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एनसीआर के पेट्रोल पंपों पर लगेंगे ANPR कैमरे, 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन होंगे जब्त

चंडीगढ़ हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामिल सभी शहरों में पेट्रोल पंपों पर परिवहन विभाग आटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाने जा रहा है। यह कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पढ़कर बता देंगे कि वह कितना पुराना है। इसके बाद मौके पर ही 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों और दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों को जब्त कर लिया जाएगा। पहली अक्टूबर से ऐसे वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। प्रथम चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 एएनपीआर कैमरे स्थापित किए जाएंगे, जिन पर लगभग 41 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होंगे। 30 सितंबर तक गुरुग्राम में 249, सोनीपत में 215, झज्जर में 195 तथा फरीदाबाद में 116 एएनपीआर कैमरे लगाने का लक्ष्य है। जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की पहचान तथा पर्यावरणीय मानकों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए एएनपीआर कैमरे लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। विज ने बताया कि यह कार्य वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। प्रदेश में कुल 2780 एएनपीआर कैमरे लगाए जाने की आवश्यकता है। एक अक्टूबर से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों को ईंधन की आपूर्ति नहीं की जाएगी। सरकार का उद्देश्य केवल एएनपीआर कैमरे स्थापित करना नहीं है, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से पुराने एवं जीवन-अवधि पूर्ण कर चुके वाहनों की प्रभावी पहचान करना तथा पर्यावरण संरक्षण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों को लागू करना है। एएनपीआर तकनीक के माध्यम से वाहनों की पहचान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा तथा एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।  

ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था पर संकट, हरियाणा में 2.38 लाख जमीन इंतकाल सिस्टम में अटके

कैथल प्रदेश के रेवेन्यू पोर्टल में आ रही तकनीकी कमी के कारण पूरे जमीन के 2,38,688 इंतकाल (म्यूटेशन) लंबित हैं। सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री के बाद 11वें दिन अपने आप इंतकाल दर्ज होने वाली ऑटो-म्यूटेशन व्यवस्था शुरू की थी, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। इस व्यवस्था में सुधार लाने और साफ्टवेयर की कमियों को दूर करने के लिए प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो भी विरोध जता चुके हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। रजिस्ट्री होने के बाद भी इंतकाल सिस्टम में उलझे है। प्रदेश में 2,07,560 इंतकाल पटवारियों की ओर से लंबित है। इनके अलावा 10,537 कानूनगो की तरफ से लंबित है। पटवारियों का तर्क है कि मंजूर करने के बाद भी लंबित दिखाई दे रहे हैं। इंतकाल नहीं हो रहा दर्ज: महेंद्र पट्टी अफगान के महेंद्र ने बताया कि दो माह पहले उसकी रजिस्ट्री हो गई थी, लेकिन अब इंतकाल नहीं हो रहा है। रकबा गलत उठा रहा है। इसकी कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। सोमवार को पूरा दिन पोर्टल नहीं चला, मंगलवार को पोर्टल तो चला, लेकिन गलत रकबा उठाने के कारण उसका इंतकाल नहीं हो रहा है। इंतकाल पौने एकड़ का दिखाया: वीरभान चौधरी पट्टी के वीरभान ने बताया कि उसके मां के नाम जमीन ली थी। उन्होंने एक एकड़ जमीन की खरीद की थी, लेकिन इंतकाल में पौना एकड़ दिखा रहा है। पटवारी का कहना है कि पोर्टल की खामियों के कारण ऐसा हो रहा है। वह एक माह से पटवारखाने के चक्कर लगा रहा है। राजस्व विभाग को इसके लिए कोई व्यवस्था करनी चाहिए। दी रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र खटकड़ ने बताया कि साफ्टवेयर अब भी कुछ खामिया बची है, इसमें सुधार किया जा रहा है।सबसे ज्यादा दिक्कत पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं, रकबा गलत दिखा रहा है। जानिये, जिलों की स्थिति सोनीपत में 17,486 इंतकाल लंबित हैं। इसी तरह अंबाला में 14,486,भिवानी में 10,879, चरखी-दादरी में 5215, फरीदाबाद में 13,786, फतेहाबाद में 7663, गुरुग्राम में 12,603, हांसी में 5837, हिसार में 8484, झज्जर में 12,528, जींद में 13,856, कैथल में 10,255, करनाल में 9397, कुरुक्षेत्र में 10,461, महेंद्रगढ़ में 6826, नूंह में 9196, पलवल में 13,000, पंचकूला में 4225, पानीपत में 14,486, रेवाड़ी में 12,510, रोहतक में 7825 और सिरसा में 9574 इंतकाल लंबित हैं। असली मालिकों के नाम गायब कई इंतकालों में प्रिंट निकालने पर वे खाली आ रहा हैं या रजिस्ट्री में दर्ज जमीन की मात्रा कम दिखाई दे रही है। साफ्टवेयर के झोल के कारण कुछ जमीनों के रिकार्ड से असली मालिकों के नाम ही गायब हो गए हैं। पुराने इंतकाल वापस हो रहे हैं। पटवारी मंजूर करता है तो, एक खेवट में एक इंतकाल है। लोगों ने बताया कि सोमवार को पूरा दिन साइट नहीं चली। इस कारण इंतकाल में हिस्से गलत हो रहे हैं। नए साफ्टवेयर में दस पेज की कमांड देते है तो दो पेज का रिकार्ड मिलता है, रिकार्ड अधूरा मिल रहा है।  

