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गुरु पूर्णिमा पर खास अंदाज़ में दिखेंगे सीएम योगी, निभाएंगे गुरु और शिष्य दोनों की भूमिका

गोरखपुर सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। यह वह अवसर होता है, जब गोरक्षपीठाधीश्वर नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित पीठ के अपने पूर्ववर्ती गुरुजनों की पूजन-स्तुति करते हैं और तदुपरांत अपने शिष्यों और गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं को स्नेहाशीष से अभिसिंचित करते हैं। गोरक्षपीठ की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरु पूर्णिमा (10 जुलाई, गुरुवार) पर शिष्य और गुरु दोनों भूमिकाओं में दिखेंगे। यूं तो गोरक्षपीठ, गोरखनाथ मंदिर में धर्म-अध्यात्म की मंगलध्वनि अहर्निश गुंजायमान रहती है, पर गुरु पूर्णिमा का पर्व यहां बेहद खास होता है। इस दिन के विशेष आयोजन में सहभागी बनने की गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं की उत्कंठा प्रबल होती है। नाथपंथ मुख्यतः गुरुगम्य मार्ग है। इस लिहाज से गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता है। गुरु-शिष्य परंपरा इस पीठ के मूल में है। गुरु परंपरा से ही नाथ परंपरा आगे बढ़ी है। यही वजह है कि गोरक्षपीठ, गुरु परंपरा के प्रतीक के तौर पर पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित है। हर काल में इस परंपरा को कायम रख पीठ ने कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। शिवावतार भगवान गोरखनाथ ने योग को लोक कल्याण का माध्यम बनाया तो उनके अनुगामी नाथपंथ के मनीषियों ने लोक कल्याणकारी अभियान को गति दी। उल्लेखनीय है कि सनातन संस्कृति गुरु को गोविंद (भगवान) से भी ऊंचे स्थान पर प्रतिष्ठित करती है। गुरु का ध्येय समग्र रूप में लोक कल्याण होता है और इसकी दीक्षा भी वह अपने शिष्य को देता है। गुरु परंपरा के आईने में देखें तो नाथपंथ की विश्व प्रसिद्ध गोरक्षपीठ बेमिसाल है। पीढ़ी दर पीढ़ी गोरक्षपीठाधीश्वरों ने अपने गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया है। वर्तमान पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इसे निरंतर ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। गुरु परंपरा के लोक कल्याणकारी कार्यों के अनुगमन में गोरक्षपीठ की गत-सद्यः तीन पीढ़ियां तो कीर्तिमान रचती नजर आती हैं। गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने लोक कल्याण के लिए शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम बनाते हुए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उदात्तमना ब्रह्मलीन महंत जी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो महाविद्यालय भी दान में दे दिए थे। उनके समय में ही लोगों को हानिरहित व सहजता से उपलब्ध चिकित्सा सुविधा हेतु मंदिर परिसर में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र की भी स्थापना हुई थी। अपने गुरु द्वारा शुरू किए गए इन प्रकल्पों को अपने समय में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने विस्तार दिया। शिक्षा, चिकित्सा, योग सहित सेवा के सभी प्रकल्पों को नया आयाम दिया। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के शिष्य एवं वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक कल्याण के लिए अपने दादागुरु द्वारा रोपे और अपने गुरु द्वारा सींचे गए पौधे को वटवृक्ष सरीखा बना दिया है। किराए के एक कमरे में शुरू शिक्षा का प्रकल्प दर्जनों संस्थानों के साथ ही विश्वविद्यालय तक विस्तारित हो चुका है। इलाज के लिए गोरक्षपीठ की तरफ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय की ख्याति पूरे पूर्वांचल में है। गोरक्षपीठ से योग के प्रसार को लगातार गति मिली है। पीठ की गुरु परंपरा में लोक कल्याण के मिले मंत्र की सिद्धि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री की भूमिका में भी नजर आती है। मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की तमाम व्यस्तताओं के बावजूद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हर गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेने और शिष्यों को आशीर्वाद देने के लिए गोरखनाथ मंदिर जरूर पहुंचते हैं। इसी क्रम में इस बार भी गुरुवार को वह गुरु पूर्णिमा पूजा के लिए मंदिर में मौजूद रहेंगे।  

