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सीएम सैनी की मौजूदगी में डॉ. अर्चना गुप्ता ने संभाला हरियाणा भाजपा अध्यक्ष का पदभार

पंचकूला. भारतीय जनता पार्टी हरियाणा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता आज पंचकूला स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय पंचकमल पहुंचीं, जहां उन्होंने भव्य समारोह के बीच अपने पद का औपचारिक कार्यभार ग्रहण किया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से भाजपा कार्यकर्ता, पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता बड़ी संख्या में पहुंचे। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। वहीं भाजपा हरियाणा के प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, प्रदेश सह प्रभारी सुरेन्द्र नागर, प्रदेश संगठन महामंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा, केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी भी समारोह में मौजूद रहे। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा और रेखा शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। भाजपा हरियाणा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली भी मंच पर उपस्थित रहे। भाजपा नेतृत्व के अनुसार, डॉ. अर्चना गुप्ता के नेतृत्व में संगठन की नई पारी की शुरुआत हो रही है, जिसे आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि उनके कार्यभार ग्रहण करने के साथ संगठन को नई दिशा और गति मिलेगी। पंचकमल परिसर में सुबह से ही कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने को मिला और पूरे कार्यक्रम को भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।

सुबह-सुबह गरजे कई बुलडोजर, NCR की 10 हजार घरों वाली कॉलोनी पर बड़ा एक्शन

फरीदाबाद फरीदाबाद की सघन बस्ती नेहरू कॉलोनी में बड़ा बुलडोजर ऐक्शन बुधवार सुबह शुरू हो गया। नगर निगम ने दल-बल के साथ अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। 6 जेसीबी और एक बड़ी मशीन की मदद से मकानों को हटाया जा रहा है। उधर, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग उठाते हुए कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों की ओर से अभी यह जानकारी नहीं दी गई है कि कुल कितने मकानों को तोड़ा जाएगा। चारों ओर से रास्ते बंद, लोगों की आवाजाही प्रभावित बुधवार सुबह करीब सात बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने नेहरू कॉलोनी की ओर जाने वाले प्रमुख रास्तों को बंद कर दिया। मेट्रो रोड, सैनिक कॉलोनी, बिजली दफ्तर मार्ग, मुल्ला होटल क्षेत्र और तारण नंबर की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। रास्ते बंद होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ दफ्तर जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। छह जेसीबी और बड़ी मशीन से हटाए जा रहे निर्माण नगर निगम की टीम ने भारी मशीनरी के साथ अभियान चलाया। मौके पर छह जेसीबी और एक बड़ी तोड़फोड़ मशीन लगाई गई है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी भूमि पर बने अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। कार्रवाई के दौरान निगम अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी रही। किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। वर्षों से बसी कॉलोनी, हजारों परिवारों पर असर नेहरू कॉलोनी पुनर्वास विभाग की भूमि पर विकसित हुई बस्ती मानी जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां करीब दस हजार मकान बने हुए हैं और लगभग पांच लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र से जुड़े हैं। कॉलोनी में वर्षों से परिवार रह रहे हैं। पिछले वर्ष पुनर्वास विभाग की ओर से निवासियों को नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि नोटिस के बाद आगे कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई थी। एक वर्ष बाद अब नगर निगम ने दोबारा अभियान शुरू किया है, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और निगम की दलील नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। अदालत ने सड़कों, सार्वजनिक भूमि और ग्रीन बेल्ट पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। निगम का यह भी कहना है कि क्षेत्र में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए भूमि को खाली कराना आवश्यक है। इसी आधार पर अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार की जा रही है। पुनर्वास की मांग पर उठे सवाल प्रभावित लोगों का कहना है कि इससे पहले इलाके में बने धार्मिक स्थलों को हटाने की कार्रवाई हो चुकी है और संबंधित भूमि को भी खाली कराया जा चुका है। उनका सवाल है कि अब आवासीय मकानों को तोड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। लोगों का कहना है कि वे वैकल्पिक व्यवस्था मिलने पर मकान खाली करने को तैयार हैं। मंगलवार को प्रभावित परिवारों का प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से भी मिला था और पुनर्वास की मांग रखी थी। निवासियों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की भावना के अनुरूप विस्थापित परिवारों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

