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मुजफ्फरपुर में मोहन भागवत का कार्यक्रम, पताही हवाई अड्डा मैदान में जुटेंगे उत्तर बिहार के स्वयंसेवक

मुजफ्फरपुर  Mohan Bhagwat Muzaffarpur Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत 13 दिसंबर को मुजफ्फरपुर आ रहे हैं। वे यहां उत्तर बिहार प्रांत द्वारा आयोजित 'अभ्युदय संघ समागम' में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। संघ प्रमुख के इस कार्यक्रम को लेकर मुजफ्फरपुर में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 50 हजार स्वयंसेवक जुटेंगे इस समागम में उत्तर बिहार के सभी जिलों से करीब 50 हजार पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवक जुटेंगे। संघ प्रमुख इन कार्यकर्ताओं को सीधे संबोधित कर उनका मार्गदर्शन करेंगे। आयोजन को लेकर आरएसएस के स्वयंसेवक भव्य तैयारियों में जुट गए हैं। ऑनलाइन निबंधन शुरू समागम को सफल बनाने के लिए संघ कार्यालय मधुकर निकेतन में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन निबंधन (रजिस्ट्रेशन) कार्य का विधिवत शुभारंभ कर दिया गया है। भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में संपर्क अभियान चलाया जाएगा। पताही हवाई अड्डा चिह्नित आयोजन स्थल के रूप में फिलहाल शहर के पताही हवाई अड्डा मैदान को चिन्हित किया गया है। इसके अलावा कार्यकर्ता अन्य उपयुक्त मैदानों और बड़े स्थानों की भी टोह ले रहे हैं। पूरे उत्तर बिहार प्रांत में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल है। अंतिम रूप में व्यवस्थाएं विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना चन्नी के अनुसार कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समागम में उत्तर बिहार की ऐतिहासिक भागीदारी होगी। निबंधन प्रशिक्षण के इस मुख्य सत्र में प्रांत प्रचारक रविशंकर सिंह विशेन, विभाग संघचालक चंद्रमोहन खन्ना, महानगर संघचालक अविनाश कुमार, महानगर कुटुंब प्रबोधन संयोजक रजनीश मिश्रा और जिला प्रचारक सुनील रुद्र आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहकर अभी बताइए आनलाइन कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए।  

‘पाकिस्तान से आए लोग शरणार्थी नहीं थे’, मोहन भागवत ने बंटवारे पर दिया बड़ा बयान

नागपुर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना।  भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे। 'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति' मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो। उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय।  भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना।  RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं।  वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

भारत की आत्मा बचाने में आदिवासी-सूचित समुदायों की अहम भूमिका: मोहन भागवत

नागपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत  ने कहा है कि जिस तरह से दुनिया इस समय डावांडोल हो रही है, वैश्विक उथल-पुथल मची है, ऐसे में सुदृढ़ एवं सबल भारत ही विश्व का आधार बन सकता है। इसके लिए भारत को सभी समाजों को साथ लेकर चलना होगा और आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने भारत की आत्मा बचाई है. इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि विदेशी आक्रमणों और तमाम कठिनाइयों के बावजूद आदिवासी समुदायों और अनुसूचित जातियों ने भारत की पहचान और उसकी आत्मा को संरक्षित रखा. संघ प्रमुख भागवत आज मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया पर आयोजित ‘कर्मयोगी एकल शिक्षक मेला’ में वनवासी इलाकों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के अवसर पर बोल रहे थे। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि अस्थिर विश्व में सुदृढ़ भारत ही आधार बन सकता है, जिसके लिए आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाना आवश्यक है। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि मानव जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को वापस देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज की मूल भावना और मूल्य प्रणाली हजारों वर्षों से कायम है, जिसे अक्सर हिंदू समाज की पहचान के रूप में देखा जाता है. विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को निशाना बनाया जो इन मूल्यों को जीवित रखे हुए थे. इसके बावजूद आदिवासी और अनुसूचित जाति समुदायों ने देश की आत्मा को बचाए रखा. भागवत शनिवार को मुंबई में आयोजित कर्मयोगी पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी राज्य के आदिवासी विकास मंत्री प्रो. अशोक उइके और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर भी मौजूद थे। उन्होंने आगे कहा कि वर्षों से आदिवासी समाज ने हमारी संस्कृति को संभाल कर रखा है और आदिवासी समाज हमें बहुत कुछ देता रहा है। उनकी यही प्रवृति भारत की सनातन संस्कृति की पहचान है और आदिवासियों ने सबका कल्याण करने की इसी प्रवृति को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में शिक्षा का यह प्रसार संवेदना से किया जाने वाला कार्य है। यह दया से नहीं, जी तोड़ मेहनत से संभव है। डॉ. भागवत ने कहा कि सामान्य तौर पर देश के आम लोगों को जो सुविधाएं मिलती है वो आदिवासी समाज को नहीं मिल पातीं। उन्हें देश के मुख्य प्रवाह में लाए बिना समाज का विकास नहीं हो सकता। समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अब राजनीति की व्याख्या बदलने की जरूरत है। पावर पालिटिक्स या सत्ता पाना अब राजनीति नहीं है। राजनीति का अर्थ अब विकास और सामाजिक सेवा है। नागपुर स्थित ‘स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था’  अब तक विदर्भ में चलाए जा रहे एकल विद्यालयों को अब पूरे महाराष्ट्र में विस्तारित करने जा रही है। यह संस्था नितिन गडकरी के मार्गदर्शन और मुंबई के जाने-माने व्यवसायी अतुल शिरोडकर की अध्यक्षता में काम करती है।

