samacharsecretary.com

पंचकूला में वाहन चोरी बनी पुलिस के लिए चुनौती, आधे से भी कम वाहन हो रहे बरामद

पंचकूला  जिले में वाहन चोरी की घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में ही पंचकूला में 133 वाहन चोरी हो चुके हैं, जबकि पुलिस इनमें से केवल 57 वाहन ही बरामद कर सकी है। यानी चोरी हुए वाहनों के मुकाबले बरामदगी का आंकड़ा आधे से भी कम है। पिछले वर्षों के आंकड़े देखें तो वाहन चोरी की समस्या लगातार बनी हुई है। वर्ष 2025 में पंचकूला में 339 वाहन चोरी हुए थे, जबकि पुलिस 144 वाहन ही बरामद कर सकी। वर्ष 2024 में 342 वाहन चोरी हुए और 73 बरामद हुए। इसी तरह 2023 में 357 वाहन चोरी के मामलों में 94 वाहन बरामद किए गए। वर्ष 2022 में सबसे अधिक 409 वाहन चोरी हुए थे, जिनमें से 115 वाहन बरामद किए गए। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 से 2026 के पहले छह महीनों तक जिले में कुल 1,580 वाहन चोरी हुए हैं। इनमें से 483 वाहनों की ही बरामदगी हो सकी। आंकड़े बताते हैं कि वाहन चोरी के मामलों में पुलिस के सामने चोरी हुए वाहनों को ट्रेस कर बरामद करना बड़ी चुनौती है। विशेषकर वर्ष 2024 में 342 वाहनों की चोरी के मुकाबले महज 73 वाहन बरामद हुए, जिससे बरामदगी का आंकड़ा काफी कम रहा। दोपहिया सबसे ज्यादा निशाने पर पुलिस के अनुसार चोरी के ज्यादातर मामलों में दोपहिया वाहन शामिल हैं। 97 सीसी की मोटरसाइकिलें चोरों के निशाने पर रहती हैं। पुलिस के मुताबिक इनके आसान इग्निशन सिस्टम और पर्याप्त एंटी-थेफ्ट फीचर नहीं होने से इन्हें चुराना आसान होता है। वर्ष          चोरी हुए वाहन     बरामद वाहन (जनवरी-जून)   2026               133                57 2025               339               144 2024                 342              73 2023                 357              94 2022                  409            115 कुल                     1,580           483 चोरी की बाइक बरामद, मालिक के लिए फिर भी कागजी दौड़ चोरी हुई बाइक बरामद होने के बाद उसे वापस लेने के लिए मालिक को लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मनीमाजरा निवासी की बाइक चंडीमंदिर थाना पुलिस ने बरामद की, उसे जानकारी अखबार में खबर पढ़कर मिली। थाने पहुंचने पर बाइक की दोनों नंबर प्लेट गायब मिलीं और वाहन क्षतिग्रस्त था। पुलिस ने चेसिस नंबर से पहचान की। बाइक लेने के लिए अदालत में सुपुर्दारी अर्जी, वकील और जमानतदार की व्यवस्था करनी पड़ी। कोर्ट से रिलीज आर्डर के बाद मालिक व जमानतदार की अलग फाइल बनी। जमानतदार को संपत्ति के दस्तावेज देने, नोटरी से सत्यापन और पुलिस चौकी में प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाइक मिली। करीब एक माह में 3 हजार रुपए कागजी कार्रवाई और पांच हजार रुपए मरम्मत पर खर्च हुए। मुकदमा लंबित रहने तक कोर्ट की अनुमति के बिना बाइक बेचने पर भी रोक है। वकील बोले- एक सप्ताह में मिलना चाहिए वाहन पंचकूला जिला अदालत के एडवोकेट अवनीत ढाकला ने कहा कि पंजीकृत मालिक का वाहन बरामद होने के बाद प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए। वाहन को एक सप्ताह के भीतर उसके मालिक को सुपुर्द किया जा सकता है। सामान्य मामलों में भी करीब 20 दिन प्रक्रिया में लग जाते हैं। चोरी के पीड़ित को वाहन चोरी होने के बाद दोबारा कागजी प्रक्रिया में परेशान नहीं होना चाहिए।  