अब मोबाइल ऐप से खरीद सकेंगे गाय-भैंस, हर पशु की बनेगी डिजिटल प्रोफाइल

यमुना नगर. अब पशुपालकों को अच्छी नस्ल की गाय, भैंस या बकरी खरीदने के लिए पशु मेलों और डेयरियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पशुपालन विभाग मुंह-खुर और गलघोटू रोग के टीकाकरण अभियान के साथ प्रदेश के करीब 70 लाख पशुओं का डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर रहा है। भारत पशुधन एप पर पशुओं की नस्ल, उम्र, स्वास्थ्य, टीकाकरण और दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारी उपलब्ध होगी। इससे पशुपालक घर बैठे अपनी जरूरत के अनुसार पशु तलाश सकेंगे और खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी। पशु पालन विभाग ने इस बार टीकाकरण अभियान को डिजिटल प्लेटफार्म से जोड़ा है। प्रदेशभर में 550 से अधिक पशु चिकित्सक और 2500 पशुधन विकास सहायक (वीएलडीए) अभियान में लगे हुए हैं। टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर पशुओं को टीके लगाने के साथ उनका ऑनलाइन रिकॉर्ड भी तैयार कर रही हैं। विभाग का उद्देश्य पशुधन का प्रमाणिक और अद्यतन डेटाबेस तैयार करना है। खरीदार को अब पहले ही मिलेगी पूरी जानकारी डेटाबेस तैयार होने के बाद पशुपालक अपनी जरूरत के अनुसार पशुओं की जानकारी आनलाइन देख सकेंगे। यदि कोई अधिक दूध देने वाली मुर्राह भैंस या किसी विशेष नस्ल की गाय की तलाश कर रहा है तो उसे संबंधित जानकारी आसानी से मिल जाएगी। इससे पशु खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और क्षमता का आकलन किया जा सकेगा। डेयरी व्यवसायी भूपेंद्र कुमार और कुलदीप सिंह का कहना है कि यह पहल पशुपालकों के लिए काफी लाभकारी साबित होगी। इससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। ओटीपी सत्यापन के बाद होगा पंजीकरण प्रत्येक पशु का आनलाइन पंजीकरण किया जा रहा है। इसके लिए पशुपालक के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही पशु का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड होता है। विभाग का कहना है कि इससे डेटा की शुद्धता बनी रहेगी और भविष्य में योजनाओं का लाभ पात्र पशुपालकों तक पहुंचाना आसान होगा। सुरक्षित प्रक्रिया है ओटीपी सत्यापन पशुपालन विभाग के उपमंडल अधिकारी डॉ. सतबीर सिंह ने बताया कि टीकाकरण के साथ पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। ओटीपी सत्यापन पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है। पशुपालक चाहें तो टीम के पहचान पत्र की जांच कर सकते हैं। ऐसे पता चलेगा दूध उत्पादन के बारे में भारत पशुधन एप पर पशुपालक का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा। साथ ही पशु का फोटो, नस्ल, रंग, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति व दूध उत्पादन क्षमता जैसी जानकारियां भी अपलोड होंगी। टीकाकरण का रिकॉर्ड भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। पशु की जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी।

महापौर परिषद के सम्मेलन का ऋषिकेश में आगाज, अध्यक्षता करेंगी करनाल की मेयर रेणु बाला

