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पुनर्वासित युवाओं से मिले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप, जाना हाल-चाल

रायपुर : पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप गांवों के विकास में सहभागी बनने का किया आह्वान, सिंचाई व्यवस्था के दिए निर्देश रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा  नारायणपुर प्रवास के दौरान पुनर्वास केंद्र पहुंचकर हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा से जुड़े युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप भी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने युवाओं से पुनर्वास केंद्र में मिल रही सुविधाओं, प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा की और उन्हें विकास की मुख्यधारा में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप दस्तावेज और सुविधाओं की ली जानकारी           उप मुख्यमंत्री शर्मा ने युवाओं से आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, बैंक खाते सहित अन्य जरूरी दस्तावेजों और शासकीय सुविधाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य हर पुनर्वासित युवक-युवती को सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी सुविधाएं देना है। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप पूर्व साथियों को प्रेरित करने की अपील            गृह मंत्री शर्मा ने युवाओं से कहा कि वे जेल में बंद अपने पूर्व साथियों से मिलकर उन्हें भी पुनर्वास योजना का लाभ लेने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि विकास और शांति का रास्ता ही बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का आधार है। पुनर्वासित युवाओं से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप कौशल विकास की सराहना, सिंचाई के निर्देश            उप मुख्यमंत्री ने केंद्र में चल रहे कौशल विकास प्रशिक्षण की जानकारी ली। महिलाओं द्वारा मोटर वाहन ड्राइविंग का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में दिखाई जा रही भागीदारी की सराहना की।  सर्वे कराकर खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था कराएं         चर्चा के दौरान युवाओं ने खेतों में सिंचाई के लिए बोर की जरूरत बताई। इस पर शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहीदों के परिवारों और पुनर्वासित युवाओं का सर्वे कराकर उनके खेतों में सिंचाई की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि वे खेती से स्थायी आजीविका कमा सकें। पेसा अधिनियम को और सशक्त बना रही सरकार          उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पेसा अधिनियम को और प्रभावी बनाने का काम लगातार हो रहा है। बस्तर के जनप्रतिनिधि आदिवासी समाज से हैं और क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने को कहा। साथ ही शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहभागी बनने का आह्वान किया। बस्तर को शांति-विकास की नई दिशा देने का समय: केदार कश्यप               वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर बस्तर के निर्माण तक आदिवासी समाज का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। अब समय बस्तर को शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा देने का है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ने वाले युवाओं ने इस बदलाव की शुरुआत कर दी है। अब सभी को मिलकर क्षेत्र और समाज के समग्र विकास के लिए काम करना चाहिए।             इस मौके पर पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी., कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर रॉबिन्सन गुरिया सहित जिला प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

छत्तीसगढ़ में खुल सकेंगी माइक्रो ब्रुअरी, ₹10 लाख लाइसेंस फीस; जानें क्या हैं नए नियम

