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श्रद्धालुओं पर हुई पुष्पवर्षा, संगम में तैरती रही भक्ति की लहर

प्रयागराज उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के माघ मेले में आज मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर हेलीकॉप्टर के द्वारा श्रद्धालुओं के ऊपर और साधु संतों के ऊपर पुष्प वर्षा कराई गई। यह पुष्प वर्षा सनातन की आस्था को सम्मान के तौर पर कराई जा रही है। माघ महीने में मौनी अमावस्या पर करोड़ों की भीड़ को मैनेज करके स्नान कराया जा रहा है उसे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। रात 12:00 बजे से अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई हुई है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवान और पीएसी के जवान के साथ आर ए एफ के साथ यूपी एटीएस की टीम भी स्नान घाटों पर मुस्तैदी से श्रद्धालुओं का सहयोग कर रही है। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार खुद रात्रि 12:00 बजे से मेला क्षेत्र में स्नान घाट पर भ्रमण कर रहे हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टीम को लाउड स्पीकर के माध्यम से दिशा निर्देश दे रहे हैं। ठंड पर भारी पड़ रही आस्था श्रद्धालु ठंड और कोहरे के बाद भी संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु बड़ी तादाद में संगम पहुच रहे है। संगम क्षेत्र में स्नान करने के लिए लोगो के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही है। त्रिवेणी के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगाकर हर कोई पुण्य अर्जित करना चाहता है। मान्यता यह है कि… माघ के महीने को हिंदू धर्म ग्रंथों में बहुत पवित्र माना जाता है लेकिन माघ मास के ठीक मध्य में अमावस्या के दिन का तो बहुत विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी और मां का दर्जा रखने वाली गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। इस लिये माघ स्नान के लिये अमावस्या यानि मौनी अमावस्या को बहुत ही खास बताया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन की तरफ से भी चाक चौबंद प्रबंध किये गए है।

पलक्कड़ में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का अनोखा अंदाज: कुर्सी नहीं, जमीन पर बैठक

जयपुर सत्ता या शक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पद, कुर्सी या औपचारिक प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं होता—यह बात केरल के पलक्कड़ में आयोजित तपस्या गोल्डन जुबली इंटरनेशनल म्यूजिक फेस्टिवल में उस समय स्पष्ट रूप से देखने को मिली, जब केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने परंपरागत औपचारिकताओं से अलग सादगी का मार्ग चुना।  अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त इस संगीत महोत्सव में, जहां आमतौर पर विशिष्ट अतिथियों के लिए मंच, विशेष आसन और कड़े प्रोटोकॉल की व्यवस्था होती है, वहीं मंत्री शेखावत ने इन सबसे दूरी बनाते हुए श्रोताओं के बीच जमीन पर बैठकर भारत के कालजयी भक्ति संगीत का रसास्वादन किया। उनके इस सहज और शांत व्यवहार ने न केवल उपस्थित श्रोताओं बल्कि कलाकारों का भी ध्यान आकर्षित किया।   महोत्सव में प्रस्तुत भक्ति संगीत भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की आत्मा को दर्शाता है—जहां सुर, साधना और समर्पण का संगम होता है। ऐसे वातावरण में मंत्री का जमीन पर बैठना केवल एक व्यक्तिगत चयन नहीं था, बल्कि यह एक गहरा सांस्कृतिक संदेश भी था। यह संकेत था कि संस्कृति को जीने के लिए पद या शक्ति की ऊंचाई आवश्यक नहीं, बल्कि विनम्रता और श्रद्धा ही उसका वास्तविक आधार है। गजेंद्र सिंह शेखावत का यह व्यवहार उस विचार को मजबूत करता है कि संस्कृति केवल मंच से प्रदर्शित करने की वस्तु नहीं, बल्कि उसे आत्मसात करने की प्रक्रिया है। बिना किसी चकाचौंध, बिना सुरक्षा घेरों और विशेष प्रोटोकॉल के, उन्होंने यह दिखाया कि नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप सादगी, सम्मान और सहभागिता में निहित होता है। पलक्कड़ का यह दृश्य सोशल मीडिया और सांस्कृतिक हलकों में चर्चा का विषय बना, जहां कई लोगों ने इसे भारतीय परंपराओं के अनुरूप एक प्रेरक उदाहरण बताया। यह क्षण इस बात की याद दिलाता है कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं संस्कृति के साथ समान स्तर पर जुड़ते हैं, तभी उसका संरक्षण और संवर्धन वास्तव में संभव होता है।  

सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू की चल रही कवायद, अति गंभीर बीमारियों पर होगा रिसर्च

कैंसर, डायबबिटीज समेत अन्य बीमारियों पर होगा रिसर्च, अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन   – रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर तैयार किया जाएगा स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल, इसे देश-विदेश में अपनाया जा सकेगा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। प्रदेश के आयुष अस्पताल अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें रिसर्च सेंटर हब के रूप में विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रल रिसर्च सेंटर (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान) के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा। इस पहल के तहत कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग समेत कई अति गंभीर और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर आयुष चिकित्सा पद्धतियों से शोध किया जाएगा। आयुष आधारित इलाज की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ किया जाएगा स्थापित प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयुर्वेद, योग, यूनानी व होम्योपैथी को स्वास्थ्य व्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष पद्धतियों का समन्वय न केवल इलाज को अधिक प्रभावी बनाएगा, बल्कि रोगों की रोकथाम और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में भी मददगार होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इच्छा के अनुरूप प्रदेश के चयनित आयुष अस्पतालों को रिसर्च-ओरिएंटेड सेंटर के रूप में विकसित करने पर मंथन चल रहा है। यहां उपचार के साथ-साथ रोगों के कारण, प्रभाव, जीवनशैली, खानपान और आयुष आधारित उपचार पद्धतियों पर डाटा आधारित शोध किया जाएगा। इसका मुख्य उद्​देश्य आयुष आधारित उपचारों की प्रभावशीलता को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ स्थापित करना है। सेंट्रल रिसर्च सेंटर से एमओयू के बाद आयुष चिकित्सकों को रिसर्च ट्रेनिंग, आधुनिक लैब सुविधाएं और तकनीकी सहयोग मिलेगा। इस रिसर्च का फोकस उन बीमारियों पर होगा, जिनका बोझ तेजी से बढ़ रहा है। कैंसर और डायबिटीज के अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा, थायरॉइड, हृदय रोग, जोड़ों के रोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी रिसर्च के दायरे में रहेंगी। रिसर्च प्रोजेक्ट्स से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मिलेगा मंच प्रमुख सचिव ने बताया कि सेंट्रल रिसर्च सेंटर से होने वाले एमओयू के बाद उत्तर प्रदेश आयुष रिसर्च के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य बनने की ओर बढ़ेगा। इससे न केवल प्रदेश के चिकित्सकों और शोधकर्ताओं को नई पहचान मिलेगी, बल्कि आयुष आधारित उपचारों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने में भी मदद मिलेगी। योगी सरकार का उद्देश्य है कि रिसर्च के निष्कर्षों के आधार पर स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं, जिन्हें देश-विदेश में अपनाया जा सके। इससे आयुष चिकित्सा की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। इससे आयुष क्षेत्र में रोजगार और शोध के नए अवसर भी पैदा होंगे। रिसर्च प्रोजेक्ट्स के माध्यम से आयुष चिकित्सकों, शोधार्थियों और छात्रों को काम करने का मंच मिलेगा। साथ ही, आयुष कॉलेजों के छात्रों को प्रैक्टिकल रिसर्च का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। योगी सरकार की यह पहल प्रदेश को समग्र स्वास्थ्य मॉडल स्थापित करने दिशा में बड़ा कदम साबित होगा, जहां आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान का संतुलित उपयोग होगा।