करनाल. देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा ऋषिकेश में तीन जून से अखिल भारतीय महापौर परिषद के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शंखनाद होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए ऋषिकेश नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने सभी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। ऋषिकेश के नटराज होटल में आयोजित होने वाले इस वैचारिक महाकुंभ की अध्यक्षता अखिल भारतीय महापौर परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं करनाल (हरियाणा) की महापौर श्रीमती रेणु बाला गुप्ता करेंगी। सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा। तैयारियों में झलक रहा उत्साह मंगलवार को अखिल भारतीय महापौर परिषद की अध्यक्ष रेणु बाला गुप्ता ने तैयारियों का जायजा लेते हुए कहा कि यह सम्मेलन देश के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि मैं हरियाणा की उस वीर धरा और दानवीर कर्ण की नगरी करनाल से देवभूमि की इस पवित्र भूमि पर एक विजन लेकर आई हूँ। जिस तरह मां गंगा सबको जीवन देती हैं, उसी तरह हमारे समस्त नगर निगमों को भी जन-सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। महापौर ने बताया कि सम्मेलन के लिए देशभर के लगभग 60 शहरों के महापौर ऋषिकेश पहुंच रहे हैं। करनाल की तर्ज पर अन्य शहरों में भी 'स्मार्ट सिटी' और 'स्वच्छता' के बेहतरीन मॉडल कैसे लागू हों जैसे बहुआयामी विषयों पर मेयर रेणु बाला गुप्ता विशेष रूप से अपने अनुभव साझा करेंगी। लोक-संस्कृति का दिखेगा रंग सम्मेलन के लिए ऋषिकेश नगर निगम द्वारा आयोजन स्थल और प्रमुख चौराहों को विशेष रूप से सजाया गया है। दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में मुख्य रूप से तीन सत्र आयोजित होंगे, जिनमें स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और नगर निकायों के सामने आने वाली वित्तीय चुनौतियों पर देश के शीर्ष प्रतिनिधि मंथन करेंगे। आयोजन से जुड़े विशेष आकर्षण के रूप में सभी अतिथि महापौर त्रिवेणी घाट पर होने वाली भव्य गंगा आरती में सम्मिलित होंगे। इसके साथ ही उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और पारंपरिक कार्यक्रमों के माध्यम से मेहमानों का स्वागत किया जाएगा। सम्मेलन के समापन सत्र में सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा की उपस्थिति विशेष रहेगी।

आयुष्मान योजना पर संकट के बादल, कुरुक्षेत्र के निजी अस्पतालों ने इलाज रोकने का किया ऐलान

कुरुक्षेत्र. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने चार की रात्रि या पांच जून की सुबह को आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का उपचार बंद करने का ऐलान एक बार फिर से किया है। आइएमए के पूर्व प्रधान ड. सुरेंद्र मेहता के मेहता नर्सिंग होम पर आइएमए की बैठक हुई। बैठक के बाद चिकित्सकों ने बताया कि आठ माह से आयुष्मान योजना में इलाज देने वाले अस्पतालों का बकाया नहीं दिया गया है। चिकित्सकों ने बताया कि जिले के निजी अस्पतालों को 45 करोड़ रुपये बकाया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेंद्र मेहता ने कहा कि फरवरी 2025 में सरकार के साथ आइएमए का एमओयू हुआ था, जिसमें 15 दिन के अंदर-अंदर अायुष्मान योजना में इलाज देने वाले मरीजों की पेमेंट जारी करने का आश्वासन दिया गया था। मगर ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि इस योजना में वर्ष 2024 के बाद जब चिरायु कार्ड बने उसके बाद समस्या शुरू हुई, जब एक बड़ी संख्या में लोगों के कार्ड बना दिए गए। सरकार ने फरवरी में आश्वासन दिया था कि अप्रैल तक पेमेंट आ जाएगी मगर ऐसा नहीं हुआ। अब जनवरी 2026 से निजी अस्पताल संचालकों की पेमेंट बकाया है। आइएमए भी चाहती है कि सरकार के साथ चलें। मगर इसके लिए विशेष तौर पर चिकित्सक लगाएं ताकि बकाया दिया जा सके। चार की रात को या पांच की सुबह से मरीज लेने बंद करने पड़ेंगे। इस दौरान अग्रवाल नर्सिंग होम से डॉ. अमन अग्रवाल, नंन लाल अस्पताल से डा. अंशुल ग्रोवर, श्रीबालाजी आरोग्यम अस्पताल से डा. अनुराग कौशल, मेहता नर्सिंग होम से डा. सुरेंद्र मेहता, डॉ. प्रियंका गुप्ता मौजूद रहे।

