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जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद केंद्र सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद-223 के तहत यह नियुक्ति की है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने से पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो गया था, जिसके चलते जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के दायित्व सौंपे गए हैं। अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तब तक प्रभावी रहेगी जब तक हाई कोर्ट को नियमित मुख्य न्यायाधीश नहीं मिल जाता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा का न्यायिक और विधिक क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कालेज से अर्थशास्त्र में बीए (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराने के बाद उन्होंने मुख्य रूप से सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में वकालत की। अपने वकालती करियर के दौरान उन्होंने नोएडा प्राधिकरण, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन तथा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन सहित कई सार्वजनिक और वैधानिक संस्थाओं का पक्ष रखा। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भी महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पेश होते रहे। वर्ष 2013 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया गया। जस्टिस मिश्रा ने 3 फरवरी 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बने। 21 जुलाई 2025 को उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुआ था। न्यायिक कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट में रहते हुए उनकी पीठ ने चर्चित निठारी सीरियल किलिंग मामले में अहम निर्णय सुनाया था। वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में उन्होंने अवैध खनन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश पारित किए और सेवा तथा संवैधानिक कानून से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय निर्णय दिए। जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चार जज हो गए जिनका संबध पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जिस्टस ए जी मसीह व जस्टिस अरुण पल्ली , पंजाब एवं हरियाणा हाई के कोटे से सुप्रीम कोर्ट में है जबकि जस्टिस शील नागू पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ रहते हुए मध्य प्रदेश कोटे से सुप्रीम कोर्ट पंहुचे है।

11 फर्जी एंट्री का दावा, विभागीय दस्तावेजों में गड़बड़ी से बढ़ा होमगार्ड घोटाले का मामला

चंडीगढ़ होमगार्ड वेलफेयर एवं भर्ती घोटाले की जांच में गृह रक्षी विभाग (होमगार्ड) से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि विभागीय रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर कुछ स्वयंसेवकों (होमगार्ड) का दोबारा नामांकन कराया गया। जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितता की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के अधिकारी जांच प्रभावित होने का हवाला देते हुए आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्य मुख्यालय ने अगस्त 2021 में 13 लोगों को दोबारा होमगार्ड के रूप में नामांकित करने की मंजूरी दी थी। बाद में रिकॉर्ड की जांच के दौरान पाया गया कि इनमें से 11 लोगों के नाम फर्जी तरीके से लॉन्ग रोल रजिस्टर में दर्ज किए गए थे। जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन सेंटर कमांडर स्तर पर रिकॉर्ड में फ्लूड लगाकर और बाद में प्रविष्टियां कर हेराफेरी की गई। जांच टीम ने 18 और 19 अक्तूबर 2021 को संबंधित कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की। जांच में पाया गया कि जिन 11 लोगों के नाम दर्ज किए गए थे, उनके व्यक्तिगत नामांकन फॉर्म, सेवा रिकॉर्ड, ड्यूटी कॉल-आउट रजिस्टर, भुगतान प्राप्ति रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध ही नहीं थे। इतना ही नहीं, राज्य मुख्यालय को भेजी गई उनकी सेवा अवधि संबंधी रिपोर्ट भी संदिग्ध पाई गई। जांच के बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने के साथ राज्य मुख्यालय को इन 11 लोगों की पुनर्नियुक्ति मंजूरी रद्द करने की सिफारिश की थी। इसके अलावा रिकॉर्ड से छेड़छाड़, फर्जी रिपोर्ट भेजने और सरकारी दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है। रविवार को दर्ज मिली भर्ती की तारीख रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। कुछ होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती की तारीख रविवार के दिन दर्ज मिली, जबकि कुछ की सेवा मुक्ति सरकारी अवकाश के दिन दर्शाई गई है। जांच अधिकारियों ने इसे रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी और सुनियोजित फर्जीवाड़े का संकेत माना है। उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी जांच की आंच एसीबी ने होमगार्ड विभाग के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी को पूछताछ के लिए तलब नहीं किया गया है। शिकायत के अनुसार अनियमितताओं का यह मामला वर्ष 2010 से 2025 के बीच का बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच की आंच विभाग के उच्च अधिकारियों तक कब पहुंचेगी और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी।  

