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गांव-गांव खिलेगा डेयरी बिज़नेस: हरियाणा सरकार शुरू करने जा रही बड़ी पहल

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार राज्य में पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की दिशा में नया कदम उठाने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी गांवों में दुग्ध उत्पादक सहकारी सोसायटियों का गठन किया जाएगा। सरकार ने विशेष रूप से विधवा महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और अंत्योदय परिवारों को इन सोसायटियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। बुधवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सहकारिता विभाग की बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि नई सोसायटियों को प्रोत्साहन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग संयुक्त प्रयासों के साथ योजनाओं को लागू करें, ताकि पशुपालकों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। सरकार वीटा बूथों पर दूध आधारित उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए भी नए विकल्प तलाश रही है। बैठक में बताया गया कि कई जिलों में मिल्क कलेक्शन और चिलिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही हैफेड द्वारा सरसों और सूरजमुखी तेल मिल लगाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। 

निजी सचिव पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप तूल पकड़ा, डिप्टी स्पीकर के विधायक ने दिए जांच के निर्देश

जींद  हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्डा के निजी सचिव मोहित शर्मा पर आय से अधिक संपत्ति रखने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला तब गरमाया जब आरटीआई कार्यकर्ता भारत भूषण शर्मा ने मोहित शर्मा की संपत्ति की जाँच की माँग की। इसके बाद एक यूट्यूबर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें दावा किया गया कि चीफ सेक्रेटरी ने आईएएस अधिकारी प्रियंका सोनी को इस मामले की शिकायत की है। वीडियो वायरल होने के बाद डॉ. कृष्ण मिड्डा ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और स्पष्ट शब्दों में कहा, “अभी तक मेरे निजी सचिव मोहित शर्मा के खिलाफ कोई आधिकारिक जाँच नहीं चल रही है। सोशल मीडिया पर चल रही सारी खबरें निराधार हैं। मैं खुद मुख्यमंत्री महोदय को पत्र लिखकर अपने निजी सचिव की संपत्ति की पूरी जाँच करवाऊँगा। मुझे भी सच जानना है कि कहीं मैं अब तक अंधेरे में तो नहीं रहा। जाँच शुरू होते ही मोहित शर्मा को छुट्टी पर भेज दिया जाएगा ताकि वे जाँच को किसी भी तरह प्रभावित न कर सकें।”   डिप्टी स्पीकर ने यूट्यूबर्स को कड़ी चेतावनी भी दी,“बिना तथ्यों के वीडियो बनाना बंद करें, वरना उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होगी। अगर मेरा निजी सचिव जाँच में दोषी पाया गया तो उसे कानून के अनुसार सजा मिलेगी।” गौरतलब है कि मोहित शर्मा साल 2009 से मिड्डा परिवार के साथ हैं। पहले वे डिप्टी स्पीकर के पिता डॉ. हरिचंद मिड्डा के निजी सचिव थे। फिलहाल मामला पूरी तरह सुर्खियों में है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र कब स्वीकृत होता है और जाँच कब शुरू होती है।

ग्रामीणों का प्रदर्शन: किशनपुरा में स्कूल को ताला, व्यवस्थाओं को लेकर उठाए बड़े सवाल

चरखी दादरी  चरखी दादरी के गांव डूडीवाला किशनपुरा में वीरवार को ग्रामीणों ने सरकारी स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने स्कूल में मौजूद अध्यापकों को बाहर निकाल दिया और साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, स्कूल दोबारा नहीं खुलने दिया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में कुछ अध्यापक गुटबाजी कर माहौल खराब कर रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। वे इन शिक्षकों के ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। साथ ही करीब 5–6 महीनों से स्थायी प्रिंसिपल का पद खाली है, जिस कारण स्कूल का प्रबंधन अस्त-व्यस्त चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे इस मुद्दे को लेकर पहले ही मुख्यमंत्री को शिकायत भेज चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल पर ताला लगने से गांव के करीब 400 बच्चों की पढ़ाई पूर्ण रूप से बाधित हो गई है। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की उदासीनता का नुकसान बच्चों को उठाना पड़ रहा है। सूचना मिलने पर बीईओ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि शिकायत की जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, लेकिन ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे बच्चों के भविष्य के लिए मजबूरन यह कदम उठा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विभाग को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