अमेरिका को बना रहे थे निशाना! पंचकूला के फेक कॉल सेंटर से 21 आरोपी दबोचे

पंचकूला. पंचकूला साइबर थाना पुलिस ने सेक्टर-2 मार्केट स्थित एक कार्यालय में छापेमारी कर अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान 21 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गुप्त सूचना मिली थी कि सेक्टर-2 मार्केट में स्थित एक कार्यालय से विदेशी नागरिकों, विशेषकर अमेरिका के लोगों को निशाना बनाकर साइबर ठगी की जा रही है। सूचना के आधार पर सोमवार देर रात साइबर थाना टीम ने छापा मारा। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने नवदीप, अक्षय टिक्कू, रजा और अंकुर कपूर को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया। मौके से 19 कंप्यूटर, 3 लैपटॉप, 11.30 लाख रुपये नकद, 3 वॉकी-टॉकी, 16 हेडसेट, 2 वाई-फाई राउटर, एक नोट गिनने की मशीन, 3 पीओएस मशीनें और सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को अमेजन कस्टमर केयर अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान वे लोगों को विभिन्न बहानों में उलझाकर उनके क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करते थे और बाद में खातों से रकम निकाल लेते थे। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि कॉल सेंटर का संचालन अमेरिकी समय के अनुसार किया जाता था। कार्यालय शाम करीब 7 बजे खुलता था और रात 3 बजे तक गतिविधियां चलती थीं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने विदेशी नागरिकों को ठगी का शिकार बनाया और धोखाधड़ी की कुल रकम कितनी है। मामले में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

प्रदूषण पर बड़ा एक्शन! सोनीपत की 422 फैक्ट्रियों में लगेंगे मॉनिटरिंग डिवाइस

सोनीपत. ड्रेन के जरिए यमुना नदी में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने उन फैक्ट्रियों की पहचान की हैं, जो अपने शोधित न किए गए (अनट्रीटेड) दूषित पानी को सीधे ड्रेन में बहा रही हैं। इस क्रम में जिले की ऐसी 422 फैक्ट्रियों को चिह्नित है, जिनमें अब चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए निगरानी यंत्र (माॅनिटरिंग डिवाइस) अनिवार्य कर दिए गए हैं। प्रदूषित पानी ड्रेन में न गिरे यमुना में लगातार गिर रहे दूषित पानी के कारण नदी का जल स्तर और उसकी शुद्धता प्रभावित हो रही है। यमुना में जा रहे दूषित पानी को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कमर कस ली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सूरत में फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी बिना शोधित (ट्रीट) किए ड्रेन में नहीं गिरना चाहिए। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने संयंत्रों पर ऑनलाइन रियल टाइम माॅनिटरिंग सिस्टम लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। निगरानी यंत्र लगाएंगी फैक्ट्रियां बोर्ड की इस कार्रवाई से उन उद्योगपतियों में हड़कंप है जो अब तक नियमों को ताक पर रखकर दूषित पानी को बिना शोधित किए पास कर रहे थे। यह दूषित पानी ड्रेन छह के माध्यम से ड्रेन आठ में मिलकर सीधे यमुना में गिर रहा था। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये फैक्ट्रियां समय सीमा के भीतर यंत्र लगाती हैं या नहीं। बोर्ड के अधिकारियों ने कहा है कि जो फैक्ट्रियां निगरानी यंत्र नहीं लगाएंगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्या होगा माॅनिटरिंग सिस्टम का काम? इन निगरानी यंत्रों के जरिए फैक्ट्री से निकलने वाले पानी के मानकों की जानकारी सीधे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर पर उपलब्ध रहेंगी। यदि कोई फैक्ट्री मानक से अधिक प्रदूषित पानी छोड़ती हैं तो इसका तत्काल पता चल जाएगा। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक मानवीय हस्तक्षेप को खत्म करेगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। गठित की जाएंगी विशेष निगरानी टीम सिर्फ मशीनों के भरोसे न रहकर, बोर्ड अब धरातल पर भी अपनी पकड़ मजबूत करेगा। इसके लिए अलग से विशेष टीमों का गठन किया जा रहा है। ये टीमें औचक निरीक्षण करेंगी और यह जांचेंगी कि क्या फैक्ट्री संचालक वास्तव में मानकों का पालन कर रहे हैं या फिर मानिटरिंग सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन नहीं बनाया गया, तो इसके परिणाम घातक होंगे। दूषित पानी बर्दाश्त नहीं "दूषित पानी को बिना शोधित किए बाईपास करना अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिले में 422 फैक्ट्रियां चिह्नित की गई हैं, जिनमें निगरानी यंत्र लगवाने के निर्देश दिए हैं। जो फैक्ट्री संचालक नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।" – अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सोनीपत।

