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एनडीए से निकलकर आसमान की उड़ान, दादरी की दो बेटियां उड़ाएंगी लड़ाकू विमान

चरखी दादरी हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छपार गांव निवासी इशिता सांगवान व भागवी निवासी मीनाक्षी ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने साढ़े तीन साल की ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और हैदराबाद में आज दोनों कमीशन प्राप्त करेंगी। उनकी पहली पोस्टिंग तेलंगाना के बीदर सेंटर में हुई है और अब वो देश के लिए लड़ाकू विमान उड़ाएंगी। खास बात यह है कि एनडीए के जरिए पहली बार देश की दो बेटियां फाइटर पायलट बनी हैं। इशिता सांगवान के पिता चरण सिंह सांगवान ने बताया कि वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया था कि बेटियां भी एनडीए के जरिए सेना में जा सकती हैं। इससे पहले इशिता का सपना सिविल सर्विसेज में जाना था, लेकिन कोर्ट के इस निर्णय के बाद बेटी ने फैसला बदल दिया। उस दौरान इशिता 12वीं की परीक्षा की तैयारियों में जुटी थीं कोर्ट के इस निर्णय के एक माह बाद ही एनडीए की लिखित परीक्षा थी और इशिता ने परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। 6 अगस्त 2022 को ज्वाइनिंग लेटर घर पहुंचा और 9 अगस्त को इशिता ने पुणे जाकर ज्वाइन कर लिया। पिता रविंद्र भी है सेना में है मीनाक्षी के पिता रविंद्र का भी सेना से जुड़ाव रहा है और उनकी बेटी भी एयरफोर्स में जाकर देश सेवा करेगी। मीनाक्षी की इस उपलब्धि पर गांव भागवी में खुशी का माहौल है। सरपंच प्रमिला कुमारी ने बताया कि रविवार को होनहार बेटी के सम्मान में ग्राम पंचायत की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। जिसकी तैयारियां चल रही हैं। बेटी इस उपलब्धि पर पूरे गांव को नाज है। उन्होंने बताया कि मीनाक्षी एनडीए के जरिए सेना में जाने वालीं 19 बेटियों के बैच में शामिल थीं। पुणे के खड़गवासला में उन्होंने तीन साल की ट्रेनिंग पूरी की। ट्रेनिंग पूरी होने पर मीनाक्षी को एयरफोर्स विंग मिली। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में छह माह की फाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग ली, जो हाल ही में पूरी हुई है। यह ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वो हैदराबाद में 13 जून को कमीशन प्राप्त करेंगी। इसके लिए स्वजन हैदाराबाद पहुंच चुके हैं वहीं इशिका के पिता चरण सिंह सांगवान, मां अनीता देवी समेत बहन व भाई भी मौजूद रहेंगे। बेटी की कामयाबी ने सिर फख्र से ऊंचा किया इशिता के पिता चरण सिंह व मां अनीता देवी और मीनाक्षी के पिता रविंद्र का कहना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। उन्हें आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। दोनों बेटियों ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनकर उनका सिर से फक्र से ऊंचा कर दिया है। जून 2025 में इशिता पहुंची थीं पैतृक गांव इशिता सांगवान पुणे में तीन साल की ट्रेनिंग पूरी कर जून 2025 में पैतृक गांव छपार पहुंची थीं। उस दौरान वो सीधे गांव के बाबा जमुना दास मंदिर पहुंची थीं और वहां मत्था टेक कर महंत से आशीर्वाद लिया था। इशिता की उम्र फिलहाल करीब साढ़े 22 साल वर्ष है। माता-पिता का कहना है छुट्टी पर आते ही इशिता दोबारा गांव जाकर स्वजनों व ग्रामीणों से मिलेगी। इशिता व मीनाक्षी बोलीं: असंभव कुछ भी नहीं इशिता सांगवान व मीनाक्षी ने अन्य बेटियों को भी एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि बेटियां बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और फिर पूरी शिद्दत से उसे पाने के लिए मेहनत करने में जुट जाएं। फिर देखेंगी कि कुछ भी असंभव नहीं है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद खुशी मिलती है और ताउम्र उसका फक्र रहता है।  