‘कम से कम तीन बच्चे हों’ — मोहन भागवत का आह्वान, बोले किसी से खतरा नहीं

लखनऊ  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन उसे सजग और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात लखनऊ स्थित विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कही। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों का संकल्प लेना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है, वे धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता इसके बाद माधव सभागार में आयोजित 'कार्यकर्ता कुटुंब मिलन' कार्यक्रम में उन्होंने 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनके साथ संवाद और सहयोग बनाए रखना चाहिए। हम सभी एक ही देश और मातृभूमि के पुत्र अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम सभी एक ही देश और मातृभूमि के पुत्र हैं। जो हमारे विरोधी हैं, उन्हें समाप्त करना हमारा विचार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुआं और श्मशान जैसे सार्वजनिक धार्मिक स्थल सभी हिंदुओं के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।  

जनसंख्या संतुलन पर मोहन भागवत की चिंता, हिंदू समाज से कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की अपील

लखनऊ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन उसे सजग और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात लखनऊ स्थित विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कही। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों का संकल्प लेना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है, वे धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता इसके बाद माधव सभागार में आयोजित 'कार्यकर्ता कुटुंब मिलन' कार्यक्रम में उन्होंने 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनके साथ संवाद और सहयोग बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

RSS और राम मंदिर आंदोलन का असर: मोहन भागवत ने बीजेपी के अच्छे दिनों का राज बताया

 मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भाजपा को लेकर बड़ी लकीर खींच दी है। 2024 के आम चुनाव के दौरान तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि हम आरएसएस के बिना भी चुनाव में जीत हासिल कर सकते हैं। इसे लेकर संघ कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष देखा गया था। अब सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि भाजपा के ये 'अच्छे दिन' आरएसएस के चलते ही आए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए आरएसएस ने प्रतिबद्धता दिखाई थी और जिसने इसका साथ दिया, उसे फायदा मिला। इस तरह उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि संघ के नेतृत्व में चले राम मंदिर आंदोलन का फायदा भाजपा को चुनावी राजनीति में भी मिला। इस तरह उन्होंने साफ कर दिया कि भाजपा के लिए आरएसएस का कितना महत्व है और वह भी उसका मातृ संगठन है। माना जा रहा है कि आरएसएस के कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने के मकसद से उन्होंने ऐसी बात कही है। इसके अलावा भाजपा नेतृत्व के लिए भी यह एक संदेश है कि भले ही दल का विस्तार हो गया है, लेकिन उसका वैचारिक आधार अब भी आरएसएस ही है। बता दें कि आरएसएस और भाजपा के संबंधों को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं। आरएसएस की ओर से भाजपा में किसी भी फैसले लेने के दावों को खारिज किया जाता रहा है। उसका कहना है कि हम संघ के कार्यकर्ता देते हैं, लेकिन उसके फैसलों में हमारा कोई दखल नहीं रहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अलग राजनीतिक पार्टी है भाजपा। उसमें बहुत से स्वयंसेवक हैं, लेकिन वह संघ की पार्टी नहीं है। उसमें स्वयंसेवक हैं और वे अपना काम करते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोगों के पास कोई और काम करने के लिए समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि हमारे यहां माताओं-बहनों से आप बात करेंगे तो वे कहेंगे कि इन्हें घर पर भी ध्यान देने का समय नहीं है। आरएसएस का एक ही काम कि संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट किया जाए। इसके अतिरिक्त हमें कोई और काम नहीं करना है। हमारे विचार की बात करने से कुछ लोगों को मिलता है फायदा मोहन भागवत ने कहा कि फिर सवाल उठता है कि देश में और भी समस्याएं हैं। उनका क्या होगा। इस पर संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने कहा था कि संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि सभी अहम कामों में संघ के कार्यकर्ता शामिल हैं, लेकिन वे स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि हमारा काम मनमर्जी से चलता है। इसमें नियंत्रण नहीं चलता है। स्वयंसेवकों के बीच एक सहयोग की भावना है। हमारे पास एक शक्ति है तो राष्ट्र के लिए भी एक विचार है और उसके अनुसार जो लोग बात करते हैं। उन्हें लाभ होता है। लेकिन हमारा काम किसी को लाभ पहुंचाना नहीं है।