हरियाणा के झज्जर के मुक्केबाजों ने किया कमाल, एशियन चैंपियनशिप के लिए बनाई जगह

झज्जर. खेलों की धरती झज्जर के लिए एक बार फिर गर्व का क्षण आया है। पटियाला में 28 मई से 1 जून तक आयोजित अंडर-23 राष्ट्रीय चयन ट्रायल में झज्जर जिले के चार प्रतिभाशाली मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की है। ये सभी खिलाड़ी आगामी 3 जुलाई से 16 जुलाई तक जकार्ता (इंडोनेशिया) में आयोजित होने वाली एशियन अंडर-23 बाक्सिंग चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। कोच हितेश देशवाल ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों में सागर जाखड़ (60 किग्रा), हितेश गुलिया (70 किग्रा), हेमंत सांगवान (90 किग्रा) तथा महिला वर्ग में प्राची धनखड़ (57 किग्रा) शामिल हैं। ये सभी मुक्केबाज इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए पदक जीत चुके हैं। वर्तमान में ये खिलाड़ी झज्जर के महर्षि दयानंद सरस्वती स्टेडियम में कोच हितेश देशवाल की देखरेख में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने अपनी सफलता का श्रेय कोच और परिजनों को दिया। इस उपलब्धि पर खेल प्रेमी शमशेर जाखड़, योगेंद्र धनखड़, सत्यवान गुलिया, विनोद सांगवान, हरियाणा मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष मेजर सतपाल संधू व महासचिव ओमबीर हुड्डा ने खिलाड़ियों तथा कोच को बधाई दी और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश व प्रदेश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दीं।

चेक गणराज्य में दम दिखाएंगे भारतीय बॉक्सर, ग्लासगो गेम्स से पहले होगा प्रदर्शन का आकलन

