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पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा चार सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को भावभीनी विदाई

पुलिस महानिदेशक ने सभी को स्‍मृति चिन्‍ह भेंट किए भोपाल  पुलिस मुख्‍यालय की विभिन्‍न शाखाओं से माह दिसंबर में सेवानिवृत्‍त चार कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा नेबुधवार को भावभीनी विदाई दी। डीजीपी ने सभी को प्‍लांट एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों को उनके विभिन्‍न स्‍वत्‍व (क्‍लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये। नवीन पुलिस मुख्‍यालय भवन कॉन्‍फ्रेंसहॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक श्री अनिल कुमार, पुलिस महानिरीक्षक श्री अंशुमान सिंह एवं अन्‍य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे। पुलिस मुख्‍यालय से सेवानिवृत्‍तमान सेवी उप पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा श्री भगवानदास विधानी, कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक सीआईडी श्रीमती कल्‍पना शर्मा मिश्रा, सूबेदार (एम) विशेष शाखा श्री ओम नारायण द्विवेदी तथा प्रधान आरक्षक (एम) विशेष शाखा श्रीमती स्‍वराजवती वर्मा को पुलिस मुख्‍यालय परिवार ने बुधवार को भावभीनी विदाई दी। सहायक पुलिस महानिरीक्षक सुश्री इरमीन शाह ने सेवानिवृत्‍त कर्मचारियों के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।  

रायपुर: ‘बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव से रंगेगा आदिवासी कला-संसार, 10 जनवरी से शुरू

रायपुर : 'बस्तर पंडुम 2026’ से सजेगा आदिवासी कला-संसार बस्तर की लोक-संस्कृति का महोत्सव 10 जनवरी से 06 फरवरी तक चलेगा रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दिशा निर्देश पर छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग की लोक-संस्कृति, परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन की तैयारियां शुरु कर दी गई है। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026 में “बस्तर पंडुम 2026” का आयोजन जनपद, जिला एवं संभाग स्तर पर प्रतियोगात्मक स्वरूप में किया जाएगा। यह आयोजन बस्तर अंचल की लोककला, शिल्प, नृत्य, गीत-संगीत, पारंपरिक व्यंजन, बोली-भाषा, वेश-भूषा, आभूषण, वाद्य यंत्र, नाट्य एवं जनजातीय जीवन-पद्धति के संरक्षण और संवर्धन का एक भव्य मंच बनेगा। राज्य शासन ने बस्तर संभाग के सभी सात जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, कांकेर, कोण्डागांव एवं नारायणपुर-में इस उत्सव को व्यापक सहभागिता के साथ आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अंतर्गत बस्तर संभाग की 1885 ग्राम पंचायतों से जुड़े 32 जनपद मुख्यालयों में 12 विधाओं पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ग्राम पंचायत स्तर से चयनित लोक कलाकारों और कला दलों को निःशुल्क ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से जनपद स्तरीय प्रतियोगिता में आमंत्रित किया जाएगा। पहले चरण में जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं 10 से 20 जनवरी 2026 के बीच आयोजित होंगी। प्रत्येक विधा से एक-एक विजेता दल का चयन किया जाएगा, जिन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। जनपद स्तर पर आयोजन के लिए प्रत्येक जनपद पंचायत को 5 लाख रुपये का बजट आबंटित किया गया है। दूसरे चरण में जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं 24 से 29 जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएंगी। जिला स्तर पर प्रत्येक विधा के विजेता दल को 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले को 10 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है। अंतिम और सबसे भव्य चरण के रूप में संभाग स्तरीय प्रतियोगिता 2 से 6 फरवरी 2026 तक जगदलपुर, जिला बस्तर में आयोजित होगी। इसमें सातों जिलों से चयनित 84 विजेता दल भाग लेंगे। संभाग स्तर पर प्रथम पुरस्कार 50 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 30 हजार रुपये, तृतीय पुरस्कार 20 हजार रुपये तथा शेष 48 प्रतिभागी दलों को 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस महोत्सव की विशेषता यह होगी कि इसमें केवल वही कलाकार भाग ले सकेंगे, जो बस्तर संभाग के वास्तविक मूल निवासी हैं और जनजातीय लोक कला विधाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, गांवों और कस्बों में अपनी कला से पहचान बना चुके वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ नवोदित कलाकारों को भी मंच प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक स्तर पर विजेता दलों को पुरस्कार राशि के साथ प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह (फोटो फ्रेम) प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को जनउत्सव का स्वरूप देने के लिए समाज प्रमुखों, वरिष्ठ नागरिकों, आदिवासी मुखियाओं, जनप्रतिनिधियों एवं संस्कृति प्रेमियों को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने हेतु प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इस संपूर्ण आयोजन के लिए संचालनालय, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। संस्कृति विभाग से युगल तिवारी, नोडल अधिकारी एवं कार्यक्रम संयोजक (मोबाइलः +91-94063-98080) को आयोजन का दायित्व सौंपा गया है। समन्वय हेतु प्रशांत दुबे (मोबाइलः +91-75093-62263) एवं भाविन राठौर (मोबाइलः +91-99071-41307) को नामांकित किया गया है। सभी जिलों को अपने-अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि “बस्तर पंडुम 2026” को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से आयोजित किया जाए, ताकि बस्तर की लोक-संस्कृति की असली पहचान को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।