रायपुर  छत्तीसगढ़ में अब स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर का दौर शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी (Micro Brewery) स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद राज्य में पहली बार निवेशकों को माइक्रो ब्रुअरी संचालित करने के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से पर्यटन, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति मिलेगी, निजी निवेश आकर्षित होगा और आबकारी विभाग के राजस्व में भी वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ में बीयर पसंद करने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब राज्य में अलग-अलग फ्लेवर वाली फ्रेश (क्राफ्ट) बीयर का स्वाद मिल सकेगा। राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा। रेस्तरां में बनेगी फ्रेश बीयर : नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी ऐसे रेस्तरां या होटल परिसर में स्थापित की जा सकेगी, जहां सीमित मात्रा में बीयर तैयार कर उसी स्थान पर ग्राहकों को परोसी जाएगी। यहां तैयार होने वाली बीयर को क्राफ्ट बीयर कहा जाता है, जो अपने ताजे स्वाद, गुणवत्ता और विभिन्न फ्लेवर के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय मानी जाती है। अभी तक छत्तीसगढ़ में इस तरह की व्यवस्था नहीं थी और उपभोक्ताओं को केवल बड़े ब्रांडों की औद्योगिक स्तर पर बनी बीयर ही उपलब्ध होती थी। सरकार का कहना है कि इससे लोगों को नया विकल्प मिलेगा और होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही सरकार की आय भी बढ़ेगी। माइक्रो ब्रुअरी में सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है और उसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से चल रही हैं। खासकर बेंगलुरु को देश की 'क्राफ्ट बीयर कैपिटल' माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है। लाइसेंस के लिए 10 लाख फीस होगी। 4 हजार वर्गफीट परिसर जरूरी होगा। छोटे बैच में होगी तैयार : माइक्रो ब्रुअरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें बीयर छोटे-छोटे बैच में तैयार की जाती है। उत्पादन सीमित होने के कारण गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स, यीस्ट और अन्य प्राकृतिक अवयवों का उपयोग किया जाता है। चूंकि यह बीयर तैयार होने के तुरंत बाद ग्राहकों को परोसी जाती है, इसलिए इसका स्वाद सामान्य बीयर की तुलना में अधिक ताजा और बेहतर माना जाता है। साथ ही उपभोक्ताओं को विभिन्न फ्लेवर और विशेष किस्मों की बीयर का विकल्प भी मिलता है। नए मानक तैयार : राज्य सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए कुछ अनिवार्य मानक भी तय किए हैं। इसके अनुसार लाइसेंस प्राप्त करने के लिए कम से कम 4,000 वर्गफीट क्षेत्रफल वाला परिसर होना आवश्यक होगा। इसके अलावा अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और अन्य वैधानिक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य रहेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित रेस्तरां और माइक्रो ब्रुअरी एक ही परिसर में संचालित किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों को ताजा तैयार की गई क्राफ्ट बीयर का अनुभव मिल सके। 10 लाख का लाइसेंस : नई व्यवस्था के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर वर्ष 10 लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क जमा करना होगा। प्रत्येक इकाई को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। तैयार बीयर पर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित उत्पाद शुल्क भी लागू होगा। उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। हालांकि अंतिम कीमत स्थान, ब्रांड और फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। पर्यटन को बढ़ावा : सरकार का मानना है कि यह नीति केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे राज्य के पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलेगा। देश के कई राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी मॉडल पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है। छत्तीसगढ़ में भी होटल, रेस्तरां और पर्यटन स्थलों पर इस तरह की इकाइयों के खुलने से नए निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है।  साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आबकारी विभाग का कहना है कि माइक्रो ब्रुअरी नीति लागू होने से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। लाइसेंस शुल्क, उत्पाद शुल्क और इससे जुड़े अन्य करों के माध्यम से सरकार को अतिरिक्त आय प्राप्त होगी। वहीं होटल और रेस्तरां उद्योग को अपने कारोबार का विस्तार करने का नया अवसर मिलेगा। कमाई बढ़ाने की स्कीम : नई आबकारी नीति के इस फैसले को राज्य में आतिथ्य और पर्यटन उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखने वाली बात होगी कि राज्य में कितने निवेशक माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने में रुचि दिखाते हैं और छत्तीसगढ़ में स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली क्राफ्ट बीयर लोगों के बीच कितनी लोकप्रिय हो पाती है। सामान्य बीयर से कैसे अलग होगी क्राफ्ट बीयर क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसके स्वाद, गुणवत्ता और ताजगी पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है। इसमें अलग-अलग फ्लेवर भी मिलते हैं और इसे ताजा परोसा जाता है। 4 हजार वर्गफीट जगह होना जरूरी सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी खोलने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4 हजार वर्गफीट होना चाहिए। इसके अलावा भवन में फायर सेफ्टी, मशीनों की सुरक्षा और अन्य सभी जरूरी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। सालाना 10 लाख रुपए देनी होगी लाइसेंस फीस नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर साल 10 लाख रुपए लाइसेंस फीस देनी होगी। एक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1 हजार लीटर क्राफ्ट बीयर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां सालाना लाइसेंस फीस 25 लाख रुपए थी, उसे घटाकर 10 लाख रुपए कर दिया गया है।हालांकि, लाइसेंस लेने के साथ ही कारोबारियों को लाइसेंस फीस का 25% हिस्सा … Read more

अजमेर में खीरे की खेती परियोजना को लेकर मंत्री के सब्सिडी लाभ पर हितों के टकराव के सवाल उठे

