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स्टील घोटाले पर बड़ा एक्शन: CBI ने महारत्न कंपनी SAIL पर कसा शिकंजा

भिलाई. देश की प्रतिष्ठित महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी सेल में सामने आई कथित स्टील आपूर्ति अनियमितता अब बड़े घोटाले का रूप ले चुकी है। लोकपाल के स्पष्ट निर्देश के बाद सीबीआइ ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है, जिससे अब कंपनी के शीर्ष प्रबंधन और पूर्व निदेशकों तक जांच की आंच पहुंच गई है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में सेल को लगभग 300 से 350 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बीएसपी में तैयार टीएमटी स्टील की बड़ी मात्रा भी कथित तौर पर फर्जी या गैर-पात्र प्रोजेक्ट कंपनियों को सप्लाई की गई। इससे संकेत मिलता है कि अनियमितता केवल एक इकाई तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क में फैली हुई थी। 1.5 लाख टन स्टील से खुला घोटाले का राज जांच की शुरुआत तब हुई जब यह सामने आया कि वेंकटेश इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट वर्क्स स्कीम के तहत 1.5 लाख टन से अधिक स्टील की आपूर्ति की गई, जबकि कंपनी इस योजना के लिए पात्र ही नहीं थी। लोकपाल ने 10 जनवरी 2024 को सीबीआइ जांच के आदेश दिए, जिसके बाद एजेंसी ने 10 अक्टूबर 2024 को एफआइआर दर्ज कर मामले की औपचारिक जांच शुरू की। 29 वरिष्ठ अधिकारी निलंबित, फिर बहाली पर उठे सवाल लोकपाल के आदेश के बाद सेल प्रबंधन ने 29 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया था, जिनमें निदेशक स्तर के दो अधिकारी भी शामिल थे। हालांकि, 28 जून 2024 को जांच में देरी का हवाला देकर सभी अधिकारियों की बहाली कर दी गई। इस निर्णय ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 35 निजी कंपनियां जांच के घेरे में जांच में यह भी सामने आया है कि वेंकटेश इंफ्रा के अलावा 35 से अधिक निजी कंपनियों को नियमों को दरकिनार कर स्टील सप्लाई की गई। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और गैर-प्रोजेक्ट सेक्टर की कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें इस स्कीम का लाभ मिलना ही नहीं चाहिए था। इन कंपनियों में कई नाम शामिल हैं, जैसे ब्रिक टू वाल इंफ्राटेक, ओएफबी टेक, लैंडसिएर्ज स्टेट, नोबेल टेक इंडस्ट्रीज, आर्टिस्टी इंफ्राकॉन, स्ट्राइक इंफ्राकान, जारैली प्रोजेक्ट्स, श्री सिद्धबाली इस्पात, एसएमडब्ल्यू इस्पात, रुद्रनाथ इंफ्रा, रेनबो वाणिज्य, सिल्वर वाटर मेटल एंड मिनरल्स, पीवीवी इंफ्रा लिमिटेड सहित अन्य। व्हिसलब्लोअर को ही चुकानी पड़ी कीमत इस पूरे मामले को उजागर करने वाले व्हिसलब्लोअर राजीव भाटिया बताए जा रहे हैं। उन्होंने पहले भी स्टील आपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर उच्च स्तर पर शिकायत की थी। लेकिन कार्रवाई भ्रष्टाचार पर होने के बजाय, उन्हें 11 फरवरी 2025 को सीसीएस नियम 56(जे) के तहत समयपूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, भाटिया को एक ईमानदार और निर्भीक अधिकारी माना जाता था। उनकी बर्खास्तगी को लेकर उच्च स्तर तक असंतोष की चर्चाएं हैं। सीएमडी पर भी उठे सवाल, इस्तीफे की अटकलें जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि सेल के वर्तमान सीएमडी अमरेंदु प्रकाश भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद कई कंपनियों को स्टील आपूर्ति की अनुमति दी गई। प्रशासनिक हलकों में उनके इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी धन से कानूनी खर्च पर विवाद एक और बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हुआ है कि सीबीआइ जांच का सामना कर रहे अधिकारियों की कानूनी लड़ाई के लिए सेल द्वारा करीब 70 लाख रुपये अधिवक्ताओं की फीस में खर्च किए गए। अब मांग उठ रही है कि यह राशि संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूली जाए। सबसे बड़ा सवाल, क्या होगी कार्रवाई? पूरे मामले ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि क्या इस कथित स्टील घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर मामला अन्य मामलों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव: RIMS में पूरी जांच सुविधा, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

