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सेवा की कहानी: महतारी वंदन की राशि से यशोदा ने संवारा सिलाई का कारोबार

रायपुर सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उनके हुनर और स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में सहायक बन रही हैं। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत सकालो की मती यशोदा प्रजापति की कहानी इसका उदाहरण है। सिलाई के हुनर को अपनी आजीविका का आधार बनाने वाली यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता का उपयोग घरेलू जरूरतों के साथ बचत के लिए किया। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में अपनी भागीदारी मजबूत की। महतारी वंदन की राशि से मिली बचत और कारोबार को संबल यशोदा लंबे समय से सिलाई का काम कर रही हैं। सिलाई से होने वाली आय से वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पति का सहयोग करती हैं। महतारी वंदन योजना से नियमित आर्थिक सहायता मिलने के बाद उनके लिए अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ राशि बचा पाना भी आसान हुआ। इसी बचत का उपयोग उन्होंने अपनी सिलाई की दुकान को आगे बढ़ाने में किया। यशोदा बताती हैं, “महतारी वंदन का पैसा मिलता है तो उससे मुझे बहुत मदद हो जाती है। पैसे इकट्ठा करके धीरे-धीरे अपनी दुकान को आगे बढ़ाया है।” सिलाई से आय, बच्चों की पढ़ाई में भी सहयोग यशोदा के पति वैन चलाते हैं और उनके दो बच्चे हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच यशोदा सिलाई का काम संभाल रही हैं। उनकी सिलाई से होने वाली आमदनी घर के खर्च में सहयोग देती है। वहीं महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में भी सहायक बन रही है। यशोदा का कहना है कि नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिलता है। इससे वे अपनी जरूरत के अनुसार राशि का उपयोग करने के साथ भविष्य के लिए बचत भी कर सकती हैं। हुनर और आर्थिक संबल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम यशोदा के लिए महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता केवल मासिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके हुनर को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनी। सिलाई के काम से होने वाली आय और योजना से मिली आर्थिक सहायता का समझदारी से उपयोग कर वे परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं। यशोदा ने महतारी वंदन योजना से मिल रहे आर्थिक संबल के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी कहानी बताती है कि नियमित आर्थिक सहायता जब महिलाओं की मेहनत, हुनर और बचत से जुड़ती है, तो यह परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी नई दिशा दे सकती है।

सहकारी बैंक के सीईओ 2 माह के अंदर अधीनस्थ सभी पैक्स का कर लें निरीक्षण: मंत्री सारंग

भोपाल  सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपने अधीनस्थ सभी पैक्स का निरीक्षण 2 माह के अंदर सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अपने बैंक को अपग्रेड करने की जिम्मेदारी स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी की है। वह अनुशासन और एकरूपता के साथ सफलता हासिल कर सकते हैं। बैंक में नवाचार कर एक अलग पहचान बनाई जा सकती है। मंत्री  सारंग समन्वय भवन में सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। युवा अधिकारी पुराने अधिकारी-कर्मचारियों के अनुभव का लें लाभ मंत्री  सारंग ने कहा कि सीईओ के पद पर नये एवं युवा अधिकारी पदस्थ हुए हैं। उनके लिये यह प्रशिक्षण कार्यक्रम लाभप्रद सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि पुराने अधिकारी-कर्मचारियों के अनुभव का लाभ भी उन्हें लेना चाहिये और उनका सम्मान भी बनाये रखना चाहिये।  सारंग ने कहा कि सीईओ अपने कलेक्टर से सतत सम्पर्क में रहें। साथ ही जिले के अधिकारियों से बेहतर समन्वय बनाये रखें। उन्होंने कहा कि सुव्यवस्था स्थापित करने के लिये अपने अधीनस्थ पैक्स को चैनेलाइज करें। सेवा नियमों में एकरूपता लाकर जल्द होंगे प्रमोशन मंत्री  सारंग ने कहा कि जल्द ही सेवा नियमों में एकरूपता लाकर प्रमोशन की कार्यवाही की जायेगी। अपेक्स बैंक में भी प्रमोशन जल्द होंगे। उन्होंने सभी सीईओ से वन-टू-वन चर्चा की। कार्यशाला में राज्य शासन द्वारा खरीफ एवं रबी की अलग-अलग साख सीमाओं के स्थान पर वर्षभर एक साख सीमा की उपलब्धता एवं नवीन किसान क्रेडिट कार्ड की ऑनलाइन/तकनीकी प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यशाला में जिला बैंकों से अपेक्षाएँ, प्रक्रियाओं का सरलीकरण, कवच योजना, प्रश्न-उत्तर और फीडबेक सेशन भी हुआ। इस अवसर पर सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक  दीपक सिंह, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक  मनोज गुप्ता, अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य  पी.एस. तिवारी, ‌विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी मती अरूणा दुबे,  अरूण मिश्रा, उप महाप्रबंधक  के.टी. सज्जन और अरविंद बौद्ध भी उपस्थित थे।  