कक्षा 1 में प्रवेश पर उम्र की नई सीमा लागू, 6 साल से छोटे बच्चों का दाखिला अब बंद

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में एक दूरगामी बदलाव करते हुए पहली कक्षा (Class 1) में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु सीमा को लेकर नए आदेश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग की अधिसूचना के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 से पहली कक्षा में प्रवेश पाने के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष पूरी होना अनिवार्य होगी।   यह निर्णय 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति' (NEP 2020) के प्रावधानों और 'पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट' के हालिया निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। इस नए नियम के लागू होने के बाद अब 5.5 साल के बच्चों को पहली कक्षा में दाखिला नहीं मिल सकेगा। क्यों बदला गया आयु का नियम? अब तक हरियाणा शिक्षा नियमावली 2011 के तहत, 5 साल 6 महीने की उम्र वाले बच्चों को भी पहली कक्षा में प्रवेश की अनुमति मिल जाती थी। हालांकि, केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय ने लंबे समय से सभी राज्यों को इसे 6 वर्ष करने का निर्देश दिया था। मानसिक और शारीरिक परिपक्वता: विशेषज्ञों का मानना है कि 6 वर्ष की आयु में बच्चा औपचारिक स्कूली शिक्षा के दबाव और पाठ्यक्रम को समझने के लिए मानसिक रूप से अधिक तैयार होता है। NEP 2020 का ढांचा: नई शिक्षा नीति का '5+3+3+4' मॉडल बुनियादी स्तर के पहले 3 साल प्री-स्कूल (आंगनवाड़ी/बालवाटिका) और अगले 2 साल कक्षा 1 व 2 के लिए निर्धारित करता है। कानूनी स्पष्टता: हाई कोर्ट ने 'दिविशा यादव बनाम हरियाणा राज्य' मामले में स्पष्ट किया था कि राज्य के नियम केंद्रीय कानून के अनुरूप होने चाहिए ताकि दाखिले के समय कोई भ्रम न रहे। अभिभावकों के लिए क्या बदलेगा? इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन अभिभावकों पर पड़ेगा जो अपने बच्चों का जल्दी स्कूल में दाखिला कराना चाहते थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि: बालवाटिका का विकल्प: जो बच्चे आयु सीमा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें बालवाटिका कक्षाओं में भेजा जाएगा। peer group का लाभ: एक ही उम्र के बच्चों के साथ पढ़ने से छात्रों पर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा का दबाव कम होगा। कोई छूट नहीं: 2026-27 सत्र से उम्र के नियमों में दी जाने वाली सभी प्रकार की रियायतें आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी जाएंगी। प्रशासन की तैयारी हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और प्राइवेट स्कूलों को पत्र लिखकर इस नियम का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे अपने प्रवेश नोटिस में इस बदलाव को प्रमुखता से दर्शाएं ताकि अभिभावक समय रहते अपने बच्चों के दाखिले की योजना बना सकें।  

क्या तेजस्वी बनेंगे RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष? लालू यादव की बीमारी के बीच सियासी हलचल तेज