रांची. झारखंड की राजधानी रांची के रिम्स में अब मरीजों को लगभग हर तरह की जांच की सुविधा एक ही जगह मिलने जा रही है। ट्रामा सेंटर लैब में पहले से 24 घंटे जांच की सुविधा उपलब्ध है, वहीं अब कई नई और महंगी जांचें भी शुरू की जा रही हैं। इन जांचों के शुरू होने से मरीजों को समय पर बीमारी का पता चलेगा और इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा। इससे खासकर गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक निजी लैब में हजारों रुपये खर्च करने पड़ते थे। रिम्स प्रबंधन के अनुसार, कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की जांच अब यहीं संभव होगी। जिन जांचों के लिए निजी लैब में 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे, वे फिलहाल फ्री या बहुत कम दर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। आगे चलकर इन जांचों की दरें बाजार से 90 प्रतिशत तक कम रखने की तैयारी है। ये 6 नई जांचें होंगी शुरू, मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ CA-125 जांच: यह महिलाओं में अंडाशय (ओवरी) के कैंसर की पहचान के लिए महत्वपूर्ण जांच है। CA-19-9 जांच: अग्न्याशय (पैंक्रियाज) और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर का पता लगाने में सहायक। एंटी-TPO जांच: थायरायड ग्रंथि से जुड़ी बीमारियों की पहचान के लिए उपयोगी। एंटी-CCP जांच: जोड़ों की बीमारी (रूमेटाइड आर्थराइटिस) की शुरुआती पहचान में सहायक। मूत्र प्रोटीन जांच: किडनी से जुड़ी बीमारियों और शरीर में प्रोटीन की कमी या लीकेज का पता लगाने के लिए जरूरी। RF (रूमेटाइड फैक्टर) जांच: गठिया रोग की पुष्टि और उसकी गंभीरता जानने में सहायक। ट्रामा सेंटर लैब में 24 घंटे मिल रही ये सुविधाएं  रिम्स के ट्रामा सेंटर स्थित अत्याधुनिक लैब में पहले से ही 24×7 जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां 4-5 घंटे के भीतर रिपोर्ट मिल रही है। उपलब्ध प्रमुख जांचों में शामिल हैं: रक्त शर्करा जांच (ब्लड शुगर), गुर्दा कार्य जांच (यूरिया, क्रिएटिनिन), यकृत कार्य जांच (लिवर फंक्शन), इलेक्ट्रोलाइट जांच (सोडियम, पोटैशियम), कोलेस्ट्राल जांच (लिपिड प्रोफाइल), हार्मोन जांच (टी3, टी4, टीएसएच, कोर्टिसोल), कैंसर संबंधी जांच (सीईए, एएफपी, एचसीजी, एलडीएच), गंभीर संक्रमण जांच (सीआरपी, प्रोकैल्सीटोनीन, डी-डाइमर, ट्रोपोनिन), संक्रामक रोग जांच (एचआईवी,हेपेटाइटिस बीवसी), सामान्य पैथोलाजी जांच (सीबीसी, पीटी,आइएनआर, मूत्र जांच, शरीर के तरल की जांच) आदि। निजी लैब पर निर्भरता होगी कम इन सुविधाओं के विस्तार से अब मरीजों को निजी लैब का रुख नहीं करना पड़ेगा। जहां पहले एक जांच के लिए हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब रिम्स में सस्ती या मुफ्त जांच उपलब्ध होगी। रिम्स के डाक्टरों का मानना है कि इससे गरीब मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा और समय पर जांच व इलाज से गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। पहले भी उठती रही है जांच सुविधा बढ़ाने की मांग रिम्स में महंगी जांचों की सुविधा शुरू करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। कई बार मरीजों और जनप्रतिनिधियों ने यह मुद्दा उठाया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के बावजूद जांच के लिए निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे इलाज महंगा हो जाता है। खासकर कैंसर और हार्मोन से जुड़ी जांचों के लिए मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। इन नई सुविधाओं के शुरू होने से आयुष्मान भारत योजना और बीपीएल श्रेणी के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें जांच के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा। एक ही परिसर में जांच और इलाज दोनों की सुविधा मिलने से समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

