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लेफ्टिनेंट बनकर रेवाड़ी पहुंचे बादल यादव का हुआ भव्य स्वागत, मां बोली- मुझे मेरे बेटे पर गर्व

रेवाड़ी  रेवाड़ी के यादव नगर निवासी एवं पैतृक गांव कुंभावास से ताल्लुक रखने वाले बादल यादव के भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार गृह नगर पहुंचने पर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया गया।  बूढ़पुर रोड स्थित कंकर वाली बगीची स्थित शिव मंदिर से बादल यादव को थार गाड़ी में सवार कर डीजे की धुनों के बीच उनके घर यादव नगर तक जुलूस के रूप में ले जाया गया। इस दौरान यादव नगर वासियों के साथ-साथ कुंभावास गांव के लोगों में भी जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और लोग नाचते-झूमते नजर आए। बादल यादव की इस उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी माता संतोष यादव ने कहा कि आज उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।  उन्होंने युवाओं से शिक्षा पर ध्यान देने और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया। पिता अशोक यादव, जो स्वयं सेना से सेवानिवृत्त कैप्टन हैं, उन्होंने इसे परिवार के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है। बादल यादव के दादा स्वर्गीय मातादीन सूबेदार के पद से वर्ष 1970 में सेवानिवृत्त हुए थे, जबकि ताऊ मदन लाल भी सेना में सेवाएं दे चुके हैं। बादल यादव के नाना धनसिंह भी ओनरी कैप्टन के पद से वर्ष 1993 में सेवानिवृत्त हुए थे।  बादल यादव ने प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी से कमांडेंट रजत पदक प्राप्त किया। वे अब भारतीय सेना की इंजीनियर रेजीमेंट में अपनी सेवाएं देंगे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल रेवाड़ी से प्राप्त की और पहले ही प्रयास में एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर परिवार, पैतृक गांव कुंभावास और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया। कुंभावास गांव में भी बादल यादव की इस उपलब्धि को लेकर गर्व और उत्साह का माहौल रहा। गांववासियों ने इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि बादल यादव की सफलता से कुंभावास का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर रोशन हुआ है। इस मौके पर नरेंद्र यादव, वेद प्रकाश, सुभाष यादव, हिमांशु यादव, मलखान सिंह, सुनील यादव, आयुष यादव, रोहतास नंबरदार, रायसिंह गोकलगढ़, हेमंत कुमार सहित सैकड़ों गणमान्य लोग और ग्रामीण उपस्थित रहे।

हरियाणा में पुलिस महकमे में हलचल: छुट्टी के बाद DGP शत्रुजीत कपूर की छुट्टी क्यों हुई?