ऐतिहासिक बदलाव: महाभारत-युगीन मंदिर की देखरेख प्रशासन से हटकर श्राइन बोर्ड को मिली

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले श्रीमाता भीमेश्वरी देवी मंदिर (बेरी) को अब एक सुदृढ़ संस्थागत प्रशासनिक ढांचे के तहत लाने का बड़ा निर्णय लिया है। कानून एवं विधायी विभाग की सचिव रितू गर्ग की ओर से राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद इस संदर्भ में नोटफिकेशन जारी किया है। नोटिफिकेशन के अनुसार, मंदिर और उससे जुड़ी सभी चल-अचल संपत्तियों का स्वामित्व और संचालन अब आधिकारिक रूप से बनाए गए श्राइन बोर्ड के पास होगा। यह बोर्ड मंदिर की आय, दान, धार्मिक गतिविधियों, पुजारियों की नियुक्ति, नियमों के क्रियान्वयन और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं का प्रबंधन करेगा। नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि अब पुजारियों के पारंपरिक अधिकार समाप्त होंगे। उनके लिए मुआवजे या बोर्ड में समायोजन का विकल्प रखा गया है। मंदिर की सभी दुकानें, दान पेटियां, भूमि, भवन और आभूषण श्राइन फंड में दर्ज होंगे। बोर्ड हर वर्ष बजट तैयार करेगा और पूरे मंदिर प्रबंधन का ऑडिट अनिवार्य होगा। अब तक लागू अन्य कानून इस मंदिर पर प्रभावी नहीं रहेंगे, बल्कि यह अधिनियम सर्वोपरि माना जाएगा। इसके साथ बेरी माता मंदिर हरियाणा में वह तीसरा धार्मिक स्थल बन गया है, जिसे अब सरकार श्राइन बोर्ड मॉडल पर संचालित करेगी।  भीम द्वारा स्थापना की मान्यता माता भीमेश्वरी देवी मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद पुराना है। स्थानीय मान्यता है कि इसका संबंध महाभारतकाल से है। ऐसा कहा जाता है कि पांडवों के शक्ति स्वरूप भीम ने पूजा के दौरान यहां माता की स्थापना की थी और उसी वजह से इस मंदिर का नाम भीमेश्वरी देवी पड़ा। सदियों से यहां लाखों श्रद्धालु नवरात्रों और विशेष अवसरों पर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। प्रशासनिक ढांचे के आधिकारिक रूप से लागू होने के बाद उम्मीद है कि धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में और वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री रहेंगे बोर्ड के चेयरमैन सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार शृाइन बोर्ड उसी पैटर्न पर बनेगा जिस तरह पंचकूला में माता मनसा देवी और गुरुग्राम में श्रीशीतला माता शृाइन बोर्ड पहले से कार्यरत हैं। नये बोर्ड के चेयरमैन मुख्यमंत्री होंगे। वहीं शहरी स्थानीय निकाय विभाग के मंत्री बोर्ड के वाइस-चेयरमैन व झज्जर डीसी इसके सदस्य सचिव होंगे। सरकार की ओर से बोर्ड में सरकारी व गैर-सरकारी सदस्यों की नियुक्ति भी की जाएगी। इस संरचना के बाद मंदिर के फैसले व्यक्तिगत पसंद-नापसंद के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिए जाएंगे। मंदिर की संपत्तियां और आय पर बोर्ड का हक नोटिफिकेशन में यह स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की भूमि, दुकानें और किराए, भवन, दान राशि, ज्वेलरी, सोना-चांदी और पूजा सामग्री तथा धार्मिक आयोजन से प्राप्त आय अब शृाइन फंड में शामिल होगी और इसका उपयोग केवल मंदिर, धार्मिक गतिविधियों और श्रद्धालु सुविधाओं पर किया जाएगा। पुजारियों के अधिकार समाप्त, मिलेगा मुआवजा या नौकरी सबसे बड़ा बदलाव पुजारियों के पारंपरिक अधिकारों को लेकर आया है। अधिनियम के लागू होते ही पुजारियों के विशेष अधिकार समाप्त माने जाएंगे, लेकिन उनके लिए सुरक्षा प्रावधान भी किए गए हैं। उन्हें मुआवजा देने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया जाएगा यदि कोई पुजारी नौकरी करना चाहता है तो योग्यता और चयन प्रक्रिया के बाद उसे पद दिया जा सकता है यह पहली बार है जब मंदिर व्यवस्था में पारंपरिक अधिकारों के साथ आधुनिक प्रशासनिक ढांचा समानांतर लाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने पर जोर श्राइन बोर्ड का गठन होने के बाद मंदिर परिसर में सफाई व्यवस्था, पार्किंग, धार्मिक आवास (धर्मशाला), मेडिकल सहायता, महिला सुरक्षा तथा कैशलेस दान व्यवस्था आदि का प्रबंध आसानी से किया जा सकेगा। यह भी प्रावधान है कि मंदिर फंड का उपयोग राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में भी किया जा सकता है। नोटिफिकेशन में यह भी प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति मंदिर की संपत्ति, भूमि या दस्तावेज़ अपने कब्जे में नहीं रख सकता। यदि किसी ने ऐसा किया तो उस पर जुर्माना, दंड, संपत्ति जब्ती की कार्रवाई होगी। यहां तक कि कारावास का प्रावधान भी लागू होगा। इसलिए पड़ी बोर्ड की जरूरत सूत्रों के अनुसार लंबे समय से मंदिर प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता, संपत्ति संरक्षण, आय उपयोग, अव्यवस्था और नियुक्तियों को लेकर शिकायतें और चर्चाएं होती रही थीं। सरकार का मानना है कि इस कदम के बाद मंदिर न केवल बेहतर तरीके से संचालित होगा बल्कि धार्मिक पर्यटन और राज्य की विरासत संरक्षण में भी वृद्धि होगी। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कार्यकाल में ही विधेयक पास हो गया था लेकिन इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था। मंदिरों में श्रद्धालुओं की घट रही संख्या व प्र्रबंधन सही नहीं होने की वजह से मौजूदा मैनेजमेंट व पुजारी भी शृाइन बोर्ड के गठन की मांग उठा रहे थे।