अजमेर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को अपने ही मंत्रालय के अधीन आने वाली एक योजना से लगभग 99 लाख रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उन्हें राजस्थान में उनके खीरे के खेत के लिए दी गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पैसा जिस बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया, मंत्री महोदय खुद उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। साइनबोर्ड खोलता है राज: क्या है पूरा मामला? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान के अजमेर स्थित पीह में एक विशाल खेत है, जहां कृत्रिम तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस बने हैं। यहां लगे सफेद साइनबोर्ड पर लिखा है, "राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB), कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सहायता प्राप्त।" बोर्ड पर लाभार्थी का नाम 'भागीरथ चौधरी' और 50% सब्सिडी की रकम '99,60,000 रुपये' लिखी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में यह सामने आया है कि केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को यह सब्सिडी कुछ महीने पहले उसी मंत्रालय की योजना से मिली है, जिसमें वह खुद मंत्री (MoS) हैं। यह पैसा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना "हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और फसल के बाद के प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास" के तहत दिया गया है। 2025 में इस योजना के तहत जिन 467 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली, उसमें मंत्री जी का 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती का प्रोजेक्ट भी शामिल है। मंजूरी में 'सुपरफास्ट' स्पीड: प्रोजेक्ट और लोन की फुल डिटेल साइनबोर्ड के मुताबिक, प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये है। इसमें प्रमोटर का शेयर 49.8 लाख रुपये है। चौधरी ने इस प्रोजेक्ट के लिए HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था। मार्च 2026 में NHB से अंतिम मंजूरी मिलने के कुछ ही हफ्तों के भीतर 99 लाख रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे उनके HDFC बैंक के लोन खाते में क्रेडिट कर दी गई। मंत्री जी ने 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिनों के भीतर ही इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। जबकि, नियमों के मुताबिक मंजूरी से पहले साइट का संयुक्त रूप से निरीक्षण होना अनिवार्य है। सवालों के घेरे में क्यों है यह सब्सिडी? जिस बोर्ड (NHB) ने इस सब्सिडी को पास किया है, भगीरथ चौधरी उसके पदेन उपाध्यक्ष हैं। हालांकि अंतिम मंजूरी देने वाली कमेटी में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते हैं। अप्रूवल से एक महीने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दी गई संपत्ति की घोषणा में मंत्री ने अपनी पीह वाली कृषि भूमि का जिक्र तो किया है, लेकिन इस पेंडिंग NHB प्रोजेक्ट की कोई जानकारी नहीं दी। हालांकि, उनके एक सहयोगी का कहना है कि इसका "खुलासा किया जाएगा।" भगीरथ चौधरी ने इससे पहले 2018 में भी इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन तब हार्ड कॉपी जमा करने में देरी के चलते उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया था। क्या है मंत्रालय की यह योजना? इस योजना का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना है। इसके तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर जैसी 3 सब्जियों और गुलाब व आर्किड सहित 8 प्रकार के फूलों की खेती के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट की अधिकतम 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। एक परिवार के लिए सब्सिडी की अधिकतम सीमा 1 करोड़ रुपये तय है। प्रोजेक्ट पूरा होने के तीन महीने के भीतर सब्सिडी की रकम लोन अकाउंट में जमा कर दी जाती है। हितों के टकराव को लेकर जब मीडिया संस्थान ने केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी से संपर्क किया और सवालों की सूची भेजी, तो उनके कार्यालय ने ईमेल मिलने की पुष्टि की, लेकिन मंत्री की तरफ से कोई जवाब या टिप्पणी नहीं आई।  

दक्षिण बिहार के गया, नवादा और औरंगाबाद में नई सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी

 पटना  ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे। अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है। बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है। गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है। गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है। इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही। उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा। कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा। इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।  

अनानास की खेती ने बदली किसान अरुण साहू की किस्मत, मेड़ से शुरू हुआ सफर बना लाखों की कमाई का जरिया

मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई   रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत रायपुर कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है। शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल           अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं। कम लागत, बेहतर मुनाफा              अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है। प्ररोहों की बिक्री से भी आय               फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।           अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लगाई जनचौपाल