किसानों के लिए दोधारी तलवार: बारिश से गेहूं को लाभ, पर सड़न का खतरा बढ़ा

अमृतसर. पंजाब में दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद शनिवार से मौसम साफ चल रहा है। हालांकि, शनिवार कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जारी रही। इस बदलाव से गेहूं की फसल को लेकर चिंतित किसानों को फिलहाल राहत मिली है। फसल पकने के अंतिम चरण में होने के कारण किसान लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए थे। हाल के वर्षों में कटाई से पहले हुई बेमौसमी बारिश से फसलों को नुकसान की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे किसानों की चिंता स्वाभाविक थी। इस बार हालांकि बारिश हल्की रही और तेज हवाएं नहीं चलीं, जिससे बड़े नुकसान से बचाव हो गया। कृषि विभाग के निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि बारिश धीमी रही और तेज हवाओं का अभाव रहा, जो फसल को गिरने से बचाने में अहम कारक है। हालांकि उन्होंने किसानों को आने वाले दिनों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है। 34.5 लाख  हेक्टेयर में हुई गेहूं की बुवाई इस वर्ष पंजाब में लगभग 34.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई है। ऐसे में मौसम में थोड़ा सा बदलाव भी बड़े स्तर पर असर डाल सकता है। बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है, जिससे भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी। लंबे समय से गिरते जल स्तर से जूझ रहे राज्य के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। गुरदासपुर के कुछ क्षेत्रों में फसल के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे सीमित और मामूली बताया है। इसे बड़े स्तर का नुकसान नहीं माना जा रहा। चिंताएं अभी कम नहीं हुई मौसम विभाग ने 26 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई है। ऐसे में फसल के दाने बनने के इस महत्वपूर्ण चरण में किसानों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इससे पहले फरवरी और मार्च के शुरुआती दिनों में तापमान सामान्य से लगभग पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया था, जिससे फसल पर गर्मी के असर का खतरा बढ़ गया था। कुछ इलाकों में गेहूं की फसल पर हल्का बैंगनी रंग भी देखा गया, जिसे तापमान में उतार-चढ़ाव से जोड़ा गया। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी डाॅ. सतबीर सिंह गोसल ने स्पष्ट किया कि यह रंग परिवर्तन अस्थायी है और इससे फसल को स्थायी नुकसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब तक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है, तब तक फसल सुरक्षित रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात नियंत्रित हैं, लेकिन कटाई के करीब पहुंच चुकी फसल के लिए तेज हवा, ओलावृष्टि या लंबी बारिश खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

दिन-रात का संतुलन बदला: उज्जैन वेधशाला में वसंत संपात का अद्भुत दृश्य

उज्जैन. 21 मार्च को देशभर में ‘वसंत संपात’ के रूप में एक विशेष खगोलीय घटना देखने को मिली, जब दिन और रात लगभग बराबर, 12-12 घंटे रहे। इस दौरान सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर स्थित रहा, जिससे पृथ्वी के दोनों गोलार्द्धों पर समान रूप से प्रकाश पड़ा और यह संतुलन बना। वेधशाला में खगोलीय शंकु यंत्र और नाड़ीवलय यंत्र के माध्यम से सूर्य की स्थिति और छाया में होने वाले बदलाव को आमजन के लिए प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया गया, जिससे लोगों को इस खगोलीय संतुलन को समझने का अवसर मिला। 21 मार्च को शंकु यंत्र की छाया सीधी रेखा में दिखाई दी, जो दिन-रात के बराबर होने का स्पष्ट संकेत मानी जाती है। दिन सबसे लंबे होंगे वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि खगोलीय घटना वर्ष में दो बार होती है, लेकिन मार्च का वसंत संपात उत्तरी गोलार्द्ध के लिए खास महत्व रखता है। वसंत संपात के बाद अब उत्तरी गोलार्द्ध में दिन लगातार बड़े होते जाएंगे और यह क्रम जून में ग्रीष्म अयनांत तक जारी रहेगा, जब दिन सबसे लंबे होंगे। वहीं दक्षिणी गोलार्द्ध में इसका उल्टा प्रभाव देखने को मिलेगा। वसंत संपात केवल खगोलीय घटना नहीं, बल्कि मौसम परिवर्तन का भी संकेत है। इसके साथ ही वसंत ऋतु का प्रभाव बढ़ने लगता है, तापमान में वृद्धि होती है और प्राकृतिक गतिविधियों में तेजी आती है, जिसका असर कृषि और पर्यावरण पर भी सकारात्मक रूप से पड़ता है।  