आरडीएसएस अंतर्गत पश्चिम मप्र का 86वां सब स्टेशन ऊर्जीकृत

भोपाल  ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि शासन की महत्वपूर्ण रिवेम्प्ड डिस्ट्रिब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र का 86वां 33/11 केवी सब स्टेशन इंदौर संभाग के खरगोन जिले के बलसगांव पाडल्या में ऊर्जीकृत किया गया है। पांच एमवीए के इस ग्रिड से हजारों उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में ज्यादा गुणवत्ता से बिजली मिलेगी। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर के प्रबंध निदेशक श्री अनूप कुमार सिंह ने बताया योजना में प्रदेश का पहला ग्रिड इंदौर जिले के ईमलीखेड़ा में तैयार हुआ था। अब तक इंदौर शहर वृत्त और इंदौर ग्रामीण वृत्त में कुल 13 सब स्टेशन तैयार कर बिजली वितरित की जा रही है। उज्जैन जिले में 12, शाजापुर 8, रतलाम 9, देवास 5, खरगोन 6, बड़वानी 4, खंडवा 8, बुरहानपुर 7, झाबुआ 5, धार 2, मंदसौर 3, नीमच में एक सब स्टेशन तैयार होकर विद्युत आपूर्ति सेवा प्रदान कर रहे है। श्री सिंह ने बताया कि आरडीएसएस अंतर्गत 5 एमवीए क्षमता के इन ग्रिडों से कंपनी की विद्युत वितरण क्षमता 430 एमवीए बढ़ी है।