पहले 2 महीने की छुट्टी पर भेजा, फिर DGP के पद से हटाया, शत्रुजीत कपूर के साथ हरियाणा सरकार ने क्यों किया ऐसा?   चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने रविवार देर शाम बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर को उनके पद से हटा दिया। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब वह पहले ही वदो महीने की छुट्टी पर भेजे जा चुके थे। सरकार ने साफ किया है कि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह अगले आदेश तक कार्यवाहक डीजीपी बने रहेंगे, जबकि 1990 बैच के अधिकारी शत्रुजीत कपूर को हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि सरकार ने शत्रुजीत कपूर के साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया है। दरअसल वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की कथित आत्महत्या से जुड़े विवाद के बाद ये फैसला लिया गया है। शत्रुजीत कपूर अगस्त 2023 में डीजीपी बनाए गए थे। इस नियुक्ति के दौरान उन्होंने 1989 बैच के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों मोहम्मद अकील और आरसी मिश्रा को सुपरसीड किया था। उस समय भी यह फैसला चर्चा में रहा था। हालांकि, उनका कार्यकाल उस वक्त विवादों में घिर गया, जब हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की 7 अक्टूबर को कथित आत्महत्या का मामला सामने आया। इस घटना के बाद मृतक अधिकारी के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। इसी दबाव के बीच सरकार ने रोहतक के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया को उनके पद से हटा दिया और शत्रुजीत कपूर को 14 अक्टूबर को दो महीने की छुट्टी पर भेज दिया गया। कपूर के छुट्टी पर जाते ही ओपी सिंह ने कार्यवाहक डीजीपी का कार्यभार संभाल लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक पुष्पेंद्र कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। जांच अभी भी जारी है और इसी बीच सरकार का यह फैसला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। बता दें कि कपूर, जो 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। वहीं ओपी सिंह की सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर को है। फिलहाल वो हरियाणा पुलिस मुखिया बने रहेंगे। दोनों अधिकारियों से संबंधित आदेश हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) सुमिता मिश्रा ने उसी दिन जारी किए, जिस दिन कपूर की दो महीने की छुट्टी समाप्त हुई। ओपी सिंह अपने नए दायित्व के साथ-साथ हरियाणा राज्य नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक और मधुबन स्थित फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे। इस बीच, ओपी सिंह के कार्यवाहक डीजीपी रहते हुए पुलिस विभाग ने कई बड़े अभियान चलाए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, उनके नेतृत्व में ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ और ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट डोमिनेशन’ जैसे समन्वित अभियानों के जरिए हजारों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसा गया और कई संभावित आपराधिक वारदातों को समय रहते रोका गया। इसके साथ ही ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई, जिससे कई संवेदनशील इलाकों में नशे की सप्लाई पर असर पड़ा। हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला- DGP पद से हटाया गया   हरियाणा सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी वाई पूरण कुमार की कथित आत्महत्या को लेकर हुए विवाद के बीच छुट्टी पर भेजे जाने के दो महीने बाद आईपीएस अधिकारी शत्रुजीत कपूर को रविवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद से कार्यमुक्त कर दिया। कपूर की गैरमौजूदगी में राज्य पुलिस प्रमुख का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे ओ पी सिंह को अगले आदेश तक कार्यवाहक डीजीपी (पुलिस बल के प्रमुख) के रूप में नियुक्त किया गया है। कब होगी डीजीपी की नियुक्ति हरियाणा सरकार नये डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक सूची संघ लोक सेवा आयोग को भेज सकती है, क्योंकि 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सिंह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी कपूर हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन, पंचकूला के चेयरमैन का पद संभालते रहेंगे।  इंजीनियरिंग स्नातक कपूर को अगस्त 2023 में राज्य पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था। क्या था मामला पूरन कुमार हरियाणा पुलिस के तेजतर्रार आईपीएस अफसरों में गिने जाते थे। कुछ महीने पहले वे चंडीगढ़ स्थित अपने घर में मृत पाए गए थे, शरीर पर गोली लगने के निशान थे। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का बताया गया था, जिसके बाद उनके लिए इंसाफ की मांग उठी। आपको बता दें कि पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में आठ वरिष्ठ अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था. काफी दबाव के बाद शत्रुजीत कपूर को छुट्टी पर भेज दिया गया था।

राशन उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: हरियाणा में बनेंगे 4,000 नए डिपो, वितरण होगा आसान