एशिया की सबसे बुजुर्ग हथनी वत्सला की मृत्यु

एशिया की सबसे बुजुर्ग हथनी वत्सला की मृत्यु भोपाल पन्ना टाईगर रिजर्व के परिक्षेत्र हिनौता के अंतर्गत सबसे बुजुर्ग हथनी लगभग 100 वर्ष से अधिक आयु की वत्सला की 8 जुलाई मंगलवार को मृत्यु हो गई। वत्सला को एशिया की सबसे बुजुर्ग हथनी माना जाता है। पन्ना टाईगर रिजर्व के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा वत्सला का अंतिम संस्कार किया गया। वत्सला हथनी पर्यटकों के लिये आकर्षण का केन्द्र रही है। सबसे बुजुर्ग होने से वह पूरे हाथियों के दल का नेतृत्व करती रही है। अन्य मादा हाथी के प्रसव एवं बच्चा होने के उपरांत वह एक नानी अथवा दादी के रूप में अपनी भूमिका निभाती थी। क्षेत्र संचालक पन्ना टाईगर रिजर्व ने बताया कि मादा वत्सला परिक्षेत्र हिनौता के खैरईयां नाले के पास आगे के पैर के नाखून टूट जाने के कारण बैठ गई थी। वनकर्मियों द्वारा उसको उठाने का काफी प्रयास किया गया। दोपहर को हथनी वत्सला की मृत्यु हो गई। हथनी वत्सला केरल से नर्मदापुरम लाई गई थी और बाद में उसे पन्ना टाईगर रिजर्व लाया गया था। वृद्ध होने के कारण वत्सला को आँखो से दिखना बंद हो गया था तथा वह अधिक दूरी तक नहीं चल पाती थी इसलिये गश्ती कार्य में इसका उपयोग नहीं लिया जाता था। इसे हिनौता हाथी केम्प में रखा गया था। प्रतिदिन खैरईयां नाले तक नहाने के लिये ले जाया जाता था और भोजन में दलिया दिया जा रहा था। पन्ना टाईगर रिजर्व प्रबंधन के वन्य प्राणी चिकित्सक एवं विशेषज्ञों के द्वारा समय-समय पर हथनी वत्सला के स्वास्थ्य का परीक्षण किया जा रहा था। इसलिए वत्सला पन्ना टाईगर रिजर्व के विरल एवं शुष्क वन क्षेत्र में दीर्घ आयु की अवस्था तक जीवित रही। टाईगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थपना योजना में वत्सला का अहम योगदान रहा।  

स्कूल भवन पर तालाबंदी, किराया विवाद में फंसे बच्चे – मकान मालिक ने उठाया ये कदम

इंदौर लोहा गेट पर निजी स्कूल में हंगामा हो गया। इमारत मालिक के रिश्तेदारों ने ताला लगाकर बच्चों को रोक दिया। पुलिस ने आपसी विवाद बता कर हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। बच्चों को बगैर पढ़ाई के लौटाना पड़ा। घटना गली नंबर-8 की है। मेहरुन बी की इमारत में अल हीरा पब्लिक स्कूल का संचालन होता है। याकूब और अय्यूब मुल्तानी ने ताला लगा दिया सोमवार रात मेहरुन बी के भतीजें याकूब और अय्यूब मुल्तानी ने ताला लगा दिया। सुबह नर्सरी से आठवीं तक के बच्चे पढ़ने पहुंचे तो ताला लगा मिला। स्टाफ और बच्चे प्रांगण में प्रवेश ही नहीं कर सके। प्रिंसिपल याकूब मेनन के अनुसार इमारत साल 2008 में किराये पर ली थी। हर महीने 22 हजार रुपये किराये देते है। मेहरुन बी के भजीतों ने कहा कि किराया बढ़ाकर उन्हें दें। ताला लगाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित अनुबंध मेहरुन बी के नाम से होने के कारण मेनन ने मना कर दिया। सोमवार को वह थाने गया पर पुलिस ने कहा आपसी विवाद है। जिस इमारत में स्कूल संचालित होता है वह निजी संपत्ति है। किरायेदार और इमारत मालिक के विवाद में पुलिस नहीं बोल सकती है। मंगलवार को ताला लगाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई।