स्क्रैप गोदाम में लगी आग से हड़कंप: इंदौर में दूर-दूर तक फैला धुआं

इंदौर. इंदौर में रविवार सुबह सांवरे रोड स्थित एक स्क्रैप गोदाम में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिनले के बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और इसे बुझाने का प्रयास शुरू किया। कई किमी दूर से इस आग से उठता धुएं का गुबार नजर आ रहा है। गोदाम में आग लगते ही अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के मुताबिक गोदाम में प्लास्टिक स्क्रैप का सामान भरा हुआ था। गर्मी शुरू होते ही आग की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। हाल ही में शहर की बृजेश्वरी (एनएक्स) कॉलोनी में एक घर में लगी आग से 8 लोगों की मौत हो गई थी। इंदौर के पालदा क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक स्क्रैप फैक्ट्री के गोदाम में भीषण आग लग गई, जिससे इलाके में काले धुएं का गुबार फैल गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार यह आग समता नगर स्थित नसबी मोहम्मद समीर के गोदाम में लगी थी। आग बुझाने के लिए करीब 10 हजार लीटर पानी और 10 हजार लीटर फोम का उपयोग किया गया। आसपास अतिक्रमण होने के कारण दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने और आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आग के कारण क्षेत्र में कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। दमकल को आईं भारी दिक्कतें फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के मुताबिक इलाके में अवैध अतिक्रमण के कारण सड़क काफी संकरी हो गई थी, जिससे दमकल वाहनों को गोदाम तक पहुंचने में भारी परेशानी हुई। शुरुआत में बाहर से ही पाइप डालकर आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन काफी मशक्कत के बाद रास्ते से गाड़ियां हटाकर एक दमकल वाहन को अंदर भेजा जा सका। इसी वजह से आग पर काबू पाने में काफी देर लग गई। 20 फीट की सड़क पर 7 फीट अतिक्रमण यहां की सड़क की कुल चौड़ाई करीब 20 फीट है, लेकिन स्थानीय रहवासियों द्वारा लगभग 7 फीट हिस्से पर अवैध अतिक्रमण कर लिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि यह पूरा इलाका इंडस्ट्रियल एरिया है, जहां करीब 60 से 70 फैक्ट्रियां संचालित हैं और 2 से 3 हजार कर्मचारी काम करते हैं। अतिक्रमण के कारण ट्रक और अन्य भारी वाहनों को फैक्ट्री और गोदाम तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों के अनुसार, इस समस्या को लेकर पहले भी नगर निगम को लिखित शिकायतें दी गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