चरखी दादरी में भीषण सड़क दुर्घटना: टक्कर के बाद ट्रालों में लगी भीषण आग, दोनों की जलकर मौत

चरखी दादरी  NH-152D accident: चरखी दादरी में एनएच-152डी पर गत देर रात गांव कमोद के समीप हुए भीषण सड़क हादसे में दो ट्राला आपस में टकराने के बाद आग की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयंकर था कि एक ट्राला के चालक और परिचालक जिंदा जल गए, जबकि दूसरे ट्राला का चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हाईवे पर एक ट्राला सड़क किनारे खड़ा था, तभी पीछे से आ रहे दूसरे ट्राले ने तेज रफ्तार में उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही दोनों ट्रालों में आग भड़क उठी और देखते ही देखते वाहन धू-धू कर जलने लगे। मृतकों की पहचान खांडा खेड़ी निवासी चालक राजेश और जींद के रूपगढ़ निवासी परिचालक जयवंत के रूप में हुई है। आग की लपटों में फंसे दोनों बाहर नहीं निकल सके और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। वहीं दूसरे ट्राला का घायल चालक, भागेश्वरी निवासी सतवीर को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लंबी कतार लग गई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही दादरी और भिवानी से फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। सदर थाना प्रभारी सतवीर सिंह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे, जबकि एफएसएल टीम ने भी मौके का निरीक्षण किया। आग बुझने के बाद जले हुए शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने मृतक ट्राला चालक राजेश के बेटे की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हादसे के सही कारणों का पता लगाने की कोशिश जारी है।

रिश्तों में जलन और खौफ़: पूनम ने कैसे रंजिश को बनाया चार कत्लों का कारण?