प्रमोशन की राह होगी आसान: एमपी के 22 हजार कर्मचारियों को 45 वर्ष बाद CPCT से मिलेगी छूट

भोपाल  चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के आड़े आ रही कम्प्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (सीपीसीटी) उत्तीर्ण होने की अनिवार्यता से कर्मचारियों को छूट देने की तैयारी है। ऐसे कर्मचारी, जिनकी आयु 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें छूट दी जाएगी। इससे कम आयु के कर्मचारियों को सीपीसीटी करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया जाएगा। किसी भी पदोन्नत कर्मचारी को पदावनत भी नहीं किया जाएगा। प्रदेश के लगभग 22 हजार से अधिक कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा। अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों की भी लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति अब हो सकेगी। सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्टीकरण से अटकी थीं पदोन्नतियां प्रदेश में लगभग एक लाख अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति नियम-2025 के प्रविधान के अनुसार राज्य सरकार पदोन्नत कर चुकी है। इसमें अब तक चतुर्थ श्रेणी के वे कर्मचारी पदोन्नत नहीं हो पाए हैं, जिन्होंने सीपीसीटी उत्तीर्ण नहीं की है। इसके आधार पर कृषि, उद्योग सहित अन्य विभागों ने पदोन्नति निरस्त कर दीं। दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मांगे गए मार्गदर्शन के आधार पर स्पष्टीकरण जारी किया कि सीपीसीटी से छूट का कहीं कोई प्रविधान नहीं है। 2010 में पदोन्नत चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को हिंदी मुद्रलेखन परीक्षा उत्तीर्ण करने के प्रविधान से छूट दी गई थी, इसलिए जिन अधिकारियों ने गलत व्याख्या करके पदोन्नति दी हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। इसके बाद किसी विभाग ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी। एक-दो दिन में जारी होंगे विस्तृत दिशानिर्देश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने इसका विरोध करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीपीसीटी की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की तो मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों को रास्ता निकालने के निर्देश दिए। इस पर अब यह प्रविधान किया जा रहा है कि जिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आयु 45 वर्ष से अधिक है, उन्हें पदोन्नति के लिए सीपीसीटी से छूट दी जाए। वहीं, इसे उत्तीर्ण करने की अवधि दो से बढ़ाकर पांच वर्ष करने के साथ केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को पदावनत नहीं किया जाएगा कि उसने सीपीसीटी उत्तीर्ण नहीं की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सीपीसीटी को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश एक-दो दिन में जारी कर दिए जाएंगे। इससे पदोन्नति में जो समस्या आ रही थी, वह दूर हो जाएगी।

गोंडा में बिजली मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी, 16 हजार यूनिट हेराफेरी से मचा हड़कंप