सूर्य घर योजना का बढ़ा लाभ, कैथल में 1,765 अंत्योदय परिवारों समेत 8,896 उपभोक्ता जुड़े

कैथल  प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आमजन के लिए आर्थिक राहत और ऊर्जा संरक्षण का प्रभावी माध्यम बन रही है। जिले में योजना को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 8 हजार 896 उपभोक्ताओं ने अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित कर इस योजना का लाभ उठाया है। इनमें 1765 अंत्योदय परिवार शामिल हैं। इस योजना से लोगों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ-साथ स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। योजना के तहत यदि कोई उपभोक्ता सोलर सिस्टम लगाने के लिए शुरुआत में पैसे नहीं है तो सरकार बैंकों के माध्यम से बिना किसी गारंटी या प्रापर्टी के न्यूनतम ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा उपलब्ध करवा रही है। निगम के अनुसार दो किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल प्रतिदिन लगभग 8 से 10 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। इस प्रकार एक माह में करीब 300 यूनिट तक बिजली उत्पादन संभव है, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार की सामान्य मासिक बिजली खपत के लिए काफी हद तक पर्याप्त हो सकता है। इससे परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आती है। काफी फायदा हुआ है गांव बालू निवासी सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अपने घर पर सौर ऊर्जा पैनल लगवाया है। उन्हें केंद्र सरकार के साथ-साथ हरियाणा सरकार की ओर से भी सब्सिडी मिली। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनके बिजली बिल में काफी कमी आई है और अब उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। किसे कितनी मिलती है सब्सिडी बिजली निगम के अधीक्षक अभियंता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने पात्रता और आय वर्ग के अनुसार सब्सिडी दी जाती है। अंत्योदय परिवार यानी जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है और वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक का सोलर पैनल लगवाने पर केंद्र सरकार की ओर से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार की ओर से 50 हजार रुपये, यानी कुल 1.10 लाख रुपये का अनुदान मिल सकता है। जिन परिवारों की वार्षिक आय तीन लाख रुपये तक है और बिजली खपत 2,400 यूनिट तक है, उन्हें दो किलोवाट तक के सोलर पैनल पर केंद्र सरकार से 60 हजार रुपये तथा हरियाणा सरकार से 20 हजार रुपये, यानी कुल 80 हजार रुपये का अनुदान मिल सकता है। तीन लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से एक किलोवाट पर 30 हजार रुपये, दो किलोवाट पर 60 हजार रुपये तथा तीन किलोवाट तक 78 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। पर्यावरण और जेब दोनों के लिए हितकारी प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा संरक्षण और आम जनमानस को बिजली बिलों के भारी-भरकम बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए बहुत ही बेहतरीन योजना है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि सब्सिडी की प्रक्रिया पारदर्शी हो और पात्र लोगों को समय पर लाभ मिले।  

