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बड़ी सौगात: रीवा संभाग के 1.29 लाख घरों तक पहुंचेगा साफ पानी, 2319 करोड़ की योजना शुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार ठोस कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में रीवा संभाग में मध्यप्रदेश जल निगम की परियोजना क्रियान्वयन इकाई, रीवा द्वारा संचालित रीवा समूह जल प्रदाय योजना ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। लगभग 2319.43 करोड़ रु. की लागत से विकसित इस योजना में जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर पहुंचाया जा चुका है, जिससे परियोजना के आगामी चरणों में गति मिलने की स्थिति बनी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के मार्गदर्शन में क्रियान्वित इस योजना के माध्यम से रीवा जिले के 677 ग्रामों और मऊगंज जिले के 936 ग्रामों के कुल 1613 ग्रामों को जोड़ा जा रहा है। योजना के पूर्ण होने पर लगभग 1.29 लाख ग्रामीण परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों में लंबे समय से बनी जल समस्या का समाधान संभव होगा। जल शोधन संयंत्र तक रॉ वाटर की आपूर्ति सुनिश्चित होना परियोजना के क्रियान्वयन का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके बाद जल शोधन और वितरण नेटवर्क के माध्यम से घर-घर पेयजल आपूर्ति की दिशा में कार्य को और गति दी जाएगी। योजना में गुणवत्ता, निरंतरता और दीर्घकालिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में हर-घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य की दिशा में यह योजना एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आ रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन होगा।  

साइबर सिटी में अध्यात्म और आधुनिक संगीत का संगम, 550 कलाकारों की टोली ने हनुमान भजन से बांधा समां

गुरुग्राम तेज रफ्तार जिंदगी… कॉरपोरेट कल्चर… और उसी के बीच भक्ति का एक नया अंदाज. जहां आमतौर पर गिटार और ड्रम पर फिल्मी गाने सुनाई देते हैं, वहीं अब उन्हीं धुनों पर हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा है. गुरुग्राम में युवाओं ने अध्यात्म और आधुनिक संगीत का ऐसा संगम तैयार किया है, जो न सिर्फ सुकून देता है, बल्कि अपनी जड़ों से जोड़ने का भी काम कर रहा है. साइबर सिटी गुरुग्राम, जहां जिंदगी तेज रफ्तार और आधुनिकता से भरी है, वहीं अब एक नया आध्यात्मिक रंग भी उभरता नजर आ रहा है. शहर के ‘आर्टिस्ट चौक’ पर युवा पारंपरिक भक्ति को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर एक अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं. यहां गिटार और काजोन (ड्रम) जैसे आधुनिक वाद्ययंत्रों की धुन पर हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है, जो लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है. हनुमान जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में युवाओं की इस टोली ने अपने अनोखे अंदाज से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. भक्ति और संगीत के इस संगम ने न सिर्फ माहौल को आध्यात्मिक बनाया, बल्कि वहां मौजूद हर शख्स को अपनी ओर खींच लिया. इस पहल की शुरुआत करीब तीन साल पहले एक छोटे से भजन सत्र से हुई थी. आयोजकों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यह एक बड़ा अभियान बन गया. आज इस मंच से करीब 550 कलाकार जुड़े हुए हैं, जो हर मंगलवार को एक साथ जुटकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. इस समूह की खास बात यह है कि इसमें शामिल युवा देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक… गुरुग्राम में नौकरी के सिलसिले में आए ये युवा कला और अध्यात्म के जरिए एक साझा मंच पर जुड़े हैं. हनुमान जयंती के मौके पर आयोजकों ने एक घंटे का विशेष कार्यक्रम रखा है, जिसमें राम भजन और हनुमान भजनों के बाद सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया जाएगा. इसके साथ ही सुबह भंडारे और दोपहर में ‘स्पिरिचुअल जैमिंग’ का भी आयोजन होगा. आयोजकों का कहना है कि यहां आने वाले युवाओं का उत्साह और उनकी सकारात्मक ऊर्जा इस पहल की सबसे बड़ी ताकत है. आधुनिक संगीत के साथ भक्ति का यह मेल युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक नया और प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है.  