लखनऊ यूपी के विद्युत वितरण क्षेत्र देवीपाटन मंडल में बकाया वसूली और लाइन लॉस घटाने के महा अभियान में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। गोंडा जिले में बड़गांव खण्ड प्रथम के परसोनी बनवारा में 16853 यूनिट की स्टोर रीडिंग पकड़ी गई। रीडिंग में 16 हजार यूनिट की हेराफेरी सामने आई है। बडगांव उपखण्ड अधिकारी भरत सिंह ने संबंधित मीटर रीडर और कार्यदायी संस्था टेरासॉफ्ट के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की है। मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ के निर्देश पर उत्तरी, खरगूपुर, चांदपुर, शिवपुरा, चरचरी, चौधरीडीह और रहवा जैसे हाई लॉस फीडरों पर 10 से 15 टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें घर-घर जाकर बकाया जमा करा रही हैं और नेवर पेड उपभोक्ताओं को नोटिस दे रही हैं। नोटिस के बाद भी भुगतान न करने पर संयोजन काटे जाएंगे। जांच में गोण्डा में 15, बहराइच में 12 और बलरामपुर-श्रावस्ती में 14 कुल 41 जगह बिजली चोरी पकड़ी गई, जिन पर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है। सोमवार को गोंडा जिले में 743 नोटिस पर 44.47 लाख, बहराइच में 790 नोटिस पर 65.17 लाख और बलरामपुर-श्रावस्ती में 939 नोटिस पर 55.13 लाख की वसूली हुई। मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने कहा कि बकाया बिलों का समय से भुगतान कर उपभोक्ता विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहयोग करें। उन्होंने दो टूक कहा कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने, स्टोर रीडिंग करने वाले को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। रामापुर में 40 कनेक्शन काटे : अधिशासी अभियंता रणबीर सिंह के निर्देश पर विद्युत दुबहा गांव में सघन विद्युत चेकिंग अभियान एवं राजस्व वसूली कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्रवाई से बकायादारों और बिजली चोरी करने वालों में हड़कंप मचा रहा। अभियान के दौरान विद्युत विभाग की टीम ने बड़े पैमाने पर जांच की। बकाया भुगतान न करने पर लगभग 40 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन मौके पर ही काट दिए गए। वहीं, 15 उपभोक्ताओं ने कार्रवाई से बचते हुए मौके पर ही 65,000 रुपये का राजस्व जमा कराया। जांच के दौरान 5 उपभोक्ताओं के मीटर में रीडिंग स्टोर पाई गई, जिसे टीम ने मौके पर ही अपडेट कर नया बिल जारी किया। अवर अभियंता अर्जुन कुमार पाल ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति ने बिना बकाया जमा किए चोरी से दोबारा केबल जोड़ने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छोटे फाल्ट को ठीक करने में लग रहे 14 से 20 घंटे, लोग परेशान परसपुर में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी है। नगर के गिरीश नारायण सिंह सहित अन्य उपभोक्ताओं का कहना है आए दिन रात करीब 9-10 बजे लाइन में फाल्ट होने से बिजली कट जाती है। छोटे फाल्ट को ठीक करने में भी 14 से 20 घंटे तक का समय लग जा रहा है। गर्मी में रातभर बिजली न रहने से वृद्धों, बीमारों और छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताते हैं कुछ प्रभावशाली लोगों के कनेक्शन को दूसरे फेस से जोड़कर आपूर्ति बहाल कर दी जाती है, जबकि उड़े वाले फेस से जुड़े सैकड़ों परिवार पूरी रात बिजली के इंतजार में रात काटनी पड़ रही हैं। कुछ सक्षम लोग मजबूरी में जनरेटर चलाते हैं, जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है। उपभोक्ताओं ने अधिकारियों से मांग की है कि फाल्ट होने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल हो। साथ ही चेतावनी दी है कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो नगरवासी उच्च अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से शिकायत करेंगे।

बैटरी चलित ट्रायसायकल से बदला 75% अस्थिबाधित सोमारू का जीवन, मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