तेज आंधी से हरियाणा में भारी तबाही, बिजली व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित

बहल/चंडीगढ़. तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने वीरवार देर शाम आए बहल क्षेत्र में भारी तबाही मचाते हुए बिजली वितरण व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जहां एक ओर मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं ने बिजली विभाग के ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित रहा और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कई घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली वितरण निगम की बहल सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 340 बिजली के खंभे टूटकर या गिरकर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं, जबकि कृषि सिंचाई के लिए लगाए गए 50 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर भी धराशाई हो गए। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ा है। बहल सब डिवीजन के सहायक महाप्रबंधक ऋषभ कुमार ने बताया कि तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार विभाग को करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। ऋषभ कुमार ने कहा कि अधिकांश गांवों में घरेलू बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। वहीं, कृषि और सिंचाई से संबंधित बिजली लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभाग के फील्ड कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं और जल्द ही सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।

स्कॉर्पियो में मिले चार शवों के मामले में चौंकाने वाला खुलासा, परिवार ही निकला हत्यारा

अजमेर  राजस्थान के अजमेर जिले के बोराड़ा थाना क्षेत्र में स्कॉर्पियो कार में चार लोगों के जले हुए शव मिलने का मामला एक बड़े पारिवारिक हत्याकांड के रूप में सामने आया है पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कुछ ही घंटों में मामले का खुलासा कर दिया। जांच में सामने आया कि इस वारदात को मृतक पूर्व सरपंच रामसिंह चौधरी के 17 वर्षीय नाबालिग बेटे ने अपनी मां और बहन के साथ मिलकर अंजाम दिया था। दूसरी शादी के बाद परिवार में बढ़ा तनाव पुलिस ने मृतक की पहली पत्नी सुनीता चौधरी, उनकी बेटी और नाबालिग बेटे को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार, घटना की जड़ में लंबे समय से चला आ रहा पारिवारिक विवाद था। जांच में पता चला कि रामसिंह चौधरी ने वर्ष 2005 में सुनीता चौधरी से विवाह किया था, जिससे उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। बाद में वर्ष 2019 में उन्होंने सुरज्ञान नामक महिला से दूसरा विवाह कर लिया। दूसरी शादी के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और घर में अक्सर विवाद होने लगे। बेटे ने बताई हत्या की वजह पुलिस पूछताछ में नाबालिग बेटे ने बताया कि उसका पिता शराब पीकर अक्सर उसकी मां, बहन और उसके साथ मारपीट करता था। आरोपी के अनुसार, उसकी मां को लगातार प्रताड़ित किया जाता था, जिससे उसके मन में पिता के प्रति गहरा गुस्सा पैदा हो गया था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने पहले से हत्या की योजना बना रखी थी। उसने ऑनलाइन एक चाकू मंगवाया था। 27 मई को घर में फिर विवाद हुआ और उसी रात जब रामसिंह सो गए तो बेटे ने कथित रूप से उनका गला काट दिया। पुलिस ने क्या बताया? पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान दूसरी पत्नी सुरज्ञान ने आरोपी को देख लिया था। इसके बाद उसने सुरज्ञान पर भी हमला कर दिया। शोर सुनकर वहां पहुंचीं दादी पूसी देवी और रिश्ते की बहन महिमा पर भी हमला किया गया, जिससे चारों की मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपियों ने पूरे मामले को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, चारों शवों को स्कॉर्पियो में रखा गया और ट्रैक्टर से निकाले गए डीजल की मदद से वाहन में आग लगा दी गई। फोरेंसिक जांच में खुले कई राज इसके बाद आरोपियों ने घर लौटकर खून के निशान मिटाने के लिए फर्श और दीवारों को पानी और केमिकल से साफ करने का प्रयास किया। पुलिस को शुरुआत में बताया गया कि परिवार अस्पताल जा रहा था और शॉर्ट सर्किट के कारण कार में आग लग गई। हालांकि फोरेंसिक जांच में कई ऐसे सबूत मिले जिन्होंने इस कहानी को झूठा साबित कर दिया। कार की पिछली सीटें मुड़ी हुई मिलीं, एक शव वाहन से बाहर मिला, घर में खून के निशान पाए गए, ट्रैक्टर से डीजल निकाले जाने के प्रमाण मिले और घटनास्थल की स्थिति भी हादसे की कहानी से मेल नहीं खाती थी। पहले भी की थी हत्या की कोशिश पुलिस पूछताछ में नाबालिग आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह पहले भी कई बार अपने पिता की हत्या की कोशिश कर चुका था। उसने कथित रूप से खाने में जहर मिलाने और पहाड़ी से धक्का देने की योजना भी बनाई थी, लेकिन सफल नहीं हो पाया। आखिरकार उसने ऑनलाइन मंगाए गए चाकू का इस्तेमाल कर इस वारदात को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है।