एम्स भोपाल से मरीजों को राहत, PET स्कैन से जुड़े खर्च होंगे कम

भोपाल अब एम्स भोपाल में भी कैंसर, हृदय और मस्तिष्क रोगों की पहचान के लिए अत्याधुनिक पीईटी स्कैन की सुविधा शुरू होने जा रही है। निजी अस्पतालों में जहां इसकी कीमत 20 से 30 हजार रुपये तक पहुंचती है, वहीं एम्स में यह जांच बेहद कम शुल्क में उपलब्ध होगी। इसके लिए अस्पताल परिसर में विशेष भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। यह सुविधा खासतौर से उन मरीजों के लिए राहत लेकर आएगी जिन्हें अब तक निजी अस्पतालों में महंगी जांच के लिए जाना पड़ता था। क्या है पीईटी स्कैन पीईटी स्कैन एक न्यूक्लियर इमेजिंग तकनीक है, जो शरीर के भीतर सेल स्तर की गतिविधियों को दिखाती है। इसमें एक रेडियोएक्टिव ट्रेसर इंजेक्ट किया जाता है, जो तेजी से सक्रिय अंगों में जाकर जमा होता है। ये ट्रेसर विशेष रूप से कैंसर कोशिकाओं, हृदय की क्षतिग्रस्त मांसपेशियों और मस्तिष्क के असामान्य हिस्सों में अधिक एकत्र होते हैं। स्कैनर इन सिग्नलों को पकड़कर 3डी इमेज बनाता है, जिससे बीमारी की सटीक स्थिति पता चलती है। कितना खर्च आता है निजी अस्पतालों में एक बार के पीईटी स्कैन पर 20,000 से 30,000 रुपये तक का खर्च आता है। जबकि एम्स भोपाल में यह सुविधा लगभग 2,000 से 3,000 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी। एम्स का उद्देश्य इसे आम और गरीब मरीजों के लिए सुलभ बनाना है। इन बीमारियों में मददगार कैंसर: किस अंग में है, कितना फैला है, इलाज का असर हो रहा है या नहीं हृदय रोग: हृदय की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह की स्थिति मस्तिष्क विकार: अल्जाइमर, पार्किंसन, एपिलेप्सी आदि। क्या है इसकी खासियत जहां सीटी और एमआरआई केवल शरीर की संरचना दिखाते हैं, वहीं पीईटी स्कैन शरीर की कार्यप्रणाली और मेटाबोलिक गतिविधियों को भी दिखाता है। इससे डाक्टर इलाज की दिशा बेहतर तय कर पाते हैं।

70 साल बाद इस गांव में पहली बार पक्की रोड का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ, ग्रामीणों जताई खुशी

मैहर मैहर जनपद के रिगरा गांव में वर्षों पुराने सपने ने आखिरकार साकार रूप ले लिया है। गांव में पहली बार पीसीसी (पक्की) रोड का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ, जिससे ग्रामीणों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। दशकों से कीचड़ भरे रास्तों से गुजरते आ रहे ग्रामीणों के लिए यह सड़क एक बड़ी सौगात बनकर आई है। ग्रामीणों ने दीप जलाकर किया खुशी का इजहार जानकारी के अनुसार, रिगरा गांव की स्थिति लंबे समय से दयनीय थी। गांव की मुख्य सड़क कच्ची होने के कारण बारिश में कीचड़ और फिसलन की समस्या आम थी। करीब 70 वर्षों से इस गांव की जनता बदहाली झेल रही थी, जहां पीढ़ियों ने कीचड़ से भरे रास्तों पर चलकर जीवन बिताया। लेकिन अब जब पहली बार पीसीसी रोड का निर्माण कार्य पूरा हुआ, तो गांव वासियों ने दीप जलाकर और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। ग्रामीणों ने सरकार और अधिकारियों का आभार जताया महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने सड़क पर खड़े होकर एक-दूसरे को बधाई दी और इसे विकास की ओर पहला कदम बताया। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि "इतने सालों में पहली बार हमारे गांव में सरकार की कोई योजना जमीन पर उतरी है। अब बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी नहीं होगी और बीमारों को अस्पताल तक लाने में राहत मिलेगी। ग्रामीणों ने जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों का आभार जताया और आशा व्यक्त की कि इसी तरह अन्य आवश्यक सुविधाएं भी गांव में जल्द पहुंचेंगी।" 