श्रद्धा के नाम पर खिलवाड़, मंदिर में मची भगदड़ के बाद प्रशासन सख्त, 20 नामजद आरोपियों पर एफआईआर

नांलदा बिहारशरीफ के मघड़ा मेला हादसे में पुलिस ने चार पुजारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मेले में श्रद्धा के नाम पर घिनौना खेल उजागर हुआ है। रुपये लेकर पूजा करवाने और महिलाओं पर डंडे चलाने का आरोप पुजारियों पर लगा है। दीपनगर थाने की दारोगा मौसमी कुमारी के बयान पर इस बाबत एफआईआर दर्ज हुई है। इसमें 20 नामजद व कई अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। नामजदों में 18 पंडा समाज के लोग और उनके दो सहयोगी शामिल हैं। बुधवार को एसपी भारत सोनी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आरोपितों में अनुज कुमार, अवधेश कुमार मिश्रा, विवेकानंद पांडेय व निरंजन कुमार पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। एसपी ने बताया कि पूजा करने जाने के क्रम में नूरसराय के एक गांव की 17 वर्षीया किशोरी के गायब होने का मामला प्रकाश में आया है। हालांकि, किशोरी के भाई ने दीपनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर आरोप लगाया है कि गांव का एक किशोर बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया है। मामले की जांच चल रही है। गौर हो कि मंगलवार को सुबह करीब सवा नौ बजे शीतला माता मंदिर में मची भगदड़ में आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि आठ घायल हो गए थे। घायलों में तीन का इलाज पटना में चल रहा है। गेट पर बांध दिया था बांस प्राथमिकी के अनुसार, दारोगा मौसमी कुमारी को थानाध्यक्ष राजमणि ने 10 बजकर पांच मिनट पर जल्द मंदिर पहुंचने का आदेश दिया। मंदिर के पास मौजूद लोगों ने बताया कि कुछ पंडा रुपये लेकर पूजा करा रहे थे। गेट पर बांस बांध दिया था। बांस को उठाकर गर्भगृह में घुसने के क्रम में सीढ़ी पर बेहोश होकर महिलाएं गिर गयीं। अफरा-तफरी के बीच लोग उन महिलाओं के ऊपर से गुजरने लगे। इससे उनकी मौत हो गयी। हादसे के बाद जागा प्रशासन मघड़ा शीतला माता मंदिर में मंगलवार को हुए बड़े हादसे के बाद पुलिस व जिला प्रशासन पूरी तरह जाग गया है। घटना से हुई क्षति, चूक व वसूली की छूट से सबक लेते हुए डीएम कुंदन कुमार व एसपी भारत सोनी ने कलेक्ट्रेट में बुधवार को जिलेभर के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों संग मैराथन बैठक की। इसमें आगामी पर्व-त्योहार, प्रतियोगिता परीक्षा, स्थानीय मेला, हाट आदि में लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन बनायी। साथ ही, डीएम ने आपदा प्रबंधन एडीएम को कर्मियों और अधिकारियों को प्रशिक्षित करने का आदेश दिया। धार्मिक संस्थानों व अन्य कार्यक्रम स्थलों पर हर हाल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फरमान जारी किया गया। सीसीटीवी कैमरे कियाशील हैं या नहीं, इसकी जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार के कार्यक्रम की सूचना अग्निशमन, स्वास्थ्य, बिजली, पीएचईडी व जिला आपदा विभाग के अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता डीएम डीएम ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी तरह के आयोजन में जन-सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी तरह की लापरवाही व शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। स्नान-दान, चैती पूर्णिमा, हनुमान जयंती, गुड फ्राइडे व आने आने वाले अन्य पर्व-त्योहारों में भीड़-भाड़ वाले स्थानों को चिह्रित कर समुचित तैयारी की जाएगी। बिना अनुमति व अनुज्ञप्ति के किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन पर समिति के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी। बीडीओ की जिम्मेवारी तय डीएम ने एसडीओ व बीडीओ को आदेश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों के ‘इवेंट कैलेंडर’ तैयार कर संभावित भीड़ के पूर्वानुमान के आधार पर सभी तरह का पुख्ता प्रबंध करें। कार्यक्रमों के आयोजन से पहले समिति के सदस्यों को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठक करना अनिवार्य होगा।