जाति नहीं, हिंदू पहचान ही होगी प्राथमिकता: मुंबई में मोहन भागवत का अहम संदेश

मुंबई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख कौन बन सकता है, इस बात को लेकर बड़ा बयान दिया। भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ का सरसंघचालक किसी जाति का नहीं होगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय या अन्य जाति का होना जरूरी नहीं है, केवल एक शर्त है, जो बने वह हिंदू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाति के आधार पर पद का चयन नहीं किया जाता, केवल हिन्दू होने की शर्त जरूरी है। बता दें कि मोहन भागतव ने मुंबई में आयोजित आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही। इस मौके पर कार्यक्रम में कई जानी-मानी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि जाति से नहीं बल्कि हिंदू होने से ही इस पद के लिए पात्रता तय होती है। अपने पद को लेकर भी बोले भागवत इस दौरान मोहन भागवत ने उनकी उम्र 75 साल हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने साफ किया कि संघ में पद छोड़ने का फैसला संगठन करता है, न कि कोई व्यक्ति खुद। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख का कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्र और प्रांत के प्रमुख मिलकर सरसंघचालक का चयन करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 साल के बाद बिना पद के काम करना चाहिए। मैंने अपनी उम्र के बारे में संघ को बताया, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब भी आरएसएस कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से रिटायर होना कभी नहीं होगा। 'परिस्थितियों पर ज्यादा नहीं, समाधान पर ध्यान देने की जरूरत' मोहन भागवत ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां अनुकूल भी हो सकती हैं और कठिन भी, लेकिन उन पर जरूरत से ज्यादा सोचने की बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है। इसके साथ ही हल्के-फुल्के अंदाज में भागवत ने कहा कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों से खून की आखिरी बूंद तक काम लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि संघ के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी को जबरन रिटायर किया गया हो। प्रचार नहीं, संस्कार देना संघ का काम आरएसएस प्रमुख ने साफ किया कि संघ का काम चुनावी प्रचार या आत्म-प्रचार करना नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपने काम का ज्यादा प्रचार नहीं करते। जरूरत से ज्यादा प्रचार से अहंकार आता है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, समय पर और उतना ही जितना जरूरी हो। 'आरएसएस में अंग्रेजी नहीं, लेकिन विरोध भी नहीं' इसके साथ ही भागवत ने भाषा को लेकर भी अहम टिप्पणी की। उन्होने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी माध्यम नहीं होगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहां जरूरत होगी, वहां अंग्रेजी का इस्तेमाल किया जाएगा। हमें इससे कोई परहेज नहीं है। उन्होंने कहा कि लोगों को अंग्रेजी इस तरह बोलनी चाहिए कि अंग्रेजी बोलने वाले भी सुनना चाहें, लेकिन मातृभाषा को भूलना नहीं चाहिए। इस दौरान उन्होंने अपने दक्षिण भारत और विदेश का कुछ अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब वे बंगलूरू में एक कार्यक्रम के दौरान दक्षिण भारत के कई लोग हिंदी नहीं समझ पाए, तो उन्होंने अंग्रेजी में जवाब दिए। वहीं विदेशों में रहने वाले भारतीयों से बातचीत के दौरान वह हिंदी या उनकी मातृभाषा में संवाद करते हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन करने मुजफ्फरपुर पहुंचे