पटना राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) की कमान पूरी तरह से तेजस्वी यादव के हाथों में आने के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनित किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जानकारी मिल रही है कि 25 जनवरी को इसका ऐलान कर दिया जाएगा। विदेश यात्रा से लौटने के बाद तेजस्वी यादव ऐक्शन में हैं। आगामी रणनीति और विधानसभा चुनाव में हार की समीक्षा की जा रही है। पटना में तेजस्वी यादव ने अपने सरकारी आवास पर कोर केमेटी और लोकसभा, राज्यसभा सदस्यों के साथ बैठक की। तेजस्वी को राजद में लालू यादव के बाद नंबर टू का दर्जा पहले से प्राप्त है। पार्टी में नीति निर्धारण हो या कोई बड़ा फैसला, यह काम तेजस्वी यादव ही करते हैं। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही लालू प्रसाद यादव ने यह पावर तेजस्वी को सौंप दिया था। विधानसभा चुनाव में टिकट काटने से लेकर बांटने तक का काम उन्होंने ही किया। कार्यकारी अध्यक्ष का पद मिल जाने के बाद उनकी ताकत और बढ़ जाएगी। 25 जनवरी को पार्टी कार्यसमिति की बैठक पटना में बुलाई गई है। इस बैठक पर सबकी निगाहें टिकी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसी बैठक में तेजस्वी यादव की नई जिम्मेदारी की घोषणा हो सकती है। राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वे अक्सर बीमार रहते हैं। इसे देखते हुए तेजस्वी के हाथों में पार्टी की कमान सौंपे जाने की चर्चा हो रही है। इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है। बीजेपी प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने कहा है कि यह लालू प्रसाद की मजबूरी है। वंशवादी परंपरा के तहत वे अपनी कुर्सी परिवार से बाहर के किसी पार्टी नेता को नहीं दे सकते। जदयू प्रवक्ता मनीष कुमार ने कहा है कि तेजस्वी यादव चाहे कुछ भी बन जाएं पर वे बिहार की जनता से दूर हो चुके हैं। वे बिहार वासियों के प्रति उदासीन रहते हैं।  

उड़ते विमान के बाथरूम में मिली धमकी, बम की सूचना के बाद लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग

लखनऊ आसमान में उड़ते विमान में बम की सूचना से हड़कंप मच गया। दिल्ली से बागडोगरा के लिए उड़ान भर रही इस फ्लाइट की लखनऊ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी। यह फ्लाइट इंडिगो की है। फ्लाइट के बाथरूम में टिश्यू पेपर पर लिखा था कि फ्लाइट में बम है। यह टिश्यू पेपर एक यात्री ने देखा तो उसने तत्काल क्रू मेंबर को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पॉयलट ने इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी। लखनऊ में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद विमान के कोने-कोने को चेक किया जा रहा है। फ्लाइट में 230 यात्री, दो पायलट और पांच क्रू मेंबर सवार थे।   इंडिगो एयरलाइंस की 6E-6650 फ्लाइट से रविवार की सुबह करीब 8:46 बजे एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) को बम की सूचना मिली। यह सूचना मिलते ही लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी की गई। लखनऊ एयरपोर्ट पर विमान की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद इसे आइसोलेशन वे पर पार्क कराया गया। विमान को लखनऊ एयरपोर्ट पर रोककर सघन जांच कराई जा रही है। विमान के कोने-काने की जांच की जा रही है। फिलहाल, अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु न मिलने से यात्रियों, क्र मेंबर और अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। क्या बोली पुलिस इस बारे में एसीपी कृष्णानगर रजनीश वर्मा ने बताया कि फायर ब्रिगेड और बीडीएस टीम से विमान की चेकिंग कराई जा रही है। अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। टिश्यू पेपर पर बम की सूचना किसने लिखी, इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस इस घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। 24 जनवरी से नहीं जाएगी लखनऊ से अजमेर की सीधी फ्लाइट उधर, उड़ान’ योजना की रीजनल कनेक्टिविटी के अन्तर्गत शुरू की गई एक और फ्लाइट बंद हो रही है। छोटी एयरलाइंस की लखनऊ से किशनगढ़ यानी अजमेर की सीधी फ्लाइट 24 जनवरी के बाद नहीं जाएगी। इसके पीछे यात्रियों को परिचालन कारण बताया गया है। लखनऊ से किशनगढ़ (अजमेर) के बीच सीधी उड़ान सेवा वर्ष 2024 की 16 फरवरी को शुरू हुई थी। इस रूट पर स्टार एयर एकमात्र एयरलाइन है जो सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करती है। लखनऊ से फ्लाइट एस5-223 दिन में 10:45 बजे लखनऊ से रवाना हो कर 12:05 बजे किशनगढ़ पहुंचती है। वहीं, दिन में 3:35 बजे फ्लाइट एस5-222 किशनगढ़ से उड़ान भरकर 4:55 बजे लखनऊ पहुंचती है। दोनों शहरों के बीच मात्र 1 घंटा 20 मिनट का समय लेती है। यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन (मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार) संचालित होती है।  