पवन पुत्र हनुमान लोक मंगल, विनम्रता, सेवा भाव और समर्पण के हैं प्रतीक

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार तीर्थ, परंपराओं, लोक कलाओं और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते हुए सतत् कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक चेतना का जो नव जागरण हुआ है, मध्यप्रदेश उसका साक्षी बन रहा है। मध्यप्रदेश धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के स्वर्णिम युग की ओर अग्रसर है। राज्य सरकार सुशासन, जनकल्याण और समन्वय के माध्यम से प्रदेश में रामराज के सपने को साकार करने की दिशा में प्रयासरत है। इसी क्रम में प्रभु राम के प्राकट्य पर्व की मंगल बेला में पांढुर्णा के जामसांवली में रघुकुलनंदन के प्रिय भक्त के दिव्यधाम  हनुमान लोक के पहले चरण का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विश्वास है कि अतुलित बल के स्वामी, परम ज्ञानी, दयालु, राम के प्रिय भक्त, पवन पुत्र हनुमान जी, लोक मंगल-कर्मठता-विनम्रता-सेवा भाव और समर्पण के प्रतीक हैं। व्यक्ति में सामर्थ्य होने पर वह अक्सर अहंकारी हो जाता है, लेकिन हनुमान जी ने सिखाया कि सच्चा बल वही है, जो सेवा में लगे और जो समर्पित भाव से कार्य करें। मन की एकाग्रता और अनुशासन, पवन पुत्र हनुमान के विशेष गुण हैं। वे कर्मकांड नहीं अपितु सतत् प्रयासों से उद्देश्य प्राप्ति के लिए हमें प्रेरित करते हैं। इन्हीं विचारों और मूल्यों को जामसांवली का  हनुमान लोक जीवंत करेगा।  हनुमान लोक के प्रथम चरण में मुख्य प्रवेश द्वार एवं प्लाजा का निर्माण हुआ है। मुख्य द्वार से लेकर मंदिर परिसर तक चिरंजीवी पथ का निर्माण किया गया है। इसमें हनुमान जी के विभिन्न स्वरूपों की मूर्तियां स्थापित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल पर जल्द ही 65 करोड़ 24 लाख रूपये की लागत से  हनुमान लोक के दूसरे चरण के निर्माण कार्य पूर्ण किए जाएंगे। दूसरे चरण में भक्ति सागर एवं प्रवचन हॉल, यज्ञशाला, पार्किंग, संस्कृत महाविद्यालय, भोजशाला और धर्मशाला का निर्माण होगा। यह हनुमान लोक आने वाले समय में न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक इकॉनामी को भी नई दिशा देगा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं से स्थानीय व्यापार, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से जिले की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। छिंदवाड़ा और पांढुर्णा प्रदेश के संतरा उत्पादन सेंटर के रूप में जाने जाते हैं।  हनुमान लोक के आकार लेने से पांढुर्णा प्रदेश के धार्मिक और आध्यात्मिक मानचित्र पर भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए  महाकाल लोक के निर्माण के साथ ही महेश्वर में अहिल्या लोक, मंदसौर में पशुपतिनाथ लोक, दतिया में पीतांबरा माई महालोक, जानापाव में परशुराम लोक, सलकनपुर में देवी महालोक, पन्ना में जुगल किशोर सरकार लोक, आगर-मालवा में बाबा बैजनाथ लोक और अमरकंटक में माँ नर्मदा महालोक बनाए जा रहे हैं।  