सोनीपत दिल्ली से सटे हरियाणा के सोनीपत में एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां पूनम नाम की एक महिला ने चार सालों में चार बच्चों का बेरहमी से कत्ल कर डाला, जिनमें उसका अपना बेटा भी शामिल है। वह जलन की वजह से सुंदर बच्चियों को चुन-चुनकर मारती रही। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि जिस भतीजी विधि को पानी में डुबोकर मारने की वजह से पूनम पकड़ी गई, उसकी हत्या की एक कोशिश उसने चार साल पहले भी की थी। तब उसने 2 साल की उस बच्ची के चेहेरे पर एक बड़ी केतली से चाय उड़ेल दी। तब परिवारवालों ने इसे एक हादसा समझा था। सोमवार को पूनम ने अपने दूसरे प्रयास में विधि की जान ले ली। आरोप है कि पूनम ने 6 साल की भतीजी को एक टब में डुबा दिया। बच्ची के दम तोड़ने के बाद उसकी दादी ने बच्ची की लाश को देखा तो चीख-पुकार मच गई। एक बार फिर शुरुआत में विधि की मौत को हादसा समझा गया, लेकिन जांच में जो बातें सामने आईं उससे सभी हैरान रह गए। पता चला कि सुंदरता से जलन की वजह से पूनम ने रिश्तेदारों की तीन बेटियों को मार डाला था। उसने अपने बेटे की जान क्यों ली यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पुलिस का मानना है कि उसने अपने बेटे शुभम को 2023 में इसलिए मारा क्योंकि पहली हत्या के बाद कुछ लोगों को उस पर शक होने लगा था और वह खुद को भी पीड़ित दिखाकर ध्यान भटका सके। पूनम मूल रूप से पानीपत के सिवाह गांव की रहने वाली है और शादी के बाद सोनीपत के भावर गांव में रहती है। पूनम को बुधवार को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। आरोपी का पति नवीन और विधि के पिता संदीप चचेरे भाई हैं। पूनम की पहली शिकार 2023 में 9 साल की इश्किा थी। तीसरी मृतक 8 वर्ष की जिया थी। पुलिस का मानना है कि उसे भी इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह ‘ज्यादा सुंदर’ थी। अब तक 3 बच्चों को मार चुकी पूनम को यकीन हो चला था कि वह इसी तरह कत्ल करके अपनी सनक मिटाती रहेगी और पकड़ी नहीं जाएगी, लेकिन विधि के कत्ल के बाद उसका पर्दाफाश हो गया। सोमवार को एक शादी समारोह को लेकर चल रही हंसी-खुशी के बीच 6 साल की विधि अचानक गायब हो गई थी। एसपी भूपेंद्र सिंह ने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाली उसकी दादी ने बताया कि उनके एक परिवार में 30 नवंबर से एक दिसंबर तक शादी समारोह था। इसमें आरोपी समेत कई मेहमान आए थे। जांचकर्ताओं के मुताबिक महिला ने वारदात को 1 दिसंबर को तब अंजाम दिया जब सभी मेहमान घर से बाहर गए थे और उसने पीड़ित को सीढ़ियों से ऊपर जाते देखा। पुलिस ने कहा कि आरोपी बच्ची के पीछे-पीछे छत पर गई। उससे बातचीत करती रही। उसने इस बीच एक स्टोररूम के बाहर प्लास्टिक के एक टब में पानी भरा और विधि को उसमें डुबाकर मार डाला। इसके बाद वह दरवाजे को बाहर से बंद करके नीचे आ गई। जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता की चाची ने यह कत्ल किया है। एसपी सिंह ने बताया कि पूछताछ के दौरान पूनम ने अपना गुनाह कबूल कर लिया।  