अपराधियों पर प्रशासन का वार, कोटा में हिस्ट्रीशीटर आदिल मिर्जा का घर जमींदोज

कोटा कोटा के नामी हिस्ट्रीशीटर आदिल मिर्जा के घर आज बुलडोजर आ धमका। प्रशासन ने पहले ही उसके मकान को अवैध बताकर कुछ रोज पहले घर गिराने वाली नोटिस चिपका दी थी। आदिल का यह अवैध घर 225 गज में बना है जिसे अब गिराया जा रहा है। मौके पर भारपी पुलिस बल भी मौजूद रहा। हाल ही में अपने अपराध से खौफ पैदा करे चुके आदिल को पुलिस ने एनकाउंटर में पकड़ा था। इस कार्रवाई में उसके साथी भी चोटिल हुए थे।   कौन है आदिल मिर्जा? आदिल मिर्जा का यह घर कोटा के अमृतखेड़ी गांव में बना है। आलीशान घर पहले से अवैध घोषित है और बावड़ी श्रेणी की जमीन पर बना है। आदिल मिर्जा अपराध जगत में एक कुख्यात नाम है। इसके खिलाफ कुल 34 मामले दर्ज हैं। आदिल मूल रूप से सांगोद का निवासी है। नाबालिग होते ही अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले आदिल पर जानलेवा हमला करने, पुलिस पर फायरिंग, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, महामारी अधिनियम, दंगा, डकैती, चोरी, धार्मिक भावनाएं भड़काना और राज कार्य में बाधा डालने जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। सांगोद थाने में दर्ज इन मामलों के अलावा आदिल के खिलाफ मोडक, कनवास, नयापुरा और कैथूनीपोल थानों में भी केस दर्ज हैं। पहले ही बता दिया था होगी बुलडोजर वाली कार्रवाई आदिल और उसके तीन दोस्तों को बीते दिनों गिरफ्तार करने के बाद इस नामी हिस्ट्रीशीटर के संपत्तियों की जांच की गई जिसमें उसके इस अवैध मकान की बात सामने आई थी। सांगोद में प्रशासन ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। नगर पालिका की जमीन पर अवैध कब्जा सांगोद तहसीलदार जतिन दिनकर के अनुसार, अमृत खेड़ी गांव की एक जमीन, जो सरकारी रिकॉर्ड में 'बावड़ी' के नाम पर दर्ज है और नगर पालिका की संपत्ति है, उस पर अवैध रूप से मकान बनाया गया है। पुलिस और प्रशासन ने इस आलीशान घर पर नोटिस चिपका दिया था। आदिल को 3 दिन की मोहलत दी गई है कि वह खुद अपना अतिक्रमण हटा ले। अगर तय समय (नोटिस की मियाद) तक कब्जा नहीं हटाया गया, तो प्रशासन भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर चलाकर निर्माण को ध्वस्त कर देगा। पुलिस की जांच जारी थानाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि अपराधी आदिल मिर्जा की सभी संपत्तियों की गहराई से जांच की जा रही है। इसी जांच के दौरान पता चला कि उसने सरकारी जमीन कब्जाकर अपना घर खड़ा किया है, जिस पर अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी की गई है।  

‘अपवित्र कर दिया’ का आरोप: स्वर्ण मंदिर के पवित्र सरोवर में युवक की हरकत पर विवाद