संस्कृति से राजनीति तक: बिहार दिवस पर PM मोदी और शाह ने दिलाई आपातकाल की याद

पटना. बिहार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दी गई शुभकामनाएं राजनीतिक रूप से भी कई संकेत छोड़ गई हैं। अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव को रेखांकित करते हुए इसे देश के लिए मार्गदर्शक बताया। मोदी एक्स पर बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के अपने सभी परिवारजनों को अनेकानेक शुभकामनाएं दीं। PM मोदी ने लिखा, "भारतीय विरासत को भव्यता और दिव्यता प्रदान करने वाला हमारा यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए अध्याय गढ़ने में जुटा है।" मुझे विश्वास है कि विकसित बिहार के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में यहां के कर्मठ एवं ऊर्जावान लोगों का समर्पण और सामर्थ्य बहुत काम आएगा। बिहार को बताया बौद्धिक चेतना की भूमि गृह मंत्री ने जिस तरह बिहार को सामाजिक न्याय और बौद्धिक चेतना की भूमि बताया, उसे राज्य की राजनीति के मौजूदा विमर्श से जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर जब बिहार में सामाजिक न्याय की राजनीति लंबे समय से केंद्र में रही है, ऐसे में उनका यह बयान भाजपा के व्यापक सामाजिक विस्तार के प्रयास का संकेत माना जा रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसी ऐतिहासिक शिक्षण परंपराओं का उल्लेख कर उन्होंने बिहार के गौरवशाली अतीत को राष्ट्रीय पहचान से जोड़ा। यह भी संदेश देने की कोशिश रही कि केंद्र सरकार बिहार की बौद्धिक विरासत को सम्मान देने के साथ उसे विकास के एजेंडे में शामिल कर रही है। स्वतंत्रता संग्राम और आपातकाल का जिक्र करते हुए शाह ने बिहार की राजनीतिक जागरूकता और संघर्षशीलता को रेखांकित किया। इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से जोड़ते हुए उन्होंने राज्य की भूमिका को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित करने का प्रयास किया। सामाजिक संदेश देने की कोशिश बिहार में आगामी सत्ता परिवर्तन समीकरणों को देखते हुए इस तरह के संदेशों के जरिए भाजपा लोगों के बीच भावनात्मक और वैचारिक जुड़ाव मजबूत करना चाहती है। विकास, विरासत और सामाजिक समरसता को एक साथ रखकर पार्टी अपने एजेंडे को व्यापक बनाने में जुटी है। संदेश के अंत में गृह मंत्री ने बिहार के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इंटरनेट मीडिया पर इस पोस्ट को व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है, जो यह दर्शाता है कि बिहार दिवस जैसे अवसर अब राजनीतिक संवाद का भी महत्वपूर्ण मंच बनते जा रहे हैं।

पंजाब में सुसाइड केस ने पकड़ा तूल, पूर्व मंत्री भुल्लर सहित तीन पर FIR

चंडीगढ़. पुलिस ने पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी की आत्महत्या के मामले में पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ केस दर्ज किया है। अमृतसर में पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा ने कथित तौर पर शनिवार को कोई जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने भुल्लर के पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और उनके निजी सहायक दिलबाग सिंह के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। FIR भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 351 (3) (आपराधिक धमकी) और 3 (5) (साझा इरादा) के तहत दर्ज की गई है। यह केस शनिवार रात अमृतसर के रणजीत एवेन्यू पुलिस स्टेशन में रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शनिवार को, मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों के बीच पद छोड़ने के लिए कहे जाने के बाद भुल्लर ने राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। लालजीत भुल्लर पर लगा उत्पीड़न का आरोप शनिवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें रंधावा, जिनके पास पट्टी का अतिरिक्त प्रभार भी था, को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया कि उन्होंने सल्फास खा लिया है और उन्होंने परिवहन मंत्री पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। तुम्हारे दोस्त ने सल्फास खा ली है। मंत्री लालजीत भुल्लर के डर से। अब मैं नहीं बचूंगा, रंधावा कहते हैं। तरनतारन के पट्टी से विधायक भुल्लर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया। इससे पहले, मान ने कहा था कि उन्होंने मुख्य सचिव को इस मामले की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है और मंत्री से निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ने को कहा है। मान ने कहा था कि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और साथ ही यह भी कहा था कि भुल्लर के परिवहन और जेल विभाग किसी अन्य मंत्री को सौंप दिए जाएंगे। मारपीट का भी लगा आरोप जैसे ही यह वीडियो ऑनलाइन सामने आया, विपक्षी दलों के नेताओं ने AAP सरकार की कड़ी आलोचना की और भुल्लर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने भुल्लर पर रंधावा पर दबाव डालकर अपने पिता को एक गोदाम का टेंडर दिलवाने का आरोप लगाया। भुल्लर पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने रंधावा का एक वीडियो बनाया और उन्हें किसी दूसरी पार्टी से 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने की बात कबूल करने के लिए मजबूर किया। एक आरोप यह भी था कि 13 मार्च को रंधावा को भुल्लर के घर बुलाया गया था, जहां उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें अपमानित किया गया।