तेज तूफान से बहल क्षेत्र में बड़ा नुकसान, 50 से ज्यादा ट्रांसफार्मर गिरे

बहल  तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने वीरवार देर शाम आए बहल क्षेत्र में भारी तबाही मचाते हुए बिजली वितरण व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जहां एक ओर मौसम में आए बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर तेज हवाओं ने बिजली विभाग के ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचाया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम जनजीवन प्रभावित रहा और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को कई घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली वितरण निगम की बहल सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 340 बिजली के खंभे टूटकर या गिरकर क्षतिग्रस्त पाए गए हैं, जबकि कृषि सिंचाई के लिए लगाए गए 50 से अधिक बिजली ट्रांसफार्मर भी धराशाई हो गए। इससे कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर भी व्यापक असर पड़ा है। बहल सब डिवीजन के सहायक महाप्रबंधक ऋषभ कुमार ने बताया कि तेज आंधी के कारण कई स्थानों पर बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार विभाग को करीब 22 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने बताया कि बिजली कर्मचारियों की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं। ऋषभ कुमार ने कहा कि अधिकांश गांवों में घरेलू बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। वहीं, कृषि और सिंचाई से संबंधित बिजली लाइनों एवं ट्रांसफार्मरों को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। विभाग के फील्ड कर्मचारी दिन-रात काम कर रहे हैं और जल्द ही सभी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री सैनी का एक्शन: निर्माण में कमी मिलने पर बड़ी कार्रवाई

 करनाल  जिला परिषद की 34 करोड़ रुपये की पांच मंजिला बिल्डिंग के निर्माण में कमी पाए जाने पर पंचायती राज विभाग के दो कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईएन) को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निलंबित कर दिया। इनमें पंचायती राज विभाग के तत्कालीन व वर्तमान में कैथल में तैनात परमिंद्र सिंह और करनाल में तैनात नारायण दत्त शर्मा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में जांच बैठाई है। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय से जांच टीम मौके पर पहुंची और बिल्डिंग का मुआयना किया। बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी पर भी कार्रवाई की तैयारी है। क्वालिटी कंट्रोल विंग की ओर से निर्माणाधीन भवन के कुछ पिलरों में तकनीकी कमी संबंधी तस्वीरें मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थीं। तस्वीरों में पिल्लरों टेढ़े दिखाई देने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने तुरंत संज्ञान लिया और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा और एक्सईएन परमिंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। निर्माण कार्य एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा की निगरानी में चल रहा था। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस पांच मंजिला इमारत का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, लेकिन निर्माण के बीच ही बिल्डिंग के ढांचे पर सवाल उठ गए और बड़ी कार्रवाई हो गई। चंडीगढ़ से करनाल पहुंची जांच टीम मामला सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चंडीगढ़ से करनाल पहुंचे और निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। विभाग के चीफ इंजीनियर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी पहलुओं और क्वालिटी कंट्रोल विंग की रिपोर्ट को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बारे में कार्यकारी अभियंताओं का दावा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उनका कहना है कि भवन पूरी तरह तय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है और क्वालिटी कंट्रोल विंग द्वारा खींची गई तस्वीरों का एंगिल सही नहीं था, जिसके कारण पिल्लर व बीम टेढ़े दिखाई दिए।

