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प्रदेश में 1,950 बाढ़ परियोजनाओं से 3.72 करोड़ लोगों को मिला प्रत्यक्ष लाभ

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बाढ़ सुरक्षा और जल प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश में मॉडल स्टेट के तौर पर सामने आया है। वर्ष 2017-18 से लेकर 2025-26 तक हर साल बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं की संख्या, सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रदेश के आठ प्रमुख रिवर बेसिन गंगा, यमुना, गण्डक, सरयू, रामगंगा, राप्ती-रोहिन, सोन और गोमती नदियों के डूब क्षेत्र में वर्ष 2017 से अब तक 1,950 बाढ़ परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 3869 किलोमीटर क्षेत्र में 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है, जिससे प्रदेश की लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित हुई है, साथ ही प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को भी सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है।   वर्ष 2017-18 से बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं में निरंतर वृद्धि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की ओर से वर्ष 2017-18 में जहां 74 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाए संचालित की गई थीं, जिनकी संख्या वर्ष 2018-19 बढ़कर 111 हो गई। जिसके चलते प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र 0.65 लाख हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 1.88 लाख हेक्टेयर पहुंच गया और इससे लाभान्वित जनसंख्या बढ़कर 22.03 लाख पहुंच गई। इसी क्रम में वर्ष 2019-20 में 151 और वर्ष 2020-21 में 196 परियोजनाओं के माध्यम से क्रमशः 2.88 और 5.01 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की गई। वहीं वर्ष 2021-22 में 167 परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र दोगुना बढ़कर 10.90 लाख हेक्टेयर पहुंच गया। जिसने प्रदेश के 46.26 लाख लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर राहत प्रदान की।  वर्ष 2023-24 में सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा बाढ़ सुरक्षा कार्य  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं को निरंतर प्रगति देते हुए वर्ष 2022-23 में 283 परियोजनाओं के जरिए 3.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में बाढ़ सुरक्षा कार्यों ने अब तक का सर्वोच्च स्तर छुआ। इस वर्ष 362 परियोजनाओं ने 10.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान की, जिससे 68.97 लाख लोगों को राहत मिली। वहीं वर्ष 2024-25 में 321 परियोजनाओं के संचालन से 4.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई। इसी क्रम में वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 285 परियोजनाओं के माध्यम से बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र में  4.33 लाख हेक्टेयर वृद्धि की गई और 55.69 लाख आबादी को बाढ़ सुरक्षा प्रदान की गई है। विभाग की इन परियोजनाओं के सफल संचालन से प्रदेश में लगभग 3.72 करोड़ से अधिक आबादी प्रत्यक्षतौर पर लाभान्वित हुई है।  रिकार्ड संख्या में तटबंधों के निर्माण से हुआ प्रभावी बाढ़ नियंत्रण  प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण और रिवर बेसिन में रहने वाले लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग तटबंधों का भी निर्माण करता है। इस दिशा में वर्ष 2017 से अबतक 3,869 किलोमीटर की लंबाई के 523 तटबंधों का निर्माण किया गया है। इनमें 464.92 किमी लंबाई के 19 अतिसंवेदनशील और 241.58 किमी के 18 संवेदनशील तटबंध भी शामिल हैं। इस क्रम में बाढ़ से प्रभावित बलिया, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, बहराइच, कुशीनगर सहित अनेक जिलों में कटान-रोधी एवं तटबंध सुरक्षा कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अतिरिक्त विभाग प्रदेश में 60,047 किमी की लगभग 10,727 ड्रेनेज परियोजनाओं का भी संचालन करता है। जिनके विस्तार के लिए वर्ष 2025-26 में 74.32 करोड़ रुपये की लागत से गोंडा, बिजनौर, हापुड़, बहराइच और मिर्जापुर में नये ड्रेजिंग कार्यों को मंजूरी दी गई है। प्रदेश में बाढ़ सुरक्षित क्षेत्र और लाभान्वित जनसंख्या में लगातार वृद्धि, योगी सरकार की जनकेंद्रित और जवाबदेह कार्यसंस्कृति का परिणाम है। राज्य सरकार की इन निरंतर पहलों ने उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा के क्षेत्र में देश के मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया है।