चंडीगढ़  प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार प्रदेशभर में करीब 4 हजार नए राशन डिपो खोलने की योजना पर काम कर रही है। खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रारंभिक मंजूरी मिल चुकी है। योजना के अनुसार हर जिले और गांव में 500 राशन कार्ड पर एक नया राशन डिपो स्थापित किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को अपने नजदीकी क्षेत्र में ही राशन उपलब्ध हो सकेगा। इस प्रस्ताव के तहत महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। कुल नए डिपो में से लगभग 33 प्रतिशत, यानी करीब 1320 डिपो महिलाओं के लिए आरक्षित रखने की योजना है। इससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। हालांकि, योजना को लागू करने से पहले कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं। इनमें पात्रता के नियम, आवेदन की शर्तें, जांच प्रक्रिया और तकनीकी तैयारियां शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इन प्रक्रियाओं के दौरान आवश्यकतानुसार कुछ बदलाव भी संभव हैं। सरकार का लक्ष्य है कि जनवरी माह के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं। खाद्य आपूर्ति विभाग के सुपरिंटेंडेंट अश्वनी कुमार ने बताया कि नए डिपो खोलने के प्रारंभिक प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की स्वीकृति मिल चुकी है। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद जनवरी के अंत तक नए राशन डिपो के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। आवेदन अंत्योदय सरल पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।   वर्तमान स्थिति की बात करें तो हरियाणा में इस समय 9247 राशन डिपो संचालित हैं। इन डिपो के माध्यम से 40 लाख 69 हजार से अधिक परिवारों को राशन की आपूर्ति की जा रही है, जिनमें कुल 1 करोड़ 59 लाख से ज्यादा सदस्य पंजीकृत हैं। राज्य में पीला (BPL), गुलाबी (AAY) और खाकी श्रेणी के राशन कार्ड जारी किए जाते हैं। पीले कार्डधारकों को प्रति सदस्य 5 किलो गेहूं, 2 लीटर तेल और 1 किलो चीनी मिलती है, जबकि गुलाबी कार्डधारकों को प्रति कार्ड 35 किलो गेहूं, 2 लीटर सरसों का तेल और 1 किलो चीनी दी जाती है। नए डिपो खुलने से राशन वितरण व्यवस्था और अधिक सुगम व पारदर्शी होने की उम्मीद है।

‘धान घोटाले ने खोली सरकार की पोल’, पारदर्शिता पर बड़ा सवाल : कुमारी सैलजा

सिरसा  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में फर्जी गेट पास काटकर मंडियों में धान आए बिना ही बेच डाला। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश से धान लाकर यहां के किसानों के नाम से बेचा गया। इस धान घोटाले ने प्रदेश की भाजपा सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए है जबकि सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन और प्रशासन का दावा करती आ रही है। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।  मीडिया को जारी बयान में कहा है कि हरियाणा में अनाज खरीदी प्रणाली और सरकारी वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठ रहे गंभीर आरोपों ने पूरे प्रदेश के किसान समुदाय को गहरी चिंता में डाल दिया है। धान और अन्य फसलों की सरकारी खरीद में व्यापक अनियमितताओं, कागज़ी खरीद के असामान्य रूप से बढ़े आंकड़ों तथा बिचौलियों और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की खबरों ने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सरकारी खरीद व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को सुरक्षा और सम्मान देना है, न कि उनके हक़ की अनदेखी करके उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव में धकेलना। बाढ़ से हुए फसल नुकसान के बावजूद कागज़ी खरीद में भारी वृद्धि के आरोप प्रदेश के वित्तीय संसाधनों के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करते हैं, जो चिंताजनक है। ऐसे परिस्थितियों में यह आवश्यक हो जाता है कि सरकार किसी भी प्रकार की लीपापोती से दूर रहते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अनियमितताओं के लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार कौन लोग हैं।  जांच केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन सभी निर्णयकर्ताओं और उच्च स्तर के जिम्मेदार व्यक्तियों को भी शामिल करना चाहिए जिनकी भूमिका ने इस स्थिति को जन्म दिया। किसानों से किए गए एमएसपी वादों की सत्यता और सरकारी खरीद के वास्तविक आंकड़ों को पारदर्शी रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें यह भरोसा हो सके कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए ईमानदारी से कार्य कर रही है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि किसानों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। हरियाणा के किसान आज न्याय की अपेक्षा कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या शोषण को छिपाने का प्रयास स्वीकार्य नहीं होगा। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे।  कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी। सांसद ने कहा कि धान घोटाले ने साबित कर दिया है कि सरकार भ्रष्टाचार पर कोई अंकुश नहीं लगा पाई है बल्कि अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है। हरियाणा में फर्जी गेट पास काटकर मंडियों में धान आए बिना ही धान बेच डाला। बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से धान लाकर यहां के किसानों के नाम से बेचा गया। धान घोटाला यमुनानगर में सर्वाधिक लगभग 80 करोड़ रुपये और करनाल में 20 करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार को चाहिए कि वह इस पूरे प्रकरण में सच सामने लाए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे और किसानों को उनका उचित हक तथा राहत तुरंत प्रदान करे। कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाती रहेगी।