दिल्ली-NCR में शांति व्यवस्था के लिए नया आदेश, लाउडस्पीकर और हथियारों पर पूरी तरह रोक

हापुड़ 11 जुलाई से श्रावण मास में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर उच्चाधिकारी विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। जिसके मद्देनजर इस बार कांवड़ पदयात्रा के दौरान तेज आवाज में लाउडस्पीकर और तेज ध्वनि यंत्र नहीं बजाया जा सकेगा। निर्धारित आवाज के साथ ही शिवभक्त भजनों का आनंद ले सकेंगे। इसके अलावा कांवडिया अपने साथ अस्त्र या शस्त्र लेकर नहीं जा सकेंगे। नियम उल्लंघन कर कार्रवाई तक होगी। एसपी ज्ञानंजय ने बताया कि कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। उच्चाधिकारियों से मिले दिशा-निर्देशों के क्रम में 11 जुलाई से प्रारंभ हो रही कांवड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। श्रावण के महीने में कांवड़ या जल लाने वाले कांवड़िया और श्रद्धालु शिव मंदिरों तक पदयात्रा करते हैं। पदयात्रा के दौरान धार्मिक भजन और संगीत बजाने के साथ ही कई बार नारेबाजी भी होती है। खुफिया विभाग से उच्चाधिकारियों को इनपुट मिला है कि पदयात्रा में लाउडस्पीकर, तेज ध्वनि यंत्र बजाने और नारेबाजी करने से तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसके चलते कांवड़ यात्रा में कांवड़िया और शिविरों में श्रद्धालु निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में लाउडस्पीकर या तेज ध्वनि यंत्र से नहीं बजा सकेंगे। उल्लंघन करने पर इन्हें जब्त करने के साथ ही मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । कांवड़ यात्रा के दौरान वाहनों में मनचाहा बदलाव किया जाता है। लेकिन इस पर भी पांबदी लगा दी गई है। बंद रहेंगी शराब और मांस की दुकान कांवड़ यात्रा के लिए रूट बनाए गए हैं। इन रूट पर पड़ने वाली मांस और शराब की दुकान बंद रहेंगी। संबंधित विभाग के अधिकारियों के साथ पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेगी। इसके लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। लापरवाही बरतने पर कार्रवाई भी तय होगी। अस्त्र-शस्त्र पर पूर्णत रहेंगे प्रतिबंधित कांवड़ यात्रा के दौरान अस्त्र-शस्त्र साथ ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। कावड़िया अपने साथ लाठी-डंडे, नुकीले भाले समेत तमाम तरह के हथियार लेकर नहीं जा सकेंगे। ऐसा करने वाले कांवड़ियों को प्रतिबंधित किया जाएगा। किसी भी हाल में कानून और शांति व्यवस्था बिगड़ने नहीं दी जाएगी। कांवड़ रूट पर नहीं खड़े हो सकेंगे वाहन कांवड़ यात्रा के रूट पर ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों समेत अन्य भारी वाहन खड़े होने की समस्या रहती हैं। इसको देखते हुए इन रास्तों पर वाहन खड़े करने पर पाबंदी लगा दी है। कावड़ यात्रा के इसके अलावा कांवड़ियों के रूट पर कांवड़ शिविर सड़क से तय दूरी पर लगाए जा सकेंगे। कांवड़ शिविर हाइटेंशन लाइन के नीचे नहीं लगेंगे। तेज ध्वनि संचालकों को दिया नोटिस थानावार तेज ध्वनि यंत्र संचालकों की सूची तैयार कर उन्हें नोटिस जारी किए गया है। जिसमें तेज ध्वनि यंत्र से तेज आवाज में संगीत न बजाने के साथ अन्य सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। नियम उल्लंघन पर कार्रवाई तय होगी।  

समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप मध्यप्रदेश के शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। इससे बढ़ती नगरीय जनसंख्या की आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। समृद्ध और विकसित शहर, प्रदेश के समावेशी विकास की आधारशिला बनेंगे। इसे साकार करने के लिए मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। 'नेक्स्ट होराइजन: बिल्डिंग सिटीज ऑफ टुमॉरो' थीम पर केन्द्रित कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के शहरी विकास और निवेश पर देश की रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गज विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लिए शहरी विकास के ब्लूप्रिंट पर चर्चा करेंगे। शहरी क्षेत्रों में विकास की प्रगति मध्यप्रदेश में शहरी अर्थव्यवस्था तेजी से विकसित हो रही है। प्रदेश में 4 शहर ऐसे हैं जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक है। साथ ही केन्द्र की स्मार्ट सिटी परियोजना में 7 शहर शामिल हैं। शहरी क्षेत्रों में अधो-संरचाना विकास के संबंधित 72 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इसी के साथ करीब 88 हजार करोड़ रुपये की शहरी क्षेत्र से जुड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश ने स्वच्छता के लिये देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। इंदौर देश में पिछले 7 वर्षों से स्वच्छतम शहरों की श्रेणी में पहले नम्बर पर रहा है। भोपाल को देश की दूसरे नंबर की स्वच्छतम राजधानी बनने का गौरव हासिल किया है। प्रदेश के बजट में शहरी क्षेत्र के विकास के लिए 15 हजार 780 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में शहरी क्षेत्र का योगदान 35.55 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में संचालित केन्द्र की फ्लैग शिप योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रदेश सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों शामिल है। नगरीय विकास से जुड़ी योजनाओं की गति तेज बनाए रखने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम की प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। हाउसिंग सेक्टर में बेहतर निवेश की संभावना प्रदेश में हाउसिंग सेक्टर में निवेश की अच्छी संभावना है। अफोर्डेबल हाउसिंग में8 लाख 32 हजार से अधिक किफायती आवास तैयार किये जा चुके है। प्रदेश में 10 लाख नए आवास तैयार किये जा रहे है। इनमें 50 हजार करोड़ रूपये का निवेश होगा। रियल एस्टेट की योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये प्रदेश में मानव संसाधन की गुणवत्तापूर्ण वर्क फोर्स उपलब्ध है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 6 हजार किलोमीटर सड़क, 80 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में पाईपलाइन वॉटर सप्लाई कवरेज की सुविधा और शत् प्रतिशत शहरी क्षेत्र सीवरेज सिस्टम उपलब्ध है। नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय निकायों में 23 सेवाएं ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराई गई है। नगरीय निकायों में सेन्ट्रलाईज पोर्टल के माध्यम से मंजूरी दी जा रही है। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं पर 17 हजार 230 योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ पर्यावरण के लिये 2 हजार 800 करोड़ और वॉटर फ्रंट से संबंधित डेव्हलपमेंट में 2 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में सुगम परिवहन व्यवस्था के विस्तार के लिये 21 हजार करोड़ रूपये की परियोजनाएं संचालित हैं। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पेट्रोलियम ईंधन के कार्बन फुट-फ्रंट रोकने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के बड़े शहरों में 552 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी-2025 लागू की गई है।  

महासमुंद जिले में जल संरक्षण को लेकर एक अभिनव पहल के रूप में मोर गांव मा पानी” अभियान को प्रभावशाली ढंग से क्रियान्वित

