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प्रदूषण पर कड़ा वार: सोनीपत में GRAP-III के बाद बड़ी कार्रवाई, कई यूनिटों पर शिकंजा

सोनीपल  दिल्ली–एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण स्तर को देखते हुए ग्रेप-3 (GRAP-III) लागू होने के बाद सोनीपत जिला प्रशासन और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने शुक्रवार को बड़े स्तर पर संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी। जिले में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी निगरानी के लिए 19 टीमें गठित कर औचक छापेमारी की जा रही है। इस अभियान की कमान डीसी सुशील सारवान, डीसीपी नरेंद्र कादियान और जिले के चारों एसडीएम के हाथ में है। करीब 55 अधिकारियों और भारी पुलिस बल के साथ टीमें उन औद्योगिक इकाइयों की जांच में जुटी हैं जो वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार मानी जा रही हैं।    राई रेस्ट हाउस से शुरू हुई कार्रवाई सभी टीमें सुबह राई रेस्ट हाउस में इकट्ठा की गईं, जहां मौके पर ही उद्योगों की सूची, चेकिंग मानक, और कार्रवाई से जुड़े दिशा–निर्देश अधिकारियों को सौंपे गए। डीसी सुशील सारवान ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। जिलेभर में छापेमारी इसके बाद टीमें राई, कुंडली, बरौली, मुरथल सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंचीं और प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, धुएं के उत्सर्जन स्तर, कचरा निस्तारण, तथा पानी–धूल नियंत्रित करने की व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों पर सीलिंग, नोटिस, और भारी जुर्माने जैसी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि GRAP-III लागू रहने तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।

पोस्टरों पर कालिख और वीडियो वायरल: सिरसा की राजनीति में बढ़ी गर्माहट

सिरसा  सिरसा में आधी रात को एक बड़ी राजनीतिक हलचल तब मच गई जब अज्ञात युवकों ने हुडा सेक्टर में स्थित भाजपा जिला कार्यालय और रेलवे स्टेशन पर लगाए गए भाजपा नेताओं के पोस्टरों व तस्वीरों पर काला रंग लगा दिया। इस दौरान आरोपियों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। वीडियो यूथ कांग्रेस के स्टेट और नेशनल पेजों पर भी साझा किया गया है। भाजपा का आरोप “यूथ कांग्रेस की साजिश” भाजपा कार्यकर्ता कपिल सोनी ने बताया कि कार्यालय इंचार्ज विष्णु शर्मा की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है, क्योंकि वायरल वीडियो को यूथ कांग्रेस के प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया गया है। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह कृत्य जानबूझकर पार्टी की छवि खराब करने के उद्देश्य से किया गया है। कांग्रेस का जवाब,  हमारे कार्यकर्ताओं को बदनाम करने की कोशिश दूसरी ओर, कांग्रेस जिला प्रधान संतोष बेनीवाल ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह “पूर्व नियोजित साजिश” है, जिसका मकसद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के कांग्रेस के नाम पर उंगली उठाना गलत है। संतोष बेनीवाल ने यह भी कहा कि “अगर किसी कांग्रेस कार्यकर्ता ने ऐसा किया है तो उसके खिलाफ जांच कराने को तैयार हैं।” आज कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन, वीडियो से गरमाई राजनीति गौरतलब है कि शुक्रवार को कांग्रेस द्वारा सिरसा में लघु सचिवालय पर वोट चोरी के मुद्दे को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाना है। इसका नेतृत्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और सिरसा सांसद कुमारी सैलजा करेंगी। प्रदर्शन में सिरसा विधायक गोकुल सेतिया, ऐलनाबाद विधायक भरत सिंह बेनीवाल, और कालांवली विधायक शीशपाल केहरवाला सहित कई नेता शामिल होंगे। इससे पहले ही भाजपा कार्यालय व पोस्टरों पर कालिख लगाने वाला वीडियो वायरल होने से राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है और दोनों पार्टियों के बीच आरोप–प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

अब हरियाणा में TB की जांच होगी और आसान, सरकार ने की 6 करोड़ की अत्याधुनिक मशीनों की खरीद