भिवानी. भारतीय मुक्केबाजी दल के लिए जून का महीना बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। कामनवेल्थ गेम्स 2026 से पहले भारतीय मुक्केबाज अपनी तैयारियों को परखने के लिए चेक गणराज्य में होने वाली प्रतिष्ठित ग्रैंड प्रिक्स उस्ती नाद लाबेम मुक्केबाजी प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। यह टूर्नामेंट 16 से 21 जून तक आयोजित किया जाएगा और इसे पुरुष एवं महिला एलीट मुक्केबाजों के लिए गोल्ड-श्रेणी का अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट माना जा रहा है। भारतीय टीम में वे मुक्केबाज शामिल होंगे जिनका चयन कामनवेल्थ गेम्स की तैयारियों और संभावित टीम संयोजन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह प्रतियोगिता केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खिलाड़ियों की तकनीक, फिटनेस, रणनीति और मानसिक मजबूती की भी बड़ी परीक्षा होगी। महिला और पुरुषों की भारतीय टीम में नौ मुक्केबाज हरियाणा से हैं। टीम 13 या 14 जून को चेक गणराज्य के लिए दिल्ली से उड़ान भरेगी। वरिष्ठ कोच ने क्या बताया? द्रौणाचार्य अवार्डी और भारतीय खेल प्राधिकरण भिवानी से वरिष्ठ कोच महावीर सिंह बताते हैं उस्ती नाद लाबेम टूर्नामेंट का इतिहास काफी समृद्ध रहा है और दुनिया के कई शीर्ष मुक्केबाज यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ और कोचिंग स्टाफ इस प्रतियोगिता को कामनवेल्थ गेम्स से पहले सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय तैयारी मंच के रूप में देख रहे हैं। यहां खिलाड़ियों को यूरोप और अन्य महाद्वीपों के मजबूत मुक्केबाजों के खिलाफ मुकाबले का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी कमजोरियों और मजबूत पक्षों का आकलन किया जा सकेगा। द्रौणाचार्य अवार्डी कोच जगदीश सिंह कहते हैं इस वर्ष कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन स्काटलैंड के शहर ग्लासगो में 23 जुलाई से दो अगस्त तक होगा। ऐसे में उस्ती नाद लाबेम में होने वाला प्रदर्शन भारतीय मुक्केबाजों के आत्मविश्वास, विश्व रैंकिंग और अंतिम टीम रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। कई पदक दावेदार खिलाड़ियों से दमदार प्रदर्शन की उम्मीद भारतीय दल के कई पदक दावेदार खिलाड़ियों से इस प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। कोचिंग स्टाफ खिलाड़ियों की स्थिति का अंतिम आकलन इसी टूर्नामेंट के आधार पर करेगा, ताकि ग्लास्गो में भारत अधिक से अधिक पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतर सके। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले चेक गणराज्य में होने वाली प्रतियोगिता अहम है। इसमें खिलाड़ी खुद को साबित करेंगे। वे पूरी तैयारी के साथ रिंग में उतरेंगे। हमारे सभी मुक्केबाज ऊर्जा से सराबोर हैं और अपने बेस्ट परिणाम देते हुए खेल प्रेमियों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। ये मुक्केबाज खेलने जाएंगे चेक गणराज्य मुक्केबाज    गृह राज्य/ज़िला    भार वर्ग जादूमणी     मणिपुर     55 सचिन सिवाच जूनियर     भिवानी (हरियाणा)     60 आदित्य     उत्तर प्रदेश (UP)     65 सुमित कुंडू     जींद (हरियाणा)     70 अंकुश     हिसार (हरियाणा)     80 कपिल     उत्तराखंड     90 नरेंद्र बेड़वाल     हिसार (हरियाणा)     90+ (प्लस) कॉमनवेल्थ में ये महिला मुक्केबाज खेलेंगी मुक्केबाज     गृह राज्य/ज़िला    भार वर्ग साक्षी ढांडा     भिवानी (हरियाणा)     51 kg प्रीति पंवार     भिवानी (हरियाणा)     54 kg जैस्मीन लंबोरिया     भिवानी (हरियाणा)     57 kg प्रिया घणघस     भिवानी (हरियाणा)     60 kg प्रवीण हुड्डा     रोहतक (हरियाणा)     65 kg अरूंधती चौधरी     राजस्थान     70 kg लवलीना बोरोगोहेन     असम     75 kg