रायपुर : 'मोर गांव मा पानी' अभियान से जल संरक्षण को बढ़ावा जनभागीदारी से निर्मित हुए 4 हजार से अधिक सोखता गड्ढे एवं 104 इंजेक्शन वेल  महासमुंद जिले में जल संरक्षण को लेकर एक अभिनव पहल के रूप में मोर गांव मा पानी” अभियान को प्रभावशाली ढंग से क्रियान्वित रायपुर  महासमुंद जिले में जल संरक्षण को लेकर एक अभिनव पहल के रूप में “मोर गांव मा पानी” अभियान को प्रभावशाली ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है। इस अभियान ने जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में जनभागीदारी को एक नई गति प्रदान की है। जल संचयन को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करते हुए जिले में ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग सहित अन्य विभागों के समन्वय से व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत जन सहयोग से स्कूलों, आंगनवाड़ियों, पंचायत भवनों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों में सोखता गड्ढों का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक जिले में 4 हजार से अधिक सोखता गड्ढों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है, वहीं 104 इंजेक्शन वेल के माध्यम से भूमिगत जल स्तर को पुनः तमबींतहम किया जा रहा है। यह पहल वर्षा जल को भूमिगत जल में परिवर्तित कर जल संकट की स्थिति से निपटने में सहायक सिद्ध हो रही है। सोखता गड्ढे मिट्टी की नमी बनाए रखने, सतही जल प्रवाह को नियंत्रित करने एवं आसपास के पर्यावरण को संतुलित रखने में भी कारगर साबित हो रहे हैं। “मोर गांव मा पानी” अभियान न केवल जल संचयन की दिशा में एक ठोस पहल है, बल्कि यह जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को भी प्रोत्साहित कर रहा है। यह अभियान स्थायी जल प्रबंधन प्रणाली की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुका है, जिससे आने वाले समय में जिले के जल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। जनसहयोग आधारित इस प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता में वृद्धि हुई है और जल को लेकर समुदाय का दृष्टिकोण भी सकारात्मक रूप से परिवर्तित हुआ है। यह पहल राज्य शासन के जल संरक्षण के संकल्पों को जमीनी स्तर पर मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रही है।

रायपुर : मुख्यमंत्री करेंगे ध्वजारोहण एवं जनता के नाम संदेश का प्रसारण

रायपुर : स्वतंत्रता दिवस के गरिमामय आयोजन हेतु शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश राजधानी रायपुर में होगा स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह रायपुर : मुख्यमंत्री करेंगे ध्वजारोहण एवं जनता के नाम संदेश का प्रसारण रायपुर  राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस को प्रदेशभर में गरिमापूर्ण एवं भव्य रूप से मनाने के उद्देश्य से शासन स्तर पर आवश्यक तैयारियाँ प्रारंभ कर दी गई हैं। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन की अध्यक्षता में बीते दिनों राज्य स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि स्वतंत्रता दिवस का आयोजन प्रतिवर्ष की भांति गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित और राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत वातावरण में किया जाए। राजधानी रायपुर में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह प्रातः 9 बजे से पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे तथा जनता के नाम संदेश देंगे। समारोह में संयुक्त परेड द्वारा मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया जाएगा। रायपुर में आयोजित मुख्य समारोह की परेड का दायित्व पुलिस महानिरीक्षक, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के अधीन रहेगा। परेड में बी.एस.एफ., सी.आर.पी.एफ., सी.आई.एस.एफ., आई.टी.बी.पी., एस.एस.बी., छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (महिला एवं पुरुष), नगर सेना, एन.सी.सी. कैडेट्स आदि की टुकड़ियाँ सम्मिलित होंगी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विभिन्न विभागों द्वारा पदक एवं पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। इसके लिए विभागों को जूरी गठित कर 29 जुलाई 2025 तक चयनित नामों की सूची सामान्य प्रशासन विभाग को भिजवाना होगा। निर्धारित तिथि के उपरांत प्राप्त प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य समारोह में ‘जनता के नाम संदेश‘ देंगे। यह संदेश दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के माध्यम से पूरे प्रदेश में प्रसारित किया जाएगा। मुख्य समारोह पश्चात छात्र-छात्राओं द्वारा देशभक्ति आधारित समूह-नृत्य एवं गायन प्रस्तुत किए जाएंगे। स्कूली बच्चों के कार्यक्रमों हेतु स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जूरी का गठन किया जाएगा तथा कार्यक्रम स्थल पर ही पुरस्कार वितरण होगा। कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक एवं नगर निगम आयुक्त रायपुर को स्वतंत्रता दिवस मुख्य समारोह व्यवस्था के संबंध में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई है।   प्रदेश के सभी सार्वजनिक भवनों एवं राष्ट्रीय स्मारकों पर 15 अगस्त की रात प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। निजी संस्थानों से भी ध्वजारोहण एवं रोशनी करने की अपील की गयी है। जिला, विकासखंड एवं पंचायत स्तर पर कार्यक्रमों और प्रदर्शनी के आयोजन हेतु कलेक्टरों को निर्देश जारी किए गए हैं। समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं नक्सली हिंसा में शहीद हुए जवानों के परिजनों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया जाएगा।