चंडीगढ़ गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में टीबी टेस्ट के परिणाम के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हरियाणा सरकार ने पहली बार छह करोड़ रुपये की लागत से 40 टू नेट मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी है। पहले केंद्र सरकार की ओर से यह मशीनें उपलब्ध करवाई जाती थी। इन मशीनों को सीएचसी और पीएचसी में उपलब्ध करवाया जाएगा। ये मशीनें टीबी के संदिग्ध मरीजों की गुणवत्तापूर्ण और त्वरित जांच करने में अहम म भूमिका निभाती हैं। मात्र एक से डेढ़ घंटे में पता चल सकेगा कि मरीज को टीबी है या नहीं। स्टेट टीबी अधिकारी राजेश राजू ने बताया कि टीबी के गंभीर रोगियों का पता लगाने में टू नेट मशीन बेहद उपयोगी हैं। इसके जरिए कम समय में जांच के बेहद विश्वसनीय नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मशीन से टीबी के गंभीर मामलों का पता लगाना बेहद आसान होता है। इसका मकसद हरियाणा के ग्रामीण और दूरदराज 2018 के क्षेत्रों तक जांच सुविधा का विस्तार करना है। मशीनों के आने से जो इलाके हमारी जद से बच रहे थे अब उन पर फोकस किया जा सकेगा। समय पर रोग की पहचान होने से टीबी के संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। टू नेट मशीन में एमडीआर रोगियों यानी मल्टीपल ड्रग रेजिस्टेंस मरीजों की भी जांच हो सकेगी जनवरी से अक्तूबर तक हरियाणा में 79,000 नए मरीजों की पहचान की गई है। इस समयावधि में करीब नौ लाख टेस्ट किए गए हैं। इस दौरान 78,000 से अधिक मरीजों को सफलतापूर्वक टीबी मुक्त किया भी जा चुका है। टीबी अधिकारी का कहना है कि ज्यादा टेस्ट होने पर मरीजों की संख्या भी बढ़ना तय है। उन्होंने बताया कि ज्यादा टेस्ट करने का मकसद टीबी के प्रसार को रोकना है। एक अनुमान के मुताबिक एक टीबी मरीज साल में दस से 15 लोगों को संक्रमित करता है। ऐसे में यदि समव पर उसकी जांच कर इलाज शुरू कर दिया जाए तो टीबी को रोका जा सकता है। इसलिए हरियाणा में ज्यादा टेस्ट किए जा रहे हैं।

पेंशनधारकों की मुश्किलें बढ़ीं: 36 हजार लाभार्थियों को दो महीने से नहीं मिले पैसे, सरकार तैयारी में

चंडीगढ़  हरियाणा प्रदेश में 36 हजार से ज्यादा अपात्रों की पेंशन रोकी है, सरकार ने पीपीपी में मानक से अधिक मिली आय निर्धारित सीमा से अधिक आय और दो-दो योजनाओं का लाभ ले रहे 36,250 लोगों की सरकार ने पेंशन रोक दी है। इन लोगों को सितंबर और अक्तूबर माह की पेंशन नहीं मिली है। अब इन लोगों से 12 फीसदी ब्याज के साथ पेंशन की धनराशि वसूली जाएगी। समाज कल्याण विभाग लगातार पेंशन लाभार्थियों के दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन कर रहा है। परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में आय और सरकारी लाभ का डेटा अपडेट होने पर पता चला कि प्रदेश में 36 हजार से अधिक लोगों की आय पेंशन पात्रता सीमा से अधिक पाई गई है। इसके बावजूद ये लोग वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग या अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभले रहे हैं। जिन लाभार्थियों ने गलत आय दिखाकर पेंशन हासिल की है। उनसे पहले आय संबंधी दस्तावेज मांगे जाएंगे। अगर कोई लाभार्थी यह साबित करने में असमर्थ रहता है कि उसकी पेंशन पात्रता सही थी तो उससे पूर्ण राशि ब्याज सहित वसूली जाएगी। 