बदल रहा हरियाणा! कम हुए बाल विवाह, महिलाएं तेजी से जुड़ रहीं डिजिटल दुनिया से

रोहतक. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6, 2023-24) की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश की सामाजिक तस्वीर में कई बड़े बदलावों को उजागर किया है। जहां एक ओर महिलाओं की शिक्षा, इंटरनेट उपयोग और आर्थिक भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं परिवार नियोजन के तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। आंकड़े बताते हैं कि अब हर चार में से लगभग तीन महिलाएं इंटरनेट का इस्तेमाल कर चुकी हैं। यह आंकड़ा 2019-21 में केवल 48.4 प्रतिशत था। यानी तीन साल में महिलाओं की डिजिटल पहुंच में करीब 26 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि हरियाणा बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आने वाले वर्षों में इन संकेतकों पर सरकार की नीतियों का असर और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा। रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश अब केवल कृषि और उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं ने पिछले तीन वर्षों में ऐसी डिजिटल छलांग लगाई है, जिसने राज्य की सामाजिक तस्वीर बदल दी है। 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 74 प्रतिशत महिलाएं अब इंटरनेट उपयोग कर रही हैं। मोबाइल फोन का स्वयं इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। विशेष तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं की डिजिटल पहुंच तेजी से बढ़ी है। एनएफएचएस-5 में जहां यह आंकड़ा 50.4 प्रतिशत था, वहीं अब बढ़कर 64.9 प्रतिशत हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन, आनलाइन सेवाओं और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग ने महिलाओं को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। शिक्षा में भी दिखा बड़ा सुधार शिक्षा के क्षेत्र में भी राज्य ने प्रगति दर्ज की है। 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 49.5 से बढ़कर 55.2 हो गया है। पुरुषों में यह आंकड़ा 62.2 प्रतिशत से बढ़कर 64.4 प्रतिशत तक पहुंचा है। महिलाओं के स्कूल जाने की दर में भी सुधार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और डिजिटल पहुंच में बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में रोजगार और सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करेगी। आर्थिक रूप से मजबूत हुई महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण के मोर्चे पर भी महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है। पिछले 12 महीनों में नकद भुगतान के साथ कार्य करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 18.8 से बढ़कर 25.1 हो गया है। वहीं स्वयं उपयोग करने वाले बैंक खातों वाली महिलाओं की संख्या 73.6 प्रतिशत से बढ़कर 85.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। घर या जमीन में महिलाओं की हिस्सेदारी भी 11.8 प्रतिशत से बढ़कर 14.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। कम हो रही बाल विवाह की समस्या हरियाणा में बाल विवाह के मामलों में भी गिरावट दर्ज हुई है। रिपोर्ट में परिवार और समाज से जुड़े संकेतकों में भी बदलाव दिखाई देता है। 18 वर्ष से पहले विवाह करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 12.5 से घटकर 11.9 प्रतिशत रह गया है। वहीं 21 वर्ष से पहले विवाह करने वाले पुरुषों का प्रतिशत 16 से घटकर 13.3 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर धीरे-धीरे नियंत्रण हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी 87.5 प्रतिशत से बढ़कर 91.1 प्रतिशत हो गई है। घर की खरीदारी, स्वास्थ्य और पारिवारिक निर्णयों में महिलाओं की भूमिका पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा की उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 60.9 से बढ़कर 79 प्रतिशत हो गया है। परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी नया रुझान देखने को मिला है। महिला नसबंदी का प्रतिशत घटकर 28.5 रह गया है, जबकि पारंपरिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग बढ़कर 21.4 प्रतिशत हो गया है। इससे संकेत मिलता है कि परिवार नियोजन के प्रति लोगों की पसंद और व्यवहार में बदलाव आ रहा है। बदलते हरियाणा की नई तस्वीर एनएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं कि हरियाणा में बदलाव सिर्फ सड़कों, भवनों या उद्योगों तक सीमित नहीं है। डिजिटल तकनीक, शिक्षा और आर्थिक अवसरों ने महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। राज्य की नई पहचान अब डिजिटल महिला शक्ति के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि रिपोर्ट हरियाणा में सामाजिक और तकनीकी बदलाव की मजबूत तस्वीर पेश करती है। महिलाओं की शिक्षा, डिजिटल पहुंच और आर्थिक भागीदारी में सुधार राज्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन पोषण और परिवार नियोजन से जुड़े क्षेत्रों में अभी भी गंभीर प्रयासों की जरूरत बनी है।