भगवंत मान के ‘नकली पगड़ी’ तंज पर भड़के नायब सैनी, गुरुओं और पंजाब की जनता से माफी की मांग

चंडीगढ़  पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के लिए अहम राजनीतिक चेहरा बनते जा रहे हैं। पंजाब में उनका लगातार दौरा, सिर पर सजी दस्तार और पंजाबी भाषा में मतदाताओं से संवाद अब मात्र सियासी सक्रियता नहीं रह गया, बल्कि राजनीति में पहचान और प्रतीक की बहस का हिस्सा बन गया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नायब सिंह सैनी की पगड़ी को ‘नकली’ बताकर एक अलग ही मुद्दे को हवा दे दी है, जिस पर अब दोनों दल आमने-सामने हो गए। नायब ने भी अपनी दस्तार को गुरुओं के सम्मान से जोड़ते हुए भगवंत मान पर पलटवार किए हैं। नायब सैनी जब पंजाब पहुंचते हैं तो उनका अंदाज स्थानीय रंग में नजर आता है। सिर पर पगड़ी और जुबान पर पंजाबी के जरिए वे पंजाबियों के बीच राजनीतिक संवाद कायम करने की कोशिश करते हैं। भाजपा के लिए यह पड़ोसी राज्य में नायब सैनी की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। भगवंत मान ने इसी रणनीति पर निशाना साधा है। इस पूरे विवाद ने फिलहाल पंजाब की चुनावी सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है- क्या पंजाब की राजनीति में पगड़ी सिर्फ पहचान का प्रतीक रहेगी या आने वाले चुनाव में यह राजनीतिक दावे और जवाबी दावों का हथियार भी बनेगी। भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि नायब सैनी अपनी गाड़ी में पगड़ी रखते हैं और चंडीगढ़ व पंचकूला से उसे सिर पर रखकर पंजाब पहुंचते हैं। उन्होंने तंज कसा कि शायद सैनी को लगता है कि ‘नकली पगड़ी’ पहनकर वे पंजाबियों का दिल जीत लेंगे या कोई राजनीतिक फायदा हासिल कर लेंगे। मान का यह हमला दरअसल सैनी के पंजाब दौरे और स्थानीय पहचान के साथ उनके जुड़ाव की कोशिश पर सीधा राजनीतिक सवाल है। भगवंत मान के बयान पर नायब सैनी ने बेहद तीखा पलटवार किया है। उन्होंने पगड़ी को राजनीतिक पहनावा मानने की बजाय इसे सिख गुरुओं की परंपरा, सम्मान और लोगों के स्वाभिमान से जोड़ दिया। सैनी ने कहा कि पगड़ी गुरु रूप है। भगवंत मान ने दस्तार को नकली पगड़ी कहकर जनता का अपमान किया है। नायब सैनी ने दो कदम आगे बढ़ते हुए भगवंत मान से माफी मांगने की मांग कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर मान ने दस्तार को ‘नकली पगड़ी’ कहा है तो उन्हें उस पवित्र स्थान पर जाकर माफी मांगनी चाहिए, जहां गुरुओं ने इस दस्तार को सजाया था। मान को पंजाब के लोगों से भी माफी मांगनी चाहिए। सैनी ने गुरुओं के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियों की वजह से ही समाज और देश आज इस मुकाम पर है। पगड़ी की राजनीति पर इस तरह बदला माहौल यह पलटवार सैनी के लिए सिर्फ अपने ऊपर लगे आरोप का जवाब नहीं है। उन्होंने विवाद को धार्मिक और भावनात्मक प्रतीक से जोड़कर इसकी राजनीतिक जमीन ही बदल दी है। जहां मान का निशाना सैनी के ‘पंजाबी अंदाज’ पर था, वहीं सैनी ने जवाब में दस्तार के सम्मान को केंद्र में ला दिया है। मान का हमला भाजपा के दावे को चुनौती देने की कोशिश पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने राजनीतिक आधार का विस्तार करने की कोशिश कर रही है। हरियाणा भाजपा के प्रभारी डॉ. सतीश पुनिया को पंजाब भाजपा का नया प्रभारी बना दिया गया है। वे भी पगड़ी पहनकर पंजाब में निकल पड़े हैं। ऐसे में नायब सिंह सैनी का लगातार पंजाब दौरा पार्टी की रणनीति में खास महत्व रखता है। भाजपा इस कनेक्ट को राजनीतिक पूंजी में बदलना चाहती है। यही वजह है कि सैनी की पगड़ी अब उनके व्यक्तिगत पहनावे से आगे निकलकर राजनीतिक संदेश बन चुकी है। दूसरी ओर, भगवंत मान के लिए चुनौती यह है कि भाजपा पंजाब में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए ऐसे चेहरों और मुद्दों को सामने ला रही है, जो प्रदेश की भाषा और संस्कृति से जुड़ाव का दावा करते हैं। मान का हमला भाजपा के इसी राजनीतिक दावे को चुनौती देने की कोशिश है।

