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मिक्सी इंडस्ट्री का बुरा हाल: युद्ध और बढ़ती महंगाई ने तोड़ी कमर, हजारों कर्मचारियों का भविष्य अधर में

अंबाला वही शहर जिसने देश को पहली मिक्सी दी। वही शहर जिसकी पहचान रसोई के इस जरूरी उपकरण से जुड़ी है, आज खुद अपनी साख बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। अंबाला का मिक्सी उद्योग, जो न केवल भारत बल्कि दुबई, कतर और अफ्रीकी देशों तक अपनी चमक बिखेरता था, आज वैश्विक युद्ध और महंगाई के दोहरे प्रहार से कराह रहा है। रसोई में हर दिन चलने वाली और विदेश तक अंबाला का नाम पहुंचाने वाली मिक्सी पश्चिमी देशों में युद्ध के कारण संकट में है। यही शहर है, जिसने देश को पहली मिक्सी दी। अब यही उद्योग कच्चे माल की महंगाई और वैश्विक हालात के दबाव में हांफता नजर आ रहा है। करीब 200 छोटी-बड़ी इकाइयां मिक्सी, जूसर, ग्राइंडर और चापर बनाती हैं। इनके साथ जिले के 150 से ज्यादा ट्रेडर्स जुड़े हैं और सालाना कारोबार करीब 250 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। इससे करीब 15 हजार परिवारों की रोजी-रोटी सीधी जुड़ी है।   युद्ध लंबा चला तो इनका सभी पर और अधिक संकट आना तय है। यहां निर्मित मिक्सी न केवल प्रदेश और देश, बल्कि विदेश तक जाती है। कच्चे माल के रेट लगभग दोगुने होने से 15 प्रतिशत तक रेट में बढ़ाने पड़े हैं। कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। निर्यात प्रभावित हुआ है। यहां की मिक्सी युगांडा, दुबई और कतर समेत कई देशों में भेजी जाती है। अफ्रीकी देशों में भी यहीं से सप्लाई होती है।   मौजूदा हालात में निर्यात प्रभावित हो गया है। इससे कारोबारियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। लागत बढ़ रही है, दूसरी तरफ बाजार सिकुड़ रहा है। इस धंधे से जुड़े लोगों का कहना है उन्हें ऑर्डर मिलने बंद हो गए हैं रेट में बहुत वेरिएशन है। महंगा माल कोई भी खरीदने को तैयार नही है। लेबर के लिए भी दिक्कतें बढ़ रही है। व्यापारियों ने कहा कि अंबाला के इस गौरवशाली उद्योग को अब केवल सरकारी हस्तक्षेप और बाजार की स्थिरता का ही सहारा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो वो शोर जो कभी अंबाला की आर्थिक मजबूती का प्रतीक था, हमेशा के लिए खामोश हो सकता है।

विरासत और विज्ञान का संगम डॉ. मोहन यादव के विजन में कृष्ण पाथेय-राम पथ से स्पेस टेक तक का सफर