  अमृतसर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में एक मुस्लिम युवक न पवित्र सरोवर के पानी से वुजू किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में युवक को सरोवर में पैर डुबोए, मुंह कुल्ला करते और नाक साफ करते देखा जा सकता है, जिससे कई लोगों ने इसे सरोवर को गंदा करने और सिख मर्यादा का उल्लंघन बताया। सिख समुदाय और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे पवित्र स्थल के प्रति अपमान करार दिया, क्योंकि सरोवर केवल स्नान और धार्मिक डुबकी के लिए है, जबकि वुजू के लिए अलग से बहते पानी की व्यवस्था मौजूद है।   शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मानन ने कहा कि हिंदू और सिख समुदाय मर्यादा जानते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के लोग कभी-कभी गलती कर बैठते हैं। एसजीपीसी ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है और ऐसे मामलों पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है। आरोपी युवक की पहचान दिल्ली निवासी सुभान रंगरेज के रूप में हुई, जो खुद को मुस्लिम शेर कहता है। विवाद बढ़ने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उसने वीडियो जारी कर कहा कि उसे स्वर्ण मंदिर की मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं थी और न ही वहां मौजूद किसी ने उसे रोका या बताया। वीडियो वायरल होने पर क्या बोला आरोपी आरोपी ने बताया कि वह लंबे समय से स्वर्ण मंदिर घूमना चाहता था और सिख धर्म के प्रति गहरा सम्मान रखता है। एक अन्य वीडियो में उसने स्वर्ण मंदिर को भारत की एकता का प्रतीक बताया, जहां सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सब भाई-भाई की तरह रहते हैं। उसने टोपी पहनने के बावजूद किसी की ओर से आपत्ति न करने की बात कही और कहा कि वह दोबारा जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगेगा। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भक्ति का प्रदर्शन बताया, लेकिन अधिकांश ने इसे अनजान होने के बावजूद गलत करार दिया। एसजीपीसी ने सभी से अपील की है कि वे मर्यादा का पालन करें और स्थल को पर्यटन स्थल की तरह न इस्तेमाल करें।  

मौनी अमावस्या का विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का रथ रोकने से भड़के समर्थक, बैरियर क्षतिग्रस्त