पानी के दुरुपयोग पर बड़ी सख्ती: नया कानून आएगा, उल्लंघन पर होगी कड़ी सज़ा

चंडीगढ़ सूबे में पानी के दुरुपयोग और बर्बादी करने वालों पर आने वाले वक्त में शिकंजा कसा जाएगा।  हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विशेष बिल लाने की तैयारी है, जिसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। विभाग के मंत्री ने साफ कर दिया है कि पानी का दुरुपयोग, बर्बादी व कमर्शियल इस्तेमाल चोरी छिपे करने वालों विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि विधेयक में भारी जुर्माने के साथ साथ सजा तक का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के इस तरह के रवैये के कारण बाकी लोगों को दिक्कत उठानी होती है। मंत्री ने कहा है कि शहरी क्षेत्र में पानी की दिक्कत नहीं है, बल्कि कुछ ग्रामीण इलाकों से हमें इस तरह की शिकायत मिली है, लेकिन उसके तकनीकी कारण भी हैं, क्योंकि इस बार भारी बारिश, जलभराव के कारण कईं तरह की चुनौतियां आन खड़ी हुई हैं। उसके बावजूद भी अधिकारियों को साफ साफ निर्देश हैं कि नियमित कार्यों के लिए ग्रामीण एरिया में भी दिक्कत नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में पेयजल बर्बादी रोकने को लेकर जहां सूबे की नायब सैनी सरकार दिसंबर में होने वाले शीतकालीन सत्र में नया बिल लेकर आएगी। जिसमें कड़ी सजा, मोटे जुरमाने जैसे प्रावधान रखे जा रहे हैं। इसके अलावा पानी के इस्तेमाल को लेकर मीटर लगाए जाने के साथ ही बिलों का बकाया समय से जमा हो इसके भी ठोस प्रबंधन किए जा रहे हैं। मंत्री ने साफ कर दिया है कि पेयजल की बर्बादी करने और समय से बिल नहीं जमा करने वालों पर  शिकंजा कसा जाएगा। इस क्रम में लीगल एक्सपर्ट की सलाह लेकर बिजली चोरी की तर्ज पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने विधेयक का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल संरक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए कानून बनाने से आला अफसरों को उम्मीद है कि लोगों की पानी  बर्बाद करने की आदतों पर अंकुश लगेगा। अवैध कट पर भी कार्रवाई  पेयजल लाइन में अवैध कटों पर भी कार्रवाई का प्रावधान होगा। उन्होंने कहा कि पानी के बिलों की शहरों में 60 से 65 फीसदी रिकवरी है, लेकिन गांवों में यह 5 से 7 फीसदी ही है। ऐसे में विभाग पेयजल सप्लाई के मीटर लगाए जाने के  विकल्प पर भी काम कर रहा है। गंगवा ने कहा कि महाग्राम योजना में 10 हजार से अधिक आबादी वाले 148 गांव चिह्नित किए हैं। 17 में पेयजल, सीवरेज और एसटीपी की व्यवस्था पूरी की जा चुकी है जबकि 30 में कार्य प्रगति पर है। दो साल में इन सभी 148 गांवों में शहरों की  तर्ज पर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यहां पर बता दें कि गुरुग्राम नगर निगम ने नई दरें तय कर अधिसूचना भी पूर्व में जारी कर दी गई है।   बाकी नगर निगमों में भी तैयारी हो रही है। अब घरेलू उपभोक्ताओं को पहले से दोगुना भुगतान करना होगा। एक से 20 किलोलीटर पानी की खपत पर दर 3.19 से बढ़ाकर 6.38 रुपये प्रति किलोलीटर कर दी गई है। 20 से 40 किलो लीटर तक की खपत पर अब 10.21 रुपये प्रति किलोलीटर देना होगा, जो पहले की तुलना में लगभग 60% की बढ़ोतरी है। 40 किलोलीटर से अधिक पानी उपयोग करने वालों को 12.76 प्रति किलोलीटर के हिसाब से भुगतान करना होगा। सरकार ने नगर निगमों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए नई पेयजल और सीवरेज दरें लागू करने का निर्णय लिया है। यहां पर यह  भी उल्लेखनीय है कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत, पानीपत कई जिलों में एक नवंबर से बिलों में बढ़ोतरी हो गई है। बताया जा रहा है कि खर्चों की भरपाई और नई पेयजल और सीवरेज लाइन बिछाने के क्रम में यह कदम उठाया जा रहा है।  नई पेयजल तथा सीवरेज लाइन बिछाने में खर्च की गई रकम की भरपाई के लिए नया रास्ता निकाला है। गुरुग्राम, फरीदाबाद तथा सोनीपत और पानीपत सहित कई जिलों में नवंबर से पानी के बिलों में डबल बढ़ोतरी होने जा रही है।  

आतंकी खतरे पर सख्त हरियाणा सरकार, 150 अधिकारियों के साथ एंटी-टेररिस्ट सेल की होगी स्थापना