जयपुर-पचपदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मंजूरी

जयपुर. राजस्थान के औद्योगिक और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में बड़ा बदलाव जयपुर से पचपदरा तक प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे से होने जा रहा है। लगभग 350 से 400 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे से पचपदरा रिफाइनरी को प्रदेश की राजधानी से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे पश्चिमी राजस्थान में यात्रा सुगम होगी और लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत आधार मिलेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 11,492 करोड़ रुपए है। यह एक्सप्रेस-वे जयपुर से शुरू होकर किशनगढ़ (अजमेर), पाली और जोधपुर होते हुए बालोतरा जिले के पचपदरा तक पहुंचेगा। परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है तथा डीपीआर तैयार की जा रही है। संभावना है कि यह मार्ग जोधपुर-पाली क्षेत्र से होकर निकलेगा, जिससे रोहट में प्रस्तावित दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) के पश्चिमी राजस्थान हिस्से को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल हब को सीधा लाभ इस एक्सप्रेस-वे का सबसे बड़ा लाभ पचपदरा रिफाइनरी और प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल हब को मिलेगा। रिफाइनरी को कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए सीधा व सुरक्षित कॉरिडोर मिलेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ेगा, जिससे राजस्थान की औद्योगिक कनेक्टिविटी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी। एक्सपोर्ट की राह होगी आसान इस मार्ग के बनने से जयपुर-जोधपुर-बालोतरा की यात्रा समय में लगभग दो से तीन घंटे की कमी आने की संभावना है। हालांकि, सबसे बड़ा लाभ निर्यात क्षेत्र को होगा। एक्सप्रेस-वे को जामनगर-अमृतसर भारतमाला कॉरिडोर से जोड़े जाने के बाद सड़क और कंटेनर रेल मार्ग से भी तेज और आसान तरीके से कांडला पोर्ट तक पहुंच सकेंगे। डीएमआईसी जोधपुर-पाली रोड से जुड़ाव के कारण आगामी औद्योगिक विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। जोधपुर में प्रस्तावित नई रिंग रोड के समीप से एक्सप्रेस-वे गुजरने से ट्रांसपोर्टेशन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर लॉजिस्टिक मॉडल, कनेक्टिविटी बढ़ेगी उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी इस परियोजना से एक्सपोर्ट योग्य उत्पादों की ट्रांसपोर्टेशन सुगम होगी और गुजरात तक की रफ्तार बढ़ेगी। नए औद्योगिक क्षेत्र और रिंग रोड के साथ यह एक्सप्रेस-वे रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा। -कुशल प्रजापत, सिविल इंजीनियर फैक्ट फाइल… 350 से 400 किलोमीटर लगभग कुल लंबाई 11,492 करोड़ रुपए लगभग अनुमानित लागत 05 जिले जुड़ेंगे 2 से 3 घंटे की यात्रा समय में कमी

अमित शाह के दौरे से पहले बड़ा घटनाक्रम: 103 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, शीर्ष रैंक के कैडर शामिल