प्रयागराज मौनी अमावस्या पर संगम तट पर लगे माघ मेला-2026 में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। सुबह 9 बजे तक ही करीब डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं ने मौनी स्नान पर्व पर आस्था की डुबकी लगा ली थी। श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से फूलों की बारिश भी की गई। इस बीच मौनी अमावस्या पर राजसी स्नान की तरह जुलूस निकालने पर पुलिस ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को संगम के पहले रोक दिया। प्रशासन ने 17/18 जनवरी की रात 12 बजे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर रखा है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि रथ की अनुमति नहीं ली गई थी। उधर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस पर संतों से मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पैदल जाने का अनुरोध किया था लेकिन लोग दर्शन के लिए टूट पड़ते हैं, इससे भगदड़ की स्थिति हो जाती है। रथ रोके जाने पर शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तीखी नोंकझोंक होने लगी। इसी दौरान सूचना आई कि पुल नंबर चार का बैरियर टूट गया है। कहा गया कि शंकराचार्य के समर्थकों ने इसे तोड़ा है। हालांकि शंकराचार्य ने समर्थकों द्वारा बैरियर तोड़े जाने के आरोपों को निराधार बताया है।   संगम पर हंगामे के चलते पुलिस ने पब्लिक को डायवर्ट भी किया है। आरएएफ ने कतार लगाकर भीड़ को डायवर्ट किया। पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच बहस की सूचना पर बड़ी संख्या में अधिकारी फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार, मेलाधिकारी ऋषिराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वहां पहुंचे। अधिकारियों की ओर से कहा गया कि जुलूस के साथ संगम तट पर जाने की अनुमति नहीं है। पांच लोगों के साथ जाकर स्नान करें। इस पर शंकराचार्य ने आपत्ति की और पुलिस प्रशासन पर मनमानीपूर्ण रवैए का आरोप लगाया। काफी देर तक चली खींचतान के बाद पुलिस ने समर्थकों को वहां से खदेड़ दिया। रथ अकेला रह गया तो पुलिसकर्मी खुद बाहर ले गए। तड़के चार बजे से चल रहा है स्नान माघ मेले का तीसरा और सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या आज है। इस मौके पर प्रयागराज के संगम स्थल पर भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे हैं। ब्रह्म मुहूर्त में तड़के चार बजे से स्नान शुरू हुआ जो दिन भर चलता रहेगा। स्थानीय प्रशासन के अनुमान के मुताबिक इस साल तीन करोड़ से अधिक श्रद्धालु मौनी अमावस्या के स्नान के लिए संगम क्षेत्र में पहुंचेगे। एक दिन पहले से ही उमड़ने लगे थे श्रद्धालु इस स्नान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम एक दिन पहले ही संगमनगरी में पहुंच गया। अलसुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर बाद काफी बढ़ गया। शाम को तो स्थिति यह हो गई थी कि लग रहा था मानो शनिवार को ही मौनी अमावस्या हो। सिर पर गठरी लादे हुए लोग मेले के भीतर प्रवेश करते हुए दिखाई दिए। प्रशासनिक अफसरों का अनुमान है कि रविवार को स्नान के लिए साढ़े तीन से चार करोड़ श्रद्धालु आएंगे। वहीं, अफसरों का यह भी दावा है कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले शनिवार शाम छह बजे तक 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। मेला क्ष्रेत्र में भीड़ बढ़ने पर लागू किए गए प्रतिबंध शनिवार को दोपहर बाद जब मेला क्षेत्र में भीड़ बढ़ने लगी तो पुलिस और मेला प्रशासन ने उन प्रतिबंधों को लागू कर दिया, जो भीड़ नियंत्रण के लिए बनाए गए हैं। जीटी जवाहर और तिकोनिया चौराहे से ही वाहनों का प्रवेश रोका गया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार, डीएम मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी ऋषिराज व एसपी मेला नीरज पांडेय दोपहर 12:30 बजे संगम वॉच टावर पहुंचे और भीड़ का आकलन करते हुए दिखाई दिए। दिनभर संगम पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा और स्नान का क्रम भी जारी रहा। रविवार की भीड़ से बचने के लिए श्रद्धालुओं ने पर्व से एक दिन शनिवार को ही स्नान कर लिया। दोपहर एक बजे पांटून पुल पर इतने श्रद्धालु हो गए थे कि बहुत धीरे-धीरे चलना पड़ रहा था। पांटून पुल दो से संगम आने और तीन से झूंसी जाने वाले पुलों पर केवल पैदल श्रद्धालु ही दिख रहे थे।  