रायपुर : किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल उप मुख्यमंत्री शर्मा पहुंचे नक्सलियों की मांद कहलाने वाले ग्राम किसकोड़ो, ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा किसकोड़ो – उप मुख्यमंत्री शर्मा रायपुर कभी नक्सल संगठन का मजबूत गढ़ और बस्तर में नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले उत्तर बस्तर कांकेर जिले के अंतागढ़ विकासखंड के ग्राम किसकोड़ो में शुक्रवार 26 जून को ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जिस स्थान पर कभी नक्सलियों की चौपाल लगती थी, वहीं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने देर शाम को ग्रामीणों के बीच जनचौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। वर्षों तक भय और हिंसा का दंश झेल रहा यह गांव अब लोकतंत्र, विकास और विश्वास की नई इबारत लिख रहा है। किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल        गांव पहुंचने पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर संवाद किया और एक-एक व्यक्ति की समस्याएं, मांग एवं सुझाव गंभीरता से सुनी। इस दौरान ग्राम किसकोड़ो सहित आसपास की आठ पंचायतों के सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। किसकोड़ो, जहां कभी लगती थी नक्सलियों की चौपाल, वहीं उप मुख्यमंत्री शर्मा ने लगाई जनचौपाल        ग्रामीणों ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, विद्युत व्यवस्था, बंडापाल में सब-स्टेशन निर्माण, खाद भंडारण केंद्र, स्कूल की बाउंड्रीवाल तथा मातला मार्ग पर पाइप पुलिया निर्माण जैसी अनेक मांगें रखीं। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश देते हुए अस्पताल तक मरीजों के आवागमन के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध कराने तथा विद्युत व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसकोड़ो को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाएगी। यहां पहुंचे ग्रामीणों में अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्साह देखकर उप मुख्यमंत्री ने कहा वर्षों तक डर के साए में रहने के बाद जल्द से जल्द विकास करने की जो ललक आज ग्रामीणों में दिख रही है वह अविश्वसनीय है।         उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2025 तक किसकोड़ो एरिया कमेटी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख केंद्र थी, जिसे अब नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया जा चुका है। हाल ही में गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए बोर खनन कराया गया है, जिससे ग्रामीणों को राहत मिली है। प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किसकोड़ो का निरीक्षण भी किया।         जनचौपाल में ग्रामीणों ने भावुक होकर कहा कि पहले यहां नक्सलियों की चौपाल लगती थी, आज पहली बार शासन के उप मुख्यमंत्री की चौपाल लगी है। यह किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि पहले शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरते थे। बच्चों को जबरन नक्सली संगठन में शामिल करने का प्रयास किया जाता था और सरकारी कर्मचारी भी यहां पदस्थापना होने के बावजूद कार्यभार ग्रहण करने से कतराते थे। आज वही गांव विकास, सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास के साथ नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से कहा कि कभी भय और बंदूक की पहचान रखने वाला किसकोड़ो अब विकास, विश्वास और लोकतंत्र का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां गूंज रहे "भारत माता की जय" के उद्घोष इस बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को जैविक कृषि के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेहतर प्रशिक्षण के साथ उनका सर्टिफिकेशन करने की भी आवश्यकता है, आसपास की सभी पंचायतों को मिलाकर ब्रांडिंग का कार्य किया जाए। उन्होंने लघु वनोपज प्रसंस्करण के लिए व्यवस्था निर्माण के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर कांकेर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, एएसपी आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी, एडीएम एएस पैकरा, एसडीएम अंतागढ़ राहुल रजक सहित अन्य अधिकारीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