छतीसगढ़  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बस्तर दौरे से ठीक 2 दिन पहले बीजापुर जिले में 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। इनमें 49 नक्सलियों पर कुल 1 करोड़ 6 लाख 30 हजार रुपए का इनाम घोषित है। सरेंडर नक्सलियों में डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM), प्लाटून पार्टी कमेटी जानकारी के मुताबिक सिर्फ बीजापुर जिले में ही 1 जनवरी 2025 से अब तक 421 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। 410 माओवादियों ने हथियार छोड़ दिया है। वहीं अलग-अलग मुठभेड़ में कुल 137 माओवादी मारे गए हैं। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। बीजापुर जिले में गुरुवार को 103 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। कैडर सरेंडर नक्सलियों की संख्या DVCM    1 PPCM    4 ACM    4 प्लाटून पार्टी सदस्य    1 DKAMS अध्यक्ष    3 CNM अध्यक्ष    4 KAMS अध्यक्ष    2 एरिया कमेटी पार्टी सदस्य    5 मिलिशिया कमांडर, डिप्टी कमांडर    5 जनताना सरकार अध्यक्ष    4 PLGA सदस्य    1 CNM सदस्य    12 जनताना सरकार उपाध्यक्ष    4 DAKMS उपाध्यक्ष    1 जनताना सरकार सदस्य    22 मिलिशिया प्लाटून सदस्य    23 जीपीसी    2 DAKMS सदस्य    4 भूमकाल मिलिशिया सदस्य    1 बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने कहा कि अंदरूनी क्षेत्रों में कैंप की स्थापना के साथ सड़कों का विस्तार, परिवहन की सुविधा, पानी, बिजली और शासन की अन्य जनकल्याणकारी योजना ग्रामीणों तक पहुंचने लगी है। सुरक्षा बलों का ग्रामीणों के साथ सकारात्मक संवाद हो रहा है। सामुदायिक पुलिसिंग के तहत जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर और कई माओवादी नेताओं के मारे जाने या उनके आत्मसमर्पण करने के बाद इन लोगों ने वामपंथी उग्रवादी आंदोलन छोड़ने का फैसला किया। SP ने बताया कि माओवादियों के एक डिवीजनल कमेटी सदस्य लच्छू पुनेम उर्फ ​​संतोष (36), गुड्डू फरसा (30), भीमा सोढ़ी (45), हिड़मे फरसा (26) और सुखमती ओयम (27), सभी प्लाटून पार्टी कमेटी के सदस्य हैं। प्रत्येक पर 8 लाख रुपए का इनाम था। इसके अलावा 4 नक्सलियों पर 5-5 लाख रुपए का इनाम था। 15 कैडरों पर 2-2 लाख रुपए का इनाम था। 10 पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था। 12 कैडरों पर 50-50 हजार रुपए का इनाम था और 3 पर 10-10 लाख रुपए का इनाम था। SP के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादियों के आरपीसी (क्रांतिकारी पार्टी समिति) सदस्यों की संख्या ज्यादा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50-50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई है। 4 अक्टूबर को आ रहे शाह 4 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बस्तर दौरे पर आएंगे। वे जगदलपुर में बस्तर दशहरा की मुरिया दरबार रस्म और लाल बाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेला में शामिल होंगे। अमित शाह के दौरे को लेकर पूरी तैयारी कर ली गई है। पहले 71 नक्सलियों ने किया था सरेंडर बता दें कि इससे पहले दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर कुल 71 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। इनमें 21 महिला और 50 पुरुष नक्सली शामिल थे। 30 नक्सलियों पर 64 लाख रुपए का इनाम घोषित था। सरेंडर करने वालों में डिवीजन कमेटी मेंबर (DVCM) और एरिया कमेटी मेंबर (ACM) रैंक के नक्सली हैं। कई नक्सली ऐसे थे, जो कई बड़ी मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं। क्या है लोन वर्राटू अभियान लोन वर्राटू का मतलब होता है घर वापस आइए। इस अभियान के तहत दंतेवाड़ा पुलिस अपने जिलों के ऐसे युवाओं को पुनर्वास करने और समाज की मुख्य धारा में लौटने का संदेश देती है, जो नक्सलियों के साथ हो गए हैं। पुलिस की इस योजना के तहत गांवों में उस इलाके के नक्सलियों की सूची लगाई जाती है। उनसे घर वापस लौटने की अपील की जाती है। उन्हें पुनर्वास योजना के तहत कृषि उपकरण, वाहन और आजीविका के दूसरे साधन दिए जाते हैं, जिससे वे नक्सल विचारधारा को छोड़कर जीवन यापन कर सकें। शाह की डेडलाइन, 2026 तक करेंगे नक्सलवाद का खात्मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अगस्त 2024 और दिसंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और जगदलपुर आए थे। वे यहां अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग मंचों से नक्सलियों को चेताते हुए कहा था कि हथियार डाल दें। हिंसा करोगे तो हमारे जवान निपटेंगे। वहीं उन्होंने एक डेडलाइन भी जारी की थी कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा। शाह के डेडलाइन जारी करने के बाद से बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन काफी तेज हो गए हैं। लगातार बड़े नक्सली लीडर मारे जा रहे इससे पहले 21 मई को हुई मुठभेड़ में 27 नक्सली मारे गए। इसमें 1.5 करोड़ का इनामी बसवा राजू भी था। 21 मई की मुठभेड़ से 7 दिन पहले पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्रेगुट्टा ऑपरेशन की भी जानकारी दी थी। इसमें 31 नक्सलियों को मार गिराया था।छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर स्थित कर्रेगुट्टा के पहाड़ों पर सुरक्षाबलों ने 24 दिनों तक ऑपरेशन चलाया था।  