20 साल से इंतजार कर रहे गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण पर सरकार ने शुरू किया परीक्षण

 चंडीगढ़ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब 20 वर्षों से सेवाएं दे रहे करीब 12 हजार गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण की मांग पर प्रदेश सरकार के स्तर पर अब प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 31 अगस्त को हुई बैठक के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले को आगे परीक्षण के लिए भेज दिया है। इससे लंबे समय से नियमितीकरण की राह देख रहे अतिथि अध्यापकों को उम्मीद बंधी है कि सरकार इस मुद्दे का व्यावहारिक समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता ने सीएम के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव को गेस्ट टीचरों के नियमितीकरण से जुड़े मामले को मार्क किया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश और नियमितीकरण की प्रक्रिया से संबंधित पूरी रिपोर्ट तैयार करने तथा मुख्यमंत्री को इससे अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित पत्र पर 15 सितंबर की तारीख अंकित है। ऐसे में अब अधिकारियों के स्तर पर मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। दरअसल, 31 अगस्त को विधानसभा सत्र के बाद विधानसभा सचिवालय परिसर में मुख्यमंत्री के साथ गेस्ट टीचरों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई थी। इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने अतिथि अध्यापकों के नियमितीकरण से जुड़े हाई कोर्ट के आदेश और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग का मुद्दा प्रमुखता से रखा था। यह वीडियो भी देखें मुख्यमंत्री ने मामले में अंतिम स्तर की बैठक बुलाकर ठोस समाधान निकालने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की ओर से फाइल आगे बढ़ाया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गेस्ट टीचर इससे पहले शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और निदेशक के साथ भी अपनी मांग उठा चुके हैं। विधानसभा सत्र से पहले उन्होंने सरकार के मंत्रियों और विपक्षी विधायकों को भी ज्ञापन सौंपे थे। विपक्षी विधायकों ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। करीब 20-21 वर्षों की सेवा का हवाला देते हुए गेस्ट टीचर नियमितीकरण को केवल नौकरी का विषय नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा के सम्मान और परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से मामला अधिकारियों को भेजे जाने के बाद उनकी नजर अगली बैठक और रिपोर्ट पर है। हालांकि, अभी नियमितीकरण का अंतिम निर्णय होना बाकी है, लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से मामले का दोबारा सक्रियता से परीक्षण शुरू होना गेस्ट टीचरों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।  