फर्जीवाड़े का जाल टूटा: रायपुर में करोड़ों के हाउसिंग लोन स्कैम का पर्दाफाश

रायपुर. राजधानी रायपुर में अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई में आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष थावर दास माधवानी और तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत साहू की 26 वर्षों बाद पिछले दिनों हुई गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की गहरी साजिश का राजफाश हुआ है। 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने परिचितों और रिश्तेदारों को मोहरा बनाकर 186 लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 1.86 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराया। अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए जब इस मामले की शिकायत और जांच शुरू हुई, तब यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। ईओडब्ल्यू की टीम ने दोनों आरोपितों को 25 मार्च तक रिमांड पर लेकर पूछताछ की और रायपुर, भाटापारा सहित अन्य शहरों में निवासरत पीड़ितों के बयान दर्ज किए। वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी थावर दास ने पंडरी में अपनी कपड़ा दुकान के माध्यम से रायपुरा, बोरियाकला, राखी और पंडरी-कांपा जैसे क्षेत्रों में 80 एकड़ जमीन होने का दावा किया, लेकिन ईओडब्ल्यू की जांच में यह सामने आया कि वास्तविकता में समिति के पास एक इंच भी जमीन नहीं थी। कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा हैरानी की बात यह है कि आवास संघ के तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत से कागजों पर मकानों का निर्माण कार्य भी दिखाया जाता रहा। दिवंगत क्षेत्रीय अधिकारी एई ग्रेबियल और पर्यवेक्षक बसंत साहू ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के आवास निर्माण पूर्ण होने के प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए। वर्षों तक पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया जब ईओडब्ल्यू की टीम पीड़ितों के घर पहुंची, तो कई लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई। लक्ष्मीचंद चिमनानी, दिलीप बलानी, त्रिजुगी नारायण, मोहनलाल अग्रवाल, नरेंद्र कश्यप, अशोक नाग और लक्ष्मीचंद ललवानी जैसे पीड़ितों ने बताया कि उन्हें वर्षों तक इस बात का पता नहीं चला कि उनके नाम पर लाखों का कर्ज लिया गया है। थावर दास पर उनका इतना भरोसा था कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वह उनके नाम का उपयोग कर इतना बड़ा घोटाला कर देगा। जब अधिकारियों ने लोन के कागजात दिखाए, तब उन्हें एहसास हुआ कि वे बिना मकान के ही कर्जदार बना दिए गए हैं। फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया कई पीड़ितों ने कहा कि उनसे न तो कभी हस्ताक्षर लिए गए और न ही उन्हें समिति का सदस्य बनाने की जानकारी दी गई। यह पूरी तरह से एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र था, जिसमें फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया गया। मुख्य आरोपित थावर दास ने अपने करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों को इस ठगी का औजार बनाया। 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए 1995 से 1998 के बीच, तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार की शहरी आवास योजना के तहत 186 जरूरतमंदों के नाम पर कूटरचित दस्तावेज तैयार किए गए। इन फर्जी सदस्यों के नाम पर मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से प्रति व्यक्ति एक लाख रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं ईओडब्ल्यू के जांच अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले की जड़ें आवास संघ के भीतर तक फैली थीं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विभागीय अधिकारियों ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं। उपयोगिता प्रमाण पत्र से लेकर निर्माण के विभिन्न चरणों की रिपोर्ट तक, सब कुछ दफ्तर में बैठकर तैयार किया गया। ईओडब्ल्यू अब इस मामले में अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