राजगीर जैन धर्मशाला मिस्ट्री: फंदे से लटके मिले चार शव

नालंदा. राजगीर स्थित दिगंबर जैन धर्मशाला में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक कमरे से तेज दुर्गंध आने लगी। सूचना पर डीएसपी सुनील कुमार सिंह और थानाध्यक्ष रमण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दंडाधिकारी की निगरानी में जब कमरा नंबर छह-एबी का दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। मामले की गहराई से जांच के लिए एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में आठ सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। मृतकों के पारिवारिक, आर्थिक और मानसिक हालात की जानकारी जुटाने के लिए एसआईटी के दो सदस्यों को बेंगलुरु भेजा जाएगा। फंदे से लटके मिले मां, बेटा और दो बेटियां कमरे के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्य- वृद्ध मां जीआर सुमंगला (78), पुत्र जीआर नागा प्रसाद (50) और पुत्रियां श्रुथा जीबी (43) व शिल्पा जीआर (48)- फंदे से लटके मिले। सभी शव बुरी तरह सड़ चुके थे। मृतकों के हाथ-पैर बंधे हुए थे और मुंह पर लाल रंग का टेप चिपका था, जिससे मामला और भी रहस्यमय हो गया। एंटी-डिप्रेशन की गोलियां और नकदी बरामद पुलिस और एफएसएल टीम की जांच में कमरे से अवसादरोधी दवाओं के 25 पत्ते बरामद किए गए। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड, डेबिट कार्ड, अन्य कागजात, लगभग एक लाख 18 हजार रुपये नकद और कपड़े भी मिले। आधार कार्ड कन्नड़ भाषा में हैं, जिससे मृतकों के कर्नाटक निवासी होने की पुष्टि हुई है। 31 जनवरी से ठहरे थे, दो फरवरी से बंद था कमरा जानकारी के अनुसार, चारों 31 जनवरी को नेपाल भ्रमण के बाद राजगीर पहुंचे थे और धर्मशाला में ठहरे थे। दो फरवरी तक उन्हें परिसर में देखा गया, इसके बाद कमरा बंद रहा। कई दिनों तक कमरा बंद रहने के बावजूद धर्मशाला प्रबंधन को संदेह न होना अब जांच के दायरे में है। सामूहिक आत्महत्या या जबरन हत्या? प्रथम दृष्टया मामला सामूहिक आत्महत्या का माना जा रहा है, लेकिन हाथ-पैर बंधे होने और मुंह पर टेप लगे होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या कोई व्यक्ति खुद अपने हाथ-पैर बांधकर फंदे से लटक सकता है-इसका जवाब एफएसएल रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। डॉग स्क्वायड ने भी जांच की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम, वीडियोग्राफी चारों शवों का मेडिकल बोर्ड गठित कर बिहारशरीफ सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई है, ताकि किसी भी स्तर पर जांच में चूक न हो। एसआईटी गठित, बेंगलुरु भेजे जाएंगे दो सदस्य एसपी भारत सोनी ने बताया कि मामले की गहराई से जांच के लिए एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में आठ सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। मृतकों के पारिवारिक, आर्थिक और मानसिक हालात की जानकारी जुटाने के लिए एसआईटी के दो सदस्यों को बेंगलुरु भेजा जाएगा। रिपोर्ट के बाद ही खुलेगा मौत का राज फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह सामूहिक आत्महत्या है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है। यह मामला अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है।

चौरागढ़ महादेव के लिए श्रद्धालु निकले त्रिशूल लेकर, सतपुड़ा में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे

छिंदवाड़ा  सतपुड़ा की वादियों में  हर-हर महादेव के जयकारे गुंजायमान हो गए हैं। महादेव मेले में 30 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहले दिन विभिन्न इलाकों से पचमढ़ी स्थित चौरागढ़ महादेव के लिए निकले। मेले को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वैसे तो ये मेला पचमढ़ी में भरता है, लेकिन श्रद्धालु छिंदवाड़ा जिले से होकर ही इस मेले में जा रहे हैं। खासतौर से महाराष्ट्र से आने वाले श्रद्धालु परासिया, दमुआ, जुन्नारदेव से गुजरकर दर्शन करने के लिए रवाना हो गए। महादेव मेला जाने के लिए श्रद्धालु भूरा भगत और पचमढ़ी वाले रास्ते से पहुंचते हैं। 15 दिन तक चलने वाले मेले में मप्र और महाराष्ट्र के लगभग पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। वजनी त्रिशूल लेकर निकले श्रद्धालु यात्रा के दौरान श्रद्धालु भारी वजनी त्रिशूल लेकर ऊंची-नीची पहाड़ियों पर पैदल निकले। ये त्रिशूल महादेव को चढ़ाए जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, भोजन और पार्किंग की व्यवस्था भूरा भगत क्षेत्र, मटकुली में की गई है। छोटा महादेव मंदिर (जमुनिया) में भी मेला लगा है, जो पेंच नदी के तट पर स्थित है। महादेव मेला रूट पर विशेष जांच डीएसपी यातायात रामेश्वर चौबे ने बताया कि मेला रूट के साथ ही भूरा भगत क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही यातायात व्यवस्था संभालने के लिए तकरीबन 250 पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं। छिंदवाड़ा से लेकर मटकुली सीमा और भूरा भगत मार्ग पर 30 जगह चेकिंग पाइंट बनाए गए हैं। शराब पीकर वाहन चलाने वालों को लेकर महादेव मेला रूट पर विशेष जांच कर कार्रवाई की गई। पुलिस ने देहात थाने के आगे और कुआं बादला में दो स्थानों पर चेकिंग पाइंट बनाए हैं। जहां पर वाहन चालकों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की जा रही है। इसके साथ ही परासिया व जुन्नारदेव थाना क्षेत्र में दो स्थानों पर भी वाहन चालकों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच की गई। एक्सीडेंटल पाइंट स्थानीय पुलिस ने चिह्नित किए हैं, जिन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पचमढ़ी के साथ ही जुन्नारदेव से तामिया मार्ग और दमुआ मार्ग पर भी हादसों को रोकने इंतजाम किए गए हैं। यह है मेले का इतिहास 16वीं सदी की बात है जब भूरा भगत बचपन से ही प्रभु की आराधना में लीन रहते थे। एक बार भजन के दौरान वे समाधि में चले गए। 24 घंटे बाद उनकी समाधि टूटी। इसके बाद वे घर त्यागकर प्रभु की भक्ति में लीन हो गए। किवदंतियों के अनुसार चौरागढ़ की पहाड़ियों में साधना के दौरान उन्हें महादेव के दर्शन हुए थे। उन्होंने महादेव से वरदान मांगा कि मैं आपके ही चरणों में रहूं और यहां आने वालों को आपका मार्ग बता सकूं। तब से महाशिवरात्रि पर मेले की परंपरा शुरू हुई। भूराभगत हैं भोलेनाथ के द्वारपाल महादेव मेला चौरागढ़ महादेव, पचमढ़ी में लगता है। भूरा भगत का मंदिर छिंदवाड़ा जिले के दमुआ ब्लाक में स्थित है। दमुआ से भूराभगत की दूरी 27 किमी है और ये रास्ता काफी संकरा है। मान्यता अनुसार महादेव मंदिर जाने से पहले श्रद्धालुओं ने भूरा भगत के दर्शन और पूजन किया। उन्हें भगवान भोलेनाथ का द्वारपाल कहा जाता है। किवदंती है कि भूरा भगत भगवान शिव के भक्त थे और महादेव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था कि उनके दर्शन के बिना यात्रा अधूरी है। उनकी मूर्ति एक द्वारपाल की तरह भक्तों का मार्गदर्शन करती है। महाशिवरात्रि मेले में यहां भारी भीड़ होती है।