हिसार में स्वाइन फ्लू के 4 नए मरीज मिले, संक्रमितों की संख्या बढ़कर 70 हुई

हिसार  स्वाइन फ्लू के कारण एक और महिला मरीज की मौत हो गई। जिले में स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या तीन पर पहुंच गई है। मरने वाली तीनों महिलाएं हैं। मंगलवार को चार और स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आए। इससे जिले में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की संख्या 70 पर पहुंच गई है। हालांकि अभी स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मृतक महिला की रिपोर्ट का आडिट किया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी और डिप्टी सीएमओ डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि इस साल अभी तक 70 मरीज स्वाइन फ्लू से ग्रस्त मिले हैं। अभी तक तीन महिला मरीजों की मौत हो चुकी है। दो महिला मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, एक महिला मरीज की फाइल अभी आडिट हो रही है। स्वाइन फ्लू ग्रस्त मरीज और उनके स्वजन को टैमीफ्लू दवा दी जा रही है। खांसी, जुकाम और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए और नागरिक अस्पताल में सैंपल जांच के लिए देना चाहिए। अस्पताल परिसर में स्वाइन फ्लू की निशुल्क जांच की जाती है। लक्षण दिखाई देने पर मुंह पर मास्क लगाकर रखना चाहिए और भीड़भाड़ वाले एरिया में नहीं जाना चाहिए। स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य बुखार की तरह ही होते हैं।

बस रोहतक से सुबह 8:25 पर रवाना होकर गोहाना, पानीपत और जालंधर होते हुए शाम को पहुंचेगी डेरा ब्यास

 रोहतक  हरियाणा रोडवेज से पंजाब का सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। रोहतक से डेरा ब्यास के लिए सीधी बस सर्विस का नया टाइम टेबल सामने आया है। सोनीपत डिपो के गोहाना उपकेंद्र की बस रोहतक से सुबह आठ बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। यह बस गोहाना, पानीपत सहित सात शहरों से होकर गुजरेगी। कहां-कहां से होकर जाएगी बसें हरियाणा रोडवेज के अनुसार, बस रोहतक से सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना, पानीपत, करनाल, अंबाला, राजपुरा, लुधियाना बाईपास, जालंधर और करतारपुर से होते हुए शाम करीब साढ़े पांच बजे डेरा ब्यास तक पहुंचेगी। किस शहर से कितने बजे मिलेगी बस रोहतक से बस 8 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद गोहाना से सुबह 9 बजे प्रस्थान करेगी। पानीपत से सुबह 10 बजे और करनाल से सुबह 11 बजे यह बस रवाना होगी। अंबाला से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर रवाना होगी। जालंधर में शाम चार बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच बजे बस डेरा ब्यास पहुंचेगी। कितना होगा किराया?     रोहतक से लुधियाना का किराया 410 रुपये।     रोहतक से जालंधर का किराया 510 रुपये     रोहतक से डेरा ब्यास का किराया 565 रुपये।     गोहाना से डेरा ब्यास का किराया 535 रुपये ।     पानीपत से डेरा ब्यास का किरााय 480 रुपये। वापसी का समय बस डेरा ब्यास से रात दो बजे रवाना होगी। इसके बाद जालंधर से तीन बजे बस रवाना होगी और अंबाला से सुबह छह बजे बस रोहतक के लिए रवाना होगी  

इस परियोजना और अन्य माध्यमों से हरियाणा को करीब 1280 क्यूसेक पानी मिलने का अनुमान