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस वर्ष 25 मार्च को जब अपना जन्मदिन मना रहे होंगे, तो यह उनके वर्तमान कार्यकाल में एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन लेकर आएगा। 13 दिसंबर, 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद इस वर्ष का जन्मदिन उनके वर्तमान कार्यकाल का आधा पड़ाव माना जा सकता है। इन बीते दिनों में विभिन्न तरह की राजनैतिक अटकलबाजियों को गलत साबित करते हुए ना सिर्फ डॉ. मोहन यादव ने अभी तक का कार्यकाल सहजता से पूरा किया है बल्कि इस दौरान उनकी बॉडी लैंग्वेज दिन प्रतिदिन और भी मजबूत होती दिखी. देश के केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी उनके सहज रिश्ते दिखते हैं। जन्मदिन हम सबको अवसर देता है अपनी पिछली उपलब्धियों को देखने का और एक नए संकल्प और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति में जुट जाने का. पर जब बात मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री की हो तो जाहिर है जन्मदिन पर उनके संकल्पों में पूरे प्रदेश के 8-8.50 करोड़ लोगों का भविष्य और प्रदेश के असीम विकास की संभावनायें भी निहित होंगी। अच्छी बात यह है कि इस जन्मदिन के कई महीनों पूर्व डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा के विशेष सत्र के आयोजन के जरिए प्रदेश की जनता को प्रदेश के विकास हेतु अपने विजन और रोडमैप से अवगत करा दिया। यह विशेष सत्र 17 दिसंबर, 2025 को आहूत किया गया था, जिसकी एक और विशेषता यह थी कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी इस विकास यात्रा में साथ चलने के लिए प्रेरित और आमंत्रित किया। यह देखने और सुनने में सुखद था कि इस विशेष सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से कोई भी आरोप-प्रत्यारोप नहीं हुआ बल्कि ठीक उलट दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की सराहना करते हुए इस विकास यात्रा में अपनी भागीदारी की बात की। किसी भी अन्य राज्य में विकास के लिए पक्ष और विपक्ष के बीच इस तरह की सामूहिकता एक अजीब वाकया लग सकती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इस तरह का पॉजिटिव माहौल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से संभव हुआ। मध्यप्रदेश में विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए तथा इसकी महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के विज़न और विकास के रोडमैप में वह सब कुछ है, जो प्रदेश की आर्थिक उन्नति की दिशा दिखा रहा है। अगर राज्य का प्रशासनिक ढांचा मुख्यमंत्री की राजनीतिक इच्छाशक्ति के अनुरूप इस रोडमैप के क्रियान्वयन के लिए एक संकल्प के साथ आगे बढ़े, तो मध्यप्रदेश आने वाले समय में उद्योग, व्यापार, रोजगार, अध्यात्म, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और टूरिज्म के साथ 21वीं सदी के स्पेस टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरे देश में एक बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इस रोडमैप में सबसे विशेष बात यह है कि प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजते और संरक्षित करते हुए 21वीं शताब्दी के विकसित भारत के उन आयामों पर काम करने का संकल्प है जो इस शताब्दी में हमारे जीवन को बड़े स्तर पर प्रभावित करने जा रहे हैं। जहां तक समृद्ध विरासत और आधुनिकता के संगम की बात है तो अगर प्रदेश में पहली बार कृष्ण पाथेय पर काम हो रहा है, राम वन गमन पथ को गति दी जा रही है, सिंहस्थ की जोर शोर से तैयारी चल रही है तो साथ में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एमपी स्पेस-टेक पॉलिसी, 2026 और स्टेट एआई मिशन पर भी काम हो रहा है. यह पहली बार है जब प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट डेटा के उद्योग से खेती को बड़े पैमाने पर उन्नत बनाने की बात हो रही है. इसी वर्ष 23 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि स्पेस टेक नीति-2026 से मध्यप्रदेश भारत का नया ‘स्पेस टेक’ हब बनेगा और इसी तरह भारत की नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश एक सशक्त भूमिका निभाएगा. इसके पहले 15 जनवरी, 2026 को भोपाल में क्षेत्रीय एआई इम्पैक्ट सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें सरकार ने शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, ग्रामीण विकास, शहरी प्रबंधन और औद्योगिक स्वचालन में एआई के व्यावहारिक और प्रभावशाली उपयोग को प्रदर्शित किया था. इस एआई इम्पैक्ट सम्मेलन का महत्व इसलिए भी था क्योंकि नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट, 2026 जो फरवरी में आयोजित किया गया और जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, में मध्यप्रदेश ने भी भाग लिया और इस एआई इम्पैक्ट समिट का पूरा जोर ही इस बात पर था कि कैसे एआई हमारे जीवन के हर क्षेत्र में बहुत बड़े स्तर पर इम्पैक्ट डालने वाला है। इस दृष्टि से मध्यप्रदेश में सही समय पर एआई पर कार्य होना आरंभ हुआ है। उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ में भी एआई का उपयोग इस आयोजन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में दिख सकता है। डॉ. मोहन यादव के रोडमैप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रदेश की आर्थिक आत्मनिर्भरता है. मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षों में राज्य के बजट को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है. वर्तमान में राज्य की विकास दर 14-15 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है. इस गति को बनाए रखने के लिए एमएसएमई (MSME) और औद्योगिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मध्यप्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बन सके। अपने भाषण में डॉ. मोहन यादव ने कहा, “अध्यक्ष महोदय, जब हम आपसे विजन डॉक्यूमेंट 2047 की बात कर रहे हैं, तो यह विजन डॉक्यूमेंट कोई कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हमारा व्यक्तिगत संकल्प भी है. 2047 तक मध्यप्रदेश का युवा, महिला, सभी वर्गों का इस प्रकार का माहौल बनेगा कि हमारे युवा और महिला नेतृत्व नौकरी देने वाले बनें, नौकरी लेने वाले नहीं, इस प्रकार के संकल्प से हम आगे बढ़ रहे हैं. मध्यप्रदेश 2047 का विजन डॉक्यूमेंट राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और नागरिक जीवन की गुणवत्ता को उच्चतम स्तर तक ले जाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं। हम अपनी इस सरकार के गठन के 2 वर्षों में लगभग 14-15% की ग्रोथ रेट से आगे बढ़ रहे हैं।” प्रदेश की आर्थिक तरक्की के बारे में अपने विजन को बजट के उल्लेख के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, “…सवा तीन लाख करोड़ से हम बजट को 5 साल में … Read more