मुजफ्फरपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत बिहार दौरे के क्रम में रविवार को मुजफ्फरपुर पहुंचे। उत्तर बिहार के प्रांत कार्यालय मधुकर निकेतन, आलमबाग चौक पहुंचने पर उन्होंने अल्पाहार ग्रहण किया। इसके बाद वह मुजफ्फरपुर-दरभंगा फोरलेन पर गडहां स्थित ब्लू डायमंड रिसोर्ट में आयोजित संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे। संघ प्रमुख के आगमन को लेकर कलमबाग क्षेत्र सहित कार्यक्रम स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में संघ कार्यकर्ता और पदाधिकारी कार्यक्रम स्थल पर पहुंच रहे हैं। दो दिवसीय प्रवास के दौरान मोहन भागवत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर मधुकर निकेतन परिसर में सुबह नौ बजे झंडोत्तोलन करेंगे। इसके बाद वह खंड से लेकर प्रांत स्तर तक के संघ पदाधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। संघ कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पहले दिन वह सामाजिक सद्भाव गोष्ठी सह संवाद कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान समाज परिवर्तन में सज्जन शक्ति की भूमिका पर अपना उद्बोधन देंगे। कार्यक्रम में उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे। आरएसएस से बाल स्वयंसेवक के रूप में जुड़े 75 वर्षीय अधिवक्ता गौरीशंकर प्रसाद उर्फ गौरी बाबू ने बताया कि यह पहला अवसर है, जब कोई सरसंघचालक गणतंत्र दिवस के दिन मुजफ्फरपुर में संघ कार्यालय परिसर में झंडोत्तोलन करेंगे। उन्होंने बताया कि संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरुजी माधवराव सदाशिव गोलवलकर सहित बाद के लगभग सभी सरसंघचालक मुजफ्फरपुर आए हैं, लेकिन इस विशेष अवसर पर झंडोत्तोलन और संबोधन का यह पहला मौका है। संवाद कार्यक्रम स्थल पर उत्तर बिहार प्रांत के विभिन्न जिलों से पहुंचे स्वयंसेवकों और प्रतिनिधियों का रजिस्ट्रेशन जारी है। प्रवेश से पहले सभी आगंतुक अपना निबंधन करा रहे हैं। परिसर में अल्पाहार की समुचित व्यवस्था की गई है, जहां लोग भोजन कर रहे हैं। कार्यक्रम स्थल पर संघ साहित्य बिक्री केंद्र पर भी भारी भीड़ देखी जा रही है। साहित्य में रुचि रखने वाले स्वयंसेवक और कार्यकर्ता वहां जुटे हुए हैं।इसी बीच सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए डॉग स्क्वायड की टीम ने परिसर में पहुंचकर सघन जांच शुरू कर दी है। पूरे परिसर की गहन तलाशी ली जा रही है। उत्तर बिहार प्रांत कार्यालय के सभी प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता व्यवस्था संभालने में जुटे हुए हैं। बिना पहचान पत्र या प्रवेश कार्ड के किसी को भी अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। केवल आमंत्रण पत्र प्राप्त लोगों को ही कार्यक्रम स्थल में प्रवेश दिया जा रहा है।