दस्तावेजों पर सख्ती: पहचान पत्र के साथ भूमि प्रमाण देना अनिवार्य

पटना/सहरसा. बिहार सरकार की ओर से जाति, आय एवं निवास प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया गया है। अब आवेदन के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना जरूरी कागजात के किए गए आवेदन को सीधे अस्वीकार कर दिया जाएगा। नए प्रावधान के तहत निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदक को पहचान पत्र के साथ पते से संबंधित वैध दस्तावेज या भूमि से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। वहीं, आय प्रमाण पत्र के लिए पहचान पत्र के साथ आय से जुड़े प्रमाण देना अनिवार्य किया गया है। इसी प्रकार जाति प्रमाण पत्र के लिए पहचान पत्र के साथ जमीन का खतियान देना जरूरी होगा। खतियान के साथ वंशावली संलग्न करना जरूरी प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि जमीन आवेदक के पिता, दादा या परिवार के अन्य सदस्य के नाम पर है, तो ऐसी स्थिति में खतियान के साथ वंशावली संलग्न करना अनिवार्य होगा। इससे पारिवारिक संबंध की पुष्टि की जा सकेगी। सरकार ने खतियान, दान पत्र, भूमि संबंधी अन्य दस्तावेज, भूमिहीनों को आवंटित जमीन के कागजात सहित विभिन्न राजस्व अभिलेखों को मान्य दस्तावेज की श्रेणी में रखा है। वहीं, जिन आवेदकों के पास भूमि या राजस्व से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें आवेदन के समय स्थल निरीक्षण का विकल्प दिया गया है। ऐसे मामलों में राजस्व कर्मियों द्वारा जांच के बाद ही प्रमाण पत्र निर्गत किया जाएगा। फर्जीवाड़ा पर लगेगी रोक इस संबंध में सिमरीबख्तियारपुर की राजस्व अधिकारी खुशबू कुमारी ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने से फर्जी प्रमाण पत्र बनने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। उन्होंने आवेदकों से अपील की है कि आवेदन करने से पूर्व सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कई बार बिना उचित जांच के फर्जी प्रमाण पत्र के आवेदन सामने आते रहे हैं, जिसे देखते हुए सरकार ने यह सख्त कदम उठाया है। नई व्यवस्था से अब प्रमाण पत्र निर्गमन प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में घमासान, उपाध्यक्ष और पूर्व कोषाध्यक्ष के बीच हाथापाई

महासमुंद कांग्रेस भवन में उस समय हंगामा मच गया जब जिलाध्यक्ष की मौजूदगी में जिला उपाध्यक्ष विजय साव और पूर्व जिला कोषाध्यक्ष निर्मल जैन के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात मारपीट तक पहुंच गई। बहस से शुरू हुआ विवाद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। मौके पर मची अफरा-तफरी घटना के दौरान वहां मौजूद पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुराना मतभेद आया सामने बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच काफी समय से मतभेद चल रहे थे, जो इस बैठक में खुलकर सामने आ गए। वरिष्ठ नेताओं ने कराया शांत मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराया। घटना के बाद संगठन की छवि को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। थाने पहुंचे दोनों पक्ष इस संबंध में दोनों पक्ष थाना पहुंचे हैं।

देबी ने सात साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, इसके बाद उन्हें अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा और आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा

रायपुर जब हालात मुश्किल होते हैं, तो मजबूत लोग आगे बढ़ते हैं- यह एक मशहूर कहावत है जो खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने की ललक को बयां करती है। असम की महिला पहलवान देबी डायमारी की कहानी बाधाओं को पार करने की इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। आखिरकार देबी को उन सभी प्रयासों का फल तब मिला, जब उन्होंने यहां 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' में महिलाओं की 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता।                असम के गोलाघाट जिले के सिसुपानी स्थित दिनेशपुर गांव की रहने वाली 28 वर्षीय देबी ने सात साल की उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उन्हें अपने चाचा-चाची के साथ रहना पड़ा और आर्थिक तंगी के चलते अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए उन्हें छोटे-मोटे काम भी करने पड़े। बोडो ट्राइब से आने वाली देबी कहती हैं, '' इस पदक के पीछे मेरी कड़ी मेहनत है। मैंने चार साल पहले ही 2022 में गोलाघाट जिले के बोकाखात में काजीरंगा के बगल में खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी। इसमें प्रैक्टिस करने के लिए मुझे सेंटर के आसपास रूम लेकर रहना पड़ा। रूम का 1000 रुपया किराया देने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए मुझे एक साल तक पार्ट टाइम जॉब भी करना पड़ा।''               वह आगे कहती हैं, '' पहले तो मुझे 2022 में 2500 रुपये मासिक वेतन पर ईजी बाजार (बोकाखात) स्टोर में काम करना पड़ा और फिर 2023 में काजीरंगा में स्थित बोन विला रिसॉर्ट में करीब 7000 रुपये के मासिक वेतन पर जॉब करना पड़ा। वहां पर मैं स्वीमिंग पूल की देखभाल और सफाई करती थीं।'' उन्होंने आगे कहा,  ''सारा दिन काम करने के बाद शाम को सिर्फ दो घंटे के लिए मैं कुश्ती की प्रैक्टिस कर पाती थी। मैंने जितना भी किया, उसके बदले मुझे ये रजत मिला। लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं और मैं अब और कड़ी मेहनत करके आगे गोल्ड जीतना चाहती हूं।''                 कुश्ती में मैट पर उतरने से पहले देबी पॉवरलिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग करती थीं। लेकिन साल 2022 में उनकी मुलाकात असम टीम के कोच अनुस्तूप नाराह (ANUSTUP NARAH) से हुई, जिनके मार्गदर्शन में रहकर वह कुश्ती की दांव पेंच सीखी हैं।  कोच अनुस्तूप कहते हैं, '' 2022 में जब बोकाखात में पंजा टूर्नामेंट हुआ था तो उस दौरान वह मुझे मिली और मैंने उन्हें देखते ही कह दिया कि तुम रेसलिंग करो। उसने सोच विचार के बाद मुझे हां- कह दिया और फिर मैंने उन्हें सबसे पहले सेंटर के पास ही रहने के लिए कहा ताकि ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त समय मिल सके। वह बोली कि सर यहां तो रूम लेकर रहना पड़ेगा और मेरे पास इतने पैसे तो नहीं है। फिर मैंने गोलाघाट जिले के कुश्ती सहायक सचिव से कहकर देबी को काम दिलवाया और एक साइकिल भी दिलवाई। देबी उसी साइकिल से जॉब करने लगी और फिर वह सेंटर के पास रहकर ही प्रैक्टिस भी करने लगी।''               देबी डायमारी ने 2022 में अपने ही जिले के बोकाखात में काजीरंगा स्थित खेलो इंडिया सेंटर में कुश्ती शुरू की थी और उसी साल उन्होंने विशाखापत्तनम में हुए सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया। इसके बाद साल बाद ही उन्होंने 2024 में स्टेट चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। देबी की पिछले साल ही शादी हुई है और उनका पति बेंगलोर में प्राइवेट नौकरी करता है। वह कहती हैं, '' ससुराल वाले मुझे हर तरह से बहुत सपोर्ट करते हैं। पति भी मुझे बहुत सपोर्ट करता है और वह बेंगलुरु से बराबर पैसा भेजता रहता है ताकि मुझे कोई चीज की दिक्कत ना हो।''        देबी डायमारी ने कहा, '' मेरा अगला लक्ष्य सीनियर लेवल पर और पदक जीतना है ताकि मैं उसके बाद इंटरनेशनल लेवल पर भाग ले सकूं। ये सब करने के लिए मैं दिन-रात कड़ी मेहनत कर रही हूं। यहां से जाने के बाद अब देखेंगे कि कोच साहब क्या प्लानिंग करते हैं और फिर हम उसी के हिसाब से काम करेंगे।''