कैंसर-हृदय रोग के मरीजों को राहत, जिला अस्पताल में कम कीमत पर मिलेंगी दवाएं

यमुना नगर. मरीजों को सस्ती व सुलभ दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में खोली जा रही अमृत (अफोर्डेबल मेडिसिन एंड रिलाइबल इंप्लांटस फार ट्रीटमेंट) फार्मेसी का स्टोर तैयार हो गया है। इसके साथ ही वीटा का बूथ भी खुलेगा। दोनों एक जगह होने से मरीजों को काफी राहत मिलेगी। अस्पताल में दाखिल तीमारदारों को वीटा बूथ से दूध व चाय की सुविधा मिलेगी। वहीं दवाइयों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, अगले सप्ताह यह दोनों शुरू हो जाएंगे। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल परिसर जन औषधि केंद्र भी चल रहा है, यहां पर दवाइयों से लेकर स्टाफ तक की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग के फार्मेसिस्ट देखते हैं। यदि अस्पताल में कोई दवाई उपलब्ध नहीं है तो मरीज यहां जन औषधि केंद्र से जेनरिक दवाइयां सस्ती कीमत पर ले सकता है। कई बार जन औषधि केंद्र पर भी दवाई नहीं मिल पाती ऐसे में मरीज को बाहर स्टोर से ही दवाई लेनी पड़ती है। सस्ते दामों में मिलेंगी महंगी दवाइयां अमृत फार्मेसी केंद्र में मरीजों के लिए दवाइयां और इम्प्लांट्स बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत पर मिलेगी। इस केंद्र पर कैंसर से लेकर हृदय रोग सहित गंभीर बीमारियों की दवाइयां भी उपलब्ध रहेगी। अच्छी बात ये है कि बाहर के मरीज भी यहां आकर दवाई ले सकेंगे।

झज्जर में पार्कों को मिलेगी नई खूबसूरती, ₹1.58 करोड़ से होंगे विकास कार्य

झज्जर. शहर के सेक्टर-9 के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। लंबे समय से पार्कों के विकास और सौंदर्यीकरण की उठ रही मांग अब धरातल पर उतरने जा रही है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से सेक्टर-9 पार्ट-ए और पार्ट-बी में स्थित छह पार्कों के कायाकल्प के लिए रफ कास्ट एस्टीमेट और डीएनआईटी तैयार कर लिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1.58 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे पार्कों में बागवानी, बाउंड्री वाल, ग्रिल फेंसिंग, गार्डन बेंच और बच्चों के लिए खेल उपकरण लगाए जाएंगे। पार्ट-ए और पार्ट-बी के लिए बजट का ब्योरा  एचएसवीपी के एसडीओ देवेंद्र ने बताया कि सेक्टर-9 पार्ट-ए के पार्कों के विकास के लिए 82.57 लाख रुपये का अनुमानित बजट रखा गया है। इसमें टो वॉल व ग्रिल फेंसिंग के लिए 49.92 लाख, हार्टिकल्चर (बागवानी) कार्यों के लिए 9.94 लाख तथा गार्डन बेंच व बच्चों के खेल उपकरणों के लिए 5.71 लाख रुपये का प्रावधान है।

हरियाणा में पशुपालकों को बड़ी राहत, 19.19 लाख पशुओं का बीमा, ₹23.68 करोड़ की मदद

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार अब पशुपालन को केवल ग्रामीण परिवारों की पारंपरिक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि नियमित और लाभकारी स्वरोजगार के रूप में विकसित करने की तैयारी में है। सरकार का जोर पशुधन की उत्पादकता, स्वास्थ्य और नस्ल सुधार के साथ पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा देने पर है। इसी कड़ी में पशुधन बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं और बेहतर नस्ल के लिए तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय सामूहिक पशुधन बीमा योजना के तहत 31 अगस्त 2026 तक 19.91 लाख पशुओं का बीमा किया गया है। वर्ष 2018-19 से 31 अगस्त 2026 तक 32,679 बीमा दावों का निपटारा कर पशुपालकों को 123.68 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। सामान्य श्रेणी के पशुपालकों को प्रीमियम में 85 प्रतिशत और अनुसूचित जाति परिवारों को 100 प्रतिशत सहायता देने का प्रविधान किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, हरियाणा सरकार ने पशुपालन को कारोबार के रूप में बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता का दायरा बढ़ाया है। मई 2026 तक 2.31 लाख पशुधन किसान क्रेडिट कार्ड स्वीकृत किए गए और 3,478 करोड़ रुपये वितरित किए गए। राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत भेड़, बकरी, सूकर पालन और चारा इकाइयों के लिए 10 से 50 लाख रुपये तक सब्सिडी का प्रविधान है। अब तक 10 लाभार्थियों को 2.62 करोड़ रुपये की सहायता मिली है।

हाइड्रोजन ट्रेन में नहीं मिल रहे यात्री, रेलवे ने लिया बड़ा फैसला; दिल्ली तक बढ़ाया जा सकता है रूट