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को नए ढांचे और उच्च स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। फरीदाबाद की अल फला यूनिवर्सिटी में संदिग्ध गतिविधि और सामग्री मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे प्रदेश में सतर्कता बढ़ाई है। इसी क्रम में डीजीपी ओपी सिंह ने एंटी टेररिस्ट स्क्वाड अर्थात एटीएस के गठन का विस्तृत प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। इसे हरियाणा की आतंकवाद-रोधी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव में एटीएस की आवश्यकता, यूनिट की संरचना, मानव संसाधन और संचालन प्रणाली का पूरा खाका शामिल है। सरकार अब यह तय करेगी कि एटीएस का ढांचा उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ऑपरेशन आधारित हो या फिर एनसीआर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा का अलग मॉडल तैयार किया जाए। अधिकारियों का मानना है कि दिल्ली की सीमा, औद्योगिक क्षेत्रों और संवेदनशील गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए हरियाणा-विशेष मॉडल अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इस विषय पर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय जल्द होने की संभावना है।   अल फला यूनिवर्सिटी मामले के बाद हरियाणा पुलिस ने एनसीआर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। प्रदेश के 150 थानों को विशेष निगरानी चक्र में शामिल किया गया है। प्रत्येक थाने से एक जवान को प्रतिदिन फील्ड रेकी, संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण और इंटेलिजेंस जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह रिपोर्ट सीधे वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही है।   प्रस्ताव के अनुसार एटीएस को केवल घटना के बाद कार्रवाई करने वाली यूनिट के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व-निवारण आधारित एजेंसी के रूप में विकसित किया जाएगा। यूनिट का मुख्य फोकस प्रीवेंटिव इंटेलिजेंस, संदिग्ध गतिविधियों की शुरुआती पहचान और समय रहते कार्रवाई पर रहेगा। मौजूदा सुरक्षा ढांचा अधिकतर पोस्ट इंसीडेंट रिस्पॉन्स पर आधारित है, जिसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उन्नत करने की जरूरत मानी गई है। एटीएस क्यों जरूरी पिछले महीनों में एनसीआर क्षेत्र में संवेदनशीलता बढ़ी है। सीमावर्ती दबाव, साइबर संदिग्ध गतिविधियां और हालिया घटनाओं ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ढांचे को प्रीवेंटिव मोड में बदलना आवश्यक है। अल फला यूनिवर्सिटी मामले ने यह जरूरत और अधिक स्पष्ट कर दी है। डीजीप ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस गठन का प्रस्ताव भेज दिया गया है और अंतिम निर्णय सरकार पर निर्भर करेगा। उनका कहना है कि एटीएस बनने से हरियाणा नई रणनीति और अधिक गति के साथ आतंकवाद-रोधी प्रयासों को लागू कर सकेगा ।

इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा हाई-टेक प्लानिंग से: हरियाणा सरकार ने लॉन्च किया ‘जिला मॉडल 2.0’