इंदौर में आज होगा भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे मैच

इंदौर. भारत और न्यूजीलैंड के बीच रविवार को होने वाले वनडे मैच से पहले ही शहर में प्रशंसकों पर क्रिकेट का खुमार चढ़ गया है। इसकी एक झलक शनिवार को देखने मिली। जब से टीमें दोनों टीमें इंदौर पहुंची हैं अपने स्टार खिलाड़ियों को एक झलक पाने के लिए प्रशंसक टीम होटल और स्टेडियम के बाहर नजर आने लगे थे। बता दें कि इस समय भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की सीरीज 1-1 से बराबरी पर है और इंदौर में जो भी टीम जीतेगी वह सीरीज पर कब्जा करेगी। ऐसे में इस मैच के लिए रोमांच और भी बढ़ गया है। किसी भी आयोजन को इंदौर की जनता किसी उत्सव की तरह मनाती है और शनिवार को भी नजारें अलग नहीं थे। इस मैच के लिए शहर में उत्सव का माहौल नजर आ रहा है। शनिवार को भी दिनभर होलकर स्टेडियम के आसपास की सड़कें क्रिकेट प्रशंसकों से पटी रहीं। युवाओं की संख्या इसमें ज्यादा थी। कई महिला-पुरुष अपने बच्चों को भी लेकर स्टेडियम की ओर पहुंचे थे कि किसी तरह स्टार खिलाड़ियों की एक झलक मिल जाए। बुजुर्गों की संख्या भी कम नही थी। कई प्रशंसक देर रात तक स्टेडियम के बाहर रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल की जर्सी बेच रहे दुकानदारों से पसंदीदा खिलाड़ियों की जर्सी लेते भी दिखाई दिए। प्रशंसकों से घिरी टीम भारतीय टीम दोपहर के सत्र में अभ्यास के लिए होलकर स्टेडियम पहुंची थी। तभी से स्टेडियम में किसी तरह प्रवेश करने के लिए कई प्रशंसक जुगाड़ में लगे रहे। स्थिति यह हो गई कि स्टेडियम के बाहर और रेसकोर्स रोड पर बड़ी संख्या में प्रशंसक नजर आने लगे थे। करीब चार घंटे के अभ्यास के बाद जब भारतीय टीम के खिलाड़ी बस से बाहर निकलकर होटल की ओर जा रहे थे, तो प्रशंसक स्टार खिलाड़ियों की झलक पाने के लिए उमड़ पड़े और टीम बस प्रशंसकों से घिर गई। सभी मोबाइल से फोटो और वीडियो बनाते रहे। वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी इन्हें काबू नहीं कर पा रहे थे। बस प्रशंसकों की इस भीड़ में धीमी गति से बमुश्किल बाहर निकली। टीम के स्टेडियम से निकलने के काफी देर बाद तक प्रशंसक वहीं डटे रहे। यह भी जानें 8वां वनडे मैच खेला जाएगा होलकर स्टेडियम में 29वां अंतरराष्ट्रीय वनडे खेला जाएगा इंदौर में 7 मैच हुए हैं इंदौर के होलकर स्टेडियम में अभी तक। सभी में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की है। 418 रन भारत ने बनाए थे इंदौर के होलकर स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ 2011 में। यह भारत का अभी तक का सर्वोच्च स्कोर है। 399 रन बनाए थे भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 में, यह होलकर स्टेडियम में भारत का दूसरा सर्वोच्च स्कोर है। 2023 के बाद पहली बार न्यूजीलैंड की टीम इंदौर के होलकर स्टेडियम में वनडे मैच खेलेगी। यह इस स्टेडियम में दोनों के बीच दूसरा मैच है। 90 रनों से जीती थी भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पिछले वनडे मैच में। मैच के दौरान साफ पानी की चिंता… होलकर स्टेडियम में मैच देखने आने वाले प्रशंसकों सहित तमाम लोगों के लिए स्वच्छ पानी के विशेष प्रबंध किए गए हैं। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) द्वारा आरओ वाटर के जार स्टेडियम परिसर में लगवाए जा रहे हैं। मैच के दौरान करीब 15 हजार पानी के जार लगाए जाएंगे, जिसमें तीन लाख लीटर पानी की खपत रहेगी। साथ ही कचरा प्रबंधन के लिए भी टीम तैनात की गई है। मैच के दौरान निकलने वाले कचरे से खाद बनाने के लिए परिसर में ही पहले चरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मध्य प्रदेश क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) के प्रशासनिक अधिकारी रोहित पंडित ने बताया कि स्टेडियम में होने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जाती है। इस बार भी आरओ का पानी प्रशंसकों के लिए निश्शुल्क उपलब्ध रहेगा। स्टेडियम परिसर में विभिन्न स्थानों पर पानी के काउंटर लगाए गए हैं, जिससे किसी भी प्रशंसक को परेशान न होना पड़े। स्टेडियम की गैलरी में पानी या अन्य सामग्री ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्टेडियम में मैच के दौरान जो भी कचरा निकलता है उसे भी खाद बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। कचरे से खाद बनाने के क्रम में एक चरण स्टेडियम में ही पूरा किया जाता है। इसके लिए भी स्वच्छताकर्मियों की पूरी टीम मुस्तैद रहेगी। हमारा उद्देश्य है कि स्टेडियम में मैच देखने आने वाले बेहतर अनुभव लेकर लौटें।