ग्रामीण शिक्षा को बढ़ावा: नावली स्कूल अब 12वीं तक अपग्रेड, बेटियों को मिलेगी राहत

नूंह  विद्यालय शिक्षा विभाग हरियाणा द्वारा जिला नूंह के राजकीय मिडिल स्कूल नावली खंड फिरोजपुर झिरका (कोड-6097) को उन्नत कर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया है। इस उन्नयन के साथ विद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों के सुचारू संचालन के लिए 21 नए पदों की स्वीकृति भी दी गई है। स्वीकृत पदों में एक प्रधानाचार्य, 14 पीजीटी (अंग्रेजी, हिंदी, गणित, इतिहास, राजनीति विज्ञान, उर्दू, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, भूगोल एवं गृह विज्ञान), एक लिपिक, तीन लैब अटेंडेंट तथा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 10 माह की अवधि के लिए इन पदों के वेतन एवं भत्तों के लिए लगभग एक करोड़ 49 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस स्वीकृति से विद्यालय में वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की शिक्षा के लिए आवश्यक आधारभूत मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। विद्यालय के वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर उन्नयन से नावली एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए दूरस्थ विद्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे विशेष रूप से छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को नई मजबूती प्राप्त होगी। विज्ञान पढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा स्थानीय ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। वहीं इसी वर्ष से इस विद्यालय में विद्यार्थियों को दाखिला लेने का अवसर मिलेगा,अब छात्राओं को पढ़ने के लिए दूसरे गांव में नहीं जाना पड़ेगा। विद्यार्थियों को गांव में ही आर्ट्स,कामर्स और विज्ञान पढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा। छात्राओं का ड्राॅप आउट बढ़ा बता दें कि वर्तमान समय में विद्यालय में छठी,सातवीं,आठवीं कक्षा में लगभग 220 विद्यार्थी अध्यनरत हैं,जिनमें 50 प्रतिशत से अधिक बेटियां शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उच्च शिक्षा की सुविधा गांव के स्कूल में उपलब्ध न होने के कारण छात्राओं का ड्राॅप आउट बढ़ रहा था। विद्यालय को 12वीं तक अपग्रेड करेंगे बेटियों को पढ़ने के लिए नवाली से पास के सरकारी स्कूल साकरस में जाना पड़ता था,जिसकी दूरी करीब छह किलोमीटर है। जबकि दर्जनों छात्राएं 10 किलोमीटर दूर मांडीखेड़ा स्कूल पढ़ने जाती हैं। सरकारी बस सुविधा उपलब्ध न होने से भी छात्राओं को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे में विद्यालय को 12वीं तक का अपग्रेड करना गांव की प्रमुख मांग थी जो आज पूरी हो गई।  

पंजाब के राजपुरा में CM नायब सैनी ने किया आह्वान, कहा- समाज की भागीदारी से होगा बदलाव

राजपुरा  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि सैनी समाज को अब केवल समर्थक की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पंचायत से लेकर विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत एवं निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रभावी पैरवी की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंजाब के राजपुरा में सैनी समाज वेलफेयर कमेटी द्वारा आयोजित सैनी महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर कमेटी की ओर से उनका भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया। नायब सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और उनका आवास जनता के लिए चौबीसों घंटे खुला रहता है। जनकल्याण, सामाजिक न्याय और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। समाज को संगठित होकर आगे बढ़ना होगा, तभी सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर उसकी भागीदारी और प्रभाव बढ़ेगा। सम्मेलन में सैनी समाज कल्याण समिति के सर्कल चेयरमैन जैलदार जसविंदर सिंह सैनी, महिन्दर सैनी, प्रधान जतिन्दर सैनी, चेयरमैन गुरनाम, अंगद सैनी, गुरदर्शन सैनी, रणबीर सिंह, सर्वजीत कौर, एमसी लक्की और दविन्दर सैनी सहित बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। पंजाब सरकार पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे पूरे नहीं हुए, जिसके कारण लोग स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और आम लोगों से जुड़े कई मुद्दों पर पंजाब सरकार अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है। केंद्र और प्रदेश की योजनाओं का किया उल्लेख मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार द्वारा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें प्रकाश पर्व के अवसर पर किए गए विभिन्न कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिरसा विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर स्थापित की गई है, जबकि फरीदाबाद, धमतान साहिब, यमुनानगर और अंबाला में भी उनके नाम से विभिन्न परियोजनाएं विकसित की गई हैं। किसानों और महिलाओं के लिए योजनाएं गिनाईं मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित कर रही है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। महिलाओं को रियायती दर पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने सहित कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवा महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नियमित रूप से दिया जा रहा है। ओबीसी वर्ग को मिला मजबूत प्रतिनिधित्व नायब सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में ओबीसी वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विभिन्न स्तरों पर पिछड़े वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने का कार्य किया है।