जींद/सोनीपत जिस ट्रेन में एक साथ 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं, उसमें पूरे रास्ते कभी 40 तो कभी 60 यात्री ही बैठे हों. देश की इकलौती हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन फिलहाल कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रही है. हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चल रही इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतनी कम रह रही है कि रेलवे को इसके रूट को एक्सटेंड करना पड़ रहा है. अब भारतीय रेल हाइड्रोजन ट्रेन में यात्री की संख्या बढ़ाने के लिए इसे दिल्ली तक ले आने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इसके रास्ते में कुछ तकनीकी और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी हैं।  यह हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चल रही है. अधिकारियों के मुताबिक, 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत तक के पूरे सफर में आमतौर पर सिर्फ 40 से 60 यात्री ही मिलते हैं. कम यात्रियों की वजह से ट्रेन रोज सिर्फ एक आने-जाने का फेरा लगा रही है. शुरुआती योजना के मुताबिक इसे जींद और सोनीपत के बीच रोज दो फेरे लगाने थे. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे पिछले करीब दो महीनों से इस ट्रेन का संचालन कर रहा है. ट्रेन के संचालन और नई तकनीक पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी लगातार काम कर रही है।  दिल्ली तक क्यों बढ़ाना चाहता है रेलवे? कम फुटफॉल को देखते हुए रेलवे अब इस ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक ले जाने के विकल्प पर काम कर रहा है. आजादपुर दिल्ली का प्रमुख थोक फल और सब्जी बाजार है. रेलवे का मानना है कि अगर ट्रेन दिल्ली तक पहुंचती है तो यात्रियों के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. स्थानीय लोग भी लंबे समय से ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल रेलवे इस विस्तार से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहा है. अंतिम फैसला सुरक्षा, तकनीकी जरूरतों और संचालन की व्यवहारिकता को देखने के बाद लिया जाएगा।  17 जुलाई को शुरू हुई थी हाइड्रोजन ट्रेन भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी. यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी है. इसे रेलवे की क्लीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक अहम कदम बताया गया था. हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की तरह सीधे डीजल का इस्तेमाल नहीं होता. इसमें हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, जो ट्रेन को चलाने के लिए इस्तेमाल होती है. इसी वजह से इसे कम प्रदूषण वाली रेल तकनीक के तौर पर देखा जाता है. रेलवे के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो हाइड्रोजन बेस्ड रेल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।  इस रूट पर कम यात्रियों की समस्या नई नहीं है. रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन से पहले इसी रूट पर चलने वाली डेमू ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी. फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा इस रूट पर 3 दूसरी डेमू ट्रेनें भी चल रही हैं. लेकिन इनमें भी बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती. रेलवे से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जींद और सोनीपत के बीच रोजाना दफ्तर जाने वाले यात्रियों और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है. यही वजह है कि ट्रेनों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं।  ट्रेन को दिल्ली तक ले जाने में क्या है परेशानी हाइड्रोजन ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने का विचार आसान जरूर लगता है, लेकिन रेलवे के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच की है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में ज्यादा यात्रियों को ले जाने के लिए आमतौर पर 18-20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा दिल्ली के व्यस्त रेल नेटवर्क में पहले से ही ट्रेनों की आवाजाही काफी ज्यादा है. ऐसे में नई ट्रेन के लिए ट्रैक की उपलब्धता और समय तय करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  एक टैंक में 250-300 किमी तक चलती है ट्रेन ईंधन के मामले में फिलहाल बड़ी समस्या नहीं बताई जा रही है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन एक बार टैंक पूरी तरह भरने के बाद करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है. दिल्ली और जींद के बीच दूरी करीब 130 किलोमीटर है. यानी दूरी के हिसाब से ट्रेन एक टैंक में यह सफर कर सकती है. हालांकि, अभी ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की सुविधा सिर्फ जींद में है. ऐसे में दिल्ली तक सेवा बढ़ाने पर ईंधन भरने की व्यवस्था और ट्रेन के संचालन की योजना को भी ध्यान में रखना होगा।  पानीपत-सफीदों रूट का विकल्प भी सुझाया स्थानीय लोगों के बीच ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग है, लेकिन अगर दिल्ली रूट में संचालन संबंधी दिक्कतें आती हैं तो एक दूसरा विकल्प भी सुझाया गया है. स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन को सोनीपत से पानीपत और फिर सफीदों होते हुए जींद तक चलाया जा सकता है. इससे एक सर्किट तैयार हो जाएगा. पानीपत एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रूट से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है और ट्रेन का इस्तेमाल भी बेहतर हो सकता है. इस प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन जींद से चलकर सोनीपत, पानीपत और सफीदों होते हुए वापस जींद पहुंच सकती है. इस तरह करीब 180 किलोमीटर का एक सर्किट बन सकता है।  सुरक्षा के लिहाज से अभी कोई जल्दबाजी नहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन नई तकनीक पर आधारित है, इसलिए इसके विस्तार को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी. विशेषज्ञों की टीम ट्रेन के मौजूदा संचालन के साथ-साथ दिल्ली तक विस्तार के लिए किए जा रहे ट्रायल और तकनीकी पहलुओं पर नजर रख रही है. रेलवे के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है. यानी फिलहाल रेलवे के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 2,600 सीटों वाली ट्रेन में 40-60 यात्री क्यों मिल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि ज्यादा यात्रियों तक पहुंचने के लिए इसका रूट कैसे बदला जाए. दिल्ली तक विस्तार एक विकल्प है, जबकि पानीपत-सफीदों वाला सर्किट दूसरा रास्ता हो सकता है. अंतिम … Read more