9 लाख सरकारी कर्मचारियों को मेडिकल इमरजेंसी में कैशलेस इलाज को मिली मंजूरी

पटना. बिहार सरकार ने अपने कर्मचारियों और जन प्रतिनिधियों के लिए राहत का पिटारा खोल दिया है. राज्य के करीब 9 लाख सरकारी सेवकों और पेंशनभोगियों के लिए अब गंभीर बीमारी या अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी के समय अस्पताल में पैसे की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में घोषणा करते हुए राज्यकर्मियों और विधायकों-पार्षदों के लिए ‘कैशलेस इलाज’ की सुविधा लागू करने का एलान किया है. इस फैसले के बाद अब बिहार के कर्मचारी भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों (CGHS) की तर्ज पर बिना भुगतान किए बड़े अस्पतालों में अपना इलाज करा सकेंगे. विधानसभा में बड़हरा से भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप ने कर्मचारियों के इलाज में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया. चर्चा के दौरान जाले विधायक जीवेश मिश्रा भी इस मांग पर अड़ गए. आखिरकार विधायकों की लगातार मांग को देखते हुए उपमुख्यमंत्री ने कैशलेस इलाज को मंजूरी दे दी. इसका मतलब साफ है—अब सरकारी कर्मचारी, विधायक और विधान पार्षद इलाज के वक्त कोई भुगतान नहीं करेंगे, पूरा खर्च सीधे राज्य सरकार वहन करेगी. बिहार सरकार पहले से ही कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना चला रही है, जिसमें इलाज के बाद खर्च की भरपाई की जाती है. लेकिन विधायकों का कहना था कि गंभीर स्थिति में मरीज के पास पहले पैसा मांगना अमानवीय है. इसी समस्या को देखते हुए कैशलेस व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया गया. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि राज्य की योजना सीजीएचएस से भी बेहतर है और अब इसे और मजबूत किया जाएगा. सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगेगी रोक स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के संकेत देते हुए सम्राट चौधरी ने एक और बड़ा एलान किया. उन्होंने कहा कि सरकारी डॉक्टरों को किसी भी हालत में प्राइवेट प्रैक्टिस की इजाजत नहीं दी जाएगी. इसके लिए सरकार जल्द ही ठोस एक्शन प्लान और नीति लाएगी. साथ ही पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज चलाने के लिए भी नई नीति बनाई जा रही है. नीट छात्रा मौत मामले में सियासी तल्खी विधानसभा के बाहर नीट छात्रा मौत मामले पर भी सियासत गरमाई. उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी मंत्री या उनके बेटे की भूमिका है तो नाम और सबूत दें. उन्होंने दावा किया कि दोषी 24 घंटे में जेल में होंगे. सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि नाम न बताने का मतलब साक्ष्य छुपाना है.

जनरल ड्यूटी एवं ट्रेड्समैन के लिए 10 को भिवानी में होगी अग्निवीर भर्ती

रोहतक. अग्निवीर भर्ती योजना के अंतर्गत अग्निवीर जनरल ड्यूटी एवं अग्निवीर ट्रेड्समैन (10वीं पास) श्रेणियों के लिए द्वितीय चरण की भर्ती रैली का आयोजन 10 फरवरी होगा। भर्ती रैली भिवानी स्थित भीम स्टेडियम में आयोजित की जाएगी। स्थानीय सेना भर्ती कार्यालय के भर्ती निदेशक अनुराग सिंह ने बताया कि कि उक्त श्रेणियों के लिए कामन एंट्रेंस एग्जाम (द्वितीय चरण) में शार्टलिस्ट किए गए उम्मीदवार अपने एडमिट कार्ड भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in से डाउनलोड कर सकते हैं। भर्ती से संबंधित किसी भी प्रकार की सहायता के लिए उम्मीदवार सेना भर्ती कार्यालय रोहतक या हेल्पलाइन नंबर 8901384498 एवं 01262-253431 पर संपर्क कर सकते हैं। भर्ती निदेशक ने सभी उम्मीदवारों को दलालों से सावधान रहने की सलाह देते हुए कहा कि सेना भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी एवं योग्यता आधारित है। भर्ती रैली के दौरान किसी भी प्रकार के शक्तिवर्धक या नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया से वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने उम्मीदवारों से अपील की है कि वे भर्ती रैली में आवश्यक दस्तावेजों सहित निर्धारित समय पर उपस्थित हो।