हरियाणा महिला आयोग में नई नियुक्तियां, रेनू भाटिया के पद छोड़ने के बाद उषा प्रियदर्शनी-मीना परमार की बढ़ी भूमिका

 चंडीगढ़  चंडीगढ़ कुरुक्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ से विवाद के चलते हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया के इस्तीफे के बाद प्रदेश सरकार ने आयोग का पुनर्गठन कर दिया है। हरियाणा सरकार ने राज्य महिला आयोग का विस्तार करते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इस बदलाव के तहत उषा प्रियदर्शनी को आयोग का नया अध्यक्ष  और मीना परमार को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पूर्व अध्यक्ष रेणु भाटिया के इस्तीफे के बाद आयोग के इस नए नेतृत्व से महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों में तेजी आने की उम्मीद है। आइए, विस्तार से समझते हैं कि उषा प्रियदर्शनी और मीना परमार कौन हैं और संगठन में इनका अब तक का सफर कैसा रहा है… ऊषा प्रियदर्शी का जन्म 12 अगस्त 1972 को राजस्थान में हुआ। स्नातक तक शिक्षित उषा के पति नीरज प्रियदर्शी अधिवक्ता हैं। निवास स्थान गुरुग्राम के सुशांत लोक फेज-तीन में है। राजनीति में ऊषा 25 साल से भाजपा में सक्रिय हैं। ओबीसी मोर्चा भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष सहित महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं। मीना परमार का जन्म 10 सितंबर 1976 को भिवानी के गांव खरक कलां में हुआ था, वे स्नातक पास हैं। इनके पति अर्जुन सिंह लेक्चरर हैं। भिवानी के सेक्टर 13 में निवास है। मीना 26 साल से राजनीति में हैं। वर्ष 2016 से 2019 तक भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं। 2021 में महिला मोर्चा की महामंत्री बनीं। साढ़े चार साल तक पद पर रहीं रेनू भाटिया साढ़े चार साल तक अध्यक्ष के पद पर रहीं रेनू भाटिया महिला आयोग की चेयरपर्सन का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन रेनू भाटिया साढ़े चार साल तक इस पद पर रहीं। उन्होंने 19 जनवरी 2022 को चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल पिछले साल 18 जनवरी को पूरा हो गया था। हालांकि 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जारी एक पत्र के जरिये कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ाया था, जिस पर विवाद छिड़ा है।    