द्वारका एक्सप्रेसवे से सोहना हाईवे तक बनेगा एलिवेटेड रोड, SPR पर ट्रैफिक होगा आसान

गुरुग्राम गुरुग्राम में सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। इस एलिवेटेड रोड के निर्माण से द्वारका एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम-सोहना हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। इससे दिल्ली से मुंबई आवागमन आसान हो जाएगा। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की ओर से इसके लिए अगले सप्ताह तक टेंडर जारी कर दिए जाने की उम्मीद है। जीएमडीए ने पिछले महीने करीब 775 करोड़ रुपये के टेंडर दस्तावेज बनाकर हरियाणा सरकार को भेजे थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरफ से गठित इंफ्रास्ट्रक्चर एवं इंजीनियरिंग कमेटी इन टेंडर दस्तावेजों की जांच कर रही है। उम्मीद है कि तीन से चार दिन के अंदर इन दस्तावेज को मंजूरी मिल जाएगी। इसके तुरंत बाद जीएमडीए की तरफ से इस एलिवेटेड रोड के निर्माण के टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। मार्च में जारी हुए टेंडर को डीपीआर में कमी की वजह से इस टेंडर को रद्द कर दिया था। टेंडर आवंटन के 30 महीने के अंदर यह परियोजना पूरी होगी। चार लेन ­का बनेगा एलिवेटेड रोड द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे से गुरुग्राम-सोहना हाईवे की तरफ चार-चार लेन का एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। एलिवेटेड रोड के नीचे एसपीआर पर तीन-तीन लेन की मुख्य सड़क और दो-दो लेन की सर्विस रोड तैयार होगी। क्लोवरलीफ भी बनेगा एलिवेटेड रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे के एलिवेटेड रोड से जोड़ने के लिए वाटिका चौक पर क्लोवरलीफ तैयार किया जाएगा। अगले दो सप्ताह के अंदर एस्टीमेट बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद टेंडर दस्तावेज को मंजूरी के लिए हरियाणा सरकार के पास भेजा जाएगा। गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड की डीपीआर बन रही गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे से जोड़ने के लिए गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर भी एलिवेटेड रोड के निर्माण की योजना है। जीएमडीए ने डीपीआर तैयार करने के लिए एक कंपनी को टेंडर आवंटित किया है। अगले दो माह में डीपीआर तैयार हो जाएगी, जिसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। प्रवीण चौधरी, मुख्य अभियंता, जीएमडीए, ''एसपीआर पर एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार हैं। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। अगले सप्ताह में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ‘’ गुरुग्राम में हरित क्षेत्र का होगा रखरखाव इसके साथ ही जीएमडीए ने गुरुग्राम में बख्तावर चौक से लेकर सुभाष चौक तक मुख्य सड़क के दोनों तरफ हरित क्षेत्र के रखरखाव की योजना बनाई है। इसके तहत करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आएगी। अगले महीने में इस योजना के तहत टेंडर जारी हो जाएगा। ठेकेदार को चार महीने के अंदर काम पूरा करना होगा। 12 महीने तक देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार की रहेगी।