धर्म ही जीवन और सृष्टि की मूल शक्ति, इसके बिना कुछ भी संभव नहीं: मोहन भागवत

मुंबई आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने ने रविवार को कहा कि धर्म ही पूरी सृष्टि का संचालक है। जब सृष्टि बनी, तब उसे चलाने के लिए जो नियम बने, वही धर्म है। पूरी दुनिया उन्हीं नियमों पर चलती है। इसलिए कोई भी पूरी तरह अधर्मी नहीं हो सकता। राज्य भले ही सेकुलर हो सकता है, लेकिन मनुष्य, प्रकृति या सृष्टि की कोई भी चीज धर्म के बिना नहीं रह सकती। संघ प्रमुख ने ये बात मुंबई में आयोजित ‘विहार सेवक ऊर्जा मिलन’ कार्यक्रम में कही। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पानी का धर्म बहना है और आग का धर्म जलाना है। इसी तरह हर व्यक्ति का भी अपना-अपना धर्म और कर्तव्य होता है, जैसे पुत्र धर्म, राजधर्म और समाज धर्म। ये नियम और अनुशासन हमारे पूर्वजों ने गहरे आध्यात्मिक चिंतन और कठिन साधना से समझे। उन्होंने पैदल-पैदल देशभर में घूमकर, बिना भाषण दिए भी, आम लोगों के जीवन में धर्म को उतार दिया। इसलिए भारतवर्ष की रग-रग में धर्म बसता है। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई ड्राइवर नहीं है, लेकिन उन्हें, पीएम नरेंद्र मोदी और हम जैसे अनेक लोगों को चलाने वाली एक ही शक्ति है। वही शक्ति आपको भी चला रही है। अगर हम उस शक्ति द्वारा चलाई जा रही गाड़ी में बैठे हैं, तो हमारा कभी एक्सीडेंट नहीं होगा। उस ड्राइवर का नाम है—धर्म। धर्म ही पूरी सृष्टि का ड्राइवर है। सृष्टि के चलने का नियम ही धर्म है और सब कुछ उसी पर चलता है। भागवत ने कहा कि परिस्थितियां हमारे हाथ में नहीं होतीं। वे उसकी इच्छा से आती-जाती हैं। अगर उसकी इच्छा होगी तो हम केवल निमित्त बनेंगे और परिस्थिति बदल जाएगी। अगर नहीं बदली, तो भी कोई नुकसान नहीं है। कम से कम हम अच्छा जीवन जीते हुए, अच्छे कर्म करते हुए, अच्छे स्थान को प्राप्त करेंगे। इसी निष्ठा के साथ हमें अहंकार से मुक्त होकर सबको साथ लेकर सेवा करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश में धर्म का बल खड़ा हो रहा है। जब यह धर्म पूरी तरह खड़ा होगा, तब देश अपनी सभी समस्याओं पर विजय पाकर फिर से विश्व गुरु बनेगा। भारतवर्ष परम वैभव और बल से संपन्न होकर विश्व मंच पर अग्रणी स्थान प्राप्त करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि वह दिन हम इन्हीं आंखों से देखेंगे। बस एक ही शर्त है कि हमें धर्म पर अडिग रहना है और सेवा करते रहना है। मोहन भागवत ने युवाओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यहां मौजूद युवाओं में एक अंदरूनी शक्ति है। भक्तिभाव से भरा हुआ मन और सेवा की भावना संतों का स्वभाव होती है। संत दूसरों के छोटे से गुण को भी बड़ा बनाकर देखते हैं। उन्होंने कहा कि जो बात मंच से कही गई है, वह वे उसी भावना से स्वीकार कर रहे हैं।

भोपाल में संघ प्रमुख मोहन भागवत, दो दिनों में चार प्रमुख कार्यक्रमों में लेंगे हिस्सा

 भोपाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत 2 और 3 जनवरी को अपनी दो दिन की यात्रा के दौरान भोपाल में प्रमुख नागरिकों, सामाजिक और धार्मिक नेताओं, युवाओं और महिलाओं के साथ बातचीत करेंगे. संघ की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, पिछले 10 महीनों में यह भागवत की मध्य प्रदेश की पांचवीं यात्रा होगी. RSS प्रमुख 2 जनवरी को 'युवा संवाद' और 'प्रमुखजन गोष्ठी' (प्रमुख नागरिकों के साथ बातचीत) में हिस्सा लेंगे, इसके बाद 3 जनवरी को 'सामाजिक सद्भाव बैठक' और 'शक्ति संवाद' (महिलाओं के साथ बातचीत) होगी. एक न्यूज एजेंसी ने आरएसएस पदाधिकारी के हवाले से बताया कि भागवत इन कार्यक्रमों के दौरान संगठन की 100 साल की यात्रा का जिक्र करेंगे और समकालीन मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे. उन्होंने बताया कि RSS प्रमुख 2 जनवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी में कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में प्रांत-स्तरीय 'युवा संवाद' को संबोधित करेंगे. यह कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में होगा। ये आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में होंगे। दूसरा आयोजन प्रमुख जन सम्मेलन होगा, जिसमें भोपाल विभाग के 1500 प्रमुख जन सम्मिलित होंगे। यहां डा. मोहन भागवत का व्याख्यान होगा। प्रश्नोत्तर का सत्र नहीं रखा गया है। इसमें विभिन्न क्षेत्र में काम करने वाले संस्था प्रमुख सम्मिलित होंगे। प्रमुखजन गोष्ठी: समाज के प्रभावशाली लोगों से विमर्श आज यानी शुक्रवार शाम 5:30 बजे रविन्द्र भवन के हंस ध्वनि सभागार में प्रमुखजन गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसमें भोपाल विभाग के सामाजिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक, व्यवसायिक और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय प्रमुख व्यक्तित्वों को आमंत्रित किया गया है। गोष्ठी में संघ की शताब्दी यात्रा, सामाजिक समरसता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर संवाद होगा। सामाजिक सद्भाव बैठक: सभी समाजों के प्रतिनिधि होंगे शामिल कल 3 जनवरी को सुबह 9:30 बजे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रांत के सभी जिलों से विभिन्न समाजों के प्रमुख प्रतिनिधि भोपाल पहुंचेंगे। बैठक का उद्देश्य सामाजिक एकता, समरसता और पारस्परिक सहयोग को मजबूत करना है। सरसंघचालक इस मंच से समाज को जोड़ने वाले विचारों और साझा जिम्मेदारियों पर मार्गदर्शन देंगे। शक्ति संवाद: मातृशक्ति से सीधा संवाद कल 3 जनवरी को शाम 5 बजे भोपाल की प्रमुख मातृ शक्ति के साथ शक्ति संवाद कार्यक्रम आयोजित होगा। इस संवाद में समाज, परिवार और राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। यह कार्यक्रम महिला सहभागिता और सामाजिक नेतृत्व के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शताब्दी वर्ष में बढ़ी संघ को जानने की जिज्ञासा संघ के शताब्दी वर्ष के चलते समाज के विभिन्न वर्गों में आरएसएस को लेकर जिज्ञासा और रुचि बढ़ी है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के इस प्रवास के माध्यम से लोगों को संघ के बारे में तथ्यात्मक और वास्तविक जानकारी मिलेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि देश और समाज के निर्माण में नागरिक किस प्रकार सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। यह प्रवास संघ के शताब्दी वर्ष में भोपाल के लिए एक महत्वपूर्ण वैचारिक और सामाजिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। अगले दिन यानी शनिवार सुबह 9:30 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में सामाजिक सद्भाव सम्मेलन होगा, जिसमें विभिन्न समाज के लोग रहेंगे। वह शाम को भोपाल स्टेशन के पास केशव निडम में शक्ति सम्मेलन को संबोधित करेंगे, जिसमें भोपाल की महिलाएं सम्मिलित होंगी। इन आयोजनों में दो बड़ी बातें हैं। एक तो यह कि उन्हें बुलाया गया है जो आरएसएस के कार्यकर्ता या स्वयंसेवक नहीं हैं। दूसरा, शक्ति सम्मेलन में 40 वर्ष से कम आयु की महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। प्रांत के सभी 31 जिलों (प्रशासनिक ढांचे के अनुसार 16 जिले) के युवा, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है और पहचान बनाई है, इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. उन्होंने बताया कि प्रमुख नागरिकों के साथ बातचीत रवींद्र भवन के एक ऑडिटोरियम में होगी, जिसमें भोपाल संभाग के विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है. बयान के अनुसार, 3 जनवरी को कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम में 'सामाजिक सद्भाव बैठक' का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न समुदायों के प्रमुख सदस्य हिस्सा लेंगे. इसमें कहा गया है कि उसी शाम भोपाल की प्रमुख महिला प्रतिनिधियों के साथ 'शक्ति संवाद' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. बयान में कहा गया है, "भागवत की यात्रा लोगों को RSS के बारे में तथ्यात्मक और प्रामाणिक जानकारी देगी. यह राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में व्यक्ति क्या भूमिका निभा सकते हैं, इस बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान करेगी."