चंडीगढ़िया मोहल्ले में पुलिस की छापेमारी, 5.71 लाख रुपये बरामद

सिरसा  सीआईए ऐलनाबाद पुलिस टीम ने शहर के चंडीगढ़िया मोहल्ला क्षेत्र में एक मकान पर दबिश देकर बड़े स्तर पर चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से मकान मालिक सहित 25 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकद राशि तथा ताश के पत्ते बरामद किए हैं। पुलिस प्रवक्ता एएसआई राजपाल ने बताया कि सीआईए ऐलनाबाद की पुलिस टीम बीती रात गश्त के दौरान आइटीआइ चौक क्षेत्र में मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि चंडीगढ़िया मोहल्ला निवासी दीपक उर्फ काका अपने घर में कई लोगों को इकट्ठा कर बड़े स्तर पर जुआ खिलवा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए मकान पर दबिश दी। पुलिस को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर सभी को मौके पर ही काबू कर लिया। तलाशी लेने पर आरोपितों के कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकदी और ताश के पत्ते बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान हिसार निवासी महेंद्र, ललित कुमार, बलजिंद्र, चंद्रगोपाल, सुनील, अनिल, शसन, मुकेश, सुरेंद्र, राकेश, राजेश, कालांवाली निवासी गुरदित्ता तथा सिरसा निवासी पवन कुमार, मनोज कुमार, अमन, प्रिंस, सज्जन कुमार, दीपक, योगेश और सौरभ चावला सहित अन्य के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ थाना शहर सिरसा में जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मकान में चल रहा था जुए का खेल, पुलिस रेड में 25 लोग दबोचे गए

सिरसा. सीआईए ऐलनाबाद पुलिस टीम ने शहर के चंडीगढ़िया मोहल्ला क्षेत्र में एक मकान पर दबिश देकर बड़े स्तर पर चल रहे जुए के अड्डे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से मकान मालिक सहित 25 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकद राशि तथा ताश के पत्ते बरामद किए हैं। पुलिस प्रवक्ता एएसआई राजपाल ने बताया कि सीआईए ऐलनाबाद की पुलिस टीम बीती रात गश्त के दौरान आइटीआइ चौक क्षेत्र में मौजूद थी। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि चंडीगढ़िया मोहल्ला निवासी दीपक उर्फ काका अपने घर में कई लोगों को इकट्ठा कर बड़े स्तर पर जुआ खिलवा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बताए गए मकान पर दबिश दी। पुलिस को देखकर मौके पर मौजूद लोग भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस टीम ने घेराबंदी कर सभी को मौके पर ही काबू कर लिया। तलाशी लेने पर आरोपितों के कब्जे से 5 लाख 71 हजार 105 रुपये की नकदी और ताश के पत्ते बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान हिसार निवासी महेंद्र, ललित कुमार, बलजिंद्र, चंद्रगोपाल, सुनील, अनिल, शसन, मुकेश, सुरेंद्र, राकेश, राजेश, कालांवाली निवासी गुरदित्ता तथा सिरसा निवासी पवन कुमार, मनोज कुमार, अमन, प्रिंस, सज्जन कुमार, दीपक, योगेश और सौरभ चावला सहित अन्य के रूप में हुई है। पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ थाना शहर सिरसा में जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है।