जनस्वास्थ्य से समझौता नहीं: हेल्थ मिनिस्टर आरती सिंह का दो टूक संदेश

चंडीगढ़ हरियाणा की हेल्थ मिनिस्टर आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य के लोगों की हेल्थ के साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स के मामले में, इंडस्ट्रियल-ग्रेड्स को अपने प्रोडक्ट्स की सेल और ट्रांसपोर्ट में नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अगर कोई मैन्युफैक्चरर उल्लंघन करता है, तो उसका लाइसेंस कैंसिल किया जा सकता है और उसके खिलाफ लीगल एक्शन भी लिया जा सकता है। फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन हरियाणा के स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर ललित कुमार गोयल ने कहा कि हेल्थ मिनिस्टर आरती सिंह राव की गाइडलाइंस के अनुसार पब्लिक हेल्थ को ध्यान में रखते हुए यह एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्रियल-ग्रेड हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स के गलत इस्तेमाल को रोकने और पब्लिक हेल्थ की सेफ्टी सुनिश्चित करने के मकसद से एक ज़रूरी एडवाइजरी जारी की गई है। यह एडवाइजरी हरियाणा स्टेट फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के ज़रिए राज्य के सभी फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर्स, ट्रेडर्स, इंपोर्टर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को बता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह निर्देश डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़, एनफोर्समेंट डिवीज़न, भारत सरकार की 22 दिसंबर 2025 को जारी एडवाइज़री के अनुसार जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना सेफ्टी के इंडस्ट्रियल-ग्रेड हाई रिस्क सॉल्वैंट्स की बिक्री पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है और इससे दवा सप्लाई की क्वालिटी और सेफ्टी पर असर पड़ता है। एडवाइज़री के अनुसार, सभी हाई रिस्क इंडस्ट्रियल सॉल्वैंट्स के कंटेनर पर उनके इस्तेमाल के लिए साफ़ और पढ़ने लायक मार्क लगाना ज़रूरी होगा। यह चेतावनी सेल्स बिल, डिलीवरी चालान और लेन-देन से जुड़े दूसरे सभी डॉक्यूमेंट्स पर भी खास तौर पर दिखाई जाएगी। उन्होंने साफ़ किया कि हाई रिस्क सॉल्वैंट्स और एक्सिपिएंट्स की खुली बिक्री पूरी तरह से मना रहेगी। ये प्रोडक्ट्स भी सिर्फ़ ओरिजिनल, सील्ड और टैम्पर-प्रूफ कंटेनर में ही बेचे जाएंगे, जिन पर पूरी लेबलिंग और बैच-ट्रेसेबिलिटी से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए।  गोयल ने कहा कि इन निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित यूनिट्स के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस कैंसिल करना या कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार लोगों की सेहत की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देती है और फार्मा सेक्टर में क्वालिटी, ट्रांसपेरेंसी और सेफ्टी पक्का करने के लिए लगातार ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। ये निर्देश सिर्फ़ लोगों की सेहत और सेफ्टी के हित में जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनवरी माह के अंत में करेंगे भैरवनाथ लोक का लोकार्पण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भैरवनाथ मंदिर को मिला भव्य दिव्य स्वरूप रूद्राभिषेक कर मंदिर परिसर में पीपल के वृक्ष का किया रोपण भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने रीवा के गुढ़ में स्थित भैरवनाथ मंदिर में भगवान आशुतोष की पूजा अर्चना की और रूद्राभिषेक किया। उन्होंने भैरवनाथ की पूजा भी की। प्रयागराज के वैदिक आचार्यों ने विधि विधान से पूजा अर्चना संपन्न कराई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ लोक का लोकार्पण जनवरी माह के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जायेगा। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि इस धार्मिक स्थल को आकर्षक बनाने के प्रयास किये गये हैं। ग्यारह सौ वर्ष पुरानी आस्था को नया स्वरूप मिला है। यह स्थल धार्मिक स्थल के साथ ही पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित होगा। श्रृद्धालुओं के लिये धर्मशाला व अन्य सुविधायें भी उपलब्ध रहेंगी। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि भैरवनाथ मंदिर की पहाड़ी में पीपल के 100 पौधे लगाये जा रहे हैं। पीपल आक्सीजन का सबसे बड़ा स्त्रोत है। उन्होंने कहा कि पीपल का धार्मिक महत्व भी है। भगवान कृष्ण ने कहा था कि वृक्षों में मैं पीपल हूँ अत: यह सबसे पूज्य वृक्ष भी है। पूर्ण परिसर को आकर्षक व हरीतिमायुक्त बनाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने पीपल के पौधे का रोपण किया। इस दौरान विधायक गुढ़ श्री नागेन्द्र सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मनरेगा संशोधन पर पंजाब सरकार सख्त, विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को घेरा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा के स्पेशल सेशन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में बदलाव का विरोध किया और इस बदलाव के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया। यह प्रस्ताव मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने सदन में पेश किया, जिसे सदन में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार ने न सिर्फ मनरेगा बल्कि दलित मजदूरों के मुंह से निवाला भी छीन लिया है। इस नीति ने देश के दलित मजदूरों के जीने का हक भी खत्म कर दिया है। मंत्री सौंद ने कहा कि मनरेगा गरीब परिवारों के लिए एक वक्त की रोटी का आखिरी सहारा था। मुख्यमंत्री मान ने सदन में बोलते हुए केंद्र सरकार को कड़े शब्दों में यह भी कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो लोग भाजपा के साथ-साथ अकाली नेताओं को भी गांवों में घुसने नहीं देंगे। 