उद्योग संचालन की निरंतरता के लिए त्वरित समन्वय

भोपाल  एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक  विशाल सिंह चौहान ने मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में उद्योगों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में 80 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि, गैस एजेंसी संचालक तथा संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यकारी संचालक  चौहान ने औद्योगिक इकाइयों से वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था, उत्पादन की निरंतरता और भविष्य की आवश्यकताओं पर विस्तृत संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योगों की संचालन व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन और संबंधित एजेंसियां समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं। पीएनजी कनेक्शन को प्रोत्साहन बैठक में गैस प्राधिकरण भारत लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मंडीदीप क्षेत्र में उपलब्ध पाइप्ड नेचुरल गैस सुविधा की जानकारी दी। औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी कनेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह अवगत कराया गया कि 31 मार्च 2026 तक बिना सुरक्षा जमा राशि के पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उद्योगों को 23 मार्च 2026 के परिपत्र की जानकारी दी गई, जिसके अनुसार कुल एलपीजी आपूर्ति का 5 प्रतिशत भाग औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित किया गया है। प्रवासी श्रमिकों की सुविधा के लिए 5 किलोग्राम और 2 किलोग्राम गैस सिलेंडर कनेक्शन की उपलब्धता पर भी चर्चा की गई। उत्पादन की निरंतरता पर बल कार्यकारी संचालक  चौहान ने कहा कि उद्योग प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार हैं और उत्पादन की निरंतरता सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता अनुसार वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग पर भी सकारात्मक विचार रखने का सुझाव दिया गया, जिससे संचालन प्रभावित न हो। गैस सिलेंडर वितरण की सुव्यवस्थित योजना तैयार करने, पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को प्राथमिकता से पूर्ण करने तथा आवश्यक उद्योग इकाइयों को वरीयता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। औद्योगिक संघों से समन्वय बनाए रखने पर भी बल दिया गया। अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी सक्रिय संवाद कार्यकारी संचालक  चौहान ने बगरौदा इंडस्ट्री एसोसिएशन भोपाल तथा अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों से भी इसी विषय पर विस्तृत चर्चा की। एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था के संबंध में बढ़ियाखेड़ी, सीहोर के उद्योगपतियों से भी संवाद किया।  

कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

रायपुर कैबिनेट मंत्री  लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल विश्व क्षय दिवस के अवसर पर को टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कोरबा जिले में 100 दिवसीय विशेष पहचान एवं उपचार अभियान का शुभारंभ आज  कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ शासन के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में किया गया। इस अभियान के तहत  जिले में टीबी के संभावित मरीजों एवं उच्च जोखिम वाले समूहों की पहचान कर उनकी समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री  देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में टीबी को जड़ से समाप्त करने का अभियान स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के सतत प्रयासों से प्रदेश में गांव से लेकर शहर तक टीबी  की रोकथाम एवं उपचार के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं तथा मरीजों के लिए निःशुल्क उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों के सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में सशक्त अभियान चलाया जा रहा है। “निक्षय निरामय मित्र” जैसी पहल के माध्यम से टीबी मरीजों की पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। मंत्री  देवांगन ने बताया कि जिले में टीबी मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है और वर्तमान में 101 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित हो चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों से जल्द ही कोरबा जिले को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाया जा सकेगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि टीबी के लक्षणों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान कर तुरंत जांच एवं उपचार कराएं। जिले के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों में उपचार की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।  देवांगन ने टीबी मरीजों के उपचार में परिवार, समाज एवं सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए सभी से सहयोग करने तथा टीबी मुक्त कोरबा बनाए रखने में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस दौरान मंत्री  देवांगन ने कार्यक्रम में  उपस्थित सभी लोगो को टीबी मुक्त भारत बनाने हेतु योगदान देने का शपथ दिलाया। साथ ही जिले के टीबी मुक्त घोषित पंचायतों को प्रमाण पत्र एवं गांधी प्रतिमा देकर सम्मानित किया गया। टीबी उन्मूलन में योगदान देने वाले सार्वजनिक उपक्रम, समाजसेवी संस्थानों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में 20 टीबी मरीजों को पोषण सहयोग प्रदान करने हेतु निक्षय किट का वितरण किया गया, जिससे उनके उपचार में सहायता मिल सके। इस अवसर पर निगम आयुक्त  आशुतोष पांडेय, जिला पंचायत सीईओ  दिनेश कुमार नाग, अपर कलेक्टर  देवेंद्र पटेल,  ओंकार यादव, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस एन केसरी, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ बी आर रात्रे, लायन्स क्लब के अध्यक्ष  विक्रम अग्रवाल, एनजीओ प्रमुख, जनप्रतिनिधि सहित टीबी मुक्त पंचायतो के सरपंच, मितानिन एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने में जनता की भूमिका सबसे अहम, सब मिलकर बनाएं टीबी मुक्त भारत…. स्वास्थ्य मंत्री