केंद्र का सख्त रुख: राजस्थान और हरियाणा को तुरंत सौंपना होगा टाइम-बाउंड रोडमैप

चंडीगढ़  यमुना जल समझौते पर केन्द्र सरकार ने अब राजस्थान और हरियाणा सरकार से काम की विस्तृत कार्ययोजना मांगी है। इसके पीछे मंशा है कि अलाइनमेंट के बाद के काम भी तय समय पर पूरे हों। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर.पाटिल के साथ हुई हाईलेवल बैठक के बाद मंत्रालय इस परियोजना को लेकर सक्रिय हो गया है। मंत्रालय चाहता है कि दोनों राज्य तय अलाइनमेंट के अनुरूप कब, क्या और कैसे काम आगे बढ़ाएंगे, इसका स्पष्ट रोडमैप तत्काल भेजें। इसी आधार पर परियोजना की टाइमलाइन तैयार की जाएगी, ताकि काम मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में ही शिलान्यास और निर्माण तक पहुंच सके।  संभव है कि केन्द्र स्तर पर एक कमेटी सक्रिय हो, जो समीक्षा करे। परियोजना में 300 किलोमीटर लंबाई में पाइपलाइन बिछाने के लिए अलाइनमेंट सर्वे हुआ है। इसमें 290 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में और 10 किलोमीटर हिस्सा राजस्थान में है।  यह करना है… 1- अंतिम रूप दिए गए अलाइनमेंट के अनुसार निर्माण कार्य के चरण तय होंगे। 2- भूमि अधिग्रहण, डीपीआर अपडेट, फंडिंग पैटर्न और इंटरस्टेट कॉर्डिनेशन से जुड़े बिंदुओं पर स्थिति। 3- कार्य के हर चरण की समय सीमा (टाइम-बाउंड प्लान), जिससे मंत्रालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग हो सके।

कोहरा बना किसानों का दोस्त! हरियाणा में इन फसलों के लिए बेहद लाभकारी रहेगा मौसम

नूंह  नूंह जिले में मौसम ने अचानक तीखे तेवर दिखा दिए हैं। तड़के सुबह से ही घने कोहरे ने पूरे नूंह जिले को अपने आगोश में ले लिया, वहीं हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने लोगों को घरों में दुबकने पर मजबूर कर दिया। रविवार को गलियों, चौक-चौराहों और बाजारों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते नजर आए। कोहरे की मोटी चादर के कारण सड़कों पर दृश्यता बेहद कम रही, जिससे वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। हाईवे से लेकर ग्रामीणों में सड़कों तक वाहन रेंगते दिखाई दिए। चालकों ने हेडलाइट जलाकर सावधानीपूर्वक वाहन चलाए, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके। सुबह-सुबह काम पर निकलने वाले मजदूरों, बुजुर्गों और बच्चों पर ठंड का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला। ठंड के इस मौसम में चाय की दुकानों पर खासा जमावड़ा नजर आया, जहां लोग गरमागरम चाय की चुस्कियां लेते हुए ठंड से राहत लेते दिखे। हालांकि यह मौसम किसानों के लिए खुशखबरी लेकर आया है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक घना कोहरा और ठंड रबी फसलों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जा रही है। इससे गेहूं, सरसों सहित अन्य फसलों में नमी बनी रहेगी, जिससे पैदावार बेहतर होने की उम्मीद है। वहीं मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी ठंड और कोहरे के बने रहने की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, सुबह और देर रात अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।