तनाव का असर आम जनता पर: सीमावर्ती इलाकों में बिगड़ा किचन बजट

अमृतसर. भले ही अमेरिका, ईरान और इजराइल जैसे देशों पर जंग के मैदान सजे हों, लेकिन इसकी तपिश अब हजारों मील दूर भारत और खासकर पवित्र शहर अमृतसर में महसूस की जा रही है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में सप्लाई चेन पर जहां असर डाला है। वहीं इसका सीधा असर अमृतसर के बाजारों और आम आदमी की जेब पर पड़ता दिख रहा है। विगत कुछ ही दिनों में खाने-पीने के खाद्य पदार्थों के अलावा रोजाना में प्रयोग होने वाली सभी चीजों पर खासा असर पड़ा है और लगभग सभी चाजों के दामों में वृद्धी आंकी जा रही है। इससे लोग काफी सकते में पंड़ चुके हैं कि आखिर वे करें भी तो क्या? और रोजाना की जरूरतों के दाम बढ़ गए हैं। बॉर्डर एरिया होने से दोहरी मार  अमृतसर एक बॉर्डर जिला है और इसकी इकॉनमी का एक बड़ा हिस्सा ट्रेड और टूरिज्म पर निर्भर करता है। जंग के हालात की वजह से इंटरनेशनल मार्किट में क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं, जिससे माल ढुलाई बहुत महंगी हो गई है। इसका सीधा असर बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों और दालों पर पड़ रहा है। अमृतसर की बड़ी सब्जी मंडी (वल्ला मंडी), लोहगढ़ की सब्जी की फड़ियो वाली मंडी के अलावा छेहरटा सब्जी मंडी में जहां सभी सबिज्यों के दाम आसमान छू चुके हैं, जिससे आम लोगों के बीच दामों को अब सब्जियों का जायका लेना काफी दूभर हो चुका है। इसके अलावा खाने-पीने वाले सभी पदार्थ व अन्य सामान भी अब महंगे दामों पर बिक रहा है। बर्तन और तेल के दाम बढ़े ईरान और उसके आस-पास के इलाकों से क्रूड ऑयल व खरेलू गैस एल.पी.जी की सप्लाई प्रभावित होने से माल-ढुलाई में खासा असर पड़ रहा है। इसको लेकर सप्लाई पर असर पड़ने के डर से कंपनियों ने खाने के तेलों (रिफाइंड और सरसों का तेल) के दाम 5 से 10 परसैंट बढ़ा दिए हैं। अमृतसर के बड़े बाजारों जैसे मजीठ मंडी और दाल मंडी के व्यापारियों का कहना है कि अगर लड़ाई और बीस-पच्चीस दिन लंबी चली तो फिर दालों और चीनी आदि के दाम और बढ़ सकते हैं। घरेलू रसोई गैस और पैट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का डर लोगों को अभी से सताने लगा है। टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री पर मंदी का खतरा अमृतसर एक वर्ल्ड-क्लास टूरिज्म हब है। इंटर नैशनल फ्लाइट्स के रूट बदलने और फ्यूल के बढ़ते दामों की वजह से हवाई किराए बढ़ गए हैं। इससे श्री हरिमंदिर साहिब आने वाले विदेशी और एन.आर.आई श्रद्धालुओं की संख्या में भी काफी कमी आंकी जा रही है। होटल मालिकों के मुताबिक अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती गई तो होटल के कमरों और खाने के रेट बढ़ा जाएंगे, जिससे शहर के टूरिज्म बिजनेस को बड़ा झटका लगेगा। इसके अलावा होटल वालों के लिए गैस सिलैंडर अब सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। कई होटलों व ढाबों वालों ने गैस की किल्लत के कारण डीजल की भटि्टयों की ओर रूख किया है, जिससे उनकी खाना बनाने की लागत काफी बढ़ चुकी है। अब वो कब तक मूल्य स्थिर रख सकेगें, ये तो समय के गर्भ में है। ड्राई फ्रूट्स और ट्रेड पर असर  अमृतसर को ड्राई फ्रूट्स ट्रेड का हब माना जाता है। युद्ध के रास्तों की वजह से अब अफगानिस्तान और मिडिल ईस्ट के देशों से आने वाला सामान रुक रहा है। इससे बादाम, काजू और किशमिश जैसी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि स्टॉक कम हो रहा है और डिमांड बढ़ रही है, जिससे आने वाले त्योहारों के सीजन में ये चीजें आम लोगों के लिए खरीदना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी 80 परसैंट से ज्यादा तेल की जरूरतों के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है, यह युद्ध किसी आर्थिक सुनामी से कम नहीं है। अमृतसर में मिडिल क्लास परिवारों का कहना है कि पहले से ही नौकरियों की कमी है और अब महंगाई ने उनकी कमर तोड़ दी है। अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाए और युद्ध जारी रहा, तो अमृतसर के हर घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।

कोपलवाणी स्कूल के बच्चे पहुंचे लोकभवन

रायपुर विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर विशेष पहल आज विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर कोपलवाणी स्कूल के स्पीच थेरेपी सेंटर के बच्चे अपने माता-पिता एवं शिक्षकों के साथ लोक भवन पहुंचे और राज्यपाल  रमेन डेका से शिष्टाचार भेंट की। यह अवसर न केवल बच्चों के लिए विशेष रहा, बल्कि समाज में ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस पर विशेष पहल          राज्यपाल ने बच्चे और उनके अभिभावकों तथा विशेष बच्चों के लिए समर्पित शिक्षकों से आत्मीय संवाद किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की। इस दौरान उन्होंने ऑटिज़्म को नज़दीक से समझने का अवसर प्राप्त किया तथा विशेष बच्चों की क्षमताओं और चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ जाना।           कार्यक्रम के दौरान  डेका बच्चों के साथ अत्यंत आत्मीयता से मिले और उनके साथ समय बिताया। सभी ने मिलकर नीले रंग के गुब्बारे आकाश में छोड़कर यह संदेश दिया कि समाज में हर बच्चे को समान अवसर, समझ और स्वीकार्यता मिलनी चाहिए।            इस अवसर पर राज्यपाल  डेका ने कोपलवाणी संस्था के बच्चों के आवागमन की सुविधा के लिए अपने स्वेच्छानुदान मद से ई-रिक्शा प्रदान किए और उन्होंने ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।          कोपलवाणी की डायरेक्टर मती पद्मा शर्मा ने बताया कि यह पहला अवसर है जब विशेष बच्चे लोकभवन पहुँचे हैं। अभिभावकों ने भी इसे गर्व का विषय बताया कि उनके बच्चे आज राज्यपाल से भेंट कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सही मार्गदर्शन, विशेष शिक्षकों, अभिभावकों एवं समाज के संवेदनशील लोगों के सहयोग से ये बच्चे निश्चित ही जीवन में उत्कृष्ट मुकाम प्राप्त करेंगे। कार्यक्रम में संस्था के शिक्षक, शिक्षिकाएं सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