पंचकूला  हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जानकारी देते हुए कहा कि किसाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर हरियाणा सहित छह राज्यों के बीच आज ऐतिहासिक समझौता हुआ है। परियोजना पूरी होने के बाद इससे तथा अन्य माध्यम से हरियाणा को करीब 1280 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस पानी से सिंचाई तथा पेयजल योजनाओं को सिरे चढ़ाने की योजना हरियाणा सरकार ने बनानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता तथा जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुई बैठक में शामिल होने के बाद हरियाणा भवन में मीडिया से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कई दशक से परियोजना लटकी थी लेकिन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास से आगे बढ़ने जा रही है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास इस नारे के साथ प्रधानमंत्री देश को विकसित करने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का बयान मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि आज किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर समझौता हरियाणा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्षों से लंबित इस परियोजना को संवाद, सहयोग और सहमति के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से धन्यवाद और उनकी पहल और सक्रिय प्रयासों से वर्षों से लंबित इस विषय पर राज्यों के बीच सहमति बनाने का रास्ता साफ हुआ है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल जी का आभार जताया जिन्होंने लगातार राज्यों और संबंधित विभागों के साथ समन्वय करते हुए इस परियोजना को गति दी। बोले- यमुना में हरियाणा के पानी का हिस्सा 48 प्रतिशत है, इसलिए यमुना में पानी की उपलब्धता बढ़ाने पर हमें फ़ायदा होगा। साथ ही दो परियोजना रेणुका जी और लखवार की परियोजना पहले से ही निर्माणाधीन है, जल्द ही किसाऊ परियोजना पर भी काम शुरू होगा इन परियोजनाओं से बढ़ेगी पानी की उपलब्धता इन तीनों परियोजनाओं से कुल 2676 क्युसिक पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, जिसमें हरियाणा का हिस्सा 1280 क्युसिक होगा। यह पानी हमारे प्रदेश की वर्तमान जरूरतों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों की जल आवश्यकताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन में राष्ट्र प्रमुखों के लिए दिए गए गाला डिनर में इंडी गठबंधन राज्यों के मुख्यमंत्री के नहीं आने के सवाल पर सीएम ने कहा कि यह दुखदायी है कि भाजपा का विरोध करते-करते विपक्षी नेता देश का विरोध करने लगे हैं। कार्यक्रम में सभी राज्य के मुख्यमंत्री को बुलाया गया था, जो नहीं आए वही बता पाएंगे कि क्यों नहीं आए।

एवरेस्ट के बाद एल्ब्रुस और किलिमंजारो पर लहराया तिरंगा, डॉ. आशा का सेवन समिट्स मिशन की ओर कदम