हरियाणा में डिजिटल कनेक्टिविटी को मिली रफ्तार, 82.84% ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में

चंडीगढ़  हरियाणा ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी और दूरसंचार ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। प्रदेश की 6222 ग्राम पंचायतों में से 5154 यानी 82.84 प्रतिशत ग्राम पंचायतें भारतनेट के दायरे में आ चुकी हैं। कुल 45 हजार 130 फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन कार्यरत हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को राज्य ब्राडबैंड समिति की बैठक में भारतनेट, राइट आफ वे (आरओडब्ल्यू) नियम 2024, 5जी नेटवर्क के विस्तार तथा दूरसंचार परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न पहलों की समीक्षा की। 150 करोड़ रुपये का मिला प्रोत्साहन चालू वित्त वर्ष में पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (एसएएससीआइ) के तहत राज्य के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन निर्धारित किया गया है। यह प्रोत्साहन दूरसंचार क्षेत्र में छह सुधार लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़ा है। 31 मार्च तक लंबित सभी आरओडब्ल्यू आवेदनों का निपटारा कर दिया गया है, जिससे अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन का प्रविधान है। 150 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज में आरओडब्ल्यू नियमों के क्रियान्वयन संबंधी आदेशों के लिए 45 करोड़ रुपये, राज्य आरओडब्ल्यू पोर्टल के लिए 22.5 करोड़ रुपये, पुराने लंबित आवेदनों के निपटारे के लिए अधिकतम 22.5 करोड़ रुपये, औसत निपटारा अवधि को 45 दिन या उससे कम करने के लिए 7.5 करोड़ रुपये, भारतनेट अनुपालन के लिए 37.5 करोड़ रुपये तथा बिजली क्षेत्र से संबंधित आवश्यकताओं के अनुपालन के लिए 15 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। मुख्य सचिव ने आरओडब्ल्यू आवेदनों की औसत निपटारा अवधि 45 दिन या उससे कम करने के लिए आवश्यक कदम तेजी से उठाने के निर्देश दिए। आवेदनों और दूरसंचार ढांचे को मिलेगी गति इस दौरान उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय दूरसंचार समितियों को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी चर्चा हुई। इन समितियों की नियमित त्रैमासिक बैठकें आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि जिलों में आरओडब्ल्यू आवेदनों तथा दूरसंचार ढांचे से संबंधित मामलों का स्थानीय स्तर पर शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके। भूमिगत दूरसंचार एवं अन्य बुनियादी ढांचे को खुदाई के दौरान होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ‘काल बिफोर यू डिग’ प्रणाली के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया गया। वर्तमान में हरियाणा के विभिन्न विभागों के 1204 उपयोगकर्ता इस प्रणाली पर पंजीकृत हैं। समिति ने सरकारी भवनों तथा अन्य उपयुक्त सरकारी संपत्तियों पर 5जी स्माल सेल, रूफटाप साइट, पोल और फाइबर नेटवर्क के विस्तार को सुविधाजनक बनाने के उपायों पर भी विचार किया। इसके अलावा दूरसंचार टावरों पर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रगति की समीक्षा की गई। स्मार्ट मीटर से दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के लिए हरित ऊर्जा की मुक्त पहुंच को सुगम बनाने के साथ-साथ संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायतों में बिजली की खपत और बिलिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी सहायता मिलेगी।  