रायपुर एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ विश्व क्षय दिवस के अवसर पर पूरे देश के साथ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में भी “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर इस अभियान की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा द्वारा नोएडा से वर्चुअल माध्यम से की गई, वहीं छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से होना अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। एमसीबी जिले से टीबी मुक्त भारत अभियान का स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल बोले – जनभागीदारी से ही होगा टीबी का अंत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि 24 मार्च का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “टीबी मुक्त भारत” का संकल्प तेजी से साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि 7 दिसंबर 2024 से 24 मार्च 2025 तक चले अभियान में 4113 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की 118 ग्राम पंचायतों के सरपंचों को उत्कृष्ट कार्य के लिए गांधी जी की प्रतिमा एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। अब गांव-गांव पहुंचेगी हाईटेक जांच –   AI  से 10 मिनट में मिलेगी रिपोर्ट अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब गांव-गांव तक पहुंचेंगी। आयुष्मान स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच की जाएगी, जिसमें रक्त जांच के साथ हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन से मौके पर ही छाती का एक्स-रे किया जाएगा। आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI ) तकनीक की मदद से मात्र 5 से 10 मिनट में रिपोर्ट उपलब्ध होगी, जिससे शुरुआती स्तर पर ही टीबी की पहचान संभव हो सकेगी। जिले में 203 मरीज उपचार, निक्षय योजना से मिल रही पोषण सहायता वर्तमान में जिले में 203 टीबी मरीज उपचाररत हैं, जिनमें 7 एमडीआर और 4 टीबी संक्रमण के मरीज शामिल हैं। सभी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा 1000 रुपये प्रतिमाह (6 माह तक) तथा राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त 200 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जा रही है। वहीं वर्ष 2025-26 में 205 निक्षय मित्रों द्वारा 283 मरीजों को गोद लेकर पोषण आहार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही जिले में 3 ट्रू-नेट मशीन, 5 सामान्य एक्स-रे मशीन और 1 हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के माध्यम से जांच कार्य संचालित किया जा रहा है। जागरूकता रथ रवाना, 100 दिनों में घर-घर पहुंचेगा अभियान अभियान को चार चरणों में संचालित किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी। इसके बाद हाई रिस्क क्षेत्रों, भीड़भाड़ वाले स्थानों, शहरी और जनजातीय क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जो जिलेभर में अभियान का प्रचार-प्रसार करेगा। कार्यक्रम में चंपा देवी पावले, महापौर रामनरेश राय, सभापति संतोष सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, एमआईसी सदस्य नीलम सलूजा, मंडल अध्यक्ष पुरुषोत्तम सोनकर, राम लखन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अंत में उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में संकल्प लिया कि “हम सब ने ठाना है, छत्तीसगढ़ से टीबी को भगाना है। टीबी हारेगा, देश जीतेगा।”

विदिशा के डायल 112 हीरोज: सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  विदिशा जिले के थाना सिरोंज क्षेत्र में ट्रैक्टर और कार की टक्कर में घायल हुए लोगों को डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई से समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। डायल-112 टीम की तत्परता से घायलों को शीघ्र चिकित्सीय सहायता मिल सकी। दिनांक 24 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना सिरोंज क्षेत्र अंतर्गत दीनदयाल पार्क के पास ट्रैक्टर और कार की टक्कर हो गई है, जिससे कई लोग घायल हो गए हैं। सूचना प्राप्त होते ही सिरोंज थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। मौके पर पहुँचकर आरक्षक  रामनरेश एवं पायलट  प्रेमनारायण ने पाया कि दुर्घटना में 05 व्यक्ति घायल हो गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डायल-112 जवानों ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सिविल अस्पताल सिरोंज पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 जवानों की त्वरित कार्रवाई के कारण घायलों को समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सकी। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा हर आपात स्थिति में आमजन की सहायता और जीवन रक्षा के लिए सदैव सजग और प्रतिबद्ध है।  

आतंकियों के लिए बनेगी ‘काला पानी’ जैसी जेल! सम्राट चौधरी ने लोकेशन का किया खुलासा