लखनऊ में बिजली की अधिकतम मांग 32,673 मेगावाट तक पहुंची, खपत के सारे रिकॉर्ड टूटे

 लखनऊ प्रदेश में भीषण गर्मी से बिजली की खपत और अधिकतम मांग के पिछले सारे रिकार्ड टूटते जा रहे हैं। गुरुवार को बिजली की रिकार्ड खपत 693.46 मिलियन (69.35 करोड़) यूनिट रही। इससे पहले बुधवार को 67.84 करोड़ और 21 जून को 67.66 करोड़ यूनिट बिजली की खपत रही थी। पारा न गिरने से बुधवार रात 9.51 बजे 32,673 मेगावाट बिजली की अधिकतम मांग का भी नया रिकार्ड बना है। मानसून के विलंबित होने के कारण अब तक वर्षा न होने से इनदिनों रात और दिन के तापमान में बहुत अंतर न होने से न्यूनतम बिजली की मांग भी 23-24 हजार मेगावाट से नीचे नहीं जा रही है। वर्षा न होन से बिजली की मांग के 34 हजार मेगावाट के भी पार जाने का अनुमान है। इस बीच विभिन्न कारणों से तापीय परियोजनाओं की तीन यूनिटें घाटमपुर की 660-660 मेगावाट की दो व पारीछा की 250 मेगावाट की एक यूनिट के ठप होने से लगभग डेढ़ हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन घट गया है। हालांकि, पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि प्रदेशवासियों को तय शेड्यूल से कहीं अधिक बिजली की आपूर्ति की जा रही है दावा है कि शहरों को 24 घंटे बिजली देने के साथ ही गांवों में भी 18 के बजाय 21 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। पावर एक्सचेंज से पर्याप्त बिजली न मिलने से गांवों में जरूर रात के समय दो-तीन घंटे बिजली की कटौती की जा रही हैं लेकिन उसकी भरपाई दिन में कहीं ज्यादा बिजली देकर की जा रही है।

पटना मौसम अपडेट: 28 जून को बिजली-बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई जिलों में सतर्कता जरूरी

पटना  पटना मौसम विज्ञान केंद्र की तरफ से जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, 28 जून को बिहार में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलने वाला है। एक तरफ कुछ जिलों में बादलों की गड़गड़ाहट, कड़कती बिजली और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की अनुमान लगाया गया है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, कटिहार, भागलपुर और पूर्णिया जिलों के कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन इलाकों के लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की गई है। वहीं मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, दरभंगा, समस्तीपुर, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, रोहतास, भभुआ, भोजपुर, बक्सर, अरवल और औरंगाबाद जिलों में मेघगर्जन आकाशीय बिजली गिरने के आसार हैं। इसके अलावा, इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। दूसरी ओर, राज्य के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। इस क्षेत्र के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना जताई गई है। तापमान की बात करें तो दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-मध्य बिहार, जिनमें पटना, गया, बक्सर और भोजपुर जैसे जिले शामिल हैं, वहां अधिकतम तापमान 38 से 40 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है। जबकि उत्तर बिहार और दक्षिण-पूर्व बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। राज्यभर में न्यूनतम तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना है।

पंजाब में गर्मी का कहर जारी, 41 डिग्री तक पहुंचा तापमान; पहाड़ी इलाकों से लगे जिलों में बारिश की संभावना

अमृतसर  पंजाब में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर बने रहने के बावजूद गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है। शुक्रवार को राज्य का अधिकतम तापमान एक बार फिर 41 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। सबसे अधिक तापमान पटियाला में 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक हिमाचल प्रदेश से सटे जिलों में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना बनी रहेगी, जबकि राज्य के अधिकांश मैदानी इलाकों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, 27 जून (शनिवार) को पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर और रूपनगर जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना है। गुरदासपुर जिले में भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए निगरानी श्रेणी का अलर्ट जारी किया गया है। आने वाले दिन कोई अलर्ट नहीं 28 जून: बारिश का दायरा कुछ सिमट जाएगा। इस दिन पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। राज्य के शेष जिलों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है, लेकिन मौसम विभाग ने कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। 29 जून: वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी पंजाब तक सीमित रहेगा। पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि अन्य जिलों में वर्षा की संभावना नहीं है।  30 जून: को भी लगभग यही स्थिति बनी रहेगी। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली और रूपनगर में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश की संभावना है। बाकी जिलों में मौसम शुष्क रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन जिलों में वर्षा का अनुमान है, वहां भी व्यापक बारिश नहीं होगी, बल्कि केवल कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा दर्ज की जा सकती है। सामान्य से 1.7 डिग्री बढ़ा तापमान शुक्रवार को भी पंजाब में गर्मी का असर बरकरार रहा। औसत अधिकतम तापमान में 1.9 डिग्री की बढ़ौतरी देखने को मिली। राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान पटियाला में 41.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके बाद बठिंडा में 40.8, भाखड़ा बांध 39.5, लुधियाना 39.0, मोहाली 38.5, गुरदासपुर (बल्लोवाल) 38.0, पठानकोट 37.8, जालंधर 37.3, फिरोजपुर और होशियारपुर में 37.1 तथा अमृतसर में 35.0 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 1.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। हालांकि वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पूर्वी और हिमाचल से सटे जिलों में बादलों की आवाजाही व हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी, लेकिन दक्षिणी और मध्य पंजाब में गर्मी का असर फिलहाल जारी रहने का अनुमान है।