रेवाड़ी  भारत की गौरवशाली बेटी 48 वर्षीय डॉ. आशा रेवाड़ी के पुलिस लाइन में रहती हैं l डॉ. आशा के पति अजय सिंह रेवाड़ी में हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। आशा के दो बच्चे हैं एक बेटी (डॉक्टर)और एक बेटा (इंजीनियर) ने एक बार फिर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते हुए एक उल्लेखनीय पर्वतारोहण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने 21 अगस्त 2026 को यूरोप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रुस का सफल आरोहण किया और इसके बाद अपने अभियान को लगातार जारी रखते हुए 29 अगस्त 2026 को अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह किया। दोनों चोटियों को प्रभावी अभियान अवधि के केवल छह दिनों में फतह किया गया, जबकि दोनों समिट डेट के बीच कैलेंडर के अनुसार आठ दिन का अंतर है, जिसमें यात्रा एवं ट्रांजिट समय शामिल है। यह उपलब्धि उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ संकल्प, शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और अनुशासन का प्रमाण है। माउंट एल्ब्रुस यूरोप की सर्वोच्च चोटी पर की फतेह 21 अगस्त 2026 को सुबह 09:07 बजे, डॉ. आशा ने 5,642 मीटर (18,510 फीट) ऊंची माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर यूरोप की सर्वोच्च चोटी को फतह किया। वह अपने साथ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा लेकर शिखर तक पहुंचीं। इसके साथ ही उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और “महिला सशक्तिकरण” के संदेश एवं लोगो भी शिखर तक पहुंचाए। उनका यह आरोहण केवल पर्वतारोहण की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय भावना और महिलाओं की शिक्षा, सशक्तिकरण एवं प्रगति का संदेश दुनिया की ऊंची चोटियों तक पहुंचाने का प्रतीक भी बना। माउंट किलिमंजारो को भी किया फतेह माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई के बाद डॉ. आशा ने अपने महत्वाकांक्षी अभियान को जारी रखा और तंजानिया स्थित माउंट किलिमंजारो की ओर प्रस्थान किया। 29 अगस्त 2026 को सुबह 05:31 बजे, उन्होंने 5,895 मीटर (19,341 फीट) ऊंची उहुरू पीक पर सफलतापूर्वक पहुंचकर अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी को फतह किया। इस प्रकार डॉ. आशा ने यूरोप और अफ्रीका की सर्वोच्च चोटियों को लगातार एक ही अभियान-यात्रा में सफलतापूर्वक फतह किया। जिसमें अंतरराष्ट्रीय यात्रा और अभियान संबंधी व्यवस्थाएं शामिल थीं, जबकि प्रभावी अभियान अवधि छह दिन रही।माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो की लगातार सफल चढ़ाई उनकी असाधारण सहनशक्ति, दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन, शारीरिक क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है। माउंट एवरेस्ट से यूरोप और अफ्रीका की चोटियों तक डॉ. आशा ने वर्ष 2017 में 39 वर्ष की आयु में अपने पहले ही प्रयास में चीन/तिब्बत की ओर से माउंट एवरेस्ट का सफल आरोहण किया था। उन्होंने भारत और विश्व की पहली नर्सिंग ऑफिसर के रूप में माउंट एवरेस्ट फतह करने की पहचान का दावा किया है और उनकी इस उपलब्धि से जुड़े रिकॉर्ड दावे भी किए गए हैं। एक सरकारी नर्सिंग ऑफिसर के रूप में मरीजों की सेवा करने से लेकर माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने और उसके बाद माउंट एल्ब्रुस तथा माउंट किलिमंजारो को फतह करने तक की उनकी यात्रा जनसेवा, साहस, अनुशासन और पर्वतारोहण उत्कृष्टता का अद्भुत उदाहरण है। 27 वर्षों की सरकारी सेवा डॉ. आशा पिछले 27 वर्षों से राजस्थान सरकार में नर्सिंग ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ-साथ उन्होंने पर्वतारोहण और साहसिक अभियानों के अपने जुनून को भी निरंतर आगे बढ़ाया। उनकी यात्रा यह शक्तिशाली संदेश देती है कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा किया जा सकता है। सेवन समिट्स मिशन 2026–27 की ओर माउंट एवरेस्ट, माउंट एल्ब्रुस और माउंट किलिमंजारो को सफलतापूर्वक फतह करने के बाद डॉ. आशा अब अपने महत्वाकांक्षी “सेवन समिट्स मिशन 2026–27” की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।उनका अंतिम लक्ष्य सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफलतापूर्वक पहुंचना और एक भारतीय महिला पर्वतारोही एवं स्वास्थ्य सेवा कर्मी के रूप में एक प्रेरणादायक अंतरराष्ट्रीय उदाहरण स्थापित करना है। एयर पिस्टल शूटिंग में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन पर्वतारोहण के साथ-साथ डॉ. आशा एक उत्कृष्ट एयर पिस्टल शूटर भी हैं। वह 10 मीटर, 25 मीटर और 50 मीटर की स्पर्धाओं में भाग लेती हैं।वर्ष 2025 में उन्होंने मास्टर्स महिला वर्ग में 4 स्वर्ण और 3 कांस्य पदक जीते। यह उपलब्धि उनकी फिटनेस, एकाग्रता, सटीकता, अनुशासन और प्रतिस्पर्धात्मक उत्कृष्टता को दर्शाती है। शिखर से भी आगे — एक प्रेरणादायक संदेश डॉ. आशा की यात्रा राजस्थान के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दुनिया की सर्वोच्च चोटियों तक पहुंची है। यह केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की महिलाओं और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है। भारतीय तिरंगा, महिला सशक्तिकरण तथा “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश पर्वतों की चोटियों तक पहुंचाकर डॉ. आशा ने पर्वतारोहण को समाज में जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बनाया है।    

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शिक्षा निदेशालय का निर्देश: एचटेट पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त होगी