पंचकूला में हाई लेवल बैठक, परीक्षा और कानून व्यवस्था पर सख्त निगरानी

पंचकूला  21 जून को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न करवाना हरियाणा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। खुफिया तंत्र सक्रिय रहेगा और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद पूरे मामले को मॉनिटर कर रहे हैं। इसी संबंध में शुक्रवार को पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। प्रदेश में कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नीट परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था तथा नशामुक्त हरियाणा अभियान की भी समीक्षा की गई। बैठक में प्रदेशभर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। डीजीपी ने सभी अधिकारियों को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप गंभीरता, सतर्कता और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए। डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केंद्रों का समय रहते निरीक्षण किया जाए तथा सुरक्षा, निगरानी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को पहले से सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने के निर्देश देते हुए कहा कि पेपर लीक अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर हरियाणा पुलिस की नजर रहनी चाहिए। बैठक में नशामुक्त हरियाणा अभियान को लेकर भी व्यापक चर्चा की गई। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो संजय कुमार ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार नशामुक्त अभियान को लेकर काफी संवेदनशील है तथा उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है। नशा तस्करी के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश एडीजीपी संजय कुमार ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में बढ़ती नशा तस्करी का सीधा प्रभाव हरियाणा पर पड़ता है। ऐसे में डिमांड और सप्लाई दोनों स्तरों पर रणनीतिक कार्रवाई करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशा बिक्री अथवा स्टोरेज की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जाए। मेडिकल स्टोर एवं केमिस्ट एसोसिएशनों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएं तथा केमिस्ट शाप्स के स्टाक, सीसीटीवी सिस्टम और रिकार्ड की लगातार निगरानी की जाए। डीजीपी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन हर परिस्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल को सदैव तैयार रहना होगा। प्रत्येक जिले में गठित कानून एवं व्यवस्था कंपनियों का नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।

निर्माण में लापरवाही पड़ी भारी! करनाल मामले में दो XEN सस्पेंड, CM सैनी ने लिया बड़ा फैसला

करनाल. जिला परिषद की 34 करोड़ रुपये की पांच मंजिला बिल्डिंग के निर्माण में कमी पाए जाने पर पंचायती राज विभाग के दो कार्यकारी अभियंताओं (एक्सईएन) को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निलंबित कर दिया। इनमें पंचायती राज विभाग के तत्कालीन व वर्तमान में कैथल में तैनात परमिंद्र सिंह और करनाल में तैनात नारायण दत्त शर्मा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के लिए चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में जांच बैठाई है। शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित मुख्यालय से जांच टीम मौके पर पहुंची और बिल्डिंग का मुआयना किया। बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी पर भी कार्रवाई की तैयारी है। क्वालिटी कंट्रोल विंग की ओर से निर्माणाधीन भवन के कुछ पिलरों में तकनीकी कमी संबंधी तस्वीरें मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी गई थीं। तस्वीरों में पिल्लरों टेढ़े दिखाई देने पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने तुरंत संज्ञान लिया और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा और एक्सईएन परमिंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। निर्माण कार्य एक्सईएन नारायणदत्त शर्मा की निगरानी में चल रहा था। करीब 34 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस पांच मंजिला इमारत का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा किया जाना है, लेकिन निर्माण के बीच ही बिल्डिंग के ढांचे पर सवाल उठ गए और बड़ी कार्रवाई हो गई। चंडीगढ़ से करनाल पहुंची जांच टीम मामला सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चंडीगढ़ से करनाल पहुंचे और निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया। विभाग के चीफ इंजीनियर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी पहलुओं और क्वालिटी कंट्रोल विंग की रिपोर्ट को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक की। इस बारे में कार्यकारी अभियंताओं का दावा है कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है। उनका कहना है कि भवन पूरी तरह तय मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है और क्वालिटी कंट्रोल विंग द्वारा खींची गई तस्वीरों का एंगिल सही नहीं था, जिसके कारण पिल्लर व बीम टेढ़े दिखाई दिए।