विभाग ने बढ़ाया बच्चों के जेल में रहने का समय, 816 महिला कैदी और 47 बच्चे शामिल

चंडीगढ़  हरियाणा की जेलों में अब मां के साथ रह रहे बच्चों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल जेल विभाग ने बच्चों के साथ मां के रहने की अवधि को 2 साल बढ़ा दिया है। इसके बाद अब बच्चे 6 की बजाय 8 साल तक जेल में अपनी मां के साथ रह सकेंगे। डी.जी. जेल आलोक राय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि इस फैसले से जेल में रह रही महिला कैदियों के साथ उन बच्चों को भी राहत मिलेगी जिनका बाहर कोई नहीं है। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल, खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 में महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जेलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही हैं और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद हैं, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चेः छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्को आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेलें खोली गई हैं जहां करनाल में 30 फ्लैट । हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। जेल विभाग ऐसे बच्चों के लिए जेल परिसर में ही उनकी पढ़ाई और पौष्टिक खाने की पूरी व्यवस्था कर रहा है। प्रदेश की 17 जेलों में बच्चों के खेलने के लिए क्रैच बने हुए हैं। इन बच्चों के खेल को खान-पान एवं अच्छे स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। 816 महिला कैदी जेलों में बंद हैं केंद्रीय जेलों सहित हरियाणा की कुल 20 जेलों में से 17 जेलों में जेल विभाग के द्वारा महिला वार्ड बने हुए हैं। अभी इन जिलों में कुल 816 महिला कैदी बंद हैं, जिनमें से 162 महिलाएं सजा काट रही है और 654 महिलाओं के केस अंडर ट्रायल चल रहे हैं। इन महिला बंदियों के पास कुल 47 बच्चे बंद है, जिनकी उम्र 6 वर्ष तक की आयु के बीच है। जेल विभाग के इस फैसले से इन बच्चों को राहत पहुंची है। हफ्ते में एक दिन बाहर जाते हैं बच्चे छोटे बच्चों को सप्ताह में एक बार जेल के मुख्य गेट से बाहर जेल परिसर में बने पार्कों आदि में जेल के महिला मुलाजिम के निगरानी में घूमने के लिए भेजा जाता है। डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि सूबे की ओपन जेलों के तहत हरियाणा में करनाल और फरीदाबाद में 2 ओपन जेल खोली गई हैं, जहां करनाल में 30 फ्लैट हैं वहीं फरीदाबाद में 36 जहां पर यह कैदी अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। क्या बोले डीजी जेल हरियाणा के डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं, या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है। नए फैसले से मां और बच्चों दोनों को मिलेगी राहत : आलोक राय हरियाणा के डी.जी. जेल आलोक राय ने कहा कि इस फैसले से बच्चों और मां दोनों को राहत मिलेगी। कई बार अलग-अलग रहने से बच्चे डिप्रैशन में चले जाते हैं या उनकी मां के साथ ऐसा हो जाता है। अब दोनों साथ रहेंगे तो वह अवसाद से दूर रहेंगे। जेल विभाग ऐसे बच्चों को हर सुविधा दे रहा है।

देशविरोधी नारे और फर्जीवाड़ा! अल-फलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में हुआ बड़ा खुलासा

फरीदबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर यहां के एक पूर्व नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा खुलासा किया है। कर्मचारी ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में रोजाना 100 से लेकर 150 तक नकली मरीजों की फाइलें तैयार की जाती थी। आतंकी डॉ. मुजम्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर बने डॉ. उमर नबी के कहने पर ऐसा किया जाता था। जो कर्मचारी ऐसा नहीं करता था उसकी एबसेंट मार्क कर सैलरी काट दी जाती थी। उसने बताया कि रात के समय काम करने वाला कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी पर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। इतना ही नहीं, कई बार हंसी-मजाक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे तक लगा दिए जाते थे। सूत्रों की मानें तो डॉ. शाहीन सईद अपने दोस्त और दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से डॉ. मुजम्मिल के साथ एनआईटी मार्केट में विस्फोटक या अन्य सामान खरीदने जाती थी। सुरक्षा जांच एजेंसी अब दोनों के आने-जाने, कौन-कौन सा सामान खरीदा, मिलने-जुलने जैसी सारी जानकारी को जुटा रही है। बता दें कि राजस्थान के रहने वाले लक्ष्मण ने साल 2025 में 14 जुलाई को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था। लेकिन 25 अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। वह यहां पर नर्सिंग स्टाफ में काम करता था। मेडिकल कॉलेज में उसकी ड्यूटी अस्पताल के आईसीयू में होती थी। लक्ष्मण ने बताया कि रात के समय काम करने वाले स्टाफ से नकली फाइलें तैयार कराई जाती थी। हर कर्मचारी को 5 फाइल तैयार करने का टारगेट दिया जाता था। इन नकली फाइलों पर डॉक्टर के साइन पहले से ही होते थे। फाइल में केवल उनको मेडिकल चार्ट नोट्स बनाने होते थे। इन फाइलों में उन दवाइयों का रिकॉर्ड बनाया जाता, जो यूज ही नहीं होती थी। इन फाइलों को सुबह होते ही डॉक्टर अपने साथ ले जाते थे। फाइलों का क्या यूज होता था किसी भी स्टाफ के कर्मचारी को इसके बारे में नहीं बताया जाता था। लक्ष्मण ने बताया कि उनको लगता है कि इन फाइलों का उपयोग बाहर से गरीबों के इलाज के नाम पर फंड एकत्रित करने के लिए किया जाता था। रोजाना 100 से लेकर 150 तक फाइलों को तैयार किया जाता था। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी फाइलें बनाने से मना करता था तो किसी की सैलरी होल्ड कर दी जाती है या फिर कटौती की जाती है। लेकिन कश्मीरियों के साथ ऐसा नहीं किया जाता है। लक्ष्मण के अनुसार अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां करीब 80 फीसदी मुस्लिम और 20 फीसदी हिंदू कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें भी करीब 30 से 35 फीसदी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर कश्मीर से आते हैं। पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी लक्ष्मण ने दावा किया है कि रात के समय जो कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। वे अक्सर अपनी बातों में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए नजर आते थे। कई बार एक दूसरे के साथ वह हंसी-मजाक करते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे। हर रोज कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ चर्चा होती रहती थी। कश्मीरी स्टाफ आरोप लगाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सेना उनके भाइयों पर जुल्म करती है। सेना कश्मीरियों को स्पेशल टारगेट बनाती है। केंद्र और हरियाणा सीएम, मंत्री को भेजा मांग पत्र अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट के पेरेंट्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मानव संसाधन मंत्री , हरियाणा सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर, NMC को ईमेल के जरिए अपना मांग पत्र भेजा है। मांग पत्र में सभी को इस मामले में जल्दी से जल्दी शामिल होने की बात कही है। एक अभिभावक ने बताया कि उनके साथ 360 से अधिक अभिभावक आपस में जुड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश, यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली और एनसीआर के हैं। सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सरकार हाई लेवल कमेटी गठित करे पेरेंट्स की मांग है कि सरकार एक हाई लेवल कमेटी का गठन करे। कमेटी के अंदर स्वास्थ्य विभाग, NMC सहित दूसरे विशेषज्ञ और अभिभावकों को शामिल किया जाए। कमेटी यह सुनिश्चित करे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई, प्रैक्टिस, इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार का कोई खतरा न आए। क्योंकि अभी तक उन्हें केवल मौखिक रूप से आश्वासन दिया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का आतंकवाद में नाम आने के बाद हर कोई उनके बच्चों को शक की नजर देख रहा है। ऐसे में उनके बच्चों को आगे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनके बच्चे डर के साये में न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही रातों को सो पा रहे हैं।