सरकार की संवेदनशील पहल  बैटरी चलित ट्रायसायकल से बदला 75% अस्थिबाधित सोमारू का जीवन, मिली आत्मनिर्भरता की नई उड़ान ​रायपुर         समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांगजन हितैषी योजनाएं प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद का नया उजाला भर रही हैं। नारायणपुर जिले के नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गुडरीपारा निवासी 47 वर्षीय सोमारू नेताम की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कैसे एक शासकीय योजना ने न सिर्फ एक व्यक्ति की शारीरिक बाधाओं को दूर किया, बल्कि उन्हें समाज में स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के साथ जीने का संबल भी दिया।       ​ग्राम गुडरीपारा निवासी सोमारू नेताम, पिता श्री चैतराम, 75 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांगता से ग्रस्त हैं। इस गंभीर दिव्यांगता के कारण उनका जीवन लंबे समय तक काफी कठिनाइयों से भरा रहा। चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ होने की वजह से उनकी दिनचर्या बेहद सीमित होकर रह गई थी। घर से बाहर निकलने से लेकर दैनिक आवश्यकताओं के सामान के लिए बाजार जाने या स्वास्थ्य जांच हेतु अस्पताल पहुंचने तक, हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें अपने परिवार के सदस्यों या ग्रामीणों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता था। दूसरों पर इस लगातार निर्भरता ने न केवल उनके आवागमन को बाधित किया था, बल्कि उनके भीतर के आत्मविश्वास को भी प्रभावित कर रखा था।        ​सोमारू के इस कठिन जीवन संघर्ष को आसान बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग की 'बैटरी चलित (मोटराइज्ड) ट्रायसायकल प्रदाय योजना' एक वरदान बनकर सामने आई। विभाग द्वारा संवेदनशीलता से पहल करते हुए सोमारू नेताम को एक आधुनिक बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान की गई। यह ट्रायसायकल मिलते ही सोमारू के दैनिक जीवन की तस्वीर रातों-रात बदल गई।         ​अब सोमारू को अपनी छोटी से छोटी जरूरतों के लिए किसी दूसरे का इंतजार नहीं करना पड़ता। वे बिना किसी सहायता के अपने घर से खुद ट्रायसायकल चलाकर बाजार, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों तक बेहद आसानी से आवागमन कर रहे हैं। इस सुविधा ने उनकी गतिशीलता को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे न केवल उनके समय और श्रम की बचत हो रही है, बल्कि परिवार के सदस्यों पर से भी उनकी निर्भरता काफी कम हो गई है। ​स्वतंत्र रूप से आवागमन करने की इस आजादी ने सोमारू के आत्मबल को एक नई ऊंचाई दी है। वे अब न केवल अपने व्यक्तिगत कार्य स्वयं निपटा रहे हैं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों में भी अधिक सहजता और उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए सोमारू बताते हैं कि बैटरी चालित ट्रायसायकल उनके लिए महज एक वाहन नहीं, बल्कि स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीने का सबसे बड़ा सहारा है। इसने उनकी जिंदगी को सुगम बनाकर भविष्य के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह बदल दिया है।       ​दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  सरकार की यह योजनाएं असल मायने में जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। सोमारू नेताम की यह प्रेरणादायक कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि जब शासकीय योजनाएं सही समय पर सही हितग्राही तक पहुंचती हैं, तो वे जीवन में आत्मनिर्भरता, सम्मान और सामाजिक सहभागिता के नए दरवाजे खोल देती हैं।