आदिवासी अंचलों तक पहुंचेगी सेहत की सौगात, मुख्यमंत्री साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट को किया रवाना

रायपुर दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के दरवाज़े तक पहुँचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत बुधवार को नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुँचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गाँवों व बसाहटों तक पहुँचाएगी। मोबाइल मेडिकल यूनिटों की तैनाती से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गाँवों और बसाहटों तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी। इससे दो लाख से अधिक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जाँच की सुविधा गाँव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इस पहल को आदिवासी समुदायों की “सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार” बताया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह गौरव का दिन है। समाज में आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक प्रत्येक दृष्टिकोण से पिछड़े लोग विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग हैं। छत्तीसगढ़ में निवासरत 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 21 सौ बसाहटों में निवासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होगा। इन सर्वसुविधा-संपन्न 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से यह कार्य आसान होगा। इस यूनिट में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर उपस्थित होंगे। इस यूनिट में 25 तरह की जाँच सुविधाएँ तथा 106 तरह की दवाइयाँ निःशुल्क उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री साय ने इस नवीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के सहित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि विशेष पिछड़ी जाति के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रयासरत हैं। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे सुदूर वनांचलों के लिए हैं जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच कम है। आज 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट पूरे प्रदेश के लिए समर्पित कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूर्ण करेगा। मंत्री जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने इस पुनीत कार्य में छत्तीसगढ़ को सहभागी बनकर योगदान देने का अवसर प्रदान किया। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक उत्थान के लिए पीएम जनमन योजना की शुरुआत की। इसका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को सीधे बसाहटों तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थिति में मरीज को इन यूनिट के माध्यम से निकट स्वास्थ्य केंद्रों में पहुँचाना आसान होगा। हमारा उद्देश्य सिर्फ मशीनें ही नहीं, अपितु कुशल एवं संवेदनशील कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। ये यूनिटें हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जाँच और रोगों  का उपचार किया जाएगा और आवश्यक दवाइयों का वितरण किया जाएगा। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा। उल्लेखनीय है कि पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ नियमित रूप से नहीं पहुँच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान व रोकथाम में मदद मिलेगी।

नव वर्ष पर मंत्री काश्यप ने दी शुभकामनाएं

भोपाल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री श्री चेतन्य कुमार काश्यप ने प्रदेशवासियों को नववर्ष 2026 की मंगल कामनाएं और बधाई दी है। मंत्री श्री काश्यप ने प्रदेश वासियों के सुख समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है। मंत्री श्री काश्यप ने नववर्ष के शुभकामना संदेश में नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अभ्युदय मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि आगामी वर्ष में मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन में कीर्तिमान स्थापित होगा तथा बड़ी संख्या में उद्योग लगेंगे। 

औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में संशोधन : छत्तीसगढ़ को और अधिक निवेश-अनुकूल एवं प्रतिस्पर्धी बनाने की बड़ी पहल