दालें प्रोटीन का सबसे बढ़ा स्रोत, इसकी उत्पादकता और पोषण बढ़ाने के लिए आगे आएं किसान

भोपाल . मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की उपजाऊ धरती, समृद्ध जल संसाधन और अनुकूल जलवायु हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। इकार्डा जैसे अंतर्राष्ट्री य अनुसंधान संस्थान का सशक्त होना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। भारत में अन्न केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और संस्कार का आधार है “अन्न देवो भव:” हमारी कृषि परंपरा का मूल मंत्र है। मध्यप्रदेश ‘कृषक कल्याण वर्ष’ मना रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘बीज से बाजार तक’ किसान के साथ खड़ी सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक दलहन उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना, आयात निर्भरता कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इस मिशन किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक भंडारण और सुनिश्चित विपणन की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। दलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जिससे इस मिशन का सर्वाधिक लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में दलहन आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलित कर राष्ट्रीय परामर्श एवं रणनीति सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) सीहोर के नवनिर्मित प्रशासनिक भवन, प्रशिक्षण केंद्र तथा अत्याधुनिक प्लांट टिशु कल्चर प्रयोगशाला का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इकार्डा का यह नवीन भवन प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए नई आशाओं और संभावनाओं का द्वार खोलेगा। यह केंद्र वैज्ञानिक खेती, उन्नत तकनीक और वैश्विक कृषि अनुभव को किसानों से जोड़ने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंचाई विस्तार और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि इकार्डा द्वारा विकसित वैज्ञानिक मॉडल प्रदेश की योजनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय और इकार्डा का यह संयुक्त प्रयास मध्यप्रदेश को टिकाऊ और समृद्ध कृषि का राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक मॉडल बना सकता है। उन्होंने कहा कि सीहोर का यह राष्ट्रीय सम्मेलन दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, मूल संवेदनाओं और भविष्य की संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच बनेगा और नीति निर्धारण व अनुसंधान के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय कृषि मंत्रालय एवं इकार्डा की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह अनुसंधान केंद्र प्रदेश की कृषि को नई दिशा देगा और किसानों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश भारत का फूड बॉस्केट है। भारतीय संस्कृति में अन्न देवता के माध्यम से समाज पल्लवित होता है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के विकास और कल्याण के लिए 4 श्रेणियां गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण बताई हैं। हमारी भारतीय सभ्यता में कृषि आधारित जीवन शैली विकसित हुई। आधुनिक समय में खेती में कई प्रकार के विकार आ गए। खेती में रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से हमारी जीवन शैली में बदलाव आया। प्रधानमंत्री  मोदी ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा। अमेरिका जैसे देश ने भारत की बात मानी। उन्होंने कहा कि दाल हर भारतीय परिवार की प्रतिदिन की थाली का अभिन्न हिस्सा और हर मौसम में भारतीय परिवारों की जरूरत है। इसका उत्पादन और खपत बताता है कि दलहन क्षेत्र में हमें और अधिक काम करने की जरूरत है। इसलिए अब मध्यप्रदेश में दलहन फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ायेंगे। इसके लिए हम केन्द्र सरकार के साथ हम-कदम होकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार दालों के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार के हर मिशन, हर संकल्प की पूर्ति में हर जरूरी सहयोग देगी। हम देश में दाल समृद्धि का संकल्प मिल-जुलकर पूरा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भावांतर भुगतान योजना से सोयाबीन की उपज की 1500 करोड़ रूपये से अधिक राशि किसानों के खातों में पहुंची है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन उपयुक्त प्रबंधन के अभाव में प्रदेश का बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था। हमारी सरकार आने के बाद प्रदेश में सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर बढ़ा है। देश की पहली केन-बेतवा राष्ट्रीय लिंक नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) नदी जोड़ो परियोजना से प्रदेश में सिंचाई का रकबा और तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि हमने आने वाले सालों में प्रदेश का सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा है। दलहन उत्पादन में अग्रणी है मध्यप्रदेश : केन्द्रीय मंत्री  चौहान केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  चौहान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के 27 देशों से हमारा समझौता हुआ है। उन्होंने अमेरिका के साथ कृषि समझौते में किसानों के हितों की रक्षा की गई है। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा। देश के बासमती चावल और मसालों को 18 प्रतिशत टैरिफ से लाभ मिलेगा। टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाना है। देश में मूंग को छोड़कर अन्य दालों का उत्पादन घट गया। दाल हमें विदेश से आयात करना पड़े यह देश के हित में नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार को बधाई देते हुए कहा कि हमारा मध्यप्रदेश आज भी दलहन उत्पादन में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि किसानों को केवल गेहूं, सोयाबीन और धान ही नहीं उगाना चाहिए, बल्कि फसल चक्रण पर ध्यान देना चाहिए। देश में चना, मसूर और उड़द का उत्पादन बढ़ाना है। इकार्डा के माध्यम से दलहन फसलों के उन्नत बीज तैयार किए जाएंगे। केन्द्रीय कृषि मंत्री  चौहान ने कहा कि देश का कृषि मंत्रालय अब दिल्ली से नहीं, गांव और खेतों से चल रहा है। हमारे कृषि वैज्ञानिक प्लांट टिशू कल्चर के माध्यम से मसूर सहित अन्य दलहन फसलों की नई और उन्नत किस्में तैयार हो रही हैं। किसानों को ज्यादा उत्पादन वाले और रोग रहित बीच उपलब्ध कराना है। दलहन आत्म निर्भरता मिशन के अंगर्तग दालों के कलस्टर बनाए जाएंगे। इकार्डा के सहयोग से बीज ग्राम और बीज हब बनाए जाएंगे। प्रगतिशील और आदर्श किसानों को एक हैक्टेयर में दलहन उत्पादन के लिए 10 … Read more

अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप में शानदार प्रदर्शन से विहान मल्होत्रा ने खींचा सबका ध्यान

पटियाला. अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 में विहान मल्होत्रा ने अपने शानदार और जिम्मेदाराना प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। प्रतिभाशाली ऑलराउंडर बल्लेबाज ने जिम्बाब्वे के खिलाफ नाबाद 109 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाया। वहीं विहान ने बांग्लादेश के खिलाफ मैच में बांग्लादेशी बल्लेबाजों को अपनी फिरकी पर ऐसा फंसाया कि चार ओवर में चार विकेट चटका दिए। इसी से उन्हें दोनों मैचों में प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। संकट की स्थिति में टीम को संभालने की उनकी क्षमता, संयमित बल्लेबाजी और लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने की कला ने उन्हें भारतीय अंडर-19 टीम के भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ शतक उनकी तकनीक, धैर्य और मैच फिनिश करने की क्षमता का बेहतरीन उदाहरण रहा, जिसने उन्हें टूर्नामेंट के उभरते सितारों में शामिल कर दिया। उनके कोच व अन्य क्रिकेटरों ने अंडर-19 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट जीतने वाली टीम के सदस्य पटियाला के विहान मल्होत्रा की पटियाला में क्रिकेट कोचिंग अकेडमी क्रिकेट हब में भारतीय जीत का जश्न मनाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 5 शावकों के जन्म पर किया हर्ष व्यक्त मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के चीता परिवार में 5 शावकों के जन्म पर हर्ष व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज की गई है। मादा चीता आशा ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जिससे भारत के चीता पुनर्स्थापन अभियान को नई मजबूती मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब भारत में जन्मे चीतों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि कूनो में कुल चीतों की संख्या 35 तक पहुँच गई है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश को देश में वन्य जीव संरक्षण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करती है। इस सफलता का श्रेय समर्पित वन अमले और पशु चिकित्सकों की सतत निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और अथक मेहनत को जाता है। कूनो में हो रहा यह सकारात्मक विकास भारत की जैव-विविधता संरक्षण यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।