लाडो लक्ष्मी योजना का बढ़ा दायरा, 13.50 लाख नई महिलाओं को मिलेगा ₹2,100 मासिक लाभ

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब 1.80 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों की पात्र महिलाओं को भी हर महीने 2100 रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी। इससे योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 23.50 लाख हो जाएगी। अभी तक एक लाख रुपये तक सालाना आय वाले परिवारों की करीब 10 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिल रहा था। आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये वार्षिक करने के बाद इस आय वर्ग में कुल 17 लाख 13 हजार 447 महिलाएं पात्र दायरे में आती हैं। इनमें करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं ऐसी हैं, जो पहले से किसी अन्य योजना का लाभ ले रही हैं। ऐसे में करीब 13.50 लाख नई महिलाओं को 2100 रुपये मासिक सहायता मिलने का रास्ता साफ हुआ है। हर महिला को सालाना 25 हजार 200 रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महेंद्रगढ़ में योजना का दायरा बढ़ाते हुए आवेदन के लिए पोर्टल की शुरुआत की है। इस पर पात्र महिलाएं आवेदन कर सकती हैं। सरकार 25 सितंबर को पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर नए लाभार्थियों को योजना का लाभ देना शुरू कर सकती है। तब तक आवेदन और पात्रता सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी। बजट में 6500 करोड़, लगातार बढ़ा सरकार का वित्तीय प्रविधान लाडो लक्ष्मी योजना के लिए हरियाणा सरकार ने अपने 2026-27 के बजट में 6500 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। योजना शुरू करते समय पहले बजट में 5000 करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया था। यानी एक साल में बजटीय प्रविधान में 1500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। राज्य के 2026-27 बजट में सामाजिक कल्याण एवं पोषण क्षेत्र के लिए कुल 20,110 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिसमें लाडो लक्ष्मी योजना अकेले 6500 करोड़ रुपये की है। अभी तक दस किस्तों में दिए जा चुके दो हजार करोड़ परिवार पहचान पत्र प्राधिकरण के स्टेट कार्डिनेटर डा. सतीश खोला के अनुसार 10 अगस्त 2026 तक लाडो लक्ष्मी योजना की 10 किस्तों में करीब 9.98 लाख महिलाओं को 2,042.31 करोड़ रुपये दिए जा चुके थे। उसी समय सरकार ने आय सीमा 1.80 लाख रुपये करने और चालू वित्त वर्ष में 6500 करोड़ रुपये के प्रविधान की जानकारी दी थी, जिसे अब मुख्यमंत्री ने धरातल पर लागू कर दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे हर हाल में पूरा करते हैं। दूसरे राज्यों में महिलाओं को कितनी आर्थिक मदद राज्य – योजना – सहायता हरियाणा – दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना – 2,100 रुपये मासिक पंजाब – मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना – 1,000 रुपये मासिक और एससी महिलाओं के लिए 1,500 रुपये हिमाचल प्रदेश – इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि – 1,500 रुपये मासिक कर्नाटक – गृह लक्ष्मी योजना – 2,000 रुपये मासिक हिमाचल प्रदेश – मुख्यमंत्री शगुन योजना – 31,000 विवाह सहायता हरियाणा – मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना – श्रेणी के अनुसार 31,000 से 71,000 रुपये मासिक तक हरियाणा में एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक तक आय वाले परिवारों की महिलाएं     1 अंबाला 62612     2 भिवानी 66014     3 चरखी-दादरी 24159     4 फरीदाबाद 222562     5 फतेहाबाद 46379     6 गुरुग्राम 92017     7 हांसी 27809     8 हिसार 67177     9 झज्जर 67513     10 जींद 73152     11 कैथल 66518     12 करनाल 105717     13 कुरुक्षेत्र 47982     14 महेंद्रगढ़ 46709     15 नूंह 69760     16 पलवल 101652     17 पंचकूला 37472     18 पानीपत 109424     19 रेवाड़ी 52685     20 रोहतक 60254     21 सिरसा 69397     22 सोनीपत 118878     23 यमुनानगर 77605  