VB-GRAM-G योजना पर मान सरकार का बड़ा फैसला, अधिसूचना जारी; पहले AAP ने किया था विरोध

चंडीगढ़  पंजाब में वीबी जी राम जी (विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन) योजना लागू हो गई है। राज्य सरकार ने स्कीम लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।पंजाब सरकार पहले इस योजना के विरोध में थी। योजना के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था। केंद्र की इस स्कीम के तहत एक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की व्यवस्था की गई है।  केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाई थी। संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।  बता दें कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाया था. संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी।  कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2005 में MGNREGA शुरू किया था. इसके तहत ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का काम मिलने की गारंटी दी गई थी. अब नए कानून के तहत, गारंटी वाले काम के दिनों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है।  पंजाब सरकार ने किया एक्ट का विरोध विपक्ष शासित पांच राज्यों कर्नाटक, केरल, पंजाब, तेलंगाना और झारखंड ने VB-G Ram G एक्ट का विरोध करते हुए और MGNREGA योजना को बहाल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किए थे. पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि VB-G RAM G एक्ट का गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और ग्रामीण मजदूरों पर बुरा असर पड़ेगा, जो अपनी जीविका के लिए MGNREGA पर निर्भर हैं।  योजना का उद्देश्य स्पष्ट VB-G RAM G योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के विकास के विजन को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में काम की तलाश करने वाले लोगों को 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकेगी। आर्थिक सुधारों की दिशा में एक कदम इस योजना का उद्देश्य न केवल रोजगार पैदा करना है, बल्कि ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देना है। एएपी सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि इससे राज्य के आर्थिक ढांचे में सुधार होगा और युवा वर्ग को रोजगार के अवसर मिलेंगे। योजना के तहत, कर्मचारियों को स्थायी नौकरी के लिए भी प्रोत्साहित किया जायेगा। गांवों में काम से होगी खुशहाली VB-G RAM G योजना की लॉन्चिंग से ग्रामीण क्षेत्र में काम की प्रवृत्ति बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल मजदूरों को काम मिलेगा, बल्कि इसके चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इस योजना का पूरा फायदा उन परिवारों को होगा जो रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे थे। सरकार की तैयारियों में तेजी पंजाब सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। यह योजना न केवल रोजगार बल्कि आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा। आवश्यकता जन जागरूकता की योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार को गांवों में जन जागरूकता अभियान चलाना होगा। लोगों को योजना की जानकारी और उसके लाभ समझाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें और इसका लाभ उठा सकें। सरकार ने क्या कहा? हालांकि, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया कि VB-G Ram G एक्ट मजदूरों के जीवन में एक नए युग की शुरुआत करेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना से जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और सड़कें, पुल, पुलिया, स्कूल और आंगनवाड़ी भवन बनाए जा सकेंगे. केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 95,600 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट आवंटित किया।  1 जुलाई से लागू होगी योजना शिवराज चौहान ने कहा, VB GRAM-G योजना 1 जुलाई से लागू हो रही है, जिससे बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से सुचारू और कर्मचारी-केंद्रित बदलाव सुनिश्चित होना चाहिए. उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक स्कीम का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों मज़दूरों की ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी से जुड़ा मामला है. एक भी मज़दूर एक दिन के लिए भी बिना काम के नहीं रहना चाहिए. रोज़गार पैदा करने, मज़दूरी के भुगतान या कानूनी अधिकारों में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने MGNREGA के तहत पहले ही 30,000 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए थे. इस नए आवंटन के साथ, स्कीम के तहत कुल फंड 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है।