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024–30 में महत्वपूर्ण संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इन संशोधनों के माध्यम से नीति को अन्य राज्यों की तुलना में और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, स्पष्ट एवं निवेश-अनुकूल बनाया गया है। इससे राज्य में औद्योगिक एवं सेवा क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार के नए अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं। मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों के लिए स्थायी एवं गुणवत्तापूर्ण रोजगार का सृजन सुनिश्चित करना है। इसी दृष्टि से ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा रोजगार सृजन अनुदान से संबंधित नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब 50 से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले विशेष सेक्टर के उद्यम — जैसे फार्मा, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी आदि के एमएसएमई इकाइयों को भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को दिए जाने वाले वेतन पर अनुदान प्राप्त होगा। सेवा क्षेत्र के दायरे का विस्तार करते हुए, मंत्रिमंडल ने कंप्यूटर-आधारित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स एवं ऐप-आधारित एग्रीगेटर, तथा NABL मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक लैब को भी नीति के अंतर्गत सम्मिलित किया है। इन संस्थाओं को अब औद्योगिक विकास नीति के तहत निर्धारित प्रोत्साहन एवं अनुदान का लाभ मिलेगा। पर्यटन एवं स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास को गति देने के उद्देश्य से रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में पाँच सितारा होटलों तथा अन्य जिलों में तीन सितारा होटलों की स्थापना के लिए प्रोत्साहनात्मक संशोधन किए गए हैं। इसी प्रकार राज्य में बड़े निजी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की स्थापना को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता संवर्धन के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि NIRF Ranking में शीर्ष 100 में शामिल शिक्षण संस्थानों द्वारा राज्य में परिसर स्थापित किए जाने पर उन्हें नीति के अंतर्गत विशेष अनुदान प्रदान किया जाएगा। इससे छत्तीसगढ़ में उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों की स्थापना को बढ़ावा मिलेगा और राज्य के युवाओं को विश्व-स्तरीय शिक्षा एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत ये संशोधन छत्तीसगढ़ को उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। इन निर्णयों से राज्य में निवेश बढ़ने, व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की गति को और अधिक तेज एवं संतुलित बनाने में सहायता मिलेगी।

नशे के खिलाफ निर्णायक लड़ाई: ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ अभियान के 304वें दिन 113 तस्करों पर शिकंजा

चंडीगढ़  पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही जंग लगातार और तेज होती जा रही है। भगवंत मान सरकार की 'युद्ध नशियां विरुद्ध' मुहिम के तहत पंजाब पुलिस ने 304वें दिन भी पूरे दमखम के साथ मोर्चा संभाले रखा। राज्यभर में लगातार रेड, सर्च ऑपरेशन और जागरूकता अभियानों के जरिए पुलिस न सिर्फ नशा तस्करों पर शिकंजा कस रही है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखने की कोशिश भी कर रही है। पंजाब पुलिस का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे की जड़ तक पहुंचने और पूरे ड्रग नेटवर्क को तोड़ने की है। इसी सोच के साथ 304वें दिन पंजाब पुलिस ने राज्यभर में 319 अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों के दौरान 82 एफआईआर दर्ज की गईं और 113 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की यह कार्रवाई दिखाती है कि अब नशे के सौदागरों के लिए पंजाब में कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है। अगर अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह अभियान काफी असरदार साबित हुआ है। पिछले 304 दिनों में कुल 42,480 नशा तस्करों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। यह संख्या अपने आप में बताती है कि पंजाब पुलिस कितनी गंभीरता से इस मिशन को आगे बढ़ा रही है। मान सरकार की इस मुहिम की खास बात इसकी तीन-स्तरीय रणनीति है। पहला स्तर है इन्फोर्समेंट (सख्त कार्रवाई), रेड और गिरफ्तारी। दूसरा स्तर है डी-एडिक्शन, जिसके तहत नशे की लत में फंसे लोगों को इलाज और काउंसलिंग के जरिए सामान्य जीवन की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है। तीसरा और सबसे अहम स्तर है प्रिवेंशन, यानी जागरूकता। स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और मोहल्लों में लोगों को नशे के नुकसान बताए जा रहे हैं, ताकि युवा इस दलदल में फंसने से पहले ही रुक जाएं। पंजाब पुलिस का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। जब तक आम लोग, परिवार और युवा साथ नहीं आएंगे, तब तक नशे के खिलाफ पूरी जीत संभव नहीं है। इसी वजह से जागरूकता अभियानों पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है जितना कार्रवाई पर।