पटना बिहार सरकार 'काला पानी' जैसी नई हाई सिक्योरिटी जेल बनाने जा रही है। इसमें आतंकियों और दुर्दांत अपराधियों को कैद रखा जाएगा। इस जेल की जगह फाइनल कर दी गई है। राज्य के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने ऐलान किया कि इसका निर्माण कैमूर जिले में स्थित अधौरा पहाड़ पर किया जाएगा। इस जेल में बंद खूंखार अपराधी बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को समृद्धि यात्रा के तहत कैमूर जिले के दौरे पर पहुंचे। इस दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद रहे। यहां आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सम्राट ने कहा कि कैमूर को जंगल और पहाड़ वाला इलाका माना जाता है। पिछले साल जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार प्रगति यात्रा पर आए थे, तब उन्होंने उस पहाड़ पर डिग्री कॉलेज खोलने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि अब नीतीश सरकार ने तय किया है कि कैमूर के अधौरा पहाड़ पर हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी। सबसे खूंखार आतंकवादी होंगे, उन्हें यहां बंद किया जाएगा। पहाड़ी पर इस तरह की जेल बनाने की घोषणा सम्राट ने ही पिछले दिनों बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में की थी। हालांकि, उस समय यह नहीं बताया गया था कि यह जेल कहां बनाई जाएगी। अब इसकी जगह फाइनल कर दी गई है। कैसी होगी हाई सिक्योरिटी जेल सम्राट चौधरी ने पिछले महीने सदन में कहा था कि नई हाई सिक्योरिटी जेल में खूंखार अपराधियों को रखा जाएगा। इसे ऐसी पहाड़ी पर बनाया जाएगा, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आएगा और इंटरनेट की कोई सुविधा नहीं होगी। इस जेल तक आने-जाने का बस एक ही रास्ता होगा, उस पर भी कड़ा पहरा होगा। गृह मंत्री ने बताया था कि इस जेल में बाहर से किसी भी व्यक्ति को अंदर आने की अनुमति नहीं होगी। इसमें कैद अपराधी बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटे हुए रहेंगे। यहां से ना तो कोई शख्स बाहर जा पाएगा और ना ही अंदर आ पाएगा। जेल के अंदर से आपराधिक नेटवर्क चलाने वाले गैंगस्टर और माफिया को भी यहां रखा जाएगा। काला पानी जैसी होगी नई जेल? अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में स्थित सेलुलर जेल को काला पानी जेल कहा जाता है। अंग्रेजों द्वारा भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को इसमें कैद रखा जाता था और उन्हें बहुत कठोर यातनाएं दी जाती थीं। यहां कैद लोग बाकी दुनिया से पूरी तरह अलग हो जाते थे। उन्हें काल कोठरियों में बंद रखा जाता था। कोल्हू से तेल निकालने जैसे कठिन काम कराए जाते थे। इसी वजह से इसे काला पानी की सजा कहा जाता था।  

पंजाब में बड़ा विभागीय फेरबदल: चीमा को ट्रांसपोर्ट, भुल्लर से जेल विभाग लेकर डॉ. रवजोत को दिया

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। पंजाब वेयरहाउस के जिला मैनेजर रहे गगनदीप सिंह रंधावा के खुदकुशी मामले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के विभागों का बंटवारा किया गया है। पंजाब सरकार ने कैबिनेट मंत्रियों के पोर्टफोलियो में फेरबदल किया है। पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के इस्तीफे और गिरफ्तारी के बाद उनके दोनों विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए गए हैं। वित्त मंत्री हरपाल चीमा को ट्रांसपोर्ट विभाग दिया गया है। वहीं जेल विभाग की जिम्मेदारी डॉ. रवजोत को दी गई है। उक्त दोनों विभाग पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर के पास थे।   कोर्ट में भुल्लर की पेशी आज इस मामले में पूर्व मंत्री लाल सिंह भुल्लर को पुलिस ने सोमवार देर शाम गिरफ्तार कर लिया है। भुल्लर को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। आज उनके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। भुल्लर की पोस्ट पर क्या बोली रंधावा की बेटी वहीं भुल्लर की खुद को निर्दोष बताने वाली सोशल मीडिया पोस्ट पर रंधावा की बेटी ने मीडिया के सामने बयान दिया है। रंधावा की बेटी ने कहा कि भुल्लर की ओर से खुद को निर्दोष बताए जाने के दावे बेबुनियाद हैं। उनके मुताबिक, उनके पिता को लगातार फोन कॉल के जरिए दबाव डाला जाता था। उन्होंने कहा कि इन कॉल्स की संख्या काफी है और इसकी जांच साइबर सेल से कराई जानी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित सरकारी कार्यालय के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि वीडियो में उनके पिता यह कहते दिखाई देते हैं कि उन पर दबाव बनाया जा रहा था। परिवार की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस मामले में पुलिस और अन्य एजेंसियों की कार्रवाई की ओर से बनती कार्रवाई की जा रहीं है। यह है मामला गगनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार रात को जहरीला पदार्थ निगल लिया था। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने मरने से पहले बनाए वीडियो में पंजाब के मंत्री लालजीत भुल्लर का नाम लिया था। वीडियो सामने आने के बाद सीएम ने तुरंत मंत्री का इस्तीफा ले लिया था। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और परिवार का दबाव बढ़ा तो भुल्लर, उसके पिता और उसके पीए के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

