सरकारी भवनों को शत-प्रतिशत सौर ऊर्जीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकारी भवनों पर बिना किसी अग्रिम निवेश के सोलर प्लांट लगाए जाएँगे, इससे बिजली के बिल में भी बचत होगी।