रेलवे की सफाई व्यवस्था पर अब यात्रियों की नजर, ट्रेन में होगी औचक जांच; सीधे लिया जाएगा फीडबैक

 अंबाला  ट्रेन में कंबल-तकिया साफ मिला या नहीं, टॉयलेट की हालत कैसी थी और डिब्बे में सफाई हुई या नहीं अब रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था का फीडबैक सीधे यात्री देंगे। ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ के तहत रेलवे ने ट्रेनों में सफाई व्यवस्था की औचक जांच से लेकर यात्रियों की प्रतिक्रिया लेने तक की पूरी व्यवस्था तैयार की है। देश में रोजाना दो करोड़ से अधिक यात्रियों के रेल से सफर करने के बीच रेलवे का जोर अब सफाई को सिर्फ कर्मचारी की जिम्मेदारी रखने के बजाय यात्री को भी अभियान का हिस्सा बनाने पर है चलती ट्रेनों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा (ओबीएचएस) के पर्यवेक्षक और संबंधित ठेकेदार शौचालय, यात्री डिब्बों, लिनेन और पेंट्री कार की औचक जांच करेंगे। एसी कोच में यात्रियों को दिए जाने वाले चादर, कंबल और तकिये की सफाई पर भी नजर रहेगी। यात्रियों से सफाई व्यवस्था और उपलब्ध कराए गए लिनेन को लेकर फीडबैक लिया जाएगा रेलवे ने अभियान को ट्रेनों और स्टेशनों तक सीमित न रखकर स्वच्छता शपथ को जनभागीदारी का आधार बनाने की तैयारी की है। दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के अवसर पर शपथ दिलाई जाएगी। शपथ में हर व्यक्ति ‘न गंदगी करूंगा, न करने दूंगा’ के संकल्प के साथ स्वच्छता की शुरुआत खुद से, परिवार, मोहल्ले, गांव-शहर और कार्यस्थल से करने का वचन लेगा। अफसरों की भी तय होगी जिम्मेदारी रेलवे बोर्ड से लेकर जोन, मंडल और स्टेशन स्तर तक अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। डीआरएम स्तर पर अभियान की निगरानी, ट्रैक-यार्ड की सफाई, स्टेशन प्रबंधन और ट्रेनों में ओबीएचएस व्यवस्था की जांच के लिए अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। एक अक्टूबर को बड़े स्तर पर श्रमदान और दो अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस के कार्यक्रम होंगे। यानी इस बार रेलवे की स्वच्छता मुहिम में झाड़ू भी चलेगी, शपथ भी होगी और यात्री की जुबान से सफाई की असली रिपोर्ट भी सामने आएगी। हर व्यक्ति 100 लोगों को जोड़ेगा स्वच्छता शपथ में प्रत्येक व्यक्ति से साल में 100 घंटे यानी हर सप्ताह कम से कम दो घंटे स्वच्छता के लिए देने का संकल्प कराया जाएगा। शपथ लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति 100 अन्य लोगों को स्वच्छता से जोड़ने और उन्हें भी शपथ दिलाने का प्रयास करेगा। स्टेशनों पर उद्घोषणा प्रणाली से ‘मेरी सीट, मेरा डिब्बा’ थीम पर लगातार स्वच्छता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। यात्रियों को पंपलेट बांटे जाएंगे और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड पर भी स्वच्छता शपथ एवं जागरूकता संदेश दिखाए जाएंगे। यानी प्लेटफार्म से ट्रेन की सीट तक यात्री को यह याद दिलाया जाएगा कि सफाई केवल रेलवे की नहीं, उसकी भी जिम्मेदारी है