चलती तिपहिया साइकिल बनी आग का गोला, हरियाणा में दिव्यांग व्यक्ति की दर्दनाक मौत

पानीपत/चरखी दादरी. चरखी दादरी जिले के गांव कन्हेटी में वीरवार देर शाम ई-ट्राइसाइकिल में आग लगने से एक बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में दिव्यांग युवक की मौके पर ही मृत्यु हो गई। सूचना मिलने सदर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाली इमलोटा पुलिस चौकी टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवाया। शुक्रवार को स्वजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। मृतक की पहचान कन्हेटी निवासी रविंद्र (29) के रूप में हुई है। स्वजनों से मिली जानकारी के अनुसार रविंद्र पांच साल पहले इमलोटा के समीप सड़क हादसे का शिकार हो गया था। हादसे में लगी गंभीर चोटों के कारण उसके पेट से नीचे के हिस्से ने काम करना छोड़ दिया था। जिसके चलते वह चलने-फिरने में पूरी तरह से असमर्थ था। वह ई-ट्राइसाइकिल के जरिए ही इधर-उधर जाता था। बीते करीब दो साल से वह झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ के खेल मैदान पर जाता था और युवाओं को अभ्यास करवाता था। वीरवार शाम को वह गांव कन्हेटी स्थित सैयद पीर मजार पर मत्था टेकने के लिए गया था। वहां से लौटने के लिए उसने अपनी ई-ट्राइसाइकिल पर बैठकर उसे स्टार्ट किया तो उसी दौरान वह आग पकड़ गई। वह दिव्यांग होने के कारण उसने फंस गया और नीचे नहीं उतर पाया। आसपास के लोगों ने आग की लपटे देखी तो वहां पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन तब तक जिंदा जलने से उसकी दर्दनाक मृत्यु हो चुकी थी। बाद में ग्रामीणों ने डायल 112 पर काल कर घटना की जानकारी दी तो पुलिस टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतक के चचेरे भाई राजेश के बयान पर इतफाकिया मौत की कार्रवाई की है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट या दूसरा तकनीकि कारण माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अवैध माइनिंग की शिकायत पड़ी भारी! पानीपत में तीन दोस्तों को स्कॉर्पियो से कुचलकर मार डाला

पानीपत. गांव डिकाडला में बुधवार देर रात तीन दोस्तों को स्कॉर्पियो से कुचलकर मार डाला। मृतकों की पहचान डिकाडला के नरेंद्र गाहल्याण (46), विनोद (48) व अनिप गाहल्याण (36) के रूप में हुई। स्वजन का आरोप है कि सड़क हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या थी, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई। नरेंद्र खेतीबाड़ी के साथ प्रॉपर्टी का काम करता था, अनिप बी-टेक पासआउट था। तीनों बुधवार रात सड़क किनारे बात कर रहे थे, तभी तेज रफ्तार स्कार्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी। स्वजन के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि नरेंद्र और अनिप की मौके पर ही मौत हो गई। विनोद ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। पुलिस को दी थी अवैध माइनिंग की शिकायत नरेंद्र के भाई विरेंद्र गाहल्याण ने पुलिस को बताया कि गांव के कुछ लोगों की ट्रॉली और डंपर कुछ माह पहले अवैध माइनिंग मामले में पकड़े गए थे। आरोपितों को शक था कि नरेंद्र की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई थी, इसके चलते वे रंजिश रखते थे। पुलिस ने मनीष, संदीप, रविंद्र, नवीन, तुषार, सचिन, नीरज, राजबीर और सूरज समेत नौ लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया है। वारदात में प्रयोग स्कार्पियो बरामद की है। भागते समय स्कार्पियो में आग लग गई थी, जिसके बाद आरोपित उसे छोड़कर फरार हो गए थे। एफएसएल ने साक्ष्य जुटाए हैं। गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें गठित आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें गठित की हैं। मामले की सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। स्वजन ने आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है। -भूपेंद्र सिंह, एसपी, पानीपत

महिला की मौत पर बड़ी कार्रवाई कायम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को मिली कोर्ट की मंजूरी

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों में लापरवाही को इस आधार पर नहीं छिपा सकती कि संबंधित महिला का हाव-भाव देखकर उसे गर्भवती होने का आभास नहीं हुआ था। अदालत ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में सेवा से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपीलकर्ता द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण उसकी सेवाओं में गंभीर कमी को उजागर करता है। ऐसे में उसकी संविदात्मक नियुक्ति समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय में खामी नहीं पाई जा सकती। क्या है मामला? मामले के अनुसार, पंचकूला निवासी कौशल्या देवी अपने निर्धारित क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थी। उसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के घरों में जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनकी निगरानी करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ना था। इसी दौरान उसके कार्यक्षेत्र में रहने वाली एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महिला की गर्भावस्था के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ओर से कोई रिपोर्ट या सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इससे पहले एकल पीठ भी सेवा समाप्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर चुकी थी। एकल पीठ का मानना था कि कार्यकर्ता अपनी सेवा में कमी के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। मृतक परिवार ने नहीं दी जानकारी: अपीलकर्ता सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि मृतक के परिवार ने उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी थी। उसने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि घर के दौरे के दौरान उसने महिला को छत पर तेजी से जाते और गीला भारी कंबल उठाकर घरेलू काम करते देखा था। उसके अनुसार महिला के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि वह गर्भवती है। इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण पूरी तरह अविश्वसनीय और वास्तविकता से परे है। अदालत ने कहा कि यह जवाब स्वयं दर्शाता है कि अपीलकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं कर रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का दायित्व केवल परिवार से सूचना मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी करना है। खंडपीठ ने कहा कि जब सेवाओं में इतनी गंभीर कमी सामने आई और कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही संविदात्मक नियुक्ति समाप्त की गई, तो इस कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा।