हृदय अभियान की राज्य नीति आयोग ने भी सराहना की, जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा

विकास प्रक्रियाओं में बढ़ा नवाचार हरदा का हृदय अभियान बना आदर्श उदाहरण, राज्य नीति आयोग ने की सराहना नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ हृदय अभियान की राज्य नीति आयोग ने भी सराहना की, जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा  भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर विकास प्रक्रियाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। नवाचारों की श्रंखला में हरदा जिले में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा का संयुक्त "हृदय अभियान" आदर्श उदाहरण साबित हुआ। राज्य नीति आयोग ने भी इस अभियान की सराहना की है। जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा के सूचकांकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हरदा जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण तथा शैक्षिक सेवाओं को "हृदय अभियान" के अंतर्गत माताओं, बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार लाया गया। सभी हितग्राही माताएँ और 18 वर्ष तक के बच्चों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाया गया। मातृ मृत्यु, शिशु मृत्यु के आंकड़ों में कमी लाने और कुपोषण को कम करने के लिये एक साथ विशेष गतिविधियां चलाई गई। इसके लिए घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर जानकारी प्रदान करना, गर्भवती माताओं को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और बालक-बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां चलाई गई। ऐसे गांवो का चयन किया गया जिनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा संबंधी सूचकांक पिछले कुछ वर्षों में न्यूनतम रहे। कैसे हुई हृदय अभियान की शुरुआत जिले में नवाचार के रूप में कुपोषण मुक्त करने और जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा तथा स्वास्थ्य की सुविधाओं की पहुंच बच्चों और महिलाओं तक बढ़ाने के उद्देश्य से हृदय अभियान चलाया गया। दूर दराज के 50 गांवों को चिन्हित किया गया, जिनमें गर्भवती माताओं और बच्चों की समस्या दूसरे गांवों की अपेक्षा ज्यादा थी। स्वास्थ्य, महिला बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभागों का संयुक्त सर्वे कराया गया। संयुक्त दल ने डोर-टू-डोर सर्वे कर रिपोर्ट दी। गर्भवती माताओं का पंजीयन, टीकाकरण और हाई रिस्क महिलाओं का प्रबंध ग्राम और संस्था स्तर पर किया गया। जननी सुरक्षा योजना, प्रसूति सहायता योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी तथा भुगतान संबंधी समस्याओं का शिविर लगाकर निराकरण किया गया। पोषण सलाह, आयरन टेबलेट, कैल्शियम टेबलेट उपलब्ध कराई। सर्वे में प्राप्त कुपोषण प्रभावित बच्चों के लिए विशेष पोषण प्लान तैयार किया गया। शाला त्यागी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए फील्ड स्तर पर जनशिक्षक, प्रधानाध्यापकों के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया। "हृदय अभियान" का परिणाम यह रहा कि बच्चों में कुपोषण से मुक्त कराने, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार, शाला त्यागी बच्चों को पुनः शाला में प्रवेश दिलाने में उल्लेखनीय सुधार हुआ। पोषण स्तर में सुधार के लिए ग्रेन्यूल फॉर्म में कुपोषित बच्चों को फ्लेवर मुनगा ग्रेन्यूल पाउडर 10 ग्राम, दूध पाउडर 10 ग्राम के साथ प्रतिदिन दो बार दिया गया और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा अति कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाया गया। इस प्रकार 225 कुपोषित बच्चों में सुधार हुआ। स्वास्थ्य सर्वेक्षण के दौरान चिन्हित 739 गर्भवती माताओं का बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन किया गया। उनके समग्र आईडी बनाए गए। बैंकों में खाते खुलवाए गए। संस्थान प्रसवों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई। स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन से ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त हुई। टीकाकरण कार्यक्रम में चिन्हित गांवों के बच्चों को टीके लगाए गए। इनमें 38 बच्चे टिमरनी, 26 खिरकिया और 29 बच्चे हंडिया ब्लॉक में हैं। स्वास्थ्य के अलावा 1752 शाला त्यागी बच्चों में से 562 को पुनः शाला में प्रवेश कराया गया।