शानदार प्रदर्शन पर अब सम्मान! हरियाणा सरकार ने शुरू की नई अवॉर्ड स्कीम

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार द्वारा आगामी 25 दिसम्बर को साल 2024 और 2025 में गुड गवर्नेस से जुड़े शानदार इनोवेटिव काम करने वाले कर्मचारियों को गुड गवर्नेस अवॉर्ड दिए जाएंगे, इसके लिए 13 दिसम्बर तक आवेदन किया जा सकता है। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि एडमिनिस्ट्रेटिव सैक्रेटरी, विभागाध्यक्ष और आई. ए. एस ऑफिसर को छोड़ कर सभी पात्र कर्मचारी (रैगुलर या कांट्रैक्ट वाले) अपने-अपने ऑफिस-हँड याविभागाध्यक्ष या संबंधित एडमिनिस्ट्रेटिव सैक्रेटरी के जरिए ऑनलाइन पोर्टल पर 13 दिसम्बर तक अप्लाई कर सकते हैं। इसमें प्रोजैक्ट स्कीम प्रोग्राम का चयन किया जाएगा और नॉमिनेट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्टेट फ्लैगशिप अवॉर्ड पोर्टल के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव सैक्रेटरी अवॉर्ड अपलोड करेंगे।

1.17 करोड़ की बोली लगाई… फिर पीछे हटे! VIP नंबर मामले में अनिल विज का बड़ा एक्शन

चंडीगढ़ हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि राज्य में हाल ही में एचआर 88 बी 8888 नंबर के लिए ऑनलाइन नीलामी के दौरान किसी व्यक्ति ने 1 करोड़ 17 लाख रूपए की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। लेकिन बोली लगाने के बाद उस व्यक्ति ने अपनी सुरक्षा राशि जब्त होने दी, इसलिए इस संबंध में उस व्यक्ति की संपति और आय की जांच करवाई जाएगी। देखा जाएगा कि वास्वत में उस व्यक्ति की आर्थिक क्षमता एक करोड 17 लाख रूपए की बोली लगाने की है या नहीं।  मीडिया कर्मियों से आज बातचीत करते हुए मंत्री अनिल विज ने बताया कि राज्य में फैंसी और वीआईपी वाहन नंबर नीलामी प्रणाली से आवंटित किए जाते हैं और कई लोग बड़ी-बड़ी बोलियां लगाकर इन नंबरों को खरीदने की कोशिश करते हैं। यह न केवल प्रतिष्ठा का विषय होता है, बल्कि सरकार की राजस्व वृद्धि में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एचआर 88 बी 8888 नंबर के लिए ऑनलाइन नीलामी के दौरान किसी व्यक्ति ने 1 करोड़ 17 लाख रूपए की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। लेकिन बोली लगाने के बाद उस व्यक्ति ने अपनी सुरक्षा राशि जब्त होने दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बोली लगाना सिर्फ शौक बनता जा रहा है, न कि जिम्मेदारी। व्यक्ति की आय और संपत्ति की होगी जांच, आयकर विभाग को पत्र भेजा जाएगा – विज परिवहन मंत्री ने कहा कि “मैंने परिवहन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जिस व्यक्ति ने यह बोली लगाई, उसकी संपत्ति और आय की पूरी जांच करवाई जाए। यह देखा जाए कि वास्तव में उस व्यक्ति की आर्थिक क्षमता 1 करोड़ 17 लाख रुपये की बोली लगाने की है भी या नहीं।” उन्होंने आगे बताया कि इस संबंध में आयकर विभाग को भी पत्र भेजकर विस्तृत जांच के लिए कहा जा रहा है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति गलत जानकारी या बिना आर्थिक क्षमता के बोली न लगा सके। गौरतलब है कि गत दिनों चरखी दादरी के बाढ़ड़ा उपमंडल के ‘HR88B8888’ नंबर के लिए ऑनलाइन ऑक्शन हुई थी। इस नंबर की नीलामी 1 करोड़ 17 लाख रुपये तक हुई थी और हिसार के एक व्यक्ति ने यह बोली लगाई थी और 11 हजार सुरक्षा राशि जमा कराई थी, मगर बोली के पैसे जमा करवाने के आखिरी दिन उसने पैसे जमा नहीं करवाए।