“हाव-भाव देखकर गर्भ का अंदाजा नहीं लगा” दलील पर HC की कड़ी टिप्पणी, अपील खारिज

 चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों में लापरवाही को इस आधार पर नहीं छिपा सकती कि संबंधित महिला का हाव-भाव देखकर उसे गर्भवती होने का आभास नहीं हुआ था। अदालत ने गर्भवती महिला की मौत के मामले में सेवा से हटाई गई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी अपील खारिज कर दी। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार व अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपीलकर्ता द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण उसकी सेवाओं में गंभीर कमी को उजागर करता है। ऐसे में उसकी संविदात्मक नियुक्ति समाप्त करने के प्रशासनिक निर्णय में कोई खामी नहीं पाई जा सकती। क्या है मामला? मामले के अनुसार, पंचकूला निवासी कौशल्या देवी अपने निर्धारित क्षेत्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत थी। उसकी जिम्मेदारी क्षेत्र के घरों में जाकर गर्भवती महिलाओं की पहचान करना, उनकी निगरानी करना तथा आवश्यक स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं से जोड़ना था। इसी दौरान उसके कार्यक्षेत्र में रहने वाली एक गर्भवती महिला की मृत्यु हो गई। हैरानी की बात यह रही कि महिला की गर्भावस्था के संबंध में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ओर से कोई रिपोर्ट या सूचना विभाग को नहीं दी गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि इससे पहले एकल पीठ भी सेवा समाप्ति आदेश में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर चुकी थी। एकल पीठ का मानना था कि कार्यकर्ता अपनी सेवा में कमी के लिए कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकी। मृतक परिवार ने नहीं दी जानकारी: अपीलकर्ता सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने दलील दी कि मृतक के परिवार ने उसे गर्भावस्था के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी थी। उसने कारण बताओ नोटिस के जवाब में कहा था कि घर के दौरे के दौरान उसने महिला को छत पर तेजी से जाते और गीला भारी कंबल उठाकर घरेलू काम करते देखा था। उसके अनुसार महिला के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत नहीं होता था कि वह गर्भवती है। इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्टीकरण पूरी तरह अविश्वसनीय और वास्तविकता से परे है। अदालत ने कहा कि यह जवाब स्वयं दर्शाता है कि अपीलकर्ता अपने कर्तव्यों का निर्वहन अपेक्षित स्तर पर नहीं कर रही थी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का दायित्व केवल परिवार से सूचना मिलने का इंतजार करना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से क्षेत्र में गर्भवती महिलाओं की पहचान और निगरानी करना है। खंडपीठ ने कहा कि जब सेवाओं में इतनी गंभीर कमी सामने आई और कारण बताओ नोटिस देने के बाद ही संविदात्मक नियुक्ति समाप्त की गई, तो इस कार्रवाई में कोई कानूनी त्रुटि नहीं मानी जा सकती। इसी आधार पर अदालत ने अपील को खारिज करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश को बरकरार रखा।

नौकरी में आरक्षण को लेकर HC की अहम टिप्पणी, आरक्षित कोटे का फायदा लेने वालों पर स्पष्ट आदेश