45 लाख रूपये की लागत के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमंतु एवं अर्ध-घुमंतु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को 45 लाख रुपये से अधिक की लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि जनता की सेवा और क्षेत्र का समग्र विकास ही हमारा मूल मंत्र है। यही कारण है कि क्षेत्र में विकास के कार्य अनवरत जारी हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हमारी सरकार विकास कार्यों और जन-कल्याण के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्यमंत्री गौर ने 23 लाख रुपये की लागत से विवेकानंद कॉलोनी के पार्क में बाउंड्री वॉल एवं पाथवे का निर्माण और रजत नगर में सड़क के डामरीकरण कार्य का भूमि-पूजन किया। वहीं राजीव नगर 'ए' सेक्टर में 22 लाख रुपये की लागत से सीसी सड़क निर्माण, शेड निर्माण और पेवर ब्लॉक लगाने के कार्यों का भी भूमि-पूजन किया गया। भूमि-पूजन के इस भव्य कार्यक्रम में पार्षद ममता विश्वकर्मा, छाया ठाकुर, श्री संतोष ग्वाला, श्री मनोज विश्वकर्मा, श्री बृजेश व्यास, श्री प्रदीप लोधी, श्री दलजीत सिंह, श्री संजय जी, श्री प्रतीक पाराशर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।  

वन मंत्री कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने मुरकुची और पखना कोंगेरा में दी विकास कार्यों की सौगात वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने विकास की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि बस्तर का समग्र विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों की राह में आने वाली हर बाधा को दूर करना उनका लक्ष्य है।  मंत्री  केदार कश्यप ने आज नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बस्तर विकासखंड में विकास की नई इबारत लिखी। उन्होंने क्षेत्र के सघन दौरे के दौरान मुरकुची और पखना कोंगेरा में आयोजित भव्य कार्यक्रमों मंस शिरकत की, जहाँ उन्होंने विधायक निधि से स्वीकृत कुल 56 लाख रूपए की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन कर ग्रामीणों को बड़ी सौगात दी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 10 महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर आवागमन और सामुदायिक सुविधाओं में व्यापक सुधार सुनिश्चित होगा। जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पुलियाओं का निर्माण केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। उन्होंने पूर्ववर्ती कठिनाईयों का स्मरण कराते हुए कहा कि बरसात के दिनों में छोटे-छोटे नालों के उफान पर होने के कारण ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों और मरीजों को जो परेशानियां झेलनी पड़ती थीं, अब ये नई पुलियाएं उन समस्याओं का स्थायी समाधान बनेंगी। वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचाना ही सुशासन की असली पहचान है। उन्होंने पुल-पुलिया के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ये निर्माण कार्य स्थानीय परिवहन को सुगम बनाएंगे और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में किसानों की मदद करेंगे। साथ ही तारागांव में सामुदायिक भवन के निर्माण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए गांवों में सुरक्षित और पक्के भवनों का होना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण समाज एकजुट होकर अपनी परंपराओं का निर्वहन कर सके। मंत्री  कश्यप ने ग्रामीणों से सीधा संवाद करते हुए अपील की कि वे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर स्वयं भी नजर रखें, क्योंकि यह संपत्ति उनकी अपनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायणपुर विधानसभा के हर कोने में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार निरंतर जारी रहेगा और धन की कमी को कभी विकास में बाधक नहीं बनने दिया जाएगा। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मती वेदवती कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष  संतोष बघेल सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।