0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय

सेवा संकल्प से संवरी उम्मीद  0.40 हेक्टेयर में गुलाब पटेल ने लिखा मछली पालन से समृद्धि का नया अध्याय ​रायपुर,       ​एक किसान के लिए उसकी ज़मीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीदों का आधार होती है। सारंगढ़ विकासखंड के ग्राम नवरंगपुर निवासी गुलाब पटेल पिता: स्व. श्री प्रेमलाल पटेल ने अपनी इसी ज़मीन में छिपी संभावनाओं को पहचाना और एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज प्रदेश के हज़ारों किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।      ​पारंपरिक खेती से इतर कुछ नया करने की सोच के साथ गुलाब पटेल ने जल संरक्षण और मत्स्य पालन को आजीविका का जरिया बनाने का फैसला किया। उनकी इस सोच को साकार करने में केंद्र व राज्य सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना और सेवा संकल्प अभियान संबल बने। ​शासकीय योजना से मिली राह और संबल      गुलाब पटेल के पास 0.40 हेक्टेयर भूमि थी, जिसे उन्होंने तालाब निर्माण के लिए चुना। योजना के तहत उन्हें विभाग से 1.20 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ। विभागीय मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता से तालाब का निर्माण पूरा हुआ और इसी के साथ शुरू हुआ मछली पालन का एक नया सफर। ​250 क्विंटल उत्पादन और 10 से 15 लाख का शुद्ध लाभ       तालाब बनने के बाद गुलाब पटेल ने मत्स्य पालन को वैज्ञानिक तकनीक और पूरे समर्पण के साथ अपनाया। नियमित देखरेख, उत्तम आहार और सही प्रबंधन का नतीजा यह रहा कि आज उनके 0.40 हेक्टेयर के जलक्षेत्र से प्रतिवर्ष लगभग 250 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है। तमाम लागत निकालने के बाद उन्हें हर साल 10 से 15 लाख रुपए तक का शुद्ध लाभ मिल रहा है। ​सेवा संकल्प अभियान: कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरती योजनाएं        गुलाब पटेल की यह सफलता 'सेवा संकल्प अभियान' की उस मूल भावना को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य शासकीय योजनाओं को केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित न रखकर आम जन के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाना है। शासन के सहयोग, विभागीय मार्गदर्शन और किसान की अनथक मेहनत के इस संगम ने एक छोटे से भू-खंड को आर्थिक आत्मनिर्भरता के मजबूत मॉडल में बदल दिया है।       ​आज गुलाब पटेल न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर दूसरों के लिए भी एक मार्गदर्शक बनकर उभरे हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि यदि सही योजना और दृढ़ संकल्प का साथ मिले, तो ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी समृद्धि का द्वार खोल सकता है।

सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

सेवा संकल्प अभियान: धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश ​रायपुर,       राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत धमतरी स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ बालिका विद्यालय में समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिवसीय विभागीय प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बालिकाओं को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना था। ​योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी        शिविर में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। बालिकाओं को उपलब्ध अवसरों और अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सही जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। ​नुक्कड़ नाटक बना आकर्षण का केंद्र       कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक तथा सामाजिक दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।        उपस्थित ​प्रमुख जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अंत में  लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।

बंजर जमीन पर उगेगा ‘श्रीअन्न’, झारखंड को केंद्र से ₹20 करोड़ की मदद; बनेंगे चेकडैम

रांची  राज्य में बंजर भूमि विकास योजना के तहत झारखंड को इस वर्ष केंद्र से 20 करोड़ रुपये मिलेंगे। हालांकि यह राशि प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को पिछले वर्ष दिए गए 13 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होगा। वन एवं पर्यावरण विभाग इसकी तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत राज्य के पलामू और संताल परगना प्रमंडलों में औसत से कम हुई वर्षा की वजह से इस राशि से मिलेट्स की खेती के लिए किसानों को सहायता दी जाएगी। राज्य में पानी की कमी वाली भूमि पर मिलेट्स या मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती की जाती है। बंजर भूमि विकास के तहत यहां पौधरोपण और छोटे चेक डैम भी बनाए जाते हैं। बंजर भूमि यानी ऊंची भूमि पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में पिछले दो सालों में रिकॉर्ड मिलेट्स का उत्पादन हुआ है। झारखंड में भी इस तरह की भूमि पर प्रयोग को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने योजना बनाई है। बिहार में बंजर भूमि विकास के तहत पिछले साल मिली राशि से छोटे-बड़े करीब 750 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके अलावा सामाजिक वानिकी के तहत इस राशि से 70 हजार नए पौधे लगाए गए हैं। बंजर भूमि पर कृषि कार्य से जुड़े किसान विकास केंद्र के सहायक वैज्ञानिक संजय मिश्रा ने बताया कि चेकडैम की वजह से मिट्टी में नमी बढ़ी है। इससे यहां श्रीअन्न के साथ फलदार पौधे भी लगे हैं, जिनकी वृद्धि अच्छी है। राज्य सरकार बंजर भूमि का जिला स्तर पर नया डाटाबेस भी तैयार कर रही है। इसमें उस भूमि का सर्वे भी किया जाएगा, जहां मिट्टी की ऊपर परत उपजाऊ नहीं रह गई है।