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, वे बाद में अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जिन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन तो किया, लेकिन किसी प्रकार की आरक्षण संबंधी रियायत नहीं ली और उनके अंक सामान्य वर्ग की कटआफ से अधिक हैं, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार किए जाने का अधिकार होगा। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (ग्रुप-बी) के 805 पदों पर भर्ती से जुड़े पुनर्विचार आवेदनों का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। यह भर्ती 21 जून 2024 को जारी विज्ञापन के माध्यम से की गई थी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के आधार पर कोई भी लाभ प्राप्त करने वाले उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग में समायोजन का दावा नहीं कर सकते। वहीं, ऐसे उम्मीदवार, जिन्होंने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया हो लेकिन आयु सीमा में छूट, शुल्क रियायत या अन्य किसी प्रकार का लाभ न लिया हो और जिन्होंने सामान्य वर्ग की निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हों, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार का अवसर दिया जाएगा। मामले में पुनर्विचार याचिकाएं 3 नवंबर 2025 को दिए गए खंडपीठ के एक पूर्व निर्णय के बाद दाखिल की गई थीं। अनुमति याचिका पहले ही हो चुकी खारिज: हाई कोर्ट याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भले ही उन्हें आरक्षण का लाभ न मिले, लेकिन उनके अंक सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं, इसलिए उन्हें चयन का अधिकार मिलना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। दावों की सच्चाई जानने के लिए हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे स्पष्ट करें कि पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं में से किन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन करने के कारण कोई लाभ प्राप्त किया था या नहीं। इसके बाद राज्य सरकार ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का लाभ लिया था। अदालत ने इस शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में माइग्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो पुनर्विचार याचिका कर्ता अंतत अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चयनित पाए जाते हैं, उन्हें उनके जूनियर उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से लाभ दिया जाए। हालांकि वास्तविक वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ केवल उनकी वास्तविक नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे। अदालत ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

आंधी-तूफान से थमा जनजीवन, फतेहाबाद में भारी तबाही, कई इलाकों में ब्लैकआउट

हिसार. हरियाणा में मौसम ने अचानक रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है। भीषण गर्मी और तपती लू के बीच प्रदेश के कई जिलों में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी ने भारी तबाही मचाई है। इस भीषण आंधी और तेज वर्षा से फतेहाबाद सहित राज्य के कई हिस्सों में सैकड़ों पेड़, बिजली के खंभे और दुकानों के टीन शेड व होर्डिंग्स उखड़ गए, जिससे गुरुग्राम सहित कई इलाकों में ब्लैकआउट है। हांसी में करीब एक घंटे तक चली तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि भी हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग के अनुसार पंजाब के ऊपर चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार से 13 जून तक पूरे प्रदेश में भारी वर्षा, गरज-चमक और ओलावृष्टि का ‘आरेंज अलर्ट’ जारी किया है। वीरवार सुबह से ही मौसम के मिजाज बदले-बदले नजर आए। सरकार की ओर से मोबाइल पर इमरजेंसी अलर्ट जारी मौसम के इस रूप को देख हरियाणा सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों के मोबाइल फोन पर ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (चेतावनी संदेश) भेजा। इस संदेश में पंचकूला, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और पानीपत जिलों के निवासियों को घरों में रहने और तेज तूफान व ओलावृष्टि के प्रति सावधान रहने की सलाह दी है। प्रारंभिक सुस्ती के बाद मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। गति में तेजी आई है, लेकिन बारिश की स्थिति अच्छी नहीं है। जून में अभी तक देश में औसतन 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इस स्थिति को अलनीनो से जोड़कर देखा जा रहा है, जो प्रशांत महासागर में तेजी से उभर रहा है। यूपी और बिहार में कई लोगों की मौत पश्चिम विक्षोभ से उत्तर भारत में वीरवार को अचानक मौसम ने करवट ली। उत्तर प्रदेश और बिहार में तेज आंधी-पानी और वज्रपात से 16 लोगों की मौत हो गई। जिनमें बिहार में 10 लोगों की जान गई, जबकि एक ही परिवार के चार लोगों समेत 10 झुलस गए। वहीं, कई जगह वर्षा से जलभराव हुआ।