चंडीगढ़  प्रदेश की नायब सरकार ने जिला स्तर पर विकास को लेकर नया अध्याय खोल दिया है। अब तक विकास योजनाओं पर खर्च होने वाला बजट कई दिशाओं में बिखर जाता था, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 से पूरी व्यवस्था बदलने वाली है। राज्य ने एक ‘जिला मॉडल 2.0’ तैयार किया है, जिसमें पहली बार अलग-अलग सेक्टरों के लिए तय प्रतिशत, स्पष्ट सीमाएं और कड़ी निगरानी की व्यवस्था लागू की जा रही है। यह बदलाव केवल पॉलिसी नहीं, बल्कि गांव और कस्बों की वास्तविक तस्वीर बदलने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने नई पॉलिसी में बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा बुनियादी ढांचे पर खर्च करने का निर्णय लिया है। अब जिलों की योजना राशि का 60 प्रतिशत सिर्फ उन कार्यों में लगेगा जिनका जनता रोज उपयोग करती है। इनमें गलियां, नालियां, पेयजल लाइनों का विकास, सिंचाई ढांचा, सड़कें, पुल, स्वास्थ्य केंद्र, ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट और पशुधन व बागवानी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि जब तक बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, बाकी विकास अधूरा ही रहेगा। लंबे समय से शिकायत थी कि जिलों में विकास कार्यों का चयन बिना ठोस ढांचे के होता रहा। कई बार पंचायतें अपनी पसंद से काम चुन लेती थीं, तो कई परियोजनाएं डीडीएमसी स्तर पर मंजूर हो जाती थीं, भले वे योजना के मूल उद्देश्य से बाहर हों। इसी वजह से कई जरूरी कार्य अधर में लटके और बजट का बिखराव बढ़ता गया। नई व्यवस्था में यह स्थिति बदल दी गई है। पहली बार सरकार ने स्पष्ट सूची जारी की है कि कौन से कार्य स्वीकार्य हैं और कौन से नहीं। अब किसी भी स्तर पर मनमानी मंजूरियों का रास्ता बंद होगा। सिर्फ जरूरत के हिसाब से मिलेगी मंजूरी सरकार के अनुसार, अब जिला योजनाओं का फोकस जरूरत पर रहेगा, न कि दबाव पर। जनप्रतिनिधियों के दबाव में भी काम नहीं होंगे, बल्कि जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। फंड का आवंटन इस तरह तय किया गया है कि हर जिला अपनी प्राथमिकता के अनुसार योजना चुने। पिछड़े इलाकों को पहले लाभ मिले। तात्कालिक और महत्वपूर्ण कार्यों को तुरंत स्वीकृति मिले, जबकि कम जरूरी योजनाएं बाद में आएं। सरकार का कहना है कि एक समान फार्मूला सभी जिलों पर लागू नहीं हो सकता, इसलिए हर जिले की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार सेक्टर-वार सीमा तय की गई है। शिक्षा, महिला और बाल विकास को तय हिस्सा नई योजना में तीन ऐसे क्षेत्र शामिल किए गए हैं जिन्हें पहले अपेक्षाकृत कम फंड मिलता था। इनमें सामुदायिक भवन, स्कूल–कॉलेज और आंगनवाड़ी व बाल पोषण से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। नए नियम के अनुसार, इन्हें अब 10-10 प्रतिशत फंड तय रूप से मिलेगा। इससे उन इलाकों को राहत मिलेगी जो लंबे समय से शिक्षा और सामुदायिक सुविधाओं की कमी झेल रहे थे। जिला योजना में निजी एजेंसियों की एंट्री बंद नीति का यह निर्णय सबसे प्रभावशाली माना जा रहा है। अब जिला योजना के तहत किसी भी प्रोजेक्ट में निजी एजेंसियां सीधे शामिल नहीं होंगी। सभी कार्य डीडीएमसी की निगरानी में सरकारी विभागों के माध्यम से ही होंगे। डीडीएमसी में मंत्री अध्यक्ष, उपायुक्त उपाध्यक्ष होते हैं, जबकि सांसद, विधायक, महापौर और जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। सरकार का मानना है कि इससे जवाबदेही बढ़ेगी और निजी हितों की संभावनाएं खत्म होंगी। फाइल से फील्ड तक ट्रैकिंग मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अनुसार, निगरानी की कमजोर कड़ी अब समाप्त की जा रही है। नया ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि हर प्रोजेक्ट की शुरुआत, स्वीकृति, लागत और प्रगति ऑनलाइन ट्रैक होगी। डीडीएमसी को नियमित रिपोर्ट देनी होगी। गलत मंजूरियों या लापरवाही पर जिम्मेदारी तय होगी। सरकार इसे ‘स्मार्ट निगरानी तंत्र’ बता रही है। जिला दर जिला बदलेगी तस्वीर पहली बार प्राथमिकता आधारित विकास योजनाओं को लागू किया जा रहा है। अब यह नहीं देखा जाएगा कि कौन किसकी परियोजना आगे बढ़ा रहा है, बल्कि यह देखा जाएगा कि जनता के लिए कौन सा काम जरूरी है। फंड का बिखराव रुकेगा और प्रभाव बढ़ेगा। बजट तय ढांचे में चलेगा, जिससे अधूरे काम रुकेंगे नहीं। गांव और कस्बों की बुनियाद मजबूत होगी और सड़क, पानी, नालियों, पुलों तथा स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहले से तेज़ी से सुधरेंगी। अब विकास का केंद्र वे इलाके होंगे जिन्हें लंबे समय से नज़रअंदाज किया जाता रहा।