चंडीगढ़ हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बिना हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) पास किए पढ़ा रहे करीब 25 हजार शिक्षकों को अब एचटेट पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि एक सितंबर 2025 को जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से ज्यादा समय बाकी था, उनके लिए एचटेट अनिवार्य है। उन्हें अपने पढ़ाए जाने वाले विषय अथवा स्तर (पीआरटी, पीजीटी व टीजीटी) का एचटेट पास करना होगा। पास नहीं करने पर सेवा समाप्त की जा सकती है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है। ऐसे सभी शिक्षकों को अगस्त 2028 तक एचटेट परीक्षा पास करनी होगी। एक सितंबर 2025 को सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बाकी होने वाले शिक्षकों को एचटेट से छूट दी गई है। ऐसे शिक्षक सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति तक नौकरी कर सकेंगे। हालांकि, उन्हें आगे पदोन्नति नहीं मिलेगी। प्रमोशन के लिए संबंधित विषय का एचटेट पास करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लागू हुआ नियम निदेशालय ने ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य व अन्य मामले में एक सितंबर 2025 को दिए आदेश के आधार पर जारी किए हैं। इस मामले में 29 मई 2026 को दाखिल पुनर्विचार याचिका पर भी आदेश हुआ था। हरियाणा के शिक्षकों की ओर से राहत के लिए दाखिल पुनर्विचार याचिका मई 2026 में खारिज हो चुकी है। साल में दो बार होगा एचटेट बिना एचटेट वाले शिक्षकों को परीक्षा पास करने के पर्याप्त अवसर देने के लिए शिक्षा निदेशालय ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड, भिवानी को साल में दो बार एचटेट आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। नियुक्ति और प्रमोशन पर भी सख्ती जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को सभी संबंधित शिक्षकों को नए नियमों की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। निदेशालय की स्थापना शाखाओं को कहा गया है कि शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही की जाए। शिक्षक संगठन नाराज, सरकार से दखल की मांग हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रभू सिंह ने बताया हरियाणा में एचटेट की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 को जारी हुई थी। यानी उससे पहले जो भी अध्यापक भर्ती हुए थे, उन्होंने पात्रता परीक्षा नहीं दी। ऐसे करीब 25 हजार अध्यापक होंगे। सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, मगर वह खारिज हो गई थी। कई राज्यों ने अपने शिक्षकों को राहत दी है। हरियाणा सरकार से मांग है कि वे इसमें दखल देकर राहत दे।  

हरियाणा में 2814 स्कूलों पर बड़ा एक्शन, 30 सितंबर तक गिरेंगी असुरक्षित इमारतें

चंडीगढ़ हरियाणा में सरकारी स्कूलों में असुरक्षित भवनों को ढहाकर नए कमरे बनाए जाएंगे। प्रदेश में 2814 स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जहां कक्षाएं जर्जर कमरों में चल रही हैं। सभी असुरक्षित भवनों को गिराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है। इतना ही नहीं, मानसून के दौरान जिन 700 स्कूलों में जलभराव की समस्या आई थी, उनमें मिट्टी का भराव करने के साथ ही चहारदीवारी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जल्द ही शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक लेंगे, जिसके चलते विभागीय अधिकारी कमियों को दूर करने में जुट गए हैं। 150 राजकीय विद्यालयों के नए भवन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा 719 उत्कृष्ट विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर काम शुरू हो गया है। इनमें संस्कृति माडल स्कूल, मुख्यमंत्री अर्ली इंग्लिश एंड एक्सीलेंस स्कूल तथा पीएम श्री विद्यालय शामिल हैं। सभी उत्कृष्ट विद्यालयों में नए भवन, अतिरिक्त कक्षाएं, पृथक शौचालय, मजबूत चहारदीवारी, खेल मैदान, विज्ञान व कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, डिजिटल लैब, स्मार्ट कक्षाएं, पुस्तकालय, नया फर्नीचर, टैबलेट तथा अन्य आधुनिक शिक्षण संसाधन प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे। हर जिले में एक माडल बाल-वाटिका बनाई जाएगी। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक ने सभी अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक में कहा है कि असुरक्षित इमारतों को ढहाने से लेकर बजट खर्च न करने वाले अफसरों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। 30 सितंबर तक स्कूल भवनों के सत्यापन, कंडम घोषित करने और ध्वस्तीकरण का काम पूरा करने को कहा गया है। 647 स्कूलों में मौसमी और 53 स्कूलों में स्थायी रूप से पानी भरने की समस्या से निजात पाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारियों को मिट्टी भराव के लिए तुरंत नया बजट एस्टिमेट भेजने को कहा है। स्कूलों में बेकार पड़े कंप्यूटर और प्रिंटर सहित अन्य आइटी उपकरणों को निर्धारित पालिसी के तहत निपटाने के आदेश दिए गए हैं पौधरोपण में अंबाला सबसे आगे, फरीदाबाद और पलवल पिछड़े बैठक में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान की समीक्षा में बताया गया कि हरियाणा में 12.50 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 8.25 लाख पौधे लगा दिए गए हैं। अंबाला जिला लक्ष्य का 119 प्रतिशत काम पूरा कर पहले स्थान पर है, जबकि फरीदाबाद में सिर्फ तीन प्रतिशत और पलवल में सिर्फ आठ प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ है।