मंदिर में अफरा-तफरी: खल्लारी रोप-वे केबल टूटने से 8 लोग जख्मी

महासमुंद. खल्लारी स्थित प्रसिद्ध खल्लारी मंदिर में रविवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में संचालित रोप-वे का केबल अचानक टूट गया। घटना के समय रोप-वे में श्रद्धालु सवार थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई। केबल टूटते ही ट्रॉली झटके के साथ नीचे की ओर आई, जिससे उसमें बैठे लोग घायल हो गए। हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हादसे में कुल 8 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद लोगों और मंदिर प्रबंधन व पुलिस ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल महासमुंद भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। एहतियात के तौर पर रोप-वे सेवा को तत्काल बंद कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी को हादसे का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। स्थानीय लोगों ने लापरवाही का आरोप लगाया स्थानीय लोगों ने रोप-वे की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाया है। प्रशासन ने मामले में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ज्ञात हो कि नवरात्र जारी है और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ है। अप्रैल 2024 से शुरू है रोप-वे सेवा महासमुंद जिले के प्रसिद्ध खल्लारी माता मंदिर में रोप-वे की सुविधा अप्रैल 2024 चैत्र नवरात्रि से पूरी तरह से संचालित है, जिससे श्रद्धालुओं को 842-981 सीढ़ियां चढ़ने की थकान से मुक्ति मिल गई है। रोप-वे का भूमिपूजन 2021 में किया गया था। इसका निर्माण कोलकाता की कंपनी "रोपवे एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया। रोप-वे का संचालन मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से नियमित रूप से भक्तों के लिए किया जा रहा है। चैत्र नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी हुई है। पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है इस रोप-वे परियोजना का निर्माण मंदिर ट्रस्ट और कोलकाता की इस निजी कंपनी ने मिलकर किया है। इस रोप-वे में कुल चार ट्रॉली लगाई गई हैं, जिसमें प्रत्येक ट्रॉली में 4 व्यक्ति बैठ सकते हैं। यह प्रणाली एक घंटे में लगभग 200 लोगों को दर्शन कराने की क्षमता रखती है। यह रोप-वे लगभग 300-350 मीटर लंबा है और पहाड़ी की 130 मीटर की ऊंचाई को कवर करता है।

खस्ताहाल पुल बना मौत का जाल: तेज रफ्तार बाइक गिरने से 4 युवकों की जान गई

मंडला. मंडला-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार की रात बड़ा हादसा हो गया। बीजाडांडी थाना क्षेत्र के ग्राम भैंसवाही के पास कालपी निवास मार्ग पर एक तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर पुलिया से नीचे जा गिरी। इस भीषण दुर्घटना में बाइक सवार चार युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही बीजाडांडी पुलिस ने मौके पर पहुचकर जांच शुरू कर दी है। जानकारी अनुसार एक ही बाइक पर सवार चार युवक काफी तेज रफ्तार में जा रहे थे। भैंसवाही ग्राम के पास अचानक चालक का नियंत्रण खो गया और बाइक सीधे पुलिया के नीचे जा गिरी। हादसे में बाइक के परखच्चे उड़ गए और चारों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रात में शिनाख्त न हो पाने के कारण पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन रविवार सुबह चारों मृतकों की पहचान कर ली गई है। इनके नाम प्रमोद कुमार नरेती (24), निवासी रमतिला, बीजाडांडी, संतलाल उइके (23), निवासी ग्राम बस्तरी, निवास, शिवम यादव (17), निवासी टिकरिया मूल निवासी बिछिया कुरई, गंगा राम उइके (22), निवासी टिकरिया है। सूचना मिलते ही बीजाडांडी पहुंचे स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जिससे अस्पताल परिसर का माहौल गमगीन हो गया। पीएम के बाद स्वजनों को सौंपे गए शव बीजाडांडी थाना प्रभारी ने बताया कि चारों युवकों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराकर अंतिम संस्कार के लिए स्वजनों को सौंप दिया गया है। बीजाडांडी पुलिस ने बताया कि शुरुआती जांच में दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार और बाइक का अनियंत्रित होना माना जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। इधर… एनएच 30 पर कंटेनर पलटा, पीछे से आ रहा ट्रक भी टकराया शनिवार देर रात ही नेशनल हाईवे 30 पर स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पास भीषण सड़क हादसा हो गया। मंडला-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग में बीजाडांडी के पास एक तेज रफ्तार कंटेनर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे अचानक पलट गया। तेज रफ्तार कंटेनर मार्ग किनारे बनी एक झोपड़ी में पलटा था, गनीमत रही कि हादसे के दौरान वहां कोई नहीं था, जिसके कारण एक बड़ा हादसा और जनहानि टल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कंटेनर के पलटने के तुरंत बाद पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने पलटे कंटेनर को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। जिससे दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि कंटेनर में सवार ड्राइवर, परिचालक बाल-बाल बच गए और उन्हें मामूली चोटे आई। जिन्हें उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्र भेजा गया। बीजाडांडी थाना पुलिस इस हादसे की जांच कर रही है और हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।