फसल अवशेष जलाने के बढ़ते मामले: प्रशासन ने 17 किसानों को किया गिरफ्तार

जींद जिले में एक ही दिन में सात जगह धान के अवशेष जलाने के मामले सामने आए हैं। इस पर जिला पुलिस ने सात किसानों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की हैं। जिले में अब तक धान के अवशेष जलाने के आरोप में करीब 70 किसानों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 16 नवंबर को दर्ज हुईं एफआईआर में आरोपी 17 किसानों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए किसानों में ललित खेड़ा से सुमेर, सिंधवीखेड़ा से उमेद सिंह, निडानी से पवन, रधाना से रमेश, दालमवाला से धर्मबीर, बराह कलां से राहुल, निडाना से महेंद्र, पौली से श्रीभगवान, मालवी से धर्मबीर और सुरेंद्र, खरैंटी से सुनील, जुलाना से नसीब सिंह, सिंघवाल से प्रवेश, फुलियां कलां से रामबीर, खरड़वाल से सुरेश, मुआना से सुखा और बड़ौदा से नरेंद्र शामिल हैं।   अब तक जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर अब तक पराली जलाने पर जींद में सबसे ज्यादा 167 किसानों पर एफआईआर हुई है। इसके अलावा रोहतक में 36, सोनीपत में 10, कैथल में 11, कुरुक्षेत्र और करनाल में 3-3. झज्जर और अंबाला में एक-एक किसान पर एफआईआर दर्ज हुई है। 

हुड्डा बोले— रिपोर्ट ने खोली सरकार की पोल, न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल

चंडीगढ़  हरियाणा में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि इंडिया जस्टिस रिपोर्ट ने मौजूदा भाजपा सरकार की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा पुलिस की रैंकिंग पिछले पांच साल में 8वें स्थान से गिरकर 14वें स्थान पर पहुंच गई है। हुड्डा के अनुसार 18 बड़े राज्यों में हरियाणा की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। तुलना में बिहार चार पायदान ऊपर है और पड़ोसी पंजाब 7वें स्थान पर है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि सामाजिक न्याय और समान अवसर देने में सरकार पूरी तरह असफल रही है। पुलिस में एससी अधिकारियों की नियुक्ति के मामले में हरियाणा 18 में से 17वें स्थान पर है। एससी सिपाही और ओबीसी कांस्टेबल भर्ती में भी राज्य पिछड़ता दिख रहा है। हुड्डा ने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि आरक्षित वर्गों की नियुक्तियां लगभग ठप पड़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में 80 से अधिक गैंग सक्रिय हैं, जो हत्या, लूट, फिरौती और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस विभाग की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। कांस्टेबल स्तर के 38.9 प्रतिशत पद खाली हैं और महिला अधिकारियों के 17.8 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। प्रति व्यक्ति पुलिस खर्च हरियाणा में मात्र 1,908 रुपये है, जबकि पंजाब में यह 2,604 रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में एक थाने पर औसतन 1,09,325 की आबादी का भार है, जबकि केरल में यह संख्या केवल 23,992 है। हुड्डा ने कहा कि हाल ही में एडीजीपी रैंक के एक अधिकारी और एक एएसआई द्वारा की गई आत्महत्या पुलिस विभाग के भीतर बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को उजागर करती है। कांग्रेस ने इन घटनाओं की सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है, लेकिन उनका आरोप है कि सरकार मामले को लगातार टाल रही है

हरियाणा की हवा में जहर: इस जिसे का AQI पहुंचा 500 पार, हेल्थ एक्सपर्ट ने दे डाली चेतावनी

फरीदाबाद  हरियाणा में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है। फरीदाबाद का AQI 508 और गुरुग्राम का 498 खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सोनीपत, रोहतक, कैथल व कुरुक्षेत्र की हवा भी खराब श्रेणी में दर्ज हुई।  हवा में धुंध ऐसी मिल गई है कि आसमान तक धुंधला पड़ गया है. आज सुबह अलग-अलग शहरों के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और साफ कर दिया। कई शहरों में हवा बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है।   सबसे बुरा हाल फरीदाबाद का है जहां AQI 508 दर्ज हुआ। यह स्तर खतरनाक श्रेणी में आता है। इतनी ज़हरीली हवा में ज्यादा देर रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. सांस की समस्या आंखों में जलन, सिरदर्द और कमजोरी जैसे लक्षण आम हो जाते हैं। फरीदाबाद में रहने वालों के लिए मास्क पहनना और बाहर कम निकलना ही समझदारी है। गुरुग्राम भी फरीदाबाद से बहुत पीछे नहीं है। यहां AQI 498 दर्ज किया गया जो खतरनाक श्रेणी में ही आता है।बड़े-बड़े ऑफिस, ट्रैफिक की भीड़ और निर्माण कार्य इन सबने हवा को और खराब कर दिया है. सुबह-शाम सड़कों पर चलना मुश्किल होता जा रहा है। सोनीपत में AQI 220 रहा जो गंभीर श्रेणी में आता है। भले फरीदाबाद और गुरुग्राम जितना खराब नहीं लेकिन सेहत पर इसका भी साफ असर पडरहा है। अस्थमा और दिल की बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्तर काफी खतरनाक है।