नोटिस के बाद भी हाई कोर्ट नहीं पहुंचीं पन्ना कलेक्टर, अदालत ने जारी किया गैर-जमानती वारंट

जबलपुर हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आदेश की अवहेलना पर पन्ना कलेक्टर उषा परमार के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने वारंट की तामील की जिम्मेदारी पन्ना पुलिस अधीक्षक को सौंपते हुए कलेक्टर को अगली सुनवाई पर 30 सितंबर को उपस्थित कराने के निर्देश दिए हैं। नियमितीकरण को लेकर याचिका दायर की थी मामला सेवानिवृत्त कर्मचारी जाविन आरा रिजवी की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता पन्ना कलेक्टर कार्यालय में सेक्शन आफिसर के पद पर कार्यरत थीं। नियमितीकरण की मांग को लेकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की हाई कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को याचिका का निराकरण करते हुए कलेक्टर को याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 90 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई। नोटिस के बावजूद पेश नहीं हुईं कलेक्टर एकलपीठ ने पाया कि अवमानना याचिका पर 4 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद कलेक्टर की ओर से न तो अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश की गई। संपर्क अधिकारी भी नियुक्त किया गया था आदेश में उल्लेख है कि कलेक्टर ने पांच अक्टूबर, 2025 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर नोटिस प्राप्त होने की जानकारी दी थी। कलेक्टर कार्यालय की स्थापना शाखा के प्रभारी अधिकारी को इस मामले में संपर्क अधिकारी भी नियुक्त किया गया था। इसके बाद भी आदेश के अनुपालन के संबंध में आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।  

पराली प्रबंधन पर बाजवा का सुझाव, किसानों को ₹100 प्रति क्विंटल प्रोत्साहन देने की मांग

चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पराली जलाने के मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार की प्रस्तावित दंडात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए किसानों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन की मांग की है। बाजवा ने कहा कि पराली जलाने की समस्या का समाधान किसानों को केवल अपराधी मानकर जुर्माना लगाने से नहीं होगा। इसके लिए किसानों की आर्थिक मजबूरियों को समझते हुए व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। बाजवा नहीं करते पराली जलाने का समर्थन बाजवा ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के तहत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ जुर्माने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित व्यवस्था में खेत के आकार आधार पर प्रत्येक घटना के लिए 5,000, 10,000 और 30,000 रुपये तक जुर्माना लगाने की बात कही गई है। खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा – सरकार ने पराली जलाने की समस्या का समाधान निकाला है। देश की राजधानी दिल्ली से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में किसान पराली जलाते हैं, जिससे प्रदूषण काफी बढ़ सकता है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस पराली जलाने की समस्या को रोकने के लिए नए नियम बनाने का प्रस्ताव दिया है। नए नियमों के तहत पराली जलाए जाने वाले खेतों को रेड कैटेगरी में डाला जाएगा। क्या होंगे पराली जलाने को लेकर नया नियम? पर्यावरण मंत्रालय ने पराली जलाने को लेकर ड्राफ्ट नियम बुधवार को जारी किए। ड्राफ्ट नियमों के तहत, जिस खेत में पराली जलाई जाएगी, उसे घटना की तारीख से 15 महीने के लिए 'रेड कैटेगरी' में रखा जाएगा। हालांकि, इस कैटेगरी में डाले जाने के क्या नतीजे होंगे, यह अभी साफ नहीं है। नियमों के तहत, 'अगर उसी जमीन पर बाद में फिर से पराली जलाने की घटना होती है या इन नियमों के तहत लगाया गया पर्यावरण जुर्माना (अगर कोई हो) तय समय में जमा नहीं किया जाता है, तो 'रेड एंट्री' अगले 15 महीनों के लिए भी लागू रहेगी।'