इंसाफ की लंबी राह: 62 साल बाद अदालत ने 80 साल के बुजुर्ग को दिलाया अधिकार

फरीदाबाद लंबे समय से चल रहा जमीन से जुड़ा एक कानूनी विवाद आखिरकार 62 साल बाद अपने अंजाम तक पहुंच गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फरीदाबाद में छह दशक पुराने इस संपत्ति विवाद पर अंतिम फैसला सुनाते हुए निजी डेवलपर के खिलाफ मूल अलॉटी के अधिकारों को पूरी तरह बरकरार रखा है।   जमीन की मौजूदा कीमत  7 करोड़ रुपये  दरअसल फरीदाबाद जिले में 5,103 वर्गफुट की वह ज़मीन, जिसे 62 साल पहले 14,000 रुपये से भी कम में खरीदा गया था, अब मौजूदा बाजार कीमत करीब 7 करोड़ रुपये होने के बावजूद केवल 25% अतिरिक्त नाममात्र राशि पर सौंपे जाने का आदेश दिया गया है. इस संपत्ति के एकमात्र वारिस सी. के. आनंद की उम्र 80 वर्ष से अधिक है. जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा, ‘जो पक्ष दशकों तक अपने दायित्वों के पालन को टालता रहा हो, वह बाजार कीमतों में बढ़ोतरी को ढाल बनाकर नहीं अपना सकता।’   आधी रकम जमा कर दी  गई थी  मामला 1963 का है, जब एम/एस आरसी सूद एंड कंपनी लिमिटेड ने फरीदाबाद के सूरजकुंड के पास ईरोस गार्डन्स कॉलोनी शुरू की और खरीदार नांकी देवी (आनंद की मां) से अग्रिम राशि ली. कंपनी ने प्लॉट नंबर 26-ए (350 वर्ग गज) और प्लॉट नंबर बी-57 (217 वर्ग गज) क्रमशः 24 और 25 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से बेचने का समझौता किया। नांकी देवी ने लगभग आधी रकम जमा कर दी थी। पीढ़ियों तक चली कानूनी लड़ाई इसके बाद वैधानिक अड़चनों, प्रशासनिक देरी और पीढ़ियों तक चली कानूनी लड़ाइयों का सिलसिला शुरू हुआ। 1963 का पंजाब शेड्यूल्ड रोड्स एंड कंट्रोल्ड एरियाज एक्ट और 1975 का हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट लागू होने के बाद डेवलपर ने इन्हें कब्जा न देने का कारण बताया। 1980 के दशक के मध्य में, तीसरे पक्ष को प्लॉट बेचे जाने की आशंका पर अलॉटियों ने केवल बिक्री रोकने के लिए अदालत का रुख किया। तब भी हाईकोर्ट ने माना कि अलॉटमेंट वैध हैं और कंपनी उन्हें एकतरफा रद्द नहीं कर सकती. इसके बावजूद कब्जा नहीं मिला।   2002 में मुकदमेबाजी का नया दौर शुरू हुआ. निचली अदालतों ने अलॉटियों के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन डेवलपर हाईकोर्ट पहुंचा और समय-सीमा, 1964 में कथित रद्दीकरण और छह दशक पुराने सौदे को आज के बाजार में लागू करना अनुचित होने जैसे तर्क दिए. जस्टिस गुप्ता ने शनिवार को जारी 22 पन्नों के फैसले में इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।  

हरियाणा में नई IMT की सौगात, इन गांवों के लोगों को मिलेंगे रोजगार और विकास के अवसर

हरियाणा  हरियाणा की औद्योगिक संरचना विकास निगम (एचएसआइआइडीसी) ने खरखौदा इंडस्ट्रियल माडल टाउन (IMT) के फेज-2 के विस्तार की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। पहले चरण में इसके लिए जमीन की मूल्यांकन का काम होगा। इसके बाद IMT का विस्तार सोनीपत के साथ झज्जर की ओर होगा। जिसके चलते किसानों की जमीन को चिन्हित किया जाएगा।  बताया जा रहा है कि आईएमटी बनाने के लिए 5800 एकड़ जमीन पर काम शुरू होगा। एचएसआइआइडीसी की ओर से जो योजना बनाई गई है, उसके हिसाब से IMT को विस्तार देने के लिए जमीन का चयन इस प्रकार किया गया है, जिससे कि KMP एक्सप्रेसवे को क्रास न करना पड़े। इसे दिल्ली-जम्मू कटरा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि भविष्य में यहां स्थापित होने वाले उद्योगों को दोनों एक्सप्रेसवे का सीधा लाभ मिल सकेंगे। वहीं सोनीपत के खरखौदा क्षेत्र के पांच गांवों की जमीन पर IMT का विस्तार होगा। जिसके चलते झज्जर के छह गांवों में 3,625 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है, जबकि सोनीपत के पांच गांवों की 2,175 एकड़ जमीन को शामिल किया गया है। आसपास के गांवों में जमीन के दाम 8 से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ पहुंच चुके हैं।   