वन उपज सीजन शुरू: 16 लाख बोरा तेंदूपत्ता तोड़ाई, समितियों को सौंपी जिम्मेदारी

राजनांदगांव. राजनांदगांव जिले के वन क्षेत्र में इस वर्ष भी अधिक से अधिक तेंदूपत्ता की तोडाई सुनिश्चित कराने का प्रावधान किया जा रहा है. इस वर्ष भी 51 समितियां को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है. जिले के वन क्षेत्रों में 700 से अधिक फड तैयार करने का प्रावधान रखा गया है. ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिले में 60% अधिक क्षेत्र में अभी भी वन संपदा है. बाघनदी से लेकर बोरतालाव, अर्जुनी, छुरिया, चिचोला डोंगरगांव, डोंगरगढ़ मोहला मानपुर अंबागढ़ चौकी, औधी सहित अन्य क्षेत्रों में भी तेंदूपत्ता की तोड़ाई सुनिश्चित कराने का प्रावधान रखा गया है. जिसकी तैयारी भी शुरू कर दी गई है. वन विभाग के अधिकारियों की माने तो इस वर्ष भी 84 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण सुनिश्चित कराया जाएगा. इसके लिए 51 समितियां को जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है. वन क्षेत्र में 700 से अधिक स्थानों पर फड तैयार किए जाएंगे. इसके लिए भी स्थान का चिन्हांकन कर लिया गया है. इस वर्ष बारिश नहीं हुई तो अच्छी क्वालिटी का तेंदूपत्ता मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. तेंदूपत्ता का संग्रहण कराने के लिए बाहर के ठेकेदार भी रुचि दिखा रहे हैं. छत्तीसगढ़ में इस साल हरा सोना (तेंदूपत्ता) की तुड़ाई सबसे पहले दक्षिण बस्तर में 20-25 अप्रैल से शुरू होगी। प्रथम चरण में सुकमा, बीजापुर दंतेवाड़ा जिले से इसकी शुरुआत होगी। वहीं अंतिम चरण में 10 मई को सरगुजा में तेंदूपत्ता का संग्रहण किया जाएगा। इसके लिए 13 लाख 50 हजार संग्राहक परिवारों का फैमिली कार्ड बनाया गया है। इसमें सभी का ब्यौरा दिया गया है। इस साल करीब 50 हजार अतिरिक्त लोगों के जुड़ने का संभावना विभागीय अधिकारियों ने जताई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ लिमिटेड अनिल साहू ने बताया कि तेंदूपत्ता खरीदी की तैयारियां अंतिम चरण में चल रही है। इस साल करीब करीब 16 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। बता दें कि प्रदेश में धान की फसल के बाद तेंदूपत्ता की वृहद स्तर पर खरीदी होती है। ऑनलाइन भुगतान तेंदूपत्ता तोड़ने वालों को इस साल उनके बैंक खातों में ऑनलाइन राशि अंतरित की जाएगी। इस साल 5500 रुपए प्रतिमानक बोरा की दर से इसकी खरीदी होगी। वहीं उक्त राशि का भुगतान कैशलेश किया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में अभियान चलाकर बैंक खाते खोले जा रहे है। कैशलेस प्रक्रिया को अनिवार्य साथ ही सूदूर क्षेत्र में मोबाइल बैंकिंग के जरिए बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया भी चल रही है। बताया जाता है कि अब तक करीब 12 लाख 40 हजार लोगों के बैंक खाते खोले गए है। साथ ही इसकी प्रक्रिया चल रही है। बता दें कि बस्तर क्षेत्र में तेंदूपत्ता भुगतान में हुए फर्जीवाड़े के बाद इस साल कैशलेस प्रक्रिया को अनिवार्य किया जा रहा है।