यात्रियों को बड़ा झटका: हिसार–दिल्ली हवाई सेवा बंद, अयोध्या रूट पर बदला उड़ान शेड्यूल

हरियाणा  धुंध को देखते हुए हिसार एयरपोर्ट पर डीजीसीए ने नया विंटर शेड्यूल जारी कर दिया है। इसमें हिसार से दिल्ली की फ्लाइट को 16 दिसंबर से आगामी आदेशों तक रद्द कर दिया है। वहीं अब अयोध्या के लिए हफ्ते में एक बार फ्लाइट जाएगी। नया विंटर शेड्यूल 15 जनवरी तक लागू रहेगा। इसमें हिसार- दिल्ली, दिल्ली-हिसार हवाई रूट को बंद कर दिया गया है। अब हिसार एयरपोर्ट से शुक्रवार, शनिवार, रविवार को ही हवाई सेवाएं संचालित होंगी। अन्य दिनों में कोई फ्लाइट नहीं होगी। मात्र 9 महीने में ही हिसार से दिल्ली की हवाई सेवा को बंद कर दिया है।  बताया जा रहा है कि हिसार से दिल्ली के लिए काफी कम संख्या में यात्री मिल रहे थे। इसके चलते इस रूट पर हवाई सेवा बंद करने का निर्णय लिया। हिसार से अयोध्या रूट में भी बदलाव किया गया है। अभी तक अयोध्या के लिए सप्ताह में दो दिन फ्लाइट थी। अब एक दिन ही चलेगी। हिसार से जयपुर के लिए पहले एक दिन फ्लाइट थी जिसे अब दो दिन कर दिया है।  जानें हिसार-चंडीगढ़ फ्लाइट का समय हिसार से चंडीगढ़ फ्लाइट पहले सप्ताह में तीन दिन मंगलवार, वीरवार और शनिवार को उड़ती थी। अब इसके फेरे घटा दिए गए हैं। अब यह फ्लाइट सप्ताह में एक दिन शुक्रवार को ही उड़ेगी। पहले इसका समय सुबह 12:35 बजे से था जो अब शाम को सवा 4 बजे तक दिया है। वहीं चंडीगढ़ से हिसार का समय पहले सुबह 11:10 बजे था जो अब बदलकर सुबह 9:50 कर दिया गया है। 

घने कोहरे ने ली सड़क सुरक्षा की परीक्षा, हरियाणा में 4 बसें भिड़ीं, यात्रियों में अफरा-तफरी

चंडीगढ़  हरियाणा के रेवाड़ी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 352डी पर सुबह एक बड़ी सड़क दुर्घटना होने की सूचना मिली है। भीषण कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम होने की वजह से चार बसों में आपस में टक्कर हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह दुर्घटना तड़के सुबह हुई जब घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी बहुत कम हो गई थी। इस हादसे में तीन से चार बसें एक-दूसरे से टकरा गईं। ये बसें रेवाड़ी से झज्जर की ओर जा रही थीं।   सूत्रों के मुताबिक, इस टक्कर में कई यात्री घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में ले जाया गया है। हालांकि, घायलों की सही संख्या की पुष्टि होना बाकी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। प्राथमिक आकलन से पता चलता है कि कम दृश्यता ही दुर्घटना का मुख्य कारण थी, हालांकि अधिकारियों ने कहा कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना की सही परिस्थितियों का पता चल पाएगा।